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HindiCBSE Class 12 · Chapter 13

फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक: Class 12 सारांश, चरित्र और प्रश्न

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

'पहलवान की ढोलक' फणीश्वर नाथ रेणु की आंचलिक कहानी है। अनाथ लुट्टन ढोल की ताल पर कुश्ती लड़कर राज-पहलवान बनता है, पर नए राजकुमार के आते ही दरबार से निकाल दिया जाता है। महामारी में अपने बेटों को खोकर भी वह रात भर ढोलक बजाकर मरते गाँव में हिम्मत भरता है। यह लोक-कला की उपेक्षा की कहानी है।

What फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक is about

'पहलवान की ढोलक' आरोह भाग 2 के गद्य खंड का पाठ है। फणीश्वर नाथ रेणु (1921-1977) हिंदी के प्रमुख आंचलिक कथाकार हैं; उनका उपन्यास 'मैला आँचल' (1954) आंचलिक उपन्यास की शुरुआत माना जाता है। उनकी कहानियों में गाँव की बोली, लोकगीत और लोक-जीवन जीवंत हो उठते हैं, और इस कहानी में तो ढोल के बोल ही कथा की धड़कन बन गए हैं।

कहानी का केंद्रीय प्रश्न है: जब पुरानी व्यवस्था (राजा साहब) की जगह नई, विलायती सोच वाली व्यवस्था (राजकुमार) आ जाती है, तो लोक-कलाकार का क्या होता है? पाठ की भूमिका इसे 'भारत' पर 'इंडिया' के छा जाने की समस्या कहती है।

बोर्ड परीक्षा (खंड ग) में इस पाठ से पठित गद्यांश पर पाँच MCQ, लगभग 60 शब्दों के 3 अंक वाले और लगभग 40 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न आ सकते हैं। ढोल और दाँव-पेंच का तालमेल, लुट्टन के जीवन के मोड़, 'मेरा गुरु यही ढोल है', महामारी में ढोलक का असर, सूर्योदय-सूर्यास्त का अंतर और प्रकृति का मानवीकरण सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।

Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27

फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

कहानी जाड़े की एक अमावस्या की रात से शुरू होती है। मलेरिया और हैज़े से त्रस्त गाँव डरे हुए बच्चे की तरह काँप रहा है; झोंपड़ियों से कराहने और रोने की आवाज़ें आती हैं, कुत्ते भी रात में मिलकर रोते हैं। इस भयानक सन्नाटे को केवल पहलवान की ढोलक ललकारती है, जिसकी आवाज़ मरते गाँव में जान डाल देती है।

फिर कहानी पीछे लौटती है। लुट्टन के माता-पिता उसके नौ वर्ष का होते ही चल बसे; उसकी शादी पहले हो चुकी थी, इसलिए विधवा सास ने उसे पाला। गाँव वाले सास को सताते थे, इसलिए बदला लेने की धुन में उसने कसरत शुरू की और जवानी में गाँव का सबसे अच्छा पहलवान बन गया।

श्यामनगर के मेले के दंगल में ढोल की ललकार सुनकर उसने पंजाब से आए 'शेर के बच्चे' चाँद सिंह को चुनौती दे दी, जो अपने गुरु बादल सिंह के साथ आया था। राजा साहब ने दस रुपये देकर उसे लौटाना चाहा, पर उसकी ज़िद पर लड़ने की अनुमति दी। सबका समर्थन चाँद सिंह के साथ था; लुट्टन के साथ केवल ढोल था। ढोल के हर बोल को वह एक निर्देश की तरह सुनता रहा और अंत में चाँद सिंह को चित कर दिया। जीतकर उसने सबसे पहले ढोलों को प्रणाम किया। राजा साहब ने उसे राज-पहलवान बना दिया और 'लुट्टन सिंह' कहने लगे; जाति को लेकर आपत्ति हुई तो बोले कि उसने क्षत्रिय का काम किया है। आगे उसने काला खाँ जैसे नामी पहलवानों को भी हराया।

पंद्रह वर्ष वह अजेय रहा। पत्नी दो बेटों को जन्म देकर मर गई; दोनों बेटे भी दरबार के भावी पहलवान घोषित हुए। लुट्टन उन्हें ढोल को ही अपना गुरु मानने की सीख देता था। पर बूढ़े राजा की मृत्यु के बाद विलायत से लौटे राजकुमार ने दंगल की जगह घोड़ों की रेस शुरू कर दी और पहलवानों का खर्च सुनकर उन्हें निकाल दिया।

लुट्टन बेटों के साथ गाँव लौट आया और गाँव के युवकों को कुश्ती सिखाने लगा, पर भूखे किसान-बच्चे कुश्ती कैसे सीखते? अखाड़ा खाली हो गया। फिर सूखा, अन्न की कमी, मलेरिया और हैज़ा आए। दिन में लोग एक-दूसरे को ढाढ़स बँधाते, पर रात होते ही चुप हो जाते। तब केवल ढोलक की आवाज़ उनमें जीने का साहस भरती। एक रात बेटों ने तड़पते हुए 'उठा पटक दो' वाला ताल बजाने को कहा; सुबह दोनों पेट के बल मरे मिले। लुट्टन ने राजा की दी हुई रेशमी जाँघिया पहनी, कसरत की और बेटों को नदी में बहा आया। उसी रात फिर ढोलक बजी और गाँव की हिम्मत लौट आई। चार-पाँच दिन बाद एक रात ढोलक नहीं बजी; सुबह शिष्यों ने उसकी लाश चित पड़ी देखी। उसकी इच्छा थी कि उसे चिता पर पेट के बल लिटाया जाए, क्योंकि वह जीवन में कभी चित नहीं हुआ था, और चिता जलाते समय ढोलक बजाई जाए।

Themes and message

व्यवस्था-परिवर्तन और लोक-कला की उपेक्षा

राजा साहब कुश्ती के कद्रदान थे; विलायत से लौटे राजकुमार ने दंगल हटाकर घोड़ों की रेस शुरू कर दी। पुरानी लोक-संस्कृति पर नई, दिखावटी व्यवस्था थोप दी गई और लोक-कलाकार रोटी के लिए मोहताज हो गया।

From the text: राजकुमार का "टैरिबुल!" और मैनेजर का "हौरिबुल!" कहना।

कला की जीवनदायिनी शक्ति

ढोलक बुखार नहीं उतार सकती थी, न महामारी रोक सकती थी; फिर भी उसकी आवाज़ से अधमरे लोगों में साहस आता था और वे बिना डरे मृत्यु का सामना करते थे। कला जीवन को अर्थ और साहस देती है।

From the text: "यही आवाज़ मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी।"

अदम्य जिजीविषा और साहस

अनाथ होना, दरबार से निकाला जाना, बेटों की मृत्यु—हर आघात के बाद भी लुट्टन टूटता नहीं। बेटों को नदी में बहाकर भी वह उसी रात ढोलक बजाता है।

From the text: "पर पहलवान की हिम्मत तो देखो, डेढ़ हाथ का कलेजा है!"

गाँव की गरीबी और महामारी की त्रासदी

सूखा, अन्न की कमी, मलेरिया, हैज़ा और दवा-इलाज का अभाव—रेणु स्वतंत्रता के बाद के उपेक्षित गाँव का सच्चा चित्र खींचते हैं, जहाँ भूखे बच्चे कुश्ती भी नहीं सीख सकते।

From the text: गाँव के अर्द्धमृत प्राणी 'औषधि-उपचार-पथ्य-विहीन' बताए गए हैं।

Characters

लुट्टन सिंह पहलवान

कहानी का नायक; लोक-कलाकार और पहलवान।

  • साहसी और जीवट वाला: 'शेर के बच्चे' को चुनौती, बेटों की मृत्यु के बाद भी ढोलक बजाना
  • ढोल को गुरु मानने वाला, कृतज्ञ: जीतकर सबसे पहले ढोलों को प्रणाम
  • बच्चों जैसा भोला और सरल: मेले में अबरख का चश्मा, सीटी, खिलौना
  • स्वाभिमानी: मरकर भी 'चित' न होने की इच्छा
  • परोपकारी: अपनी पीड़ा भुलाकर गाँव में हिम्मत भरता है

बेटों को नदी में बहाने के बाद भी उसी रात ढोलक बजाना; मृत्यु से पहले पेट के बल चिता पर लिटाने की इच्छा।

राजा श्यामानंद (राजा साहब)

श्यामनगर के दंगल-प्रेमी वृद्ध राजा; लुट्टन के संरक्षक।

  • कला और प्रतिभा के कद्रदान
  • उदार और जाति-भेद से ऊपर: 'उसने क्षत्रिय का काम किया है'
  • स्नेही

लुट्टन को राज-पहलवान बनाया और जाति पर आपत्ति को ठुकरा दिया।

चाँद सिंह ('शेर के बच्चे')

पंजाब से आया पहलवान, गुरु बादल सिंह का शिष्य; लुट्टन का प्रतिद्वंद्वी।

  • बलवान और सुंदर
  • घमंडी: दंगल में दहाड़ता फिरता था

तीन दिन में सब पहलवानों को हराकर 'शेर के बच्चे' की उपाधि पाई, पर लुट्टन से चित हुआ।

राजकुमार और नए मैनेजर

नई, विलायती व्यवस्था के प्रतीक।

  • लोक-कला के प्रति उदासीन
  • केवल खर्च देखने वाले

पहलवानों के भोजन-व्यय पर "टैरिबुल!" और "हौरिबुल!" कहकर उन्हें निकाल दिया।

How it is written

DeviceExampleEffect
मानवीकरण"अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी"; तारे भावुक तारे पर हँसते हैंप्रकृति के माध्यम से गाँव की पीड़ा और असहायता गहराई से व्यक्त होती है।
ध्वन्यात्मक शब्द'चट्-धा, गिड़-धा', 'धाक-धिना, तिरकट-तिना', 'चटाक्-चट्-धा'गद्य में संगीत पैदा होता है; ढोल की आवाज़ और दाँव-पेंच एक साथ सुनाई-दिखाई देते हैं।
उपमा"मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव भयार्त्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था"गाँव की बेबसी का मार्मिक चित्र।
मुहावरे'चार चाँद लगाना', 'मिट्टी सुँघाना', 'पानी फिर जाना', 'डेढ़ हाथ का कलेजा'भाषा को सजीव और लोक-रंग वाली बनाते हैं।
आंचलिक और अंग्रेज़ी शब्दों का मेल'होल इंडिया', 'टैरिबुल', 'हौरिबुल', 'तनी-मनी काहे'पात्रों की बोली और पुरानी-नई व्यवस्था की टकराहट दोनों उभरती हैं।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है

    लुट्टन: बेटों को कसरत और सांसारिक ज्ञान सिखाते समय

    ढोल की ताल से ही उसने दाँव-पेंच सीखे और जीता; कला के प्रति कृतज्ञता।

  • यही आवाज़ मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी।

    लेखक: महामारी की रात में ढोलक का प्रभाव

    कला की जीवनदायिनी शक्ति; ढोलक गाँव को मृत्यु से लड़ने का साहस देती है।

  • उसने क्षत्रिय का काम किया है।

    राजा साहब: राज-पंडितों और मैनेजर की जाति-संबंधी आपत्ति पर

    वीरता कर्म से है, जन्म से नहीं; राजा की उदारता।

  • दोनों बहादुर गिर पड़े!

    लुट्टन: सुबह बेटों को मृत देखकर

    असह्य दुख में भी पहलवान की भाषा और धैर्य; मुसकुराने की चेष्टा उसकी जीवटता है।

  • मैं जिंदगी में कभी ‘चित’ नहीं हुआ।

    लुट्टन (शिष्य द्वारा दोहराया गया): लुट्टन की मृत्यु के बाद उसकी अंतिम इच्छा बताते हुए

    मृत्यु के बाद भी हार न मानने वाला स्वाभिमान।

फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

कला संकट में साहस देती है

मान लीजिए किसी अस्पताल के कोविड वार्ड में एक नर्स रात को मरीज़ों के लिए धीमे स्वर में गाना गाती है और मरीज़ों का डर कम हो जाता है।

इस घटना की तुलना पहलवान की ढोलक से कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ढोलक भी बुखार नहीं उतारती थी, न गाना वायरस मारता है।
  2. पर दोनों ही डरे हुए लोगों के मन में साहस भरते हैं; मरते लोग भी बिना डर के आँख मूँदते थे।

Answer: दोनों उदाहरण बताते हैं कि कला शरीर का इलाज नहीं, मन का सहारा है। लुट्टन की ढोलक की तरह नर्स का गाना भी भय और अकेलेपन से लड़ने की ताकत देता है।

Memory hook: दवा शरीर के लिए, कला मन के लिए।

व्यवस्था बदलने पर लोक-कला की उपेक्षा

कल्पना कीजिए कि आपके शहर में नई कमेटी आते ही रामलीला और कुश्ती का वार्षिक आयोजन बंद करके केवल डीजे नाइट करवाने लगती है, और पुराने कलाकार बेरोज़गार हो जाते हैं।

पाठ के आधार पर इस स्थिति पर टिप्पणी कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाठ में राजकुमार ने दंगल की जगह घोड़ों की रेस शुरू की और पहलवानों को निकाल दिया।
  2. लोक-कला का मूल्य केवल खर्च से नहीं आँका जा सकता; उसे बचाना समाज की ज़िम्मेदारी है।

Answer: यह वही स्थिति है जो लुट्टन ने झेली। नई चीज़ें अपनाना ठीक है, पर पुरानी लोक-कलाओं और कलाकारों को सम्मान और सहारा देना भी ज़रूरी है, वरना हमारी सांस्कृतिक जड़ें सूख जाएँगी।

Memory hook: रेस आई, दंगल गया, पहलवान बेघर।

दुख में भी कर्तव्य

मान लीजिए एक डॉक्टर के घर में किसी की मृत्यु हो गई है, फिर भी वह आपदा के समय अगले दिन अस्पताल लौटकर मरीज़ों को देखता है।

लुट्टन के व्यवहार से इसकी तुलना कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लुट्टन ने बेटों को नदी में बहाया और उसी रात फिर ढोलक बजाई।
  2. दोनों अपने निजी दुख से ऊपर उठकर दूसरों के लिए जीते हैं।

Answer: दोनों ने निजी शोक को सामूहिक कर्तव्य पर हावी नहीं होने दिया। लुट्टन की ढोलक सुनकर गाँव वालों की हिम्मत दुगुनी हुई, वैसे ही डॉक्टर का लौटना दूसरों को हिम्मत देता है।

Memory hook: डेढ़ हाथ का कलेजा।

Topics in this chapter

How the board asks फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5)महामारी की रात, ढोलक का असर, कुश्ती का दृश्य या राजकुमार के आने वाले अंश पर अर्थ, अलंकार, मानवीकरण और कथन-कारण।पहचानें कि अंश कहानी के किस मोड़ का है; ढोल के बोलों के अर्थ और कठिन शब्द (विभीषिका, निस्तब्धता, भयार्त्त) पहले तैयार रखें।
ढोल और जीवन का संबंध (3 अंक)ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में तालमेल; 'मेरा गुरु यही ढोल है' क्यों कहा; ढोलक का गाँव पर असर।कम से कम दो बोल और उनका अर्थ लिखें; फिर बताएँ कि ढोल ने कुश्ती में क्या किया और महामारी में क्या।
जीवन के मोड़ / चरित्र (3 अंक)लुट्टन के जीवन के प्रमुख परिवर्तन; उसके चरित्र की विशेषताएँ।क्रम से: अनाथ होना, दंगल की जीत और राज-पहलवान, राजा की मृत्यु और निष्कासन, बेटों की मृत्यु, अपनी मृत्यु।
आशय / तुलना (2 अंक)भावुक तारे वाला अंश, सूर्योदय-सूर्यास्त का अंतर, 'टैरिबुल-हौरिबुल', 'उसने क्षत्रिय का काम किया है'।प्रसंग एक वाक्य में, फिर आशय; तुलना वाले प्रश्न में दोनों पक्ष अलग-अलग लिखें।

Tricks to remember फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ढोल के बोल और उनके अर्थ

    चट्-धा गिड़-धा = आ जा भिड़ जा; चटाव्/चटाक्-चट्-धा = उठा पटक दे; ढाक्-ढिना = वाह पट्ठे; चट्-गिड़-धा = मत डरना; धाक-धिना तिरकट-तिना = दाँव काटो, बाहर हो जा; धिना-धिना धिक-धिना = चित करो; धा-गिड़-गिड़ = वाह बहादुर।

    Use it when: ढोल और दाँव-पेंच के तालमेल वाले प्रश्न में।

  • जीवन के पाँच मोड़: 'अनाथ-दंगल-दरबार-निष्कासन-महामारी'

    9 वर्ष में अनाथ; श्यामनगर दंगल में चाँद सिंह को हराया; 15 वर्ष राज-पहलवान; राजकुमार ने निकाला; महामारी में बेटे और फिर स्वयं।

    Use it when: जीवन के परिवर्तन वाले 3 अंक के प्रश्न में।

  • नाम याद रखें

    चाँद सिंह (शेर का बच्चा) + गुरु बादल सिंह; काला खाँ ('आ-ली'); राजा श्यामानंद; श्यामनगर मेला।

    Use it when: तथ्य वाले MCQ में।

फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: गद्यांश 1: ढोलक और महामारी की रात

पहलवान संध्या से सुबह तक, चाहे जिस खयाल से ढोलक बजाता हो, किंतु गाँव के अर्द्धमृत, औषधि-उपचार-पथ्य-विहीन प्राणियों में वह संजीवनी शक्ति ही भरती थी। बूढ़े-बच्चे-जवानों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता था।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: लेखक कहते हैं कि रात की विभीषिका को सिर्फ़ एक ही चीज़ ललकारकर चुनौती देती रहती थी।) रात्रि की विभीषिका को कौन चुनौती देता था?
    (क) सियारों का क्रंदन
    (ख) पहलवान की ढोलक
    (ग) गाँव के लोग
    (घ) कुत्तों का रोना

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'औषधि-उपचार-पथ्य-विहीन' से गाँव की किस स्थिति का पता चलता है?
    (क) गाँव में डॉक्टर बहुत थे
    (ख) बीमारों के लिए न दवा थी, न इलाज, न उचित भोजन
    (ग) लोग दवा खाना नहीं चाहते थे
    (घ) गाँव में अस्पताल नया बना था

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    ढोलक की आवाज़ सुनकर लोगों की आँखों के आगे क्या नाचने लगता था?
    (क) मेले का दृश्य
    (ख) दंगल का दृश्य
    (ग) राजदरबार
    (घ) खेत-खलिहान

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: लेखक आगे कहते हैं कि 'स्पंदन-शक्ति-शून्य स्नायुओं में भी बिजली दौड़ जाती थी'।) 'स्पंदन-शक्ति-शून्य स्नायुओं में भी बिजली दौड़ जाती थी'—इसका आशय है:
    (क) गाँव में बिजली आ गई थी
    (ख) निर्जीव-से पड़े लोगों में भी उत्साह का संचार हो जाता था
    (ग) लोगों को करंट लगता था
    (घ) लोग डर से काँपने लगते थे

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): ढोलक की आवाज़ से गाँव का बुखार और महामारी दूर हो जाती थी।
    कारण (R): ढोलक की आवाज़ लोगों में संजीवनी शक्ति भरती थी।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

Show the answersAnswers
  1. (ख) पहलवान की ढोलक
  2. (ख) बीमारों के लिए न दवा थी, न इलाज, न उचित भोजन
  3. (ख) दंगल का दृश्य
  4. (ख) निर्जीव-से पड़े लोगों में भी उत्साह का संचार हो जाता था
  5. (घ) कथन गलत है (ढोलक में बुखार हटाने या महामारी रोकने का गुण नहीं था), पर कारण सही है।

Extract 2: गद्यांश 2: अमावस्या की रात

जाड़े का दिन। अमावस्या की रात—ठंडी और काली। मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव भयार्त्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था। पुरानी और उजड़ी बाँस-फूस की झोंपड़ियों में अंधकार और सन्नाटे का सम्मिलित साम्राज्य!

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    गाँव किन बीमारियों से पीड़ित था?
    (क) प्लेग और चेचक
    (ख) मलेरिया और हैज़ा
    (ग) टी.बी. और खसरा
    (घ) डेंगू और पीलिया

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'गाँव भयार्त्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था' में कौन-सा अलंकार है?
    (क) रूपक
    (ख) उपमा
    (ग) यमक
    (घ) श्लेष

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: लेखक आगे लिखते हैं कि अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी।) 'अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी' में भाषा की कौन-सी विशेषता है?
    (क) प्रकृति का मानवीकरण
    (ख) अनुप्रास
    (ग) अंग्रेज़ी शब्दों का प्रयोग
    (घ) प्रश्न शैली

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: लेखक आगे सन्नाटे का भी मानवीकरण करते हैं—मानो वह गाँव के दुख की ध्वनियों को ज़बरदस्ती अपने भीतर दबा रहा हो।) निस्तब्धता किसे अपने हृदय में दबाने की चेष्टा कर रही थी?
    (क) ढोलक की आवाज़ को
    (ख) करुण सिसकियों और आहों को
    (ग) तारों की हँसी को
    (घ) सियारों के क्रंदन को

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    गद्यांश का मूल भाव क्या है?
    (क) जाड़े की सुंदर रात का वर्णन
    (ख) महामारी से त्रस्त गाँव का भय, पीड़ा और सन्नाटा
    (ग) गाँव के उत्सव का वर्णन
    (घ) पहलवान की वीरता

Show the answersAnswers
  1. (ख) मलेरिया और हैज़ा
  2. (ख) उपमा
  3. (क) प्रकृति का मानवीकरण
  4. (ख) करुण सिसकियों और आहों को
  5. (ख) महामारी से त्रस्त गाँव का भय, पीड़ा और सन्नाटा

फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: ढोल को गुरु मानना · 2 marks · Short answerBoard level

लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. किसी पहलवान से प्रशिक्षण नहीं मिला।
  2. दंगल में ढोल के बोल ही निर्देश बने।

Answer: लुट्टन ने किसी पहलवान से कुश्ती नहीं सीखी थी। ढोल की ललकार ने ही उसे दंगल में उतारा, और चाँद सिंह से लड़ते समय वह हर बोल को निर्देश मानकर दाँव काटता और पटकता गया। इसलिए वह ढोल को ही अपना गुरु मानता था।

Example 2: ढोल और दाँव-पेंच का तालमेल · 3 marks · Short answerHarder board level

कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? उदाहरण सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. हर बोल का एक अर्थ।
  2. बोल के अनुसार दाँव।
  3. परिणाम।

Answer: लुट्टन ढोल के हर बोल को एक आदेश की तरह सुनता था। चाँद सिंह ने दबाया तो 'चट्-गिड़-धा' ने कहा 'मत डरना'; 'धाक-धिना, तिरकट-तिना' सुनकर उसने दाँव काटा और बाहर निकल आया; 'चटाक्-चट्-धा' पर चाँद को उठाकर पटका और 'धिना-धिना, धिक-धिना' पर उसे चित कर दिया। इस प्रकार ढोल ही उसका मार्गदर्शक और उत्साह था।

Example 3: सूर्योदय और सूर्यास्त · 3 marks · Short answerHarder board level

महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दिन का दृश्य।
  2. रात का दृश्य।
  3. ढोलक की भूमिका।

Answer: सूर्योदय होते ही लोग कराहते हुए भी घरों से निकलते, पड़ोसियों को ढाढ़स बँधाते और चेहरों पर कुछ चमक दिखती। सूर्यास्त होते ही सब अपनी झोंपड़ियों में दुबक जाते, बोलने की शक्ति भी खो देते; माताएँ मरते बेटे को पुकार भी न पातीं। रात के इस सन्नाटे को केवल पहलवान की ढोलक चुनौती देती थी।

Example 4: राजकुमार का निर्णय · 2 marks · Short answerHOTS / competency

'टैरिबुल!' और 'हौरिबुल!' जैसे शब्द नई व्यवस्था की किस सोच को दर्शाते हैं? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. विलायती शिक्षा और अंग्रेज़ी शब्द।
  2. कला को केवल खर्च के तराज़ू पर तौलना।

Answer: विलायत से लौटे राजकुमार और नए मैनेजर ने पहलवानों का भोजन-व्यय सुनकर अंग्रेज़ी में नाक-भौं सिकोड़ी। यह उस नई सोच को दिखाता है जो लोक-कला को बोझ और खर्च मानती है और विलायती शौक (घोड़ों की रेस) को श्रेष्ठ।

Example 5: कलाओं का अस्तित्व · 3 marks · Short answerHOTS / competency

'कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज नहीं है'—पहलवान की ढोलक के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. व्यवस्था ने साथ छोड़ा।
  2. फिर भी कला जीवित रही और गाँव को शक्ति दी।
  3. पर कलाकार की भूख व्यवस्था की उपेक्षा का परिणाम।

Answer: राजकुमार ने दरबार से निकाल दिया, पर लुट्टन की ढोलक बंद नहीं हुई; महामारी में वही गाँव का सहारा बनी। इस अर्थ में कला का अस्तित्व व्यवस्था पर निर्भर नहीं। फिर भी संरक्षण छिनने से उसका अखाड़ा खाली हुआ और परिवार भूखा रहा। अतः कला जीवित रहती है, पर कलाकार को जीवित रखने के लिए समाज का सहारा ज़रूरी है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

कहानी के किन-किन मोड़ों पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए? (लगभग 60 शब्द) (3 marks)

StepMarks
बचपन में अनाथ, सास ने पाला; सास के अपमान का बदला लेने को कसरत1
चाँद सिंह को हराकर राज-पहलवान; पंद्रह वर्ष अजेय1
राजा की मृत्यु पर निष्कासन, गाँव वापसी; महामारी में बेटों और फिर स्वयं की मृत्यु1

लुट्टन ने ढोल को अपना गुरु क्यों माना? (लगभग 40 शब्द) (2 marks)

StepMarks
उसका कोई पहलवान गुरु नहीं था; ढोल की आवाज़ से ही प्रेरणा1
चाँद सिंह से कुश्ती में ढोल के बोलों को निर्देश मानकर जीता1

Where students lose marks in फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: लिखना कि ढोलक की आवाज़ से बीमारी ठीक हो जाती थी

    पाठ स्पष्ट कहता है कि ढोलक में बुखार हटाने या महामारी रोकने का गुण नहीं था; वह केवल मृत्यु का डर दूर करती थी।

    Do this: लिखें: ढोलक ने शरीर नहीं, मन को शक्ति दी; मरते लोग बिना डर के आँख मूँदते थे।

    Usually costs: 1 अंक / कथन-कारण में पूरा अंक

  • Mistake: चाँद सिंह और बादल सिंह को उलट देना

    चाँद सिंह 'शेर का बच्चा' और लुट्टन का प्रतिद्वंद्वी है; बादल सिंह उसका गुरु।

    Do this: 'चाँद शिष्य, बादल गुरु' याद रखें।

    Usually costs: MCQ में 1 अंक

  • Mistake: पहलवान को दरबार से निकालने का कारण उसकी हार बताना

    वह पंद्रह वर्ष अजेय रहा; उसे नए राजकुमार की बदली रुचि (घोड़ों की रेस) और खर्च की सोच के कारण निकाला गया।

    Do this: कारण में व्यवस्था-परिवर्तन लिखें, व्यक्तिगत कमी नहीं।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: सूर्योदय-सूर्यास्त के अंतर में केवल प्रकाश-अंधकार लिखना

    प्रश्न लोगों के व्यवहार का अंतर पूछता है: दिन में लोग एक-दूसरे को ढाढ़स बँधाते, रात में चुप हो जाते, माताएँ बेटे को पुकार भी न पातीं।

    Do this: दोनों समय के मानवीय दृश्य की तुलना करें और ढोलक की भूमिका जोड़ें।

    Usually costs: 1 अंक

Practice questions on फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    'पहलवान की ढोलक' कहानी के लेखक का प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास कौन-सा है?
    (क) गोदान
    (ख) मैला आँचल
    (ग) राग दरबारी
    (घ) तमस

    Hint

    1954 में प्रकाशित।

    Answer

    (ख) मैला आँचल

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    संजीवनी शक्ति, दंगल का दृश्य।

    Answer

    ढोलक की आवाज़ अधमरे, दवा-विहीन लोगों में संजीवनी शक्ति भरती थी। उनकी आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता और शिथिल नसों में उत्साह दौड़ जाता। बीमारी नहीं जाती थी, पर मरते लोग बिना डर के आँख मूँदते थे।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    राजा साहब ने क्यों कहा कि 'उसने क्षत्रिय का काम किया है'? इस कथन से राजा के बारे में क्या पता चलता है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    राज-पंडितों और मैनेजर की आपत्ति।

    Answer

    लुट्टन को 'सिंह' कहने पर राज-पंडितों और क्षत्रिय मैनेजर ने उसकी जाति पर आपत्ति की। राजा ने कहा कि उसने वीरता दिखाकर क्षत्रिय का काम किया है। इससे पता चलता है कि वे गुण और कर्म को जाति से बड़ा मानने वाले उदार व्यक्ति थे।

  4. Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    कथन (A): दंगल में लुट्टन के पक्ष में केवल ढोल की आवाज़ थी।
    कारण (R): राजमत और बहुमत दोनों चाँद सिंह के पक्ष में थे।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

    Hint

    सब चाँद को शाबाशी दे रहे थे।

    Answer

    (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level

    आशय स्पष्ट कीजिए: 'आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी।' (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    मानवीकरण; गाँव की निराशा।

    Answer

    लेखक तारों का मानवीकरण करते हैं। कोई संवेदनशील तारा दुखी गाँव की मदद के लिए धरती पर आना चाहता, पर उसकी रोशनी रास्ते में ही खत्म हो जाती और दूसरे तारे उसकी असफलता पर हँसते। आशय यह है कि महामारी के अँधेरे में गाँव तक कोई सहायता या आशा की किरण नहीं पहुँच रही थी; बाहरी दुनिया उदासीन थी।

  6. Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    बेटों की मृत्यु के बाद लुट्टन का व्यवहार उसके व्यक्तित्व के बारे में क्या बताता है? क्या उसका व्यवहार कठोरता था या साहस? तर्क दीजिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    रेशमी जाँघिया, कसरत, उसी रात ढोलक।

    Answer

    लुट्टन ने मुसकुराने की चेष्टा करते हुए कहा 'दोनों बहादुर गिर पड़े', राजा की दी हुई जाँघिया पहनकर बेटों को नदी में बहाया और उसी रात फिर ढोलक बजाई। यह कठोरता नहीं, असाधारण साहस है। उसने दुख को भीतर सहा ताकि गाँव की टूटती हिम्मत बची रहे; लोगों ने कहा भी कि उसका कलेजा डेढ़ हाथ का है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.लुट्टन किस उम्र में अनाथ हुआ और उसे किसने पाला?Show answer

    नौ वर्ष में; विधवा सास ने।

  2. 2.'शेर के बच्चे' का असली नाम क्या था?Show answer

    चाँद सिंह।

  3. 3.राजा साहब ने लुट्टन को लौटाने के लिए क्या दिया?Show answer

    दस रुपये का नोट।

  4. 4.दंगल की जगह राजकुमार ने क्या शुरू किया?Show answer

    घोड़ों की रेस।

  5. 5.मरते बेटों ने कौन-सा ताल बजाने को कहा?Show answer

    'उठा पटक दो' वाला ताल।

  6. 6.लुट्टन की अंतिम इच्छा क्या थी?Show answer

    चिता पर पेट के बल लिटाया जाए और चिता सुलगाते समय ढोलक बजाई जाए।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • लेखक: फणीश्वर नाथ रेणु (1921-1977), आंचलिक कथाकार; विधा: कहानी।
  • आरंभ: महामारी से काँपता गाँव, अमावस्या की रात; केवल ढोलक की ललकार।
  • लुट्टन: 9 वर्ष में अनाथ, सास ने पाला; बदले की धुन में कसरत।
  • श्यामनगर दंगल: चाँद सिंह ('शेर का बच्चा', गुरु बादल सिंह) को ढोल के बोलों के सहारे चित किया; ढोलों को प्रणाम।
  • राजा: 'उसने क्षत्रिय का काम किया है'; 15 वर्ष राज-पहलवान; काला खाँ को हराया।
  • राजकुमार: विलायत से, घोड़ों की रेस, 'टैरिबुल-हौरिबुल'; पहलवान निकाला गया।
  • महामारी: बेटे मरे ('दोनों बहादुर गिर पड़े'), उसी रात फिर ढोलक; अंत में लुट्टन की लाश चित, इच्छा पेट के बल चिता।
  • विषय: व्यवस्था-परिवर्तन और लोक-कला, कला की संजीवनी शक्ति, जिजीविषा; शैली: मानवीकरण, ध्वन्यात्मक शब्द।

फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक: frequently asked questions

'पहलवान की ढोलक' का मूल संदेश क्या है?

यह कहानी बताती है कि व्यवस्था बदलने पर लोक-कलाएँ और कलाकार कैसे उपेक्षित हो जाते हैं, और फिर भी कला संकट में मनुष्य को जीने और मृत्यु से न डरने का साहस देती है।

लुट्टन ने किस पहलवान को हराकर ख्याति पाई?

श्यामनगर मेले के दंगल में पंजाब से आए चाँद सिंह को, जो 'शेर के बच्चे' कहलाता था और जिसके गुरु बादल सिंह थे।

लुट्टन को राज-दरबार से क्यों निकाला गया?

बूढ़े राजा की मृत्यु के बाद विलायत से लौटे राजकुमार ने दंगल की जगह घोड़ों की रेस शुरू की और पहलवानों का भोजन-खर्च सुनकर उन्हें निकाल दिया।

फणीश्वर नाथ रेणु कौन थे?

रेणु (1921-1977) हिंदी के प्रसिद्ध आंचलिक कथाकार थे। मैला आँचल, परती परिकथा (उपन्यास), ठुमरी (कहानी-संग्रह) और ऋणजल धनजल (संस्मरण) उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।

Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 2 (Reprint 2026-27), फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक