बात अठन्नी की (सुदर्शन) ICSE Class 9: सारांश, चरित्र-चित्रण और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'बात अठन्नी की' सुदर्शन की कहानी है। गरीब नौकर रसीला मजबूरी में मालिक की मिठाई के पैसों में से एक अठन्नी बचाकर अपना कर्ज़ चुकाता है और उसे छह महीने की सज़ा मिलती है, जबकि रिश्वत लेने वाले उसके मालिक और न्याय करने वाले मजिस्ट्रेट सम्मानित बने रहते हैं।
What बात अठन्नी की – सुदर्शन is about
'बात अठन्नी की' हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार सुदर्शन की कहानी है, जो साहित्य सागर में संकलित है। CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम के अनुसार यह कक्षा 9 के लिए निर्धारित पाँच कहानियों में से एक है।
कहानी समाज के दोहरे न्याय पर तीखा व्यंग्य करती है: एक गरीब, ईमानदार नौकर मजबूरी में एक अठन्नी की चोरी करता है तो उसे कठोर सज़ा मिलती है, पर हज़ारों की रिश्वत लेने वाले बड़े लोग 'सभ्य' बने रहते हैं। रमज़ान के शब्दों में, यह 'न्याय नगरी नहीं, अंधेर नगरी' है।
2025 के ICSE हिंदी बोर्ड प्रश्न-पत्र में इसी कहानी का अवतरण पूछा गया था। परीक्षकों के अनुसार छात्रों ने रमज़ान को ठीक से नहीं पहचाना, रसीला और रमज़ान को आपस में मिला दिया, 'बड़े लोगों' के नाम (जगत सिंह, शेख सलीमुद्दीन) नहीं लिखे और 'अंधेर नगरी' का पूरा भाव स्पष्ट नहीं किया। इस पृष्ठ पर उद्धरण साहित्य सागर के अभ्यास-अवतरणों से लिए गए हैं, जैसे वे CISCE के 2025 प्रश्न-पत्र और प्रकाशित हल में छपे हैं।
Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में खंड ख (40 अंक) में दो चुनी हुई पुस्तकों से चार प्रश्न करने होते हैं, और साहित्य सागर के हर प्रश्न (अवतरण और चार उप-प्रश्न) के 10 अंक होते हैं।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र और परीक्षकों की रिपोर्ट
बात अठन्नी की – सुदर्शन: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
रसीला कई वर्षों से इंजीनियर बाबू जगत सिंह के यहाँ नौकर है। उसे केवल दस रुपए मासिक वेतन मिलता है, जबकि गाँव में उसके बूढ़े पिता, पत्नी और बच्चों का पूरा भार उसी पर है। वह बार-बार वेतन बढ़ाने की प्रार्थना करता है, पर मालिक नहीं मानते। फिर भी वह नौकरी नहीं छोड़ता, क्योंकि इस घर में उस पर कभी किसी ने संदेह नहीं किया; दूसरी जगह शायद पैसे ज़्यादा मिल जाएँ, पर ऐसा आदर नहीं मिलेगा।
पड़ोस में ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन का चौकीदार रमज़ान रहता है, जो रसीला का पक्का मित्र है। एक दिन वह रसीला को उदास देखकर सौगंध दिलाकर कारण पूछता है। गाँव से पत्र आया है कि बच्चे बीमार हैं और पैसे चाहिए, पर रसीला के पास पैसे नहीं हैं। रमज़ान उसे उधार देकर उसकी सहायता करता है, और रसीला थोड़ा-थोड़ा करके कर्ज़ चुकाने लगता है।
बातचीत में पता चलता है कि रसीला के मालिक जगत सिंह ने पाँच सौ रुपए की रिश्वत ली है, और रमज़ान बताता है कि उसके मालिक शेख साहब भी रिश्वत लेते हैं। रमज़ान कहता है कि ऐसी कमाई से ये लोग कोठियों में रहते हैं और हम परिश्रम करके भी खाली हाथ रहते हैं। रसीला सोचता है कि वर्षों में इस घर के सैकड़ों रुपए उसके हाथों से निकले, पर उसकी नीयत कभी नहीं बिगड़ी।
कर्ज़ की अंतिम अठन्नी चुकाने की चिंता में, एक दिन जब मालिक उसे पाँच रुपए की मिठाई लाने भेजते हैं, तो रसीला साढ़े चार रुपए की मिठाई लाता है और बची अठन्नी से रमज़ान का कर्ज़ चुका देता है। चोरी पकड़ी जाती है। जगत सिंह उस पर मुकदमा चलाते हैं, और मुकदमा उनके पड़ोसी, ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन की अदालत में जाता है। रसीला अपना अपराध स्वीकार कर लेता है और उसे एक अठन्नी के लिए छह महीने की सज़ा मिलती है।
फ़ैसला सुनकर रमज़ान का मन क्रोध और दुख से भर जाता है। वह सोचता है कि यह दुनिया 'न्याय नगरी नहीं, अंधेर नगरी है': छोटी चोरी पकड़ी गई तो अपराध हो गया, पर असली अपराधी बड़ी-बड़ी कोठियों में बैठकर रिश्वत से धन बटोर रहे हैं और उन्हें कोई नहीं पकड़ता।
Themes and message
दोहरा न्याय: गरीब के लिए सज़ा, अमीर के लिए सम्मान
कहानी का मुख्य व्यंग्य यही है कि एक अठन्नी की मजबूरी भरी चोरी पर गरीब रसीला को छह महीने की सज़ा मिलती है, जबकि रिश्वत लेने वाले जगत सिंह और शेख सलीमुद्दीन समाज में सम्मानित हैं और वही न्याय करते हैं।
From the text: रमज़ान का कथन: 'यह दुनिया न्याय नगरी नहीं, अंधेर नगरी है।'
रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार
पढ़े-लिखे, ऊँचे पदों पर बैठे लोग अच्छा वेतन पाकर भी रिश्वत लेते हैं। लेखक दिखाता है कि 'सफ़ेदपोश' अपराध छिपा रहता है, जबकि गरीब की छोटी भूल तुरंत अपराध बन जाती है।
From the text: जगत सिंह का पाँच सौ रुपए की रिश्वत लेना; रमज़ान: 'ऐसी कमाई से कोठियों में रहते हैं'।
गरीबी और मजबूरी
रसीला चोर नहीं है; वर्षों की ईमानदारी के बाद वह परिवार की बीमारी, कम वेतन और कर्ज़ की मजबूरी में एक बार भटकता है। कहानी अपराध के पीछे की परिस्थितियों को समझने का आग्रह करती है।
From the text: दस रुपए का वेतन, गाँव से बीमार बच्चों का पत्र, कर्ज़ की अठन्नी।
सच्ची मित्रता
रमज़ान संकट में रसीला की सहायता करता है और अंत में उसके साथ हुए अन्याय पर दुखी और क्रुद्ध होता है। अलग धर्मों के दो गरीब नौकरों की मित्रता कहानी का कोमल पक्ष है।
From the text: सौगंध दिलाकर उदासी का कारण पूछना; अंत में रमज़ान का आक्रोश।
Characters
रसीला
इंजीनियर बाबू जगत सिंह का पुराना नौकर; कहानी का केंद्रीय पात्र।
- ईमानदार और विश्वसनीय: वर्षों में कभी नीयत नहीं बिगड़ी।
- कर्तव्यनिष्ठ और परिवार के प्रति ज़िम्मेदार।
- स्वाभिमानी: अधिक वेतन से ज़्यादा आदर को महत्त्व देता है।
- परिस्थितियों का शिकार: मजबूरी में एक बार भूल करता है और उसे स्वीकार करता है।
उसका सोचना: 'मुझपर यहाँ कभी किसी ने संदेह नहीं किया'; अदालत में अपराध स्वीकार करना।
रमज़ान
ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन का चौकीदार; रसीला का मित्र।
- सच्चा मित्र और सहायक।
- समझदार और स्पष्टवादी: बड़े लोगों की रिश्वतखोरी को पहचानता है।
- संवेदनशील: अन्याय पर आक्रोश व्यक्त करता है।
उधार देकर सहायता; 'अंधेर नगरी' वाला चिंतन।
बाबू जगत सिंह
इंजीनियर, रसीला का मालिक।
- कंजूस और संवेदनहीन: वर्षों के नौकर का वेतन नहीं बढ़ाता।
- भ्रष्ट: पाँच सौ रुपए की रिश्वत लेता है।
- कठोर: एक अठन्नी के लिए नौकर पर मुकदमा करता है।
वेतन की प्रार्थना ठुकराना; मुकदमा दायर करना।
शेख सलीमुद्दीन
ज़िला मजिस्ट्रेट, जगत सिंह का पड़ोसी।
- रिश्वतखोर होते हुए भी न्यायाधीश बने हुए।
- गरीब के प्रति कठोर: अठन्नी के लिए छह महीने की सज़ा देते हैं।
रसीला के मुकदमे का फ़ैसला।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| व्यंग्य | रिश्वतखोर लोग ही एक अठन्नी की चोरी पर न्याय करते हैं। | समाज की न्याय-व्यवस्था की विसंगति उजागर होती है। |
| शीर्षक का प्रतीकात्मक अर्थ | 'बात अठन्नी की': छोटी रकम, बड़ी सज़ा। | छोटी-सी 'बात' के माध्यम से बड़े अन्याय पर ध्यान जाता है। |
| संवाद-शैली | रसीला और रमज़ान की बातचीत। | पात्र जीवंत लगते हैं और कथानक आगे बढ़ता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
यहाँ इतने सालों से हूँ। अमीर लोग नौकरों पर विश्वास नहीं करते पर मुझपर यहाँ कभी किसी ने संदेह नहीं किया।
रसीला (मन में): वेतन न बढ़ने पर भी नौकरी न छोड़ने का कारण सोचते हुए।
उसकी ईमानदारी और स्वाभिमान; आदर को पैसे से ऊपर रखना।
कोई बात नहीं है, तो खाओ सौगंध।
रमज़ान: रसीला की उदासी का कारण जानने के लिए।
दोनों की गहरी मित्रता।
ऐसी कमाई से कोठियों में रहते हैं, और एक हम हैं कि परिश्रम करने पर भी हाथ में कुछ नहीं रहता।
रमज़ान: मालिकों की रिश्वतखोरी की चर्चा करते हुए।
अमीर-गरीब की असमानता और भ्रष्टाचार पर टिप्पणी।
यह दुनिया न्याय नगरी नहीं, अंधेर नगरी है।
रमज़ान (मन में): रसीला को छह महीने की सज़ा सुनाए जाने पर।
कहानी का केंद्रीय व्यंग्य: दोहरा न्याय।
यह इंसाफ नहीं अँधेर है। सिर्फ़ एक अठन्नी की ही तो बात थी!
रमज़ान: अदालत के फ़ैसले के बाद।
शीर्षक से जुड़ा कथन; छोटी भूल, कठोर दंड।
बात अठन्नी की – सुदर्शन in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
कानून सबके लिए समान
मान लीजिए एक गरीब फल वाले से पुलिस छोटी-सी गलती पर जुर्माना वसूलती है, पर बड़े नियम तोड़ने वाली गाड़ी को छोड़ देती है।
यह कहानी के किस विचार से जुड़ता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- छोटे पर कठोरता, बड़े पर ढील।
- रमज़ान की 'अंधेर नगरी'।
Answer: यह वही दोहरा न्याय है जिस पर सुदर्शन ने व्यंग्य किया; समाज तभी न्यायपूर्ण होगा जब कानून सब पर समान लागू हो।
Memory hook: अठन्नी पर सज़ा, लाखों पर सलाम: यही अंधेर है।
उचित वेतन
कल्पना कीजिए आपके घर में काम करने वाली दीदी का वेतन वर्षों से नहीं बढ़ा, जबकि महँगाई बढ़ती गई।
कहानी के आधार पर इसका क्या परिणाम हो सकता है और क्या करना चाहिए?
Try it first, then show the solutionSolution
- रसीला की मजबूरी कम वेतन से शुरू हुई।
- उचित वेतन देना मालिक का कर्तव्य।
Answer: कम वेतन और मजबूरी ईमानदार व्यक्ति को भी भटका सकती है; कर्मचारियों को सम्मान के साथ उचित वेतन देना न्याय और समझदारी दोनों है।
Memory hook: उचित वेतन, ईमानदार मन।
मित्र की सहायता
मान लीजिए आपका मित्र कई दिनों से उदास है पर कारण नहीं बताता।
रमज़ान से आप क्या सीख सकते हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- स्नेह से कारण पूछें।
- जितनी हो सके, सहायता करें।
Answer: रमज़ान की तरह सच्चा मित्र आगे बढ़कर परेशानी पूछता और सहायता करता है।
Memory hook: सौगंध से सच, सहायता से साथ।
Topics in this chapter
How the school exam asks बात अठन्नी की – सुदर्शन
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| वक्ता/श्रोता का परिचय | 'उपर्युक्त वाक्य के वक्ता तथा श्रोता का परिचय दें।' | नाम, किसका नौकर/चौकीदार, आपसी संबंध। रसीला और रमज़ान को न मिलाएँ। |
| घटना का कारण और परिणाम | 'रसीला पर किस आरोप में किसने मुकदमा दायर किया? उसे कितनी सज़ा हुई?' | क्रम: वेतन, बीमारी, उधार, अठन्नी, मुकदमा, छह महीने की सज़ा। |
| कथन का आशय | ''ऐसी कमाई' से क्या तात्पर्य है?' / ''अंधेर नगरी' से क्या आशय है?' | शब्दार्थ के साथ कहानी के संदर्भ में भाव। |
| उद्देश्य और शीर्षक | 'कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।' / 'शीर्षक की सार्थकता।' | दोहरा न्याय, रिश्वतखोरी, गरीब की मजबूरी; अठन्नी का प्रतीक। |
Tricks to remember बात अठन्नी की – सुदर्शन
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
र-र: नौकर और चौकीदार
रसीला = 'र'सोई वाला नौकर (जगत सिंह का); रमज़ान = 'र'खवाला चौकीदार (शेख साहब का)।
Use it when: पात्रों को न मिलाने के लिए।
कथानक-क्रम
वेतन → बीमारी → उधार → अठन्नी → मुकदमा → छह महीने।
Use it when: घटना-क्रम वाले प्रश्न।
संख्याएँ
10 रुपए वेतन, 500 की रिश्वत, 5 में 4½ की मिठाई, 6 महीने सज़ा।
Use it when: तथ्य-आधारित प्रश्न।
बात अठन्नी की – सुदर्शन: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: अवतरण: 'अंधेर नगरी' (2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र में पूछा गया)
सोचने लगा, "यह दुनिया न्याय नगरी नहीं, अंधेर नगरी है। चोरी पकड़ी गई तो अपराध हो गया। असली अपराधी बड़ी-बड़ी कोठियों में बैठकर दोनों हाथों से धन बटोर रहे हैं। उन्हें कोई नहीं पकड़ता।"
(1) · 2 marks · Short answer
(i) यहाँ कौन सोच रहा है? उसका परिचय दीजिए और बताइए कि वह यह क्यों सोचने लगा।
(2) · 2 marks · Short answer
(ii) 'चोरी पकड़ी गई' से किस चोरी की ओर संकेत है? वह चोरी किसने और क्यों की थी?
(3) · 3 marks · Short answer
(iii) 'असली अपराधी' किन्हें कहा गया है? उनकी क्या विशेषताएँ थीं?
(4) · 3 marks · Long answer
(iv) 'अंधेर नगरी' से क्या आशय है? कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Show the answersAnswers
- रमज़ान सोच रहा है, जो ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन का चौकीदार और रसीला का पड़ोसी मित्र है। रसीला को एक अठन्नी की चोरी पर छह महीने की सज़ा सुनकर वह ऐसा सोचने लगा।
- रसीला की अठन्नी की चोरी। उसने मालिक के पाँच रुपए में साढ़े चार की मिठाई लाकर बची अठन्नी से रमज़ान का कर्ज़ चुकाया था; जगत सिंह ने उसे पकड़वाया।
- इंजीनियर बाबू जगत सिंह और ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन को। दोनों रिश्वतखोर, भ्रष्ट और गरीबों के प्रति संवेदनहीन थे; रिश्वत और धन के बल पर समाज में सम्मानित बने रहते थे।
- ऐसी जगह जहाँ न्याय न हो: गरीब को छोटी भूल पर कठोर दंड और अमीर रिश्वतखोरों का सम्मान। कहानी का उद्देश्य शोषक और शोषित का अंतर तथा रिश्वतखोरी की बुराई उजागर करना और न्याय-व्यवस्था की विसंगति पर व्यंग्य करना है।
बात अठन्नी की – सुदर्शन: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: रसीला नौकरी क्यों नहीं छोड़ता था? · 2 marks · Short answerExam level
वेतन न बढ़ने पर भी रसीला नौकरी क्यों नहीं छोड़ना चाहता था?
Try it first, then show the solutionSolution
- वर्षों का विश्वास।
- आदर बनाम पैसा।
Answer: इस घर में वर्षों से किसी ने उस पर संदेह नहीं किया था, जबकि अमीर लोग प्रायः नौकरों पर विश्वास नहीं करते। उसे लगता था कि कहीं और शायद ग्यारह-बारह रुपए मिल जाएँ, पर ऐसा आदर नहीं मिलेगा।
Example 2: रमज़ान का सुझाव · 2 marks · Short answerExam level
रसीला की परेशानी जानकर रमज़ान ने क्या सुझाव दिया और फिर क्या किया?
Try it first, then show the solutionSolution
- मालिक से पेशगी माँगने का सुझाव।
- स्वयं उधार देकर सहायता।
Answer: रमज़ान ने कहा कि इतने वर्षों की नौकरी के बाद वह मालिक से कुछ रुपए पेशगी क्यों नहीं माँग लेता; फिर उसने स्वयं उधार देकर रसीला की सहायता की, जिसे रसीला थोड़ा-थोड़ा करके चुकाने लगा।
Example 3: रसीला की चोरी · 3 marks · Short answerHarder exam level
रसीला ने अठन्नी कैसे और क्यों बचाई? उसके इस कार्य को आप चोरी मानेंगे या मजबूरी? तर्क दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- घटना: पाँच की जगह साढ़े चार की मिठाई।
- कारण: कर्ज़ की अंतिम अठन्नी।
- अपना मत।
Answer: मालिक ने पाँच रुपए की मिठाई मँगवाई, रसीला साढ़े चार की लाया और बची अठन्नी से रमज़ान का कर्ज़ चुकाया। कानून की दृष्टि से यह चोरी है, पर यह वर्षों की ईमानदारी के बाद मजबूरी में हुई एक भूल थी; उसने अपराध स्वीकार भी किया। इसलिए समाज को इसके पीछे की मजबूरी समझनी चाहिए थी।
Example 4: शीर्षक की सार्थकता · 3 marks · Short answerHarder exam level
'बात अठन्नी की' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कथानक अठन्नी के इर्द-गिर्द।
- छोटी रकम, बड़ी सज़ा: व्यंग्य।
Answer: पूरी कहानी एक अठन्नी की 'बात' पर टिकी है: उसी के लिए ईमानदार रसीला भटकता है, उसी के लिए मुकदमा होता है और छह महीने की सज़ा मिलती है। अठन्नी जैसी छोटी रकम और कठोर दंड का अंतर रिश्वतखोरों के बड़े अपराधों के सामने न्याय की विसंगति को उजागर करता है, इसलिए शीर्षक सार्थक है।
Example 5: न्याय-व्यवस्था पर विचार · 4 marks · Long answerHOTS / competency
क्या आज भी समाज में 'अंधेर नगरी' जैसी स्थिति दिखाई देती है? अपने विचार उदाहरण सहित लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कहानी का संदर्भ।
- आज का उदाहरण।
- समाधान का सुझाव।
Answer: हाँ, कई बार छोटे अपराधों पर गरीबों को तुरंत दंड मिलता है, जबकि बड़े आर्थिक घोटाले करने वाले प्रभावशाली लोग लंबे समय तक बचे रहते हैं। जैसे रसीला को एक अठन्नी पर सज़ा मिली पर रिश्वतखोर मालिक सम्मानित रहे। समाधान: कानून सबके लिए समान रूप से लागू हो, भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई हो और न्याय करते समय परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया जाए।
Example 6: रमज़ान का चरित्र · 3 marks · Short answerHOTS / competency
रमज़ान के चरित्र की तीन विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- मित्रता, समझदारी, संवेदनशीलता।
Answer: (1) सच्चा मित्र: सौगंध दिलाकर रसीला की उदासी का कारण पूछता है और उधार देकर सहायता करता है। (2) समझदार और स्पष्टवादी: जानता है कि बड़े लोग रिश्वत की कमाई से कोठियों में रहते हैं। (3) संवेदनशील: रसीला की सज़ा पर दुखी होकर दुनिया को 'अंधेर नगरी' कहता है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
3 अंक: ''असली अपराधी' किन्हें कहा गया है? उनकी क्या विशेषताएँ थीं?' (2025 की अंक-योजना के अपेक्षित बिंदुओं पर आधारित; विभाजन संकेतात्मक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| दोनों नाम: इंजीनियर जगत सिंह और मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन | 1 |
| विशेषता: रिश्वतखोर, भ्रष्ट | 1 |
| विशेषता: संवेदनहीन, धन के बल पर सम्मानित | 1 |
Where students lose marks in बात अठन्नी की – सुदर्शन
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: रसीला और रमज़ान को मिला देना
2025 के परीक्षकों ने यह भूल विशेष रूप से बताई।
Do this: रसीला: जगत सिंह का नौकर। रमज़ान: शेख सलीमुद्दीन का चौकीदार।
Usually costs: परिचय वाले प्रश्न के अंक।
Mistake: 'बड़े लोगों' के नाम न लिखना
छात्र केवल 'अमीर लोग' लिखते हैं।
Do this: जगत सिंह और शेख सलीमुद्दीन का नाम लेकर उनकी भूमिका बताएँ।
Usually costs: उत्तर अधूरा माना जाता है।
Mistake: चोरी की रकम और कारण न बताना
कहानी का क्रम याद न होना।
Do this: पाँच रुपए में साढ़े चार की मिठाई; बची अठन्नी से रमज़ान का कर्ज़।
Usually costs: घटना वाले प्रश्न के अंक।
Mistake: 'अंधेर नगरी' का अधूरा अर्थ
छात्र केवल शब्दार्थ लिखते हैं।
Do this: गरीब पर कठोर सज़ा और अमीर रिश्वतखोरों का सम्मान, दोनों बातें लिखें।
Usually costs: आशय वाले प्रश्न के अंक।
Practice questions on बात अठन्नी की – सुदर्शन
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerExam level
रसीला को कितना वेतन मिलता था और उस पर किन-किन का भार था?
Hint
गाँव में परिवार।
Answer
दस रुपए मासिक; गाँव में उसके बूढ़े पिता, पत्नी और बच्चों का भार उसी पर था।
Q2 · 2 marks · Short answerExam level
रसीला का मुकदमा किसकी अदालत में पेश हुआ और उसका उस व्यक्ति से क्या संबंध था?
Hint
पड़ोसी।
Answer
ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन की अदालत में, जो जगत सिंह के पड़ोसी थे और रमज़ान के मालिक भी।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
रमज़ान की बात सुनकर रसीला के मन में क्या विचार आया?
Hint
सैकड़ों रुपए उसके हाथ से निकले।
Answer
उसने सोचा कि वर्षों में इस घर के सैकड़ों रुपए उसके हाथों से निकले, पर उसकी नीयत कभी नहीं बिगड़ी; अगर वह एक-एक आना भी उड़ाता तो काफ़ी रकम जुड़ जाती।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
जगत सिंह के चरित्र की दो कमज़ोरियाँ लिखिए।
Hint
वेतन और रिश्वत।
Answer
वह कंजूस और संवेदनहीन है, जो वर्षों के ईमानदार नौकर का वेतन नहीं बढ़ाता; और भ्रष्ट है, जो पाँच सौ रुपए की रिश्वत लेता है, फिर भी एक अठन्नी के लिए नौकर पर मुकदमा कर देता है।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
यदि आप न्यायाधीश होते, तो रसीला के मामले में क्या निर्णय देते? कारण सहित लिखिए।
Hint
परिस्थितियाँ, स्वीकारोक्ति, पहला अपराध।
Answer
मुक्त उत्तर। उदाहरण: पहला अपराध, वर्षों की ईमानदारी, मजबूरी और स्वीकारोक्ति देखते हुए चेतावनी देकर छोड़ देता या अठन्नी लौटाने का आदेश देता; साथ ही मालिक को उचित वेतन देने की सलाह देता।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
Hint
न्याय, ईमानदारी, संवेदना।
Answer
कानून सबके लिए समान होना चाहिए; बड़े लोगों का भ्रष्टाचार छोटे अपराध से अधिक घातक है; गरीब की मजबूरी समझनी चाहिए; और मालिकों को कर्मचारियों को उचित वेतन देना चाहिए।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'बात अठन्नी की' के लेखक कौन हैं?Show answer
सुदर्शन।
2.रसीला किसका नौकर था?Show answer
इंजीनियर बाबू जगत सिंह का।
3.रमज़ान कौन था?Show answer
ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन का चौकीदार और रसीला का मित्र।
4.जगत सिंह ने कितनी रिश्वत ली थी?Show answer
पाँच सौ रुपए।
5.रसीला को कितनी सज़ा हुई?Show answer
छह महीने की।
6.रमज़ान ने दुनिया को क्या कहा?Show answer
'न्याय नगरी नहीं, अंधेर नगरी'।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कहानी को छह चरणों में सुना सकते हैं?
- क्या आप चारों पात्रों का परिचय दे सकते हैं?
- क्या आप 'ऐसी कमाई' और 'अंधेर नगरी' का आशय समझा सकते हैं?
- क्या आप शीर्षक की सार्थकता लिख सकते हैं?
- क्या आप कहानी का उद्देश्य बता सकते हैं?
बात अठन्नी की – सुदर्शन: frequently asked questions
क्या यह कहानी कक्षा 10 में भी पढ़नी है?
नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में CISCE ने निर्धारित पाठों को बाँट दिया है; 'बात अठन्नी की' कक्षा 9 के पाठों में है।
क्या रसीला को चोर कहना उचित है?
कानूनी दृष्टि से उसने चोरी की, पर कहानी दिखाती है कि वह वर्षों से ईमानदार था और मजबूरी में भटका; उत्तर में दोनों पक्ष लिखना अच्छा रहता है।
कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
समाज की न्याय-व्यवस्था में अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग मापदंड नहीं होने चाहिए, और रिश्वतखोरी सबसे बड़ा अपराध है।
उत्तरों में पात्रों के नाम क्यों ज़रूरी हैं?
2025 के परीक्षकों ने गलत या अधूरे नामों पर अंक काटे; वक्ता-श्रोता के प्रश्नों में नाम और संबंध दोनों लिखें।
Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; CISCE Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi (examiners' comments); Sahitya Sagar: Baat Athanni Ki, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)