कवितावली (तुलसीदास): पेट की आग, बेरोज़गारी और युग-यथार्थ (कक्षा 12)
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
कवितावली के तीन छंदों में तुलसीदास अपने युग की गरीबी, बेरोज़गारी और 'पेट की आग' का यथार्थ चित्र खींचते हैं। पहले कवित्त में सब वर्ग के लोग पेट के लिए हर अच्छा-बुरा काम करते हैं, यहाँ तक कि संतान बेचते हैं; दूसरे में किसान, भिखारी, व्यापारी, नौकर सबकी आजीविका छिन चुकी है; सवैये में तुलसी जाति की परवाह न करने वाला स्वाभिमान दिखाते हैं। उनके अनुसार समाधान राम की कृपा है।
Notice how poverty feeds the hunger fire and drives people to desperate acts, while Tulsi shows only Ram's grace, like a rain cloud, can quench it.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand कवितावली: पेट की आग और तुलसी के युग का यथार्थ
कवितावली तुलसी की ब्रजभाषा की रचना है, जो कवित्त-सवैया छंदों में है। यहाँ तुलसी भक्त होने के साथ अपने समय के सजग समाज-चित्रकार भी हैं।
पहला कवित्त। मज़दूर, किसान-कुल, व्यापारी, भिखारी, भाट, नौकर, चंचल नट, चोर, दूत और बाज़ीगर, सब पेट के लिए पढ़ते हैं, अनेक कलाएँ गढ़ते हैं, पहाड़ चढ़ते हैं और दिन भर शिकार की खोज में घने जंगलों में भटकते हैं। पेट के लिए लोग ऊँचे-नीचे काम और धर्म-अधर्म करते हैं, बेटा-बेटी तक बेच देते हैं। तुलसी निष्कर्ष देते हैं कि पेट की आग समुद्र की बड़वाग्नि से भी बड़ी है और उसे केवल राम रूपी घनश्याम ही बुझा सकते हैं। यहाँ रूपक (राम = घनश्याम, यानी बादल) और अतिशयोक्ति या व्यतिरेक (पेट की आग बड़वाग्नि से बड़ी) है; 'चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी' में 'च' की आवृत्ति से अनुप्रास है।
दूसरा कवित्त। किसान के पास खेती नहीं, भिखारी को भीख नहीं, व्यापारी को व्यापार नहीं, नौकर को नौकरी नहीं। आजीविका से रहित लोग चिंतित होकर एक-दूसरे से पूछते हैं कि कहाँ जाएँ, क्या करें। शास्त्र और लोक दोनों का मत है कि संकट में राम ही कृपा करते हैं। तुलसी कहते हैं कि दरिद्रता रूपी रावण ने दुनिया को दबा लिया है और पापों की आग देखकर वे हाहाकार कर रहे हैं। 'दारिद-दसानन' रूपक है।
सवैया। लोग उन्हें धूर्त कहें, संन्यासी, राजपूत या जुलाहा, तुलसी को किसी की बेटी से अपने बेटे का ब्याह नहीं करना और न किसी की जाति बिगाड़नी है। वे राम के प्रसिद्ध गुलाम हैं। वे माँगकर खा लेते हैं और मस्जिद में सो जाते हैं; न किसी से एक लेना, न दो देना। यह जाति-पाँति के बंधनों से मुक्त, निःस्पृह स्वाभिमान है।
तीनों छंदों का एक संदेश है: सामाजिक संकट का कारण आर्थिक अभाव है, और तुलसी का समाधान राम की भक्ति है, पर उनका चित्रण यथार्थवादी और करुण है। परीक्षा में 'युग-यथार्थ' के प्रश्न का उत्तर दोनों कवित्तों के प्रमाणों से दें।
कवितावली: पेट की आग और तुलसी के युग का यथार्थ: key facts
- तीन छंद, तीन विषय
पहला कवित्त पेट की आग, संतान तक बेचना दूसरा कवित्त खेती-भीख-व्यापार-नौकरी का अभाव, दारिद-दसानन सवैया जाति-पाँति से मुक्त स्वाभिमान - हर छंद के साथ एक पंक्ति याद रखें।
- रूपक और अलंकार
- राम घनश्याम = रूपक
- दारिद-दसानन = रूपक
- आगि बड़वागितें बड़ी = व्यतिरेक/अतिशयोक्ति
- चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी = अनुप्रास
- परीक्षा में पंक्ति से अलंकार पहचानें।
- भाषा और छंद
- कवितावली: ब्रजभाषा | छंद: कवित्त और सवैया
- राम-विलाप वाले अंश (मानस) की भाषा अवधी है; दोनों को न मिलाएँ।
कवितावली: पेट की आग और तुलसी के युग का यथार्थ in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
रोज़गार का संकट
मान लीजिए एक बड़े शहर में अचानक कई कारखाने बंद हो जाते हैं और मज़दूर, दुकानदार और ठेकेदार सभी एक साथ बेकार हो जाते हैं। लोग एक-दूसरे से पूछ रहे हैं, 'अब कहाँ जाएँ, क्या करें?'
इस स्थिति की कवितावली के कौन-से छंद से तुलना की जा सकती है और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- सभी वर्गों का एक साथ बेरोज़गार होना दूसरे कवित्त जैसा है।
- 'कहाँ जाएँ, क्या करें' का प्रश्न उसी कवित्त में आता है।
- इसलिए तुलना दूसरे कवित्त 'खेती न किसान को...' से होगी।
Answer: दूसरा कवित्त; उसमें भी सभी वर्गों की आजीविका छिन गई है और लोग यही प्रश्न पूछते हैं।
Memory hook: किसान, भिखारी, बनिया, नौकर: चारों बेकार।
स्वाभिमान और निःस्पृहता
मान लीजिए आपके मोहल्ले का एक वृद्ध लेखक किसी की सिफ़ारिश या दान लिए बिना, कहीं भी बैठकर खाना खा लेता है और कहता है, 'मुझे न किसी से लेना, न देना।'
इस स्वभाव की तुलना तुलसी के सवैये से कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- किसी पर निर्भर न होना 'न काहू की बेटी सों बेटा ब्याहब' जैसा सामाजिक बंधन से मुक्ति है।
- कहीं भी भोजन और विश्राम 'माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो' जैसी निःस्पृहता है।
- इसलिए तुलना सवैये से बनती है।
Answer: सवैये का स्वाभिमान: सामाजिक बंधनों और लेन-देन से मुक्त निःस्पृह जीवन।
Memory hook: न लेना, न देना, बस राम का गुलाम।
Tricks to remember कवितावली: पेट की आग और तुलसी के युग का यथार्थ
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पेट की आग की सीढ़ी
पढ़ना, कला सीखना, पहाड़ चढ़ना, जंगल भटकना, धर्म-अधर्म करना, संतान बेचना: ऊपर से नीचे की ओर बढ़ती मजबूरी।
Use it when: पहले कवित्त का क्रम याद रखने के लिए।
चार का अभाव
किसान-खेती, भिखारी-भीख, बनिया-व्यापार, नौकर-नौकरी: चार वर्ग, चार अभाव।
Use it when: दूसरे कवित्त के प्रमाण लिखने के लिए।
कवितावली: पेट की आग और तुलसी के युग का यथार्थ: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: राम घनश्याम · 1 mark · MCQBoard level
'तुलसी बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें' में 'घनस्याम' का आशय और अलंकार है—
(क) काला बादल; रूपक
(ख) श्रीकृष्ण; उपमा
(ग) अंधकार; यमक
(घ) समुद्र; अनुप्रास
Try it first, then show the solutionSolution
- घनश्याम का अर्थ यहाँ बादल है, जो आग बुझाता है।
- राम को ही बादल मान लिया गया है, कोई वाचक शब्द नहीं, इसलिए रूपक।
Answer: (क) घनश्याम बादल है और राम को बादल बताने में रूपक है; राम की कृपा पेट की आग बुझाती है।
Example 2: पेट की आग का यथार्थ · 2 marks · Short answerHarder board level
पहले कवित्त के आधार पर बताइए कि तुलसी ने पेट की आग की भयंकरता कैसे दिखाई है (लगभग 40 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- लोगों की मजबूरी: हर काम, धर्म-अधर्म, संतान बेचना।
- तुलना: बड़वाग्नि से भी बड़ी।
Answer: तुलसी बताते हैं कि हर वर्ग के लोग पेट के लिए ऊँचे-नीचे काम और धर्म-अधर्म करते हैं, यहाँ तक कि बेटा-बेटी बेच देते हैं। अंत में वे पेट की आग को समुद्र की बड़वाग्नि से भी बड़ा कहकर उसकी भयंकरता दिखाते हैं।
Example 3: युग की आर्थिक विषमता · 3 marks · Long answerHarder board level
कवितावली के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि तुलसी को अपने युग की आर्थिक विषमता की गहरी समझ थी (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- पहले कवित्त से एक प्रमाण।
- दूसरे कवित्त से दो अभाव।
- 'कहाँ जाएँ, क्या करें' की पीड़ा और निष्कर्ष।
Answer: तुलसी ने पहले कवित्त में दिखाया कि हर वर्ग पेट के लिए धर्म-अधर्म करता और संतान तक बेच देता है। दूसरे कवित्त में उन्होंने बताया कि किसान के पास खेती, भिखारी को भीख, व्यापारी को व्यापार और नौकर को नौकरी नहीं है, और लोग पूछते हैं कि कहाँ जाएँ। इससे उनकी समाज और अर्थव्यवस्था की गहरी समझ दिखती है।
Example 4: दारिद-दसानन · 3 marks · Long answerHarder board level
'दारिद-दसानन दबाई दुनी' में निहित भाव और अलंकार को स्पष्ट कीजिए। तुलसी इस संकट का समाधान किसमें देखते हैं? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- रूपक: दरिद्रता = रावण।
- भाव: दुनिया को दबाने वाली क्रूर शक्ति।
- समाधान: राम की कृपा।
Answer: इस पंक्ति में दरिद्रता को ही दसानन (रावण) बताया गया है, इसलिए रूपक अलंकार है। भाव यह है कि जैसे रावण ने संसार को आतंकित किया था, वैसे ही दरिद्रता ने दुनिया को दबा लिया है। तुलसी इस संकट से मुक्ति राम की कृपा में देखते हैं और दीनबंधु से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
Example 5: स्वाभिमान या पलायन? · 3 marks · Long answerHOTS / competency
कुछ पाठक कहते हैं कि सवैये में तुलसी समाज से विमुख हो गए हैं। क्या आप सहमत हैं? सवैये की पंक्तियों के आधार पर तर्क सहित अपना मत दीजिए (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- कवि जाति और सामाजिक दबावों को अस्वीकार करता है।
- वह राम की भक्ति से जुड़ा रहता है और सबके प्रति निर्भय है।
- यह पलायन से अधिक स्वाभिमान और स्वतंत्रता है।
Answer: मैं पूरी तरह सहमत नहीं हूँ। तुलसी कहते हैं कि उन्हें न किसी की बेटी से बेटे का ब्याह करना है, न किसी की जाति बिगाड़नी है, और वे माँगकर खा लेते हैं। यह समाज की जाति-पाँति की रूढ़ियों के प्रति निःस्पृहता और स्वाभिमान है। वे राम के गुलाम होकर समाज के दबाव से मुक्त हैं, पर समाज की पीड़ा पर पहले दो कवित्तों में वे गहराई से बोलते हैं।
Where students lose marks in कवितावली: पेट की आग और तुलसी के युग का यथार्थ
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: केवल कवित्त का भावार्थ लिखना, प्रमाण न देना
'समझ' सिद्ध करने के लिए पंक्ति या घटना का प्रमाण चाहिए।
Wrong working
तुलसी को आर्थिक विषमता की समझ थी क्योंकि उन्होंने गरीबी लिखी।
Right working
तुलसी ने लिखा कि लोग पेट के लिए बेटा-बेटी बेचते हैं और किसान को खेती नहीं, भिखारी को भीख नहीं।
Do this: हर दावे के साथ एक पंक्ति या वर्णन जोड़ें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: कवितावली की भाषा और मानस की भाषा मिला देना
कवितावली ब्रजभाषा में, मानस अंश अवधी में है।
Do this: अंश के छंद से भाषा पहचानें: कवित्त-सवैया तो ब्रज, चौपाई तो अवधी।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: सवैये को केवल बेफ़िक्री मान लेना
उसमें जाति-पाँति की अस्वीकृति और राम-निष्ठा का स्वाभिमान भी है।
Do this: निःस्पृहता, जाति-निरपेक्षता और भक्ति तीनों का उल्लेख करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: रूपक की जगह उपमा लिख देना
'राम घनस्याम' और 'दारिद-दसानन' में वाचक शब्द नहीं, अभेद है।
Do this: वाचक शब्द न हो तो रूपक पर विचार करें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- युग-यथार्थ के उत्तर में दोनों कवित्तों से कम से कम दो-दो प्रमाण दें।
- सवैये के उत्तर में तीन बातें लिखें: जाति-निरपेक्षता, निःस्पृहता और राम-निष्ठा।
- अलंकार वाले प्रश्नों में 'घनस्याम' और 'दसानन' रूपक के उदाहरण हैं।
- कवित्त-सवैया ब्रजभाषा में हैं; भाषा-छंद के MCQ में यही याद रखें।
- समाधान के रूप में तुलसी के राम-भक्ति वाले दृष्टिकोण को स्पष्ट लिखें।
Practice questions on कवितावली: पेट की आग और तुलसी के युग का यथार्थ
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
'चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी' में किस वर्ण की आवृत्ति है और कौन-सा अलंकार बनता है?
(क) 'र'; यमक
(ख) 'च'; अनुप्रास
(ग) 'ट'; श्लेष
(घ) 'क'; उपमाHint
शब्दों के आरंभ की ध्वनि देखिए।
Answer
(ख) 'च' वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
दूसरे कवित्त के अनुसार लोग किस प्रश्न से व्यथित हैं और यह किस स्थिति को दर्शाता है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
'कहाँ जाएँ, क्या करें'।
Answer
आजीविका छिन जाने से लोग चिंतित होकर एक-दूसरे से पूछते हैं कि कहाँ जाएँ और क्या करें। यह प्रश्न तत्कालीन बेरोज़गारी, असहायता और आर्थिक संकट की स्थिति को दिखाता है।
Q3 · 3 marks · Long answerHarder board level
'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी' में तुलसी ने किस भाव को किस प्रकार उभारा है? अलंकार बताते हुए लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
समुद्र की आग से भी बड़ी: तुलना का उत्कर्ष।
Answer
तुलसी ने पेट की आग की भयंकरता को उभारने के लिए उसे समुद्र की बड़वाग्नि से भी बड़ा बताया है। यहाँ उपमेय (पेट की आग) को उपमान (बड़वाग्नि) से बढ़ाकर कहा गया है, इसलिए व्यतिरेक या अतिशयोक्ति का भाव है। इससे भूख की विवशता और उसके कारण मनुष्य के नैतिक पतन का मार्मिक चित्र बनता है।
Q4 · 3 marks · Long answerHarder board level
सवैये में 'माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो' से तुलसी के किस जीवन-मूल्य का पता चलता है? दो बिंदुओं में लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
निःस्पृहता और धार्मिक-जातीय भेद से मुक्ति।
Answer
पहला, तुलसी निःस्पृह हैं; वे माँगकर खा लेते हैं और किसी से कुछ लेना-देना नहीं रखते, इसलिए सांसारिक लोभ से मुक्त हैं। दूसरा, मस्जिद में सो जाने की बात बताती है कि वे जाति और धर्म की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर सहज स्वीकार का भाव रखते हैं। दोनों से स्वाभिमान और भक्ति की स्वतंत्रता प्रकट होती है।
Q5 · 3 marks · Long answerHOTS / competency
तुलसी ने कवित्तों में समस्याओं का चित्रण यथार्थ रूप में किया, पर समाधान भक्ति में दिया। आपके विचार से क्या आज के संदर्भ में यह समाधान पर्याप्त है? तर्क सहित अपना मत लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
युग की सीमा और भक्ति की आश्वासन-शक्ति दोनों देखें।
Answer
तुलसी के युग में सामाजिक-आर्थिक समाधान की प्रचलित धारणा भक्ति और आस्था थी, इसलिए उन्होंने राम की कृपा को उपाय बताया। आज रोज़गार, शिक्षा और नीति जैसे ठोस उपाय भी ज़रूरी हैं। फिर भी उनकी कविता का मूल्य समस्या के यथार्थ चित्रण और संकट में मानसिक संबल देने में है। इसलिए वह अकेला समाधान नहीं, पर संवेदना जगाने वाला बल है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.तुलसी के अनुसार पेट की आग किससे बड़ी है?Show answer
समुद्र की बड़वाग्नि से।
2.पेट की आग कौन बुझा सकता है?Show answer
राम रूपी घनश्याम (बादल)।
3.दूसरे कवित्त में दरिद्रता को किसकी उपमा दी गई है?Show answer
रावण (दसानन) की, रूपक के रूप में।
4.सवैये में तुलसी ने स्वयं को क्या कहा है?Show answer
राम का प्रसिद्ध गुलाम।
5.कवितावली किस भाषा में है?Show answer
ब्रजभाषा में, कवित्त और सवैया छंदों में।
कवितावली: पेट की आग और तुलसी के युग का यथार्थ: frequently asked questions
कवितावली का कौन-सा अंश पाठ्यक्रम में है?
उत्तर कांड से लिए गए तीन छंद (दो कवित्त और एक सवैया)।
'पेट की आग' का आशय क्या है?
भूख, यानी आजीविका की मजबूरी, जो मनुष्य से ऊँचे-नीचे काम और धर्म-अधर्म तक करवा देती है।
क्या तुलसी जाति-पाँति मानते थे?
सवैये के अनुसार वे जाति की परवाह नहीं करते; जाति की किसी चिंता से उन्होंने खुद को मुक्त बताया।
इस अंश से बोर्ड में क्या पूछा जाता है?
काव्यांश पर MCQ, युग-यथार्थ पर 3 अंक के प्रश्न, पंक्तियों का आशय और अलंकार।