नेताजी का चश्मा (स्वयं प्रकाश) ICSE Class 9: सारांश, चरित्र-चित्रण और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'नेताजी का चश्मा' स्वयं प्रकाश की कहानी है। एक कस्बे के चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की पत्थर की मूर्ति पर चश्मा नहीं है, इसलिए गरीब फेरीवाला कैप्टन उस पर असली चश्मा लगाता रहता है। कैप्टन की मृत्यु के बाद बच्चों का बनाया सरकंडे का चश्मा देखकर हालदार साहब की आँखें भर आती हैं।
What नेताजी का चश्मा – स्वयं प्रकाश is about
'नेताजी का चश्मा' हिंदी कथाकार स्वयं प्रकाश की कहानी है, जो साहित्य सागर में संकलित है और CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में कक्षा 9 के लिए निर्धारित है। यही कहानी NCERT की 'क्षितिज भाग 2' में भी है।
कहानी बताती है कि देशभक्ति केवल बड़े नेताओं या सैनिकों तक सीमित नहीं है; एक गरीब, लँगड़ा फेरीवाला भी अपने ढंग से देश के प्रति सम्मान प्रकट कर सकता है। कस्बे के लोग उसे 'कैप्टन' कहकर मज़ाक उड़ाते हैं, पर नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति उसे अधूरी लगती है, इसलिए वह अपने बेचने वाले फ्रेमों में से एक मूर्ति पर लगा देता है। अंत में बच्चों का सरकंडे वाला चश्मा बताता है कि यह भावना नई पीढ़ी तक पहुँच गई है।
इस पृष्ठ के उद्धरण NCERT के प्रकाशित पाठ से मिलाए गए हैं, और साहित्य सागर के अभ्यास-अवतरण (StudiesToday पर छपे) उसी पाठ से मेल खाते हैं।
Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में साहित्य सागर के हर प्रश्न (अवतरण और चार उप-प्रश्न) के 10 अंक होते हैं।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र (प्रश्नों का स्वरूप)
नेताजी का चश्मा – स्वयं प्रकाश: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
हालदार साहब को कंपनी के काम से हर पंद्रहवें दिन एक छोटे कस्बे से गुज़रना पड़ता था। वहाँ की नगरपालिका ने मुख्य बाज़ार के चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की एक छोटी मूर्ति लगवाई थी। लेखक अनुमान लगाता है कि कम बजट और समय की कमी के कारण यह काम कस्बे के हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर मोतीलाल जी को सौंपा गया होगा।
फ़ौजी वर्दी वाली मूर्ति सुंदर थी, पर उसकी आँखों पर पत्थर का चश्मा नहीं था; उसकी जगह असली, काले चौड़े फ्रेम का चश्मा पहनाया गया था। पान खाते समय यह देखकर हालदार साहब मुसकरा उठे: 'मूर्ति पत्थर की, लेकिन चश्मा रियल!' उन्हें लगा कि महत्त्व मूर्ति के रंग-रूप का नहीं, उसके पीछे की भावना का है।
हर बार उन्हें मूर्ति पर नया चश्मा दिखता। पानवाले ने बताया कि यह काम कैप्टन चश्मेवाला करता है: जब किसी ग्राहक को मूर्ति वाला फ्रेम चाहिए होता, वह उसे उतारकर बेच देता और मूर्ति पर दूसरा लगा देता। असली चश्मे के बारे में पानवाले ने कहा, 'मास्टर बनाना भूल गया।'
हालदार साहब ने पूछा कि क्या कैप्टन नेताजी का साथी या आज़ाद हिंद फ़ौज का सिपाही है। पानवाले ने उसका मज़ाक उड़ाया और उसे लँगड़ा और पागल कहा, जो हालदार साहब को बुरा लगा। कैप्टन एक बहुत बूढ़ा, मरियल, लँगड़ा आदमी था, जो गांधी टोपी पहने बाँस पर चश्मे टाँगकर फेरी लगाता था।
दो साल तक हालदार साहब मूर्ति पर अलग-अलग चश्मे देखते रहे। फिर एक दिन मूर्ति पर कोई चश्मा नहीं था। पूछने पर पानवाले ने उदास होकर आँखें पोंछते हुए कहा, 'साहब! कैप्टन मर गया।' हालदार साहब बहुत दुखी हुए और सोचते रहे कि उस कौम का क्या होगा जो देश के लिए सब कुछ न्योछावर करने वालों पर हँसती है।
पंद्रह दिन बाद उन्होंने तय किया कि वे चौराहे पर न रुकेंगे, न मूर्ति की ओर देखेंगे। पर आदत से आँखें उठ गईं। उन्होंने जीप रुकवाई और मूर्ति के सामने अटेंशन में खड़े हो गए। मूर्ति पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। यह देखकर हालदार साहब की आँखें भर आईं।
Themes and message
सामान्य नागरिक की देशभक्ति
कैप्टन न सैनिक था, न नेता, पर नेताजी की अधूरी मूर्ति उसे खलती थी और वह अपनी गरीबी में भी उस पर चश्मा लगाता रहा। कहानी कहती है कि देशभक्ति छोटे-छोटे कामों में भी प्रकट होती है।
From the text: कैप्टन का बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगाना।
भावना का महत्त्व, रूप का नहीं
मूर्ति साधारण थी और चश्मा असली, फिर भी हालदार साहब को लगा कि इसके पीछे की भावना ही सबसे महत्त्वपूर्ण है।
From the text: 'महत्त्व मूर्ति के रंग-रूप या कद का नहीं, उस भावना का है।'
देशभक्तों के प्रति समाज की उपेक्षा
पानवाला कैप्टन को लँगड़ा और पागल कहकर हँसता है। हालदार साहब इस पर आहत होते हैं और सोचते हैं कि जो कौम देश के लिए त्याग करने वालों का मज़ाक उड़ाती है, उसका क्या होगा।
From the text: 'वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!'
नई पीढ़ी में आशा
कैप्टन की मृत्यु के बाद बच्चों का बनाया सरकंडे का चश्मा बताता है कि देशप्रेम की भावना समाप्त नहीं हुई, बच्चों तक पहुँच गई है।
From the text: सरकंडे का चश्मा और हालदार साहब का भावुक होना।
Characters
हालदार साहब
कहानी के मुख्य पात्र, जिनकी आँखों से घटनाएँ दिखती हैं।
- संवेदनशील और भावुक।
- देशभक्त: कैप्टन का मज़ाक उन्हें बुरा लगता है।
- जिज्ञासु: बदलते चश्मों का रहस्य जानना चाहते हैं।
अंत में अटेंशन में खड़े होना और आँखें भर आना।
कैप्टन चश्मेवाला
गरीब, बूढ़ा, लँगड़ा फेरीवाला; कहानी का केंद्रीय देशभक्त पात्र।
- सच्चा देशभक्त: नेताजी की मूर्ति को अधूरा नहीं देख सकता।
- गरीब पर स्वाभिमानी।
- समाज द्वारा उपेक्षित।
बाँस पर चश्मे टाँगकर फेरी लगाना; मूर्ति पर चश्मे बदलना।
पानवाला
चौराहे की पान की दुकान वाला।
- मज़ाकिया और बातूनी।
- कैप्टन का उपहास करने वाला, पर उसकी मृत्यु पर भावुक।
'मास्टर बनाना भूल गया'; 'साहब! कैप्टन मर गया।'
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| प्रतीक | चश्मा। | देशभक्ति की भावना का प्रतीक, जो मूर्ति को पूर्ण करता है। |
| व्यंग्य | 'मास्टर बनाना भूल गया', नगरपालिका का 'उत्साह'। | समाज और व्यवस्था की कमियों पर हल्का-फुल्का कटाक्ष। |
| मार्मिक अंत | सरकंडे का चश्मा। | दुख के बीच आशा जगाता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मूर्ति पत्थर की, लेकिन चश्मा रियल!
हालदार साहब (मन में): पहली बार मूर्ति पर असली चश्मा देखकर।
कौतूहल की शुरुआत; कहानी का केंद्रीय विरोधाभास।
मास्टर बनाना भूल गया।
पानवाला: हालदार साहब के पूछने पर कि असली चश्मा कहाँ गया।
मूर्ति पर पत्थर का चश्मा न होने का कारण।
वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!
पानवाला: कैप्टन के बारे में पूछे जाने पर।
देशभक्तों के प्रति समाज की उपेक्षा।
साहब! कैप्टन मर गया।
पानवाला: मूर्ति पर चश्मा न होने का कारण बताते हुए।
कहानी का दुखद मोड़; पानवाले की छिपी संवेदना।
सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं।
कथावाचक: अंतिम दृश्य।
नई पीढ़ी में देशप्रेम की भावना का प्रतीक।
नेताजी का चश्मा – स्वयं प्रकाश in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
छोटे काम, बड़ी भावना
मान लीजिए आपके मोहल्ले के पार्क में किसी स्वतंत्रता सेनानी की मूर्ति गंदी पड़ी है।
कैप्टन से प्रेरणा लेकर आप क्या करेंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- मित्रों के साथ सफ़ाई का निर्णय।
- नगरपालिका को सूचना।
Answer: कैप्टन की तरह छोटा-सा प्रयास भी देश और उसके नायकों के प्रति सम्मान प्रकट करता है।
Memory hook: चश्मा छोटा, भावना बड़ी।
उपहास नहीं, सम्मान
कल्पना कीजिए आपकी कक्षा का एक छात्र रोज़ राष्ट्रगान के समय पूरे सम्मान से खड़ा होता है और कुछ लोग उस पर हँसते हैं।
कहानी के अनुसार सही दृष्टिकोण क्या है?
Try it first, then show the solutionSolution
- पानवाले जैसा उपहास गलत।
- हालदार साहब जैसा सम्मान सही।
Answer: देश के प्रति सम्मान रखने वालों का मज़ाक उड़ाना हमारी अपनी कमी दिखाता है; हमें ऐसी भावना का आदर करना चाहिए।
Memory hook: हँसो मत, साथ दो।
बच्चों में देशप्रेम
मान लीजिए छोटे बच्चे स्वतंत्रता दिवस पर अपने हाथों से झंडियाँ बनाकर गली सजाते हैं।
यह कहानी के अंत से कैसे जुड़ता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- सरकंडे का चश्मा बच्चों ने बनाया।
- भावना अगली पीढ़ी तक पहुँची।
Answer: बच्चों का सच्चा, सरल प्रयास देशप्रेम की निरंतरता का प्रतीक है, जैसा कहानी के अंत में दिखाया गया है।
Memory hook: सरकंडे में भविष्य।
Topics in this chapter
How the school exam asks नेताजी का चश्मा – स्वयं प्रकाश
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पात्र-परिचय | 'कैप्टन कौन था? उसका परिचय दीजिए।' | रूप (बूढ़ा, लँगड़ा, गांधी टोपी), काम (चश्मे की फेरी), भावना (देशभक्ति)। |
| घटना का कारण | 'मूर्ति पर चश्मा बार-बार क्यों बदल जाता था?' | ग्राहक को वही फ्रेम चाहिए तो कैप्टन उसे बेचकर दूसरा लगाता था। |
| कथन का आशय | ''मास्टर बनाना भूल गया' का आशय' / 'हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हुए?' | संदर्भ और भाव दोनों। |
| उद्देश्य और शीर्षक | 'कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।' | सामान्य नागरिक की देशभक्ति, भावना का महत्त्व, बच्चों में आशा। |
Tricks to remember नेताजी का चश्मा – स्वयं प्रकाश
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
कहानी-क्रम
मूर्ति → असली चश्मा → बदलते चश्मे → कैप्टन → कैप्टन की मृत्यु → बिना चश्मा → सरकंडे का चश्मा।
Use it when: घटना-क्रम।
तीन पात्र
हालदार (देखने वाले), कैप्टन (करने वाला), पानवाला (बताने वाला)।
Use it when: पात्र-परिचय।
15 और 2
हर पंद्रहवें दिन गुज़रना; दो साल तक चश्मे देखना।
Use it when: तथ्य-प्रश्न।
नेताजी का चश्मा – स्वयं प्रकाश: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: चश्मा बदलने का रहस्य · 2 marks · Short answerExam level
मूर्ति पर चश्मा बार-बार क्यों बदल जाता था?
Try it first, then show the solutionSolution
- कैप्टन चश्मेवाले का काम।
- ग्राहक की माँग।
Answer: कैप्टन चश्मेवाला मूर्ति पर अपने फ्रेमों में से एक लगा देता था। जब किसी ग्राहक को वही फ्रेम चाहिए होता, तो वह उसे उतारकर बेच देता और मूर्ति पर दूसरा फ्रेम लगा देता।
Example 2: पानवाले का दोहरा रूप · 3 marks · Short answerHarder exam level
पानवाले के व्यवहार में कौन-सा परिवर्तन दिखता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- पहले उपहास।
- बाद में भावुकता।
Answer: पहले वह कैप्टन का मज़ाक उड़ाता है, उसे लँगड़ा और पागल कहता है। पर कैप्टन की मृत्यु की खबर देते समय वह उदास होकर आँखें पोंछता है। इससे पता चलता है कि ऊपर से मज़ाकिया दिखने वाले पानवाले के मन में भी कैप्टन के प्रति लगाव था।
Example 3: हालदार साहब का निर्णय · 3 marks · Short answerHarder exam level
कैप्टन की मृत्यु के बाद हालदार साहब ने क्या तय किया और फिर क्या हुआ?
Try it first, then show the solutionSolution
- निर्णय: चौराहे पर न रुकना, मूर्ति न देखना।
- आदत से देखना, सरकंडे का चश्मा।
Answer: उन्होंने तय किया कि वे न चौराहे पर रुकेंगे, न मूर्ति की ओर देखेंगे, क्योंकि बिना चश्मे की मूर्ति देखना उन्हें दुखी करता। पर आदत से आँखें मूर्ति पर उठ गईं; उन्होंने जीप रुकवाई, अटेंशन में खड़े हुए और सरकंडे का चश्मा देखकर उनकी आँखें भर आईं।
Example 4: 'मास्टर बनाना भूल गया' · 2 marks · Short answerHarder exam level
''मास्टर बनाना भूल गया' कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- संदर्भ: पत्थर का चश्मा नहीं।
- भाव: मूर्तिकार की चूक, हल्का व्यंग्य।
Answer: मूर्ति बनाने वाले मास्टर मोतीलाल पत्थर का चश्मा बनाना भूल गए, इसलिए मूर्ति पर असली चश्मा लगाया जाता था। पानवाले का यह कथन हल्का व्यंग्य भी है और यही कमी कैप्टन की देशभक्ति प्रकट होने का अवसर बनती है।
Example 5: सरकंडे के चश्मे का संदेश · 4 marks · Long answerHOTS / competency
सरकंडे का चश्मा देखकर हालदार साहब भावुक क्यों हो गए? इससे क्या संदेश मिलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- उनकी आशंका: कैप्टन के बाद कोई नहीं।
- बच्चों का चश्मा: भावना जीवित।
- संदेश।
Answer: उन्हें लगता था कि कैप्टन के जाने के बाद नेताजी की मूर्ति बिना चश्मे के रहेगी और लोगों में देशभक्ति की भावना नहीं बची। बच्चों का बनाया सरकंडे का चश्मा बताता है कि वह भावना नई पीढ़ी में जीवित है। संदेश: देशप्रेम किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं; बच्चों में यह भावना देश का भविष्य उज्ज्वल बनाती है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
4 अंक: 'सरकंडे का चश्मा देखकर हालदार साहब भावुक क्यों हो गए? इससे क्या संदेश मिलता है?' (विभाजन संकेतात्मक) (4 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| कैप्टन की मृत्यु के बाद मूर्ति के अधूरी रहने की आशंका | 1 |
| बच्चों द्वारा बनाया सरकंडे का चश्मा | 1 |
| भावना का नई पीढ़ी तक पहुँचना | 1 |
| संदेश: देशप्रेम जीवित है, बच्चों में आशा | 1 |
Where students lose marks in नेताजी का चश्मा – स्वयं प्रकाश
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कैप्टन को सचमुच सेना का कैप्टन मानना
नाम से भ्रम।
Do this: वह एक गरीब चश्मेवाला फेरीवाला था; लोग उसे कैप्टन कहते थे।
Usually costs: परिचय के अंक।
Mistake: चश्मा बदलने का अधूरा कारण
केवल 'कैप्टन बदलता था' लिखना।
Do this: ग्राहक की माँग पर बेचकर दूसरा लगाना, दोनों बातें लिखें।
Usually costs: कारण के अंक।
Mistake: अंत का भाव न समझाना
केवल 'सरकंडे का चश्मा था' लिखना।
Do this: बच्चों द्वारा बनाया होना और उसका संदेश लिखें।
Usually costs: उद्देश्य के अंक।
Mistake: पानवाले को केवल नकारात्मक पात्र बताना
उसकी भावुकता को अनदेखा करना।
Do this: उपहास और बाद की उदासी, दोनों पक्ष लिखें।
Usually costs: चरित्र-चित्रण के अंक।
Practice questions on नेताजी का चश्मा – स्वयं प्रकाश
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerExam level
हालदार साहब कस्बे से कितने दिन बाद और क्यों गुज़रते थे?
Hint
कंपनी का काम।
Answer
हर पंद्रहवें दिन, कंपनी के काम से।
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
मूर्ति किसने बनाई थी, लेखक के अनुमान के अनुसार?
Hint
हाई स्कूल।
Answer
कस्बे के हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर मोतीलाल जी ने।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
कैप्टन का रूप-रंग कैसा था?
Hint
बूढ़ा, लँगड़ा।
Answer
बहुत बूढ़ा, मरियल-सा, लँगड़ा आदमी, सिर पर गांधी टोपी और आँखों पर काला चश्मा; एक हाथ में संदूकची और दूसरे में बाँस पर टँगे चश्मे।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
हालदार साहब किस बात पर आहत हुए?
Hint
पानवाले का मज़ाक।
Answer
पानवाले ने कैप्टन को लँगड़ा और पागल कहकर उसका मज़ाक उड़ाया; देश के प्रति सम्मान रखने वाले व्यक्ति का यह उपहास उन्हें बुरा लगा।
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
आप अपने आसपास देशभक्ति की भावना कैसे प्रकट कर सकते हैं? तीन उपाय लिखिए।
Hint
छोटे काम।
Answer
सार्वजनिक संपत्ति और स्मारकों की रक्षा करना; राष्ट्रीय पर्वों पर सक्रिय भाग लेना; स्वच्छता, नियम-पालन और दूसरों की सहायता जैसे कर्तव्य निभाना।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
क्या कैप्टन को 'कैप्टन' कहना केवल मज़ाक था? अपने विचार लिखिए।
Hint
नाम और उसकी भावना।
Answer
लोग उसे मज़ाक में कैप्टन कहते थे, पर उसकी देशभक्ति ने इस नाम को सार्थक कर दिया; मूर्ति के सम्मान की रक्षा करने वाला वह सचमुच एक 'कैप्टन' था।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'नेताजी का चश्मा' के लेखक कौन हैं?Show answer
स्वयं प्रकाश।
2.मूर्ति किसकी थी और किस चीज़ की बनी थी?Show answer
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की, संगमरमर की।
3.मूर्ति पर चश्मा कौन लगाता था?Show answer
कैप्टन चश्मेवाला।
4.पानवाले ने कैप्टन को क्या कहा?Show answer
लँगड़ा और पागल।
5.अंत में मूर्ति पर कैसा चश्मा था?Show answer
सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा, जैसा बच्चे बनाते हैं।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कहानी को सात चरणों में सुना सकते हैं?
- क्या आप हालदार साहब, कैप्टन और पानवाले का परिचय दे सकते हैं?
- क्या आप चश्मा बदलने का रहस्य बता सकते हैं?
- क्या आप सरकंडे के चश्मे का संदेश लिख सकते हैं?
- क्या आप कहानी का उद्देश्य बता सकते हैं?
नेताजी का चश्मा – स्वयं प्रकाश: frequently asked questions
क्या यह वही कहानी है जो NCERT में है?
हाँ, स्वयं प्रकाश की यही कहानी NCERT की 'क्षितिज भाग 2' में भी है; ICSE में यह साहित्य सागर के अंतर्गत कक्षा 9 में निर्धारित है।
कैप्टन को कैप्टन क्यों कहा जाता था?
लोग उसे मज़ाक में कैप्टन कहते थे; उसकी देशभक्ति ने इस नाम को सार्थक बना दिया।
मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा किसने रखा?
कहानी स्पष्ट नाम नहीं बताती; वर्णन से पता चलता है कि वह बच्चों का बनाया हुआ था।
क्या यह कहानी कक्षा 10 में भी है?
ICSE में नहीं; 2028 के पाठ्यक्रम में यह कक्षा 9 के निर्धारित पाठों में है।
Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; NCERT क्षितिज भाग 2: नेताजी का चश्मा (स्वयं प्रकाश); Sahitya Sagar: Netaji Ka Chashma, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)