स्वर्ग बना सकते हैं (रामधारी सिंह 'दिनकर') ICSE Class 9: भावार्थ और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'स्वर्ग बना सकते हैं' दिनकर की 'कुरुक्षेत्र' से लिया गया अंश है, जिसमें शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह युधिष्ठिर को समझाते हैं कि धरती किसी की खरीदी हुई दासी नहीं; सब मनुष्य जन्म से समान हैं। जब तक सुख न्यायपूर्ण ढंग से सबको नहीं मिलेगा, शांति नहीं होगी; मनुष्य चाहे तो धरती को स्वर्ग बना सकता है।
What स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर' is about
'स्वर्ग बना सकते हैं' राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता है, जो उनके प्रबंध-काव्य 'कुरुक्षेत्र' से ली गई है। CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में साहित्य सागर की यह कविता कक्षा 9 के लिए निर्धारित है।
महाभारत के युद्ध के बाद शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह धर्मराज युधिष्ठिर को उपदेश देते हैं। वे कहते हैं कि धरती पर सबका समान अधिकार है; प्रकाश, वायु और विकास पर सबका हक है। जब तक सुख-साधनों का न्यायपूर्ण और समान वितरण नहीं होगा, तब तक संघर्ष और अशांति बनी रहेगी। ईश्वर ने धरती पर इतने सुख बिखेरे हैं कि यदि मनुष्य स्वार्थ, भय और संचय छोड़ दे, तो पल में धरती को स्वर्ग बना सकता है।
2025 के ICSE हिंदी बोर्ड प्रश्न-पत्र में इसी कविता का पद्यांश पूछा गया था। परीक्षकों के अनुसार छात्रों ने युधिष्ठिर और भीष्म पितामह के नाम सही नहीं लिखे, आदर्श जीवन की विशेषताएँ नहीं दीं, बाधाओं के उदाहरण नहीं दिए और 'भव' का अर्थ धरती लिखा, जबकि उसका अर्थ संसार है।
Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में साहित्य सागर की कविता पर प्रश्न (पद्यांश और चार उप-प्रश्न) 10 अंक का होता है।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र और परीक्षकों की रिपोर्ट
स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर': explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
प्रसंग: महाभारत के युद्ध के बाद कुरुक्षेत्र में शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह धर्मराज युधिष्ठिर को समझा रहे हैं कि शांति कैसे स्थापित हो सकती है।
पहला भाग: भीष्म कहते हैं: हे धर्मराज, यह भूमि किसी की खरीदी हुई दासी नहीं है। इसके सभी निवासी जन्म से एक-दूसरे के बराबर हैं। सबको खुला प्रकाश और खुली हवा चाहिए; सबको बिना बाधा के विकास और भय-आशंकाओं से मुक्त जीवन चाहिए। पर इस मार्ग में अनेक विघ्न अड़े हुए हैं, मानो मानवता की राह रोककर पर्वत खड़े हों। जब तक हर मनुष्य को न्यायोचित सुख नहीं मिलता, तब तक धरती पर चैन और संसार में शांति नहीं हो सकती।
दूसरा भाग: जब तक मनुष्य-मनुष्य के बीच सुख का बँटवारा समान नहीं होगा, तब तक कोलाहल शांत नहीं होगा और संघर्ष कम नहीं होगा। मनुष्य यह बात भूलकर आपस में शंका और भय में फँसा है और केवल अपने भोग और संचय में लगा है। ईश्वर के दिए सुख धरती पर इतने बिखरे हुए हैं कि उन्हें भोगने वाले मनुष्य उतने हैं ही नहीं। सब संतुष्ट हो सकते हैं, सब एक-सा सुख पा सकते हैं; मनुष्य चाहे तो पल में धरती को स्वर्ग बना सकते हैं।
संदेश: धरती को स्वर्ग बनाने के लिए किसी चमत्कार की नहीं, समानता, न्यायपूर्ण वितरण, स्वार्थ-त्याग और आपसी विश्वास की आवश्यकता है।
Themes and message
समानता
धरती किसी एक की संपत्ति नहीं; सब मनुष्य जन्म से समान हैं और प्रकाश, वायु तथा विकास पर सबका समान अधिकार है।
From the text: 'धर्मराज यह भूमि किसी की, नहीं क्रीत है दासी'
न्यायपूर्ण वितरण और शांति
जब तक सुख-साधन सबको न्यायोचित ढंग से नहीं मिलते, तब तक संघर्ष और अशांति बनी रहती है। शांति का आधार न्याय है।
From the text: 'न्यायोचित सुख सुलभ नहीं जब तक मानव-मानव को'
स्वार्थ, भय और संचय की बाधा
मनुष्य आपस में शंका और भय में फँसा है और केवल अपने भोग-संचय में लगा है; यही 'पर्वत' मानवता की राह रोके खड़े हैं।
From the text: 'लगा हुआ केवल अपने में और भोग-संचय में'
आशा: धरती पर स्वर्ग संभव
ईश्वर ने पर्याप्त सुख दिए हैं; यदि मनुष्य चाहे तो सब संतुष्ट हो सकते हैं और धरती स्वर्ग बन सकती है। कविता निराशा नहीं, संभावना का संदेश देती है।
From the text: 'चाहें तो पल में धरती को स्वर्ग बना सकते हैं'
The speaker and the people in the poem
भीष्म पितामह
वक्ता; शरशय्या पर लेटे महाभारत के वयोवृद्ध योद्धा।
- अनुभवी और ज्ञानी।
- मानवतावादी: समानता और न्याय पर बल।
युधिष्ठिर को दिया गया उपदेश।
युधिष्ठिर (धर्मराज)
श्रोता; पांडवों में ज्येष्ठ, जो युद्ध के बाद शांति का मार्ग जानना चाहते हैं।
- धर्म और न्याय के पक्षधर, इसलिए 'धर्मराज'।
संबोधन 'धर्मराज'।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| रूपक/प्रतीक | 'मानवता की राह रोककर पर्वत अड़े हुए हैं।' | स्वार्थ, भेदभाव और भय जैसी बाधाओं को पर्वत के रूप में प्रस्तुत करता है। |
| संबोधन शैली | 'धर्मराज...' | उपदेश को सीधा और आत्मीय बनाती है। |
| तत्सम-प्रधान खड़ी बोली | क्रीत, जन्मना, समीरण, विकीर्ण, शमित। | ओजपूर्ण और गंभीर भाषा, विषय के अनुरूप। |
| प्रश्न-शैली | 'चैन कहाँ धरती पर तब तक शांति कहाँ इस भव को ?' | पाठक को सोचने पर विवश करती है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
धर्मराज यह भूमि किसी की, नहीं क्रीत है दासी,
भीष्म पितामह: कविता का आरंभ, युधिष्ठिर से।
धरती पर सबका समान अधिकार।
मानवता की राह रोककर पर्वत अड़े हुए हैं।
भीष्म पितामह: बाधाओं का वर्णन।
स्वार्थ, भेदभाव आदि बड़ी बाधाएँ।
प्रभु के दिए हुए सुख इतने हैं विकीर्ण धरती पर,
भीष्म पितामह: दूसरा भाग।
संसाधनों की कमी नहीं, वितरण की समस्या है।
चाहें तो पल में धरती को स्वर्ग बना सकते हैं,
भीष्म पितामह: कविता का अंत।
शीर्षक का स्रोत; आशा का संदेश।
स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर' in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
संसाधनों का बँटवारा
मान लीजिए आपकी कक्षा में खेल का सामान केवल कुछ छात्र अपने पास रख लेते हैं और बाकी खेल नहीं पाते।
कविता की सीख यहाँ कैसे लागू होगी?
Try it first, then show the solutionSolution
- सामान पर्याप्त, बँटवारा असमान।
- समान अवसर से झगड़े ख़त्म।
Answer: जैसे कवि कहते हैं कि सुख पर्याप्त हैं, समस्या बँटवारे की है; बारी-बारी और समान बँटवारे से कक्षा में शांति आएगी।
Memory hook: कमी नहीं, बँटवारे की कमी।
भय और शंका
कल्पना कीजिए दो पड़ोसी एक-दूसरे पर शक करके दीवारें ऊँची करते जाते हैं और कभी बात नहीं करते।
कवि इसे कैसे देखते?
Try it first, then show the solutionSolution
- शंका और भय = बाधा का पर्वत।
- विश्वास से सहयोग।
Answer: कवि के अनुसार शंका और भय मनुष्य को अपने-आप में बंद कर देते हैं; विश्वास और सहयोग ही 'स्वर्ग' का रास्ता खोलते हैं।
Memory hook: दीवार नहीं, पुल बनाओ।
मूलभूत अधिकार
मान लीजिए किसी बस्ती में स्वच्छ पानी की सुविधा नहीं है जबकि पास की कॉलोनी में भरपूर है।
'सबको मुक्त प्रकाश... समीरण' की बात यहाँ कैसे लागू होती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- मूल सुविधाएँ सबका अधिकार।
- न्यायोचित वितरण आवश्यक।
Answer: प्रकाश, वायु और जल जैसी मूल सुविधाएँ सबका अधिकार हैं; उनका न्यायपूर्ण वितरण ही शांति की नींव है।
Memory hook: प्रकाश, पवन, पानी: सबका।
Topics in this chapter
How the school exam asks स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर'
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| प्रसंग | 'यह संदेश कौन, किसे दे रहा है?' / 'भीष्म युधिष्ठिर को किस नाम से बुलाते हैं, क्यों?' | भीष्म पितामह, शरशय्या, कुरुक्षेत्र, धर्मराज युधिष्ठिर। |
| पंक्ति का आशय | ''प्रभु के दिए हुए सुख इतने हैं विकीर्ण धरती पर' का आशय' | संसाधन पर्याप्त, वितरण की समस्या। |
| शब्दार्थ | 'शब्दार्थ: क्रीत, जन्मना, समीरण, भव, शमित, विकीर्ण' | क्रीत = खरीदी हुई, जन्मना = जन्म से, समीरण = वायु, भव = संसार, शमित = शांत, विकीर्ण = बिखरे हुए। |
| उद्देश्य और प्रासंगिकता | 'धरती को स्वर्ग कैसे बनाया जा सकता है?' | समानता, न्याय, स्वार्थ-त्याग; आज के उदाहरण। |
Tricks to remember स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर'
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
भी-यु-कु
भीष्म (वक्ता), युधिष्ठिर (श्रोता), कुरुक्षेत्र (स्थान)।
Use it when: प्रसंग वाला प्रश्न।
भव = संसार
'भवसागर' = संसार-सागर।
Use it when: शब्दार्थ।
स-न्या-त्या
समानता, न्याय, त्याग = स्वर्ग।
Use it when: उद्देश्य।
स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर': extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: पद्यांश (2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र में पूछा गया)
लेकिन विघ्न अनेक अभी
इस पथ पर अड़े हुए हैं
मानवता की राह रोककर
पर्वत अड़े हुए हैं।
न्यायोचित सुख सुलभ नहीं
जब तक मानव-मानव को
चैन कहाँ धरती पर तब तक
शांति कहाँ इस भव को ?
(1) · 2 marks · Short answer
(i) यह संदेश कौन, किसे और कहाँ दे रहा है?
(2) · 2 marks · Short answer
(ii) कवि के अनुसार आदर्श जीवन की दो विशेषताएँ लिखिए।
(3) · 3 marks · Short answer
(iii) 'विघ्न' और 'पर्वत' किन बाधाओं के प्रतीक हैं? उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है?
(4) · 3 marks · Long answer
(iv) 'भव' का अर्थ लिखिए। कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Show the answersAnswers
- भीष्म पितामह, कुरुक्षेत्र में शरशय्या पर लेटे हुए, धर्मराज युधिष्ठिर को यह संदेश दे रहे हैं।
- सबको समान अधिकार और भेदभाव-रहित जीवन; खुला प्रकाश-वायु, बाधा-रहित विकास और भय-आशंका से मुक्त, सुखी और प्रेमपूर्ण जीवन।
- ईर्ष्या-द्वेष, जाति-धर्म और अमीर-गरीब का भेदभाव, स्वार्थ तथा भय-संदेह। इन्हें सुख-साधनों के समान वितरण, न्याय और स्वार्थ-त्याग से दूर किया जा सकता है।
- भव = संसार। उद्देश्य: यह बताना कि मनुष्य धरती को स्वर्ग बना सकता है यदि वह समभाव अपनाए, सबको न्यायोचित सुख मिले और लोग अपने मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक हों; समानता और न्याय ही शांति का आधार हैं।
स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर': exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: 'क्रीत दासी' · 2 marks · Short answerExam level
कवि ने भूमि के लिए किस शब्द का प्रयोग किया है और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- क्रीत = खरीदी हुई।
- भूमि पर सबका समान अधिकार।
Answer: कवि कहते हैं कि भूमि किसी की 'क्रीत दासी' (खरीदी हुई दासी) नहीं है; अर्थात धरती किसी एक की संपत्ति नहीं, उस पर सबका समान अधिकार है।
Example 2: शांति की शर्त · 2 marks · Short answerExam level
धरती पर शांति के लिए क्या आवश्यक है?
Try it first, then show the solutionSolution
- न्यायोचित सुख सबको।
Answer: हर मनुष्य को न्यायोचित सुख समान रूप से सुलभ होना आवश्यक है; जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक धरती पर चैन और संसार में शांति नहीं होगी।
Example 3: स्वर्ग कैसे बने? · 3 marks · Short answerHarder exam level
कवि के अनुसार मनुष्य पल में धरती को स्वर्ग कैसे बना सकता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- सुख पर्याप्त हैं।
- स्वार्थ, भय, संचय छोड़ना।
- समान वितरण।
Answer: ईश्वर ने धरती पर इतने सुख बिखेरे हैं कि सबके लिए पर्याप्त हैं। यदि मनुष्य शंका, भय और केवल अपने भोग-संचय की प्रवृत्ति छोड़कर सुखों का समान बँटवारा करे, तो सब संतुष्ट हो सकते हैं और धरती पल में स्वर्ग बन सकती है।
Example 4: 'धर्मराज' संबोधन · 3 marks · Short answerHarder exam level
भीष्म पितामह युधिष्ठिर को 'धर्मराज' क्यों कहते हैं? इस संबोधन का कविता में क्या महत्त्व है?
Try it first, then show the solutionSolution
- युधिष्ठिर न्यायप्रिय।
- उपदेश न्याय और धर्म पर।
Answer: युधिष्ठिर सदा धर्म और न्याय का पक्ष लेते थे, इसलिए 'धर्मराज' कहलाते हैं। युद्ध के बाद राजा बनने वाले न्यायप्रिय युधिष्ठिर को संबोधित करके भीष्म याद दिलाते हैं कि सच्चा राजधर्म प्रजा में सुख का न्यायपूर्ण वितरण है।
Example 5: आज की प्रासंगिकता · 4 marks · Long answerHOTS / competency
दिनकर का यह संदेश आज के भारत के लिए कितना प्रासंगिक है? उदाहरण सहित लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- आज भी असमानता।
- संविधान और योजनाएँ।
- व्यक्तिगत कर्तव्य।
Answer: बहुत प्रासंगिक। आज भी अमीर-गरीब की खाई, शिक्षा और स्वास्थ्य तक असमान पहुँच, और जाति-धर्म के भेदभाव समाज में संघर्ष पैदा करते हैं। हमारा संविधान समानता का अधिकार देता है, और भोजन, शिक्षा व आवास से जुड़ी योजनाएँ 'न्यायोचित सुख' पहुँचाने के प्रयास हैं। नागरिक के रूप में भेदभाव छोड़ना और ज़रूरतमंदों से संसाधन बाँटना ही धरती को स्वर्ग बनाने की दिशा है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
3 अंक: ''विघ्न' और 'पर्वत' किन बाधाओं के प्रतीक हैं? उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है?' (2025 की अंक-योजना के अपेक्षित बिंदुओं पर आधारित; विभाजन संकेतात्मक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| बाधाएँ: ईर्ष्या-द्वेष, जाति-धर्म/अमीर-गरीब का भेदभाव | 1 |
| बाधाएँ: स्वार्थ, भय-संदेह | 1 |
| उपाय: समान वितरण, न्याय, स्वार्थ-त्याग | 1 |
Where students lose marks in स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर'
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: वक्ता और श्रोता के नाम गलत
2025 में छात्रों ने युधिष्ठिर और भीष्म के नाम सही नहीं लिखे; महाभारत का ज्ञान कम।
Do this: वक्ता: भीष्म पितामह (शरशय्या पर, कुरुक्षेत्र में); श्रोता: धर्मराज युधिष्ठिर।
Usually costs: प्रसंग के अंक।
Mistake: 'भव' का अर्थ धरती लिखना
परीक्षकों ने यह भूल विशेष रूप से बताई।
Do this: भव = संसार।
Usually costs: शब्दार्थ के अंक।
Mistake: बाधाओं के उदाहरण न देना
छात्र केवल 'बाधाएँ' लिखते हैं।
Do this: ईर्ष्या-द्वेष, भेदभाव, स्वार्थ, भय-संदेह जैसे ठोस उदाहरण दें।
Usually costs: आशय वाले प्रश्न के अंक।
Mistake: उद्देश्य अधूरा
केवल 'शांति' लिखना।
Do this: समानता, न्यायपूर्ण वितरण, अधिकारों के प्रति जागरूकता और धरती को स्वर्ग बनाने की संभावना।
Usually costs: उद्देश्य के अंक।
Practice questions on स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर'
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerExam level
शब्दार्थ लिखिए: क्रीत, जन्मना, समीरण, भव।
Hint
पहला भाग।
Answer
क्रीत = खरीदी हुई; जन्मना = जन्म से; समीरण = वायु; भव = संसार।
Q2 · 2 marks · Short answerExam level
शब्दार्थ लिखिए: शमित, विकीर्ण, कोलाहल, विघ्न।
Hint
दूसरा भाग।
Answer
शमित = शांत; विकीर्ण = बिखरे हुए; कोलाहल = शोर; विघ्न = रुकावट।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
मनुष्य किन बातों में फँसा हुआ है, कवि के अनुसार?
Hint
शंका, भय, भोग-संचय।
Answer
आपसी शंका और भय में, तथा केवल अपने भोग और संचय में।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'जब तक मनुज-मनुज का यह सुख भाग नहीं सम होगा' का भाव लिखिए।
Hint
समान बँटवारा।
Answer
जब तक सब मनुष्यों में सुख का बँटवारा बराबर नहीं होगा, तब तक संसार का शोर (असंतोष) शांत नहीं होगा और संघर्ष कम नहीं होगा।
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'सबको मुक्त प्रकाश चाहिए, सबको मुक्त समीरण' से कवि क्या कहना चाहते हैं? आज के संदर्भ में दो उदाहरण दीजिए।
Hint
मूलभूत अधिकार।
Answer
प्रकृति के दिए मूलभूत साधन (प्रकाश, वायु) और विकास के अवसर सबके लिए हैं, किसी एक के नहीं। आज: स्वच्छ हवा और पानी पर सबका अधिकार; शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ सबके लिए सुलभ हों।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
यदि आपको अपने विद्यालय को 'स्वर्ग' बनाना हो, तो कविता की सीख के आधार पर तीन उपाय लिखिए।
Hint
समानता, साझा, विश्वास।
Answer
मुक्त उत्तर। उदाहरण: किसी के साथ भेदभाव न हो और सबको समान अवसर मिलें; पुस्तकें और संसाधन ज़रूरतमंद साथियों से बाँटें; आपसी डर और शंका की जगह विश्वास और सहयोग का वातावरण बनाएँ।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.यह कविता किस काव्य से ली गई है?Show answer
दिनकर के 'कुरुक्षेत्र' से।
2.वक्ता और श्रोता कौन हैं?Show answer
भीष्म पितामह और युधिष्ठिर।
3.'क्रीत' का अर्थ?Show answer
खरीदी हुई।
4.'भव' का अर्थ?Show answer
संसार।
5.धरती पर शांति कब तक नहीं होगी?Show answer
जब तक सबको न्यायोचित सुख नहीं मिलेगा।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कविता का प्रसंग बता सकते हैं?
- क्या आप दोनों भागों का भावार्थ लिख सकते हैं?
- क्या आप बाधाओं ('पर्वत') के उदाहरण दे सकते हैं?
- क्या आप दस कठिन शब्दों के अर्थ लिख सकते हैं?
- क्या आप कविता का उद्देश्य और आज की प्रासंगिकता लिख सकते हैं?
स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर': frequently asked questions
भीष्म पितामह शरशय्या पर क्यों थे?
महाभारत के युद्ध में बाणों से घायल होकर वे बाणों की शय्या पर लेटे थे; इच्छामृत्यु के वरदान के कारण वे उत्तरायण तक जीवित रहे और इसी बीच युधिष्ठिर को उपदेश दिया।
'कुरुक्षेत्र' क्या है?
दिनकर का प्रबंध-काव्य, जिसमें महाभारत युद्ध के बाद युद्ध, शांति और न्याय पर भीष्म और युधिष्ठिर का संवाद है।
क्या यह कविता कक्षा 10 में भी है?
नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में यह कक्षा 9 की निर्धारित कविताओं में है।
उत्तर में प्रसंग कैसे लिखें?
एक वाक्य में: 'कुरुक्षेत्र में शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह धर्मराज युधिष्ठिर को समझा रहे हैं कि...'
Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; CISCE Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi (examiners' comments); Sahitya Sagar: Swarg Bana Sakte Hain, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)