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HindiCBSE Class 12 · Chapter 1

हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत: Class 12 भावार्थ और प्रश्न

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

'आत्मपरिचय' और 'एक गीत' हरिवंश राय बच्चन की कविताएँ हैं। 'आत्मपरिचय' में कवि संसार से अपने प्रेम और टकराव के विरोधाभासी रिश्ते को बताता है—जग का भार लेकर भी वह प्यार बाँटता है। 'एक गीत' (दिन जल्दी-जल्दी ढलता है) में समय की गति और अकेलेपन की व्याकुलता है। बोर्ड इनसे MCQ और 40-60 शब्दों के प्रश्न पूछता है।

What हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत is about

आरोह भाग 2 का पहला पाठ हालावादी कवि हरिवंश राय बच्चन (1907-2003) की दो कविताएँ हैं। पहली, 'आत्मपरिचय', कवि का अपना परिचय है: वह संसार से कटा भी है और जुड़ा भी, दुखी भी है और मस्त भी। दूसरी, 'एक गीत', 'निशा निमंत्रण' से ली गई है; इसमें ढलते दिन के साथ प्राणियों की घर लौटने की उतावली और अकेले कवि की शिथिलता का चित्र है।

बोर्ड परीक्षा (खंड ग) में इन कविताओं से पठित काव्यांश पर पाँच MCQ, लगभग 60 शब्दों का 3 अंक वाला और लगभग 40 शब्दों का 2 अंक वाला प्रश्न आ सकता है। विरोधाभास वाली पंक्तियाँ ('शीतल वाणी में आग', 'रोदन में राग') और 'नादान वहीं है ... जहाँ पर दाना' का अर्थ सबसे ज़रूरी हैं।

Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27

हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत: explanation

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

आत्मपरिचय: कवि कहता है कि वह संसार के जीवन का भार लिए फिरता है, फिर भी उसके जीवन में प्यार है। किसी प्रिय ने उसकी साँसों के तारों को छूकर झंकृत कर दिया है। वह प्रेम की मदिरा पीता है और संसार की परवाह नहीं करता; संसार उनकी पूछ करता है जो उसकी प्रशंसा गाते हैं, पर कवि अपने मन का गीत गाता है। वह अपने हृदय के उद्गार और उपहार लिए घूमता है। यह अधूरा संसार उसे नहीं भाता, इसलिए वह सपनों का संसार लिए फिरता है। वह हृदय में आग जलाकर उसमें जलता है, पर सुख-दुख दोनों में मग्न रहता है। संसार भवसागर पार करने को नाव बनाता है, जबकि कवि उसकी लहरों पर मस्त होकर बहता है। उसके यौवन के उन्माद में भी अवसाद है, क्योंकि किसी की याद उसे बाहर हँसाती और भीतर रुलाती है।

कवि कहता है कि बहुत यत्न करके भी कोई सत्य नहीं जान पाया; जहाँ ज्ञानी हैं, वहीं मूर्ख भी हैं। इसलिए वह सीखा हुआ ज्ञान भुलाना सीख रहा है। उसका और जग का कोई नाता नहीं: वह रोज़ कितने ही संसार बनाकर मिटाता है और जिस पृथ्वी पर जग वैभव जोड़ता है, उसे वह हर कदम से ठुकराता है। वह अपने रोने में भी राग और शीतल वाणी में भी आग लिए फिरता है; उसके पास वह खंडहर है जिस पर राजाओं के महल भी न्योछावर हों। लोग उसके रोने को गाना और फूट पड़ने को छंद बनाना कहते हैं। वह स्वयं को कवि नहीं, दुनिया का एक नया दीवाना मानता है और मस्ती का संदेश देता है।

एक गीत: दिन जल्दी-जल्दी ढल रहा है। रास्ते में रात न हो जाए, इस सोच में थका पथिक भी तेज़ चलता है। चिड़ियों के बच्चे घोंसलों से झाँक रहे होंगे, यह ध्यान आते ही उनके पंखों में चंचलता भर जाती है। पर कवि सोचता है कि उससे मिलने को कौन व्याकुल है, वह किसके लिए जल्दी करे? यह प्रश्न उसके पैरों को शिथिल कर देता है और हृदय को व्याकुलता से भर देता है।

Themes and message

कवि और संसार का द्वंद्वात्मक संबंध

कवि संसार से प्रेम भी करता है और उससे असहमत भी है। वह जग का भार ढोता है, फिर भी प्यार बाँटता है; जग की परवाह नहीं करता, फिर भी उसी को मस्ती का संदेश देता है। यह 'प्रेम और विरोध' साथ-साथ चलने वाला संबंध कविता का केंद्र है।

From the text: "मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ, / फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ"

विरोधाभास और आत्म-अभिव्यक्ति

कवि अपने व्यक्तित्व को उलटी लगने वाली बातों से प्रकट करता है: रोने में राग, शीतल वाणी में आग, उन्माद में अवसाद। इससे पता चलता है कि उसका मन सुख-दुख, प्रेम-पीड़ा का मिश्रण है।

From the text: "मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूँ, / शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ"

ज्ञान के अहंकार पर व्यंग्य

कवि कहता है कि सत्य किसी ने नहीं जाना; जहाँ ज्ञानी हैं वहीं नासमझ भी हैं। इसलिए वह किताबी ज्ञान भूलकर प्रेम और अनुभव से सीखना चाहता है।

From the text: "नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना!"

समय की गति और अकेलेपन की व्याकुलता

'एक गीत' में ढलता दिन सबको घर लौटने के लिए तेज़ कर देता है, क्योंकि कोई उनकी प्रतीक्षा कर रहा है। कवि के लिए कोई प्रतीक्षा नहीं करता, इसलिए उसके कदम धीमे पड़ जाते हैं। प्रतीक्षा और लक्ष्य ही जीवन में गति भरते हैं।

From the text: "मुझसे मिलने को कौन विकल? / मैं होऊँ किसके हित चंचल?"

The speaker and the people in the poem

कवि (वक्ता)

दोनों कविताओं का वक्ता: 'आत्मपरिचय' में अपना परिचय देने वाला, 'एक गीत' में ढलते दिन को देखने वाला अकेला व्यक्ति।

  • मस्तमौला: सुख-दुख दोनों में मग्न।
  • स्वाभिमानी: जग की चापलूसी नहीं करता, अपने मन का गान करता है।
  • भावुक और एकाकी: किसी की याद उसे भीतर रुलाती है; उसकी प्रतीक्षा करने वाला कोई नहीं।

"मैं अपने मन का गान किया करता हूँ!" और "मैं, हाय, किसी की याद लिए फिरता हूँ!"

जग (संसार)

कवि के सामने खड़ा पक्ष, जो वैभव जोड़ता है, अपनी प्रशंसा करने वालों को पूछता है और भवसागर पार करने को नाव बनाता है।

  • भौतिकवादी
  • स्वार्थी
  • दिखावे को महत्त्व देने वाला

"जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते"; "जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव"

पंथी और चिड़ियाँ ('एक गीत')

ढलते दिन में घर लौटने की उतावली वाले प्राणी, जिनसे कवि अपनी तुलना करता है।

  • लक्ष्य से प्रेरित
  • प्रतीक्षा करने वालों के लिए आतुर

"यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है!"

Poetic devices

DeviceExampleEffect
विरोधाभास"शीतल वाणी में आग", "रोदन में राग"कवि के भीतर के द्वंद्व को चमत्कारपूर्ण ढंग से प्रकट करता है।
रूपक अलंकार"स्नेह-सुरा", "भव-सागर", "साँसों के दो तार"प्रेम को मदिरा, संसार को सागर और साँसों को वीणा के तार मानकर भाव को सघन करता है।
अनुप्रास"मैं मस्ती का संदेश", "जल्दी-जल्दी"ध्वनि-सौंदर्य और गेयता।
पुनरुक्ति प्रकाश"दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!", "बना-बना"समय की तेज़ी और बार-बार होने की क्रिया पर ज़ोर।
प्रश्न अलंकार / गीतात्मकता"मुझसे मिलने को कौन विकल?"अकेलेपन की वेदना को सीधा प्रश्न बनाकर मार्मिक बनाता है; टेक से गीत की लय।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ

    कवि: 'आत्मपरिचय' की पहली पंक्ति

    कवि संसार के दायित्वों और दुखों को ढोता है; अगली पंक्ति में फिर भी प्यार लिए फिरने का विरोधाभास।

  • मैं अपने मन का गान किया करता हूँ

    कवि: जग की चापलूसी करने वालों से तुलना

    कवि की स्वतंत्रता और स्वाभिमान।

  • नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना

    कवि: सत्य की खोज पर विचार

    ज्ञान का दावा करने वालों में भी नासमझी है; ज्ञान के अहंकार पर व्यंग्य।

  • शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ

    कवि: अपने विरोधाभासी व्यक्तित्व का वर्णन

    विनम्र शब्दों में भी विद्रोह और तीव्र भावों की आग।

  • दिन जल्दी-जल्दी ढलता है

    कवि: 'एक गीत' की टेक

    समय की तेज़ गति और जीवन की नश्वरता का बोध।

हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

प्रतीक्षा से गति

मान लीजिए स्कूल से लौटते समय आपको पता है कि घर पर नानी आई हैं और आपकी राह देख रही हैं।

आपकी चाल पर इसका क्या असर होगा? इसे 'एक गीत' से जोड़िए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रतीक्षा करने वाला कोई हो तो कदम अपने-आप तेज़ हो जाते हैं।
  2. कविता में चिड़ियाँ बच्चों के ध्यान से चंचल होती हैं, जबकि कवि के लिए कोई विकल नहीं, इसलिए वह शिथिल है।

Answer: नानी की प्रतीक्षा मेरी चाल तेज़ कर देगी, जैसे चिड़ियों के परों में बच्चों के ध्यान से चंचलता भर जाती है। प्रतीक्षा न हो तो कवि की तरह कदम शिथिल पड़ जाते हैं।

Memory hook: कोई राह देखे तो पैर दौड़ें।

अपने मन का गान

कल्पना कीजिए कि आपकी कक्षा में सब लोग एक लोकप्रिय गीत की तारीफ़ कर रहे हैं, पर आपको कोई दूसरा, कम चर्चित गीत अच्छा लगता है।

'आत्मपरिचय' के कवि की तरह आप क्या करेंगे और क्यों?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कवि जग की प्रशंसा नहीं गाता, अपने मन का गान करता है।
  2. अपनी पसंद को विनम्रता से कहना स्वाभिमान है, ज़िद नहीं।

Answer: मैं विनम्रता से अपनी पसंद बताऊँगा, क्योंकि कवि की तरह सच्ची अभिव्यक्ति भीड़ की तारीफ़ से अधिक मूल्यवान है।

Memory hook: भीड़ का गाना नहीं, मन का गाना।

भीतर रोना, बाहर हँसना

मान लीजिए आपका दोस्त बोर्ड परीक्षा के तनाव में है, पर सबके सामने हँसता-मज़ाक करता रहता है।

'जो मुझको बाहर हँसा, रुलाती भीतर' पंक्ति से उसकी स्थिति कैसे समझी जा सकती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बाहर की हँसी हमेशा भीतर की खुशी नहीं होती।
  2. कवि भी किसी की याद में भीतर दुखी है पर बाहर मस्त दिखता है।

Answer: दोस्त भी कवि की तरह बाहर हँसकर भीतर का दुख छिपा रहा है; हमें उसकी बात ध्यान से सुननी चाहिए।

Memory hook: बाहर मुस्कान, भीतर तूफ़ान।

Topics in this chapter

How the board asks हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5)'आत्मपरिचय' या 'एक गीत' का अंश देकर शब्दार्थ, भाव, अलंकार और कथन-कारण प्रश्न।पहले पहचानें कि अंश किस कविता का है; 'आत्मपरिचय' में कवि-जग संबंध, 'एक गीत' में समय और प्रतीक्षा का भाव ढूँढें।
विरोधाभास वाली पंक्तियों की व्याख्या (2-3 अंक)'शीतल वाणी में आग', 'रोदन में राग', 'उन्मादों में अवसाद' का आशय।पहले शाब्दिक विरोध बताएँ, फिर उसके पीछे छिपा कवि का भाव लिखें।
कवि और जग का संबंध (3 अंक)'आत्मपरिचय' के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कवि का संसार से कैसा संबंध है।दोनों पक्ष लिखें: जुड़ाव (भार, प्यार, मस्ती का संदेश) और अलगाव (जग की परवाह नहीं, वैभव को ठुकराना); प्रमाण दें।
'एक गीत' पर प्रश्न (2-3 अंक)चिड़ियों के परों में चंचलता क्यों आती है? कवि के पैर शिथिल क्यों होते हैं?प्रतीक्षा = गति; प्रतीक्षा का अभाव = शिथिलता। यह तुलना ज़रूर लिखें।

Tricks to remember हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • आत्मपरिचय के जोड़े

    भार-प्यार, उन्माद-अवसाद, रोदन-राग, शीतल-आग: हर जोड़ा एक विरोधाभास।

    Use it when: विरोधाभास और शिल्प वाले प्रश्नों में।

  • एक गीत का क्रम: पंथी-चिड़िया-कवि

    पंथी (रात का डर) → चिड़िया (बच्चों की याद) → कवि (कोई विकल नहीं)।

    Use it when: 'एक गीत' के भाव-क्रम वाले प्रश्नों में।

  • दाना-नादान

    दाना = ज्ञानी, नादान = मूर्ख; दोनों एक ही जगह।

    Use it when: ज्ञान पर व्यंग्य वाली पंक्ति के अर्थ में।

हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: काव्यांश 1: 'आत्मपरिचय' – स्नेह-सुरा और मन का गान

मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ,
मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ,
जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते,
मैं अपने मन का गान किया करता हूँ!

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    'स्नेह-सुरा' से कवि का क्या आशय है?
    (क) शराब
    (ख) प्रेम रूपी मदिरा
    (ग) संसार का धन
    (घ) दवा

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    संसार किन लोगों को पूछता है?
    (क) जो अपने मन का गान करते हैं
    (ख) जो संसार की प्रशंसा गाते हैं
    (ग) जो दुखी रहते हैं
    (घ) जो कवि हैं

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    काव्यांश से कवि के स्वभाव की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
    (क) चापलूसी
    (ख) स्वाभिमान और स्वतंत्रता
    (ग) लालच
    (घ) डर

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    'स्नेह-सुरा' में कौन-सा अलंकार है?
    (क) उपमा
    (ख) रूपक
    (ग) यमक
    (घ) श्लेष

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): कवि जग का ध्यान नहीं करता।
    कारण (R): कवि को संसार की प्रशंसा पाने की चिंता नहीं, वह अपने मन की बात कहता है।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

Show the answersAnswers
  1. (ख) प्रेम रूपी मदिरा
  2. (ख) जो संसार की प्रशंसा गाते हैं
  3. (ख) स्वाभिमान और स्वतंत्रता
  4. (ख) रूपक (स्नेह को ही सुरा मान लिया गया है)
  5. (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

Extract 2: काव्यांश 2: 'एक गीत' – पंथी और चिड़ियाँ

हो जाए न पथ में रात कहीं,
मंजिल भी तो है दूर नहीं—
यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    थका हुआ पंथी जल्दी-जल्दी क्यों चलता है?
    (क) उसे दौड़ प्रतियोगिता जीतनी है
    (ख) रास्ते में रात न हो जाए और मंज़िल पास है
    (ग) उसे डर है कि बारिश होगी
    (घ) वह थका नहीं है

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: आगे कवि पक्षी की ओर से सोचते हैं कि घोंसलों में उसके बच्चे राह देख रहे होंगे—'बच्चे प्रत्याशा में होंगे'।) 'बच्चे प्रत्याशा में होंगे' में 'प्रत्याशा' का अर्थ है—
    (क) निराशा
    (ख) उम्मीद/प्रतीक्षा
    (ग) भय
    (घ) नींद

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' में कौन-सा अलंकार है?
    (क) पुनरुक्ति प्रकाश
    (ख) उपमा
    (ग) उत्प्रेक्षा
    (घ) मानवीकरण

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    काव्यांश का मूल भाव क्या है?
    (क) रात का डर
    (ख) प्रिय जनों की प्रतीक्षा जीवन में गति भरती है
    (ग) चिड़ियों का भोजन
    (घ) यात्रा की थकान

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): पंथी थका होने पर भी तेज़ चलता है।
    कारण (R): उसे पता है कि कोई उसकी प्रतीक्षा नहीं कर रहा।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

Show the answersAnswers
  1. (ख) रास्ते में रात न हो जाए और मंज़िल पास है
  2. (ख) उम्मीद/प्रतीक्षा
  3. (क) पुनरुक्ति प्रकाश ('जल्दी-जल्दी')
  4. (ख) प्रिय जनों की प्रतीक्षा जीवन में गति भरती है
  5. (ग) कथन सही है, कारण गलत है: पंथी मंज़िल पास होने और रात के डर से तेज़ चलता है; प्रतीक्षा न होने की बात कवि के बारे में है।

हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: कवि और जग · 3 marks · Short answerHarder board level

'आत्मपरिचय' कविता में कवि ने अपने और संसार के संबंध को कैसे प्रस्तुत किया है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. जुड़ाव के प्रमाण।
  2. अलगाव के प्रमाण।
  3. निष्कर्ष।

Answer: कवि का संसार से संबंध प्रेम और विरोध दोनों का है। वह जग-जीवन का भार उठाता है और फिर भी जीवन में प्यार बाँटता है तथा जग को मस्ती का संदेश देता है। दूसरी ओर वह जग की परवाह नहीं करता, उसकी प्रशंसा नहीं गाता और जिस पृथ्वी पर जग वैभव जोड़ता है उसे ठुकराता है। इसलिए यह संबंध द्वंद्वात्मक है।

Example 2: दाना और नादान · 2 marks · Short answerHarder board level

'नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना!' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दाना = ज्ञानी, नादान = नासमझ।
  2. सत्य कोई नहीं जान पाया, इसलिए ज्ञानी होने का दावा व्यर्थ।

Answer: दाना का अर्थ ज्ञानी और नादान का अर्थ नासमझ है। कवि कहता है कि बहुत प्रयत्न करके भी कोई सत्य नहीं जान पाया, इसलिए जो स्वयं को ज्ञानी समझते हैं, उनमें भी नासमझी छिपी है। यह ज्ञान के अहंकार पर व्यंग्य है।

Example 3: चिड़ियों की चंचलता · 3 marks · Short answerHOTS / competency

'एक गीत' में चिड़ियों के परों में चंचलता क्यों भर जाती है? कवि की स्थिति उनसे कैसे भिन्न है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बच्चों की प्रतीक्षा का ध्यान।
  2. कवि के लिए कोई प्रतीक्षा नहीं।
  3. परिणाम: शिथिल कदम, व्याकुल हृदय।

Answer: शाम होते ही चिड़ियों को ध्यान आता है कि उनके बच्चे घोंसलों से झाँककर उनकी प्रतीक्षा कर रहे होंगे। यह ध्यान उनके परों में चंचलता और उड़ान में तेज़ी भर देता है। कवि के जीवन में ऐसा कोई नहीं जो उससे मिलने को व्याकुल हो। इसलिए उसके कदम शिथिल हो जाते हैं और हृदय विह्वलता से भर जाता है।

Example 4: विरोधाभास पहचानिए · 1 mark · MCQBoard level

निम्नलिखित में से कौन-सी पंक्ति विरोधाभास का उदाहरण है?
(क) दिन जल्दी-जल्दी ढलता है
(ख) मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूँ
(ग) बच्चे प्रत्याशा में होंगे
(घ) मंजिल भी तो है दूर नहीं

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रोदन (रोना) और राग (गीत/प्रेम) परस्पर विरोधी लगते हैं।

Answer: (ख) मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूँ

Example 5: सपनों का संसार · 2 marks · Short answerBoard level

कवि 'स्वप्नों का संसार' लिए क्यों फिरता है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. उसे यह संसार अपूर्ण लगता है।
  2. इसलिए वह आदर्श, प्रेम-भरे संसार की कल्पना करता है।

Answer: कवि को यह संसार अधूरा लगता है, जिसमें स्वार्थ, दिखावा और वैभव की होड़ है। ऐसा संसार उसे नहीं भाता, इसलिए वह मन में प्रेम और सौंदर्य से भरे एक आदर्श, सपनों के संसार की कल्पना लिए घूमता है।

Example 6: कवि नहीं, दीवाना · 3 marks · Short answerHOTS / competency

कवि स्वयं को 'दुनिया का एक नया दीवाना' क्यों कहता है? इससे उसकी कविता के बारे में क्या पता चलता है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लोग उसके रोने को गाना कहते हैं।
  2. उसकी कविता भीतर की पीड़ा का सहज फूटना है, कारीगरी नहीं।
  3. दीवाना = मस्ती और भावुकता।

Answer: कवि कहता है कि वह रोया तो लोगों ने उसे गाना कहा और भाव फूट पड़े तो उसे छंद बनाना कहा। यानी उसकी कविता सोच-समझकर गढ़ी गई कला नहीं, भीतर की पीड़ा का सहज उफान है। इसलिए वह स्वयं को कवि की उपाधि से अलग रखकर दुनिया का नया दीवाना कहता है, जो मस्ती और प्रेम का संदेश लिए घूमता है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

'आत्मपरिचय' के आधार पर कवि और संसार के संबंध पर प्रकाश डालिए। (लगभग 60 शब्द) (3 marks)

StepMarks
जुड़ाव: जग-जीवन का भार ढोना, फिर भी प्यार बाँटना, मस्ती का संदेश देना1
अलगाव: जग की परवाह न करना, मन का गान, वैभव वाली पृथ्वी को ठुकराना1
निष्कर्ष: संबंध प्रेम और विरोध का, द्वंद्वात्मक; पंक्ति का प्रमाण1

'शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ' का आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द) (2 marks)

StepMarks
शाब्दिक विरोधाभास: शीतल और आग1
भाव: विनम्र शब्दों में भी विद्रोह/तीव्र भावना की आग1

Where students lose marks in हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: 'दाना' का अर्थ अनाज का दाना लिखना

    यहाँ 'दाना' फ़ारसी शब्द है, जिसका अर्थ ज्ञानी/बुद्धिमान है।

    Wrong working

    जहाँ अनाज का दाना है वहाँ नादान है।

    Right working

    जहाँ ज्ञानी (दाना) हैं, वहीं नासमझ (नादान) भी हैं।

    Do this: दाना = ज्ञानी याद रखें।

    Usually costs: MCQ में 1 अंक, व्याख्या में 1 अंक

  • Mistake: कवि को संसार का पूरी तरह विरोधी बताना

    कवि जग-जीवन का भार भी ढोता है और प्यार भी बाँटता है; संबंध द्वंद्वात्मक है।

    Do this: उत्तर में 'प्रेम और विरोध दोनों' लिखें।

    Usually costs: 3 अंक के उत्तर में 1 अंक

  • Mistake: 'एक गीत' के कवि की शिथिलता का कारण थकान बताना

    कारण यह है कि उससे मिलने को कोई विकल नहीं।

    Do this: प्रश्न 'मुझसे मिलने को कौन विकल?' उद्धृत करें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: दोनों कविताओं को मिलाकर लिखना

    प्रश्न प्रायः एक ही कविता पर होता है।

    Do this: उत्तर की शुरुआत में कविता का नाम लिखें और उसी के प्रमाण दें।

    Usually costs: आधा अंक

Practice questions on हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    हरिवंश राय बच्चन किस काव्यधारा के कवि माने जाते हैं?
    (क) प्रगतिवाद
    (ख) हालावाद
    (ग) रीतिकाल
    (घ) प्रयोगवाद

    Hint

    'मधुशाला' के कवि।

    Answer

    (ख) हालावाद

  2. Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'मैं भव मौजों पर मस्त बहा करता हूँ'—इस पंक्ति में कवि और जग के दृष्टिकोण का अंतर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    जग नाव बनाता है।

    Answer

    संसार भवसागर से पार उतरने के लिए नाव बनाता है, यानी सुरक्षा और साधन जुटाता है। कवि जीवन की लहरों से बचना नहीं चाहता; वह सुख-दुख की उन लहरों पर मस्त होकर बहता है और जीवन को पूरे मन से जीता है।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    'मैं और, और जग और, कहाँ का नाता'—पंक्ति में 'और' शब्द के प्रयोग की विशेषता बताइए। (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    यमक: एक शब्द, भिन्न अर्थ।

    Answer

    पहला 'और' का अर्थ है 'भिन्न/अलग', दूसरा 'और' संयोजक 'तथा' है और तीसरा फिर 'भिन्न'। एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थों से यमक का चमत्कार है और कवि तथा जग के अलगाव पर ज़ोर पड़ता है।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerBoard level

    'एक गीत' के आधार पर बताइए कि मनुष्य के कदम कब शिथिल पड़ जाते हैं। (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    प्रतीक्षा का अभाव।

    Answer

    जब मनुष्य के जीवन में कोई लक्ष्य या प्रतीक्षा करने वाला अपना न हो, तब उसके कदम शिथिल पड़ जाते हैं। कवि सोचता है कि उससे मिलने को कौन विकल है और वह किसके लिए चंचल हो; यह प्रश्न उसके पैरों की गति छीन लेता है।

  5. Q5 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    कथन (A): कवि यौवन का उन्माद लिए फिरता है, फिर भी उसमें अवसाद है।
    कारण (R): किसी की याद उसे बाहर हँसाती और भीतर रुलाती है।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

    Hint

    अवसाद का कारण पंक्ति में ही है।

    Answer

    (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

  6. Q6 · 3 marks · Short answerHarder board level

    'आत्मपरिचय' कविता के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    विरोधाभास, रूपक, गेयता, भाषा।

    Answer

    कविता गीत-शैली में है, जिसमें 'लिए फिरता हूँ' और 'किया करता हूँ' की आवृत्ति से लय बनती है। 'स्नेह-सुरा', 'भव-सागर' में रूपक और 'शीतल वाणी में आग', 'रोदन में राग' में विरोधाभास का चमत्कार है। भाषा सरल खड़ी बोली है जिसमें तत्सम शब्दों के साथ 'दाना', 'नादान', 'दीवाना' जैसे उर्दू शब्द भी हैं।

  7. Q7 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    आज के सोशल मीडिया युग में 'जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते' पंक्ति कितनी सार्थक है? उदाहरण सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    लाइक के लिए लिखना बनाम मन से लिखना।

    Answer

    आज भी लोग उन्हीं को अधिक सराहते हैं जो भीड़ की पसंद के अनुसार बोलते-लिखते हैं; सोशल मीडिया पर 'लाइक' पाने के लिए लोग वही पोस्ट करते हैं जो चलन में हो। बच्चन की यह पंक्ति इसी पर व्यंग्य है। कवि अपने मन का गान करता है; आज भी सच्ची, मौलिक अभिव्यक्ति भीड़ की तारीफ़ से अधिक मूल्यवान है, भले ही उसे तुरंत लोकप्रियता न मिले।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.कवि कौन-सा भार लिए फिरता है?Show answer

    जग-जीवन का भार।

  2. 2.कवि किसका पान करता है?Show answer

    स्नेह-सुरा (प्रेम की मदिरा) का।

  3. 3.जग भव-सागर तरने के लिए क्या बनाता है?Show answer

    नाव।

  4. 4.कवि स्वयं को क्या कहता है?Show answer

    दुनिया का एक नया दीवाना।

  5. 5.'एक गीत' की टेक क्या है?Show answer

    दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

  6. 6.कवि के पैर शिथिल क्यों होते हैं?Show answer

    क्योंकि उससे मिलने को कोई विकल नहीं।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • कवि: हरिवंश राय बच्चन (1907, इलाहाबाद); हालावाद; मधुशाला, निशा निमंत्रण आदि।
  • आत्मपरिचय: कवि-जग संबंध प्रेम और विरोध का (द्वंद्वात्मक)।
  • मुख्य विरोधाभास: भार-प्यार, उन्माद-अवसाद, रोदन में राग, शीतल वाणी में आग।
  • 'नादान वहीं है ... जहाँ पर दाना' = ज्ञानियों में भी नासमझी; ज्ञान के अहंकार पर व्यंग्य।
  • कवि स्वयं को 'दुनिया का एक नया दीवाना' कहता है; मस्ती का संदेश।
  • एक गीत: दिन जल्दी ढलता है; पंथी रात के डर और पास की मंज़िल से तेज़ चलता है।
  • चिड़ियों में बच्चों की प्रतीक्षा से चंचलता; कवि के लिए कोई विकल नहीं, इसलिए शिथिलता।
  • शिल्प: गीतात्मकता, टेक, रूपक, विरोधाभास, पुनरुक्ति प्रकाश, सरल खड़ी बोली।

हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत: frequently asked questions

'आत्मपरिचय' कविता का मूल भाव क्या है?

कवि अपने व्यक्तित्व का परिचय देते हुए बताता है कि उसका संसार से संबंध प्रेम और विरोध, दोनों का है। वह दुख और भार उठाकर भी प्रेम और मस्ती का संदेश देता है।

'एक गीत' किस संग्रह से है और उसका भाव क्या है?

'एक गीत' बच्चन के संग्रह 'निशा निमंत्रण' से लिया गया है। इसमें ढलते दिन के साथ सबके घर लौटने की उतावली और अकेले कवि की शिथिलता दिखाकर बताया गया है कि प्रतीक्षा करने वाले अपने ही जीवन में गति भरते हैं।

बच्चन को हालावादी कवि क्यों कहा जाता है?

'मधुशाला', 'मधुबाला' और 'मधुकलश' जैसी रचनाओं में उन्होंने हाला (मदिरा) और प्याले के प्रतीकों से जीवन, प्रेम और मस्ती की बात कही, इसलिए उन्हें हालावाद का प्रवर्तक कवि माना जाता है।

परीक्षा में इस पाठ से किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?

पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, लगभग 60 शब्दों के 3 अंक वाले और लगभग 40 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न; विरोधाभास और कवि-जग संबंध पर प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।

Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 2 (Reprint 2026-27), हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत