मेघ आए (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना) ICSE Class 9: भावार्थ और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'मेघ आए' सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता है, जिसमें वर्षा के बादलों को सज-धजकर गाँव आए शहरी मेहमान (दामाद) के रूप में दिखाया गया है। हवा, पेड़, धूल, नदी, बूढ़ा पीपल, लता और तालाब गाँव वालों की तरह उसका स्वागत करते हैं, और अंत में मिलन के आँसुओं जैसी वर्षा होती है।
What मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना is about
'मेघ आए' नई कविता के प्रमुख कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता है, जो साहित्य सागर में संकलित है और CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में कक्षा 9 के लिए निर्धारित है। यही कविता NCERT की 'क्षितिज भाग 1' में भी है।
कविता का सौंदर्य उसके मानवीकरण में है। बहुत दिनों बाद आए बादल ऐसे लगते हैं जैसे शहर से कोई मेहमान (पाहुन) सज-धजकर गाँव आया हो। गाँव के सब लोग, यानी प्रकृति के सब अंग, अपने-अपने ढंग से उसका स्वागत करते हैं: हवा आगे-आगे नाचती चलती है, पेड़ गरदन उचकाकर झाँकते हैं, नदी घूँघट सरकाकर तिरछी नज़र से देखती है, बूढ़ा पीपल जुहार करता है, लता किवाड़ की ओट से शिकायत करती है, और अंत में मिलन के आँसू बरसते हैं।
इस पृष्ठ पर कविता की पंक्तियाँ साहित्य सागर के अभ्यास-अवतरणों से ली गई हैं, जैसे वे प्रकाशित हल (StudiesToday) में छपे हैं; अपनी पुस्तक से मिला लें।
Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में साहित्य सागर की कविता पर प्रश्न (पद्यांश और चार उप-प्रश्न) 10 अंक का होता है।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र (प्रश्नों का स्वरूप)
मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पहला दृश्य: मेहमान का आगमन। मेघ बड़े बन-ठन कर, सँवर कर आए हैं। उनके आगे-आगे हवा (बयार) नाचती-गाती चल रही है, जैसे मेहमान के आगे गाँव के बच्चे या स्त्रियाँ दौड़कर खबर देती हैं। गली-गली में दरवाज़े-खिड़कियाँ खुलने लगे, मानो गाँव में शहर का कोई पाहुन (मेहमान, दामाद) आया हो और सब उसे देखने को उत्सुक हों।
दूसरा दृश्य: गाँव की उत्सुकता। पेड़ झुककर, गरदन उचकाकर झाँकने लगे। आँधी चली तो धूल ऐसे भागी जैसे कोई गाँव की स्त्री घाघरा उठाकर दौड़ रही हो। नदी ठिठक गई और उसने घूँघट सरकाकर तिरछी नज़र (बाँकी चितवन) से मेहमान को देखा, जैसे गाँव की नवविवाहिता स्त्री लाज और उत्सुकता से देखती है।
तीसरा दृश्य: स्वागत और उलाहना। बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार (प्रणाम, स्वागत) की, जैसे घर का बुज़ुर्ग करता है। किवाड़ की ओट में खड़ी लता (नायिका) व्याकुल होकर उलाहना देती है: 'बरस बाद सुधि लीन्ही' (पूरे एक बरस बाद याद आई)। तालाब हर्षित होकर परात भर पानी लाया, जैसे मेहमान के पैर धोने के लिए पानी लाया जाता है।
चौथा दृश्य: मिलन। क्षितिज रूपी अटारी पर बादल घिर आए और बिजली चमकी। नायिका के मन का भ्रम दूर हो गया कि प्रिय नहीं आएँगे: 'क्षमा करो, गाँठ खुल गई अब भरम की'। धैर्य का बाँध टूट गया और झर-झर मिलन के आँसू ढलकने लगे, यानी झमाझम वर्षा होने लगी।
Themes and message
प्रकृति का मानवीकरण
पूरी कविता एक रूपक है: बादल शहरी मेहमान हैं, और हवा, पेड़, धूल, नदी, पीपल, लता, तालाब गाँव के लोग। प्रकृति के सारे अंग मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं।
From the text: 'बूढ़े पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की'
ग्रामीण संस्कृति और आतिथ्य
कविता गाँव में मेहमान के स्वागत की परंपराएँ दिखाती है: बड़े-बूढ़ों का प्रणाम, स्त्रियों का घूँघट और ओट से देखना, पैर धोने के लिए परात में पानी।
From the text: 'हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।'
प्रतीक्षा और मिलन का आनंद
एक वर्ष की प्रतीक्षा के बाद बादलों का आना धरती और गाँव के लिए प्रिय के लौटने जैसा है; उलाहना, भ्रम का टूटना और मिलन के आँसू इस भावना को व्यक्त करते हैं।
From the text: 'बरस बाद सुधि लीन्ही'; 'बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके'
वर्षा का महत्त्व
गाँव के लिए वर्षा जीवन है; इसलिए उसके आने पर पूरा गाँव (प्रकृति) उत्साह से भर उठता है।
From the text: पूरे गाँव की उत्सुकता और स्वागत।
The speaker and the people in the poem
मेघ
शहर से आए सज-धजे मेहमान (पाहुन/दामाद)।
- बन-ठन कर, सँवर कर आए हुए।
- बहुत दिनों (एक बरस) बाद आने वाले।
'मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।'
गाँव के लोग (प्रकृति के अंग)
स्वागत करने वाले।
- बयार: आगे-आगे नाचती-गाती।
- पेड़: गरदन उचकाकर झाँकते।
- नदी: घूँघट सरकाकर तिरछी नज़र से देखती।
- बूढ़ा पीपल: आगे बढ़कर जुहार करता।
- लता: ओट से उलाहना देती नायिका।
- ताल: परात भर पानी लाता।
कविता के सभी दृश्य।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| मानवीकरण | 'पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाये'; 'धूल भागी घाघरा उठाये'। | प्रकृति के दृश्य सजीव और रोचक बन जाते हैं। |
| उपमा/उत्प्रेक्षा | 'पाहुन ज्यों आये हों गाँव में शहर के।' | मेघों के आगमन को मेहमान के आगमन से जोड़ती है। |
| रूपक | 'क्षितिज अटारी'; 'बाँध टूटा'। | क्षितिज को घर की अटारी और धैर्य को बाँध के रूप में दिखाता है। |
| पुनरुक्ति प्रकाश और अनुप्रास | 'आगे-आगे', 'गली-गली', 'झर-झर'। | लय, गति और चित्रात्मकता। |
| लोकभाषा का प्रयोग | 'पाहुन', 'जुहार', 'सुधि लीन्ही'। | ग्रामीण वातावरण और आत्मीयता। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
कवि: कविता का आरंभ और टेक।
मेघ सज-धजे मेहमान की तरह।
पाहुन ज्यों आये हों गाँव में शहर के।
कवि: पहला दृश्य।
पूरी कविता का मूल रूपक।
बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरकाए।
कवि: दूसरा दृश्य।
नदी का नवविवाहिता की तरह मानवीकरण।
बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके
कवि: अंतिम दृश्य।
वर्षा = मिलन के आँसू।
मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
प्रतीक्षा के बाद मिलन
मान लीजिए विदेश में रहने वाले आपके मामा एक साल बाद घर आते हैं।
घर का वातावरण कविता के किन दृश्यों जैसा होगा?
Try it first, then show the solutionSolution
- सब उत्सुकता से दरवाज़े पर।
- बड़े आगे बढ़कर स्वागत करते हैं; कोई प्यार से उलाहना देता है।
Answer: जैसे गाँव ने मेघ का स्वागत किया, वैसे ही परिवार प्रिय के लौटने पर उत्साह, उलाहने और खुशी के आँसुओं से भर जाता है; कवि ने इसी अनुभव से वर्षा को जोड़ा है।
Memory hook: मेघ = प्रिय मेहमान।
वर्षा और किसान
कल्पना कीजिए किसी गाँव में महीनों से बारिश नहीं हुई और किसान आसमान ताक रहे हैं।
उनके लिए बादलों का आना कैसा होगा?
Try it first, then show the solutionSolution
- चिंता और प्रतीक्षा।
- बादल आने पर उत्सव।
Answer: किसान के लिए वर्षा जीवन है; इसीलिए कविता में पूरी प्रकृति उत्सव मनाती है।
Memory hook: वर्षा = गाँव का उत्सव।
मानवीकरण से लेखन
मान लीजिए आपको विद्यालय पत्रिका के लिए 'बसंत का आगमन' पर कविता लिखनी है।
'मेघ आए' से आप कौन-सी तकनीक सीख सकते हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- ऋतु को एक पात्र (मेहमान) बनाएँ।
- पेड़-पक्षियों को स्वागत करने वाले लोग।
Answer: मानवीकरण से साधारण प्राकृतिक घटना भी जीवंत कहानी बन जाती है।
Memory hook: प्रकृति को पात्र बनाओ।
Topics in this chapter
How the school exam asks मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| भावार्थ | ''बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरकाए' का भाव' / ''क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की' का आशय' | प्रकृति का दृश्य + मानवीय व्यवहार की तुलना। |
| मानवीकरण की पहचान | 'मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में क्या परिवर्तन हुए?' | हर प्राकृतिक अंग और उसका मानवीय व्यवहार। |
| शब्दार्थ | 'शब्दार्थ: बन-ठन के, बाँकी चितवन, पाहुन, ठिठकना, बरस, सुधि, अकुलाई, ढरके' | सूची बनाकर याद करें। |
| केंद्रीय भाव | 'मेघों के लिए 'बन-ठन के, सँवर के' क्यों कहा गया?' / 'कविता का केंद्रीय भाव' | मेहमान का रूपक; प्रतीक्षा और मिलन। |
Tricks to remember मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
स्वागत करने वाले सात
बयार, खिड़कियाँ, पेड़, धूल, नदी, पीपल, लता (और ताल)।
Use it when: मानवीकरण के उदाहरण।
चार दृश्य
आगमन → उत्सुकता → स्वागत/उलाहना → मिलन।
Use it when: भावार्थ का क्रम।
मिलन अश्रु = वर्षा
बाँध टूटा = धैर्य टूटा; आँसू = बारिश।
Use it when: अंतिम पंक्ति।
मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: पद्यांश: स्वागत और मिलन
बूढ़े पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
'बरस बाद सुधि लीन्ही'
बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।
(1) · 2 marks · Short answer
(i) बूढ़े पीपल ने मेहमान का स्वागत कैसे किया? कवि ने पीपल को 'बूढ़ा' क्यों कहा?
(2) · 2 marks · Short answer
(ii) लता ने मेहमान को कैसे देखा और क्या कहा? क्यों?
(3) · 3 marks · Short answer
(iii) 'हरसाया ताल लाया पानी परात भर के' का भाव स्पष्ट कीजिए।
(4) · 3 marks · Long answer
(iv) शब्दार्थ लिखिए: जुहार, सुधि, अकुलाई, परात। इस पद्यांश में कौन-सा अलंकार प्रमुख है?
Show the answersAnswers
- उसने आगे बढ़कर जुहार (प्रणाम) की। पीपल दीर्घजीवी वृक्ष है, और गाँव में मेहमान आने पर घर के बड़े-बूढ़े ही आगे बढ़कर स्वागत करते हैं, इसलिए उसे बूढ़ा कहा गया।
- किवाड़ की ओट से व्याकुल होकर देखा और उलाहना दिया: 'बरस बाद सुधि लीन्ही'। वह मेघ की प्रतीक्षा में व्याकुल थी और उनके इतनी देर से आने पर रूठी हुई थी; लाज के कारण ओट से देखती है।
- जैसे गाँव में मेहमान आने पर उसके पैर धोने के लिए परात में पानी लाया जाता है, वैसे ही प्रसन्न तालाब मानो मेघ रूपी मेहमान के स्वागत में परात भर पानी लाया। यह ग्रामीण आतिथ्य का सुंदर चित्र है, और वर्षा से तालाब के भरने का संकेत भी।
- जुहार = प्रणाम, अभिवादन; सुधि = याद, सुध; अकुलाई = व्याकुल; परात = थाली जैसा बड़ा बर्तन। प्रमुख अलंकार मानवीकरण: पीपल, लता और ताल मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं।
मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: वातावरण में परिवर्तन · 3 marks · Short answerExam level
मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में क्या परिवर्तन हुए?
Try it first, then show the solutionSolution
- हवा, दरवाज़े, पेड़, धूल, नदी।
Answer: तेज़ हवा नाचती-गाती चलने लगी; गली-गली दरवाज़े-खिड़कियाँ खुलने लगीं; पेड़ झुकने और गरदन उचकाकर झाँकने लगे; आँधी चली और धूल भागने लगी; नदी ठिठक गई मानो घूँघट सरकाकर देख रही हो।
Example 2: 'बन-ठन के' · 2 marks · Short answerExam level
मेघों के लिए 'बन-ठन के, सँवर के' आने की बात क्यों कही गई है?
Try it first, then show the solutionSolution
- मेहमान सज-धजकर आता है।
- काले-घने सुंदर बादल।
Answer: जैसे शहर से आने वाला मेहमान (विशेषकर दामाद) बहुत दिनों बाद सज-धजकर ससुराल आता है, वैसे ही एक वर्ष बाद काले-घने, सुंदर बादल आए हैं; कवि ने उनमें सजीवता लाने के लिए यह कहा है।
Example 3: भ्रम की गाँठ · 3 marks · Short answerHarder exam level
'क्षितिज अटारी गहराई दामिनि दमकी, क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की' का आशय स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- क्षितिज पर बादल घिरे, बिजली चमकी।
- नायिका का भ्रम टूटा।
Answer: क्षितिज रूपी अटारी पर बादल घिर आए और बिजली चमकी। नायिका (लता/धरती) को भ्रम था कि प्रिय (मेघ) इस बार नहीं आएँगे; उनके आने से वह भ्रम दूर हो गया और वह अपने संदेह के लिए क्षमा माँगती है।
Example 4: अंतिम पंक्ति · 2 marks · Short answerHarder exam level
'बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके' में वर्षा को किस रूप में दिखाया गया है?
Try it first, then show the solutionSolution
- बाँध = धैर्य।
- आँसू = वर्षा।
Answer: लंबी प्रतीक्षा के बाद प्रिय से मिलने पर धैर्य का बाँध टूट जाता है और खुशी के आँसू बहने लगते हैं; कवि ने झमाझम वर्षा को इन्हीं मिलन के आँसुओं के रूप में दिखाया है।
Example 5: कविता और गाँव की संस्कृति · 4 marks · Long answerHOTS / competency
कविता में भारतीय ग्रामीण संस्कृति के कौन-से चित्र मिलते हैं? चार उदाहरण दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- मेहमान की खबर, उत्सुकता।
- घूँघट, ओट।
- बड़ों का जुहार।
- पैर धोने का पानी।
Answer: (1) मेहमान के आने की खबर से गली-गली दरवाज़े-खिड़कियाँ खुल जाना; (2) नवविवाहिता का घूँघट सरकाकर तिरछी नज़र से देखना और लता का किवाड़ की ओट से बात करना; (3) बुज़ुर्ग (पीपल) का आगे बढ़कर जुहार करना; (4) मेहमान के पैर धोने के लिए परात में पानी लाना। ये चित्र गाँव के आतिथ्य, लज्जा और आत्मीयता को दिखाते हैं।
Example 6: अपना मत · 3 marks · Short answerHOTS / competency
क्या प्रकृति को मनुष्य के रूप में दिखाने से कविता अधिक प्रभावशाली बनती है? तर्क दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- परिचित अनुभव से जोड़ना।
- भावनाएँ जगाना।
Answer: हाँ। मेहमान के स्वागत जैसा परिचित अनुभव पाठक को तुरंत वर्षा के आनंद से जोड़ देता है; पेड़, नदी, पीपल के मानवीय भाव दृश्य को चित्र की तरह आँखों के सामने ला देते हैं, और वर्षा केवल मौसम की घटना न रहकर मिलन का उत्सव बन जाती है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
3 अंक: ''क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की' का आशय' (विभाजन संकेतात्मक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| क्षितिज-अटारी पर बादल, बिजली की चमक | 1 |
| भ्रम: प्रिय (मेघ) नहीं आएँगे | 1 |
| भ्रम टूटना, क्षमा माँगना | 1 |
Where students lose marks in मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: केवल प्राकृतिक अर्थ लिखना
मानवीय तुलना छूट जाती है।
Do this: हर दृश्य में बताएँ कि प्रकृति का अंग किस मनुष्य की तरह व्यवहार कर रहा है।
Usually costs: भावार्थ के अंक।
Mistake: 'पाहुन' का अर्थ गलत
लोकभाषा का शब्द।
Do this: पाहुन = मेहमान (प्रायः दामाद)।
Usually costs: शब्दार्थ के अंक।
Mistake: अंतिम पंक्ति का अर्थ अधूरा
'मिलन अश्रु' = वर्षा, यह न लिखना।
Do this: धैर्य का बाँध टूटना और वर्षा को मिलन के आँसू कहना, दोनों लिखें।
Usually costs: आशय के अंक।
Mistake: अलंकार के नाम बिना उदाहरण
छात्र केवल 'मानवीकरण' लिखते हैं।
Do this: अलंकार + पंक्ति + प्रभाव।
Usually costs: काव्य-सौंदर्य के अंक।
Practice questions on मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerExam level
शब्दार्थ लिखिए: बन-ठन के, बाँकी चितवन, पाहुन, ठिठकना।
Hint
पहला दृश्य।
Answer
बन-ठन के = सज-धजकर; बाँकी चितवन = तिरछी नज़र; पाहुन = मेहमान (अतिथि); ठिठकना = सहमकर रुक जाना।
Q2 · 2 marks · Short answerExam level
धूल को किस रूप में दिखाया गया है?
Hint
घाघरा।
Answer
आँधी चलने पर धूल ऐसे उड़ती है जैसे गाँव की कोई स्त्री घाघरा उठाकर भाग रही हो।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'बरस बाद सुधि लीन्ही' कौन, किससे और क्यों कहता है?
Hint
लता।
Answer
किवाड़ की ओट में खड़ी व्याकुल लता मेघ से कहती है, क्योंकि वह पूरे एक वर्ष बाद आया है; यह प्रेम भरा उलाहना है।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
कविता में मेघ को 'शहर का पाहुन' क्यों कहा गया है?
Hint
सज-धज और बहुत दिनों बाद आना।
Answer
शहर से आने वाला मेहमान सज-धजकर, बहुत दिनों बाद आता है और गाँव में उसका बड़ा आदर-सत्कार होता है; मेघ भी एक वर्ष बाद सज-धजकर आए हैं और सारी प्रकृति उनका स्वागत करती है।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
अपने क्षेत्र में पहली वर्षा के आगमन का वर्णन मानवीकरण का प्रयोग करते हुए चार वाक्यों में कीजिए।
Hint
प्रकृति को मनुष्य की तरह दिखाएँ।
Answer
मुक्त रचनात्मक उत्तर; प्रत्येक वाक्य में किसी प्राकृतिक वस्तु को मानवीय क्रिया करते दिखाया जाए, जैसे 'प्यासी धरती ने आँखें मूँदकर पहली बूँदों का स्वागत किया।'
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
कविता में कौन-से दो दृश्य आपको सबसे सुंदर लगे और क्यों?
Hint
व्यक्तिगत प्रतिक्रिया।
Answer
मुक्त उत्तर; उदाहरण: नदी का घूँघट सरकाकर देखना (लज्जा और उत्सुकता का सुंदर चित्र) और ताल का परात भर पानी लाना (आतिथ्य की आत्मीयता)।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'मेघ आए' के कवि कौन हैं?Show answer
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना।
2.मेघ की तुलना किससे की गई है?Show answer
गाँव में आए शहर के मेहमान (पाहुन) से।
3.बूढ़े पीपल ने क्या किया?Show answer
आगे बढ़कर जुहार की।
4.'बाँकी चितवन' का अर्थ?Show answer
तिरछी नज़र।
5.ताल क्या लाया?Show answer
परात भर पानी।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप चारों दृश्यों का भावार्थ लिख सकते हैं?
- क्या आप मानवीकरण के पाँच उदाहरण दे सकते हैं?
- क्या आप दस कठिन शब्दों के अर्थ लिख सकते हैं?
- क्या आप 'भरम की गाँठ' और 'मिलन अश्रु' का आशय समझा सकते हैं?
- क्या आप कविता में ग्रामीण संस्कृति के चित्र बता सकते हैं?
मेघ आए – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: frequently asked questions
क्या यह वही कविता है जो NCERT में है?
हाँ, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की यही कविता NCERT की 'क्षितिज भाग 1' में भी है; ICSE में यह साहित्य सागर के अंतर्गत कक्षा 9 में है।
कविता में 'लता' कौन है?
लता नायिका (प्रतीक्षा करती पत्नी) के रूप में है, जो लाज के कारण किवाड़ की ओट से मेघ (प्रिय) को उलाहना देती है।
क्या यह कविता कक्षा 10 में भी है?
नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में यह कक्षा 9 की निर्धारित कविताओं में है।
उत्तर में काव्य-सौंदर्य कैसे लिखें?
भाषा (सरल खड़ी बोली में लोकभाषा के शब्द), अलंकार (मानवीकरण, उपमा, रूपक, पुनरुक्ति), और चित्रात्मकता: तीनों पर एक-एक वाक्य उदाहरण सहित।
Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; Sahitya Sagar: Megh Aaye, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)