Skip to content
HindiICSE Class 9 · Chapter 10

साखी (कबीरदास) ICSE Class 9: भावार्थ, काव्य-सौंदर्य और प्रश्न

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

साहित्य सागर की 'साखी' में संत कबीरदास के दोहे हैं। इनमें गुरु को ईश्वर से भी बड़ा बताया गया है, अहंकार छोड़ने पर ही ईश्वर मिलने की बात है, मूर्ति-पूजा और ज़ोर से अज़ान देने जैसे आडंबरों पर व्यंग्य है, और ईश्वर के गुणों को अनंत बताया गया है। भाषा सधुक्कड़ी है।

What साखी – कबीरदास is about

कबीरदास (पंद्रहवीं शताब्दी) भक्तिकाल की निर्गुण शाखा के प्रमुख संत-कवि थे। वे ईश्वर को निराकार मानते थे और धर्म के नाम पर होने वाले बाह्याडंबरों, अंधविश्वास और हिंदू-मुस्लिम भेदभाव का खुलकर विरोध करते थे। 'साखी' (साक्षी) उनके अनुभव से निकले दोहे हैं। CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में साहित्य सागर की 'साखी' कक्षा 9 के लिए निर्धारित है।

2025 के ICSE हिंदी बोर्ड प्रश्न-पत्र में 'जब मैं था तब हरि नहीं...' वाली साखी पूछी गई थी। अंक-योजना में कबीर की भाषा सधुक्कड़ी/पंचमेल खिचड़ी, 'मैं' का अर्थ अहंकार, और कबीर की निर्गुण-निराकार भक्ति तथा समाज-सुधारक भूमिका अपेक्षित थी। परीक्षकों के अनुसार कई छात्रों ने भाषा को खड़ी बोली, ब्रज या अवधी लिख दिया और 'मैं' का अर्थ नहीं समझाया।

इस पृष्ठ पर वे पाँच साखियाँ हैं जो साहित्य सागर के अभ्यास-प्रश्नों में छपी हैं (StudiesToday) और जिनमें से एक CISCE के 2025 प्रश्न-पत्र में है। आपकी पुस्तक में और साखियाँ भी हो सकती हैं; उन्हें भी इसी विधि से पढ़ें।

Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में साहित्य सागर की कविता पर प्रश्न (पद्यांश और चार उप-प्रश्न) 10 अंक का होता है।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र और परीक्षकों की रिपोर्ट

साखी – कबीरदास: explanation

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

1. गुरु की महिमा: 'गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, काके लागू पायँ। बलिहारी गुरु आपनो, जिन गोबिंद दियौ बताय॥' यदि गुरु और ईश्वर दोनों एक साथ सामने खड़े हों, तो पहले किसके चरण छुऊँ? कबीर कहते हैं कि मैं अपने गुरु पर बलिहारी जाता हूँ, जिन्होंने मुझे ईश्वर का ज्ञान कराया। अर्थात गुरु ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाता है, इसलिए उसका स्थान सबसे ऊँचा है।

2. अहंकार का त्याग: 'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहि। प्रेम गली अति साँकरी, तामे दो न समाहि॥' जब तक मुझमें 'मैं' (अहंकार) था, तब तक हरि (ईश्वर) नहीं मिले; अब ईश्वर मिल गए हैं तो अहंकार नहीं रहा। प्रेम (भक्ति) की गली इतनी सँकरी है कि उसमें अहंकार और ईश्वर दोनों एक साथ नहीं समा सकते।

3. आडंबर पर व्यंग्य (मस्जिद): 'काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय। ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय॥' कंकड़-पत्थर जोड़कर मस्जिद बना ली गई है और उस पर चढ़कर मुल्ला ज़ोर से अज़ान देता है। कबीर पूछते हैं: क्या खुदा बहरा हो गया है? ईश्वर तो मन की पुकार भी सुनता है; दिखावे की आवश्यकता नहीं।

4. आडंबर पर व्यंग्य (मूर्ति-पूजा): 'पाहन पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूँ पहार। ताते ये चाकी भली, पीस खाय संसार॥' यदि पत्थर पूजने से भगवान मिलते, तो मैं पूरा पहाड़ पूज लेता। इससे तो घर की चक्की भली है, जिससे पिसा अन्न सारा संसार खाता है। कबीर मूर्ति-पूजा के आडंबर का विरोध करते हैं और उपयोगी कर्म को श्रेष्ठ बताते हैं।

5. ईश्वर के गुण अनंत: 'सात समंद की मसि करौं, लेखनि सब बनराय। सब धरती कागद करौं, हरि गुन लिखा न जाय॥' यदि सातों समुद्रों के जल को स्याही बना लूँ, सारे वन की लकड़ियों को कलम बना लूँ और पूरी धरती को कागज़ बना लूँ, तब भी ईश्वर के गुणों का वर्णन पूरा नहीं लिखा जा सकता। ईश्वर की महिमा अनंत है।

Themes and message

गुरु की महिमा

कबीर के अनुसार गुरु ही अज्ञान का अंधकार दूर करके ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाता है, इसलिए उसका स्थान ईश्वर से भी पहले है।

From the text: 'बलिहारी गुरु आपनो, जिन गोबिंद दियौ बताय।'

अहंकार का त्याग

ईश्वर-प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा अहंकार है। 'मैं' मिटने पर ही 'हरि' मिलते हैं, जैसे अंधकार और प्रकाश एक साथ नहीं रह सकते।

From the text: 'प्रेम गली अति साँकरी, तामे दो न समाहि।'

बाह्याडंबरों का विरोध

कबीर हिंदू और मुसलमान दोनों के दिखावे पर व्यंग्य करते हैं: मूर्ति-पूजा और ज़ोर से बाँग देना। उनके अनुसार सच्ची भक्ति मन की होती है।

From the text: 'क्या बहरा हुआ खुदाय'; 'पाहन पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूँ पहार।'

ईश्वर की अनंतता

निराकार ईश्वर के गुण इतने अनंत हैं कि समुद्र, वन और धरती जैसे विशाल साधन भी उनका वर्णन नहीं कर सकते।

From the text: 'सब धरती कागद करौं, हरि गुन लिखा न जाय।'

The speaker and the people in the poem

कवि (कबीरदास)

निर्गुण भक्त, समाज-सुधारक और साखियों के वक्ता।

  • निर्भीक: दोनों धर्मों के आडंबरों पर व्यंग्य।
  • गुरु-भक्त और विनम्र।
  • अनुभव-आधारित ज्ञान वाले: सरल भाषा में गहरी बात।

सभी साखियाँ।

Poetic devices

DeviceExampleEffect
भाषा: सधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी)पाहन, पहार, मसि, खुदाय, बाँग।अनेक बोलियों और भाषाओं के शब्दों का मेल; जनसाधारण तक सीधे पहुँचती है।
दोहा छंदहर साखी दो पंक्तियों का दोहा है।छोटा, लयबद्ध और याद रखने में आसान।
व्यंग्य'क्या बहरा हुआ खुदाय'।आडंबर की निरर्थकता तीखेपन से उजागर होती है।
अतिशयोक्तिसात समुद्रों की स्याही, धरती का कागज़।ईश्वर के गुणों की अनंतता का प्रभावशाली चित्र।
अनुप्रास'गुरु गोबिंद', 'पाहन पूजे'।लय और माधुर्य।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • बलिहारी गुरु आपनो, जिन गोबिंद दियौ बताय॥

    कबीर: पहली साखी।

    गुरु को ईश्वर से पहले स्थान।

  • जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहि।

    कबीर: दूसरी साखी (2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र में पूछी गई)।

    अहंकार और ईश्वर एक साथ नहीं।

  • ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय॥

    कबीर: तीसरी साखी।

    धार्मिक दिखावे पर व्यंग्य।

  • पाहन पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूँ पहार।

    कबीर: चौथी साखी।

    मूर्ति-पूजा के आडंबर का विरोध।

  • सब धरती कागद करौं, हरि गुन लिखा न जाय।।

    कबीर: पाँचवीं साखी।

    ईश्वर के गुण अनंत।

साखी – कबीरदास in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

गुरु के प्रति कृतज्ञता

मान लीजिए शिक्षक दिवस पर आपको अपने किसी शिक्षक के बारे में बोलना है।

पहली साखी का भाव आप कैसे जोड़ेंगे?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. गुरु ने कौन-सा ज्ञान दिया।
  2. उस ज्ञान से जीवन में क्या बदला।

Answer: कबीर की तरह गुरु को वह मार्गदर्शक मानें जिसने आपको लक्ष्य तक पहुँचाया; यही सच्ची कृतज्ञता है।

Memory hook: गुरु रास्ता, गोविंद मंज़िल।

अहंकार बाधा है

कल्पना कीजिए टीम का सबसे अच्छा खिलाड़ी किसी की सलाह नहीं सुनता और टीम हार जाती है।

'जब मैं था तब हरि नहीं' यहाँ कैसे लागू होता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'मैं' (अहंकार) सीखने का रास्ता बंद करता है।
  2. विनम्रता से ही प्रगति।

Answer: अहंकार नए ज्ञान और सहयोग के लिए जगह नहीं छोड़ता; उसे छोड़ने पर ही सफलता मिलती है।

Memory hook: 'मैं' गया, तो राह खुली।

दिखावा बनाम सच्ची आस्था

मान लीजिए आपके मोहल्ले में किसी धार्मिक आयोजन पर देर रात तक बहुत तेज़ लाउडस्पीकर बजते हैं।

कबीर इस पर क्या कहते?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'क्या बहरा हुआ खुदाय'।
  2. ईश्वर मन की पुकार सुनता है; दूसरों को कष्ट देना भक्ति नहीं।

Answer: कबीर के अनुसार ईश्वर तक पहुँचने के लिए शोर नहीं, सच्चा मन चाहिए; दूसरों को परेशान करने वाला दिखावा भक्ति नहीं।

Memory hook: ईश्वर बहरा नहीं।

Topics in this chapter

How the school exam asks साखी – कबीरदास

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
भावार्थ''पाहन पूजे हरि मिले' दोहे का भाव स्पष्ट कीजिए।'पहले सरल अर्थ, फिर कबीर का संदेश।
शब्दार्थ'शब्दों के अर्थ लिखिए: पाहन, पहार, मसि, बनराय।'पाहन = पत्थर, पहार = पहाड़, मसि = स्याही, बनराय = वन (वनस्पति)।
व्यंग्य और भाषा''क्या बहरा हुआ खुदाय' में निहित व्यंग्य' / 'कबीर की भाषा पर टिप्पणी'आडंबर पर व्यंग्य; सधुक्कड़ी/पंचमेल खिचड़ी भाषा।
कवि-परिचय और भक्ति'कबीर किस प्रकार की भक्ति में विश्वास करते थे?'निर्गुण-निराकार; समाज-सुधार; गुरु-महिमा।

Tricks to remember साखी – कबीरदास

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • पाँच साखियाँ, पाँच शब्द

    गुरु, मैं, मस्जिद, पाहन, समंद।

    Use it when: साखियों का क्रम।

  • सधुक्कड़ी = साधुओं की खिचड़ी

    साधुओं की संगति से बनी, पाँच भाषाओं की 'खिचड़ी'।

    Use it when: भाषा वाला प्रश्न।

  • पा-प-म-ब

    पाहन = पत्थर, पहार = पहाड़, मसि = स्याही, बनराय = वन।

    Use it when: शब्दार्थ।

साखी – कबीरदास: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: पद्यांश (2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र में पूछा गया)

"जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहि।
प्रेम गली अति साँकरी, तामे दो न समाहि॥"

  1. (1) · 2 marks · Short answer

    (i) कबीर की भाषा का नाम लिखिए। यहाँ 'मैं' किसका प्रतीक है?

  2. (2) · 2 marks · Short answer

    (ii) 'जब मैं था तब हरि नहीं' का भाव स्पष्ट कीजिए।

  3. (3) · 3 marks · Short answer

    (iii) 'प्रेम गली अति साँकरी, तामे दो न समाहि' का अर्थ समझाइए।

  4. (4) · 3 marks · Long answer

    (iv) कबीर किस प्रकार की भक्ति में विश्वास रखते थे? समाज-सुधारक के रूप में उनकी दो विशेषताएँ लिखिए।

Show the answersAnswers
  1. सधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी) भाषा। 'मैं' अहंकार (घमंड) का प्रतीक है।
  2. जब तक मन में अहंकार रहता है, तब तक ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती; अहंकार मिटने पर ही हरि मिलते हैं।
  3. भक्ति (प्रेम) का मार्ग इतना सँकरा है कि उसमें अहंकार और ईश्वर दोनों एक साथ नहीं रह सकते, जैसे एक म्यान में दो तलवारें नहीं समातीं। इसलिए ईश्वर पाने के लिए अहंकार का त्याग आवश्यक है।
  4. निर्गुण, निराकार ईश्वर की भक्ति में। समाज-सुधारक के रूप में उन्होंने अंधविश्वास और धार्मिक आडंबरों (मूर्ति-पूजा, ज़ोर से बाँग) का विरोध किया और धार्मिक भेदभाव मिटाकर हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल दिया।

साखी – कबीरदास: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: गुरु के प्रति दृष्टिकोण · 2 marks · Short answerExam level

कबीर के गुरु के प्रति दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दुविधा: पहले किसके चरण छुएँ।
  2. निर्णय: गुरु के, क्योंकि उन्होंने ईश्वर को बताया।

Answer: कबीर गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ मानते हैं। गुरु और गोविंद दोनों सामने हों तो वे गुरु पर बलिहारी जाते हैं, क्योंकि गुरु ने ही उन्हें ईश्वर का ज्ञान कराया और उस तक पहुँचने का मार्ग दिखाया।

Example 2: शब्दार्थ · 2 marks · Short answerExam level

शब्दों के अर्थ लिखिए: पाहन, पहार, मसि, बनराय।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रसंग से अर्थ।

Answer: पाहन = पत्थर; पहार = पहाड़; मसि = स्याही; बनराय = वन, वनस्पति।

Example 3: व्यंग्य · 3 marks · Short answerHarder exam level

'ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय' में निहित व्यंग्य स्पष्ट कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दृश्य: मस्जिद पर चढ़कर ज़ोर की अज़ान।
  2. व्यंग्य: क्या ईश्वर बहरा है?

Answer: कंकड़-पत्थर से बनी मस्जिद पर चढ़कर मुल्ला ज़ोर-ज़ोर से बाँग देता है, मानो खुदा बहरा हो। कबीर का व्यंग्य है कि ईश्वर सर्वव्यापी है और मन की धीमी पुकार भी सुनता है; ज़ोर से पुकारना केवल दिखावा है।

Example 4: चक्की क्यों भली? · 3 marks · Short answerHarder exam level

कबीर ने पत्थर की मूर्ति से चक्की को भला क्यों बताया है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मूर्ति भी पत्थर, चक्की भी पत्थर।
  2. चक्की उपयोगी: अन्न पीसती है।

Answer: मूर्ति और चक्की दोनों पत्थर की हैं; मूर्ति पूजने से ईश्वर नहीं मिलता, पर चक्की से पिसा अन्न सारा संसार खाता है। इसलिए उपयोगी कर्म दिखावे की पूजा से श्रेष्ठ है; यह मूर्ति-पूजा के आडंबर पर व्यंग्य है।

Example 5: अतिशयोक्ति · 3 marks · Short answerHOTS / competency

'सात समंद की मसि करौं...' साखी में कौन-सा अलंकार है और उसका क्या प्रभाव है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. असंभव कल्पना: समुद्र की स्याही, धरती का कागज़।
  2. प्रभाव: अनंतता।

Answer: अतिशयोक्ति अलंकार: सात समुद्रों को स्याही, सारे वन को कलम और धरती को कागज़ बनाने की असंभव कल्पना की गई है। इससे ईश्वर के गुणों की अनंतता बहुत प्रभावशाली ढंग से प्रकट होती है।

Example 6: आज की प्रासंगिकता · 4 marks · Long answerHOTS / competency

कबीर की साखियाँ आज के समाज में कितनी प्रासंगिक हैं? दो उदाहरण दीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आडंबर आज भी।
  2. अहंकार और भेदभाव आज भी।

Answer: बहुत प्रासंगिक। (1) आज भी धर्म के नाम पर ऊँची आवाज़ में दिखावा, महँगे आयोजन और अंधविश्वास दिखते हैं; कबीर सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति मन की है। (2) अहंकार और धार्मिक भेदभाव आज भी समाज को बाँटते हैं; कबीर का संदेश अहंकार त्यागने और सबको समान मानने का है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

3 अंक: 'प्रेम गली अति साँकरी, तामे दो न समाहि' का अर्थ समझाइए। (2025 की अंक-योजना के अपेक्षित बिंदुओं पर आधारित; विभाजन संकेतात्मक) (3 marks)

StepMarks
प्रेम गली = भक्ति का मार्ग1
दो = अहंकार और ईश्वर, जो साथ नहीं रह सकते1
संदेश: अहंकार-त्याग पर बल1

Where students lose marks in साखी – कबीरदास

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: कबीर की भाषा गलत लिखना

    2025 में छात्रों ने खड़ी बोली, ब्रज या अवधी लिखा।

    Do this: सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी लिखें।

    Usually costs: भाषा वाले अंश के अंक।

  • Mistake: 'मैं' का अर्थ न समझाना

    छात्र 'मैं' को कवि स्वयं मान लेते हैं।

    Do this: 'मैं' = अहंकार।

    Usually costs: भावार्थ के अंक।

  • Mistake: केवल शब्दार्थ, संदेश नहीं

    भावार्थ में कबीर का उद्देश्य छूट जाता है।

    Do this: हर साखी के अंत में एक वाक्य: कबीर क्या सिखाना चाहते हैं।

    Usually costs: भावार्थ के अंक।

  • Mistake: निर्गुण भक्ति का उल्लेख न करना

    कवि-परिचय कमज़ोर।

    Do this: निर्गुण, निराकार ईश्वर; आडंबर-विरोध; हिंदू-मुस्लिम एकता।

    Usually costs: परिचय वाले प्रश्न के अंक।

Practice questions on साखी – कबीरदास

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · Very short answerExam level

    कबीर के अनुसार परमात्मा से मिलने का रास्ता कौन दिखाता है?

    Hint

    पहली साखी।

    Answer

    गुरु।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerExam level

    'मैं' और 'हरि' शब्दों का प्रयोग किसके लिए हुआ है?

    Hint

    दूसरी साखी।

    Answer

    'मैं' अहंकार के लिए और 'हरि' परमात्मा के लिए।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder exam level

    कबीर की भाषा पर टिप्पणी कीजिए।

    Hint

    साधु-संगति, अनेक बोलियाँ।

    Answer

    कबीर साधु-संतों की संगति में रहते थे, इसलिए उनकी भाषा में भोजपुरी, अवधी, ब्रज, राजस्थानी, पंजाबी, खड़ी बोली, अरबी-फ़ारसी आदि के शब्द मिले हैं। इसे सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी भाषा कहते हैं; यह सरल और जनसाधारण की भाषा है।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    कबीर ने किन-किन आडंबरों का विरोध किया? साखियों के आधार पर लिखिए।

    Hint

    मस्जिद और मूर्ति।

    Answer

    मुसलमानों द्वारा मस्जिद पर चढ़कर ज़ोर से बाँग देने का और हिंदुओं द्वारा पत्थर की मूर्ति पूजने का।

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    'प्रेम गली अति साँकरी' में 'प्रेम गली' से क्या अभिप्राय है?

    Hint

    भक्ति का मार्ग।

    Answer

    ईश्वर-भक्ति (प्रेम) का मार्ग, जो इतना सँकरा है कि उसमें अहंकार के लिए जगह नहीं।

  6. Q6 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    किसी एक साखी का भाव अपने जीवन के उदाहरण से समझाइए।

    Hint

    गुरु या अहंकार।

    Answer

    मुक्त उत्तर। उदाहरण: 'गुरु गोबिंद दोऊ खड़े': मेरे गणित शिक्षक ने कठिन विषय को सरल बनाकर मुझे उसमें रुचि दिलाई; ज्ञान का द्वार खोलने वाले गुरु के प्रति कृतज्ञता ही इस साखी का भाव है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.कबीर किस भक्ति-धारा के कवि थे?Show answer

    निर्गुण (निराकार) भक्ति-धारा के।

  2. 2.कबीर की भाषा को क्या कहते हैं?Show answer

    सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी।

  3. 3.कबीर गुरु को ईश्वर से श्रेष्ठ क्यों मानते हैं?Show answer

    क्योंकि गुरु ने ही ईश्वर का ज्ञान कराया।

  4. 4.'मसि' का अर्थ?Show answer

    स्याही।

  5. 5.कबीर ने चक्की को भला क्यों कहा?Show answer

    क्योंकि उससे पिसा अन्न संसार खाता है; मूर्ति-पूजा से ईश्वर नहीं मिलता।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप पाँचों साखियाँ भावार्थ सहित सुना सकते हैं?
  • क्या आप 'मैं' और 'हरि' का अर्थ बता सकते हैं?
  • क्या आप दोनों आडंबर-विरोधी साखियों का व्यंग्य समझा सकते हैं?
  • क्या आप कबीर की भाषा और भक्ति पर टिप्पणी लिख सकते हैं?
  • क्या आप कठिन शब्दों के अर्थ लिख सकते हैं?

साखी – कबीरदास: frequently asked questions

साखी शब्द का क्या अर्थ है?

'साखी' संस्कृत 'साक्षी' से बना है: आँखों देखा या अनुभव किया हुआ ज्ञान। कबीर ने अपने अनुभव के सत्य को दोहों में कहा।

क्या साहित्य सागर में केवल यही पाँच साखियाँ हैं?

यहाँ वे साखियाँ हैं जो पुस्तक के अभ्यास-प्रश्नों में छपी मिलीं; आपकी पुस्तक में और भी हो सकती हैं, उन्हें भी इसी ढंग से भावार्थ सहित तैयार करें।

क्या कबीर ईश्वर को नहीं मानते थे?

मानते थे, पर निराकार ईश्वर को; वे केवल दिखावे और आडंबर के विरोधी थे।

क्या साखी कक्षा 10 में भी है?

नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में 'साखी' कक्षा 9 की निर्धारित कविताओं में है।

Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; CISCE Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi (examiners' comments); Sahitya Sagar: Sakhi, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)