बहू की विदा (विनोद रस्तोगी) ICSE Class 9: सारांश, चरित्र-चित्रण और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'बहू की विदा' विनोद रस्तोगी का दहेज-विरोधी एकांकी है। लोभी जीवनलाल कम दहेज के कारण अपनी बहू कमला को उसके भाई प्रमोद के साथ विदा नहीं करते। जब उनकी अपनी बेटी गौरी के ससुराल वाले भी इसी कारण उसे विदा नहीं करते, तो पत्नी राजेश्वरी उनकी आँखें खोलती है और वे कमला को विदा कर देते हैं।
What बहू की विदा – विनोद रस्तोगी is about
'बहू की विदा' विनोद रस्तोगी का एकांकी है, जो एकांकी संचय में संकलित है और CISCE के 2028 के पाठ्यक्रम में कक्षा 9 के लिए निर्धारित है।
एकांकी दहेज प्रथा की बुराई पर प्रहार करता है। जीवनलाल अपनी बहू के मायके वालों को कम दहेज और बारात की 'खातिरदारी' ठीक न होने के लिए दंड देना चाहते हैं, पर जब वही व्यवहार उनकी अपनी बेटी के साथ होता है, तब उन्हें समझ आता है कि बहू भी किसी की बेटी है। उनकी पत्नी राजेश्वरी एकांकी की नैतिक आवाज़ है।
2025 के ICSE हिंदी बोर्ड प्रश्न-पत्र में इसी एकांकी का अवतरण पूछा गया था। परीक्षकों के अनुसार छात्रों ने विदा न करने का सही कारण (बारात का स्वागत ठीक न होना, कम दहेज) नहीं लिखा, पात्रों के नाम भूल गए या गलत लिखे, यह नहीं बताया कि बेटी गौरी के ससुराल वालों के इनकार के बाद ही जीवनलाल माने, और राजेश्वरी का नाम व चरित्र-चित्रण छोड़ दिया।
Weightage: CISCE कक्षा 9 के लिए अलग प्रश्न-पत्र की रूपरेखा प्रकाशित नहीं करता; परीक्षा विद्यालय लेता है। बोर्ड के स्वरूप में एकांकी संचय के हर प्रश्न (अवतरण और चार उप-प्रश्न) के 10 अंक होते हैं।Source: CISCE ICSE 2028 द्वितीय भाषा पाठ्यक्रम (खंड ख); CISCE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र और परीक्षकों की रिपोर्ट
बहू की विदा – विनोद रस्तोगी: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
जीवनलाल के बेटे रमेश का विवाह कमला से हुआ है। कमला का भाई प्रमोद उसे विदा कराकर मायके ले जाने आया है। पर जीवनलाल विदा करने से मना कर देते हैं। उनका कहना है कि विवाह में बारात की खातिरदारी उनकी हैसियत के अनुसार नहीं हुई और दहेज कम मिला; इससे उनके नाम पर धब्बा लगा, उनकी शान को ठेस पहुँची और भरी बिरादरी में उनकी हँसी हुई। वे प्रमोद से कहते हैं कि अपनी माँ से कह देना कि अगर बेटी की विदा चाहती हो तो पहले उस घाव के लिए 'मरहम' भेजें, यानी पाँच हज़ार रुपये।
प्रमोद विनम्रता से विनती करता है और कहता है कि शिकायत आपको हमसे है, उस भोली-भाली लड़की ने क्या बिगाड़ा है, जो विदा न करके आप उससे बदला ले रहे हैं। पर जीवनलाल नहीं मानते।
जीवनलाल की पत्नी राजेश्वरी दयालु और न्यायप्रिय है; वह कमला की पीड़ा समझती है और पति के व्यवहार से दुखी है। उसी समय जीवनलाल का बेटा रमेश अपनी बहन गौरी को उसकी ससुराल से विदा कराने गया था, पर लौटकर बताता है कि गौरी के ससुराल वालों ने भी दहेज कम होने का बहाना बनाकर उसे विदा नहीं किया।
यह सुनकर जीवनलाल शराफ़त और इंसानियत की दुहाई देने लगते हैं। तब राजेश्वरी उनकी आँखें खोलती है: 'अब शराफ़त और इंसानियत की दुहाई देते हो', कुछ देर पहले तो तुम स्वयं वही कर रहे थे; जैसे तुम्हारी बेटी, वैसे ही कमला भी किसी की बेटी है। जीवनलाल का हृदय-परिवर्तन होता है। वे कहते हैं कि कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है, और कमला को विदा की तैयारी करने को कहते हैं। प्रमोद मुसकराकर रमेश की ओर देखता है और कमला खुशी के आँसू पोंछती हुई अंदर चली जाती है।
Themes and message
दहेज प्रथा की बुराई
एकांकी दिखाता है कि दहेज का लोभ परिवारों को कैसे तोड़ता है और निर्दोष बहुओं को सज़ा देता है। जीवनलाल का 'मरहम' पाँच हज़ार रुपये की माँग है।
From the text: 'पहले उस घाव के लिए मरहम भेजें।'
बहू भी बेटी है
जीवनलाल को तभी समझ आता है जब वही दुख उनकी अपनी बेटी गौरी को मिलता है। एकांकी कहता है कि बहू को बेटी जैसा मान देना चाहिए।
From the text: गौरी को विदा न किए जाने का समाचार और जीवनलाल का हृदय-परिवर्तन।
दोहरे मापदंड
जो व्यवहार जीवनलाल दूसरों की बेटी के साथ उचित समझते हैं, अपनी बेटी के साथ होने पर उसे अन्याय कहते हैं। राजेश्वरी इसी पाखंड को उजागर करती है।
From the text: 'अब शराफत और इन्सानियत की दुहाई देते हो।'
स्त्री की नैतिक शक्ति
राजेश्वरी शांत पर दृढ़ स्वर में पति का विरोध करती है और परिवार को सही राह दिखाती है। एकांकी स्त्री-शिक्षा और जागरूकता को दहेज के विरुद्ध हथियार के रूप में देखने का अवसर देता है।
From the text: राजेश्वरी का अंतिम संवाद।
Characters
जीवनलाल
कमला के ससुर, रमेश और गौरी के पिता।
- लोभी और लालची: दहेज के लिए बहू की विदा रोकते हैं।
- हठी और अभिमानी: 'मेरे नाम पर धब्बा', 'मेरी शान'।
- संवेदनहीन, पर अंत में अपनी गलती समझने वाले।
प्रमोद से संवाद; अंत में 'कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है'।
राजेश्वरी
जीवनलाल की पत्नी।
- विनम्र, ममतामयी और निर्लोभी।
- न्यायप्रिय और साहसी: पति के अन्याय का विरोध करती है।
- धैर्यवान: सही समय पर पति की आँखें खोलती है।
'अब शराफत और इन्सानियत की दुहाई देते हो...'
प्रमोद
कमला का भाई।
- विनम्र पर स्वाभिमानी।
- बहन के प्रति स्नेही; तर्क से अन्याय का विरोध करता है।
'उस भोली-भाली लड़की ने आपका क्या बिगाड़ा है'
कमला
जीवनलाल की बहू, रमेश की पत्नी।
- भोली-भाली, सहनशील; दहेज-लोभ की निर्दोष शिकार।
अंत में खुशी के आँसू।
रमेश और गौरी
जीवनलाल के बेटा और बेटी।
- रमेश: कमला का पति; गौरी को लेने गया था।
- गौरी: जीवनलाल की बेटी, जिसे उसके ससुराल वालों ने विदा नहीं किया।
गौरी के न आने का समाचार।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| प्रतीक: घाव और मरहम | 'उस करारी चोट का घाव'; 'मरहम भेजें'। | अपमान को घाव और दहेज को मरहम कहकर जीवनलाल के लोभ को व्यंग्यपूर्ण ढंग से दिखाता है। |
| नाटकीय मोड़ | गौरी के विदा न होने का समाचार। | वही स्थिति उलटकर जीवनलाल पर आती है; हृदय-परिवर्तन स्वाभाविक लगता है। |
| वक्रोक्ति/उलट प्रयोग | 'कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है।' | जिस 'चोट' (बेटी का अपमान) से उन्हें दुख हुआ, उसी ने उनकी आँखें खोल दीं। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
भरी बिरादरी में जो हँसी हुई, उस करारी चोट का घाव आज भी हरा है।
जीवनलाल: प्रमोद से, विदा न करने का कारण बताते हुए।
उनका अभिमान और दहेज-लोभ।
शिकायत आपको हमसे है, उस भोली-भाली लड़की ने आपका क्या बिगाड़ा है, जो विदा न करके आप उससे बदला ले रहे हैं।
प्रमोद: जीवनलाल से (2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र का अवतरण)।
निर्दोष बहू के साथ अन्याय पर प्रश्न।
अब शराफत और इन्सानियत की दुहाई देते हो।
राजेश्वरी: गौरी के न आने पर जीवनलाल के दुहाई देने पर।
पति के दोहरे मापदंड पर प्रहार।
कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है, बेटा।
जीवनलाल: हृदय-परिवर्तन के बाद प्रमोद से।
आँखें खुलना; कमला की विदा।
बहू की विदा – विनोद रस्तोगी in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
दोहरे मापदंड
मान लीजिए कोई व्यक्ति अपने बेटे की शादी में बड़ा दहेज चाहता है, पर बेटी की शादी में दहेज माँगे जाने पर दुखी होता है।
एकांकी इस व्यवहार के बारे में क्या कहता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- जीवनलाल का भी यही व्यवहार।
- राजेश्वरी का प्रश्न: अब इंसानियत याद आई?
Answer: जो हमें अपने लिए अन्याय लगता है, वह दूसरों के लिए भी अन्याय है; एकांकी इसी पाखंड को उजागर करता है।
Memory hook: बहू भी किसी की बेटी।
सही बात कहने का साहस
कल्पना कीजिए परिवार का कोई बड़ा सदस्य किसी के साथ अन्याय कर रहा है और सब चुप हैं।
राजेश्वरी से क्या सीख मिलती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- आदर बनाए रखते हुए विरोध।
- ठोस उदाहरण से समझाना।
Answer: राजेश्वरी ने सही समय पर, गौरी का उदाहरण देकर पति को समझाया; अन्याय के सामने विनम्र पर दृढ़ आवाज़ उठाना ज़रूरी है।
Memory hook: चुप्पी भी अन्याय का साथ है।
दहेज के विरुद्ध कदम
मान लीजिए आपके किसी रिश्तेदार की शादी में दहेज की माँग की जा रही है।
एक जागरूक नागरिक के रूप में आप क्या कर सकते हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- परिवार में बात उठाना।
- दहेज निषेध कानून की जानकारी देना।
Answer: दहेज लेना-देना कानूनन अपराध है; जागरूकता और साहस से ही यह प्रथा खत्म होगी, जैसा एकांकी का संदेश है।
Memory hook: दहेज नहीं, सम्मान।
Topics in this chapter
How the school exam asks बहू की विदा – विनोद रस्तोगी
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| वक्ता-श्रोता | 'वक्ता और श्रोता कौन हैं?' (जीवनलाल-प्रमोद; प्रमोद-जीवनलाल; राजेश्वरी-जीवनलाल) | नाम और आपसी संबंध सही-सही। |
| कारण | 'जीवनलाल ने बहू को विदा क्यों नहीं किया?' / ''मरहम' से क्या आशय है?' | खातिरदारी और कम दहेज; मरहम = पाँच हज़ार रुपये। |
| हृदय-परिवर्तन | 'वक्ता की आँखें किस घटना से खुलीं?' | गौरी के ससुराल वालों का इनकार + राजेश्वरी का कथन। |
| समस्या और समाधान | 'क्या स्त्री-शिक्षा दहेज प्रथा समाप्त करने में सहायक हो सकती है?' | अपना मत, तर्क, उदाहरण। |
Tricks to remember बहू की विदा – विनोद रस्तोगी
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
छह पात्र, तीन जोड़े
जीवनलाल-राजेश्वरी, रमेश-कमला, गौरी, प्रमोद।
Use it when: पात्र-परिचय।
घाव → मरहम → चोट
अपमान का घाव, दहेज का मरहम, बेटी की चोट जो असली मरहम बनी।
Use it when: प्रतीकों के प्रश्न।
पाँच हज़ार
मरहम की कीमत।
Use it when: तथ्य-प्रश्न।
बहू की विदा – विनोद रस्तोगी: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: अवतरण (2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र में पूछा गया)
"शिकायत आपको हमसे है, उस भोली-भाली लड़की ने आपका क्या बिगाड़ा है, जो विदा न करके आप उससे बदला ले रहे हैं।"
(1) · 2 marks · Short answer
(i) यह कथन कौन, किससे कह रहा है? 'शिकायत' का कारण क्या है?
(2) · 2 marks · Short answer
(ii) 'भोली-भाली लड़की' कौन है? उसके पति का नाम लिखिए।
(3) · 3 marks · Short answer
(iii) क्या जीवनलाल ने प्रमोद की बात मानी? अंत में उनका हृदय-परिवर्तन कैसे हुआ?
(4) · 3 marks · Long answer
(iv) जीवनलाल की पत्नी का नाम लिखिए और दोनों पति-पत्नी के चरित्र की तुलना कीजिए।
Show the answersAnswers
- कमला का भाई प्रमोद जीवनलाल से कह रहा है। शिकायत का कारण: विवाह में बारात की खातिरदारी ठीक न होना, जिससे जीवनलाल के सम्मान को ठेस लगी, और दहेज कम मिलना।
- कमला, जीवनलाल की बहू; उसके पति का नाम रमेश है।
- पहले नहीं माने। जब उनकी बेटी गौरी के ससुराल वालों ने भी कम दहेज का कारण बताकर उसे विदा नहीं किया, तब उन्हें बेटी वालों का दुख समझ आया; पत्नी राजेश्वरी ने उनकी आँखें खोलीं, और उन्होंने कमला को विदा कर दिया।
- राजेश्वरी। जीवनलाल हठी, लालची और अभिमानी हैं, जो दहेज के लिए बहू की विदा रोकते हैं; राजेश्वरी विनम्र, ममतामयी, निर्लोभी और न्यायप्रिय है, जो पति के दोहरे व्यवहार का विरोध करके परिवार को सही राह दिखाती है।
बहू की विदा – विनोद रस्तोगी: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: विदा न करने का कारण · 2 marks · Short answerExam level
जीवनलाल ने अपनी बहू कमला को विदा करने से क्यों मना कर दिया?
Try it first, then show the solutionSolution
- खातिरदारी।
- कम दहेज, सम्मान को ठेस।
Answer: उनके अनुसार विवाह में बारात की खातिरदारी उनकी हैसियत के अनुसार नहीं हुई और दहेज कम मिला; इससे बिरादरी में उनकी हँसी हुई और सम्मान को ठेस पहुँची, इसलिए वे बदले में बहू की विदा रोक रहे थे।
Example 2: 'मरहम' का आशय · 2 marks · Short answerExam level
'पहले उस घाव के लिए मरहम भेजें' में 'घाव' और 'मरहम' से क्या आशय है?
Try it first, then show the solutionSolution
- घाव = अपमान।
- मरहम = दहेज (पाँच हज़ार)।
Answer: 'घाव' से आशय कम दहेज और खातिरदारी से हुए अपमान से है, और 'मरहम' से आशय पाँच हज़ार रुपये के अतिरिक्त दहेज से, जिसे देकर ही बहू की विदा हो सकती थी।
Example 3: राजेश्वरी की भूमिका · 3 marks · Short answerHarder exam level
राजेश्वरी ने अपने पति की आँखें कैसे खोलीं?
Try it first, then show the solutionSolution
- गौरी की स्थिति।
- जीवनलाल की दुहाई।
- राजेश्वरी का तर्क।
Answer: जब गौरी के ससुराल वालों ने कम दहेज के कारण उसे विदा नहीं किया और जीवनलाल शराफ़त-इंसानियत की दुहाई देने लगे, तब राजेश्वरी ने कहा कि अब इंसानियत याद आ रही है, कुछ देर पहले तो तुम स्वयं वही कर रहे थे। जैसे गौरी तुम्हारी बेटी है, वैसे ही कमला भी किसी की बेटी है। इस तर्क ने जीवनलाल को अपनी भूल का अहसास कराया।
Example 4: 'चोट भी मरहम' · 3 marks · Short answerHarder exam level
'कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है' से जीवनलाल का क्या अभिप्राय है?
Try it first, then show the solutionSolution
- चोट = बेटी का अपमान।
- मरहम = सही समझ।
Answer: अपनी बेटी गौरी के ससुराल वालों से मिली 'चोट' ने उनकी आँखें खोल दीं; उन्हें समझ आ गया कि बहू भी बेटी होती है। इस अनुभव ने उनके लोभ के 'घाव' का इलाज कर दिया, और वे कमला को विदा करने को तैयार हो गए।
Example 5: स्त्री-शिक्षा और दहेज · 4 marks · Long answerHOTS / competency
क्या स्त्री-शिक्षा दहेज प्रथा को समाप्त करने में सहायक हो सकती है? अपने विचार लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- आत्मनिर्भरता।
- अधिकारों की जागरूकता।
- सामाजिक दृष्टि में बदलाव।
Answer: हाँ। शिक्षित बेटियाँ आत्मनिर्भर बनती हैं, इसलिए विवाह को आर्थिक सौदा मानने की सोच कमज़ोर होती है; वे अपने अधिकारों और दहेज-विरोधी कानूनों के प्रति सजग रहती हैं और अन्याय का विरोध कर सकती हैं; और परिवारों में बेटा-बेटी का भेद घटता है। पर साथ में पुरुषों और परिवारों की सोच बदलना तथा कानून का कड़ाई से पालन भी आवश्यक है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
3 अंक: 'क्या जीवनलाल ने प्रमोद की बात मानी? अंत में उनका हृदय-परिवर्तन कैसे हुआ?' (2025 की अंक-योजना के अपेक्षित बिंदुओं पर आधारित; विभाजन संकेतात्मक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| पहले नहीं माने | 1 |
| बेटी गौरी के ससुराल वालों का विदा से इनकार | 1 |
| राजेश्वरी की बात से हृदय-परिवर्तन; कमला को विदा किया | 1 |
Where students lose marks in बहू की विदा – विनोद रस्तोगी
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: विदा न करने का अधूरा कारण
2025 में छात्रों ने बारात के स्वागत और कम दहेज, दोनों कारण नहीं लिखे।
Do this: दोनों लिखें: खातिरदारी में कमी (सम्मान को ठेस) और दहेज कम।
Usually costs: कारण के अंक।
Mistake: पात्रों के नाम गलत
छह नाम याद रखने हैं।
Do this: जीवनलाल-राजेश्वरी (पति-पत्नी), रमेश-कमला (पति-पत्नी), गौरी (बेटी), प्रमोद (कमला का भाई)।
Usually costs: परिचय के अंक।
Mistake: हृदय-परिवर्तन का कारण छोड़ना
2025 में परीक्षकों के अनुसार छात्रों ने यह नहीं लिखा कि बेटी गौरी के ससुराल वालों के इनकार के बाद ही जीवनलाल माने।
Do this: गौरी के ससुराल वालों का इनकार और राजेश्वरी का तर्क, दोनों लिखें।
Usually costs: घटना के अंक।
Mistake: राजेश्वरी का चरित्र छोड़ना
परीक्षकों ने राजेश्वरी का नाम और चरित्र-चित्रण छूटने का उल्लेख किया।
Do this: विनम्र, ममतामयी, निर्लोभी, न्यायप्रिय: उदाहरण सहित।
Usually costs: चरित्र-चित्रण के अंक।
Practice questions on बहू की विदा – विनोद रस्तोगी
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerExam level
जीवनलाल के परिवार के सदस्यों के नाम और संबंध लिखिए।
Hint
पत्नी, बेटा, बेटी, बहू।
Answer
पत्नी राजेश्वरी, बेटा रमेश, बेटी गौरी, बहू कमला (रमेश की पत्नी)।
Q2 · 2 marks · Short answerExam level
प्रमोद कौन है और क्यों आया है?
Hint
कमला।
Answer
प्रमोद कमला का भाई है, जो उसे विदा कराकर मायके ले जाने आया है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
अंत में प्रमोद और कमला की क्या प्रतिक्रिया हुई?
Hint
मुसकान और आँसू।
Answer
प्रमोद मुसकराकर अपने जीजा रमेश की ओर देखने लगा और कमला खुशी के आँसू पोंछती हुई अंदर चली गई।
Q4 · 3 marks · Short answerHarder exam level
जीवनलाल के चरित्र की तीन विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।
Hint
लोभी, अभिमानी, अंत में परिवर्तित।
Answer
(1) लोभी: पाँच हज़ार रुपये माँगते हैं। (2) अभिमानी और हठी: 'मेरे नाम पर धब्बा', प्रमोद की विनती नहीं मानते। (3) अंत में संवेदनशील: बेटी के अपमान से अपनी गलती समझकर कमला को विदा करते हैं।
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
एकांकी का शीर्षक 'बहू की विदा' कहाँ तक उचित है?
Hint
पूरी कथा का केंद्र।
Answer
पूरा एकांकी कमला (बहू) की विदा के प्रश्न पर टिका है: विदा का रुकना संघर्ष है, और विदा होना समाधान। इसी के माध्यम से दहेज की समस्या उजागर होती है, इसलिए शीर्षक उचित है।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
आपके विचार में दहेज प्रथा समाप्त करने के लिए युवा क्या कर सकते हैं? तीन उपाय लिखिए।
Hint
व्यक्तिगत और सामाजिक।
Answer
मुक्त उत्तर: दहेज न लेने-देने का संकल्प; दहेज माँगने वालों का सामाजिक बहिष्कार और शिकायत; बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'बहू की विदा' के लेखक कौन हैं?Show answer
विनोद रस्तोगी।
2.कमला को विदा कराने कौन आया था?Show answer
उसका भाई प्रमोद।
3.जीवनलाल ने 'मरहम' के रूप में क्या माँगा?Show answer
पाँच हज़ार रुपये (अतिरिक्त दहेज)।
4.जीवनलाल की बेटी का नाम?Show answer
गौरी।
5.जीवनलाल की आँखें किसने खोलीं?Show answer
पत्नी राजेश्वरी ने, गौरी के विदा न किए जाने के बाद।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप सभी पात्रों के नाम और संबंध बता सकते हैं?
- क्या आप विदा न करने के दोनों कारण लिख सकते हैं?
- क्या आप 'घाव', 'मरहम' और 'चोट' के अर्थ समझा सकते हैं?
- क्या आप जीवनलाल और राजेश्वरी की तुलना कर सकते हैं?
- क्या आप एकांकी का संदेश लिख सकते हैं?
बहू की विदा – विनोद रस्तोगी: frequently asked questions
जीवनलाल का हृदय-परिवर्तन स्वाभाविक है या अचानक?
स्वाभाविक है, क्योंकि जो दुख वे दूसरों को दे रहे थे, वही उनकी अपनी बेटी को मिला; राजेश्वरी ने सही समय पर उन्हें इसका बोध कराया।
क्या यह एकांकी कक्षा 10 में भी है?
नहीं। 2028 के पाठ्यक्रम में CISCE ने निर्धारित पाठ बाँट दिए हैं; 'बहू की विदा' कक्षा 9 में है।
एकांकी का मुख्य संदेश क्या है?
दहेज प्रथा एक सामाजिक बुराई है; बहू को बेटी समझना चाहिए और दोहरे मापदंड छोड़ने चाहिए।
उत्तर में नाम क्यों ज़रूरी हैं?
2025 के परीक्षकों ने पात्रों के नाम भूलने या गलत लिखने पर अंक काटे; वक्ता-श्रोता के प्रश्नों में नाम और संबंध दोनों लिखें।
Based on: CISCE ICSE 2028 Second Languages syllabus (Indian Languages); CISCE ICSE 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Regulations for ICSE Examination Year 2028; CISCE Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi (examiners' comments); Ekanki Sanchay: Bahu Ki Vida, textbook exercise passages and solutions (StudiesToday)