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HindiCBSE Class 12 · Chapter 5

शमशेर बहादुर सिंह – उषा: Class 12 भावार्थ, बिंब और प्रश्न

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

'उषा' शमशेर बहादुर सिंह की कविता है, जो आरोह भाग 2 के काव्य खंड में है। इसमें सूर्योदय से ठीक पहले आकाश के पल-पल बदलते रंगों को गाँव की सुबह के उपमानों—गीला चौका, काली सिल, स्लेट—से चित्रित किया गया है। बोर्ड इससे काव्यांश पर MCQ और 40-60 शब्दों के प्रश्न पूछता है।

What शमशेर बहादुर सिंह – उषा is about

'उषा' आरोह भाग 2 के काव्य खंड की छोटी पर बहुत सघन कविता है। शमशेर बहादुर सिंह बिंबधर्मी कवि हैं: वे शब्दों से चित्र बनाते हैं। इस कविता में वे भोर के आकाश को दूर से देखने वाले दर्शक नहीं हैं, बल्कि उसे गाँव के घर-आँगन की चीज़ों से जोड़ देते हैं।

बोर्ड परीक्षा (खंड ग) में इस कविता से तीन तरह के प्रश्न आ सकते हैं: पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (कथन-कारण सहित, 1×5), लगभग 60 शब्दों का 3 अंक वाला प्रश्न और लगभग 40 शब्दों का 2 अंक वाला प्रश्न। सबसे ज़्यादा ध्यान उपमानों, बिंबों, कोष्ठक के प्रयोग और 'जादू टूटने' के अर्थ पर दें।

Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27

शमशेर बहादुर सिंह – उषा: explanation

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

कविता सूर्योदय से ठीक पहले के आकाश का शब्द-चित्र है। सबसे पहले भोर का आकाश बहुत नीला है, जैसे शंख हो—यानी उसमें नीलेपन के साथ एक हल्की उजली चमक है। फिर कवि कहता है कि भोर का आकाश राख से लीपे हुए चौके जैसा है, जो अभी गीला पड़ा है। गीली राख का रंग धूसर-नीला होता है और उसमें नमी की ताज़गी होती है; ओस से भीगा भोर का आकाश भी ऐसा ही लगता है। कोष्ठक में लिखा '(अभी गीला पड़ा है)' इस ताज़गी पर ज़ोर देता है।

इसके बाद आकाश में हल्की लाली आने लगती है। कवि कहता है कि मानो बहुत काली सिल ज़रा-से लाल केसर से धुल गई हो, या स्लेट पर किसी ने लाल खड़िया चाक मल दी हो। अँधेरे के बीच पहली लाली को दिखाने के लिए ये गाँव के घरों की परिचित चीज़ें हैं: मसाला पीसने की सिल और बच्चों की स्लेट।

फिर सूरज की पहली किरणें दिखती हैं। कवि को लगता है जैसे नीले जल में किसी की गोरी, झिलमिलाती देह हिल रही हो। नीला आकाश जल है और उसमें काँपती सुनहरी आभा गोरी देह जैसी है।

अंत में 'और...' के बाद एक विराम है और कवि कहता है कि अब उषा का जादू टूट रहा है, सूर्योदय हो रहा है। उषा के समय रंगों का जो पल-पल बदलता खेल था, वह सूरज के पूरे निकल आने पर समाप्त हो जाता है। इस तरह कविता प्रकृति की गति को गाँव के जीवन की हलचल से जोड़कर एक सजीव, गतिशील चित्र बनाती है।

Themes and message

प्रकृति का गतिशील शब्द-चित्र

कविता एक स्थिर दृश्य नहीं, बल्कि बदलते दृश्यों की शृंखला है: नीला शंख, गीला चौका, केसर से धुली सिल, स्लेट पर लाल चाक, नीले जल में झिलमिल देह और अंत में सूर्योदय। हर पंक्ति के साथ रंग और रोशनी बदलती है, इसलिए इसे 'गतिशील शब्द-चित्र' कहा जाता है।

From the text: "प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे" से शुरू होकर "सूर्योदय हो रहा है" पर अंत।

गाँव की सुबह और घरेलू जीवन

कवि आकाश की तुलना के लिए गाँव के घर की चीज़ें चुनता है: राख से लीपा चौका, मसाला पीसने की सिल, बच्चों की स्लेट और खड़िया चाक। इनसे आकाश का दृश्य धरती के जीवन से जुड़ जाता है और सुबह की घरेलू हलचल—चौका लीपना, सिल धोना, बच्चों का पढ़ने बैठना—भी महसूस होती है।

From the text: "राख से लीपा हुआ चौका", "बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से"

सौंदर्य की क्षणभंगुरता

उषा का सौंदर्य कुछ ही पलों का है। जैसे ही सूरज पूरा निकलता है, रंगों का खेल खत्म हो जाता है। कवि इसे 'जादू टूटना' कहता है। इससे संकेत मिलता है कि प्रकृति के सबसे सुंदर क्षण बहुत छोटे होते हैं और उन्हें ध्यान से देखना पड़ता है।

From the text: "जादू टूटता है इस उषा का अब"

नई कविता का शिल्प: बिंब और विराम

शमशेर नए उपमान चुनते हैं और कोष्ठक, बिंदु (...) तथा पंक्तियों के बीच की खाली जगह से भी अर्थ पैदा करते हैं। कोष्ठक में '(अभी गीला पड़ा है)' दृश्य की ताज़गी बताता है और 'और...' का विराम सूर्योदय से पहले के ठहराव को दिखाता है।

From the text: "(अभी गीला पड़ा है)" और "और..."

The speaker and the people in the poem

कवि (वक्ता)

भोर के आकाश को देखने वाला, जो उसे गाँव की सुबह के उपमानों में बाँधता है।

  • सूक्ष्म निरीक्षक: रंगों के छोटे-छोटे बदलाव पकड़ता है।
  • चित्रकार मन: शब्दों से रंग और रेखा उकेरता है।
  • धरती से जुड़ा: आकाश को घर-आँगन की चीज़ों से जोड़ता है।

"स्लेट पर या लाल खड़िया चाक / मल दी हो किसी ने" जैसे बिंब उसकी चित्रात्मक दृष्टि दिखाते हैं।

Poetic devices

DeviceExampleEffect
उपमा अलंकार"प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे"आकाश की तुलना शंख से, 'जैसे' वाचक शब्द के साथ; नीलेपन में उजली चमक का भाव।
उत्प्रेक्षा अलंकार"बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से / कि जैसे धुल गई हो"आकाश में आई लाली की संभावना-भरी कल्पना ('मानो/जैसे')।
रूपक / बिंब"भोर का नभ / राख से लीपा हुआ चौका"आकाश को ही चौका मान लिया गया है; दृश्य बिंब बनता है।
दृश्य बिंब और रंग-बिंब"नील जल में या किसी की / गौर झिलमिल देह"नीले और सुनहरे-गोरे रंगों का मेल, झिलमिलाती रोशनी का चित्र।
मुक्त छंदपूरी कवितातुकबंदी और मात्रा का बंधन नहीं; बातचीत जैसी लय।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे

    कवि: कविता की पहली पंक्ति

    भोर के आकाश के नीलेपन और उसमें छिपी उजली चमक का बिंब; उपमा अलंकार।

  • राख से लीपा हुआ चौका

    कवि: भोर के नभ का वर्णन

    धूसर-नीले, ओस से नम आकाश की तुलना गाँव के गीले, लीपे चौके से; पवित्रता और ताज़गी का भाव।

  • बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से

    कवि: अँधेरे आकाश में पहली लाली

    काले आकाश पर हल्की लालिमा का चित्र; घरेलू उपमान।

  • जादू टूटता है इस उषा का अब

    कवि: कविता का अंत

    सूर्योदय के साथ उषा के बदलते रंगों का सम्मोहन समाप्त होता है।

शमशेर बहादुर सिंह – उषा in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

गतिशील शब्द-चित्र

मान लीजिए आप किसी पहाड़ी गाँव में सुबह पाँच बजे छत पर खड़े हैं और दस मिनट में आकाश का रंग गहरे नीले से धूसर, फिर हल्का लाल और अंत में सुनहरा होता है।

शमशेर की तरह अपने घर की तीन चीज़ों को उपमान बनाकर इन बदलते रंगों का चित्र खींचिए और बताइए कि यह 'गतिशील' क्यों है।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहले रंग के लिए घर की कोई नीली-धूसर चीज़ चुनिए, जैसे 'राख से पुता तवा'।
  2. लाली के लिए 'माँ की चुनरी का किनारा', सुनहरे के लिए 'पीतल की थाली' जैसी चीज़।
  3. हर पंक्ति में रंग बदलता दिखाइए; यही गति है।

Answer: उदाहरण: 'आकाश राख से पुता तवा था, फिर उस पर माँ की लाल चुनरी का किनारा फैला, और अब पीतल की थाली चमक उठी।' रंग पल-पल बदलते हैं, इसलिए चित्र गतिशील है।

Memory hook: उषा = रंगों की रील; हर पंक्ति एक नया फ़्रेम।

सौंदर्य की क्षणभंगुरता

कल्पना कीजिए कि आप सूर्योदय की तस्वीर लेने के लिए फ़ोन निकालते हैं, पर कैमरा खुलने तक सूरज पूरा निकल आता है और गुलाबी आकाश सामान्य नीला हो जाता है।

इस अनुभव को 'जादू टूटता है इस उषा का अब' से जोड़कर समझाइए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. उषा के रंग कुछ ही मिनट रहते हैं।
  2. सूरज पूरा निकलते ही वह मोहक दृश्य समाप्त हो जाता है; कवि इसे जादू टूटना कहता है।

Answer: जैसे कैमरा खुलने तक गुलाबी आकाश बदल गया, वैसे ही कविता में सूर्योदय होते ही उषा का रंगीन सम्मोहन टूट जाता है; सुंदर पल क्षणिक होते हैं।

Memory hook: सूरज उगा, जादू गया।

घरेलू उपमान

मान लीजिए आपके छोटे भाई ने कभी गाँव नहीं देखा और वह पूछता है कि 'सिल' और 'चौका' आकाश जैसे कैसे हो सकते हैं।

उसे दो वाक्यों में समझाइए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सिल काला पत्थर है; उस पर केसर का लाल रंग वैसा लगता है जैसे अँधेरे आकाश में पहली लाली।
  2. राख से लीपा गीला चौका धूसर-नीला और नम होता है, जैसे ओस भरा भोर का आकाश।

Answer: काली सिल पर लाल केसर = अँधेरे आकाश में लाली; गीला लीपा चौका = ओस से नम धूसर-नीला आकाश।

Memory hook: रसोई की चीज़ें, आकाश के रंग।

Topics in this chapter

How the board asks शमशेर बहादुर सिंह – उषा

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5)कविता का एक अंश देकर उपमान का अर्थ, बिंब, अलंकार, कोष्ठक या विराम का प्रयोजन और एक कथन-कारण प्रश्न पूछा जाता है।हर उपमान को आकाश के रंग से मिलाकर पढ़ें: शंख = नीला-उजला, चौका = धूसर-नीला और नम, सिल/स्लेट = काले पर लाली, नील जल-गौर देह = पहली किरणें।
लगभग 60 शब्दों का प्रश्न (3 अंक)'उषा' को गाँव की सुबह का गतिशील शब्द-चित्र क्यों कहा गया है? कविता के बिंबों की विशेषता बताइए।तीन बिंदु लिखें: उपमान गाँव के हैं, दृश्य बदलते रहते हैं, अंत में सूर्योदय से जादू टूटता है; हर बिंदु के साथ एक पंक्ति का प्रमाण दें।
लगभग 40 शब्दों का प्रश्न (2 अंक)कोष्ठक का अर्थ, 'जादू टूटना' का आशय, किसी एक उपमान की सार्थकता।एक वाक्य में अर्थ, दूसरे में कविता से प्रमाण और प्रभाव।
शिल्प-सौंदर्यभाषा, अलंकार, छंद और बिंब पर प्रश्न।मुक्त छंद, खड़ी बोली, उपमा-उत्प्रेक्षा, दृश्य बिंब और नए उपमान—इन पाँच शब्दों का प्रयोग करें।

Tricks to remember शमशेर बहादुर सिंह – उषा

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • क्रम याद करें: 'शंख-चौका-सिल-स्लेट-जल-सूरज'

    नीला शंख → गीला चौका → केसर-धुली सिल → लाल चाक वाली स्लेट → नील जल में गौर देह → सूर्योदय। रंग: नीला → धूसर → लाल → सुनहरा।

    Use it when: उपमानों का क्रम और रंग-परिवर्तन वाले प्रश्नों में।

  • कोष्ठक = ताज़गी, बिंदु = ठहराव

    (अभी गीला पड़ा है) ताज़गी बताता है; 'और...' सूर्योदय से पहले का ठहराव।

    Use it when: नई कविता के शिल्प वाले प्रश्नों में।

  • शमशेर = शब्दों के चित्रकार

    बिंबधर्मी कवि; उनकी कविता को 'देखना' भी होता है।

    Use it when: कवि-परिचय और शिल्प के प्रश्नों में।

शमशेर बहादुर सिंह – उषा: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: काव्यांश 1: नीला शंख और गीला चौका

प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    भोर के नभ की तुलना किससे की गई है?
    (क) सफ़ेद बादल से
    (ख) राख से लीपे हुए चौके से
    (ग) सोने के थाल से
    (घ) नदी के किनारे से

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: कवि चौके के बारे में आगे कहते हैं—'(अभी गीला पड़ा है)'।) '(अभी गीला पड़ा है)' कोष्ठक से क्या भाव प्रकट होता है?
    (क) वर्षा हो रही है
    (ख) चौका गंदा है
    (ग) भोर के आकाश की नमी और ताज़गी
    (घ) सूर्य पूरा निकल आया है

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: इसके बाद कवि आकाश की तुलना केसर से धुली काली सिल से करते हैं।) 'बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो' में किस दृश्य का संकेत है?
    (क) अँधेरे आकाश में हल्की लालिमा फैलने का
    (ख) रसोई में मसाला पीसने का
    (ग) रात होने का
    (घ) बादलों के गरजने का

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    'प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे' में कौन-सा अलंकार है?
    (क) अनुप्रास
    (ख) उपमा
    (ग) श्लेष
    (घ) यमक

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): कवि ने भोर के आकाश के लिए गाँव के घरेलू उपमान चुने हैं।
    कारण (R): कवि आकाश की गति को धरती के जीवन की हलचल से जोड़ना चाहता है।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

Show the answersAnswers
  1. (ख) राख से लीपे हुए चौके से
  2. (ग) भोर के आकाश की नमी और ताज़गी
  3. (क) अँधेरे आकाश में हल्की लालिमा फैलने का
  4. (ख) उपमा ('जैसे' वाचक शब्द के साथ नभ की तुलना शंख से)
  5. (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

Extract 2: काव्यांश 2: स्लेट, नील जल और सूर्योदय

और...
जादू टूटता है इस उषा का अब
सूर्योदय हो रहा है।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: इससे पहले कवि भोर के आकाश की तुलना लाल खड़िया चाक मली हुई स्लेट और नीले जल में झिलमिलाती गोरी देह से करते हैं।) 'स्लेट पर लाल खड़िया चाक मल देना' किसका प्रतीक है?
    (क) बच्चों की शरारत का
    (ख) गहरे आकाश पर फैलती लालिमा का
    (ग) शाम के अँधेरे का
    (घ) बारिश के बाद के आकाश का

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: पिछले प्रश्न का संदर्भ देखें।) 'नील जल में ... गौर झिलमिल देह' का बिंब किस समय का है?
    (क) आधी रात का
    (ख) दोपहर का
    (ग) सूर्य की पहली किरणें दिखने का
    (घ) सूर्यास्त का

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'जादू टूटता है इस उषा का अब' से कवि का क्या आशय है?
    (क) उषा का सौंदर्य स्थायी है
    (ख) सूर्योदय होते ही उषा के रंगों का सम्मोहन समाप्त हो जाता है
    (ग) कवि जादूगर से मिलता है
    (घ) आकाश में बादल छा गए हैं

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    'और...' के बाद के बिंदुओं का प्रयोग क्या दर्शाता है?
    (क) कविता अधूरी रह गई है
    (ख) छपाई की भूल
    (ग) सूर्योदय से ठीक पहले का ठहराव और प्रतीक्षा
    (घ) कवि का क्रोध

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): काव्यांश में उषा का सौंदर्य क्षणिक बताया गया है।
    कारण (R): सूर्य निकलते ही आकाश के बदलते रंगों का खेल समाप्त हो जाता है।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

Show the answersAnswers
  1. (ख) गहरे आकाश पर फैलती लालिमा का
  2. (ग) सूर्य की पहली किरणें दिखने का
  3. (ख) सूर्योदय होते ही उषा के रंगों का सम्मोहन समाप्त हो जाता है
  4. (ग) सूर्योदय से ठीक पहले का ठहराव और प्रतीक्षा
  5. (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

शमशेर बहादुर सिंह – उषा: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: गतिशील शब्द-चित्र · 3 marks · Short answerHarder board level

'उषा' कविता को गाँव की सुबह का गतिशील शब्द-चित्र क्यों कहा गया है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. उपमान गाँव के घर से लिए गए हैं।
  2. दृश्य स्थिर नहीं, रंग बदलते रहते हैं।
  3. अंत में सूर्योदय के साथ दृश्य बदल जाता है।

Answer: कवि ने भोर के आकाश के लिए गाँव के घरेलू उपमान चुने हैं—राख से लीपा गीला चौका, केसर से धुली काली सिल और लाल खड़िया चाक मली स्लेट। आकाश का रंग पल-पल बदलता है: नीले शंख से धूसर, फिर लाल और अंत में सुनहरा। सूर्योदय होते ही यह जादू टूट जाता है। बदलते दृश्यों और गाँव के उपमानों के कारण इसे गतिशील शब्द-चित्र कहा गया है।

Example 2: कोष्ठक का प्रयोजन · 2 marks · Short answerHarder board level

'भोर का नभ / राख से लीपा हुआ चौका / (अभी गीला पड़ा है)' में कोष्ठक से कविता में क्या विशेष अर्थ पैदा हुआ है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कोष्ठक दृश्य में एक और परत जोड़ता है।
  2. गीलापन ओस और ताज़गी का संकेत है।

Answer: कोष्ठक में लिखा '(अभी गीला पड़ा है)' बताता है कि भोर का आकाश ओस से नम और ताज़ा है, जैसे अभी-अभी लीपा गया चौका। नई कविता में कोष्ठक इसी तरह दृश्य को सजीव बनाकर अतिरिक्त अर्थ देता है।

Example 3: जादू टूटना · 2 marks · Short answerBoard level

'जादू टूटता है इस उषा का अब' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. उषा का जादू = बदलते रंगों का सम्मोहन।
  2. सूर्योदय होते ही वह दृश्य समाप्त।

Answer: सूर्योदय से पहले आकाश में रंगों का जो पल-पल बदलता, मोहक खेल चल रहा था, वही उषा का जादू है। जैसे ही सूरज पूरा निकलता है, यह खेल समाप्त हो जाता है। कवि इसी को उषा का जादू टूटना कहता है।

Example 4: उपमान पहचानिए · 1 mark · MCQBoard level

निम्न में से कौन-सा उपमान 'उषा' कविता में नहीं आया है?
(क) शंख
(ख) सिल
(ग) स्लेट
(घ) दीपक

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कविता में शंख, चौका, सिल, स्लेट, खड़िया चाक, नील जल आते हैं।
  2. दीपक का उल्लेख नहीं है।

Answer: (घ) दीपक

Example 5: उपमानों की नवीनता · 3 marks · Short answerHOTS / competency

शमशेर ने सूर्योदय के लिए परंपरागत उपमानों (जैसे सोने का थाल, कमल) के स्थान पर चौका, सिल और स्लेट क्यों चुने? इससे कविता को क्या लाभ हुआ? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रयोगवादी-नई कविता नए उपमान खोजती है।
  2. ये उपमान आम जीवन से आते हैं, इसलिए दृश्य परिचित लगता है।
  3. आकाश और धरती का जीवन जुड़ जाता है।

Answer: प्रयोगवादी और नई कविता ने पुराने, घिसे-पिटे उपमानों की जगह जीवन से जुड़े नए उपमान अपनाए। चौका, सिल और स्लेट गाँव के हर घर की परिचित चीज़ें हैं, इसलिए पाठक दृश्य को तुरंत देख लेता है। इनसे भोर का आकाश धरती के घरेलू जीवन और सुबह की हलचल से जुड़ जाता है। इससे कविता ताज़ा, सजीव और अपनी-सी लगती है।

Example 6: अलंकार और बिंब · 2 marks · Short answerHarder board level

'नील जल में या किसी की / गौर झिलमिल देह / जैसे हिल रही हो।' पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य लिखिए। (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भाव: पहली किरणों की झिलमिल।
  2. शिल्प: उत्प्रेक्षा, रंग-बिंब, मुक्त छंद।

Answer: नीले आकाश में सूर्य की पहली सुनहरी किरणों को नीले जल में हिलती गोरी, झिलमिल देह के रूप में देखा गया है। 'जैसे हिल रही हो' में उत्प्रेक्षा है, नीले और गौर रंगों का दृश्य बिंब है और भाषा सरल खड़ी बोली है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

'उषा' कविता को गाँव की सुबह का गतिशील शब्द-चित्र क्यों कहा जाता है? (लगभग 60 शब्द) (3 marks)

StepMarks
गाँव के उपमान: गीला चौका, काली सिल, स्लेट-चाक (प्रमाण सहित)1
गतिशीलता: रंग पल-पल बदलते हैं—नीला, धूसर, लाल, सुनहरा1
अंत में सूर्योदय से उषा का जादू टूटना; निष्कर्ष1

'(अभी गीला पड़ा है)' कोष्ठक का प्रयोग कविता में क्या अर्थ जोड़ता है? (लगभग 40 शब्द) (2 marks)

StepMarks
भोर के आकाश की नमी/ओस और ताज़गी का संकेत1
नई कविता में कोष्ठक से अतिरिक्त अर्थ और दृश्य को सजीव बनाना1

Where students lose marks in शमशेर बहादुर सिंह – उषा

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: उपमानों को केवल गिनाना, आकाश से न जोड़ना

    प्रश्न उपमान की सार्थकता पूछता है, सूची नहीं।

    Wrong working

    कवि ने चौका, सिल और स्लेट के उपमान दिए हैं।

    Right working

    गीला लीपा चौका ओस से नम धूसर-नीले आकाश को, काली सिल पर केसर अँधेरे में लाली को दिखाता है।

    Do this: हर उपमान के साथ आकाश का रंग और भाव लिखें।

    Usually costs: 3 अंक के उत्तर में 1 अंक

  • Mistake: 'जादू टूटना' को नकारात्मक घटना समझना

    यहाँ जादू उषा के रंगों का सम्मोहन है; उसका टूटना सूर्योदय का स्वाभाविक संकेत है।

    Do this: लिखें: सूर्य निकलते ही उषा का रंगीन, बदलता दृश्य समाप्त हो जाता है।

    Usually costs: MCQ में 1 अंक, 2 अंक के उत्तर में आधा अंक

  • Mistake: उपमा और उत्प्रेक्षा में भ्रम

    'शंख जैसे' सीधी तुलना (उपमा) है; 'कि जैसे धुल गई हो' संभावना/कल्पना (उत्प्रेक्षा) है।

    Do this: क्रिया के साथ 'मानो/जैसे ... हो' आए तो उत्प्रेक्षा देखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: कविता को शहर की सुबह का चित्र बताना

    चौका, सिल, स्लेट गाँव के घर के उपमान हैं।

    Do this: 'गाँव की सुबह का गतिशील शब्द-चित्र' वाक्यांश याद रखें।

    Usually costs: आधा से 1 अंक

Practice questions on शमशेर बहादुर सिंह – उषा

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    'उषा' कविता किस काव्य-प्रवृत्ति की रचना है?
    (क) छायावाद
    (ख) प्रयोगवाद/नई कविता
    (ग) रीतिकाल
    (घ) भक्तिकाल

    Hint

    शमशेर नए बिंब और नए उपमानों के कवि हैं।

    Answer

    (ख) प्रयोगवाद/नई कविता

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    कविता में आकाश के रंग किस क्रम में बदलते हैं? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    शंख से सूर्योदय तक।

    Answer

    पहले आकाश शंख जैसा बहुत नीला है, फिर राख से लीपे गीले चौके जैसा धूसर-नीला होता है। फिर काली सिल पर केसर और स्लेट पर लाल चाक जैसी लाली आती है और अंत में नीले जल में गोरी झिलमिल देह जैसी सुनहरी आभा के बाद सूर्योदय होता है।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो'—इस पंक्ति में 'ज़रा से' शब्द का क्या महत्त्व है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    लाली कितनी है?

    Answer

    'ज़रा से' बताता है कि अभी आकाश में लाली बहुत कम है; अँधेरा अधिक है और केवल हल्की-सी लालिमा फैलनी शुरू हुई है। इससे सूर्योदय से पहले के उस शुरुआती क्षण की सूक्ष्मता और धीमे परिवर्तन का सटीक चित्र बनता है।

  4. Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHOTS / competency

    कथन (A): 'उषा' कविता में कवि केवल आकाश का मूक दर्शक है।
    कारण (R): कवि भोर के आकाश को गाँव के घरेलू जीवन से जोड़ता है।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

    Hint

    कवि केवल देखता है या रचता भी है?

    Answer

    (घ) कथन गलत है, कारण सही है: कवि आकाश को धरती के जीवन से जोड़ने वाला स्रष्टा है, केवल मूक दर्शक नहीं।

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level

    'उषा' कविता में प्रयुक्त किन्हीं दो उपमानों की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    उपमान + आकाश का रंग + भाव।

    Answer

    पहला उपमान 'राख से लीपा हुआ चौका' है: लीपा हुआ गीला चौका धूसर-नीला और नम होता है, जैसे ओस से भीगा भोर का आकाश; इसमें पवित्रता और ताज़गी भी है। दूसरा उपमान 'लाल खड़िया चाक मली स्लेट' है: काली स्लेट पर लाल चाक वैसी ही लगती है जैसे अँधेरे आकाश पर फैलती पहली लालिमा। दोनों उपमान आकाश को गाँव की सुबह से जोड़ते हैं।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerBoard level

    'उषा' कविता की भाषा और शिल्प की दो विशेषताएँ लिखिए। (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    छंद, भाषा, बिंब, विराम-चिह्न।

    Answer

    कविता मुक्त छंद में सरल खड़ी बोली में लिखी गई है और उसमें गाँव के नए उपमानों से बने सजीव दृश्य बिंब हैं। कोष्ठक और 'और...' जैसे विराम-चिह्न भी अर्थ देते हैं, जो नई कविता की पहचान है।

  7. Q7 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    यदि आज के शहर की सुबह पर यही कविता लिखी जाए तो चौका, सिल और स्लेट के स्थान पर कौन-से उपमान आ सकते हैं? दो उदाहरण देकर बताइए कि इससे कविता का प्रभाव कैसे बदलेगा। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    उपमान बदलें, पर रंग और गति बनी रहे।

    Answer

    शहर की सुबह के लिए 'धुएँ से धूसर काँच की खिड़की' धूसर-नीले आकाश का और 'काली सड़क पर लाल सिग्नल की चमक' पहली लाली का उपमान बन सकते हैं। इनसे आकाश का रंग-परिवर्तन तो दिखेगा, पर कविता का भाव घरेलू आत्मीयता से हटकर शहरी भागदौड़ और कृत्रिमता की ओर चला जाएगा। इससे पता चलता है कि उपमान ही कविता के परिवेश को रचते हैं।

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Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.भोर का नभ किसके जैसा बताया गया है?Show answer

    राख से लीपे हुए चौके जैसा, जो अभी गीला पड़ा है।

  2. 2.काली सिल किससे धुली हुई लगती है?Show answer

    ज़रा-से लाल केसर से।

  3. 3.स्लेट पर क्या मल दिया गया है?Show answer

    लाल खड़िया चाक।

  4. 4.नील जल में क्या हिलता हुआ दिखता है?Show answer

    किसी की गौर, झिलमिल देह।

  5. 5.कविता का अंतिम दृश्य क्या है?Show answer

    उषा का जादू टूटता है और सूर्योदय हो रहा है।

  6. 6.'प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे' में अलंकार?Show answer

    उपमा अलंकार।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • कवि: शमशेर बहादुर सिंह (1911-1993), बिंबधर्मी कवि; आरोह भाग 2, काव्य खंड।
  • विषय: सूर्योदय से ठीक पहले के आकाश का गतिशील शब्द-चित्र।
  • उपमान क्रम: नीला शंख → राख से लीपा गीला चौका → केसर से धुली काली सिल → लाल खड़िया चाक मली स्लेट → नील जल में गौर झिलमिल देह → सूर्योदय।
  • उपमान गाँव के घर के हैं, इसलिए 'गाँव की सुबह' का चित्र।
  • कोष्ठक '(अभी गीला पड़ा है)' = नमी और ताज़गी; 'और...' = ठहराव।
  • 'जादू टूटता है' = सूर्योदय के साथ रंगों का सम्मोहन समाप्त; सौंदर्य क्षणिक।
  • शिल्प: मुक्त छंद, खड़ी बोली, उपमा-उत्प्रेक्षा, दृश्य और रंग बिंब।

शमशेर बहादुर सिंह – उषा: frequently asked questions

'उषा' कविता का केंद्रीय भाव क्या है?

कविता सूर्योदय से ठीक पहले के आकाश के पल-पल बदलते रंगों का शब्द-चित्र है, जिसे गाँव की सुबह के घरेलू उपमानों से जोड़ा गया है। सूर्योदय होते ही यह जादू टूट जाता है।

'उषा' कविता को बिंबधर्मी कविता क्यों कहा जाता है?

इसमें हर पंक्ति एक दृश्य बनाती है: नीला शंख, गीला चौका, केसर से धुली सिल, लाल चाक मली स्लेट, नील जल में गौर देह। पाठक इसे पढ़ते हुए देखता है, इसलिए यह बिंबधर्मी है।

बोर्ड परीक्षा में 'उषा' से कैसे प्रश्न आते हैं?

पाठ्यक्रम के अनुसार काव्य खंड से पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), लगभग 60 शब्दों के 3 अंक वाले और लगभग 40 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न पूछे जाते हैं; 'उषा' इनमें से किसी में भी आ सकती है।

शमशेर बहादुर सिंह कौन थे?

शमशेर बहादुर सिंह (1911-1993) प्रयोगवादी और नई कविता के प्रमुख बिंबधर्मी कवि थे। उनकी रचनाओं में 'कुछ कविताएँ', 'चुका भी हूँ नहीं मैं' और 'काल तुझसे होड़ है मेरी' शामिल हैं; उन्हें साहित्य अकादेमी सम्मान मिला।

Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 2 (Reprint 2026-27), शमशेर बहादुर सिंह – उषा