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HindiICSE Class 9 · स्वर्ग बना सकते हैं – रामधारी सिंह 'दिनकर'

स्वर्ग बना सकते हैं (रामधारी सिंह 'दिनकर'): भीष्म का उपदेश, समानता और न्याय

Updated 18 October 2026 · Fact-checked

'स्वर्ग बना सकते हैं' दिनकर के प्रबंध-काव्य 'कुरुक्षेत्र' का अंश है। शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह धर्मराज युधिष्ठिर को समझाते हैं कि धरती किसी की खरीदी हुई दासी नहीं है और सब मनुष्य जन्म से समान हैं। जब तक सुख न्यायपूर्ण ढंग से सबको नहीं मिलेगा, शांति नहीं होगी; मनुष्य चाहे तो धरती को स्वर्ग बना सकता है।

Notice Bhishma's advice turns the red causes of unrest into the green habits that can make the earth a heaven.

Illustration drawn for QuestionBuddy.

Understand भीष्म का उपदेश: समानता, न्याय और धरती का स्वर्ग (स्वर्ग बना सकते हैं)

कवि और पाठ। यह राष्ट्रकवि रामधारी सिंह "दिनकर" की कविता है, जो उनके प्रबंध-काव्य "कुरुक्षेत्र" से ली गई है।

प्रसंग। महाभारत के युद्ध के बाद शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह धर्मराज युधिष्ठिर को समझा रहे हैं कि शांति कैसे स्थापित हो।

पहला भाग। भीष्म कहते हैं कि यह भूमि किसी की खरीदी हुई दासी नहीं है और इसके सब निवासी जन्म से एक-दूसरे के बराबर हैं। सबको खुला प्रकाश, खुली हवा, बिना बाधा के विकास और भय-आशंका से मुक्त जीवन चाहिए। पर रास्ते में विघ्न पर्वत की तरह खड़े हैं। जब तक हर मनुष्य को न्यायोचित सुख नहीं मिलता, धरती पर चैन और संसार में शांति नहीं हो सकती।

दूसरा भाग। जब तक सुख का बँटवारा समान नहीं होगा, कोलाहल शांत नहीं होगा। मनुष्य आपस में शंका और भय में फँसा है और केवल अपने भोग और संचय में लगा है। ईश्वर के दिए सुख इतने बिखरे हैं कि सब संतुष्ट हो सकते हैं। मनुष्य चाहे तो पल में धरती को स्वर्ग बना सकता है।

शब्दार्थ। भव का अर्थ संसार है, धरती नहीं। क्रीत का अर्थ खरीदी हुई है।

संदेश। स्वर्ग बनाने के लिए चमत्कार नहीं, समानता, न्यायपूर्ण वितरण, स्वार्थ-त्याग और आपसी विश्वास चाहिए।

पात्र। भीष्म: अनुभवी, ज्ञानी, मानवतावादी वक्ता। युधिष्ठिर: धर्मराज, श्रोता।

भीष्म का उपदेश: समानता, न्याय और धरती का स्वर्ग (स्वर्ग बना सकते हैं): key facts

वक्ता और श्रोता
भीष्म पितामह | धर्मराज युधिष्ठिर
प्रसंग के प्रश्न।
दो बाधाएँ
स्वार्थ और संचय | शंका और भय
मनुष्य के भीतर की बाधाएँ।
शांति की शर्त
  • न्यायोचित सुख
  • समान बँटवारा
  • समान अधिकार
मुख्य संदेश।
शब्दार्थ
भव = संसार | क्रीत = खरीदी हुई
परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।

How to answer भीष्म का उपदेश: समानता, न्याय और धरती का स्वर्ग (स्वर्ग बना सकते हैं) questions

पद्यांश के प्रश्न का उत्तर इस प्रकार लिखिए।

  1. 1कविता, कवि और ग्रंथ का नाम लिखिए।
  2. 2वक्ता और श्रोता बताइए।
  3. 3मुख्य कथन सरल शब्दों में लिखिए।
  4. 4बाधाओं के उदाहरण दीजिए।
  5. 5आदर्श जीवन या स्वर्ग की परिकल्पना और संदेश बताइए।

भीष्म का उपदेश: समानता, न्याय और धरती का स्वर्ग (स्वर्ग बना सकते हैं) in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

बाँटकर खाना

मान लीजिए किसी कक्षा के कुछ छात्र बड़े टिफ़िन में से सबको खाना बाँटने की जगह अपना-अपना पूरा खाकर और बाकी को भूखा छोड़कर बैठ जाते हैं।

यह कविता के किस संदेश से मिलता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सुख का असमान बँटवारा।
  2. अशांति या असंतोष।
  3. समान बँटवारे से शांति।

Answer: यह न्यायपूर्ण बँटवारे के संदेश से मिलता है कि सुख का समान वितरण होने पर ही शांति और संतोष आता है।

Memory hook: बाँटो तो शांति।

Tricks to remember भीष्म का उपदेश: समानता, न्याय और धरती का स्वर्ग (स्वर्ग बना सकते हैं)

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • भीष्म-युधिष्ठिर

    वक्ता और श्रोता।

    Use it when: प्रसंग।

  • न्याय से शांति

    न्यायोचित सुख नहीं तो शांति नहीं।

    Use it when: संदेश।

  • भव = संसार

    भव को धरती न लिखें।

    Use it when: शब्दार्थ।

भीष्म का उपदेश: समानता, न्याय और धरती का स्वर्ग (स्वर्ग बना सकते हैं): solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: वक्ता कौन · 1 mark · MCQBoard level

इस कविता में उपदेश कौन दे रहे हैं?
(क) कृष्ण (ख) भीष्म पितामह (ग) अर्जुन (घ) द्रोण

Try it first, then show the solutionSolution
  1. वक्ता भीष्म पितामह हैं, जो शरशय्या पर लेटे युधिष्ठिर को समझा रहे हैं (1)।

Answer: (ख) भीष्म पितामह।

Example 2: प्रसंग लिखिए (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level

इस पद्यांश का प्रसंग संक्षेप में लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कविता और ग्रंथ (1)
  2. वक्ता-श्रोता और स्थिति (1)।

Answer: यह दिनकर की कृति कुरुक्षेत्र का अंश है। महाभारत के युद्ध के बाद शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह धर्मराज युधिष्ठिर को शांति का उपाय समझा रहे हैं।

Example 3: भूमि दासी नहीं (3 अंक) · 3 marks · Short answerHarder board level

"यह भूमि किसी की खरीदी हुई दासी नहीं है" का आशय स्पष्ट कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भूमि किसी की संपत्ति नहीं (1)
  2. सब बराबर (1)
  3. सबका अधिकार (1)।

Answer: इसका आशय है कि धरती किसी एक की संपत्ति नहीं है जिसे खरीदकर मनचाहा उपयोग किया जा सके। सभी मनुष्य जन्म से समान हैं और सबका उस पर समान अधिकार है।

Example 4: बाधाएँ और शांति (4 अंक) · 4 marks · Long answerHarder board level

कविता के अनुसार संसार में शांति क्यों नहीं है? दो बाधाएँ बताइए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. न्यायोचित सुख का अभाव (1)
  2. असमान बँटवारा (1)
  3. स्वार्थ और संचय (1)
  4. शंका और भय (1)।

Answer: जब तक सुख का बँटवारा मनुष्यों में समान और न्यायपूर्ण नहीं होता, शांति नहीं हो सकती। बाधाएँ हैं, एक, मनुष्य का स्वार्थ और केवल अपने भोग-संचय में लगे रहना, और दो, आपसी शंका और भय।

Example 5: स्वर्ग बनाने की शर्तें (4 अंक) · 4 marks · Long answerHOTS / competency

"मनुष्य चाहे तो पल में धरती को स्वर्ग बना सकता है।" इसके लिए कौन-सी बातें आवश्यक हैं? अपना मत दो कारणों से लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मत (1)
  2. समानता और न्याय (1)
  3. स्वार्थ-त्याग (1)
  4. निष्कर्ष (1)।

Answer: मेरे विचार से समान और न्यायपूर्ण वितरण तथा स्वार्थ का त्याग आवश्यक है। जब सब को अवसर और साधन मिलेंगे, तो संघर्ष घटेगा। जब हम भय और संचय छोड़कर एक-दूसरे पर विश्वास करेंगे, तब धरती पर सुख और शांति संभव होगी।

Where students lose marks in भीष्म का उपदेश: समानता, न्याय और धरती का स्वर्ग (स्वर्ग बना सकते हैं)

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: भव का अर्थ धरती लिखना

    शब्दार्थ गलत।

    Wrong working

    भव = धरती

    Right working

    भव = संसार

    Do this: शब्दार्थ याद कीजिए।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: वक्ता-श्रोता न बताना

    प्रसंग अधूरा।

    Wrong working

    एक राजा उपदेश देता है।

    Right working

    भीष्म पितामह युधिष्ठिर को उपदेश देते हैं।

    Do this: नाम लिखिए।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: बाधाएँ न लिखना

    उत्तर अधूरा।

    Wrong working

    शांति नहीं है।

    Right working

    स्वार्थ, संचय और भय बाधाएँ हैं।

    Do this: उदाहरण दीजिए।

    Usually costs: 1 से 2 अंक

Exam tips

  • वक्ता और श्रोता के नाम लिखिए।
  • भव और क्रीत का अर्थ याद रखिए।
  • दो बाधाएँ उदाहरण सहित लिखिए।
  • संदेश समानता और न्याय से जोड़िए।
  • कुरुक्षेत्र का उल्लेख कीजिए।

Practice questions on भीष्म का उपदेश: समानता, न्याय और धरती का स्वर्ग (स्वर्ग बना सकते हैं)

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    यह अंश किस काव्य से लिया गया है?
    (क) कामायनी (ख) कुरुक्षेत्र (ग) रश्मिरथी (घ) साकेत

    Hint

    कुरुक्षेत्र दिनकर का प्रबंध-काव्य है।

    Answer

    (ख) कुरुक्षेत्र।

  2. Q2 · 1 mark · Short answerBoard level

    "भव" का सही अर्थ क्या है? (1 अंक)

    Hint

    शब्दार्थ याद कीजिए।

    Answer

    संसार।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    कविता में किन चीज़ों पर सबका समान अधिकार बताया गया है? (3 अंक)

    Hint

    प्रकाश, हवा, विकास।

    Answer

    प्रकाश और हवा पर, तथा बिना बाधा के विकास और भय-आशंका से मुक्त जीवन पर सबका समान अधिकार बताया गया है।

  4. Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level

    "ईश्वर के दिए सुख" के बारे में कवि क्या कहते हैं? (3 अंक)

    Hint

    बिखरे सुख।

    Answer

    कवि कहते हैं कि सुख धरती पर इतने बिखरे हैं कि सब संतुष्ट हो सकते हैं और सब एक-सा सुख पा सकते हैं।

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level

    मानवता की राह रोकने वाले पर्वतों का क्या अर्थ है? (3 अंक)

    Hint

    रूपक।

    Answer

    ये पर्वत उन बाधाओं के प्रतीक हैं जो मानवता की प्रगति रोकती हैं, जैसे स्वार्थ, भय और असमानता।

  6. Q6 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    कविता का संदेश आज के समाज पर कैसे लागू होता है? दो कारण दीजिए। (4 अंक)

    Hint

    आज की असमानता।

    Answer

    आज भी समाज में सुख-साधनों का असमान बँटवारा है, इसलिए समानता और न्याय की बात प्रासंगिक है। साथ ही स्वार्थ छोड़कर सहयोग से समस्याएँ सुलझाने का संदेश भी आज उपयोगी है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.कवि?Show answer

    रामधारी सिंह 'दिनकर'।

  2. 2.वक्ता?Show answer

    भीष्म पितामह।

  3. 3.श्रोता?Show answer

    युधिष्ठिर।

  4. 4.काव्य?Show answer

    कुरुक्षेत्र।

  5. 5.भव का अर्थ?Show answer

    संसार।

  6. 6.मुख्य संदेश?Show answer

    न्याय और समानता से धरती स्वर्ग बन सकती है।

भीष्म का उपदेश: समानता, न्याय और धरती का स्वर्ग (स्वर्ग बना सकते हैं): frequently asked questions

कविता कहाँ संकलित है?

यह कविता दिनकर के प्रबंध-काव्य 'कुरुक्षेत्र' से ली गई है।

कौन-सी कक्षा?

ICSE कक्षा 9।

क्या पूरी कविता उद्धृत है?

नहीं, केवल मुख्य भावों की संक्षिप्त बातें हैं।