मातृभूमि का मान (हरिकृष्ण 'प्रेमी') ICSE Class 9: सारांश, चरित्र-चित्रण और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'मातृभूमि का मान' हरिकृष्ण 'प्रेमी' का ऐतिहासिक एकांकी है। बूँदी से हारकर मेवाड़ के महाराणा लाखा प्रतिज्ञा करते हैं कि बूँदी का दुर्ग जीते बिना अन्न-जल नहीं लेंगे। इसके लिए बूँदी का नकली दुर्ग बनता है, पर मेवाड़ की सेना का हाड़ा सैनिक वीरसिंह अपनी मातृभूमि के उस दुर्ग की रक्षा में प्राण दे देता है।
What मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी' is about
'मातृभूमि का मान' हिंदी के ऐतिहासिक नाटककार हरिकृष्ण 'प्रेमी' का एकांकी है, जो एकांकी संचय में संकलित है और CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में कक्षा 9 के लिए निर्धारित है।
एकांकी राजस्थान के गौरवपूर्ण इतिहास की पृष्ठभूमि में मातृभूमि-प्रेम और स्वाभिमान की कथा है। मेवाड़ के महाराणा लाखा राजपूतों को एकता के सूत्र में बाँधने के लिए बूँदी को अधीनता स्वीकार करने को कहते हैं, पर बूँदी के राव हेमू स्वतंत्र रहना चाहते हैं। युद्ध में हार, क्रोध में की गई 'विवेकहीन' प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग की योजना और अंत में वीरसिंह का बलिदान, सब मिलकर यह संदेश देते हैं कि अपनी जन्मभूमि का मान प्राणों से भी बड़ा है।
2025 के ICSE हिंदी बोर्ड प्रश्न-पत्र में इसी एकांकी का अवतरण ('ताकत की बात छोड़ो, अभय सिंह!...') पूछा गया था। परीक्षकों के अनुसार छात्रों ने अभय सिंह और राव हेमू के नाम मिला दिए, पूरी कथा नहीं जानते थे, राव हेमू का उत्तर (मेवाड़ की अधीनता अस्वीकार, हाड़ा वंश किसी का गुलाम नहीं) अधूरा लिखा, और एकांकी का उद्देश्य (देशप्रेम, राजस्थान के गौरवशाली इतिहास पर गर्व) नहीं बताया।
Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में एकांकी संचय के हर प्रश्न (अवतरण और चार उप-प्रश्न) के 10 अंक होते हैं।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र और परीक्षकों की रिपोर्ट
मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी': summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
संदेश और इनकार: मेवाड़ के महाराणा लाखा चाहते हैं कि राजपूतों की असंगठित शक्ति संगठित होकर एक सूत्र में बँधे। इसलिए वे अपने सेनापति अभय सिंह के हाथ बूँदी के राव हेमू को संदेश भेजते हैं कि बूँदी मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करे। राव हेमू उत्तर देते हैं कि बूँदी महाराणाओं का आदर करता है, पर स्वतंत्र रहना चाहता है; हाड़ा वंश किसी की गुलामी नहीं करेगा। अभय सिंह ताकत की बात करते हैं, तो राव हेमू कहते हैं कि हर राजपूत को अपनी ताकत पर नाज़ है; राजपूतों की एकता की माला तो बनी हुई है, पर मेवाड़ के इस दंभ से उस माला को तोड़ने का श्रीगणेश हो गया है।
युद्ध और प्रतिज्ञा: इसके बाद नीमरा के मैदान में युद्ध होता है, जिसमें महाराणा लाखा को बूँदी के राव हेमू से पराजित होकर भागना पड़ता है। आत्मग्लानि से भरे लाखा अपने को धिक्कारते हैं और जनसभा में भी नहीं जाना चाहते। अपमान की वेदना में वे प्रतिज्ञा करते हैं कि जब तक बूँदी के दुर्ग में सेना सहित प्रवेश नहीं करेंगे, अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे।
नकली दुर्ग: यह प्रतिज्ञा विवेकहीन थी, क्योंकि बूँदी को तुरंत जीतना संभव नहीं था। तब एक चारणी के सुझाव पर बूँदी का एक नकली (मिट्टी का) दुर्ग बनवाया जाता है, ताकि उसे ध्वस्त करके प्रतिज्ञा पूरी की जा सके। महाराणा स्वयं मानते हैं कि इस मिट्टी के दुर्ग को मिट्टी में मिलाने से उनकी आत्मा को संतोष नहीं होगा, पर विवेकहीन प्रतिज्ञा से छुटकारा मिल जाएगा।
वीरसिंह का बलिदान: मेवाड़ की सेना में नौकरी करने वाले वीरसिंह की जन्मभूमि बूँदी थी। जब उसे पता चलता है कि उसकी मातृभूमि का दुर्ग (भले नकली हो) अपमानित होने वाला है, तो वह अपने हाड़ा साथियों के साथ प्रण लेता है कि प्राण रहते उस दुर्ग पर मेवाड़ की पताका नहीं फहरने देंगे। वह दुर्ग की रक्षा में वीरता से लड़ता हुआ प्राण दे देता है। उसके बलिदान से महाराणा लाखा सहित सब राजपूतों को समझ आता है कि जन्मभूमि का मान क्या होता है।
Themes and message
मातृभूमि-प्रेम और बलिदान
वीरसिंह के लिए अपनी जन्मभूमि का नकली दुर्ग भी उतना ही पवित्र है जितना असली; उसका मान बचाने के लिए वह प्राण दे देता है। यही एकांकी का केंद्रीय संदेश है।
From the text: वीरसिंह का प्रण और बलिदान।
स्वाभिमान और स्वतंत्रता
राव हेमू मेवाड़ का आदर करते हुए भी अधीनता स्वीकार नहीं करते; हाड़ा वंश स्वतंत्र रहना चाहता है।
From the text: 'प्रत्येक राजपूत को अपनी ताकत पर नाज़ है।'
राजपूत एकता का प्रश्न
महाराणा लाखा एकता चाहते थे, पर दबाव से थोपी गई एकता उलटी पड़ती है; राव हेमू के शब्दों में, एकता की 'माला' तोड़ने का श्रीगणेश हो गया।
From the text: 'उस माला को तोड़ने का श्रीगणेश हो गया है।'
क्रोध में लिया गया विवेकहीन निर्णय
अपमान की वेदना में की गई प्रतिज्ञा महाराणा को नकली दुर्ग जैसे उपाय तक ले जाती है, जिसका परिणाम एक वीर का बलिदान होता है।
From the text: 'अपमान की वेदना में जो विवेकहीन प्रतिज्ञा मैंने कर डाली थी'
Characters
महाराणा लाखा
मेवाड़ के शासक।
- महत्त्वाकांक्षी: राजपूतों को एक सूत्र में बाँधना चाहते हैं।
- स्वाभिमानी और क्रोधी: हार से आत्मग्लानि, विवेकहीन प्रतिज्ञा।
- अंत में वीरसिंह के बलिदान से प्रभावित और विवेकशील।
प्रतिज्ञा और नकली दुर्ग का प्रसंग।
राव हेमू
बूँदी के शासक (हाड़ा राजपूत)।
- स्वाभिमानी, देशभक्त, निर्भीक।
- मेवाड़ का आदर करते हुए भी स्वतंत्रता के पक्षधर।
अभय सिंह को उत्तर (2025 का अवतरण)।
अभय सिंह
मेवाड़ के सेनापति; महाराणा का संदेश लेकर बूँदी जाते हैं।
- स्वामिभक्त; मेवाड़ की शक्ति पर गर्व करने वाले।
राव हेमू से संवाद।
वीरसिंह
मेवाड़ की सेना में नौकरी करने वाला बूँदी का हाड़ा वीर।
- सच्चा देशभक्त: मातृभूमि को नौकरी से ऊपर रखता है।
- निर्भीक और वीर: नकली दुर्ग की रक्षा में प्राण देता है।
साथियों के साथ प्रण और बलिदान।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| प्रतीक: माला | राजपूतों की एकता की 'माला'। | एकता का सुंदर प्रतीक; दंभ से उसके टूटने का संकेत। |
| नाटकीय विडंबना | नकली दुर्ग की रक्षा में असली बलिदान। | दिखाता है कि मातृभूमि का मान प्रतीक में भी उतना ही सच्चा है। |
| ओजपूर्ण संवाद | 'ताकत की बात छोड़ो, अभय सिंह!' | वीर रस और ऐतिहासिक वातावरण। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
ताकत की बात छोड़ो, अभय सिंह! प्रत्येक राजपूत को अपनी ताकत पर नाज़ है।
राव हेमू: अभय सिंह के संदेश के उत्तर में (2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र का अवतरण)।
बूँदी का स्वाभिमान।
हाँ, उस माला को तोड़ने का श्रीगणेश हो गया है।
राव हेमू: उसी संवाद का अंत।
दंभ से एकता के टूटने की चेतावनी।
जब तक बूँदी के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करूँगा, अन्न जल ग्रहण नहीं करूँगा।
महाराणा लाखा: नीमरा की हार के बाद की प्रतिज्ञा।
क्रोध में ली गई विवेकहीन प्रतिज्ञा।
इस मिट्टी के दुर्ग को मिट्टी में मिलाने से मेरी आत्मा को संतोष नहीं होगा
महाराणा लाखा: नकली दुर्ग के बारे में।
महाराणा का अंतर्द्वंद्व।
मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी' in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
जन्मभूमि का सम्मान
मान लीजिए आप दूसरे शहर में पढ़ते हैं और कोई आपके गृह-नगर का मज़ाक उड़ाता है।
वीरसिंह की भावना इसे कैसे समझाती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- जन्मभूमि से भावनात्मक जुड़ाव।
- सम्मान की रक्षा, पर शालीनता से।
Answer: जैसे वीरसिंह के लिए नकली दुर्ग भी अपनी मातृभूमि का प्रतीक था, वैसे ही हमारी जन्मभूमि से हमारी पहचान जुड़ी है; उसका सम्मान स्वाभाविक है, पर आज हम उसे तर्क और अच्छे आचरण से बचाते हैं।
Memory hook: प्रतीक भी पवित्र।
क्रोध में लिए निर्णय
कल्पना कीजिए खेल में हारने के बाद आप गुस्से में कसम खाते हैं कि जब तक जीतेंगे नहीं, खाना नहीं खाएँगे।
महाराणा लाखा की प्रतिज्ञा से क्या सीख मिलती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- क्रोध में निर्णय विवेकहीन।
- उसे निभाने के लिए नकली उपाय करने पड़ते हैं।
Answer: क्रोध में की गई प्रतिज्ञाएँ अक्सर हमें और कठिनाई में डालती हैं; शांत होकर निर्णय लेना बुद्धिमानी है।
Memory hook: गुस्से में कसम, पछतावे का कदम।
एकता थोपी नहीं जाती
मान लीजिए कक्षा का मॉनिटर सब पर अपनी बात थोपकर 'टीम' बनाना चाहता है।
राव हेमू की 'माला' वाली बात यहाँ कैसे लागू होती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- दबाव से विरोध पैदा होता है।
- आदर और बराबरी से सच्ची एकता।
Answer: राव हेमू के अनुसार ज़बरदस्ती थोपी गई अधीनता एकता की माला तोड़ देती है; सच्ची एकता आदर और बराबरी से बनती है।
Memory hook: दबाव से नहीं, आदर से एकता।
Topics in this chapter
How the school exam asks मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी'
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| वक्ता-श्रोता और प्रसंग | 'अभय सिंह कौन हैं?' / 'वक्ता कौन है? उसने क्या उत्तर दिया?' | अभय सिंह (मेवाड़ के सेनापति) और राव हेमू (बूँदी) को न मिलाएँ। |
| प्रतिज्ञा और नकली दुर्ग | 'महाराणा लाखा ने प्रतिज्ञा क्यों ली?' / 'नकली दुर्ग क्यों बनवाया गया?' | नीमरा की हार, अपमान, विवेकहीन प्रतिज्ञा, चारणी का सुझाव। |
| वीरसिंह | 'वीरसिंह कौन था? उसने क्या किया?' | बूँदी का हाड़ा, मेवाड़ की सेना में; नकली दुर्ग की रक्षा में बलिदान। |
| शीर्षक और उद्देश्य | ''मातृभूमि का मान' शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।' | वीरसिंह का बलिदान और राव हेमू का स्वाभिमान: दोनों मातृभूमि के मान के लिए। |
Tricks to remember मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी'
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पात्र-नक्शा
मेवाड़: लाखा (राणा) + अभय सिंह (सेनापति) + वीरसिंह (बूँदी का, पर मेवाड़ में नौकर)। बूँदी: राव हेमू।
Use it when: पात्र-परिचय।
घटना-क्रम
संदेश → इनकार → नीमरा की हार → प्रतिज्ञा → नकली दुर्ग → वीरसिंह का बलिदान।
Use it when: सारांश।
न-न-न
नीमरा (युद्ध), नकली (दुर्ग), नाज़ (ताकत पर)।
Use it when: मुख्य शब्द।
मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी': extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: अवतरण (2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र में पूछा गया)
इतने बड़े दंभ को मेवाड़ अपने प्राणों में आश्रय न दें, इसी में उसका कल्याण है। रह गई बात एक माला गूँथने की, तो वह माला तो बनी हुई है। हाँ, उस माला को तोड़ने का श्रीगणेश हो गया है।
(1) · 2 marks · Short answer
(i) अभय सिंह कौन हैं? वे क्या संदेश लेकर आए थे?
(2) · 2 marks · Short answer
(ii) वक्ता कौन है? उसने संदेश का क्या उत्तर दिया?
(3) · 3 marks · Short answer
(iii) वक्ता के चरित्र की तीन विशेषताएँ लिखिए।
(4) · 3 marks · Long answer
(iv) एकांकी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Show the answersAnswers
- अभय सिंह मेवाड़ के सेनापति हैं। वे महाराणा लाखा का संदेश लाए थे कि बूँदी मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करे, ताकि राजपूतों की शक्ति एक सूत्र में बँध सके।
- वक्ता बूँदी के राव हेमू हैं। उन्होंने मेवाड़ की अधीनता अस्वीकार कर दी और कहा कि बूँदी महाराणाओं का आदर करता है, पर हाड़ा वंश किसी की गुलामी नहीं करेगा।
- स्वाभिमानी (अधीनता अस्वीकार), देशभक्त (बूँदी की स्वतंत्रता के लिए दृढ़), निर्भीक और गर्वीला हाड़ा राजपूत (मेवाड़ की शक्ति से नहीं डरता)।
- देशप्रेम और राष्ट्रीय चेतना जगाना; यह दिखाना कि मातृभूमि का मान प्राणों से बड़ा है; स्वाभिमान की रक्षा; राजपूतों की एकता की आवश्यकता; और राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का स्मरण, जिसका चरम वीरसिंह का बलिदान है।
मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी': exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: प्रतिज्ञा का कारण · 3 marks · Short answerExam level
महाराणा लाखा ने क्या प्रतिज्ञा ली और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रतिज्ञा का शब्द।
- कारण: नीमरा में हार और अपमान।
Answer: उन्होंने प्रतिज्ञा की कि जब तक बूँदी के दुर्ग में सेना सहित प्रवेश नहीं करेंगे, अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। कारण: राव हेमू ने अधीनता का प्रस्ताव ठुकरा दिया था, और नीमरा के युद्ध में बूँदी से पराजित होकर भागने से उन्हें गहरा अपमान और आत्मग्लानि हुई थी।
Example 2: विवेकहीन प्रतिज्ञा · 3 marks · Short answerHarder exam level
महाराणा की प्रतिज्ञा 'विवेकहीन' क्यों थी? उसे पूरा करने का क्या उपाय निकाला गया?
Try it first, then show the solutionSolution
- क्रोध में, बिना सोचे।
- बूँदी को तुरंत जीतना असंभव; नकली दुर्ग।
Answer: प्रतिज्ञा अपमान की वेदना और क्रोध में बिना सोचे-समझे की गई थी; बूँदी को तुरंत जीतना संभव नहीं था और अन्न-जल त्यागने से महाराणा के प्राण संकट में थे। इसलिए एक चारणी के सुझाव पर बूँदी का नकली दुर्ग बनवाया गया, जिसे ध्वस्त करके प्रतिज्ञा पूरी की जा सके।
Example 3: वीरसिंह का बलिदान · 3 marks · Short answerHarder exam level
वीरसिंह कौन था? उसने नकली दुर्ग की रक्षा क्यों की?
Try it first, then show the solutionSolution
- जन्मभूमि बूँदी; मेवाड़ की नौकरी।
- दुर्ग नकली पर मातृभूमि का प्रतीक।
Answer: वीरसिंह बूँदी का हाड़ा राजपूत था, जो मेवाड़ की सेना में नौकरी करता था। उसके लिए नकली दुर्ग भी उसकी मातृभूमि बूँदी का प्रतीक था, इसलिए उसने साथियों के साथ प्रण लिया कि प्राण रहते उस पर मेवाड़ की पताका नहीं फहरने देंगे, और उसकी रक्षा में प्राण दे दिए।
Example 4: शीर्षक की सार्थकता · 3 marks · Short answerHarder exam level
'मातृभूमि का मान' शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- राव हेमू: स्वतंत्रता का मान।
- वीरसिंह: नकली दुर्ग का मान।
- लाखा: सीख।
Answer: एकांकी की हर घटना मातृभूमि के मान से जुड़ी है: राव हेमू बूँदी की स्वतंत्रता का मान रखते हैं, और वीरसिंह नौकरी के कर्तव्य से ऊपर अपनी जन्मभूमि का मान रखते हुए नकली दुर्ग की रक्षा में प्राण दे देता है; उसके बलिदान से सब राजपूतों को जन्मभूमि का मान करना आता है। इसलिए शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
Example 5: कर्तव्य बनाम मातृभूमि · 4 marks · Long answerHOTS / competency
वीरसिंह मेवाड़ का सैनिक था, फिर भी उसने मेवाड़ के विरुद्ध हथियार उठाए। क्या उसका कार्य उचित था? तर्क दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- एक पक्ष: नौकरी का कर्तव्य।
- दूसरा पक्ष: मातृभूमि का सम्मान सर्वोपरि।
- अपना मत।
Answer: मुक्त उत्तर। एक दृष्टि से सैनिक को अपने स्वामी का आदेश मानना चाहिए। पर एकांकी के अनुसार मातृभूमि का मान किसी नौकरी से बड़ा है; वीरसिंह ने अपमान के उस नाटक में भाग लेने के बजाय सम्मान के लिए प्राण दिए, और उसके बलिदान ने स्वयं महाराणा को सच्चा देशप्रेम सिखाया। इसलिए उसका कार्य अपने युग के मूल्यों में उचित और प्रेरणादायक था।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
2 अंक + 2 अंक (2025 का स्वरूप): '(i) अभय सिंह कौन हैं? क्या संदेश लाए? (ii) वक्ता कौन है? उसने क्या उत्तर दिया?' (अंक-योजना के अपेक्षित बिंदुओं पर आधारित; विभाजन संकेतात्मक) (4 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| अभय सिंह: मेवाड़ के सेनापति | 1 |
| संदेश: बूँदी मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करे | 1 |
| वक्ता: राव हेमू (बूँदी) | 1 |
| उत्तर: अधीनता अस्वीकार; हाड़ा वंश किसी का गुलाम नहीं | 1 |
Where students lose marks in मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी'
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: अभय सिंह और राव हेमू को मिलाना
2025 के परीक्षकों ने यह भूल विशेष रूप से बताई।
Do this: अभय सिंह: मेवाड़ के सेनापति (संदेशवाहक)। राव हेमू: बूँदी के शासक (वक्ता)।
Usually costs: परिचय के अंक।
Mistake: राव हेमू का उत्तर अधूरा
2025 में परीक्षकों के अनुसार छात्रों ने राव हेमू के उत्तर की पूरी व्याख्या नहीं दी।
Do this: आदर करते हैं, पर अधीनता नहीं; हाड़ा वंश स्वतंत्र रहेगा।
Usually costs: उत्तर के अंक।
Mistake: वीरसिंह की स्थिति न समझना
यह न लिखना कि वह मेवाड़ की सेना में था, जिससे उसके द्वंद्व का महत्त्व छूट जाता है।
Do this: वह बूँदी का था, पर मेवाड़ की सेना में नौकरी करता था; यही उसका द्वंद्व है।
Usually costs: चरित्र और कथानक के अंक।
Mistake: उद्देश्य अधूरा
केवल 'वीरता' लिखना।
Do this: देशप्रेम, स्वाभिमान, एकता, राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का स्मरण।
Usually costs: उद्देश्य के अंक।
Practice questions on मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी'
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · Very short answerExam level
महाराणा लाखा किस युद्ध में पराजित हुए?
Hint
मैदान का नाम।
Answer
नीमरा के युद्ध में (बूँदी के राव हेमू से)।
Q2 · 2 marks · Short answerExam level
महाराणा लाखा जनसभा में क्यों नहीं जाना चाहते थे?
Hint
आत्मग्लानि।
Answer
नीमरा के युद्ध में हारकर भागने से उन्हें गहरी आत्मग्लानि थी; वे अपने को धिक्कार रहे थे और लोगों का सामना नहीं करना चाहते थे।
Q3 · 1 mark · Very short answerHarder exam level
नकली दुर्ग बनवाने का सुझाव किसने दिया?
Hint
चारण।
Answer
एक चारणी ने।
Q4 · 3 marks · Short answerHarder exam level
राव हेमू ने 'माला' का उदाहरण देकर क्या कहा? उसका भाव लिखिए।
Hint
एकता।
Answer
उन्होंने कहा कि राजपूतों की एकता की माला तो बनी हुई है, पर मेवाड़ के दंभ से उसे तोड़ने का श्रीगणेश हो गया है। भाव: राजपूत पहले से ही एक-दूसरे का आदर करते हैं; ज़बरदस्ती अधीनता थोपने से एकता बनती नहीं, टूटती है।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder exam level
वीरसिंह के बलिदान का राजपूतों पर क्या प्रभाव पड़ा?
Hint
सीख।
Answer
उसके बलिदान ने राजपूतों (स्वयं महाराणा लाखा सहित) को जन्मभूमि का मान करना सिखा दिया।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
आज के भारत में 'मातृभूमि का मान' कैसे बढ़ाया जा सकता है? तीन उपाय लिखिए।
Hint
नागरिक कर्तव्य।
Answer
मुक्त उत्तर: अपने कर्तव्य ईमानदारी से निभाना; राष्ट्रीय प्रतीकों, धरोहर और पर्यावरण का सम्मान व रक्षा; देश की एकता बनाए रखना और भेदभाव से दूर रहना।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'मातृभूमि का मान' के लेखक कौन हैं?Show answer
हरिकृष्ण 'प्रेमी'।
2.महाराणा लाखा किस राज्य के शासक थे?Show answer
मेवाड़ के।
3.बूँदी के शासक कौन थे?Show answer
राव हेमू (हाड़ा)।
4.नकली दुर्ग क्यों बनवाया गया?Show answer
महाराणा की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए।
5.नकली दुर्ग की रक्षा किसने की?Show answer
वीरसिंह ने, अपने हाड़ा साथियों के साथ।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप एकांकी को छह चरणों में सुना सकते हैं?
- क्या आप अभय सिंह, राव हेमू, लाखा और वीरसिंह का परिचय दे सकते हैं?
- क्या आप 'माला' वाले कथन का भाव लिख सकते हैं?
- क्या आप प्रतिज्ञा को विवेकहीन कहने का कारण बता सकते हैं?
- क्या आप शीर्षक की सार्थकता और उद्देश्य लिख सकते हैं?
मातृभूमि का मान – हरिकृष्ण 'प्रेमी': frequently asked questions
क्या यह एकांकी ऐतिहासिक है?
यह राजस्थान के मेवाड़ और बूँदी के इतिहास की एक प्रसिद्ध कथा पर आधारित है; लेखक ने इसे देशप्रेम का संदेश देने के लिए नाटकीय रूप दिया है।
'हाड़ा' कौन थे?
बूँदी पर शासन करने वाला राजपूत वंश; राव हेमू और वीरसिंह दोनों हाड़ा राजपूत हैं।
क्या यह एकांकी कक्षा 10 में भी है?
नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में यह कक्षा 9 के निर्धारित एकांकियों में है।
उत्तर में नामों का ध्यान क्यों रखें?
2025 में परीक्षकों ने अभय सिंह और राव हेमू के नाम मिलाने पर अंक काटे; वक्ता और श्रोता दोनों के नाम और राज्य लिखें।
Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; CISCE Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi (examiners' comments); Ekanki Sanchay: Matrubhumi Ka Maan, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)