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HindiICSE Class 9 · Chapter 9

अपना अपना भाग्य (जैनेंद्र कुमार) ICSE Class 9: सारांश, चरित्र-चित्रण और प्रश्न

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

'अपना अपना भाग्य' जैनेंद्र कुमार की कहानी है। नैनीताल की एक ठंडी शाम लेखक और उसके मित्र को एक गरीब, बेघर पहाड़ी बालक मिलता है। वे उसकी ठोस सहायता नहीं करते, और अगली सुबह वह ठंड से मरा मिलता है। लोग इसे 'अपना-अपना भाग्य' कहकर टाल देते हैं। कहानी समाज की संवेदनहीनता पर व्यंग्य है।

What अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार is about

'अपना अपना भाग्य' हिंदी के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार जैनेंद्र कुमार की कहानी है, जो साहित्य सागर में संकलित है और CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में कक्षा 9 के लिए निर्धारित है।

कहानी का शीर्षक ही उसका व्यंग्य है। समाज के सुविधासंपन्न लोग गरीबों की दुर्दशा देखकर भी कोई ठोस सहायता नहीं करते और अंत में सब कुछ 'भाग्य' पर डालकर अपनी ज़िम्मेदारी से छूट जाते हैं। नैनीताल के सुंदर, बादलों भरे वातावरण और एक भूखे, नंगे पैर बालक की ठंड से मौत का विरोधाभास कहानी को मार्मिक बनाता है।

इस पृष्ठ के उद्धरण साहित्य सागर के अभ्यास-अवतरणों से लिए गए हैं, जैसे वे प्रकाशित हल (StudiesToday) में छपे हैं; पुस्तक का मूल पाठ हमें उपलब्ध नहीं था, इसलिए विवरण अपनी पुस्तक से मिलाकर पढ़ें।

Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में साहित्य सागर के हर प्रश्न (अवतरण और चार उप-प्रश्न) के 10 अंक होते हैं।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र (प्रश्नों का स्वरूप)

अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

लेखक अपने मित्र के साथ नैनीताल में संध्या के समय बहुत देर तक निरुद्देश्य घूमने के बाद एक बेंच पर बैठा था। संध्या धीरे-धीरे उतर रही थी; रुई के रेशों जैसे बादल उनके सिर को छूते हुए निकल रहे थे और प्रकाश-अंधकार के साथ कभी नीले, कभी सफ़ेद, कभी हल्के लाल दिखते थे। ठंड बढ़ रही थी।

तभी कुहरे की सफ़ेदी में कुछ ही हाथ दूर से एक काली-सी आकृति उनकी ओर आती दिखाई दी। वह दस-बारह वर्ष का एक बालक था: नंगे पैर, नंगे सिर, एक मैली कमीज़ पहने। उसका रंग गोरा था, पर मैल से काला पड़ गया था; आँखें बड़ी पर सूनी थीं, और ठंड से उसके पैर सीधे नहीं पड़ रहे थे।

पूछने पर पता चला कि वह गरीब पहाड़ी परिवार से है; घर में बहुत भाई-बहन थे और भूख रहती थी, इसलिए वह भागकर नैनीताल आ गया था। यहाँ वह एक दुकान पर काम करता था, जहाँ उसे दिन भर के काम के बदले जूठा खाना और एक रुपया मिलता था, पर अब वह काम भी छूट गया था और उसके पास रहने की जगह नहीं थी।

लेखक उस बालक को अपने एक वकील मित्र के पास ले गए, जिन्हें अपने होटल के लिए नौकर चाहिए था। पर वकील साहब ने यह कहकर मना कर दिया कि पहाड़ी बच्चे बड़े शैतान होते हैं, उनमें अवगुण छिपे रहते हैं, और किसी अनजान को नौकर रखने पर वह सामान लेकर भाग भी सकता है। लेखक और उनके मित्र बालक की कोई ठोस सहायता नहीं कर पाए और उसे उसी ठंडी रात में उसके भाग्य पर छोड़कर लौट आए।

अगली सुबह खबर मिली कि वह बालक सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे ठंड से मरा पड़ा था। बताने वालों ने बताया कि उसके मुँह, छाती, मुट्ठियों और पैरों पर बर्फ़ की हल्की-सी चादर चिपक गई थी, मानो दुनिया की बेहयाई ढँकने के लिए प्रकृति ने शव के लिए सफ़ेद और ठंडे कफ़न का प्रबंध कर दिया हो। सब लोग इसे 'अपना-अपना भाग्य' कहकर अपने-अपने काम में लग गए।

Themes and message

समाज की संवेदनहीनता और स्वार्थ

सुविधासंपन्न लोग बालक की हालत देखते हैं, बातें करते हैं, पर कोई उसे रात भर का आश्रय या गर्म कपड़ा तक नहीं देता। उसकी मृत्यु के बाद भी वे इसे 'भाग्य' कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

From the text: वकील साहब का इनकार; अंत में 'अपना-अपना भाग्य' कहना।

आर्थिक विषमता

एक ओर सैर के लिए नैनीताल आए लोग, होटल और बंगले; दूसरी ओर एक रुपये और जूठे खाने के लिए काम करता भूखा बालक। कहानी अमीर-गरीब की खाई दिखाती है।

From the text: बालक की मज़दूरी: जूठा खाना और एक रुपया।

'भाग्य' के नाम पर पलायन

शीर्षक व्यंग्यात्मक है। बालक की मृत्यु भाग्य से नहीं, समाज की उपेक्षा से हुई; पर लोग 'भाग्य' कहकर अपनी ज़िम्मेदारी से बच निकलते हैं।

From the text: कहानी का अंत और शीर्षक।

प्रकृति और मनुष्य का विरोधाभास

सुंदर बादलों भरी संध्या और निर्मम ठंड; प्रकृति बालक को बर्फ़ का कफ़न देती है, जबकि मनुष्य उसे एक कंबल भी नहीं दे पाता।

From the text: 'मानो दुनिया की बेहयाई ढँकने के लिए प्रकृति ने शव के लिए सफ़ेद और ठंडे कफ़न का प्रबंध कर दिया था।'

Characters

पहाड़ी बालक

दस-बारह वर्ष का गरीब, बेघर बालक।

  • गरीब और उपेक्षित: नंगे पैर, मैली कमीज़।
  • मेहनती: एक रुपये और जूठे खाने के लिए काम करता है।
  • स्वाभिमानी और सहनशील: शिकायत नहीं करता।

उसका वर्णन और उसकी कहानी।

लेखक और उसके मित्र

नैनीताल घूमने आए शिक्षित व्यक्ति।

  • सहानुभूति दिखाते हैं, पर ठोस सहायता नहीं करते।
  • संवेदनशील होते हुए भी अपनी सुविधा को प्राथमिकता देते हैं।

बालक को वकील के पास ले जाना, फिर लौट आना।

वकील साहब

लेखक के मित्र और होटल के मालिक।

  • पूर्वाग्रही: 'पहाड़ी बड़े शैतान होते हैं।'
  • स्वार्थी और अविश्वासी।

बालक को नौकर रखने से इनकार।

How it is written

DeviceExampleEffect
व्यंग्यशीर्षक 'अपना अपना भाग्य'।भाग्य के नाम पर ज़िम्मेदारी से भागने वाले समाज पर कटाक्ष।
प्रकृति-चित्रणरुई के रेशे जैसे बादल, कुहरे की सफ़ेदी।सुंदर वातावरण और करुण घटना का विरोधाभास।
उत्प्रेक्षाबर्फ़ की चादर मानो प्रकृति का दिया कफ़न।मृत्यु के दृश्य को मार्मिक और व्यंग्यपूर्ण बनाती है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • मैंने देखा कि कुहरे की सफेदी में कुछ ही हाथ दूर से एक काली-सी मूर्ति हमारी तरफ आ रही थी।

    लेखक: नैनीताल की संध्या में बालक को पहली बार देखना।

    कहानी के मुख्य पात्र का प्रवेश।

  • अजी ये पहाड़ी बड़े शैतान होते हैं। बच्चे-बच्चे में अवगुण छिपे रहते हैं

    वकील साहब: बालक को नौकर रखने से मना करते हुए।

    पूर्वाग्रह और संवेदनहीनता।

  • मानो दुनिया की बेहयाई ढँकने के लिए प्रकृति ने शव के लिए सफ़ेद और ठंडे कफ़न का प्रबंध कर दिया था।

    कथावाचक: बालक की मृत्यु का वर्णन।

    समाज की बेहयाई पर तीखा व्यंग्य।

  • आप भी क्या अजीब हैं उठा लाए कहीं से-लो जी यह नौकर लो।

    वकील साहब: लेखक से।

    गरीब के प्रति तिरस्कार।

अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

सहानुभूति से आगे बढ़कर सहायता

मान लीजिए सर्दी की रात आपको रेलवे स्टेशन पर बिना कंबल के सोता एक बच्चा दिखता है।

कहानी से क्या सीख लेकर आप क्या करेंगे?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. केवल दुख जताना पर्याप्त नहीं।
  2. बड़ों की सहायता से कंबल, भोजन या हेल्पलाइन पर सूचना।

Answer: लेखक की तरह केवल बात करके लौट आना नहीं, बल्कि छोटी-सी ठोस सहायता किसी की जान बचा सकती है।

Memory hook: सहानुभूति + सहायता = मानवता।

पूर्वाग्रह

कल्पना कीजिए कोई कहता है कि 'फलाँ इलाके के लोग चोर होते हैं।'

वकील साहब के कथन से तुलना कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पूरे समूह के बारे में सामान्यीकरण।
  2. इससे ज़रूरतमंद व्यक्ति के साथ अन्याय।

Answer: वकील साहब ने 'पहाड़ी बच्चे शैतान होते हैं' कहकर एक मासूम बालक को सहारे से वंचित कर दिया; पूर्वाग्रह अन्याय को जन्म देता है।

Memory hook: व्यक्ति को परखो, समूह को नहीं।

भाग्य का बहाना

मान लीजिए कोई दुर्घटना के बाद कहता है, 'उसकी किस्मत ही खराब थी', जबकि सड़क पर गड्ढा महीनों से था।

कहानी का शीर्षक यहाँ कैसे लागू होता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. असल कारण: लापरवाही।
  2. भाग्य कहना: ज़िम्मेदारी से बचना।

Answer: जैसे कहानी में, 'भाग्य' कहना अक्सर मानवीय लापरवाही को छिपाने का बहाना होता है।

Memory hook: भाग्य नहीं, लापरवाही।

Topics in this chapter

How the school exam asks अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
प्रसंग और वर्णन'लेखक किसके साथ कहाँ बैठा था?' / 'बादलों का कैसा वर्णन है?'नैनीताल, संध्या, बेंच, मित्र; प्रकृति-चित्रण के शब्द।
पात्र-परिचय'बालक का परिचय दीजिए।' / 'वक्ता (वकील साहब) का परिचय।'आयु, रूप, परिस्थिति; वकील का पूर्वाग्रह।
आशय''दुनिया की बेहयाई ढँकने...' का आशय'शाब्दिक दृश्य + व्यंग्यार्थ।
उद्देश्य और शीर्षक'कहानी का उद्देश्य' / 'शीर्षक की सार्थकता'संवेदनहीनता, विषमता, भाग्य के नाम पर पलायन।

Tricks to remember अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • कहानी-क्रम

    बेंच → बादल → बालक → बातचीत → वकील का इनकार → ठंडी रात → बर्फ़ का कफ़न → 'भाग्य'।

    Use it when: घटना-क्रम।

  • 1 रुपया, 10-12 वर्ष

    बालक की आयु और मज़दूरी।

    Use it when: तथ्य-प्रश्न।

  • बर्फ़ = कफ़न

    प्रकृति ने दिया, मनुष्य ने नहीं।

    Use it when: व्यंग्य वाला अवतरण।

अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: अवतरण: अंत

पर बतलाने वालों ने बताया कि गरीब के मुँह पर छाती, मुट्ठियों और पैरों पर बर्फ की हल्की-सी चादर चिपक गई थी, मानो दुनिया की बेहयाई ढँकने के लिए प्रकृति ने शव के लिए सफ़ेद और ठंडे कफ़न का प्रबंध कर दिया था।

  1. (1) · 2 marks · Short answer

    (i) यहाँ 'गरीब' किसे कहा गया है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए।

  2. (2) · 2 marks · Short answer

    (ii) बालक की मृत्यु का क्या कारण था?

  3. (3) · 3 marks · Short answer

    (iii) 'दुनिया की बेहयाई ढँकने के लिए प्रकृति ने कफ़न का प्रबंध कर दिया' का आशय स्पष्ट कीजिए।

  4. (4) · 3 marks · Long answer

    (iv) कहानी का उद्देश्य और शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

Show the answersAnswers
  1. उस दस-बारह वर्ष के पहाड़ी बालक को, जो गरीबी के कारण घर से भागकर नैनीताल आया था और एक दुकान पर जूठे खाने और एक रुपये के लिए काम करता था।
  2. उसका काम छूट गया था, रहने की जगह नहीं थी, और कड़ाके की ठंड में उसके पास केवल एक फटी कमीज़ थी; किसी ने आश्रय नहीं दिया और वह रात में ठंड से मर गया।
  3. जिस बालक को जीते-जी मनुष्यों ने एक कपड़ा तक नहीं दिया, उसके शव पर प्रकृति ने बर्फ़ की सफ़ेद चादर ओढ़ा दी। लेखक व्यंग्य करता है कि मानो प्रकृति मनुष्य की निर्लज्जता और संवेदनहीनता को ढँक रही हो।
  4. उद्देश्य: समाज की स्वार्थपरता, संवेदनहीनता और आर्थिक विषमता को उजागर करना। शीर्षक व्यंग्यात्मक है: बालक की मृत्यु को लोग 'अपना-अपना भाग्य' कहकर टाल देते हैं, जबकि असल कारण समाज की उपेक्षा थी।

अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: बालक का वर्णन · 2 marks · Short answerExam level

लेखक ने बालक का वर्णन कैसे किया है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आयु, कपड़े, रूप, आँखें, चाल।

Answer: दस-बारह वर्ष का बालक, नंगे पैर, नंगे सिर, एक मैली कमीज़ लटकाए; गोरा रंग मैल से काला पड़ गया था, आँखें बड़ी पर सूनी थीं, और ठंड से पैर सीधे नहीं पड़ रहे थे।

Example 2: वकील साहब का इनकार · 2 marks · Short answerExam level

वकील साहब बालक को नौकर क्यों नहीं रखना चाहते थे?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पूर्वाग्रह।
  2. चोरी का डर।

Answer: उनका मानना था कि पहाड़ी बच्चे शैतान और अवगुणों से भरे होते हैं; अनजान बालक को रखने पर वह सामान लेकर भाग सकता है, इसलिए उन्होंने मना कर दिया।

Example 3: लेखक की भूमिका · 3 marks · Short answerHarder exam level

क्या लेखक और उसके मित्र भी बालक की मृत्यु के लिए उत्तरदायी हैं? तर्क दीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. उन्होंने सहानुभूति दिखाई।
  2. पर ठोस सहायता (आश्रय, कपड़ा, पैसे) नहीं दी।

Answer: हाँ, कुछ हद तक। उन्होंने बालक से बात की और उसे वकील के पास भी ले गए, पर इनकार के बाद उसे कड़ाके की ठंड में अकेला छोड़ दिया; एक रात का आश्रय या गर्म कपड़ा उसकी जान बचा सकता था। कहानी इसी 'सहानुभूति पर निष्क्रियता' पर व्यंग्य करती है।

Example 4: शीर्षक का व्यंग्य · 3 marks · Short answerHarder exam level

'अपना अपना भाग्य' शीर्षक में छिपे व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लोगों का कथन।
  2. वास्तविक कारण।

Answer: लोग कहते हैं कि बालक का मरना उसका भाग्य था, पर वास्तव में उसकी मृत्यु समाज की उपेक्षा, गरीबी और संवेदनहीनता के कारण हुई। 'भाग्य' कहकर लोग अपने कर्तव्य से बच निकलते हैं; यही शीर्षक का व्यंग्य है।

Example 5: आप क्या करते? · 4 marks · Long answerHOTS / competency

यदि आप लेखक की जगह होते तो उस बालक की सहायता कैसे करते?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. तत्काल सहायता।
  2. दीर्घकालिक उपाय।

Answer: मुक्त उत्तर। उदाहरण: उसी रात उसे भोजन, गर्म कपड़ा या कंबल और अपने होटल में आश्रय देता; अगले दिन किसी आश्रय-गृह, बाल-कल्याण संस्था या पुलिस की सहायता से उसकी सुरक्षा और शिक्षा की व्यवस्था करवाता, या उसके परिवार से संपर्क करता।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

3 अंक: ''अपना अपना भाग्य' शीर्षक में छिपे व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।' (विभाजन संकेतात्मक) (3 marks)

StepMarks
लोगों का कथन: मृत्यु को भाग्य कहना1
वास्तविक कारण: उपेक्षा, गरीबी, संवेदनहीनता1
व्यंग्य: भाग्य के नाम पर कर्तव्य से पलायन1

Where students lose marks in अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: मृत्यु का कारण केवल 'ठंड' लिखना

    छात्र सामाजिक कारण छोड़ देते हैं।

    Do this: ठंड के साथ गरीबी, बेघर होना और समाज की उपेक्षा लिखें।

    Usually costs: कारण वाले प्रश्न के अंक।

  • Mistake: वकील साहब को लेखक समझना

    दोनों 'मित्र' कहे गए हैं।

    Do this: लेखक के साथ बेंच पर बैठा मित्र अलग है; वकील साहब होटल के मालिक हैं।

    Usually costs: परिचय के अंक।

  • Mistake: शीर्षक को शाब्दिक रूप से लेना

    व्यंग्य न समझना।

    Do this: स्पष्ट करें कि 'भाग्य' एक बहाना है।

    Usually costs: शीर्षक के अंक।

  • Mistake: प्रकृति-चित्रण छोड़ देना

    वर्णन वाले प्रश्न में संक्षिप्त उत्तर।

    Do this: बादलों के रंग और रुई के रेशे जैसी उपमा लिखें।

    Usually costs: वर्णन के अंक।

Practice questions on अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 2 marks · Short answerExam level

    बालक नैनीताल क्यों आया था?

    Hint

    घर की गरीबी।

    Answer

    घर में बहुत भाई-बहन थे और भूख रहती थी, इसलिए वह काम की तलाश में भागकर नैनीताल आ गया था।

  2. Q2 · 1 mark · Very short answerExam level

    बालक को काम के बदले क्या मिलता था?

    Hint

    भोजन और पैसे।

    Answer

    जूठा खाना और एक रुपया।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    नैनीताल की संध्या का वर्णन कीजिए।

    Hint

    बादल और रंग।

    Answer

    संध्या धीरे-धीरे उतर रही थी; रुई के रेशे जैसे बादल सिर छूते हुए निकल रहे थे और प्रकाश-अंधकार के साथ कभी नीले, कभी सफ़ेद, कभी हल्के लाल दिखते थे।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    वकील साहब के कथन से उनके स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है?

    Hint

    पूर्वाग्रह।

    Answer

    वे पूर्वाग्रही, अविश्वासी और संवेदनहीन हैं; एक पूरे समुदाय के बच्चों को शैतान मानते हैं और एक ज़रूरतमंद बालक की मदद करने के बजाय अपना नुकसान सोचते हैं।

  5. Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    आज के समाज में बेघर बच्चों की सहायता के लिए क्या किया जा सकता है?

    Hint

    व्यक्ति, समाज, सरकार।

    Answer

    मुक्त उत्तर: आश्रय-गृह और रैन-बसेरे; चाइल्डलाइन जैसी हेल्पलाइन पर सूचना देना; पुराने गर्म कपड़ों का दान; बाल-श्रम पर रोक और शिक्षा की व्यवस्था; व्यक्तिगत स्तर पर तुरंत भोजन और आश्रय देना।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    'उत्प्रेक्षा' अलंकार का उदाहरण कहानी से देकर समझाइए।

    Hint

    'मानो'।

    Answer

    'मानो दुनिया की बेहयाई ढँकने के लिए प्रकृति ने शव के लिए सफ़ेद और ठंडे कफ़न का प्रबंध कर दिया था।' यहाँ बर्फ़ की चादर में कफ़न की संभावना की गई है ('मानो'), इसलिए उत्प्रेक्षा है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.'अपना अपना भाग्य' के लेखक कौन हैं?Show answer

    जैनेंद्र कुमार।

  2. 2.कहानी किस स्थान पर घटित होती है?Show answer

    नैनीताल।

  3. 3.बालक की आयु कितनी थी?Show answer

    दस-बारह वर्ष।

  4. 4.वकील साहब ने बालक के बारे में क्या कहा?Show answer

    पहाड़ी बड़े शैतान होते हैं, बच्चे-बच्चे में अवगुण छिपे रहते हैं।

  5. 5.बालक की मृत्यु कैसे हुई?Show answer

    ठंड से, सड़क किनारे पेड़ के नीचे।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप कहानी को आठ चरणों में सुना सकते हैं?
  • क्या आप बालक और वकील साहब का परिचय दे सकते हैं?
  • क्या आप 'बेहयाई' वाले अवतरण का आशय लिख सकते हैं?
  • क्या आप शीर्षक का व्यंग्य समझा सकते हैं?
  • क्या आप कहानी का उद्देश्य बता सकते हैं?

अपना अपना भाग्य – जैनेंद्र कुमार: frequently asked questions

क्या लेखक बालक के प्रति निर्दयी थे?

निर्दयी नहीं, पर निष्क्रिय: उन्होंने सहानुभूति दिखाई, पर ठोस सहायता नहीं की। कहानी इसी पर व्यंग्य करती है।

कहानी का अंत इतना कठोर क्यों है?

लेखक पाठक को झकझोरना चाहते हैं ताकि वह गरीबों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझे।

क्या यह कहानी कक्षा 10 में भी है?

नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में यह कक्षा 9 के निर्धारित पाठों में है।

उद्देश्य वाले प्रश्न में कितने बिंदु लिखें?

तीन: संवेदनहीनता/स्वार्थ, आर्थिक विषमता, और भाग्य के नाम पर ज़िम्मेदारी से पलायन।

Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; Sahitya Sagar: Apna Apna Bhagya, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)