ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव: Class 12 वितान सार और प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'अतीत में दबे पाँव' ओम थानवी का यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें वे पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित सिंधु घाटी सभ्यता के नगर मुअनजो-दड़ो की यात्रा का वर्णन करते हैं। उसका नगर-नियोजन, महाकुंड, ढकी नालियाँ, कुएँ और कलात्मक वस्तुएँ बताती हैं कि यह साधन-संपन्न, पर दिखावे से दूर, समाज से अनुशासित सभ्यता थी।
What ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव is about
'अतीत में दबे पाँव' वितान भाग 2 का तीसरा पाठ है। पत्रकार और लेखक ओम थानवी ने इसमें पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित मुअनजो-दड़ो (मोहनजोदड़ो, अर्थ 'मुर्दों का टीला') की यात्रा का वर्णन किया है। यह यात्रा-वृत्तांत और रिपोर्ताज का मेल है: लेखक खंडहरों में घूमते हुए पुरातत्त्व के तथ्य भी बताते हैं और अपनी अनुभूतियाँ भी।
शीर्षक का अर्थ दोहरा है: लेखक अतीत (पाँच हज़ार साल पुराने शहर) में धीरे-धीरे, दबे पाँव प्रवेश करते हैं, मानो किसी पराए घर में जा रहे हों; और अतीत स्वयं धरती के नीचे दबा हुआ है।
बोर्ड परीक्षा (खंड ग) में वितान से 3 में से 2 प्रश्न, 5-5 अंक के आते हैं। पाठ्यक्रम में लगभग 60 शब्द लिखा है, पर 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्नपत्र में 'लगभग 100 शब्दों में' उत्तर माँगा गया है, इसलिए यहाँ के मॉडल उत्तर लगभग 100 शब्दों के हैं। नगर-नियोजन, जल-संस्कृति, 'साधन-संपन्न पर आडंबरहीन', 'समाज-पोषित सौंदर्य-बोध', 'ताकत से नहीं, समझ से अनुशासित' और 'अधूरी सीढ़ियाँ' वाले कथन सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।
Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27
ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
मुअनजो-दड़ो और हड़प्पा दुनिया के दो सबसे पुराने नियोजित शहर माने जाते हैं। मुअनजो-दड़ो ताम्र काल के शहरों में सबसे बड़ा और उत्कृष्ट है; यह लगभग दो सौ हैक्टर में फैला था और इसकी आबादी लगभग पचासी हज़ार थी। हड़प्पा के अधिकांश साक्ष्य रेललाइन बिछाते समय नष्ट हो गए। सिंधु के पानी से बचने के लिए पूरा शहर ईंटों से बनाए गए कृत्रिम टीलों पर बसा था। इसकी खूबी है कि आज भी इसकी सड़कों-गलियों में घूमा जा सकता है।
सबसे ऊँचे चबूतरे पर बाद में बना बौद्ध स्तूप है। 1922 में राखालदास बनर्जी इसी की खोज में आए थे; फिर जॉन मार्शल के निर्देश पर बड़ी खुदाई हुई और भारत की सभ्यता मिस्र और मेसोपोटामिया के समकक्ष सिद्ध हुई। स्तूप वाला हिस्सा 'गढ़' कहलाता है, जहाँ प्रशासनिक इमारतें, सभा-भवन, ज्ञानशाला, कोठार और महाकुंड हैं। सड़कें ग्रिड प्लान में सीधी या आड़ी हैं। 'दैव मार्ग' के आगे महाकुंड (लगभग 40 फुट लंबा, 25 फुट चौड़ा, 7 फुट गहरा) है; उसमें पक्की ईंटें, चूने-चिरोड़ी का गारा और डामर हैं ताकि पानी न रिसे; पास में दोहरे घेरे वाला कुआँ और ढकी नालियाँ हैं। कोठार में संभवतः कर का अनाज जमा होता था। यहाँ गेहूँ, जौ, कपास, सरसों, चना आदि की खेती होती थी; सूती कपड़ा दुनिया के दो सबसे पुराने नमूनों में है और रंगाई का कारखाना भी मिला।
पूरब की बस्ती रईसों की थी। 'डीके' हलके (काशीनाथ दीक्षित के नाम पर) में 33 फुट चौड़ी मुख्य सड़क है, जिस पर कोई घर नहीं खुलता; दरवाज़े भीतर की गलियों में हैं, ठीक वैसे जैसे चंडीगढ़ में कार्बूजिए ने बनाया। हर घर में स्नानघर है, नालियाँ ढकी हैं और शहर में लगभग सात सौ कुएँ थे; लेखक पूछते हैं कि क्या इसे जल-संस्कृति कहें। सब घर 1:2:4 अनुपात की पकी ईंटों के हैं। यहीं याजक-नरेश की मूर्ति और प्रसिद्ध 'नर्तकी' मिली। कामगारों की बस्ती में दो-दो कमरों के छोटे घर हैं।
सूने घरों में घूमते हुए लेखक को लगता है मानो वे किसी पराए घर में दबे पाँव घुस आए हों; उन्हें राजस्थान का उजड़ा गाँव कुलधरा याद आता है। अजायबघर में औज़ार, बर्तन, मुहरें, खिलौने, गहने हैं, पर कोई हथियार नहीं। इससे लगता है कि यहाँ सैन्य सत्ता नहीं, समझ से बना अनुशासन था। न भव्य महल, न मंदिर, न समाधियाँ; नरेश का मुकुट भी छोटा है। यह 'लो-प्रोफ़ाइल' सभ्यता थी, जिसका सौंदर्य-बोध राज या धर्म से नहीं, समाज से पोषित था। अब सिंधु के रिसते पानी से क्षार और दलदल की समस्या के कारण खुदाई बंद है और खंडहरों को बचाना ही बड़ी चुनौती है।
Themes and message
उन्नत नगर-नियोजन
ग्रिड प्लान की सड़कें, कृत्रिम टीलों पर बसावट, सड़क पर न खुलने वाले घर, ढकी नालियाँ, एक जैसी ईंटें और बस्तियों का बँटवारा दिखाते हैं कि पाँच हज़ार साल पहले भी शहर सोच-समझकर बसाया गया था।
From the text: मुख्य सड़क 33 फुट चौड़ी है, जिस पर दो बैलगाड़ियाँ साथ-साथ चल सकती थीं।
जल-संस्कृति
नदी, लगभग सात सौ कुएँ, महाकुंड, हर घर में स्नानघर और बेजोड़ पानी-निकासी, ये सब पानी और स्वच्छता के प्रति सजगता दिखाते हैं।
From the text: लेखक पूछते हैं: "क्या सिंधु घाटी सभ्यता को हम जल-संस्कृति कह सकते हैं?"
आडंबरहीन, समझ से अनुशासित समाज
न हथियार, न भव्य महल-मंदिर, न राजाओं की समाधियाँ; फिर भी नगर-योजना, ईंटों, मुहरों और सफ़ाई में एकरूपता है। यह शक्ति से नहीं, सामूहिक समझ से चलने वाला समाज था।
From the text: "वहाँ अनुशासन ज़रूर था, पर ताकत के बल पर नहीं।"
समाज-पोषित कला और सौंदर्य-बोध
मूर्तियाँ, चित्रित मृद्-भांड, मुहरें, आभूषण, लिपि, कशीदाकारी, सब में बारीक कला है, पर आकार छोटा है; सभ्यता तकनीक से अधिक कला-सिद्ध है।
From the text: "जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।"
खंडहरों में धड़कता अतीत
लेखक के लिए खंडहर केवल इतिहास नहीं, बीते जीवन का अनुभव हैं: रसोई की गंध, बैलगाड़ी की रुन-झुन, घर में घुसने का अपराध-बोध।
From the text: "वहाँ से आप इतिहास को नहीं, उसके पार झाँक रहे हैं।"
Characters
लेखक (ओम थानवी)
यात्री और वाचक।
- जिज्ञासु और प्रश्नशील: 'क्या कार्बूजिए ने यह सीख मुअनजो-दड़ो से ली?'
- संवेदनशील: खंडहरों में अतीत को महसूस करते हैं
- तुलनात्मक दृष्टि: राजस्थान, कुलधरा, चंडीगढ़ से तुलना
- तथ्यप्रिय: पुरातत्त्वविदों और इतिहासकारों के मत उद्धृत करते हैं
"देखना अपनी आँख से देखना है। बाकी सब आँख का झपकना है।"
पुरातत्त्ववेत्ता और विद्वान
जिनकी खोजें और मत पाठ में आते हैं।
- राखालदास बनर्जी (1922, स्तूप की खोज से शुरुआत)
- जॉन मार्शल (महानिदेशक, व्यापक खुदाई)
- काशीनाथ दीक्षित (डीके), हेरल्ड हरग्रीव्ज (एचआर), माधोस्वरूप वत्स (वीएस)
- मार्टिमर वीलर, इरफ़ान हबीब, ग्रेगरी पोसेल, शीरीन रत्नागर
खंडहरों के हलकों के नाम खुदाई कराने वालों के नाम पर रखे गए हैं।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| चित्रात्मक और अनुभूतिपरक शैली | रसोई की खिड़की पर उसकी गंध महसूस करना, बैलगाड़ी की रुन-झुन सुनना | पाठक भी खंडहरों में घूमने का अनुभव करता है। |
| प्रश्न शैली | 'क्या सिंधु घाटी सभ्यता को हम जल-संस्कृति कह सकते हैं?', 'क्या उस वक्त यहाँ जंगल भी थे?' | पाठक को सोचने और अनुमान लगाने के लिए आमंत्रित करती है। |
| तुलना | चंडीगढ़ (कार्बूजिए), कुलधरा, राजस्थान की धूप, मिस्र और सुमेर | प्राचीन को आज और आसपास से जोड़कर समझाती है। |
| सूक्ति-शैली | "कहते हैं, कविता में से कविता निकलती है।" | विचार को संक्षिप्त और यादगार बनाती है। |
| अंग्रेज़ी-उर्दू शब्दों का मेल | 'ग्रिड प्लान', 'लो-प्रोफ़ाइल', 'इलहाम', 'अजायबघर' | पत्रकारीय, सहज और आधुनिक भाषा। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
वहाँ से आप इतिहास को नहीं, उसके पार झाँक रहे हैं।
लेखक: आँगन की अधूरी सीढ़ियों पर खड़े होने का अनुभव
खंडहर इतिहास की किताब से आगे, जीते-जागते जीवन का अनुभव कराते हैं।
देखना अपनी आँख से देखना है। बाकी सब आँख का झपकना है।
लेखक: स्तूप से पहली बार मुअनजो-दड़ो को देखकर
प्रत्यक्ष अनुभव का महत्त्व; पढ़ना-सुनना उसकी जगह नहीं ले सकता।
वहाँ अनुशासन ज़रूर था, पर ताकत के बल पर नहीं।
लेखक (विद्वानों के मत के आधार पर): अजायबघर में हथियार न मिलने पर
सिंधु सभ्यता समझ से अनुशासित थी, सैन्य सत्ता से नहीं।
लघुता में भी महत्ता अनुभव करने वाली संस्कृति।
लेखक: छोटे मुकुट, छोटी नावें, छोटी मूर्तियों की चर्चा
आडंबरहीन, 'लो-प्रोफ़ाइल' सभ्यता।
जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।
एक पुरातत्त्ववेत्ता (लेखक द्वारा उद्धृत): सिंधु सभ्यता के सौंदर्य-बोध पर
कला राजा या पुरोहित के लिए नहीं, आम समाज के जीवन के लिए थी।
लोग निकल गए, वक्त वहीं रह गया।
लेखक: राजस्थान के उजड़े गाँव कुलधरा की याद
खंडहरों में ठहरा हुआ समय; मुअनजो-दड़ो जैसा ही अनुभव।
ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
जल-प्रबंधन
मान लीजिए आपके शहर में थोड़ी-सी बारिश में ही सड़कें पानी से भर जाती हैं क्योंकि नालियाँ खुली और कचरे से जाम हैं।
मुअनजो-दड़ो की व्यवस्था से इसकी तुलना कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- मुअनजो-दड़ो में हर घर की नाली हौदी से होकर ढकी नालियों के जाल से जुड़ती थी; मुख्य सड़क के दोनों ओर समांतर ढकी नालियाँ थीं।
- आज के शहर उसी सिद्धांत (ढकी, जुड़ी, नियोजित निकासी) से सीख सकते हैं।
Answer: पाँच हज़ार साल पहले का शहर पानी-निकासी में हमारे कई आधुनिक शहरों से आगे था। नियोजित, ढकी और साफ़ रखी गई नालियाँ ही जलभराव और बीमारी से बचा सकती हैं।
Memory hook: ढकी नाली, साफ़ गली।
दिखावे के बिना समृद्धि
कल्पना कीजिए कि एक धनी परिवार बेटी की शादी बहुत सादगी से करता है और बचा हुआ पैसा गाँव के स्कूल में पुस्तकालय बनवाने में लगा देता है।
इसकी तुलना सिंधु सभ्यता के स्वभाव से कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- सिंधु सभ्यता साधन-संपन्न थी, पर उसमें भव्य महल, मंदिर या समाधियाँ नहीं थीं।
- उसकी संपन्नता सामूहिक सुविधाओं (कुएँ, स्नानघर, नालियाँ, कोठार) में दिखती थी।
Answer: उस परिवार की तरह सिंधु सभ्यता भी 'लो-प्रोफ़ाइल' थी: समृद्धि का उपयोग दिखावे में नहीं, समाज की भलाई में होता था। यही 'लघुता में भी महत्ता' है।
Memory hook: छोटा मुकुट, बड़ी सभ्यता।
धरोहर का संरक्षण
मान लीजिए आपके शहर के पास एक पुराना किला है जिसकी दीवारों पर लोग नाम लिखते हैं और कचरा फैलाते हैं।
'अतीत में दबे पाँव' के आधार पर बताइए कि आप लोगों को क्या समझाएँगे।
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक खंडहरों में भी दबे पाँव, सम्मान से चलते हैं, मानो किसी के घर में हों।
- मुअनजो-दड़ो में अब खुदाई बंद है और खंडहरों को बचाना ही बड़ी चुनौती है; धरोहर एक बार नष्ट हुई तो लौटती नहीं।
Answer: मैं समझाऊँगा कि ऐतिहासिक स्थल हमारे पूर्वजों के जीवन के दस्तावेज़ हैं; उन्हें गंदा करना अपनी ही विरासत मिटाना है। हमें वहाँ सम्मान से जाना और उनकी रक्षा में मदद करनी चाहिए।
Memory hook: धरोहर में दबे पाँव।
Topics in this chapter
How the board asks ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| कथन की पुष्टि (5 अंक) | 'साधन-संपन्न पर भव्यता का आडंबर नहीं'; 'सौंदर्य-बोध समाज-पोषित था'; 'ताकत से नहीं, समझ से अनुशासित'। | कथन का अर्थ एक वाक्य में, फिर पाठ से तीन-चार पुरातात्त्विक प्रमाण (हथियार नहीं, महल-मंदिर नहीं, छोटा मुकुट, एकरूप ईंटें-मुहरें), निष्कर्ष। |
| आशय स्पष्ट कीजिए (5 अंक) | अधूरी सीढ़ियाँ और 'दुनिया की छत'; 'खंडहर धड़कती ज़िंदगियों के दस्तावेज़'। | संदर्भ + लेखक की अनुभूति + गहरा अर्थ (अतीत से जुड़ाव) + उदाहरण। |
| तर्कपूर्ण मत (5 अंक) | क्या सिंधु सभ्यता को जल-संस्कृति कहा जा सकता है? नगर-नियोजन आज के शहरों से कैसे बेहतर था? | पक्ष चुनें, फिर नदी, कुएँ, महाकुंड, स्नानघर, नालियों जैसे प्रमाण; आज से तुलना। |
| वर्णनात्मक (5 अंक) | महाकुंड, मुख्य सड़क, घरों की बनावट या अजायबघर का वर्णन। | आकार-माप, सामग्री, विशेषता और उसका महत्त्व; संख्याएँ सही लिखें। |
Tricks to remember ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
संख्याएँ
200 हैक्टर, 85,000 आबादी; स्तूप का चबूतरा 25 फुट; महाकुंड 40×25×7 फुट, 8 स्नानघर; कोठार 3 कतारें × 9 चौकियाँ; मुख्य सड़क 33 फुट; लगभग 700 कुएँ; ईंटें 1:2:4; 50,000 से ज़्यादा पंजीकृत वस्तुएँ; खुदाई केवल एक-तिहाई।
Use it when: वर्णनात्मक प्रश्नों में प्रमाण के लिए।
हलकों के नाम
डीके = दीक्षित काशीनाथ (मुख्य सड़क, याजक-नरेश); एचआर = हेरल्ड हरग्रीव्ज (नर्तकी, कंकाल); वीएस = वत्स माधोस्वरूप (रंगरेज़ का कारखाना)।
Use it when: तथ्य और वर्णन में।
'न' वाली सभ्यता
न हथियार, न महल, न मंदिर, न समाधि, न बड़ा मुकुट, न बड़ी नाव = आडंबरहीन, समझ से अनुशासित।
Use it when: 'साधन-संपन्न पर आडंबरहीन' वाले प्रश्न में।
ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: साधन-संपन्न, पर आडंबरहीन · 5 marks · Long answerBoard level
सिंधु सभ्यता साधन-संपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था। कैसे? (लगभग 100 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- संपन्नता के प्रमाण।
- आडंबर के अभाव के प्रमाण।
- निष्कर्ष।
Answer: मुअनजो-दड़ो सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा और सबसे समृद्ध शहर माना गया है। यहाँ उन्नत खेती, सूत की कताई-बुनाई-रंगाई, विशाल कोठार, सात सौ के करीब कुएँ, हर घर में स्नानघर, ढकी नालियाँ, ताँबे-काँसे के बर्तन, गहने और सुंदर मुहरें थीं, जो इसकी संपन्नता बताते हैं। फिर भी यहाँ न भव्य राजमहल मिले, न मंदिर, न राजाओं या महंतों की समाधियाँ। मूर्तियाँ छोटी हैं, नरेश का मुकुट भी छोटा है और नावें मिस्र की नावों जैसी होकर भी छोटी हैं। इसलिए लेखक इसे 'लो-प्रोफ़ाइल' सभ्यता कहते हैं, जो लघुता में भी महत्ता अनुभव करती थी।
Example 2: समझ से अनुशासित · 5 marks · Long answerHarder board level
पुरातत्त्व के किन चिह्नों के आधार पर कहा जा सकता है कि सिंधु सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी? (लगभग 100 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- हथियारों का अभाव।
- एकरूपता।
- शक्ति-प्रदर्शन का अभाव।
Answer: मुअनजो-दड़ो के अजायबघर में औज़ार तो हैं, पर हथियार कोई नहीं; हड़प्पा से हरियाणा तक पूरी सिंधु सभ्यता में राजतंत्र जैसे हथियार नहीं मिले। इससे लगता है कि यहाँ कोई सैन्य सत्ता नहीं थी। फिर भी पूरे शहर में गज़ब का अनुशासन था: ग्रिड प्लान की सड़कें, 1:2:4 अनुपात की एक जैसी ईंटें, एक-सी वास्तु शैली के घर, एकरूप मुहरें और बाट, सुव्यवस्थित पानी-निकासी और सफ़ाई। साथ ही महल, मंदिर और समाधियों जैसे शक्ति-प्रदर्शन के चिह्न भी नहीं हैं। ये प्रमाण बताते हैं कि लोग डर से नहीं, सामूहिक समझ और सहमति से नियम मानते थे।
Example 3: अधूरी सीढ़ियाँ · 5 marks · Long answerHarder board level
'यहाँ किसी आँगन की टूटी-फूटी सीढ़ियाँ अब आपको कहीं नहीं ले जातीं... वहाँ से आप इतिहास को नहीं, उसके पार झाँक रहे हैं।' इस कथन के पीछे लेखक का क्या आशय है? (लगभग 100 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सीढ़ियों की वर्तमान दशा।
- दुनिया की छत।
- इतिहास के पार।
Answer: मुअनजो-दड़ो के घरों की ऊपरी मंज़िलें नष्ट हो चुकी हैं, इसलिए आँगन की सीढ़ियाँ आकाश की ओर अधूरी रह जाती हैं; वे अब किसी कमरे तक नहीं पहुँचातीं। फिर भी उन पर खड़े होकर लेखक को लगता है कि वे 'दुनिया की छत' पर हैं, क्योंकि यह संसार की सबसे पुरानी नगर-सभ्यताओं में से एक है। 'इतिहास के पार झाँकना' का अर्थ है कि यहाँ केवल तिथियाँ और तथ्य नहीं, बल्कि पाँच हज़ार साल पहले के लोगों का जीता-जागता जीवन महसूस होता है: उनका घर, आँगन, रसोई, रोज़ की चहल-पहल। खंडहर अतीत से सीधा संवाद कराते हैं।
Example 4: जल-संस्कृति · 5 marks · Long answerHOTS / competency
नदी, कुएँ, स्नानागार और बेजोड़ निकासी-व्यवस्था को देखते हुए लेखक पूछते हैं कि क्या सिंधु घाटी सभ्यता को जल-संस्कृति कह सकते हैं। आपका उत्तर लेखक के पक्ष में है या विपक्ष में? तर्क दीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पक्ष चुनें।
- जल से जुड़े प्रमाण।
- सीमा और निष्कर्ष।
Answer: मेरा उत्तर लेखक के पक्ष में है। सभ्यता सिंधु नदी के किनारे बसी और बाढ़ से बचने के लिए ऊँचे टीलों पर शहर बनाया गया। केवल मुअनजो-दड़ो में लगभग सात सौ कुएँ थे और इतिहासकारों के अनुसार यह कुएँ खोदकर भू-जल तक पहुँचने वाली पहली ज्ञात संस्कृति थी। अनुष्ठानिक महाकुंड, हर घर में स्नानघर, ढकी नालियों का जाल और कुओं से सिंचाई, सब पानी के प्रति गहरी समझ दिखाते हैं। यहाँ तक कि सभ्यता का पतन भी शायद पानी की कमी से हुआ। हाँ, खेती, व्यापार और कला भी उतने ही महत्त्वपूर्ण थे, पर जीवन का केंद्र जल ही था।
Example 5: मुअनजो-दड़ो और आज के शहर · 5 marks · Long answerHOTS / competency
मुअनजो-दड़ो के नगर-नियोजन से आज के शहर क्या सीख सकते हैं? पाठ के आधार पर लिखिए। (लगभग 100 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- नियोजन की विशेषताएँ।
- आज की समस्याएँ।
- सीख।
Answer: मुअनजो-दड़ो में सीधी-आड़ी सड़कें, 33 फुट चौड़ी मुख्य सड़क, सड़क की ओर न खुलने वाले घर, हर घर में स्नानघर, ढकी नालियाँ और सामूहिक कुएँ थे; बस्तियाँ काम के अनुसार बँटी थीं। लेखक कहते हैं कि आज नियोजन के नाम पर भी अराजकता ज़्यादा मिलती है, और ग्रिड शैली के आधुनिक शहर भी नीरस लगते हैं। आज के शहर इससे जल-निकासी को नियोजित और ढका रखना, पानी के स्रोतों की रक्षा, सबके लिए स्वच्छता और दिखावे की जगह सुविधा पर खर्च करना सीख सकते हैं। सबसे बड़ी सीख है नियमों का सामूहिक पालन, जो ताकत से नहीं, समझ से आए।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
पुरातत्त्व के किन चिह्नों के आधार पर कहा जा सकता है कि सिंधु सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी? (लगभग 100 शब्द) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| हथियार न मिलना; सैन्य सत्ता के प्रमाण नहीं | 1 |
| नगर-योजना, ईंटों (1:2:4), मुहरों, पानी और सफ़ाई-व्यवस्था में एकरूपता | 2 |
| महल, मंदिर, समाधियों जैसे शक्ति-प्रदर्शन का अभाव; निष्कर्ष और प्रस्तुति | 2 |
Where students lose marks in ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: बौद्ध स्तूप को सिंधु सभ्यता का निर्माण बताना
स्तूप सभ्यता के बिखरने के बाद एक जीर्ण टीले पर बना; राखालदास बनर्जी इसी की खोज में आए थे।
Do this: 'स्तूप बाद का है' स्पष्ट लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: पाठ को कहानी या निबंध कहना
यह लेखक की मुअनजो-दड़ो यात्रा का वृत्तांत (यात्रा-वृत्तांत/रिपोर्ताज) है।
Do this: विधा: यात्रा-वृत्तांत लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'समझ से अनुशासित' वाले प्रश्न में केवल कथन दोहराना
प्रश्न 'पुरातत्त्व के किन चिह्नों के आधार पर' पूछता है; प्रमाण न देने पर विषय-वस्तु के अंक कटते हैं।
Do this: हथियार न मिलना, एकरूप नगर-योजना, ईंटें, मुहरें, सफ़ाई-व्यवस्था जैसे ठोस चिह्न लिखें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: पूरब की बस्ती को गरीबों की बस्ती लिखना
लेखक बताते हैं कि आज पूरब की बस्तियाँ गरीबों की मानी जाती हैं, पर मुअनजो-दड़ो में पूरब की बस्ती रईसों की थी; कामगारों की बस्ती दक्षिण में थी।
Do this: दिशाएँ याद रखें: पश्चिम में गढ़, पूरब में रईस, दक्षिण में कामगार।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 5 marks · Long answerBoard level
मुअनजो-दड़ो के महाकुंड की विशेषताएँ लिखिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
माप, सीढ़ियाँ, स्नानघर, ईंटें, गारा, कुआँ, नालियाँ।
Answer
महाकुंड 'दैव मार्ग' नामक गली के आगे है। यह लगभग चालीस फुट लंबा, पच्चीस फुट चौड़ा और सात फुट गहरा है। इसमें उत्तर और दक्षिण से सीढ़ियाँ उतरती हैं; तीन ओर साधुओं के कक्ष हैं और उत्तर में दो पाँत में आठ स्नानघर हैं, जिनमें किसी का द्वार दूसरे के सामने नहीं खुलता। पानी न रिसे और बाहर का अशुद्ध पानी न आए, इसके लिए पक्की ईंटों के बीच चूने और चिरोड़ी का गारा तथा दीवार में डामर लगाया गया है। पानी के लिए दोहरे घेरे वाला कुआँ और निकासी के लिए ढकी नालियाँ हैं। माना जाता है कि सामूहिक स्नान किसी अनुष्ठान का अंग था।
Q2 · 5 marks · Long answerBoard level
मुअनजो-दड़ो के घरों और गलियों की बनावट का वर्णन कीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
सड़क पर न खुलना, खिड़की नहीं, ईंटें, स्नानघर, आकार।
Answer
मुख्य सड़क के दोनों ओर घर हैं, पर सबकी पीठ सड़क की ओर है; दरवाज़े भीतर की गलियों में खुलते हैं। छोटी सड़कें नौ से बारह फुट चौड़ी हैं और उनसे छोटी गलियाँ भी हैं। सामने की दीवार में केवल प्रवेश द्वार है, खिड़की नहीं; खिड़कियाँ शायद ऊपर की मंज़िल में थीं। सब घर 1:2:4 अनुपात की पकी ईंटों के हैं। ज़्यादातर घर लगभग तीस-गुणा-तीस फुट के हैं, कुछ दुगने-तिगुने; 'मुखिया' के घर में दो आँगन और लगभग बीस कमरे हैं। हर घर में स्नानघर है और नालियाँ हौदी से होकर ढकी नालियों के जाल से जुड़ती हैं। किसी घर में छज्जे के चिह्न नहीं हैं।
Q3 · 5 marks · Long answerHarder board level
'सिंधु सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध है जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।' ऐसा क्यों कहा गया है? (लगभग 100 शब्द)
Hint
महल-मंदिर नहीं; कला रोज़मर्रा की चीज़ों में।
Answer
दूसरी प्राचीन सभ्यताओं में कला राजाओं और पुरोहितों की शक्ति दिखाने के लिए महलों, मंदिरों, पिरामिडों और विशाल मूर्तियों में दिखती है। सिंधु सभ्यता में ऐसा कुछ नहीं मिला। यहाँ की कला आम जीवन की चीज़ों में है: चित्रित मृद्-भांड, उन पर मनुष्य, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की छवियाँ, बारीक उकेरी मुहरें, खिलौने, आभूषण, केश-विन्यास, सोने की सुइयों से कशीदाकारी और सुघड़ लिपि। ये सब समाज के सामान्य लोगों के उपयोग और रुचि के लिए बने थे। इसलिए कहा गया कि यहाँ आकार की भव्यता नहीं, कला की भव्यता है और यह सौंदर्य-बोध समाज ने पाला था।
Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level
'टूटे-फूटे खंडहर, सभ्यता और संस्कृति के इतिहास के साथ-साथ धड़कती ज़िंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज़ होते हैं'—इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
रसोई की गंध, बैलगाड़ी, अपराध-बोध, कुलधरा।
Answer
खंडहर केवल यह नहीं बताते कि कौन-सी सभ्यता कब थी; वे उन लोगों के रोज़मर्रा के जीवन की झलक भी देते हैं जो कभी वहाँ रहते थे। लेखक को मुअनजो-दड़ो की रसोई की खिड़की पर खड़े होकर उसकी गंध, सुनसान सड़क पर बैलगाड़ी की रुन-झुन और सूने घरों में हवा की लय सुनाई देती है। घरों में घुसते हुए उन्हें किसी पराए घर में जाने का अपराध-बोध होता है, क्योंकि लगता है कल तक कोई यहाँ रहता था। कुलधरा की तरह लगता है कि लोग चले गए, पर समय वहीं ठहरा है। इस तरह खंडहर उन अनकहे, अनछुए जीवन-क्षणों के भी दस्तावेज़ हैं।
Q5 · 5 marks · Long answerHarder board level
मुअनजो-दड़ो की खेती, उद्योग और व्यापार के बारे में पाठ से क्या जानकारी मिलती है? (लगभग 100 शब्द)
Hint
रबी फ़सलें, कपास, रंगाई, कोठार, मेलुहा।
Answer
पहले माना जाता था कि सिंधु घाटी के लोग अन्न आयात करते थे, पर नई खोजों ने इसे गलत सिद्ध किया; कुछ विद्वान इसे मूलतः खेतिहर और पशुपालक सभ्यता मानते हैं। इरफ़ान हबीब के अनुसार लोग रबी की फ़सल लेते थे; गेहूँ, जौ, कपास, सरसों और चने के प्रमाण मिले हैं, ज्वार-बाजरा-रागी, खजूर, खरबूज़े और अंगूर भी उगाए जाते थे। सूती कपड़ा दुनिया के दो सबसे पुराने नमूनों में है और रंगाई का कारखाना भी मिला। कर का अनाज विशाल कोठार में रखा जाता था। ऊन और लिनन शायद सुमेर से आते थे और सूत वहाँ जाता था; मेसोपोटामिया के शिलालेखों में इसके लिए 'मेलुहा' शब्द मिलता है।
Q6 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
सिंधु घाटी सभ्यता का कोई पढ़ा जा सकने वाला लिखित साक्ष्य नहीं मिला; केवल अवशेषों के आधार पर धारणाएँ बनी हैं। इस पाठ के किन अनुमानों से आप सहमत हैं और किन पर प्रश्न उठाना चाहेंगे? तर्क दीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
कोठार, कॉलेज ऑफ़ प्रीस्ट्स, सैन्य सत्ता का अभाव, निम्न वर्ग।
Answer
मैं नगर-नियोजन, पानी-निकासी और एकरूप ईंटों जैसे अनुमानों से पूरी तरह सहमत हूँ, क्योंकि वे सीधे खंडहरों में दिखते हैं। पर कई अनुमान केवल संभावनाएँ हैं: कोठार में 'कर' का अनाज था, बड़ी इमारत 'कॉलेज ऑफ़ प्रीस्ट्स' थी या बीस खंभों वाला हॉल 'सचिवालय' था, ये बनावट देखकर लगाए गए अंदाज़े हैं। हथियार न मिलने से सैन्य सत्ता न होने का अनुमान भी अधूरा हो सकता है, क्योंकि अभी केवल एक-तिहाई हिस्से की खुदाई हुई है। लेखक स्वयं मानते हैं कि निम्न वर्ग की बस्तियाँ शायद दूर रही हों। लिपि पढ़ी जाने पर ही कई धारणाएँ पक्की या गलत सिद्ध होंगी।
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1.मुअनजो-दड़ो की आबादी और क्षेत्रफल कितना माना जाता है?Show answer
लगभग पचासी हज़ार आबादी, दो सौ हैक्टर क्षेत्र।
2.महाकुंड तक ले जाने वाली गली को क्या नाम दिया गया है?Show answer
दैव मार्ग (डिविनिटि स्ट्रीट)।
3.मुख्य सड़क कितनी चौड़ी है?Show answer
तैंतीस फुट।
4.चंडीगढ़ में सड़क पर न खुलने वाले घरों की शैली किसने अपनाई?Show answer
कार्बूजिए ने।
5.'नर्तकी' मूर्ति के बारे में किसने कहा कि संसार में इसके जोड़ की चीज़ शायद ही हो? वह अब कहाँ है?Show answer
मार्टिमर वीलर ने; अब दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में।
6.मुअनजो-दड़ो में खुदाई अब क्यों बंद है?Show answer
सिंधु के पानी के रिसाव से क्षार और दलदल की समस्या के कारण; अब खंडहरों को बचाना ही चुनौती है।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- लेखक: ओम थानवी; विधा: यात्रा-वृत्तांत; स्थान: मुअनजो-दड़ो ('मुर्दों का टीला'), सिंध, पाकिस्तान।
- ताम्र काल का सबसे बड़ा शहर; 200 हैक्टर, 85,000 आबादी; कृत्रिम टीलों पर बसा।
- खोज: 1922 राखालदास बनर्जी (स्तूप), जॉन मार्शल; भारत मिस्र-मेसोपोटामिया के समकक्ष।
- गढ़: स्तूप, महाकुंड (40×25×7 फुट, 8 स्नानघर, चिरोड़ी-चूना, डामर), कोठार (3×9), कॉलेज ऑफ़ प्रीस्ट्स, 20 खंभों का हॉल।
- नगर: ग्रिड प्लान, 33 फुट मुख्य सड़क, घर सड़क पर नहीं खुलते (कार्बूजिए-चंडीगढ़), हर घर में स्नानघर, ढकी नालियाँ, ~700 कुएँ, ईंटें 1:2:4।
- हलके: डीके (दीक्षित), एचआर (हरग्रीव्ज, नर्तकी), वीएस (वत्स, रंगरेज़); पूरब रईस, दक्षिण कामगार।
- हथियार नहीं, महल-मंदिर नहीं, छोटा मुकुट = 'लो-प्रोफ़ाइल', समझ से अनुशासित; सौंदर्य-बोध समाज-पोषित; जल-संस्कृति?
- अनुभूति: अधूरी सीढ़ियाँ, 'दुनिया की छत', दबे पाँव, कुलधरा; उत्तर लगभग 100 शब्द (प्रतिदर्श प्रश्नपत्र)।
ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव: frequently asked questions
'अतीत में दबे पाँव' किस विधा की रचना है?
यह ओम थानवी का यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें मुअनजो-दड़ो की यात्रा के अनुभव और पुरातात्त्विक तथ्य साथ-साथ हैं।
मुअनजो-दड़ो का अर्थ क्या है और यह कहाँ है?
मुअनजो-दड़ो का अर्थ है 'मुर्दों का टीला'। यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत में है और आज मोहनजोदड़ो नाम से जाना जाता है।
मुअनजो-दड़ो की खुदाई किसने शुरू की?
1922 में राखालदास बनर्जी बौद्ध स्तूप की खोज में आए और उन्हें ईसा पूर्व के निशान मिले; फिर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल के निर्देश पर व्यापक खुदाई हुई।
वितान के प्रश्नों में कितने शब्दों में उत्तर लिखें?
पाठ्यक्रम 2026-27 में लगभग 60 शब्द लिखा है, जबकि प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27 में 5 अंक के लिए 'लगभग 100 शब्दों में' उत्तर माँगा गया है। प्रश्नपत्र के निर्देश का पालन करें; तैयारी लगभग 100 शब्दों की रखें।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT वितान भाग 2 (Reprint 2026-27), ओम थानवी – अतीत में दबे पाँव