महायज्ञ का पुरस्कार (यशपाल) ICSE Class 9: सारांश, चरित्र-चित्रण और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'महायज्ञ का पुरस्कार' यशपाल की कहानी है। गरीबी में पड़े एक धर्मपरायण सेठ अपना यज्ञ बेचने कुंदनपुर जाते हैं और रास्ते में अपनी सारी रोटियाँ एक भूखे कुत्ते को खिला देते हैं। धन्ना सेठ की पत्नी इसी को 'महायज्ञ' बताती है। सेठ उसे बेचने से इनकार कर देते हैं, और अंत में उन्हें अपने घर में खज़ाना मिलता है।
What महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल is about
'महायज्ञ का पुरस्कार' प्रसिद्ध हिंदी कथाकार यशपाल की कहानी है, जो साहित्य सागर में संकलित है और CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में कक्षा 9 के लिए निर्धारित है।
कहानी प्रश्न उठाती है कि सच्चा यज्ञ क्या है: धन लुटाकर किए गए बड़े-बड़े अनुष्ठान, या निःस्वार्थ भाव से किसी भूखे प्राणी की सेवा? उस समय यज्ञों के फल का क्रय-विक्रय होता था; गरीबी में पड़े सेठ अपना एक यज्ञ बेचने निकलते हैं, पर रास्ते में स्वयं भूखे रहकर एक मरणासन्न कुत्ते को अपनी चारों रोटियाँ खिला देते हैं। धन्ना सेठ की विदुषी पत्नी इसी कर्म को 'महायज्ञ' कहती है।
इस पृष्ठ के उद्धरण साहित्य सागर के अभ्यास-अवतरणों से लिए गए हैं, जैसे वे प्रकाशित हल (StudiesToday) में छपे हैं; पुस्तक का मूल पाठ हमें उपलब्ध नहीं था, इसलिए विवरण अपनी पुस्तक से मिलाकर पढ़ें।
Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में साहित्य सागर के हर प्रश्न (अवतरण और चार उप-प्रश्न) के 10 अंक होते हैं।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र (प्रश्नों का स्वरूप)
महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
एक धनी सेठ बड़े विनम्र, उदार और धर्मपरायण थे। उनके द्वार से कोई साधु-संत या दुखी खाली हाथ नहीं लौटता था; उन्होंने अनेक यज्ञ किए और बहुत-सा धन दान किया। पर सब दिन एक समान नहीं रहते: अचानक उनके दिन फिरे और उन्हें गरीबी का मुँह देखना पड़ा। संगी-साथियों ने भी मुँह फेर लिया।
उन दिनों यज्ञों के फल का क्रय-विक्रय होता था। तंगी बढ़ने पर सेठानी ने सलाह दी कि वे अपना एक यज्ञ बेच दें। कुंदनपुर नगर में एक बहुत धनी सेठ रहते थे, जिन्हें लोग धन्ना सेठ कहते थे। उनकी पत्नी के बारे में प्रसिद्ध था कि उसे कोई दैवी शक्ति प्राप्त है, जिससे वह तीनों लोकों की बात जान लेती है। सेठ ने उन्हीं के हाथ यज्ञ बेचने का निश्चय किया।
सेठ तड़के ही कुंदनपुर की ओर चल पड़े, साथ में सेठानी की दी हुई चार रोटियाँ थीं। गर्मी के दिन थे; आधे रास्ते में थककर वे एक कुएँ के पास वृक्षों की छाया में रुके। जैसे ही वे रोटी तोड़ने लगे, उन्होंने देखा कि पास ही एक कुत्ता भूख से इतना दुर्बल है कि उठ भी नहीं पा रहा। सेठ का दिल भर आया और उन्होंने एक-एक करके चारों रोटियाँ उसे खिला दीं, स्वयं केवल पानी पीकर आगे बढ़ गए।
कुंदनपुर पहुँचकर उन्होंने यज्ञ बेचने की बात कही। धन्ना सेठ की पत्नी ने कहा कि वे यज्ञ खरीदने को तैयार हैं, पर सेठ को अपना 'महायज्ञ' बेचना होगा, वही जो उन्होंने आज रास्ते में किया है। सेठ चकित हुए, क्योंकि उन्होंने तो वर्षों से कोई यज्ञ नहीं किया था; पहले उन्हें लगा कि वह उनकी हँसी उड़ा रही है। उसने समझाया कि स्वयं भूखे रहकर भूखे प्राणी को भोजन देना ही सच्चा महायज्ञ है। सेठ ने अपने उस निःस्वार्थ कर्म को बेचना स्वीकार नहीं किया और खाली हाथ घर लौट आए।
सारी बात सुनकर सेठानी की चिंता दूर हो गई और वह गर्व से भर उठी कि विपत्ति में भी उनके पति ने धर्म नहीं छोड़ा; उसने सेठ के चरणों की धूल माथे से लगाई। उसी रात सेठानी ने दालान में देखा कि दहलीज़ के पास एक पत्थर ऊपर उठ आया है, जिस पर लोहे का कुंदा लगा है। सेठ ने उसे खींचा तो नीचे सीढ़ियाँ थीं और एक विशाल तहखाना जवाहरातों से भरा था। यही उनके महायज्ञ का पुरस्कार था।
Themes and message
सच्चे यज्ञ का अर्थ
कहानी का केंद्रीय संदेश है कि दिखावे या पुण्य कमाने की इच्छा से किए गए अनुष्ठानों से बड़ा यज्ञ है निःस्वार्थ भाव से किसी भूखे प्राणी की सेवा। धन्ना सेठ की पत्नी इसी कर्म को 'महायज्ञ' कहती है।
From the text: स्वयं भूखे रहकर कुत्ते को चारों रोटियाँ खिलाना।
विपत्ति में भी धर्म और करुणा
गरीबी में भी सेठ की उदारता और करुणा नहीं घटती। सेठानी के शब्दों में, 'विपत्ति में भी मेरे पति ने धर्म नहीं छोड़ा।'
From the text: सेठानी का पति के चरणों की रज माथे से लगाना।
निःस्वार्थ कर्म का पुरस्कार
सेठ ने अपने कर्म को बेचने से इनकार किया, यानी उसका कोई मूल्य नहीं लिया; पर अंत में उन्हें अप्रत्याशित धन मिलता है। कहानी बताती है कि सच्चा पुण्य स्वयं फल देता है।
From the text: तहखाने में जवाहरात मिलना।
समय का परिवर्तन
'सब दिन न जात एक समान': समृद्धि और गरीबी आती-जाती रहती है, पर मनुष्य को अपने गुण नहीं छोड़ने चाहिए। गरीबी में साथी भी मुँह फेर लेते हैं।
From the text: सेठ के दिन फिरना और साथियों का मुँह फेर लेना।
Characters
सेठ
कहानी का मुख्य पात्र; धर्मपरायण व्यापारी जो गरीब हो गया।
- उदार और दानी: द्वार से कोई खाली नहीं लौटता था।
- करुणामय: भूखे कुत्ते को अपना सारा भोजन दे देता है।
- स्वाभिमानी और सच्चा: निःस्वार्थ कर्म का मूल्य नहीं लेता।
- धैर्यवान और ईश्वर में आस्था रखने वाला।
रास्ते का प्रसंग और कुंदनपुर से खाली हाथ लौटना।
सेठानी
सेठ की पत्नी।
- व्यावहारिक: तंगी में यज्ञ बेचने की सलाह देती है।
- धैर्यवान और धर्मनिष्ठ: पति के धर्म-पालन पर गर्व करती है।
- संतोषी: खाली हाथ लौटने पर भी दुखी नहीं होती।
'धीरज रखें, भगवान सब भला करेंगे।'
धन्ना सेठ की पत्नी
कुंदनपुर की विदुषी स्त्री।
- विदुषी और दूरदर्शी: तीनों लोकों की बात जानने वाली मानी जाती है।
- सच्चे धर्म की पारखी: कुत्ते को भोजन देने को महायज्ञ कहती है।
'आपको अपना महायज्ञ बेचना होगा।'
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| लोकोक्ति | 'पर सब दिन न जात एक समान'। | भाग्य-परिवर्तन को लोक-अनुभव से जोड़ती है। |
| प्रतीक | चार रोटियाँ और भूखा कुत्ता। | करुणा और त्याग का सरल पर प्रभावी प्रतीक। |
| लोक-कथा जैसी शैली | दैवी शक्ति वाली स्त्री, अचानक प्रकट हुआ तहखाना। | नैतिक शिक्षा को रोचक और स्मरणीय बनाती है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
पर सब दिन न जात एक समान अकस्मात् दिन फिरे और सेठ जी को गरीबी का मुँह देखना पड़ा।
कथावाचक: सेठ की समृद्धि के वर्णन के बाद।
कहानी का मोड़: गरीबी का आरंभ।
बेचारे को कई दिन से खाना नहीं मिला दीखता, तभी तो यह हालत हो गई है।
सेठ (मन में): रास्ते में भूखे कुत्ते को देखकर।
सेठ की करुणा; इसी के बाद वे रोटियाँ खिला देते हैं।
सेठ जी ! यज्ञ खरीदने के लिए हम तैयार हैं, पर आपको अपना महायज्ञ बेचना होगा।
धन्ना सेठ की पत्नी: कुंदनपुर में सेठ से।
कहानी का केंद्रीय कथन: सच्चे यज्ञ की पहचान।
विपत्ति में भी मेरे पति ने धर्म नहीं छोड़ा। धन्य हैं मेरे पति !
सेठानी: सेठ के खाली हाथ लौटने और सारी बात बताने पर।
पत्नी का गर्व; धन से बड़ा धर्म।
महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
निःस्वार्थ सेवा
मान लीजिए विद्यालय जाते समय आपको सड़क पर एक घायल पिल्ला दिखता है और आपके पास टिफ़िन है।
कहानी के सेठ आपको क्या प्रेरणा देते हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- प्राणी की ज़रूरत पहचानें।
- बिना प्रशंसा की आशा के सहायता करें।
Answer: सेठ ने स्वयं भूखे रहकर कुत्ते को भोजन दिया; छोटी-सी करुणा भी 'महायज्ञ' बन सकती है।
Memory hook: चार रोटियाँ, एक महायज्ञ।
दिखावा बनाम सच्चा धर्म
कल्पना कीजिए कोई व्यक्ति दान करते हुए फ़ोटो खिंचवाकर प्रचार करता है, और दूसरा चुपचाप ज़रूरतमंद की सहायता करता है।
कहानी के अनुसार किसका कर्म श्रेष्ठ है?
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रचार की इच्छा से किया गया कर्म।
- निःस्वार्थ, चुपचाप किया गया कर्म।
Answer: धन्ना सेठ की पत्नी के अनुसार निःस्वार्थ, बिना दिखावे का कर्म ही सच्चा यज्ञ है।
Memory hook: दिखावा नहीं, दया।
कठिन समय में धैर्य
मान लीजिए किसी परिवार की आय अचानक घट जाती है।
सेठ-सेठानी के व्यवहार से क्या सीख मिलती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- धैर्य रखें, मिलकर उपाय सोचें।
- अपने मूल्य न छोड़ें।
Answer: सेठ-सेठानी ने गरीबी में भी धर्म और संतोष नहीं छोड़ा; यही कठिन समय से उबरने की शक्ति है।
Memory hook: सब दिन न जात एक समान।
Topics in this chapter
How the school exam asks महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पात्र-परिचय | 'उपर्युक्त अवतरण के वक्ता का परिचय दें।' | सेठ, सेठानी और धन्ना सेठ की पत्नी में भेद करें; नाम-स्थान और दो विशेषताएँ। |
| घटना और कारण | 'सेठ जी ने अपना सारा भोजन कुत्ते को क्यों खिला दिया?' / 'सेठ को धन की प्राप्ति कैसे हुई?' | क्रम से: गरीबी, सलाह, यात्रा, कुत्ता, कुंदनपुर, लौटना, तहखाना। |
| उद्देश्य और शीर्षक | 'कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।' / 'शीर्षक की सार्थकता।' | सच्चा यज्ञ = निःस्वार्थ सेवा; पुरस्कार = तहखाने का धन। |
| चरित्र-चित्रण | 'सेठ जी की विशेषताएँ बताइए।' | उदार, करुणामय, धर्मपरायण, स्वाभिमानी, उदाहरण सहित। |
Tricks to remember महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
कहानी-क्रम
गरीबी → सलाह → यात्रा → कुत्ता → कुंदनपुर → इनकार → तहखाना।
Use it when: घटना-क्रम।
दो पत्नियाँ
सेठानी = सलाह और गर्व; धन्ना सेठ की पत्नी = महायज्ञ की पहचान।
Use it when: वक्ता-पहचान।
चार रोटियाँ
चार रोटियाँ = एक महायज्ञ।
Use it when: मुख्य घटना।
महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: अवतरण: कुंदनपुर में
"सेठ जी ! यज्ञ खरीदने के लिए हम तैयार हैं, पर आपको अपना महायज्ञ बेचना होगा।"
(1) · 2 marks · Short answer
(i) वक्ता का परिचय दीजिए।
(2) · 2 marks · Short answer
(ii) श्रोता यहाँ क्यों आया था?
(3) · 3 marks · Short answer
(iii) 'महायज्ञ' की बात सुनकर श्रोता को क्या आश्चर्य हुआ और उसने क्या सोचा?
(4) · 3 marks · Long answer
(iv) वक्ता ने किस कार्य को महायज्ञ बताया और क्यों? क्या आप उनसे सहमत हैं?
Show the answersAnswers
- वक्ता कुंदनपुर के धन्ना सेठ की पत्नी हैं, जो विदुषी थीं और जिनके बारे में प्रसिद्ध था कि उन्हें दैवी शक्ति प्राप्त है, जिससे वे तीनों लोकों की बात जान लेती हैं।
- गरीबी में पड़े सेठ, सेठानी की सलाह पर, अपना एक यज्ञ धन्ना सेठ को बेचने आए थे, क्योंकि उन दिनों यज्ञों के फल का क्रय-विक्रय होता था।
- उन्होंने वर्षों से कोई सामान्य यज्ञ भी नहीं किया था, महायज्ञ तो दूर की बात थी। उन्हें लगा कि यज्ञ खरीदना ही नहीं है, इसलिए वे व्यर्थ ही उनकी हँसी उड़ा रही हैं।
- रास्ते में स्वयं भूखे रहकर भूखे कुत्ते को चारों रोटियाँ खिलाने को, क्योंकि वह कर्म पुण्य कमाने की इच्छा से नहीं, निःस्वार्थ करुणा से किया गया था। सहमति: हाँ, किसी प्राणी के प्राण बचाने वाला निःस्वार्थ कर्म दिखावे के अनुष्ठानों से बड़ा है।
महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: सेठानी की सलाह · 2 marks · Short answerExam level
सेठानी ने सेठ को क्या सलाह दी और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रथा: यज्ञ-फल का क्रय-विक्रय।
- कारण: गरीबी।
Answer: उन दिनों यज्ञों के फल का क्रय-विक्रय होता था। बहुत तंगी होने पर सेठानी ने सलाह दी कि सेठ अपना एक यज्ञ बेच दें।
Example 2: रास्ते का प्रसंग · 3 marks · Short answerExam level
रास्ते में सेठ ने क्या देखा और क्या किया?
Try it first, then show the solutionSolution
- विश्राम, कुआँ, रोटी।
- भूखा कुत्ता।
- चारों रोटियाँ खिलाना।
Answer: थककर वे एक कुएँ के पास वृक्षों की छाया में भोजन करने बैठे। तभी उन्होंने देखा कि पास ही एक कुत्ता भूख से इतना दुर्बल है कि उठ नहीं पा रहा। उनका दिल भर आया और उन्होंने अपनी चारों रोटियाँ एक-एक करके उसे खिला दीं, स्वयं पानी पीकर आगे बढ़ गए।
Example 3: सेठ ने महायज्ञ क्यों नहीं बेचा? · 3 marks · Short answerHarder exam level
सेठ ने अपना महायज्ञ बेचना स्वीकार क्यों नहीं किया? इससे उनके चरित्र के बारे में क्या पता चलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- कर्म निःस्वार्थ भाव से किया था।
- उसका मूल्य लेना उचित नहीं।
- चरित्र: सच्चा, स्वाभिमानी।
Answer: उन्होंने कुत्ते को भोजन पुण्य कमाने के लिए नहीं, करुणा से कराया था; ऐसे कर्म का मूल्य लेना उन्हें उचित नहीं लगा, इसलिए गरीबी के बावजूद खाली हाथ लौट आए। इससे पता चलता है कि वे सच्चे, निःस्वार्थ, स्वाभिमानी और धर्मपरायण थे।
Example 4: शीर्षक की सार्थकता · 3 marks · Short answerHarder exam level
'महायज्ञ का पुरस्कार' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- महायज्ञ: भूखे कुत्ते को भोजन।
- पुरस्कार: तहखाने का खज़ाना।
Answer: सेठ का निःस्वार्थ कर्म, भूखे कुत्ते को अपना भोजन खिलाना, कहानी का 'महायज्ञ' है, और घर के तहखाने में मिला जवाहरातों का भंडार उसका 'पुरस्कार'। पूरी कथा इन्हीं दो बिंदुओं को जोड़ती है, इसलिए शीर्षक सार्थक है।
Example 5: आज के संदर्भ में · 4 marks · Long answerHOTS / competency
आज के समय में 'महायज्ञ' के कौन-से रूप हो सकते हैं? दो उदाहरण देकर समझाइए।
Try it first, then show the solutionSolution
- निःस्वार्थ सेवा के आधुनिक उदाहरण।
- कहानी से तुलना।
Answer: आज रक्तदान करना, भूखे लोगों को भोजन कराना, बाढ़-पीड़ितों की बिना प्रचार के सहायता करना या घायल पशु का उपचार कराना महायज्ञ के रूप हैं। जैसे सेठ ने बिना किसी लाभ की आशा के कुत्ते के प्राण बचाए, वैसे ही ये कार्य भी दिखावे के बिना, केवल करुणा से किए जाएँ तो सच्चा यज्ञ हैं।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
3 अंक: 'धन्ना सेठ की पत्नी ने सेठ के किस काम को महायज्ञ बताया और क्यों?' (विभाजन संकेतात्मक; कक्षा 9 की जाँच विद्यालय करता है) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| कार्य: स्वयं भूखे रहकर भूखे कुत्ते को चारों रोटियाँ खिलाना | 1 |
| कारण: निःस्वार्थ भाव, पुण्य कमाने की इच्छा नहीं | 1 |
| तुलना: धन लुटाकर दिखावे के यज्ञ से श्रेष्ठ | 1 |
Where students lose marks in महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: वक्ता को गलत पहचानना
सेठानी और धन्ना सेठ की पत्नी को मिला देना।
Do this: सेठानी: सेठ की पत्नी (सलाह, रज)। धन्ना सेठ की पत्नी: कुंदनपुर की विदुषी (महायज्ञ)।
Usually costs: परिचय के अंक।
Mistake: महायज्ञ का कारण अधूरा
केवल 'कुत्ते को खाना दिया' लिखना।
Do this: 'स्वयं भूखे रहकर' और 'निःस्वार्थ भाव से' जोड़ें।
Usually costs: कारण वाले अंश के अंक।
Mistake: धन-प्राप्ति का क्रम गड़बड़
यह मान लेना कि धन्ना सेठ ने सेठ को धन दिया।
Do this: सेठ खाली हाथ लौटे; धन घर के तहखाने में मिला।
Usually costs: घटना वाले प्रश्न के अंक।
Mistake: उद्देश्य को केवल 'दान' तक सीमित करना
सच्चे यज्ञ की अवधारणा न समझना।
Do this: दिखावे बनाम निःस्वार्थ सेवा का अंतर लिखें।
Usually costs: उद्देश्य के अंक।
Practice questions on महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerExam level
धन्ना सेठ की पत्नी के बारे में क्या प्रसिद्ध था?
Hint
दैवी शक्ति।
Answer
कि उसे कोई दैवी शक्ति प्राप्त है, जिससे वह तीनों लोकों की बात जान लेती है।
Q2 · 2 marks · Short answerExam level
सेठ खाली हाथ लौटे तो सेठानी की क्या प्रतिक्रिया थी?
Hint
पहले काँपी, फिर गर्व।
Answer
पहले वह काँप उठी, पर पूरी बात जानकर उसकी वेदना चली गई; उसे गर्व हुआ कि विपत्ति में भी पति ने धर्म नहीं छोड़ा, और उसने उनके चरणों की रज माथे से लगाई।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder exam level
सेठ को धन की प्राप्ति कैसे हुई?
Hint
दालान, पत्थर, कुंदा।
Answer
रात को सेठानी ने दालान में दहलीज़ के पास उठा हुआ पत्थर देखा, जिस पर लोहे का कुंदा लगा था। सेठ ने कुंदा खींचा तो सीढ़ियाँ निकलीं, जो जवाहरातों से भरे विशाल तहखाने तक जाती थीं।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
संगी-साथियों के व्यवहार से कहानी क्या संकेत देती है?
Hint
गरीबी में साथ।
Answer
कि सुख के दिनों के साथी विपत्ति में प्रायः साथ छोड़ देते हैं; सच्चा सहारा अपने गुण और परिवार ही होते हैं।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
क्या आज के समय में ऐसे पुरस्कार की आशा करना उचित है? अपने विचार लिखिए।
Hint
पुरस्कार प्रतीकात्मक है।
Answer
मुक्त उत्तर। उदाहरण: खज़ाना लोक-कथा जैसा प्रतीक है; असली पुरस्कार आत्म-संतोष, सम्मान और समाज का विश्वास है। अच्छे कर्म पुरस्कार की आशा से नहीं, कर्तव्य समझकर करने चाहिए।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
सेठ और धन्ना सेठ की पत्नी, दोनों के विचारों में क्या समानता है?
Hint
सच्चा धर्म।
Answer
दोनों मानते हैं कि सच्चा धर्म दिखावे में नहीं, निःस्वार्थ करुणा में है; पत्नी उस कर्म को महायज्ञ कहती है और सेठ उसे बेचने योग्य नहीं मानते।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'महायज्ञ का पुरस्कार' के लेखक कौन हैं?Show answer
यशपाल।
2.सेठ यज्ञ बेचने कहाँ गए?Show answer
कुंदनपुर, धन्ना सेठ के यहाँ।
3.सेठ ने रास्ते में क्या किया?Show answer
अपनी चारों रोटियाँ भूखे कुत्ते को खिला दीं।
4.धन्ना सेठ की पत्नी ने किसे महायज्ञ कहा?Show answer
स्वयं भूखे रहकर कुत्ते को भोजन देने को।
5.सेठ को धन कहाँ मिला?Show answer
अपने घर के दालान के नीचे बने तहखाने में।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कहानी को सात चरणों में सुना सकते हैं?
- क्या आप तीनों मुख्य पात्रों का परिचय दे सकते हैं?
- क्या आप 'महायज्ञ' की परिभाषा कहानी के आधार पर दे सकते हैं?
- क्या आप शीर्षक की सार्थकता लिख सकते हैं?
- क्या आप कहानी का संदेश आज के जीवन से जोड़ सकते हैं?
महायज्ञ का पुरस्कार – यशपाल: frequently asked questions
क्या सचमुच यज्ञ बेचे जाते थे?
कहानी में बताया गया है कि उस समय यज्ञों के फल के क्रय-विक्रय की प्रथा थी; यह कहानी का लोक-कथा जैसा आधार है।
सेठ खाली हाथ क्यों लौटे?
क्योंकि उन्होंने अपने निःस्वार्थ कर्म, भूखे कुत्ते को भोजन कराने, को बेचना स्वीकार नहीं किया; सामान्य यज्ञ धन्ना सेठ की पत्नी खरीदना नहीं चाहती थीं।
क्या यह कहानी कक्षा 10 में भी है?
नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में यह कक्षा 9 के निर्धारित पाठों में है।
कहानी का मुख्य संदेश एक वाक्य में?
निःस्वार्थ भाव से किया गया सेवा-कार्य ही सबसे बड़ा यज्ञ है, और ऐसा कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता।
Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; Sahitya Sagar: Mahayagya Ka Puraskar, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)