संस्कार और भावना (विष्णु प्रभाकर) ICSE Class 9: सारांश, चरित्र-चित्रण और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'संस्कार और भावना' विष्णु प्रभाकर का एकांकी है। रूढ़िवादी माँ ने बड़े बेटे अविनाश को बंगाली लड़की से विवाह करने पर घर से निकाल दिया था। जब बहू हैजे से पीड़ित अविनाश को प्राणों की बाज़ी लगाकर बचाती है और स्वयं बीमार पड़ती है, तो माँ की ममता संस्कारों पर विजय पाती है।
What संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर is about
'संस्कार और भावना' प्रसिद्ध हिंदी लेखक विष्णु प्रभाकर का एकांकी है, जो एकांकी संचय में संकलित है। CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में यह कक्षा 9 के लिए निर्धारित है। (CISCE की निर्धारित पुस्तकों की सूची में लेखक का नाम 'Vishu Prabhakar' छपा है; सही नाम विष्णु प्रभाकर है।)
एकांकी एक मध्यमवर्गीय हिंदू परिवार में पुराने संस्कारों (जाति, कुल-धर्म, छुआछूत) और मानवीय भावना (माँ की ममता, प्रेम) के बीच संघर्ष दिखाता है। माँ संस्कारों की दास है, इसलिए उसने विजातीय बहू को नहीं अपनाया; पर उसका छोटा बेटा अतुल और बहू उमा आधुनिक विचारों के हैं और माँ का मन बदलने का प्रयास करते हैं। अंत में भावना की जीत होती है।
इस पृष्ठ के उद्धरण एकांकी संचय के अभ्यास-अवतरणों से लिए गए हैं, जैसे वे प्रकाशित हल (StudiesToday) में छपे हैं; पुस्तक का मूल पाठ हमें उपलब्ध नहीं था, इसलिए विवरण अपनी पुस्तक से मिलाकर पढ़ें।
Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में एकांकी संचय के हर प्रश्न (अवतरण और चार उप-प्रश्न) के 10 अंक होते हैं।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र (प्रश्नों का स्वरूप)
संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
एक मध्यमवर्गीय हिंदू परिवार में माँ अपने छोटे बेटे अतुल और उसकी पत्नी उमा के साथ रहती है। माँ पुराने संस्कारों में जकड़ी हुई है; कुल-धर्म और जाति की मर्यादा उसके लिए सबसे बड़ी है। उसके बड़े बेटे अविनाश ने उसकी इच्छा के विरुद्ध एक बंगाली (विजातीय) लड़की से प्रेम-विवाह कर लिया था। माँ ने इस विवाह का सबसे अधिक विरोध किया और अविनाश को घर से निकाल दिया। तब से वह बेटे-बहू से अलग है, पर भीतर-ही-भीतर बेटे के बिछोह से दुखी है।
अतुल और उमा आधुनिक विचारों वाले हैं। वे माँ को बताते हैं कि अविनाश की पत्नी कितनी भोली, प्यारी और बड़ों का आदर करने वाली है। फिर समाचार आता है कि अविनाश को हैजा हो गया था, जिसे छुआछूत की बीमारी माना जाता है और जिसमें लोग पास जाने से डरते हैं; पर उसकी पत्नी ने दिन-रात सेवा करके, अपने प्राणों की परवाह न करते हुए, उसे बचा लिया। मिसरानी (रसोई बनाने वाली) भी कहती है कि बहू चाहे किसी की भी हो, उसने अपने प्राण देकर पति को बचा लिया।
अब समाचार मिलता है कि स्वयं बहू बीमार है। माँ समझती है कि यदि बहू को कुछ हुआ तो अविनाश भी नहीं बचेगा। उसके मन में संस्कारों और ममता का तीव्र संघर्ष होता है। वह पछताती है कि काश वह संस्कारों की दासता से मुक्त हो पाती, तो कुल-धर्म और जाति का भूत उसे तंग न करता और वह अपने बेटे से न बिछुड़ती; स्वयं अविनाश ने उससे कहा था कि संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है।
अंत में माँ की ममता (भावना) संस्कारों पर विजय पाती है। वह प्राचीन संस्कारों का बाँध तोड़कर बेटे-बहू के पास जाने का निर्णय करती है। माँ के इस निर्णय से अतुल और उमा बहुत प्रसन्न होते हैं।
Themes and message
संस्कार बनाम भावना
एकांकी का केंद्रीय संघर्ष: जाति और कुल-धर्म के पुराने संस्कार माँ को बेटे से दूर रखते हैं, जबकि उसकी ममता उसे बेटे की ओर खींचती है। अंत में भावना की विजय होती है।
From the text: 'काश कि मैं संस्कारों की दासता से मुक्त हो पाती'
जाति-भेद और रूढ़िवादिता का विरोध
विजातीय विवाह को स्वीकार न करना रूढ़िवादी सोच है। बहू के त्याग से सिद्ध होता है कि मनुष्य का मूल्य उसकी जाति से नहीं, गुणों से है।
From the text: बंगाली बहू द्वारा हैजे से पीड़ित पति को बचाना।
पीढ़ियों का अंतर
माँ पुरानी पीढ़ी के संस्कारों की प्रतिनिधि है, जबकि अतुल और उमा नई, प्रगतिशील पीढ़ी के। वे विरोध नहीं, धैर्य और समझाने से माँ का मन बदलते हैं।
From the text: अतुल और उमा का माँ को बहू के गुण बताना।
त्याग और सेवा
बहू अपने प्राणों की परवाह न करके छूत की बीमारी में पति की सेवा करती है; यही त्याग माँ के हृदय को पिघला देता है।
From the text: 'बहू किसी की भी हो, पर अपने प्राण देकर उसने पति को बचा लिया।'
Characters
माँ
एकांकी की केंद्रीय पात्र; अतुल और अविनाश की माँ।
- रूढ़िवादी: संस्कारों और कुल-धर्म की दास।
- ममतामयी: भीतर-ही-भीतर बेटे के बिछोह से दुखी।
- आत्म-संघर्ष में फँसी, पर अंत में पश्चाताप करके बदलने वाली।
उसका आत्म-कथन और अंतिम निर्णय।
अतुल
माँ का छोटा बेटा।
- प्रगतिशील पर आज्ञाकारी: माँ का आदर करते हुए भी उसकी गलत बात का विरोध करता है।
- भाई के प्रति स्नेही: माँ को बहू अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
माँ को समझाने के प्रयास।
उमा
अतुल की पत्नी।
- समझदार और संवेदनशील।
- अविनाश की पत्नी के गुणों से प्रभावित; माँ का मन बदलने में अतुल का साथ देती है।
माँ के निर्णय पर प्रसन्नता।
अविनाश और उसकी पत्नी
बड़ा बेटा और उसकी बंगाली पत्नी (मंच पर प्रत्यक्ष नहीं, चर्चा में)।
- अविनाश: स्वतंत्र विचारों वाला; मानता है कि संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है।
- पत्नी: भोली, प्यारी, बड़ों का आदर करने वाली, त्याग की मूर्ति।
हैजे का प्रसंग; अतुल-उमा का वर्णन।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| आंतरिक संघर्ष | माँ के मन में संस्कार और ममता का द्वंद्व। | एकांकी को मनोवैज्ञानिक गहराई देता है। |
| शीर्षक का प्रतीकात्मक अर्थ | 'संस्कार' (रूढ़ियाँ) और 'भावना' (ममता, मानवता)। | पूरे संघर्ष को दो शब्दों में प्रस्तुत करता है। |
| अप्रत्यक्ष पात्र | अविनाश और बहू मंच पर नहीं, पर कथा उन्हीं से चलती है। | ध्यान माँ के आत्म-संघर्ष पर केंद्रित रहता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
अपराध और किसका है। सब मुझी को दोष देते हैं।
माँ: बहू के त्याग की चर्चा के बीच।
माँ का आत्म-संघर्ष और अपराध-बोध।
मिसरानी कह रही थी बहू किसी की भी हो, पर अपने प्राण देकर उसने पति को बचा लिया।
माँ: बहू द्वारा हैजे से पीड़ित अविनाश की सेवा।
बहू के गुणों की स्वीकृति आरंभ।
काश कि मैं संस्कारों की दासता से मुक्त हो पाती
माँ: बहू की बीमारी की खबर के बाद।
पश्चाताप; भावना की ओर मोड़।
संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है।
माँ (अविनाश की कही बात दोहराते हुए): उसी आत्म-कथन में।
एकांकी का केंद्रीय संदेश।
संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
परंपरा और परिवर्तन
मान लीजिए आपके परिवार में कोई ऐसी पुरानी रीति है जिससे किसी सदस्य को दुख पहुँचता है।
अतुल-उमा से आप क्या सीख सकते हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- बड़ों का आदर बनाए रखें।
- धैर्य और तर्क से बात करें।
Answer: अतुल और उमा ने माँ का अपमान किए बिना, सच्चे उदाहरणों से उनका मन बदला; परिवर्तन संवाद और संवेदना से आता है।
Memory hook: आदर के साथ तर्क।
गुण, जाति नहीं
कल्पना कीजिए एक नए पड़ोसी परिवार को उनके क्षेत्र या भाषा के कारण कुछ लोग अलग रखते हैं, पर संकट में वही परिवार सबसे पहले मदद करता है।
एकांकी की कौन-सी घटना इससे मिलती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- बंगाली बहू को न अपनाना।
- संकट में उसी का त्याग।
Answer: बहू के त्याग की तरह, संकट में मनुष्य के असली गुण सामने आते हैं; जाति या क्षेत्र से किसी का मूल्य तय नहीं होता।
Memory hook: संकट में गुण बोलते हैं।
पश्चाताप का साहस
मान लीजिए आपने किसी मित्र के बारे में गलत धारणा बना ली थी और बाद में सच पता चला।
माँ से क्या सीख मिलती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- गलती स्वीकार करना।
- संबंध सुधारने के लिए पहल करना।
Answer: माँ ने अपनी गलती मानी और स्वयं बेटे-बहू के पास जाने का निर्णय लिया; गलती मानकर पहल करना बड़प्पन है।
Memory hook: माफ़ी माँगना, रिश्ता बचाना।
Topics in this chapter
How the school exam asks संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| वक्ता-श्रोता और प्रसंग | 'यहाँ किसके कौन-से अपराध की बात हो रही है?' / 'बहू किसकी, कौन और किस जाति की थी?' | माँ, अविनाश, बंगाली बहू; विजातीय विवाह और घर से निकालना। |
| घटना | 'बहू ने किसे और किस बीमारी से प्राण देकर बचाया?' | अविनाश को हैजे से; छूत की बीमारी, त्याग। |
| चरित्र-चित्रण | 'माँ / अतुल / अविनाश की वधू का चरित्र-चित्रण कीजिए।' | तीन-चार विशेषताएँ, प्रसंग सहित। |
| शीर्षक और उद्देश्य | 'एकांकी के शीर्षक की सार्थकता' / 'उद्देश्य' | संस्कार बनाम भावना; भावना की विजय; जाति-भेद का विरोध। |
Tricks to remember संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
परिवार का नक्शा
माँ → अविनाश (बड़ा) + बंगाली बहू; अतुल (छोटा) + उमा।
Use it when: पात्र-संबंध।
घटना-क्रम
विवाह → निष्कासन → हैजा → बहू की सेवा → बहू बीमार → माँ का निर्णय।
Use it when: सारांश।
शीर्षक के दो पलड़े
संस्कार (जाति) बनाम भावना (ममता): भावना भारी पड़ती है।
Use it when: शीर्षक और उद्देश्य।
संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: अवतरण: माँ का पश्चाताप
काश कि मैं निर्मम हो सकती, काश कि मैं संस्कारों की दासता से मुक्त हो पाती तो कुल धर्म और जाति का भूत मुझे तंग न करता और मैं अपने बेटे से न बिछुड़ती। स्वयं उसने मुझसे कहा था, संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है।
(1) · 2 marks · Short answer
(i) वक्ता कौन है? वह किस बेटे से बिछुड़ गई थी और क्यों?
(2) · 2 marks · Short answer
(ii) माँ अपने विचारों के प्रति क्या पश्चाताप करती है?
(3) · 3 marks · Short answer
(iii) अविनाश की वधू का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(4) · 3 marks · Long answer
(iv) अंत में माँ क्या निर्णय लेती है और अतुल-उमा पर उसका क्या प्रभाव होता है? एकांकी का संदेश भी लिखिए।
Show the answersAnswers
- वक्ता अतुल और अविनाश की माँ है। वह बड़े बेटे अविनाश से बिछुड़ गई थी, क्योंकि अविनाश ने उसकी इच्छा के विरुद्ध एक बंगाली (विजातीय) लड़की से विवाह किया और माँ ने उसे घर से निकाल दिया।
- वह पछताती है कि अपने रूढ़िवादी संस्कारों (कुल-धर्म, जाति) के कारण उसने अपने बेटे-बहू को नहीं अपनाया और उनसे दूर हो गई।
- वह भोली, प्यारी और सुंदर है; बड़ों का आदर करती है; और त्याग की मूर्ति है, जिसने हैजे जैसी छूत की बीमारी में अपने प्राणों की परवाह न करके पति की सेवा की और उसे बचा लिया।
- बहू की बीमारी का समाचार सुनकर माँ संस्कारों का बाँध तोड़कर बेटे-बहू के पास जाने का निर्णय करती है; अतुल और उमा इससे बहुत प्रसन्न होते हैं। संदेश: मानवता और प्रेम जाति-भेद और रूढ़ियों से बड़े हैं; संस्कारों की दासता मनुष्य को अपनों से दूर कर देती है।
संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: माँ का अपराध · 2 marks · Short answerExam level
'अपराध और किसका है' में माँ किस अपराध की बात कर रही है?
Try it first, then show the solutionSolution
- रूढ़िवादी संस्कार।
- बेटे-बहू को न अपनाना।
Answer: माँ अपने रूढ़िवादी विचारों और जात-पात के संस्कारों को मानने के अपराध की बात कर रही है, जिनके कारण उसने विजातीय बहू को नहीं अपनाया और बेटे को घर से निकाल दिया।
Example 2: बहू का त्याग · 3 marks · Short answerExam level
बहू ने किसे, किस बीमारी से और कैसे बचाया? इसका माँ पर क्या प्रभाव हुआ?
Try it first, then show the solutionSolution
- अविनाश, हैजा।
- प्राणों की परवाह न करके सेवा।
- माँ का हृदय बदलना।
Answer: उसने अपने पति अविनाश को हैजे से बचाया, जो छूत की बीमारी मानी जाती है; उसने अपने प्राणों की परवाह न करके दिन-रात सेवा की। इससे माँ के मन में बहू के प्रति सम्मान जागा और उसके संस्कारों की दीवार दरकने लगी।
Example 3: अतुल का चरित्र · 3 marks · Short answerHarder exam level
अतुल के चरित्र की तीन विशेषताएँ लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- आज्ञाकारी।
- प्रगतिशील।
- भाई के प्रति स्नेही।
Answer: (1) आज्ञाकारी पुत्र: माँ का आदर करता है। (2) प्रगतिशील: पुराने संस्कारों को मानते हुए भी आधुनिक विचार रखता है और माँ की गलत बात का विरोध करता है। (3) स्नेही भाई: बड़े भाई को अपनाने के लिए माँ को प्रेरित करता है।
Example 4: शीर्षक की सार्थकता · 3 marks · Short answerHarder exam level
'संस्कार और भावना' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- संस्कार = रूढ़ियाँ।
- भावना = ममता।
- संघर्ष और भावना की जीत।
Answer: एकांकी में माँ के मन में पुराने संस्कारों (जाति, कुल-धर्म) और भावना (पुत्र-प्रेम, ममता) का संघर्ष है। संस्कारों के कारण वह बेटे से दूर हुई और भावना के कारण अंत में उसके पास जाने का निर्णय करती है। पूरा कथानक इन्हीं दो शब्दों के संघर्ष पर टिका है, इसलिए शीर्षक सार्थक है।
Example 5: आज की प्रासंगिकता · 4 marks · Long answerHOTS / competency
क्या एकांकी की समस्या आज के समाज में भी दिखाई देती है? उदाहरण सहित लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- अंतर्जातीय विवाह का विरोध आज भी।
- समाधान: संवाद, संवेदना।
Answer: हाँ। आज भी कई परिवार अंतर्जातीय या अंतर्धार्मिक विवाह का विरोध करते हैं, संबंध तोड़ लेते हैं और कभी-कभी हिंसा तक होती है। एकांकी दिखाती है कि जाति से बड़ा मनुष्य का गुण और प्रेम है; अतुल-उमा की तरह धैर्य से संवाद करके और भावनाओं को समझकर ही ऐसे संघर्ष सुलझाए जा सकते हैं।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
3 अंक: ''संस्कार और भावना' शीर्षक की सार्थकता' (विभाजन संकेतात्मक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| संस्कार: जाति, कुल-धर्म की रूढ़ियाँ जो माँ को दूर रखती हैं | 1 |
| भावना: ममता जो उसे बेटे की ओर खींचती है | 1 |
| संघर्ष का अंत: भावना की विजय | 1 |
Where students lose marks in संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पात्रों के संबंध गलत
अतुल और अविनाश में कौन बड़ा, उमा किसकी पत्नी।
Do this: अविनाश: बड़ा बेटा (बंगाली पत्नी)। अतुल: छोटा बेटा; उमा: अतुल की पत्नी।
Usually costs: परिचय के अंक।
Mistake: बीमारी और बचाने वाले में भ्रम
दो बीमारियों (पहले अविनाश, फिर बहू) के समाचार से क्रम उलझ जाता है।
Do this: बहू ने अविनाश को हैजे से बचाया; फिर बहू स्वयं बीमार हुई।
Usually costs: घटना के अंक।
Mistake: माँ को केवल कठोर बताना
उसकी ममता और पश्चाताप छोड़ देना।
Do this: रूढ़िवादी पर ममतामयी, और अंत में बदलने वाली: दोनों पक्ष।
Usually costs: चरित्र-चित्रण के अंक।
Mistake: लेखक का नाम गलत
सूची में 'Vishu Prabhakar' छपा है।
Do this: सही नाम: विष्णु प्रभाकर।
Usually costs: परिचय में त्रुटि।
Practice questions on संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerExam level
अविनाश ने किससे विवाह किया था और माँ ने क्या किया?
Hint
विजातीय।
Answer
एक बंगाली (विजातीय) लड़की से; माँ ने विवाह का विरोध किया और अविनाश को घर से निकाल दिया।
Q2 · 2 marks · Short answerExam level
अतुल और उमा माँ के किस निर्णय से प्रसन्न होते हैं?
Hint
अंत।
Answer
माँ के संस्कारों को छोड़कर बेटे-बहू के पास जाने के निर्णय से।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
माँ संस्कारों की दासता से मुक्त होने में विफल क्यों रही?
Hint
मध्यमवर्गीय परिवार।
Answer
मध्यमवर्गीय हिंदू परिवार में पुराने संस्कारों की रक्षा को ही धर्म माना जाता है; माँ इन्हीं में पली थी, इसलिए कुल-धर्म और जाति का भय उसे बाँधे रहा।
Q4 · 3 marks · Short answerHarder exam level
'संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है।' यह बात किसने कही थी? इसका आशय लिखिए।
Hint
अविनाश।
Answer
अविनाश ने माँ से कही थी (माँ उसे याद करती है)। आशय: जब मनुष्य बिना सोचे-समझे रूढ़ियों का दास बन जाता है, तो वे उसे अपनों से दूर कर देती हैं और मानवता के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बन जाती हैं।
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
माँ के चरित्र में परिवर्तन किन घटनाओं से आया? क्रम से लिखिए।
Hint
तीन घटनाएँ।
Answer
(1) अतुल-उमा द्वारा बहू के गुणों का वर्णन; (2) बहू द्वारा हैजे से पीड़ित अविनाश की प्राणों की परवाह न करके सेवा का समाचार; (3) बहू के स्वयं बीमार होने का समाचार और अविनाश के न बचने की आशंका।
Q6 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
यदि आप अतुल होते, तो माँ को समझाने के लिए क्या कहते? पाँच-छह वाक्य लिखिए।
Hint
आदर के साथ तर्क।
Answer
मुक्त उत्तर: माँ का आदर करते हुए बहू के गुण और त्याग बताना, यह समझाना कि मनुष्य की पहचान जाति से नहीं गुणों से है, अविनाश के बिना माँ के दुख को याद दिलाना, और परिवार के फिर से एक होने की खुशी का चित्र रखना।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'संस्कार और भावना' के लेखक कौन हैं?Show answer
विष्णु प्रभाकर।
2.अविनाश की पत्नी किस प्रदेश की थी?Show answer
बंगाल की (बंगाली, विजातीय)।
3.अविनाश को कौन-सी बीमारी हुई थी?Show answer
हैजा।
4.उमा कौन है?Show answer
अतुल की पत्नी।
5.अंत में माँ क्या निर्णय लेती है?Show answer
बेटे-बहू के पास जाने का।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप पात्रों के संबंध बता सकते हैं?
- क्या आप कथानक को छह चरणों में सुना सकते हैं?
- क्या आप माँ, अतुल और बहू का चरित्र-चित्रण कर सकते हैं?
- क्या आप शीर्षक की सार्थकता लिख सकते हैं?
- क्या आप एकांकी का संदेश आज से जोड़ सकते हैं?
संस्कार और भावना – विष्णु प्रभाकर: frequently asked questions
क्या अविनाश और उसकी पत्नी मंच पर आते हैं?
कथा उन्हीं के इर्द-गिर्द है, पर उनकी चर्चा माँ, अतुल और उमा के संवादों से होती है; अपनी पुस्तक में दृश्य-संरचना देख लें।
'मिसरानी' कौन है?
घर में रसोई बनाने वाली स्त्री; उसकी बात माँ को बहू के त्याग की याद दिलाती है।
क्या यह एकांकी कक्षा 10 में भी है?
नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में यह कक्षा 9 के निर्धारित एकांकियों में है।
एकांकी का मुख्य संदेश क्या है?
मानवता और प्रेम जाति-भेद और रूढ़ियों से बड़े हैं; संस्कारों की अंधी दासता अपनों को दूर कर देती है।
Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; Ekanki Sanchay: Sanskar Aur Bhavna, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)