गिरधर की कुंडलियाँ (गिरधर कविराय) ICSE Class 9: भावार्थ, शब्दार्थ और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
साहित्य सागर में गिरधर कविराय की कुंडलियाँ हैं, जो सरल भाषा में व्यावहारिक नीति सिखाती हैं: लाठी और कमरी (कंबल) की उपयोगिता, गुणों का महत्त्व, स्वार्थी संसार, मज़बूत का सहारा लेना, बढ़े धन का दान, और राजदरबार में समय देखकर व्यवहार करना।
What गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय is about
गिरधर कविराय अठारहवीं शताब्दी के नीतिकार कवि माने जाते हैं, जिनकी कुंडलियाँ लोक में कहावतों की तरह प्रसिद्ध हैं। CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में साहित्य सागर की 'गिरधर की कुंडलियाँ' कक्षा 9 के लिए निर्धारित हैं।
कुंडलिया छंद छह पंक्तियों का होता है: पहले एक दोहा, फिर एक रोला। दोहे का अंतिम चरण रोले के आरंभ में दोहराया जाता है, और छंद जिस शब्द से आरंभ होता है प्रायः उसी पर समाप्त होता है (जैसे 'लाठी ... लाठी'), मानो कुंडली मारकर बैठा साँप। गिरधर की कुंडलियों में 'कह गिरिधर कविराय' की छाप आती है।
पाठ की कुंडलियाँ जीवन की व्यावहारिक सीख देती हैं: साधारण वस्तुओं (लाठी, कंबल) का मूल्य, गुण का महत्त्व, स्वार्थी मित्रता से सावधानी, बढ़े धन का परोपकार में उपयोग, और सही समय-स्थान का विवेक। इस पृष्ठ पर पाठ साहित्य सागर के अभ्यास-अवतरणों से लिया गया है (aplustopper, StudiesToday) और एक अन्य स्रोत (भारतकोश) से मिलाया गया है।
Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में साहित्य सागर की कविता पर प्रश्न (पद्यांश और चार उप-प्रश्न) 10 अंक का होता है।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र (प्रश्नों का स्वरूप)
गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
1. लाठी: लाठी में बहुत गुण हैं, उसे सदा साथ रखना चाहिए। गहरी नदी या नाले में वह अंग बचाती है (गहराई नापने और सहारा देने में), झपटते कुत्ते को मारने और धमकाने वाले शत्रु को भगाने में काम आती है। कवि कहते हैं: सब हथियार छोड़कर हाथ में लाठी लीजिए।
2. कमरी (कंबल): कमरी थोड़े दाम में मिलती है, पर बहुत काम आती है। जो बढ़िया मलमल जैसे कपड़े हैं, उनका मान भी यही बचाती है (उनके ऊपर ओढ़कर)। उसे बाँधकर छोटी गठरी बना लें और रात को झाड़कर बिछा लें। थोड़ी दमड़ी में मिलने वाली कमरी सदा साथ रखने योग्य है।
3. गुण का महत्त्व: गुण के ग्राहक हज़ारों हैं, पर बिना गुण के मनुष्य को कोई नहीं पूछता। कौआ और कोयल रंग में एक-से हैं, पर कोयल की मीठी बोली सबको सुहाती है और कौए को सब अपावन मानते हैं।
4. स्वार्थी संसार: संसार में मतलब का व्यवहार है। जब तक गाँठ में पैसा है, तब तक मित्र साथ-साथ घूमते हैं; पैसा न रहे तो वही मित्र मुँह से बोलते भी नहीं। निःस्वार्थ प्रेम करने वाला मित्र कोई विरला ही होता है।
5. मज़बूत का सहारा: दिन चाहे कष्ट से काटने पड़ें, धूप में सोना पड़े, पर पतले पेड़ की छाया में न बैठें; जिस दिन तेज़ हवा चलेगी, वह जड़ से टूटकर धोखा देगा। मोटे (मज़बूत) पेड़ की छाया पकड़ें, उसके सब पत्ते झड़ जाएँ तब भी उसकी छाया में रहें। अर्थात सहारा सदा दृढ़ और विश्वसनीय का लें।
6. बढ़े धन का सदुपयोग: नाव में पानी बढ़े और घर में धन बढ़े, तो दोनों हाथों से उलीचना (बाहर निकालना) ही समझदारी है। अर्थात बढ़े धन को परोपकार और दान में लगाइए, दूसरों के काम के लिए आगे रहिए, और अच्छी चाल चलकर अपना मान बनाए रखिए।
7. राजदरबार में व्यवहार: (पाठ की अंतिम कुंडली) राजा के दरबार में अवसर देखकर जाएँ; ऐसी जगह न बैठें जहाँ से कोई उठा दे। बिना पूछे न बोलें, ज़ोर से न हँसें, पूछने पर ही बात कहें; समय देखकर काम करें, अधिक उतावली न करें, नहीं तो राजा अप्रसन्न होगा।
Themes and message
व्यावहारिक नीति
गिरधर की कुंडलियाँ रोज़मर्रा के जीवन की सीख देती हैं: कौन-सी वस्तु साथ रखें, किसका सहारा लें, कैसे व्यवहार करें। यह 'व्यावहारिक ज्ञान' उन्हें लोकप्रिय बनाता है।
From the text: लाठी, कमरी, पेड़ की छाया, दरबार का व्यवहार।
गुण की श्रेष्ठता
रूप-रंग नहीं, गुण मनुष्य को मूल्यवान बनाते हैं; कौआ और कोयल रंग में समान हैं, पर वाणी के कारण कोयल प्रिय है।
From the text: 'गुन के गाहक सहस, नर बिन गुन लहै न कोय।'
स्वार्थी संसार और सच्ची मित्रता
पैसा रहने तक लोग मित्र बने रहते हैं; निःस्वार्थ मित्र विरले होते हैं। कवि हमें मित्रों को परखने की सीख देते हैं।
From the text: 'साँई सब संसार में, मतलब का व्यवहार।'
परोपकार और धन का सदुपयोग
जैसे नाव में भरा पानी बाहर निकालना ज़रूरी है, वैसे ही बढ़े धन को दान और परोपकार में लगाना बुद्धिमानी है।
From the text: 'दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम।'
The speaker and the people in the poem
कवि (गिरधर कविराय)
नीति-उपदेशक वक्ता।
- अनुभवी और व्यावहारिक।
- सरल लोकभाषा में गहरी बात कहने वाले।
- 'कह गिरिधर कविराय' कहकर सीधे पाठक से बात करते हैं।
हर कुंडली की पाँचवीं पंक्ति।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| कुंडलिया छंद | दोहा + रोला; 'लाठी' से आरंभ, 'लाठी' पर अंत। | लयबद्ध, याद रखने में सरल; आरंभ-अंत का एक शब्द कुंडली जैसा घेरा बनाता है। |
| दृष्टांत | कौआ-कोयल; नाव का पानी; पतला पेड़। | उदाहरण से नीति स्पष्ट और प्रभावशाली होती है। |
| भाषा: ब्रज/अवधी मिश्रित लोकभाषा | कमरी, बकुचा, दमरी, बयारि, घाम। | जनसाधारण की बोली; कहावत जैसी सरलता। |
| अनुप्रास | 'चलिए चाल सुचाल'। | लय और माधुर्य। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
सब हथियार छाँडि, हाथ महँ लीजै लाठी।।
कवि: पहली कुंडली का अंत।
लाठी सबसे सरल और उपयोगी साधन।
गुन के गाहक सहस, नर बिन गुन लहै न कोय।
कवि: तीसरी कुंडली।
गुण ही मनुष्य का मूल्य है।
साँई सब संसार में, मतलब का व्यवहार।
कवि: चौथी कुंडली।
स्वार्थी संसार की सच्चाई।
पानी बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़े दाम। दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम॥
कवि: छठी कुंडली।
बढ़े धन का दान-पुण्य में उपयोग।
गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
सच्चे मित्र की पहचान
मान लीजिए आपके जन्मदिन की पार्टी में बहुत मित्र आते हैं, पर बीमार पड़ने पर केवल एक मित्र मिलने आता है।
गिरधर की कुंडली इसे कैसे समझाती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- सुख में बहुत साथी।
- संकट में विरला।
Answer: 'करत बेगरजी प्रीति, यार बिरला कोई': निःस्वार्थ मित्र विरले होते हैं, और वही संकट में साथ देते हैं।
Memory hook: संकट में जो साथ, वही सच्चा हाथ।
सहारा सोच-समझकर
कल्पना कीजिए आप किसी परियोजना के लिए ऐसे साथी पर निर्भर हैं जो हर बार ऐन वक्त पर साथ छोड़ देता है।
पेड़ वाली कुंडली क्या सलाह देती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- पतला पेड़ = अविश्वसनीय सहारा।
- मोटा पेड़ = भरोसेमंद सहारा।
Answer: ऐसे लोगों पर निर्भर रहें जो कठिन समय में भी टिके रहें, जैसे मोटा पेड़ आँधी में भी खड़ा रहता है।
Memory hook: आँधी में जो टिके, उसकी छाया लो।
धन बाँटना
मान लीजिए आपको छात्रवृत्ति के रूप में अतिरिक्त पैसे मिले।
'दोऊ हाथ उलीचिए' की सीख कैसे लागू करेंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- ज़रूरत के अनुसार उपयोग।
- कुछ भाग ज़रूरतमंदों के लिए।
Answer: बढ़े धन का कुछ भाग दूसरों की सहायता में लगाना, जैसे किसी सहपाठी की किताबें खरीदना, कवि की बताई समझदारी है।
Memory hook: नाव का पानी और घर का धन, दोनों उलीचो।
Topics in this chapter
How the school exam asks गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| भावार्थ | ''बकुचा बाँधे मोट, राति को झारि बिछावै' का भावार्थ' / ''पानी बाढ़ै नाव में...' का आशय' | सरल अर्थ + नीति/संदेश। |
| शब्दार्थ | 'शब्दार्थ लिखिए: कमरी, बकुचा, मोट, दमरी / बयारि, घाम, जर, दाम' | कमरी = कंबल, बकुचा = छोटी गठरी, मोट = गठरी, दमरी = दमड़ी (दाम), बयारि = हवा, घाम = धूप, जर = जड़। |
| विशेषताएँ और लाभ | 'लाठी से क्या-क्या लाभ होते हैं?' / 'कमरी की विशेषताएँ' | कुंडली के क्रम में सभी बिंदु। |
| नीति और प्रासंगिकता | 'कैसे पेड़ की छाया में रहना चाहिए?' / 'कवि कैसे स्थान पर न बैठने की सलाह देते हैं?' | शाब्दिक + लाक्षणिक (सहारा, सम्मान)। |
Tricks to remember गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
क्रम: ला-क-गु-स्वा-पे-ना-द
लाठी, कमरी, गुण, स्वार्थ, पेड़, नाव, दरबार।
Use it when: कुंडलियों का क्रम।
कुंडली = साँप का घेरा
जिस शब्द से शुरू, उसी पर अंत: लाठी...लाठी, कमरी...कमरी।
Use it when: छंद की पहचान।
छह पंक्तियाँ
दो का दोहा, चार का रोला।
Use it when: छंद की संरचना।
गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: पद्यांश: गुण और स्वार्थी संसार
गुन के गाहक सहस, नर बिन गुन लहै न कोय।
जैसे कागा कोकिला, शब्द सुनै सब कोय॥
शब्द सुनै सब कोय, कोकिला सबै सुहावन।
दोऊ के एक रंग, काग सब भये अपावन॥
(1) · 2 marks · Short answer
(i) 'गुन के गाहक सहस, नर बिन गुन लहै न कोय' का भावार्थ लिखिए।
(2) · 2 marks · Short answer
(ii) कौए और कोयल के उदाहरण से कवि क्या स्पष्ट करते हैं?
(3) · 3 marks · Short answer
(iii) शब्दार्थ लिखिए: सहस, गाहक, कागा, अपावन।
(4) · 3 marks · Long answer
(iv) इसी पाठ की 'साँई सब संसार में' वाली कुंडली के अनुसार संसार में कैसा व्यवहार प्रचलित है? आप इससे कितना सहमत हैं?
Show the answersAnswers
- गुणी व्यक्ति के हज़ारों ग्राहक (प्रशंसक) होते हैं, पर बिना गुण के मनुष्य को कोई नहीं अपनाता; समाज में मूल्य गुणों से है।
- दोनों का रंग एक-सा काला है, पर कोयल की मधुर वाणी के कारण वह सबको प्रिय है और कौए को सब अपावन मानते हैं; अर्थात रूप नहीं, गुण (वाणी) महत्त्वपूर्ण है।
- सहस = हज़ार; गाहक = ग्राहक, चाहने वाला; कागा = कौआ; अपावन = अपवित्र।
- संसार में मतलब का व्यवहार है: जब तक पैसा है, मित्र साथ हैं; पैसा न रहे तो वे बोलते भी नहीं; निःस्वार्थ मित्र विरला होता है। सहमति: अधिकांश बातों में सत्य है, पर सच्चे मित्र भी होते हैं, जिन्हें संकट में ही पहचाना जाता है (कोई भी तर्कसंगत मत)।
गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: लाठी के लाभ · 2 marks · Short answerExam level
लाठी से क्या-क्या लाभ होते हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- नदी-नाले में।
- कुत्ते और शत्रु से रक्षा।
Answer: गहरी नदी या नाले को पार करते समय लाठी सहारा देती है और अंगों की रक्षा करती है; झपटने वाले कुत्ते को मारने और धमकाने वाले शत्रु को भगाने में भी काम आती है। इसलिए कवि सब हथियार छोड़कर लाठी रखने की सलाह देते हैं।
Example 2: कमरी की विशेषताएँ · 3 marks · Short answerExam level
कमरी की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया गया है?
Try it first, then show the solutionSolution
- सस्ती।
- मलमल जैसे कपड़ों की रक्षा।
- गठरी, बिछौना।
Answer: कमरी थोड़े दाम में मिलती है पर बहुत काम आती है; यह मलमल जैसे बढ़िया कपड़ों की भी रक्षा करती है; इसे बाँधकर छोटी गठरी बना सकते हैं और रात को झाड़कर बिछा सकते हैं; इसलिए इसे सदा साथ रखना चाहिए।
Example 3: पेड़ की छाया · 3 marks · Short answerHarder exam level
कैसे पेड़ की छाया में रहना चाहिए और कैसे पेड़ की छाया में नहीं? इसका लाक्षणिक अर्थ क्या है?
Try it first, then show the solutionSolution
- पतला पेड़: हवा में टूटता है।
- मोटा पेड़: पत्ते झड़ने पर भी सहारा।
- लाक्षणिक: सहारा किसका लें।
Answer: पतले पेड़ की छाया में नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि तेज़ हवा चलने पर वह जड़ से टूटकर धोखा देगा; मोटे पेड़ की छाया लेनी चाहिए, उसके पत्ते झड़ जाएँ तब भी। लाक्षणिक अर्थ: जीवन में सहारा सदा दृढ़, विश्वसनीय और समर्थ व्यक्ति का लें, कमज़ोर या अविश्वसनीय का नहीं।
Example 4: धन का सदुपयोग · 3 marks · Short answerHarder exam level
'पानी बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़े दाम। दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम॥' का आशय स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- नाव में पानी: डूबने का खतरा, बाहर निकालें।
- घर में धन: दान-पुण्य में लगाएँ।
Answer: जैसे नाव में पानी भर जाए तो दोनों हाथों से उलीचकर बाहर निकालना ही समझदारी है, नहीं तो नाव डूब जाएगी, वैसे ही घर में धन बढ़ जाए तो उसे दोनों हाथों से दान और परोपकार में लगाना चाहिए; अत्यधिक धन का संचय अहंकार और दुर्गुणों में डुबो सकता है।
Example 5: कुंडलिया छंद की पहचान · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'लाठी' वाली कुंडली के आधार पर कुंडलिया छंद की दो विशेषताएँ बताइए।
Try it first, then show the solutionSolution
- दोहा + रोला।
- आरंभ और अंत एक शब्द।
Answer: (1) पहले दो पंक्तियों का दोहा और फिर चार पंक्तियों का रोला होता है; दोहे का अंतिम चरण ('तहाँ बचावै अंग') रोले के आरंभ में दोहराया जाता है। (2) छंद जिस शब्द ('लाठी') से आरंभ होता है, उसी पर समाप्त होता है।
Example 6: दरबार की नीति आज · 4 marks · Long answerHOTS / competency
राजदरबार वाली कुंडली की सीख आज के विद्यालय या कार्यालय में कैसे लागू होती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- कुंडली की सीख।
- आज का उदाहरण।
Answer: कवि कहते हैं: अवसर देखकर जाएँ, ऐसी जगह न बैठें जहाँ से उठाया जाए, बिना पूछे न बोलें, ज़ोर से न हँसें, उतावली न करें। आज भी किसी सभा, साक्षात्कार या कार्यालय की बैठक में अपनी जगह पहचानकर बैठना, पूछे जाने पर ही सोच-समझकर बोलना और धैर्य से काम करना सम्मान दिलाता है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
3 अंक: ''पानी बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़े दाम...' का आशय' (विभाजन संकेतात्मक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| नाव में पानी: उलीचना आवश्यक, नहीं तो डूबना | 1 |
| घर में धन: दान-परोपकार में लगाना | 1 |
| 'सयानो काम': बुद्धिमानी; अति-संचय से बचना | 1 |
Where students lose marks in गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: केवल शाब्दिक अर्थ लिखना
पेड़ की छाया या नाव के पानी का लाक्षणिक अर्थ छूट जाता है।
Do this: हर कुंडली में नीति/संदेश का एक वाक्य जोड़ें।
Usually costs: भावार्थ के अंक।
Mistake: शब्दार्थ में भूल
पुरानी लोकभाषा के शब्द।
Do this: कमरी, बकुचा, मोट, दमरी, बयारि, घाम, जर, बेगरजी, सहस: इन्हें सूची बनाकर याद करें।
Usually costs: शब्दार्थ के अंक।
Mistake: कुंडलियों को मिलाना
छह कुंडलियों के बिंदु एक-दूसरे में चले जाते हैं।
Do this: क्रम याद रखें: लाठी, कमरी, गुण, स्वार्थ, पेड़, नाव-धन, (दरबार)।
Usually costs: उत्तर अप्रासंगिक।
Mistake: लाभ गिनाने में बिंदु छोड़ना
लाठी के केवल एक-दो लाभ लिखना।
Do this: नदी-नाला, कुत्ता, शत्रु: तीनों लिखें।
Usually costs: आंशिक अंक।
Practice questions on गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerExam level
शब्दार्थ लिखिए: कमरी, बकुचा, मोट, दमरी।
Hint
दूसरी कुंडली।
Answer
कमरी = (काला) कंबल; बकुचा = छोटी गठरी; मोट = गठरी; दमरी = दमड़ी, दाम।
Q2 · 2 marks · Short answerExam level
शब्दार्थ लिखिए: बयारि, घाम, जर, बेगरजी।
Hint
पाँचवीं और चौथी कुंडली।
Answer
बयारि = हवा; घाम = धूप; जर = जड़; बेगरजी = निःस्वार्थ।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
कवि कैसे स्थान पर न बैठने की सलाह देते हैं?
Hint
राजा का दरबार।
Answer
ऐसी जगह, जहाँ से कोई उठा दे; अर्थात अपनी मर्यादा पहचानकर उचित स्थान पर बैठें ताकि अपमानित न होना पड़े।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'जब लग पैसा गाँठ में, तब लग ताको यार' का भाव लिखिए।
Hint
स्वार्थी मित्र।
Answer
जब तक किसी के पास पैसा है, तभी तक लोग उसके मित्र बने रहते हैं; पैसा खत्म होते ही वे साथ छोड़ देते हैं।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
कुंडलियों में से कोई दो सीखें चुनकर बताइए कि आप उन्हें अपने जीवन में कैसे अपनाएँगे।
Hint
गुण, धन, मित्रता।
Answer
मुक्त उत्तर। उदाहरण: (1) रूप-रंग के बजाय अपने गुण (मधुर वाणी, ज्ञान) बढ़ाऊँगा; (2) अपनी बचत का कुछ भाग ज़रूरतमंदों की सहायता में लगाऊँगा, जैसा 'दोऊ हाथ उलीचिए' में कहा गया है।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
क्या आज के समय में लाठी साथ रखने की सलाह उचित है? तर्क दीजिए।
Hint
प्रतीकात्मक अर्थ।
Answer
शाब्दिक रूप से हर समय लाठी रखना आज व्यावहारिक नहीं, पर इसका भाव, सरल और उपयोगी साधन तथा आत्म-रक्षा की तैयारी, आज भी उचित है; जैसे यात्रा में टॉर्च, प्राथमिक चिकित्सा या आत्म-रक्षा का ज्ञान।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कुंडलिया छंद में कितनी पंक्तियाँ होती हैं?Show answer
छह: एक दोहा और एक रोला।
2.कवि लाठी को किसके स्थान पर रखने की सलाह देते हैं?Show answer
सब हथियारों के स्थान पर।
3.'कमरी' का अर्थ?Show answer
कंबल।
4.कौआ और कोयल में क्या समानता और क्या अंतर है?Show answer
रंग एक-सा; वाणी में अंतर, कोयल की बोली मधुर।
5.कवि किसकी छाया में रहने को कहते हैं?Show answer
मोटे (मज़बूत) पेड़ की।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप सभी कुंडलियों का क्रम और विषय बता सकते हैं?
- क्या आप लाठी और कमरी के सभी लाभ लिख सकते हैं?
- क्या आप पेड़ और नाव वाली कुंडलियों का लाक्षणिक अर्थ समझा सकते हैं?
- क्या आप दस कठिन शब्दों के अर्थ बता सकते हैं?
- क्या आप कुंडलिया छंद की विशेषताएँ लिख सकते हैं?
गिरधर की कुंडलियाँ – गिरधर कविराय: frequently asked questions
गिरधर कविराय कब हुए?
उन्हें अठारहवीं शताब्दी का नीतिकार कवि माना जाता है; उनके जीवन के विषय में बहुत कम प्रामाणिक जानकारी मिलती है, पर उनकी कुंडलियाँ लोक में बहुत प्रसिद्ध हैं।
पाठ में कितनी कुंडलियाँ हैं?
अभ्यास-अवतरणों में सात कुंडलियाँ मिलती हैं (लाठी, कमरी, गुण, स्वार्थी संसार, पेड़ की छाया, नाव-धन, राजदरबार); अपनी पुस्तक से संख्या मिला लें।
क्या यह पाठ कक्षा 10 में भी है?
नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में यह कक्षा 9 की निर्धारित कविताओं में है।
भावार्थ लिखते समय क्या ध्यान रखें?
पहले सरल अर्थ, फिर नीति या संदेश, और यदि हो सके तो आज के जीवन का एक उदाहरण।
Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; Sahitya Sagar: Giridhar Ki Kundaliyan, textbook exercise passages (aplustopper); गिरधर की कुंडलियाँ (भारतकोश / Bharat Discovery); Sahitya Sagar: Giridhar Ki Kundaliyan, solutions (StudiesToday)