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HindiCBSE Class 12 · Chapter 12

कैसे बनता है रेडियो नाटक: Class 12 हिंदी नोट्स और प्रश्न

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

'कैसे बनता है रेडियो नाटक' अभिव्यक्ति और माध्यम का पाठ 12 है। रेडियो नाटक श्रव्य माध्यम का नाटक है, जिसमें दृश्य नहीं होते; सब कुछ संवादों और ध्वनि प्रभावों से बताना पड़ता है। पाठ में कहानी के चुनाव (एक्शन-प्रधान नहीं), 15-30 मिनट की अवधि, सीमित पात्र, और संवादों से देश-काल तथा पात्र स्थापित करने के नियम समझाए गए हैं।

What कैसे बनता है रेडियो नाटक is about

यह पाठ अभिव्यक्ति और माध्यम (NCERT) का पाठ 12 है। CBSE पाठ्यक्रम 2026-27 में खंड ख के शीर्षक में पाठ 12 शामिल है, पर 2 और 4 अंक वाले प्रश्नों की पंक्ति में केवल पाठ 3, 4, 5, 11 और 13 लिखे हैं, और 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्नपत्र में इस पाठ से कोई प्रश्न नहीं है (उसका रेडियो-प्रश्न पाठ 3 से है)। सीधी बात: पाठ्यक्रम के प्रश्न-विवरण के अनुसार 2 और 4 अंक वाले प्रश्न इस पाठ पर नहीं बनते; यह केवल खंड ख के निर्धारित पाठों की सूची में है। फिर भी यह पाठ्यक्रम में है और पाठ 3 (रेडियो लेखन) तथा पाठ 11 (नाट्य रूपांतरण) को समझने में सीधे मदद करता है।

पाठ बताता है कि टी.वी. और कंप्यूटर से पहले रेडियो घर बैठे मनोरंजन का सबसे सस्ता साधन था और रेडियो नाटक ने हिंदी नाट्य आंदोलन के विकास में अहम भूमिका निभाई। धर्मवीर भारती का 'अंधा युग' और मोहन राकेश का 'आषाढ़ का एक दिन' मूलतः रेडियो के लिए लिखे गए थे और बाद में मंच पर भी बेहद सफल हुए।

मुख्य विचार: रेडियो नाटक में भी कहानी, पात्र, संवाद और 'परिचय-द्वंद्व-समाधान' का ढाँचा होता है; अंतर केवल इतना है कि यहाँ दृश्य नहीं, इसलिए सब कुछ आवाज़ से रचना पड़ता है।

Weightage: यह पाठ खंड ख: अभिव्यक्ति और माध्यम का भाग है, जिसके 22 अंक हैं (कुल 80 में से)। इसमें 120 शब्दों का रचनात्मक लेखन (6 अंक), लगभग 40 शब्दों के 2-2 अंक वाले और लगभग 80 शब्दों के 4-4 अंक वाले प्रश्न आते हैं; 2 और 4 अंक वाले प्रश्न पाठ 3, 4, 5, 11 और 13 पर होते हैं, पाठ 12 पर नहीं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • बस सिनेमा और रंगमंच की तरह रेडियो नाटक में विजुअल्स अर्थात दृश्य नहीं होते।

    NCERT पाठ: रेडियो नाटक और सिनेमा-रंगमंच का अंतर

    रेडियो नाटक लेखन के सभी नियम इसी एक अंतर से निकलते हैं।

  • इसलिए कहानी का चुनाव अपने माध्यम को समझते हुए करिए।

    NCERT पाठ: एक्शन-प्रधान कहानी की समस्या

    हर कहानी हर माध्यम के लिए उपयुक्त नहीं होती।

  • महत्त्वपूर्ण हैं—संवाद और ध्वनि प्रभाव।

    NCERT पाठ: 'कट' और दृश्य की चर्चा

    रेडियो नाटक के दो मुख्य औज़ार।

Key concepts

रेडियो नाटक बनाम सिनेमा और रंगमंच

समानता: सिनेमा और रंगमंच की तरह रेडियो नाटक में भी चरित्र, उनके आपसी संवाद और संवादों से आगे बढ़ती कहानी होती है; वही ढाँचा: शुरुआत-मध्य-अंत, यानी परिचय-द्वंद्व-समाधान।

सबसे बड़ा अंतर: रेडियो नाटक में विज़ुअल्स (दृश्य) नहीं होते। रेडियो पूरी तरह श्रव्य माध्यम है, इसलिए:

  • सब कुछ संवादों और ध्वनि प्रभावों (संगीत सहित) से संप्रेषित करना होता है।
  • सहायता के लिए न मंच-सज्जा है, न वस्त्र-सज्जा, न अभिनेता के चेहरे की भाव-भंगिमाएँ।
  • इसलिए रेडियो नाटक का लेखन थोड़ा भिन्न और थोड़ा मुश्किल है।

परंपरा: रेडियो नाटक ने नाट्य आंदोलन के विकास में अहम भूमिका निभाई; 'अंधा युग' (धर्मवीर भारती) और 'आषाढ़ का एक दिन' (मोहन राकेश) मूलतः रेडियो के लिए लिखे गए।

Worked example

रेडियो नाटक और रंगमंच के नाटक में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रंगमंच: दृश्य, मंच-सज्जा, भाव-भंगिमा।
  2. रेडियो: केवल आवाज़।

Answer: रंगमंच में दर्शक दृश्य, मंच-सज्जा और अभिनेताओं की भाव-भंगिमा देखता है, जबकि रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होते; सब कुछ संवादों और ध्वनि प्रभावों से ही श्रोता तक पहुँचाना पड़ता है।

कहानी का चुनाव: तीन बातें

कहानी मौलिक हो या किसी स्रोत से ली गई, तीन बातों का ध्यान रखें:
1. कहानी पूरी तरह एक्शन (हरकत) पर निर्भर न हो: रेडियो पर बहुत एक्शन सुनाना उबाऊ होता है। पुलिस-अपराधी का पीछा या क्रिकेट-फ़ुटबॉल जैसे खेल पर अच्छा सिनेमा बन सकता है, पर रेडियो नाटक नहीं, क्योंकि केवल आवाज़ से भाग-दौड़ का रोमांच नहीं रचा जा सकता।
2. अवधि बहुत ज़्यादा न हो (लंबी कहानी हो तो धारावाहिक बनाएँ)।
3. पात्रों की संख्या सीमित हो।

सूत्र: कहानी का चुनाव अपने माध्यम को समझते हुए करें।

अवधि: 15 से 30 मिनट क्यों

रेडियो नाटक की अवधि प्रायः 15 से 30 मिनट होती है। दो कारण:
1. श्रव्य माध्यम में नाटक या वार्ता जैसे कार्यक्रमों के लिए मनुष्य की एकाग्रता की अवधि 15-30 मिनट ही होती है।
2. सिनेमा या नाटक के दर्शक घर से निकलकर प्रेक्षागृह में आते हैं; वे 'कैपटिव ऑडियंस' (एक स्थान पर 'कैद' दर्शक) हैं, थोड़ा ऊबकर भी उठकर नहीं जाते। रेडियो का श्रोता घर पर अपनी मर्ज़ी से सुनता है; मन उचटते ही स्टेशन बदल सकता है या ध्यान भटक सकता है।

लंबी कहानी हो तो धारावाहिक, जिसकी हर कड़ी 15 या 30 मिनट की हो। रेडियो पर निश्चित समय पर निश्चित कार्यक्रम आते हैं, इसलिए अवधि भी निश्चित (15, 30, 45, 60 मिनट) होती है।

Worked example

'कैपटिव ऑडियंस' किसे कहते हैं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रेक्षागृह में एकत्र दर्शक।
  2. आसानी से उठकर नहीं जाते।

Answer: सिनेमाघर या नाट्यगृह में घर से निकलकर आए और अनजान लोगों के समूह के साथ बैठे दर्शक, जो थोड़ा ऊबने पर भी आसानी से उठकर नहीं जाते, 'कैपटिव ऑडियंस' यानी एक स्थान पर कैद दर्शक कहलाते हैं।

पात्रों की संख्या

अवधि सीमित है और श्रोता चरित्रों को केवल आवाज़ के सहारे याद रखता है; बहुत पात्र होंगे तो वह उनसे रिश्ता नहीं जोड़ पाएगा।

पाठ का अंदाज़ा (प्रमुख और सहायक भूमिकाएँ):

  • 15 मिनट: अधिकतम 5-6 पात्र (ज़रूरत हो तो 7-8)।
  • 30-40 मिनट: 8 से 12 पात्र।
  • एक घंटा या अधिक: 15 से 20 भूमिकाएँ।

ये संख्याएँ अनुमान मात्र हैं; छोटे-मोटे किरदार (फेरीवाले की एक आवाज़, पोस्टमैन का एक संवाद) इनमें नहीं गिने जाते।

लेखन: ध्वनि प्रभाव और संवादों से देश-काल

मंच के नाट्यालेख, फ़िल्म की पटकथा और रेडियो नाट्यलेखन में काफ़ी समानता है; फ़र्क यह कि दृश्य का निर्माण भी ध्वनि प्रभावों (संगीत सहित) और संवादों से करना होता है।

  • रेडियो नाटक में 'दृश्य' नहीं होता, इसलिए अंक या दृश्य की जगह 'कट' (हिस्सा) लिखने की परिपाटी है; पर असली महत्त्व संवाद और ध्वनि प्रभाव का है।
  • पाठ का उदाहरण: रात में जंगल में भटके राम, श्याम और मोहन। कोष्ठक में '(जंगली जानवरों की आवाज़ें, डरावना संगीत, पदचाप का स्वर)' से स्थान का संकेत; राम का संवाद 'कितना भयानक जंगल है' और श्याम का 'इत्ती रात हो गई' से स्थान-समय स्पष्ट।
  • शर्त: देश-काल बताने वाला संवाद स्वाभाविक हो, ज़बरदस्ती ठूँसी गई सूचना जैसा न लगे।
  • ध्वनि प्रभाव कोष्ठक में लिखे जाते हैं: '(दूर से नज़दीक आती आवाज़)', '(पक्षी के पंख फड़फड़ाने का स्वर)'।

Worked example

रेडियो नाटक में 'सुबह का समय' कैसे दिखाएँगे?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ध्वनि प्रभाव।
  2. स्वाभाविक संवाद।

Answer: (चिड़ियों की चहचहाहट, दूर मंदिर की घंटी, दूधवाले की साइकिल की घंटी) माँ: 'उठ जा बेटा, छह बज गए, स्कूल बस छूट जाएगी!' ध्वनि और स्वाभाविक संवाद मिलकर सुबह का दृश्य बना देते हैं।

संवादों से पात्र-परिचय और एक्शन

रेडियो नाटक में पात्रों से जुड़ी सारी जानकारी (नाम, आपसी संबंध, चारित्रिक विशेषताएँ) संवादों से ही मिलती है। जंगल वाले दृश्य से पता चलता है कि राम सबसे ज़्यादा डरा है, श्याम डर पर काबू करने की कोशिश कर रहा है और मोहन सबसे बेफ़िक्र है।

  • भाषा: पात्र पढ़ा-लिखा है या अनपढ़, शहर का या गाँव का, किस प्रांत का, उम्र क्या है, क्या काम करता है, ये सब उसकी भाषा तय करते हैं; आपसी संबंध भी संवाद की बनावट बदलते हैं (पत्नी, बच्चे, बराबर के मित्र से अलग-अलग ढंग)।
  • संबोधन: श्रोता नहीं देख सकता कि कौन किससे बोल रहा है, इसलिए जिस पात्र को संवाद संबोधित है उसका नाम लेना ज़रूरी, खासकर जब दो से अधिक पात्र हों।
  • एक्शन को संवाद में: 'कितनी गरमी है आज पार्क में। चलूँ कुछ देर इस बेंच पर बैठ जाऊँ।' (आह की ध्वनि के साथ बैठना)।

पाठ में जगदीश चंद्र माथुर के एक नाटक का अंश (बाबू रामस्वरूप, नौकर रतन, पत्नी प्रेमा; 'धोती'/'धोबी' वाली गलतफ़हमी) रेडियो आलेख में बदलकर दिखाया गया है।

कैसे बनता है रेडियो नाटक in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

दृश्य को आवाज़ से रचना

मान लीजिए आपके स्कूल का सामुदायिक रेडियो 'नदी किनारे पिकनिक' पर पाँच मिनट का ऑडियो-नाटक चाहता है।

बिना दृश्य के नदी का किनारा और पिकनिक का माहौल कैसे बनाएँगे?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ध्वनि प्रभाव: बहते पानी की कलकल, चिड़ियाँ, बच्चों की हँसी, पत्थर फेंकने की छपाक।
  2. संवाद: 'रिया, देख! पानी कितना साफ़ है, नीचे पत्थर भी दिख रहे हैं।' इससे स्थान और पात्र दोनों स्थापित।

Answer: ध्वनि प्रभाव और स्वाभाविक संवाद मिलकर श्रोता के मन में पूरा दृश्य बना देंगे; पात्रों के नाम संवाद में लेकर उनकी पहचान भी स्पष्ट रहेगी।

Memory hook: कान से आँख का काम।

कहानी का चुनाव

कल्पना कीजिए कि आपकी कक्षा रेडियो नाटक के लिए 'क्रिकेट विश्वकप का फ़ाइनल' और 'दादी की चिट्ठी' में से एक कहानी चुन रही है।

पाठ के आधार पर कौन-सी कहानी बेहतर रहेगी और क्यों?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. क्रिकेट मैच एक्शन-प्रधान है; केवल आवाज़ से उसका रोमांच कठिन।
  2. 'दादी की चिट्ठी' भावना और संवाद प्रधान है, पात्र भी कम होंगे।

Answer: 'दादी की चिट्ठी' बेहतर है, क्योंकि रेडियो के लिए ऐसी कहानी चाहिए जो एक्शन पर नहीं, संवाद और भावनाओं पर टिकी हो, अवधि छोटी हो और पात्र सीमित हों।

Memory hook: एक्शन कम, संवाद ज़्यादा।

एक्शन को संवाद में पिरोना

मान लीजिए आपके रेडियो नाटक में एक पात्र को दरवाज़ा खोलकर बाहर बारिश देखनी है और फिर छाता उठाना है।

यह हरकत श्रोता तक कैसे पहुँचेगी?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. हरकत को संवाद का हिस्सा बनाएँ, जैसे पाठ के 'बेंच पर बैठ जाऊँ' वाले उदाहरण में।
  2. साथ में ध्वनि प्रभाव: दरवाज़े की चरमराहट, बारिश की तेज़ आवाज़।

Answer: (दरवाज़ा चरमराकर खुलता है, तेज़ बारिश का शोर) अमन: 'अरे बाप रे, कितनी तेज़ बारिश! चलो, यह छाता उठा लेता हूँ।' श्रोता को हरकत सुनाई भी देगी और समझ भी आएगी।

Memory hook: जो दिखता नहीं, वह बोला जाए।

Topics in this chapter

How the board asks कैसे बनता है रेडियो नाटक

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
परिभाषा / कारण (अभ्यास हेतु 2 अंक का प्रारूप, लगभग 40 शब्द)रेडियो नाटक की अवधि 15-30 मिनट क्यों? 'कट' क्या है? कैपटिव ऑडियंस किसे कहते हैं? रेडियो नाटक में पात्र सीमित क्यों?एक वाक्य में उत्तर, दूसरे में कारण (एकाग्रता, आवाज़ से याद रखना)।
तुलना / सीमाएँ (अभ्यास हेतु 4 अंक का प्रारूप, लगभग 80 शब्द)रेडियो नाटक और सिनेमा-रंगमंच में समानता और अंतर; दृश्य-श्रव्य माध्यमों की तुलना में श्रव्य माध्यम की सीमाएँ और उन्हें पूरा करने के उपाय।समानता (कहानी, पात्र, संवाद, ढाँचा) + अंतर (दृश्य नहीं) + उपाय (संवाद, ध्वनि प्रभाव, संगीत, संबोधन)।
अनुप्रयोग (अभ्यास हेतु 4 अंक का प्रारूप)किसी दृश्य (घनी अँधेरी रात, सुबह, नदी का किनारा, वर्षा का दिन, बच्चों की खुशी) को रेडियो नाटक में कैसे प्रस्तुत करेंगे; किसी कहानी के अंश का रेडियो आलेख।कोष्ठक में ध्वनि प्रभाव + दो-तीन स्वाभाविक संवाद जिनमें स्थान-समय और पात्रों के नाम आएँ।

Tricks to remember कैसे बनता है रेडियो नाटक

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • कहानी चुनने के तीन नियम: 'ए-अ-पा'

    एक्शन-प्रधान नहीं, अवधि छोटी, पात्र सीमित।

    Use it when: कहानी के चुनाव वाले प्रश्न में।

  • पात्र-संख्या: '15-5, 30-10, 60-20'

    15 मिनट: 5-6; 30-40 मिनट: 8-12; एक घंटा: 15-20।

    Use it when: पात्र-संख्या वाले प्रश्न में।

  • रेडियो नाटक के दो औज़ार

    संवाद + ध्वनि प्रभाव (संगीत सहित) = दृश्य, स्थान, समय, पात्र, हरकत सब कुछ।

    Use it when: सीमाएँ और उपाय वाले प्रश्न में।

कैसे बनता है रेडियो नाटक: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: अवधि सीमित क्यों · 2 marks · Short answerBoard level

रेडियो नाटक की अवधि प्रायः 15 से 30 मिनट क्यों रखी जाती है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. एकाग्रता की अवधि।
  2. श्रोता 'कैद' नहीं।

Answer: श्रव्य माध्यम में नाटक जैसे कार्यक्रमों के लिए मनुष्य की एकाग्रता 15-30 मिनट ही रहती है। साथ ही रेडियो का श्रोता प्रेक्षागृह के दर्शक की तरह 'कैद' नहीं होता; घर पर मन उचटते ही वह स्टेशन बदल सकता है।

Example 2: रेडियो नाटक बनाम रंगमंच · 4 marks · Short answerBoard level

रेडियो नाटक और रंगमंच के नाटक में क्या समानताएँ और अंतर हैं? (लगभग 80 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. समानताएँ।
  2. मूल अंतर।
  3. अंतर के परिणाम।

Answer: दोनों में एक कहानी, चरित्र, उनके आपसी संवाद और शुरुआत-मध्य-अंत यानी परिचय-द्वंद्व-समाधान का ढाँचा होता है। सबसे बड़ा अंतर यह है कि रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होते; रेडियो पूरी तरह श्रव्य माध्यम है। वहाँ न मंच-सज्जा है, न वस्त्र-सज्जा, न अभिनेता के चेहरे के भाव। इसलिए रेडियो नाटक में स्थान, समय, पात्रों का परिचय और उनकी हरकतें भी संवादों और ध्वनि प्रभावों से बतानी पड़ती हैं, और उसकी अवधि तथा पात्रों की संख्या भी सीमित रखनी पड़ती है।

Example 3: कहानी का चुनाव · 4 marks · Short answerHarder board level

रेडियो नाटक के लिए कहानी चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? उदाहरण सहित लिखिए। (लगभग 80 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. एक्शन-प्रधान न हो।
  2. अवधि।
  3. पात्र सीमित।

Answer: पहली बात, कहानी पूरी तरह एक्शन पर निर्भर न हो, क्योंकि केवल आवाज़ से भाग-दौड़ का रोमांच नहीं रचा जा सकता; पुलिस द्वारा अपराधी का पीछा या क्रिकेट मैच पर अच्छा सिनेमा बन सकता है, रेडियो नाटक नहीं। दूसरी, उसकी अवधि बहुत लंबी न हो; रेडियो नाटक प्रायः 15-30 मिनट का होता है, लंबी कहानी हो तो धारावाहिक बनाया जाए। तीसरी, पात्रों की संख्या सीमित हो, क्योंकि श्रोता उन्हें केवल आवाज़ के सहारे याद रखता है; 15 मिनट के नाटक में लगभग 5-6 पात्र ठीक हैं।

Example 4: दृश्य को आवाज़ में बदलना · 4 marks · Short answerHarder board level

रेडियो नाटक में 'घनी अँधेरी रात' और 'वर्षा का दिन' जैसे दृश्यों को आप कैसे प्रस्तुत करेंगे? (लगभग 80 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ध्वनि प्रभाव।
  2. स्वाभाविक संवाद।
  3. संगीत।

Answer: घनी अँधेरी रात के लिए झींगुरों की आवाज़, दूर कुत्ते का भौंकना, धीमा रहस्यमय संगीत और सधे कदमों की आहट दूँगा; पात्र का संवाद होगा: 'उफ़, हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा, टॉर्च भी बुझ गई!' वर्षा के दिन के लिए बादलों की गड़गड़ाहट, टीन की छत पर बूँदों की टपटप और पानी में छप-छप चलने की आवाज़ दूँगा; संवाद: 'मीना, छाता ले जा, सुबह से झड़ी लगी है!' इस तरह ध्वनि प्रभाव, संगीत और स्वाभाविक संवाद मिलकर श्रोता के मन में दृश्य रच देते हैं।

Example 5: श्रव्य माध्यम की सीमाएँ · 4 marks · Short answerHOTS / competency

दृश्य-श्रव्य माध्यमों की तुलना में श्रव्य माध्यम (रेडियो) की क्या सीमाएँ हैं? इन्हें किस तरह पूरा किया जा सकता है? (लगभग 80 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सीमाएँ: दृश्य नहीं, एक्शन कठिन, पात्र पहचानना कठिन, ध्यान भटकना।
  2. उपाय: संवाद, ध्वनि, संबोधन, अवधि।

Answer: रेडियो में दृश्य, मंच-सज्जा और चेहरे के भाव नहीं होते; एक्शन दिखाना कठिन है, श्रोता पात्रों को केवल आवाज़ से पहचानता है और घर पर उसका ध्यान जल्दी भटकता है। इन सीमाओं को पूरा करने के लिए स्थान और समय ध्वनि प्रभावों और स्वाभाविक संवादों से बताए जाते हैं; पात्रों की भाषा उनकी उम्र, शिक्षा और क्षेत्र के अनुसार अलग रखी जाती है; संवाद में संबोधित पात्र का नाम लिया जाता है; हरकतें संवाद में पिरोई जाती हैं; और अवधि तथा पात्रों की संख्या सीमित रखी जाती है। यही सीमाएँ श्रोता की कल्पना को सक्रिय भी करती हैं।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

रेडियो नाटक के लिए कहानी चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (लगभग 80 शब्द) (4 marks)

StepMarks
एक्शन-प्रधान न हो (उदाहरण: पीछा, खेल)1
अवधि 15-30 मिनट; लंबी हो तो धारावाहिक1
पात्र सीमित (कारण: आवाज़ से याद रखना)1
निष्कर्ष: माध्यम को समझकर चुनाव; प्रस्तुति1

रेडियो नाटक की अवधि प्रायः 15-30 मिनट क्यों होती है? (लगभग 40 शब्द) (2 marks)

StepMarks
श्रव्य माध्यम में एकाग्रता 15-30 मिनट1
घर पर श्रोता 'कैद' नहीं, स्टेशन बदल सकता है1

Where students lose marks in कैसे बनता है रेडियो नाटक

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: रेडियो नाटक को 'दृश्य-श्रव्य' माध्यम लिखना

    रेडियो पूरी तरह श्रव्य माध्यम है; दृश्य न होना ही उसका सबसे बड़ा अंतर है।

    Do this: 'श्रव्य माध्यम, दृश्य नहीं' स्पष्ट लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: अवधि के कारण में केवल 'कार्यक्रम का समय तय होता है' लिखना

    मुख्य कारण दो हैं: श्रोता की एकाग्रता 15-30 मिनट और घर पर बैठे श्रोता का 'कैद' न होना।

    Do this: दोनों कारण लिखें, फिर निश्चित समय वाली बात जोड़ें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: अनुप्रयोग वाले प्रश्न में केवल वर्णन लिखना, ध्वनि प्रभाव और संवाद नहीं

    रेडियो प्रस्तुति का अर्थ है कोष्ठक में ध्वनि संकेत और स्वाभाविक संवाद; केवल गद्य-वर्णन रेडियो आलेख नहीं।

    Do this: कम से कम दो ध्वनि प्रभाव और दो संवाद लिखें।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: देश-काल बताने के लिए सूचना जैसा बनावटी संवाद लिखना

    पाठ कहता है कि ऐसा संवाद स्वाभाविक हो, ज़बरदस्ती ठूँसा हुआ न लगे; 'राम, रात के बारह बजे हैं और मुझे डर लग रहा है' जैसा वाक्य बनावटी है।

    Do this: भावना के साथ सूचना दें: 'रात के बारह बज गए, अम्मा-बाबू परेशान होंगे।'

    Usually costs: 1 अंक

Practice questions on कैसे बनता है रेडियो नाटक

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 2 marks · Short answerBoard level

    रेडियो नाटक में 'कट' शब्द का प्रयोग क्यों किया जाता है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    दृश्य नहीं होता।

    Answer

    रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होते, इसलिए अंक या दृश्य की जगह अलग-अलग हिस्सों को दिखाने के लिए अंग्रेज़ी शब्द 'कट' (कट-1, कट-2) लिखने की परिपाटी है। पर यह उतना महत्त्वपूर्ण नहीं; महत्त्वपूर्ण हैं संवाद और ध्वनि प्रभाव।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level

    रेडियो नाटक में संवाद में पात्र का नाम लेना क्यों ज़रूरी है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    श्रोता देख नहीं सकता।

    Answer

    श्रोता देख नहीं सकता कि कौन किससे बात कर रहा है, इसलिए जिस पात्र को संवाद संबोधित है उसका नाम लेना ज़रूरी होता है, खासकर जब दृश्य में दो से अधिक पात्र हों; जैसे 'श्याम, मुझे बड़ा डर लग रहा है।'

  3. Q3 · 2 marks · Short answerBoard level

    किन दो प्रसिद्ध हिंदी नाटकों के उदाहरण से पाठ रेडियो नाटक का महत्त्व बताता है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    धर्मवीर भारती, मोहन राकेश।

    Answer

    धर्मवीर भारती का 'अंधा युग' और मोहन राकेश का 'आषाढ़ का एक दिन' मूलतः रेडियो के लिए लिखे गए थे और बाद में मंच पर भी बेहद सफल रहे; इससे पता चलता है कि रेडियो नाटक ने हिंदी नाट्य आंदोलन के विकास में अहम भूमिका निभाई।

  4. Q4 · 4 marks · Short answerHarder board level

    रेडियो नाटक में पात्रों की संख्या सीमित क्यों रखी जाती है? अवधि के अनुसार पात्रों की संख्या का अनुमान भी बताइए। (लगभग 80 शब्द)

    Hint

    आवाज़ से याद रखना; 15 मिनट 5-6, 30-40 मिनट 8-12, घंटा 15-20।

    Answer

    रेडियो नाटक की अवधि सीमित होती है और श्रोता चरित्रों को केवल आवाज़ के सहारे याद रखता है; बहुत अधिक पात्र हों तो वह उनसे रिश्ता नहीं जोड़ पाता और भ्रमित हो जाता है। पाठ के अनुसार 15 मिनट के नाटक में अधिकतम 5-6 पात्र, 30-40 मिनट में 8 से 12, और एक घंटे या अधिक में 15 से 20 भूमिकाएँ हो सकती हैं। ये केवल अनुमान हैं, ज़रूरत हो तो कुछ बढ़ सकते हैं, और फेरीवाले या पोस्टमैन जैसे छोटे किरदार इस गिनती में नहीं आते।

  5. Q5 · 4 marks · Short answerHarder board level

    रेडियो नाटक में पात्र की भाषा कैसे तय होती है? (लगभग 80 शब्द)

    Hint

    शिक्षा, शहर-गाँव, प्रांत, उम्र, काम; आपसी संबंध।

    Answer

    रेडियो नाटक में पात्र की पहचान उसकी आवाज़ और भाषा से ही बनती है, इसलिए भाषा पर विशेष ध्यान देना होता है। पात्र पढ़ा-लिखा है या अनपढ़, शहर का है या गाँव का, किसी विशेष प्रांत का है या नहीं, उसकी उम्र क्या है और वह क्या काम करता है, ये सब उसकी भाषा तय करते हैं। पात्रों का आपसी संबंध भी संवाद की बनावट बदल देता है; एक ही व्यक्ति पत्नी, बच्चों और बराबर के मित्र से अलग-अलग ढंग से बात करेगा। ये बारीकियाँ ही श्रोता के मन में पात्र की तसवीर बनाती हैं।

  6. Q6 · 4 marks · Short answerHOTS / competency

    आज वीडियो और ओटीटी के युग में भी पॉडकास्ट और ऑडियो-कहानियाँ लोकप्रिय हो रही हैं। रेडियो नाटक के गुणों के आधार पर इसका कारण बताइए। (लगभग 80 शब्द)

    Hint

    कल्पना, सुविधा, कम समय, संवाद-ध्वनि की शक्ति।

    Answer

    रेडियो नाटक की तरह ऑडियो-कहानियाँ भी केवल संवाद और ध्वनि प्रभावों से चलती हैं, इसलिए श्रोता अपने मन में दृश्य स्वयं रचता है; यह कल्पना का आनंद वीडियो में कम मिलता है। इन्हें यात्रा करते, काम करते या आँखें बंद करके भी सुना जा सकता है, जैसे पुराने समय में रेडियो घर बैठे सबसे सहज मनोरंजन था। रेडियो नाटक की तरह इनकी कड़ियाँ भी प्रायः 15-30 मिनट की होती हैं, जो एकाग्रता के अनुकूल है। इसलिए श्रव्य माध्यम की यह परंपरा नए रूप में जीवित है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.रेडियो नाटक का ढाँचा क्या है?Show answer

    शुरुआत-मध्य-अंत, यानी परिचय-द्वंद्व-समाधान।

  2. 2.रेडियो नाटक की सामान्य अवधि कितनी होती है?Show answer

    15 से 30 मिनट।

  3. 3.प्रेक्षागृह के दर्शकों को अंग्रेज़ी में क्या कहा गया है?Show answer

    कैपटिव ऑडियंस।

  4. 4.रेडियो नाटक में दृश्य की जगह क्या लिखा जाता है?Show answer

    कट (हिस्सा)।

  5. 5.जंगल वाले उदाहरण में तीन बच्चों के नाम क्या हैं?Show answer

    राम, श्याम और मोहन।

  6. 6.पाठ में किस नाटककार के नाटक का अंश रेडियो आलेख में बदला गया है?Show answer

    जगदीश चंद्र माथुर।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • रेडियो: पहले घर बैठे सबसे सस्ता मनोरंजन; रेडियो नाटक ने नाट्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाई ('अंधा युग', 'आषाढ़ का एक दिन')।
  • समानता: कहानी, चरित्र, संवाद, परिचय-द्वंद्व-समाधान; अंतर: दृश्य नहीं, न मंच-सज्जा, न वस्त्र-सज्जा, न भाव-भंगिमा।
  • कहानी: एक्शन-प्रधान नहीं, अवधि छोटी, पात्र सीमित; माध्यम को समझकर चुनाव।
  • अवधि 15-30 मिनट: एकाग्रता की सीमा; श्रोता 'कैपटिव ऑडियंस' नहीं; लंबी कहानी = धारावाहिक।
  • पात्र: 15 मिनट 5-6, 30-40 मिनट 8-12, घंटा 15-20 (छोटे किरदार अलग)।
  • लेखन: 'कट'; कोष्ठक में ध्वनि प्रभाव (संगीत सहित); स्वाभाविक संवादों से देश-काल; पात्रों की भाषा उम्र-शिक्षा-क्षेत्र-संबंध से; संबोधित पात्र का नाम; एक्शन संवाद में।
  • बोर्ड: 2 और 4 अंक वाले प्रश्न पाठ 3, 4, 5, 11 और 13 पर; इस पाठ पर नहीं (प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27 में भी नहीं); पाठ 3 के रेडियो-प्रश्नों में सहायक।

कैसे बनता है रेडियो नाटक: frequently asked questions

रेडियो नाटक और सिनेमा में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

रेडियो नाटक में दृश्य (विज़ुअल्स) नहीं होते; रेडियो पूरी तरह श्रव्य माध्यम है, इसलिए सब कुछ संवादों और ध्वनि प्रभावों से बताना पड़ता है।

क्या इस पाठ से बोर्ड परीक्षा में प्रश्न आता है?

पाठ्यक्रम 2026-27 में खंड ख के शीर्षक में पाठ 12 है, पर 2 और 4 अंक वाले प्रश्नों की पंक्ति में केवल पाठ 3, 4, 5, 11 और 13 लिखे हैं, और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27 में इससे प्रश्न नहीं है। यानी पाठ्यक्रम के प्रश्न-विवरण के अनुसार इस पाठ पर 2 या 4 अंक का प्रश्न नहीं बनता। पाठ 3 के रेडियो-लेखन प्रश्नों में इसकी समझ काम आती है।

रेडियो नाटक में कितने पात्र होने चाहिए?

पाठ के अनुमान से 15 मिनट के नाटक में 5-6, 30-40 मिनट में 8-12 और एक घंटे में 15-20 प्रमुख-सहायक पात्र; छोटे किरदार इस गिनती में नहीं आते।

रेडियो के लिए लिखे गए कौन-से हिंदी नाटक मंच पर भी सफल हुए?

धर्मवीर भारती का 'अंधा युग' और मोहन राकेश का 'आषाढ़ का एक दिन'।

Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT अभिव्यक्ति और माध्यम (Reprint 2025-26), पाठ 12: कैसे बनता है रेडियो नाटक