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HindiCBSE Class 12 · Chapter 2

आनंद यादव – जूझ: Class 12 वितान सारांश, चरित्र और प्रश्न

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

'जूझ' मराठी कथाकार आनंद यादव के आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश है। किसान पिता ने लेखक की पढ़ाई छुड़वाकर उसे खेत में लगा दिया था; माँ और दत्ता जी राव देसाई की मदद से वह फिर पाठशाला पहुँचता है। वहाँ अपमान झेलकर भी वह मेहनत करता है और सौंदलगेकर मास्टर से प्रेरित होकर कविता रचने लगता है।

What आनंद यादव – जूझ is about

'जूझ' वितान भाग 2 का दूसरा पाठ है। यह मराठी के कथाकार आनंद यादव के बहुचर्चित आत्मकथात्मक उपन्यास 'जूझ' का एक अंश है, जिसका हिंदी अनुवाद केशव प्रथम वीर ने किया है। 'जूझ' का अर्थ है संघर्ष; पूरा पाठ एक किसान परिवार के बच्चे के पढ़ने के अधिकार के लिए संघर्ष की कहानी है।

पाठ 'मैं' शैली में है: लेखक अपने बचपन (पाँचवीं कक्षा) की घटनाएँ याद करता है। इसमें ग्रामीण महाराष्ट्र का किसान जीवन, कोल्हू, खेतों में पानी लगाना, ढोर चराना और गाँव की पाठशाला सजीव रूप में दिखते हैं।

बोर्ड परीक्षा (खंड ग) में वितान से 3 में से 2 प्रश्न, 5-5 अंक के आते हैं। पाठ्यक्रम में लगभग 60 शब्द लिखा है, पर 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्नपत्र में 'लगभग 100 शब्दों में' उत्तर माँगा गया है, इसलिए यहाँ के मॉडल उत्तर लगभग 100 शब्दों के हैं। शीर्षक का औचित्य, कविता रचने का आत्मविश्वास, सौंदलगेकर मास्टर का अध्यापन, अकेलेपन के प्रति धारणा में बदलाव और दादा बनाम दत्ता जी राव का रवैया सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।

Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27

आनंद यादव – जूझ: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

लेखक का मन पाठशाला जाने के लिए तड़पता है, पर पिता ('दादा') के डर से वह कुछ कह नहीं पाता। उसे विश्वास है कि खेती से कुछ हाथ नहीं लगेगा, पढ़ने से नौकरी या कोई धंधा मिल सकेगा। दादा ने उसकी पढ़ाई छुड़वाकर उसे खेतों में लगा दिया है, जबकि स्वयं दिन भर गाँव में घूमता है। दीवाली के बाद ईख पेरने का कोल्हू सबसे पहले शुरू करने की दादा की आदत है, ताकि गुड़ का अच्छा भाव मिले।

जनवरी में खेती का काम कम होने पर लेखक माँ से बात करता है। माँ, जो उसे सातवीं तक पढ़ाना चाहती है, उसके साथ गाँव के प्रतिष्ठित दत्ता जी राव देसाई के पास जाती है और बताती है कि दादा खेती में हाथ नहीं लगाता और अपनी मस्ती के लिए बेटे को खेत में जोत रखा है। दोनों देसाई से यह न बताने का अनुरोध करते हैं कि वे शिकायत करने आए थे। रात को दत्ता जी राव दादा को बुलाकर खूब फटकारते हैं और लेखक से कहते हैं कि वह कल से पाठशाला जाए; अगर दादा न भेजे तो वे स्वयं पढ़ाएँगे। दादा मन मारकर मान जाता है, पर शर्त रखता है कि सुबह ग्यारह बजे तक खेत में पानी लगाना होगा, छुट्टी के बाद ढोर चराने होंगे और काम ज़्यादा हुआ तो पाठशाला से गैरहाज़िर रहना होगा।

पाँचवीं में दोबारा बैठने पर कक्षा में सब अजनबी और छोटे बच्चे हैं। शरारती चह्वाण का लड़का उसका गमछा छीनकर मास्टर की नकल करता है और धोती खींचता है; लेखक को लगता है कि उसकी अपनी पाठशाला उसे घायल कर रही है। फिर भी वह अगले दिन जाता है, माँ से नई टोपी और कपड़े मँगवा लेता है।

गणित पढ़ाने वाले मंत्री मास्टर के अनुशासन से ऊधम बंद होता है। होशियार वसंत पाटील कक्षा का मॉनीटर है; उसकी देखादेखी लेखक भी मन लगाकर पढ़ता है, गणित समझने लगता है और दोनों मिलकर लड़कों के सवाल जाँचने लगते हैं। मास्टर उसे 'आनंदा' कहकर पुकारते हैं, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।

मराठी के अध्यापक न.वा. सौंदलगेकर कविता गाकर और अभिनय करके पढ़ाते हैं, कवियों के संस्मरण सुनाते हैं और स्वयं भी कविता लिखते हैं। लेखक खेत में पानी लगाते और ढोर चराते हुए वे कविताएँ ऊँची आवाज़ में गाता और अभिनय करता है; अब उसे अकेलापन अच्छा लगने लगता है। वह एक कविता अपनी चाल में गाता है तो मास्टर उसे बड़ी कक्षाओं और समारोह में गवाते हैं। मास्टर को कवि के रूप में देखकर उसे विश्वास होता है कि कवि भी साधारण मनुष्य है और वह भी कविता लिख सकता है। वह भैंस की पीठ और पत्थर पर तुकबंदी लिखने लगता है, मास्टर को दिखाता है, और उनसे छंद, अलंकार, शुद्ध लेखन सीखता है। उसकी मराठी सुधरती है और उसे शब्दों का नशा चढ़ने लगता है।

Themes and message

शिक्षा के लिए संघर्ष

पिता के विरोध, खेत के काम और कक्षा के अपमान के बावजूद लेखक हार नहीं मानता। 'जूझ' (संघर्ष) शीर्षक उसकी इसी जुझारू प्रवृत्ति को दिखाता है।

From the text: "उस चक्की की अपेक्षा मास्टर की छड़ी की मार अच्छी लगती थी।"

एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव

सौंदलगेकर मास्टर की रसपूर्ण शिक्षण-शैली और अपनापन लेखक के भीतर छिपी काव्य-प्रतिभा को जगाते हैं; मंत्री मास्टर का अनुशासन और 'आनंदा' कहकर पुकारना आत्मविश्वास देते हैं।

From the text: "मुझे लगा कि मेरे कुछ नए पंख निकल आए हैं।"

ग्रामीण किसान जीवन और पितृसत्ता

पिता का निरंकुश व्यवहार, माँ की विवशता, बच्चों को खेती में जोतना और शिक्षा को व्यर्थ मानना गाँव के कठोर यथार्थ को दिखाते हैं।

From the text: दादा का ताना: "बालिस्टर नहीं होनेवाला है तू?"

आत्मविश्वास और सृजन

कवि भी साधारण मनुष्य है, यह जानकर लेखक में भी कविता रचने का साहस आता है; अपने आसपास के दृश्यों पर वह तुकबंदी करने लगता है।

From the text: "शब्दों का नशा चढ़ने लगा"

Characters

लेखक (आनंदा)

कथा-नायक और वाचक; पढ़ने के लिए संघर्ष करने वाला किसान का बेटा।

  • पढ़ाई के प्रति तड़प और दूरदर्शिता: खेती से भविष्य नहीं, यह समझता है
  • जुझारू और धैर्यवान: अपमान के बाद भी पाठशाला नहीं छोड़ता
  • चतुर: माँ के साथ दत्ता जी राव से दबाव डलवाने की योजना
  • मेहनती और अनुकरणशील: वसंत पाटील से सीखता है
  • कवि-हृदय और रचनाशील

खेत का काम निभाते हुए पढ़ाई जारी रखता है और भैंस की पीठ पर कविता लिखता है।

दादा (लेखक के पिता, रतनाप्पा)

किसान पिता; पढ़ाई के विरोधी।

  • स्वार्थी और आलसी: खुद गाँव भर घूमता है, बच्चों को खेत में जोतता है
  • क्रोधी और निरंकुश: परिवार उससे डरता है
  • दिखावटी सम्मान-प्रिय: देसाई का बुलावा उसके लिए सम्मान है
  • व्यावहारिक: कोल्हू जल्दी चलाकर भाव ज़्यादा लेना

दत्ता जी राव के सामने बेटे पर बुरी आदतों का आरोप लगाता है, पर फिर मन मारकर पढ़ने भेजता है।

माँ

लेखक की सहायक।

  • बेटे की भावना समझने वाली
  • पति के आगे विवश
  • समझदार: दत्ता जी राव तक बात पहुँचाने में साथ देती है

उसके मन में बेटे को सातवीं तक पढ़ाने की इच्छा थी, पर दादा के आगे उसका बस नहीं चलता था।

दत्ता जी राव देसाई

गाँव के प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिनकी बात दादा टाल नहीं सकता।

  • शिक्षा के समर्थक
  • न्यायप्रिय और प्रभावशाली
  • दयालु: स्वयं पढ़ाने का प्रस्ताव

दादा के हर तर्क को काटकर लेखक को पाठशाला भेजने का निर्णय करवाते हैं।

न.वा. सौंदलगेकर मास्टर

मराठी अध्यापक और कवि; लेखक के प्रेरक।

  • रसिक और सुरीले: कविता गाकर, अभिनय से पढ़ाते हैं
  • प्रोत्साहन देने वाले
  • स्नेही और ज्ञानी

लेखक की कविताएँ देखकर शाबाशी देते हैं और छंद, अलंकार, शुद्ध लेखन सिखाते हैं।

How it is written

DeviceExampleEffect
आत्मकथात्मक ('मैं') शैली"पाठशाला जाने के लिए मन तड़पता था।"पाठक लेखक के भय, अपमान और खुशी को सीधे अनुभव करता है।
उपमाखिलौने के कौए के बच्चे पर चोंच मारते कौओं जैसा कक्षा में लेखक का हाल; दादा का 'बरहेला सूअर की तरह' गुर्रानाभावनाओं और व्यक्तित्व का सजीव चित्र।
ग्रामीण-मराठी शब्द'दादा', 'छोरा', 'जीमने', 'कंडे', 'ढोर'महाराष्ट्र के ग्रामीण परिवेश की स्थानीयता।
रूपक'खेती के काम की चक्की', 'नए पंख निकल आए हैं'खेत के कठोर श्रम और कविता से मिली उड़ान का भाव।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • उस चक्की की अपेक्षा मास्टर की छड़ी की मार अच्छी लगती थी।

    लेखक: पाठशाला फिर शुरू होने पर

    खेती के कठोर श्रम की तुलना में पढ़ाई (छड़ी की मार के बावजूद) सुखद; पढ़ने की तड़प।

  • मेरी ही पाठशाला मुझे चोंच मार-मारकर घायल कर रही थी।

    लेखक: पहले दिन चह्वाण के लड़के द्वारा गमछा और धोती खींचे जाने पर

    अपनी ही पाठशाला में परायापन और अपमान; फिर भी लेखक हार नहीं मानता।

  • बालिस्टर नहीं होनेवाला है तू?

    दादा: पढ़ने की अनुमति देते समय ताना

    शिक्षा के प्रति पिता का तिरस्कार।

  • मुझे लगा कि मेरे कुछ नए पंख निकल आए हैं।

    लेखक: मास्टर द्वारा बड़ी कक्षाओं और समारोह में उसकी कविता गवाए जाने पर

    आत्मविश्वास और नई उड़ान का अनुभव।

  • कवि भी अपने जैसा ही एक हाड़-माँस का; क्रोध-लोभ का मनुष्य ही होता है।

    लेखक: सौंदलगेकर मास्टर को कवि के रूप में देखकर

    कविता रचने का आत्मविश्वास इसी बोध से जागा।

आनंद यादव – जूझ in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

पढ़ाई छुड़वाकर काम पर लगाना

मान लीजिए आपके गाँव में एक तेरह साल की लड़की को उसके पिता ने स्कूल से निकालकर खेत और घर के काम में लगा दिया है, जबकि वह आगे पढ़ना चाहती है।

'जूझ' के आधार पर उसकी मदद कैसे की जा सकती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखक ने भी माँ की मदद से दत्ता जी राव जैसे प्रभावशाली व्यक्ति से पिता को समझवाया।
  2. आज यह काम शिक्षक, पंचायत या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कर सकते हैं; शिक्षा का अधिकार कानून भी 14 वर्ष तक पढ़ाई अनिवार्य करता है।

Answer: उस लड़की के लिए किसी सम्मानित व्यक्ति या शिक्षक से पिता को समझाना चाहिए और काम के साथ पढ़ाई का संतुलन सुझाना चाहिए, जैसे लेखक ने सुबह-शाम खेत और दिन में पाठशाला का रास्ता अपनाया।

Memory hook: माँ + दत्ता जी राव = पाठशाला का रास्ता।

नई कक्षा में अपमान

कल्पना कीजिए कि एक विद्यार्थी को एक वर्ष पीछे होने के कारण छोटे बच्चों की कक्षा में बैठना पड़ता है और कुछ बच्चे उसका मज़ाक उड़ाते हैं।

लेखक के अनुभव से उसे क्या सीख मिल सकती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखक का भी गमछा और धोती खींची गई; एक बार उसने पाठशाला छोड़ने की सोची।
  2. पर उसने अपना ध्यान पढ़ाई पर लगाया, वसंत पाटील से दोस्ती की और सम्मान अर्जित किया।

Answer: मज़ाक से हारकर पढ़ाई छोड़ना समाधान नहीं; लेखक की तरह मेहनत करके और अच्छे साथियों से दोस्ती करके कक्षा में अपनी जगह बनाई जा सकती है।

Memory hook: चोंच मारी, फिर भी डटा रहा।

प्रेरक शिक्षक

मान लीजिए आपकी हिंदी शिक्षिका कविताएँ गाकर, अभिनय करके पढ़ाती हैं और आपको अपनी कविता लिखने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

सौंदलगेकर मास्टर से उनकी तुलना कीजिए और बताइए कि इसका आप पर क्या असर हो सकता है।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सौंदलगेकर मास्टर गाकर, अभिनय से पढ़ाते और कवियों के संस्मरण सुनाते थे।
  2. इससे लेखक में कविता के प्रति रुचि, आत्मविश्वास और भाषा के प्रति सजगता आई।

Answer: ऐसी शिक्षिका सौंदलगेकर मास्टर जैसी हैं; उनके प्रोत्साहन से हम भी अपने आसपास के दृश्यों पर लिखना, शुद्ध भाषा का ध्यान रखना और साहित्य से प्रेम करना सीख सकते हैं।

Memory hook: अच्छा शिक्षक पंख देता है।

Topics in this chapter

How the board asks आनंद यादव – जूझ

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
शीर्षक / केंद्रीय विशेषता (5 अंक)'जूझ' शीर्षक का औचित्य; क्या यह कथा-नायक की केंद्रीय चारित्रिक विशेषता उजागर करता है?जूझ = संघर्ष; पिता से, परिस्थिति से, कक्षा के अपमान से, अपने भीतर से; हर एक का प्रमाण; निष्कर्ष।
शिक्षक का प्रभाव (5 अंक)सौंदलगेकर मास्टर के अध्यापन की विशेषताएँ; कविता रचने का आत्मविश्वास कैसे जागा।अध्यापन के तीन-चार गुण, फिर लेखक पर उनका असर (अकेलापन, कविता, भाषा सुधार)।
पात्रों का रवैया / तुलना (5 अंक)पढ़ाई के बारे में दादा बनाम दत्ता जी राव; माँ की भूमिका; झूठ का सहारा।दोनों पक्ष लिखें, फिर अपना तर्कपूर्ण मत; आज के संदर्भ से जोड़ें।
धारणा में बदलाव (5 अंक)कविता से लगाव से पहले और बाद में अकेलेपन के प्रति लेखक की धारणा।पहले: अकेलापन खटकता था; बाद में: अकेले में गाना, अभिनय, नाचना; कारण: कविता का साथ।

Tricks to remember आनंद यादव – जूझ

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • पात्र और भूमिका

    दादा = रोक; माँ = साथ; दत्ता जी राव देसाई = दबाव; चह्वाण का लड़का = अपमान; मंत्री मास्टर = अनुशासन (गणित); वसंत पाटील = प्रेरणा (मॉनीटर); सौंदलगेकर मास्टर = कविता (मराठी)।

    Use it when: पात्र-आधारित प्रश्नों में।

  • दादा की शर्तें

    सुबह खेत → ग्यारह बजे तक पानी → सीधे पाठशाला → छुट्टी के बाद घंटा भर ढोर चराना → काम ज़्यादा तो गैरहाज़िर।

    Use it when: पढ़ाई फिर शुरू होने वाले प्रश्न में।

  • जूझ के चार मोर्चे

    पिता से, खेत की चक्की से, कक्षा के अपमान से, अपने अकेलेपन से।

    Use it when: शीर्षक के औचित्य वाले प्रश्न में।

आनंद यादव – जूझ: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: शीर्षक का औचित्य · 5 marks · Long answerBoard level

'जूझ' शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए स्पष्ट कीजिए कि क्या यह शीर्षक कथा-नायक की किसी केंद्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता है। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. जूझ = संघर्ष।
  2. संघर्ष के मोर्चे।
  3. केंद्रीय विशेषता: जुझारूपन।

Answer: 'जूझ' का अर्थ है संघर्ष करना, और पूरा पाठ लेखक के संघर्ष की कहानी है। उसे पढ़ाई के लिए पिता के विरोध से जूझना पड़ा, जिसके लिए उसने माँ के साथ दत्ता जी राव की मदद ली। पाठशाला लौटकर उसे सुबह-शाम खेत की कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई करनी पड़ी। कक्षा में छोटे बच्चों के बीच अपमान झेला, फिर भी पाठशाला नहीं छोड़ी और मेहनत से गणित तथा कविता में आगे बढ़ा। इस प्रकार यह शीर्षक लेखक की केंद्रीय विशेषता, उसकी जुझारू और कभी हार न मानने वाली प्रवृत्ति, को पूरी तरह उजागर करता है; इसलिए यह सर्वथा उचित है।

Example 2: कविता रचने का आत्मविश्वास · 5 marks · Long answerHarder board level

स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास लेखक के मन में कैसे पैदा हुआ? (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मास्टर की शिक्षण-शैली।
  2. कवि भी मनुष्य है।
  3. प्रोत्साहन और अभ्यास।

Answer: सौंदलगेकर मास्टर कविता गाकर, अभिनय करके पढ़ाते और यशवंत, बोरकर, ताँबे जैसे कवियों से अपनी मुलाकातों के संस्मरण सुनाते थे। इससे कवि लेखक को 'आदमी' ही लगने लगे। मास्टर स्वयं कवि थे; उन्होंने अपने दरवाज़े की मालती की बेल पर कविता लिखी थी, जिसे लेखक ने देखा था। तब उसे लगा कि कवि भी हाड़-माँस का साधारण मनुष्य होता है और उसके अपने गाँव-खेत में भी कविता के लायक दृश्य हैं। अपनी चाल में गाई कविता की प्रशंसा, उसकी तुकबंदियों पर मास्टर की शाबाशी और छंद-अलंकार पर उनके मार्गदर्शन ने यह आत्मविश्वास पक्का कर दिया।

Example 3: अकेलेपन के प्रति धारणा · 5 marks · Long answerHarder board level

कविता के प्रति लगाव से पहले और उसके बाद अकेलेपन के प्रति लेखक की धारणा में क्या बदलाव आया? (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहले: अकेलापन खटकता था।
  2. बाद में: अकेलापन प्रिय।
  3. कारण।

Answer: कविता से लगाव से पहले ढोर चराते और खेत में पानी लगाते हुए लेखक को अकेलापन बहुत खटकता था; उसे लगता था कि बात करने, गपशप और हँसी-मज़ाक के लिए हमेशा कोई साथ होना चाहिए। कविता से जुड़ने के बाद यह धारणा उलट गई। अब वह अकेले में मास्टर की तरह ऊँची आवाज़ में कविताएँ गाता, अभिनय करता और कभी नाचने भी लगता। उसे लगने लगा कि जितना अकेला रहूँ उतना अच्छा, क्योंकि तभी खुलकर गाया और अभिनय किया जा सकता है। कविता उसका साथी बन गई और अकेलापन सृजन का अवसर।

Example 4: दादा बनाम दत्ता जी राव · 5 marks · Long answerHOTS / competency

पढ़ाई-लिखाई के संबंध में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था या लेखक के पिता का? तर्क सहित उत्तर दीजिए। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पिता का तर्क और उसकी कमज़ोरी।
  2. लेखक और देसाई का तर्क।
  3. अपना मत।

Answer: मेरे विचार में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था। पिता खेती के लिए बेटे की ज़रूरत बताते थे, पर असल में वे स्वयं खेत में काम नहीं करते थे और अपनी मस्ती के लिए बेटे का भविष्य दाँव पर लगा रहे थे। लेखक समझता था कि खेती से कुछ हाथ नहीं लगेगा और पढ़ाई से नौकरी या धंधे का रास्ता खुलेगा। दत्ता जी राव ने भी कहा कि एक-दो बार सिनेमा जाने से पढ़ाई बंद नहीं करनी चाहिए। आगे चलकर लेखक का प्रसिद्ध साहित्यकार बनना इसी निर्णय को सही सिद्ध करता है। शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है।

Example 5: झूठ का सहारा · 5 marks · Long answerHOTS / competency

दत्ता जी राव से पिता पर दबाव डलवाने के लिए लेखक और उसकी माँ को एक झूठ का सहारा लेना पड़ा। यदि झूठ का सहारा न लेना पड़ता तो आगे का घटनाक्रम क्या होता? अनुमान लगाइए। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. झूठ क्या था।
  2. सच बताने पर दादा की प्रतिक्रिया।
  3. लेखक के भविष्य पर असर।

Answer: माँ ने दादा से कहा कि वह साग-भाजी देने गई थी और देसाई ने स्वयं उसे बुलाया है, और देसाई से भी यह न बताने की विनती की कि शिकायत उन्होंने की है। यदि यह छिपाया न जाता तो दादा को पता चल जाता कि माँ-बेटे ने उसकी शिकायत की है। क्रोधी दादा शायद दोनों को पीटता, देसाई के सामने मान भी लेता तो घर में बदला लेता, बेटे पर और कड़ी शर्तें लगाता या फिर से पढ़ाई बंद करा देता। लेखक का साल और शायद पूरा भविष्य नष्ट हो जाता। इसलिए यह झूठ मजबूरी में, एक बड़े भले के लिए बोला गया था।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास लेखक के मन में कैसे पैदा हुआ? (लगभग 100 शब्द) (5 marks)

StepMarks
सौंदलगेकर मास्टर का गाकर, अभिनय से कविता पढ़ाना और कवियों के संस्मरण1
मास्टर को स्वयं कवि देखकर यह बोध कि कवि भी साधारण मनुष्य है; मालती की बेल वाली कविता2
अपनी चाल में गाई कविता की प्रशंसा, तुकबंदी, मास्टर का मार्गदर्शन; भाषा और प्रस्तुति2

Where students lose marks in आनंद यादव – जूझ

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: 'दादा' को लेखक का दादाजी (पिता के पिता) समझना

    पाठ में 'दादा' लेखक के पिता के लिए प्रयुक्त है (मराठी परिवेश में पिता का संबोधन)।

    Do this: उत्तर में 'लेखक के पिता (दादा)' लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: सौंदलगेकर मास्टर को गणित का और मंत्री मास्टर को मराठी का अध्यापक लिखना

    मंत्री मास्टर गणित पढ़ाते थे; सौंदलगेकर मास्टर मराठी और कविता।

    Do this: 'मंत्री-गणित, सौंदलगेकर-मराठी' जोड़ी याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: माँ और लेखक के झूठ को केवल 'गलत' कहकर छोड़ देना

    प्रश्न प्रायः परिस्थिति का विश्लेषण माँगता है: दादा के डर और जड़ता के कारण यह झूठ मजबूरी था, जिससे एक बच्चे का भविष्य बचा।

    Do this: मजबूरी, उद्देश्य और परिणाम तीनों लिखें; अपना संतुलित मत दें।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: पाठ को हिंदी की मूल रचना बताना

    यह मराठी उपन्यास 'जूझ' का अंश है, जिसका हिंदी अनुवाद केशव प्रथम वीर ने किया।

    Do this: लेखक आनंद यादव (मराठी), अनुवादक केशव प्रथम वीर लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

Practice questions on आनंद यादव – जूझ

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 5 marks · Long answerBoard level

    सौंदलगेकर मास्टर के अध्यापन की उन विशेषताओं को रेखांकित कीजिए जिन्होंने लेखक के मन में कविता के प्रति रुचि जगाई। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    गाना, अभिनय, संस्मरण, स्वयं कवि, अंग्रेज़ी कविताएँ।

    Answer

    सौंदलगेकर मास्टर पढ़ाते समय स्वयं कविता में रम जाते थे। उनका गला सुरीला था और उन्हें छंदों की लय, गति और ताल का अच्छा ज्ञान था। वे पहले कविता गाकर सुनाते, फिर बैठे-बैठे अभिनय से उसका भाव समझाते और उसी भाव की दूसरे कवि की कविता भी सुनाते। उन्हें पुरानी-नई मराठी और अनेक अंग्रेज़ी कविताएँ कंठस्थ थीं। वे यशवंत, बोरकर, ताँबे जैसे कवियों से अपनी मुलाकातों के संस्मरण सुनाते और अपनी कविताएँ भी पढ़ते थे। इन विशेषताओं के कारण लेखक कविता का रस पीने लगा और स्वयं कविता लिखने लगा।

  2. Q2 · 5 marks · Long answerBoard level

    पाठशाला में पहले दिन लेखक के साथ क्या हुआ और उसने इस स्थिति का सामना कैसे किया? (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    चह्वाण का लड़का, गमछा, धोती, रणनवरे मास्टर, अगला दिन।

    Answer

    पाँचवीं में दोबारा बैठने पर कक्षा में गली के दो लड़कों के अलावा सब अपरिचित और उम्र में छोटे थे, और लेखक की मटमैली धोती-गमछा उसे अजनबी बना रहे थे। शरारती चह्वाण के लड़के ने उसका गमछा छीनकर सिर पर लपेटा और मास्टर की नकल करते हुए टेबल पर रख दिया; बीच की छुट्टी में धोती की काछ खींचने की कोशिश की। लेखक को लगा कि पाठशाला उसे घायल कर रही है और उसने पाठशाला छोड़ने की भी सोची। पर अगले दिन वह उमंग से फिर गया, माँ से नई टोपी और कपड़े मँगवाए और धीरे-धीरे लड़कों से परिचय बढ़ाया।

  3. Q3 · 5 marks · Long answerHarder board level

    वसंत पाटील और मंत्री मास्टर का लेखक के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा? (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    अनुशासन, होड़, दोस्ती, 'आनंदा'।

    Answer

    मंत्री मास्टर गणित पढ़ाते थे; उनके घूँसे की दहशत से कक्षा में ऊधम बंद हुआ और सब लड़के घर से पढ़कर आने लगे। गलत सवाल वे पास बुलाकर समझाते थे। वसंत पाटील दुबला-पतला पर होशियार मॉनीटर था। पहले लेखक को लगा कि मॉनीटरी उसे मिलनी चाहिए, पर फिर उसने वसंत की तरह पढ़ना शुरू किया: किताबों पर कवर चढ़ाए, बस्ता व्यवस्थित रखा, गणित पर ध्यान दिया। दोनों मिलकर सवाल जाँचने लगे और दोस्त बन गए। मास्टर उसे 'आनंदा' कहने लगे। इस अपनेपन और स्वस्थ होड़ से उसका पाठशाला में विश्वास बढ़ा।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level

    लेखक के पिता (दादा) के चरित्र की विशेषताएँ पाठ के आधार पर लिखिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    आलसी, स्वार्थी, क्रोधी, व्यावहारिक, सम्मान-प्रिय।

    Answer

    दादा स्वार्थी और आलसी है: स्वयं दिन भर गाँव में घूमता है और पत्नी-बच्चों को खेती में जोत रखा है। वह क्रोधी और निरंकुश है; माँ और बेटा उससे इतना डरते हैं कि सीधे बात नहीं कर पाते, और माँ के मन में उसकी छवि 'बरहेला सूअर' जैसी है। वह शिक्षा को व्यर्थ मानता है और बेटे को ताना देता है कि वह बैरिस्टर नहीं बनने वाला। फिर भी वह खेती में व्यावहारिक है: गुड़ का अच्छा भाव पाने के लिए कोल्हू सबसे पहले चलाता है। वह समाज में प्रतिष्ठा चाहता है, इसलिए देसाई का बुलावा उसके लिए सम्मान है और उनके सामने झुक जाता है।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    'जूझ' पाठ में माँ की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। आज की माताओं से उसकी तुलना कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    विवशता, समझदारी, साहस; आज की स्थिति।

    Answer

    माँ बेटे की पढ़ाई की तड़प समझती है और उसे सातवीं तक पढ़ाना चाहती है, पर पति के आगे विवश है। फिर भी वह बेटे का मन रखने के लिए दत्ता जी राव के पास जाती है, समझदारी से बात रखती है और पति से बात छिपाने के लिए साग-भाजी देने का बहाना बनाती है। यह उसकी सूझ-बूझ और चुपचाप किए गए साहस को दिखाता है। आज की माताएँ अधिक शिक्षित और आत्मनिर्भर हैं; वे बच्चों की पढ़ाई के लिए खुलकर निर्णय ले सकती हैं। फिर भी कई घरों में माँ आज भी ऐसी ही विवशता झेलती है, इसलिए यह पात्र आज भी प्रासंगिक है।

  6. Q6 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    'जूझ' पाठ से आज के विद्यार्थियों को क्या प्रेरणा मिलती है? (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    लक्ष्य, धैर्य, अच्छी संगति, शिक्षक, रचनात्मकता।

    Answer

    यह पाठ सिखाता है कि यदि पढ़ने की सच्ची लगन हो तो कोई बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। लेखक ने पिता के विरोध, खेत के श्रम और कक्षा के अपमान के बावजूद पढ़ाई नहीं छोड़ी। उसने वसंत पाटील जैसे होशियार साथी से सीखा, यानी अच्छी संगति और स्वस्थ होड़ से आगे बढ़ा जा सकता है। सौंदलगेकर मास्टर के प्रसंग से पता चलता है कि अच्छे शिक्षक की बात ध्यान से सुनकर हम अपनी छिपी प्रतिभा पहचान सकते हैं। सबसे बड़ी प्रेरणा यह है कि अपने आसपास के साधारण जीवन से भी सृजन किया जा सकता है, बस आत्मविश्वास और अभ्यास चाहिए।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.दादा कोल्हू सबसे पहले क्यों चलाता था?Show answer

    ताकि बाज़ार में गुड़ की बहुतायत होने से पहले अच्छा भाव मिले।

  2. 2.लेखक किस कक्षा में दोबारा बैठा?Show answer

    पाँचवीं में।

  3. 3.लेखक का गमछा किसने छीना?Show answer

    कक्षा के शरारती चह्वाण के लड़के ने।

  4. 4.कक्षा का मॉनीटर कौन था?Show answer

    वसंत पाटील।

  5. 5.मास्टर लेखक को किस नाम से पुकारने लगे?Show answer

    'आनंदा'।

  6. 6.कागज़-पेंसिल न होने पर लेखक कविता कहाँ लिखता था?Show answer

    लकड़ी के टुकड़े से भैंस की पीठ पर या कंकड़ से पत्थर की शिला पर।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • लेखक: आनंद यादव (मराठी); आत्मकथात्मक उपन्यास 'जूझ' का अंश; अनुवाद: केशव प्रथम वीर; वितान भाग 2।
  • दादा (पिता) ने पढ़ाई छुड़वाई; माँ के साथ दत्ता जी राव देसाई के पास जाकर दबाव डलवाया; बहाना: साग-भाजी देने गई थी।
  • शर्तें: सुबह खेत में पानी, ग्यारह बजे पाठशाला, छुट्टी के बाद ढोर, काम ज़्यादा तो गैरहाज़िर।
  • कक्षा: चह्वाण का लड़का (गमछा-धोती), रणनवरे मास्टर; 'पाठशाला मुझे चोंच मार-मारकर घायल कर रही थी'।
  • मंत्री मास्टर (गणित, अनुशासन), वसंत पाटील (मॉनीटर, दोस्ती), 'आनंदा'।
  • सौंदलगेकर मास्टर (मराठी, कवि): गाकर-अभिनय से पढ़ाना → अकेलापन प्रिय, अपनी चाल में कविता, 'नए पंख', कवि भी मनुष्य, तुकबंदी, शब्दों का नशा।
  • शीर्षक: जूझ = संघर्ष = नायक की केंद्रीय विशेषता; उत्तर लगभग 100 शब्द (प्रतिदर्श प्रश्नपत्र)।

आनंद यादव – जूझ: frequently asked questions

'जूझ' पाठ के लेखक कौन हैं?

मराठी कथाकार आनंद यादव। यह उनके आत्मकथात्मक उपन्यास 'जूझ' का अंश है, जिसका हिंदी अनुवाद केशव प्रथम वीर ने किया।

'जूझ' शब्द का अर्थ क्या है?

जूझ का अर्थ है संघर्ष। पाठ में लेखक का पढ़ाई के लिए पिता, परिस्थितियों और अपने भीतर के डर से संघर्ष दिखाया गया है।

लेखक को फिर से पाठशाला भेजने के लिए दादा को किसने राज़ी किया?

गाँव के प्रतिष्ठित दत्ता जी राव देसाई ने, जिनके पास लेखक अपनी माँ के साथ गया था।

वितान के प्रश्नों में कितने शब्दों में उत्तर लिखें?

पाठ्यक्रम 2026-27 में लगभग 60 शब्द लिखा है, जबकि प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27 में 5 अंक के लिए 'लगभग 100 शब्दों में' उत्तर माँगा गया है। प्रश्नपत्र के निर्देश का पालन करें; तैयारी लगभग 100 शब्दों की रखें।

Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT वितान भाग 2 (Reprint 2026-27), आनंद यादव – जूझ