हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल: Class 12 सार, व्याख्या और प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'शिरीष के फूल' हजारी प्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध है। जेठ की जलती धूप और लू में भी फूलों से लदे रहने वाले शिरीष को लेखक 'कालजयी अवधूत' मानते हैं। उसके माध्यम से वे सिखाते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी अविचल, अनासक्त और जीवंत रहना चाहिए, और अंत में ऐसे ही अवधूत गांधीजी को याद करते हैं।
What हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल is about
'शिरीष के फूल' आरोह भाग 2 के गद्य खंड का ललित निबंध है, जो द्विवेदी जी के संग्रह 'कल्पलता' से लिया गया है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907-1979) हिंदी के मानवतावादी निबंधकार, उपन्यासकार और आलोचक थे; 'अशोक के फूल', 'कुटज', 'आलोक पर्व' (साहित्य अकादेमी पुरस्कार) उनके निबंध-संग्रह और 'बाणभट्ट की आत्मकथा' उनका प्रसिद्ध उपन्यास है। उन्हें पद्मभूषण भी मिला।
ललित निबंध में लेखक एक साधारण विषय (यहाँ एक फूल) से शुरू करके इतिहास, संस्कृत साहित्य, दर्शन और समकालीन समाज तक घूमता है, और यह यात्रा आत्मीय, विनोदपूर्ण शैली में होती है। इस निबंध में शिरीष से कबीर, कालिदास, तुलसीदास, रवींद्रनाथ और अंत में गांधीजी तक की कड़ी जुड़ती है।
बोर्ड परीक्षा (खंड ग) में इस पाठ से पठित गद्यांश पर पाँच MCQ, लगभग 60 शब्दों के 3 अंक वाले और लगभग 40 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न आ सकते हैं। शिरीष 'कालजयी अवधूत' क्यों, पुराने फलों और नेताओं की तुलना, 'जमे कि मरे', कवि के लिए अनासक्ति और फक्कड़पन, और 'हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!' सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।
Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27
हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
लेखक जहाँ बैठकर लिख रहे हैं, उसके चारों ओर शिरीष के पेड़ हैं। जेठ की भीषण गरमी में, जब धरती आग की भट्ठी बनी हुई है, शिरीष ऊपर से नीचे तक फूलों से लदा है। कर्णिकार और अमलतास भी फूलते हैं, पर अमलतास केवल पंद्रह-बीस दिन, पलाश की तरह; कबीर को ऐसा थोड़े दिन का खिलना पसंद नहीं था। शिरीष वसंत से आषाढ़ तक और कभी भादों तक फूलता रहता है। लू और उमस में भी वह 'कालजयी अवधूत' की तरह जीवन के अजेय होने का संदेश देता है।
लेखक बताते हैं कि पुराने भारत के रईस अपनी वाटिका की चहारदीवारी के पास जिन मंगलकारी पेड़ों को लगाते थे, उनमें शिरीष भी था; कामसूत्र के अनुसार ऐसे घने पेड़ों पर झूला डाला जाता था। संस्कृत साहित्य में शिरीष का फूल बहुत कोमल माना गया है; कालिदास ने कहा कि वह भौंरों के पैरों का दबाव तो सह सकता है, पक्षियों का नहीं। पर बाद के कवियों ने भूल से उसका सब कुछ कोमल मान लिया। उसके फल इतने मज़बूत होते हैं कि नए फूल आने पर भी डाल नहीं छोड़ते और खड़खड़ाते रहते हैं, जब तक नए फल-पत्ते उन्हें धकेल नहीं देते। लेखक को इनमें वे नेता याद आते हैं जो समय का रुख नहीं पहचानते और कुर्सी से चिपके रहते हैं।
बुढ़ापा और मृत्यु अटल सत्य हैं; तुलसी ने भी कहा था कि जो फला वह झड़ा। काल-देवता लगातार कोड़े चला रहा है; जो जड़ होकर एक जगह जमे रहते हैं वे मरते हैं, और जो गतिशील रहकर आगे देखते हैं वे बच सकते हैं।
शिरीष सुख-दुख में हार न मानने वाला अवधूत है; वह वायुमंडल से रस खींचकर लू में भी कोमल केसर उगाता है। लेखक के अनुसार कबीर, कालिदास जैसे कवि भी ऐसे ही मस्त, अनासक्त और फक्कड़ थे। जो कवि हिसाब-किताब में उलझ गया, वह कवि नहीं; 'कवि बनना है तो फक्कड़ बनो।' कालिदास में योगी की स्थिरता और प्रेमी का हृदय दोनों थे, इसीलिए वे सौंदर्य के भीतर तक पहुँचे; दुष्यंत का शकुंतला-चित्र तब तक अधूरा लगा जब तक कानों में शिरीष का फूल नहीं बनाया गया। पंत और रवींद्रनाथ में भी यह अनासक्ति थी; फूल या पेड़ अपने में समाप्त नहीं, किसी और सत्य की ओर इशारा है।
अंत में लेखक सोचते हैं कि जैसे शिरीष धूप-लू में स्थिर है, वैसे ही देश में फैली मार-काट और हिंसा के बीच एक बूढ़ा (गांधीजी) भी स्थिर रह सका था, क्योंकि वह भी अवधूत था, कोमल भी और कठोर भी। शिरीष को देखकर उनके मन में हूक उठती है कि वह अवधूत आज कहाँ है।
Themes and message
अजेय जिजीविषा
जेठ की जलती धूप, लू और उमस में भी शिरीष फूलों से लदा रहता है। लेखक इसे जीवन की अजेयता का प्रतीक मानते हैं: कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानना और भीतर का रस बचाए रखना।
From the text: "एकमात्र शिरीष कालजयी अवधूत की भाँति जीवन की अजेयता का मंत्र प्रचार करता रहता है"
गतिशीलता बनाम जड़ता (पुरानी-नई पीढ़ी का द्वंद्व)
शिरीष के पुराने फल नए आने पर भी डाल नहीं छोड़ते, जैसे सत्ता से चिपके नेता। काल सब पर कोड़े चलाता है; जो बदलते समय के साथ चलते हैं वही टिकते हैं।
From the text: "जमे कि मरे!"
अनासक्ति और सच्चा कवि-कर्म
लेखक के अनुसार सच्चा कवि वह है जिसमें योगी की स्थिर-प्रज्ञता और प्रेमी का सरस हृदय दोनों हों; लेखा-जोखा मिलाने वाला कवि नहीं हो सकता। कबीर और कालिदास इसके उदाहरण हैं।
From the text: "कवि बनना है मेरे दोस्तो, तो फक्कड़ बनो।"
गांधीजी और आत्मबल
हिंसा और मार-काट के बवंडर में गांधीजी शिरीष की तरह स्थिर रहे; वे कोमल भी थे और कठोर भी। निबंध का अंत आज के समय में ऐसे आत्मबल वाले व्यक्तित्व के अभाव की पीड़ा है।
From the text: "हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!"
Characters
शिरीष (प्रतीक)
निबंध का केंद्रीय प्रतीक; 'कालजयी अवधूत'।
- विपरीत परिस्थितियों में भी फूलने वाला, अजेय
- बाहर से कोमल (फूल), भीतर से कठोर (फल)
- अनासक्त और मस्त: वायुमंडल से रस खींचता है
वसंत से आषाढ़ और भादों तक लू-धूप में भी फूलता रहता है।
लेखक (हजारी प्रसाद द्विवेदी)
निबंध के वाचक; शिरीष के प्रशंसक।
- विनोदी: 'तुंदिल नरपति लोहे का पेड़ बनवा लें'
- विद्वान: संस्कृत, कबीर, तुलसी, कालिदास के प्रसंग
- संवेदनशील: गांधी के अभाव की हूक
स्वयं को 'नितांत ठूँठ' नहीं मानते; शिरीष उनके मन में 'हिल्लोल' पैदा करता है।
कालिदास
संस्कृत कवि, जिन्हें लेखक अनासक्त योगी और विदग्ध प्रेमी मानते हैं।
- सौंदर्य के भीतर तक पहुँचने वाले
- अनासक्त
शकुंतला के कानों में शिरीष पुष्प वाले प्रसंग से सौंदर्य की सूक्ष्म दृष्टि।
गांधीजी ('अपने देश का एक बूढ़ा')
निबंध के अंत में शिरीष जैसे अवधूत के रूप में स्मरण।
- हिंसा के बीच भी स्थिर
- कोमल और कठोर दोनों
लेखक के अनुसार गांधी भी वायुमंडल से रस खींचकर इतने कोमल और कठोर हो सके।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| मानवीकरण | शिरीष को 'अवधूत' और 'हज़रत' कहना जो 'मौज में आठों याम मस्त' रहता है | पेड़ एक जीवंत, दार्शनिक व्यक्तित्व बन जाता है। |
| उद्धरण और सांस्कृतिक संदर्भ | कबीर ('दिन दस फूला...'), तुलसी ('जो फरा सो झरा'), कालिदास का संस्कृत श्लोक | ललित निबंध की विद्वत्तापूर्ण और सांस्कृतिक गहराई। |
| व्यंग्य और विनोद | पुराने फलों की तुलना कुर्सी से चिपके नेताओं से; 'तुंदिल नरपतियों' का लोहे का पेड़ | गंभीर विचार भी रोचक बनता है और समाज पर चोट करता है। |
| मुहावरे और लोकोक्तियाँ | 'न ऊधो का लेना, न माधो का देना', 'ऐसे दुमदारों से तो लँडूरे भले', 'जमे कि मरे' | तत्सम-प्रधान भाषा में लोक का रस घुलता है। |
| तत्सम-प्रधान भाषा | 'धरित्री निर्धूम अग्निकुंड बनी हुई थी', 'दुरंत प्राणधारा', 'सर्वव्यापक कालाग्नि' | भाषा की गरिमा और दार्शनिक गंभीरता। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
एकमात्र शिरीष कालजयी अवधूत की भाँति जीवन की अजेयता का मंत्र प्रचार करता रहता है
लेखक: लू और उमस में भी शिरीष के फूलने पर
निबंध का केंद्रीय विचार: कठिन समय में भी अजेय और अविचल रहना।
जमे कि मरे!
लेखक: काल-देवता के कोड़ों से बचने का उपाय बताते हुए
जड़ता मृत्यु है, गतिशीलता जीवन।
कवि बनना है मेरे दोस्तो, तो फक्कड़ बनो।
लेखक: अनासक्त कवियों (कबीर, कालिदास) की चर्चा के बाद
सच्चे कवि के लिए अनासक्ति और मस्ती अनिवार्य है।
दिन दस फूला फूलिके खंखड़ भया पलास!
कबीरदास (लेखक द्वारा उद्धृत): थोड़े दिन फूलने वाले पलाश और अमलतास की तुलना में
क्षणिक चमक की तुलना में लंबे समय तक टिकने का महत्त्व।
वह किसी अन्य वस्तु को दिखाने के लिए उठी हुई अँगुली है।
लेखक: रवींद्रनाथ के सिंहद्वार वाले कथन के बाद
फूल या पेड़ अपने में समाप्त नहीं; वह किसी बड़े सत्य की ओर संकेत है।
हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!
लेखक: निबंध का अंत, गांधीजी का स्मरण
आत्मबल वाले नेतृत्व के अभाव की पीड़ा।
हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
कठिन परिस्थितियों में अविचल रहना
मान लीजिए आपकी एक सहपाठी के घर में आर्थिक संकट है, पर वह फिर भी नियमित पढ़ती है, हँसमुख रहती है और बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाती है।
उसकी तुलना शिरीष से कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- शिरीष जेठ की लू में भी फूलता है, जब बाकी फूल मुरझा जाते हैं।
- वह भी परिस्थितियों से हार मानने के बजाय भीतर से रस और ऊर्जा खींचती है।
Answer: वह सहपाठी शिरीष की तरह है: बाहर की कठोर परिस्थितियाँ उसके भीतर की सरसता और जिजीविषा को नहीं मार सकीं। द्विवेदी जी यही 'जीवन की अजेयता का मंत्र' सिखाते हैं।
Memory hook: लू में भी फूल।
पुरानी पीढ़ी की अधिकार-लिप्सा
कल्पना कीजिए कि किसी विद्यालय की खेल समिति में एक पुराने सदस्य वर्षों से अध्यक्ष बने हुए हैं और नए छात्रों के सुझावों को कभी नहीं मानते।
शिरीष के पुराने फलों के प्रसंग से इसकी तुलना कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- शिरीष के पुराने फल नए फूल आने पर भी डाल नहीं छोड़ते, खड़खड़ाते रहते हैं।
- लेखक के अनुसार समझदारी यह है कि समय रहते नई पीढ़ी को स्थान दिया जाए।
Answer: वे अध्यक्ष शिरीष के पुराने फलों जैसे हैं। लेखक कहते हैं कि झड़ना निश्चित है; अच्छा है कि पुराने लोग स्वयं समय का रुख पहचानकर नए लोगों को आगे आने दें, वरना उन्हें धकेलकर हटाया जाएगा।
Memory hook: पुराने फल, खड़खड़ाते नेता।
गतिशीलता: 'जमे कि मरे'
मान लीजिए एक दुकानदार ऑनलाइन भुगतान और नई तकनीक अपनाने से मना करता है, जबकि बाकी दुकानदार बदल जाते हैं, और धीरे-धीरे उसकी दुकान के ग्राहक घट जाते हैं।
'जमे कि मरे' के आधार पर उसे क्या सलाह देंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- काल-देवता के कोड़े से वही बचता है जो हिलता-डुलता, आगे की ओर मुँह किए रहता है।
- बदलते समय के अनुसार अपने को ढालना ही टिके रहने का उपाय है।
Answer: मैं उसे कहूँगा कि एक जगह जमे रहना, यानी बदलाव से इनकार करना, धीमी मृत्यु है। नई तकनीक अपनाकर ही वह समय की मार से बच सकता है।
Memory hook: चलते रहो, बचते रहो।
Topics in this chapter
How the board asks हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | 'जमे कि मरे', पुराने फल और नेता, कवि और फक्कड़पन, या गांधी वाले अंश पर आशय, प्रतीक और कथन-कारण। | प्रतीक पहचानें: शिरीष = अवधूत/जिजीविषा, पुराने फल = सत्ता-लोलुप पुरानी पीढ़ी, काल का कोड़ा = समय की मार, बूढ़ा = गांधी। |
| प्रतीकार्थ / व्याख्या (3 अंक) | शिरीष को कालजयी अवधूत क्यों कहा? जीवन में गतिशीलता का महत्त्व; कवि के लिए अनासक्ति और प्रेमी-हृदय। | पहले शिरीष की विशेषता (प्रमाण सहित), फिर मनुष्य-जीवन पर उसका अर्थ, अंत में एक उदाहरण (कबीर, कालिदास या गांधी)। |
| आशय स्पष्ट कीजिए (2 अंक) | 'फूल हो या पेड़... वह इशारा है', 'हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!', 'कवि बनना है... तो फक्कड़ बनो'। | प्रसंग (किस चर्चा के बाद) + गहरा अर्थ, दो-तीन वाक्यों में। |
| चिंतनपरक प्रश्न (3 अंक) | हृदय की कोमलता बचाने के लिए व्यवहार की कठोरता; शीतपुष्प नाम; आत्मबल बनाम देह-बल। | शिरीष के कोमल फूल और कठोर फल का उदाहरण दें, फिर गांधीजी या जीवन से जोड़ें। |
Tricks to remember हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
निबंध की यात्रा: 'फूल-फल-काल-कवि-गांधी'
फूल (जेठ में भी फूलना, कोमलता) → फल (पुराने फल = नेता) → काल (जमे कि मरे) → कवि (कबीर, कालिदास, फक्कड़ बनो) → गांधी (हाय, वह अवधूत!)।
Use it when: सार और क्रम वाले प्रश्नों में।
किसने क्या कहा
कबीर: दिन दस फूला... पलास; तुलसी: जो फरा सो झरा; कालिदास: शिरीष भौंरे का पद सहता है, पक्षी का नहीं; विज्जिका देवी: केवल तीन कवि (ब्रह्मा, वाल्मीकि, व्यास); रवींद्रनाथ: सिंहद्वार अंतिम मंज़िल नहीं।
Use it when: उद्धरण और तथ्य वाले MCQ में।
शिरीष = कोमल + कठोर
फूल कोमल, फल कठोर; गांधी भी कोमल और कठोर।
Use it when: 'कोमलता बचाने के लिए कठोरता' वाले प्रश्न में।
हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: जमे कि मरे
मूर्ख समझते हैं कि जहाँ बने हैं, वहीं देर तक बने रहें तो कालदेवता की आँख बचा जाएँगे। भोले हैं वे। हिलते-डुलते रहो, स्थान बदलते रहो, आगे की ओर मुँह किए रहो तो कोड़े की मार से बच भी सकते हो। जमे कि मरे!
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले लेखक कहते हैं—'महाकालदेवता सपासप कोड़े चला रहे हैं'।) 'महाकालदेवता सपासप कोड़े चला रहे हैं'—इसका आशय है:
(क) देवता लोगों को दंड दे रहे हैं
(ख) समय निरंतर सब पर प्रहार कर रहा है और कमज़ोर नष्ट हो रहे हैं
(ग) आँधी चल रही है
(घ) लोग आपस में लड़ रहे हैं(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: लेखक कहते हैं कि समय रूपी देवता की मार से जर्जर और कमज़ोर झड़ जाते हैं, पर जिनकी जीवन-शक्ति थोड़ी भी ऊपर की ओर उठती है, वे टिके रहते हैं।) काल की मार से कौन बच जाते हैं?
(क) जो एक ही स्थान पर जमे रहते हैं
(ख) जिनमें जीवन-शक्ति ऊपर की ओर उठती है और जो गतिशील रहते हैं
(ग) जो धनी हैं
(घ) जो बूढ़े हैं(3) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: लेखक कहते हैं कि 'दुरंत प्राणधारा और सर्वव्यापक कालाग्नि' का संघर्ष निरंतर चल रहा है।) 'दुरंत प्राणधारा और सर्वव्यापक कालाग्नि' में किनका संघर्ष बताया गया है?
(क) आग और पानी का
(ख) जीवन-शक्ति और सब कुछ नष्ट करने वाले समय का
(ग) राजा और प्रजा का
(घ) फूल और फल का(4) · 1 mark · MCQ
लेखक किन्हें 'भोले' कहते हैं?
(क) जो रोज़ स्थान बदलते हैं
(ख) जो सोचते हैं कि एक जगह जमे रहकर काल की नज़र से बच जाएँगे
(ग) जो कोड़े चलाते हैं
(घ) जो फूलों से प्रेम करते हैं(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): लेखक 'जमे कि मरे' कहकर गतिशीलता का संदेश देते हैं।
कारण (R): समय के साथ बदलने वाला ही काल की मार से बच सकता है, जड़ता विनाश लाती है।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) समय निरंतर सब पर प्रहार कर रहा है और कमज़ोर नष्ट हो रहे हैं
- (ख) जिनमें जीवन-शक्ति ऊपर की ओर उठती है और जो गतिशील रहते हैं
- (ख) जीवन-शक्ति और सब कुछ नष्ट करने वाले समय का
- (ख) जो सोचते हैं कि एक जगह जमे रहकर काल की नज़र से बच जाएँगे
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Extract 2: गद्यांश 2: शिरीष और गांधी
शिरीष रह सका है। अपने देश का एक बूढ़ा रह सका था। क्यों मेरा मन पूछता है कि ऐसा क्यों संभव हुआ? क्योंकि शिरीष भी अवधूत है।
(1) · 1 mark · MCQ
'अपने देश का एक बूढ़ा' किसे कहा गया है?
(क) कबीर को
(ख) कालिदास को
(ग) महात्मा गांधी को
(घ) रवींद्रनाथ को(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले लेखक पूछते हैं कि देश पर से जो हिंसा का बवंडर—'मार-काट, अग्निदाह, लूट-पाट'—बह गया है, क्या उसके भीतर भी स्थिर रहा जा सकता है।) 'मार-काट, अग्निदाह, लूट-पाट' से देश की किस स्थिति का संकेत है?
(क) त्योहारों की धूम
(ख) हिंसा और अशांति का वातावरण
(ग) प्राकृतिक आपदा
(घ) खेलों की प्रतियोगिता(3) · 1 mark · MCQ
शिरीष और गांधीजी में क्या समानता है?
(क) दोनों बहुत ऊँचे हैं
(ख) दोनों कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर और सरस रह सके
(ग) दोनों वसंत में आते हैं
(घ) दोनों शहर में रहते हैं(4) · 1 mark · MCQ
लेखक के अनुसार शिरीष और गांधीजी के स्थिर रह पाने का कारण क्या है?
(क) वे धनी थे
(ख) दोनों अवधूत (अनासक्त) हैं
(ग) दोनों को किसी ने छेड़ा नहीं
(घ) दोनों विदेश में रहे(5) · 1 mark · MCQ
गद्यांश में लेखक का स्वर कैसा है?
(क) केवल हास्यपूर्ण
(ख) चिंतनशील और प्रश्नात्मक
(ग) क्रोधपूर्ण
(घ) उदासीन
Show the answersAnswers
- (ग) महात्मा गांधी को
- (ख) हिंसा और अशांति का वातावरण
- (ख) दोनों कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर और सरस रह सके
- (ख) दोनों अवधूत (अनासक्त) हैं
- (ख) चिंतनशील और प्रश्नात्मक
हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: कालजयी अवधूत · 3 marks · Short answerBoard level
लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत की तरह क्यों माना है? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रतिकूल मौसम में फूलना।
- अनासक्ति।
- अजेयता का संदेश।
Answer: अवधूत वह संन्यासी है जो सुख-दुख में समान रहता है। जब जेठ की लू और उमस में बाकी फूल मुरझा जाते हैं, शिरीष वसंत से भादों तक फूलों से लदा रहता है। वह वायुमंडल से रस खींचकर कोमल केसर उगाता है और किसी से कुछ नहीं माँगता। इस तरह वह समय और मौसम की मार को जीतकर जीवन के अजेय होने का संदेश देता है।
Example 2: कोमलता और कठोरता · 3 marks · Short answerHarder board level
'हृदय की कोमलता को बचाने के लिए व्यवहार की कठोरता भी कभी-कभी ज़रूरी हो जाती है'—पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शिरीष के कोमल फूल, कठोर फल।
- गांधी कोमल भी, कठोर भी।
- निष्कर्ष।
Answer: शिरीष के फूल इतने कोमल हैं कि केवल भौंरे का भार सह सकें, पर उसके फल इतने मज़बूत हैं कि आसानी से डाल नहीं छोड़ते; इसी कठोरता से वह लू में भी अपनी कोमलता बचाए रखता है। गांधीजी भी हृदय से करुणामय थे, पर सिद्धांतों पर अडिग रहे। अतः भीतर की संवेदना बचाने के लिए बाहर से दृढ़ होना पड़ता है।
Example 3: फक्कड़ कवि · 2 marks · Short answerHarder board level
'कवि बनना है मेरे दोस्तो, तो फक्कड़ बनो'—इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- फक्कड़ = अनासक्त, मस्त।
- लेखा-जोखा मिलाने वाला कवि नहीं।
Answer: लेखक के अनुसार सच्चा कवि वही है जो लाभ-हानि का हिसाब छोड़कर कबीर और शिरीष की तरह मस्त और अनासक्त रहे। जो किए-कराए का लेखा-जोखा मिलाने में उलझ जाता है, उसके हृदय से सरस काव्य नहीं निकल सकता।
Example 4: तथ्य पहचानिए · 1 mark · MCQBoard level
कालिदास के अनुसार शिरीष पुष्प किसका भार सह सकता है?
(क) पक्षियों का
(ख) केवल भौंरों के पैरों का
(ग) ओस की बूँदों का
(घ) तितलियों और पक्षियों दोनों का
Try it first, then show the solutionSolution
- 'पदं सहेत भ्रमरस्य पेलवं शिरीष पुष्पं न पुनः पतत्रिणाम्'।
Answer: (ख) केवल भौंरों के पैरों का
Example 5: आत्मबल और देह-बल · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!' कहकर लेखक ने आत्मबल पर देह-बल के वर्चस्व वाली आज की सभ्यता के संकट की ओर कैसे संकेत किया है? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अवधूत = गांधी, आत्मबल के प्रतीक।
- आज हिंसा, मार-काट = देह-बल।
- अभाव की पीड़ा।
Answer: गांधीजी ने हिंसा का उत्तर हथियार से नहीं, सत्य और अहिंसा के आत्मबल से दिया और मार-काट के बवंडर में भी शिरीष की तरह स्थिर रहे। लेखक देखते हैं कि आज समाज में लूट-पाट, अग्निदाह और शक्ति-प्रदर्शन हावी है। 'वह अवधूत आज कहाँ है' कहकर वे बताते हैं कि आत्मबल की जगह देह-बल पूजा जा रहा है, यही सभ्यता का संकट है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत की तरह क्यों माना है? (लगभग 60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| जेठ की धूप, लू और उमस में भी वसंत से भादों तक फूलना | 1 |
| अवधूत की तरह सुख-दुख में समान, अनासक्त; वायुमंडल से रस खींचना | 1 |
| जीवन की अजेयता का संदेश देना / काल पर विजय | 1 |
'हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!'—लेखक ने ऐसा क्यों कहा? (लगभग 40 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| अवधूत = गांधीजी, जो हिंसा के बीच शिरीष की तरह स्थिर रहे | 1 |
| आज आत्मबल वाले ऐसे व्यक्तित्व के अभाव की पीड़ा | 1 |
Where students lose marks in हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: शिरीष को केवल कोमल फूल बताना
लेखक स्वयं परवर्ती कवियों की इस भूल को पकड़ते हैं; शिरीष के फल बहुत मज़बूत होते हैं।
Do this: कोमल फूल और कठोर फल दोनों लिखें; यही उसे गांधी जैसा बनाता है।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'अपने देश का एक बूढ़ा' को कबीर या कालिदास समझना
मार-काट और अग्निदाह के बीच स्थिर रहने वाला 'बूढ़ा' गांधीजी हैं; अगले वाक्य में उनका नाम भी है।
Do this: संदर्भ (देश की हिंसा) से पहचानें।
Usually costs: MCQ में 1 अंक
Mistake: पाठ को कहानी या संस्मरण कहना
यह 'कल्पलता' से लिया गया ललित निबंध है।
Do this: विधा: ललित निबंध लिखें।
Usually costs: MCQ में 1 अंक
Mistake: 'जमे कि मरे' का शाब्दिक अर्थ लिखकर छोड़ देना
प्रश्न जीवन-दर्शन पूछता है: जड़ता विनाश है, गतिशीलता और परिवर्तन के साथ चलना जीवन।
Do this: काल-देवता के कोड़े का प्रतीक और जीवन से उदाहरण जोड़ें।
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Practice questions on हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
'शिरीष के फूल' किस संग्रह से लिया गया है?
(क) अशोक के फूल
(ख) कल्पलता
(ग) कुटज
(घ) आलोक पर्वHint
पाठ-परिचय देखें।
Answer
(ख) कल्पलता
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
शिरीष के पुराने फलों को देखकर लेखक को किनकी याद आती है और क्यों? (लगभग 40 शब्द)
Hint
ज़माने का रुख।
Answer
पुराने फल नए फूल-पत्ते आने पर भी डाल से चिपके खड़खड़ाते रहते हैं। लेखक को इनमें वे नेता याद आते हैं जो समय का रुख नहीं पहचानते और तब तक पद नहीं छोड़ते जब तक नई पीढ़ी उन्हें धक्का देकर हटा न दे।
Q3 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
कथन (A): लेखक के अनुसार कालिदास महान कवि थे।
कारण (R): वे केवल छंद बनाना और तुक जोड़ना जानते थे।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।Hint
छंद तो लेखक भी बना लेते हैं।
Answer
(ग) कथन सही है, पर कारण गलत है; कालिदास इसलिए महान थे कि वे अनासक्त योगी की स्थिर-प्रज्ञता और विदग्ध प्रेमी का हृदय दोनों रखते थे।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
आशय स्पष्ट कीजिए: 'फूल हो या पेड़, वह अपने-आप में समाप्त नहीं है।' (लगभग 40 शब्द)
Hint
रवींद्रनाथ का सिंहद्वार।
Answer
रवींद्रनाथ के सिंहद्वार की तरह फूल या पेड़ अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि किसी बड़े सत्य की ओर उठी अँगुली हैं। शिरीष का सौंदर्य हमें जिजीविषा, अनासक्ति और जीवन की अजेयता जैसे गहरे अर्थ की ओर संकेत करता है।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
दुष्यंत द्वारा बनाए गए शकुंतला के चित्र के प्रसंग से कालिदास की सौंदर्य-दृष्टि के बारे में क्या पता चलता है? (लगभग 60 शब्द)
Hint
कानों में शिरीष पुष्प, मृणाल का हार।
Answer
दुष्यंत को अपना चित्र बार-बार अधूरा लगता रहा; अंत में समझ आया कि शकुंतला के कानों में गालों तक लटकते केसर वाला शिरीष पुष्प और गले में मृणाल का हार छूट गया है। इससे पता चलता है कि कालिदास सौंदर्य के बाहरी आवरण के भीतर तक पहुँचते थे और छोटे से छोटे विवरण को भी सौंदर्य का अनिवार्य अंग मानते थे।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
शिरीष जेठ की प्रचंड गरमी में फूलता है, फिर भी उसे 'शीतपुष्प' कहा जाता है। यह नाम किस आधार पर उचित है? पाठ के आधार पर तर्क दीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
छायादार पेड़, कोमल फूल, मन पर प्रभाव।
Answer
शिरीष के पेड़ बड़े और घने छायादार होते हैं, जिनके नीचे लू में भी ठंडक मिलती है। उसके कोमल, रेशमी केसर आँखों और मन को शीतलता देते हैं, और भीषण गरमी में उसका सरस बने रहना देखने वाले के मन में भी शांति और आशा जगाता है। इसलिए गरमी में खिलकर भी वह शीतलता देने वाला 'शीतपुष्प' है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.अमलतास (आरग्वध) कितने दिन फूलता है?Show answer
पंद्रह-बीस दिन, पलाश की भाँति।
2.शिरीष कब तक फूलता रहता है?Show answer
वसंत से आषाढ़ तक, और कभी भादों तक।
3.वनस्पतिशास्त्री के अनुसार शिरीष रस कहाँ से खींचता है?Show answer
वायुमंडल से।
4.कर्णाट-राज की प्रिया का नाम क्या था?Show answer
विज्जिका देवी।
5.दुष्यंत शकुंतला के चित्र में क्या बनाना भूल गए थे?Show answer
कानों में शिरीष पुष्प और गले में मृणाल का हार।
6.किन आधुनिक कवियों में लेखक कालिदास जैसी अनासक्ति देखते हैं?Show answer
सुमित्रानंदन पंत और रवींद्रनाथ ठाकुर।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- लेखक: हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907-1979); विधा: ललित निबंध; संग्रह: कल्पलता।
- शिरीष: जेठ की लू में भी फूलता, वसंत से भादों तक; 'कालजयी अवधूत'।
- अमलतास/पलाश: 15-20 दिन; कबीर: 'दिन दस फूला... खंखड़ भया पलास'।
- कालिदास: शिरीष केवल भौंरे के पद सहता है; परवर्ती कवियों की भूल: सब कुछ कोमल नहीं, फल कठोर।
- पुराने फल = सत्ता से चिपके नेता; तुलसी: 'जो फरा सो झरा'; 'जमे कि मरे'।
- कवि: अनासक्त योगी की स्थिर-प्रज्ञता + विदग्ध प्रेमी का हृदय; 'फक्कड़ बनो'; कबीर, कालिदास, पंत, रवींद्रनाथ।
- अंत: हिंसा के बीच स्थिर 'एक बूढ़ा' (गांधी), कोमल और कठोर; 'हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!'
हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल: frequently asked questions
'शिरीष के फूल' पाठ की विधा क्या है?
यह हजारी प्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध है, जो उनके निबंध-संग्रह 'कल्पलता' से लिया गया है।
लेखक ने शिरीष को अवधूत क्यों कहा?
क्योंकि वह संन्यासी की तरह सुख-दुख में समान रहता है; जेठ की धूप और लू में भी फूलता है और जीवन की अजेयता का संदेश देता है।
निबंध के अंत में किस अवधूत को याद किया गया है?
महात्मा गांधी को, जो देश में फैली हिंसा और मार-काट के बीच भी शिरीष की तरह स्थिर, कोमल और कठोर बने रहे।
हजारी प्रसाद द्विवेदी की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
अशोक के फूल, कल्पलता, कुटज, आलोक पर्व (निबंध); बाणभट्ट की आत्मकथा, चारुचंद्रलेख, पुनर्नवा, अनामदास का पोथा (उपन्यास); कबीर, हिंदी साहित्य की भूमिका (आलोचना)।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 2 (Reprint 2026-27), हजारी प्रसाद द्विवेदी – शिरीष के फूल