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HindiICSE Class 9 · साखी – कबीरदास

साखी (कबीरदास): गुरु की महिमा, अहंकार का त्याग और आडंबर का विरोध

Updated 18 October 2026 · Fact-checked

साहित्य सागर की साखी में कबीर के दोहे हैं: गुरु ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं, इसलिए उनका स्थान सबसे ऊँचा है; अहंकार मिटने पर ही हरि मिलते हैं; मस्जिद की अज़ान और पत्थर पूजने के आडंबर पर व्यंग्य है; और ईश्वर के गुण अनंत हैं। भाषा सधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी) है।

Understand कबीर की पाँच साखियाँ: गुरु, अहंकार और आडंबर (साखी)

कवि। कबीरदास पंद्रहवीं शताब्दी के भक्तिकाल की निर्गुण शाखा के प्रमुख संत-कवि थे। वे ईश्वर को निराकार मानते थे और बाह्याडंबरों का विरोध करते थे। साखी का अर्थ है साक्षी, यानी अनुभव से निकले दोहे। इस साखी से भावार्थ के प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

1. गुरु की महिमा। "गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, काके लागू पायँ। बलिहारी गुरु आपनो, जिन गोबिंद दियौ बताय॥" गुरु और ईश्वर दोनों सामने हों तो कबीर गुरु पर बलिहारी जाते हैं, क्योंकि गुरु ने ईश्वर का ज्ञान कराया।

2. अहंकार का त्याग। "जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहि। प्रेम गली अति साँकरी, तामे दो न समाहि॥" "मैं" का अर्थ अहंकार है। प्रेम की गली इतनी सँकरी है कि अहंकार और ईश्वर दोनों उसमें नहीं समा सकते।

3. मस्जिद पर व्यंग्य। "काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय। ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय॥" कबीर पूछते हैं कि क्या खुदा बहरा है, जो ज़ोर से अज़ान देनी पड़ती है।

4. मूर्ति-पूजा पर व्यंग्य। "पाहन पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूँ पहार। ताते ये चाकी भली, पीस खाय संसार॥" पत्थर पूजने से ईश्वर मिलते तो पहाड़ पूजते; उपयोगी चक्की इससे भली है।

5. ईश्वर के अनंत गुण। "सात समंद की मसि करौं, लेखनि सब बनराय। सब धरती कागद करौं, हरि गुन लिखा न जाय॥" सब समुद्र स्याही, सब वन कलम और धरती कागज़ हो तो भी ईश्वर के गुण पूरे नहीं लिखे जा सकते।

भाषा। सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी, यानी अनेक बोलियों का मिश्रण; खड़ी बोली, ब्रज या अवधी कहना गलत है।

विषय। गुरु-महिमा, अहंकार-त्याग, आडंबर-विरोध और ईश्वर की अनंतता।

कबीर की पाँच साखियाँ: गुरु, अहंकार और आडंबर (साखी): key facts

पाँच साखियाँ
  • गुरु की महिमा
  • अहंकार का त्याग
  • मस्जिद पर व्यंग्य
  • मूर्ति-पूजा पर व्यंग्य
  • ईश्वर के अनंत गुण
विषयों का क्रम।
कबीर की पहचान
  • निर्गुण भक्ति
  • निराकार ईश्वर
  • समाज-सुधारक
  • बाह्याडंबर-विरोधी
परिचय के प्रश्न।
भाषा
सधुक्कड़ी | पंचमेल खिचड़ी
खड़ी बोली नहीं।
मैं का अर्थ
अहंकार | अहं भाव
साखी 2 का प्रश्न।

How to answer कबीर की पाँच साखियाँ: गुरु, अहंकार और आडंबर (साखी) questions

साखी के भावार्थ के प्रश्न का उत्तर इस प्रकार लिखिए।

  1. 1पंक्ति या दोहा लिखिए।
  2. 2शब्दार्थ बताइए, जैसे मैं = अहंकार।
  3. 3दोहे का सरल भावार्थ लिखिए।
  4. 4कबीर का उद्देश्य या व्यंग्य बताइए।
  5. 5एक वाक्य में संदेश लिखिए।

कबीर की पाँच साखियाँ: गुरु, अहंकार और आडंबर (साखी) in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

मैं और हम

मान लीजिए किसी टीम का कप्तान हर बात में कहता है "यह मैंने किया", और टीम के लोग उससे दूर होते जाते हैं, जबकि जो कप्तान सबको साथ लेता है उसकी टीम जीतती है।

यह साखी के किस संदेश से मिलता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. "मैं" का भाव दूरी बनाता है।
  2. विनम्रता से निकटता बनती है।
  3. अहंकार मिटने पर ही मेल होता है।

Answer: यह "जब मैं था तब हरि नहीं" के संदेश से मिलता है कि अहंकार रहते निकटता नहीं बनती।

Memory hook: मैं हटे तो मेल बने।

Tricks to remember कबीर की पाँच साखियाँ: गुरु, अहंकार और आडंबर (साखी)

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • गुरु-मैं-मस्जिद-पाहन-सात

    पाँच साखियों का क्रम।

    Use it when: क्रम।

  • मैं = अहं

    साखी में "मैं" का अर्थ अहंकार।

    Use it when: शब्दार्थ।

  • सधुक्कड़ी

    कबीर की भाषा का नाम।

    Use it when: भाषा।

कबीर की पाँच साखियाँ: गुरु, अहंकार और आडंबर (साखी): solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: कबीर की भाषा · 1 mark · MCQBoard level

कबीर की भाषा कौन-सी मानी जाती है?
(क) खड़ी बोली (ख) सधुक्कड़ी (ग) अवधी (घ) संस्कृत

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कबीर की भाषा सधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी) है (1)।

Answer: (ख) सधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी)।

Example 2: साखी का अर्थ (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level

"साखी" शब्द का क्या अर्थ है और कबीर की साखियाँ किससे निकली हैं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. साक्षी (1)
  2. अनुभव (1)।

Answer: साखी का अर्थ साक्षी है। कबीर की साखियाँ उनके अपने अनुभव से निकले दोहे हैं।

Example 3: अहंकार का त्याग (4 अंक) · 4 marks · Long answerHarder board level

"जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहि" का भावार्थ लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मैं = अहंकार (1)
  2. अहंकार तो हरि नहीं (1)
  3. प्रेम की गली सँकरी (1)
  4. संदेश (1)।

Answer: यहाँ "मैं" का अर्थ अहंकार है। कबीर कहते हैं कि जब मुझमें अहंकार था तब ईश्वर नहीं मिले, और अब ईश्वर मिल गए हैं तो अहंकार नहीं रहा। प्रेम की गली इतनी सँकरी है कि उसमें अहंकार और ईश्वर साथ नहीं रह सकते। संदेश है कि अहंकार त्यागकर ही ईश्वर को पाया जा सकता है।

Example 4: मूर्ति-पूजा पर व्यंग्य (4 अंक) · 4 marks · Long answerHarder board level

"पाहन पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूँ पहार" में कबीर क्या कहना चाहते हैं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पत्थर पूजना (1)
  2. पहाड़ (1)
  3. चाकी भली (1)
  4. उद्देश्य (1)।

Answer: कबीर कहते हैं कि यदि पत्थर पूजने से ईश्वर मिलते तो मैं पूरा पहाड़ पूजता। इसके बजाय चक्की भली है, जिससे पिसा अन्न सारा संसार खाता है। वे मूर्ति-पूजा के आडंबर का विरोध करते हैं और उपयोगी कर्म को श्रेष्ठ बताते हैं।

Example 5: दो साखियों की तुलना (5 अंक) · 5 marks · Long answerHOTS / competency

मस्जिद और मूर्ति-पूजा वाली साखियों में कबीर के दृष्टिकोण की समानता लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दोनों में व्यंग्य (2)
  2. आडंबर का विरोध (2)
  3. निष्कर्ष (1)।

Answer: दोनों साखियों में कबीर बाह्य दिखावे पर व्यंग्य करते हैं। एक में वे ज़ोर की अज़ान पर पूछते हैं कि क्या खुदा बहरा है, दूसरी में पत्थर पूजने के बजाय उपयोगी चक्की को भला बताते हैं। दोनों से स्पष्ट है कि वे हिंदू और मुसलमान दोनों के आडंबर के विरोधी और निर्गुण भक्ति के समर्थक थे।

Where students lose marks in कबीर की पाँच साखियाँ: गुरु, अहंकार और आडंबर (साखी)

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: भाषा गलत लिखना

    खड़ी बोली या अवधी लिख देना।

    Wrong working

    कबीर की भाषा अवधी है।

    Right working

    कबीर की भाषा सधुक्कड़ी है।

    Do this: नाम याद कीजिए।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: मैं का अर्थ न बताना

    शब्दार्थ छूटना।

    Wrong working

    मैं यानी कबीर।

    Right working

    मैं यानी अहंकार।

    Do this: शब्दार्थ लिखिए।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: केवल शाब्दिक अर्थ

    भावार्थ नहीं।

    Wrong working

    पत्थर पूजना।

    Right working

    आडंबर का विरोध।

    Do this: उद्देश्य जोड़िए।

    Usually costs: 1 से 2 अंक

Exam tips

  • साखी का अर्थ और कबीर की शाखा याद रखिए।
  • मैं का अर्थ अहंकार लिखिए।
  • भाषा सधुक्कड़ी बताइए।
  • व्यंग्य के साथ संदेश लिखिए।
  • दोहे की पंक्ति शुद्ध उद्धृत कीजिए।

Practice questions on कबीर की पाँच साखियाँ: गुरु, अहंकार और आडंबर (साखी)

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    "गुरु गोबिंद दोऊ खड़े" में कबीर किस पर बलिहारी जाते हैं?
    (क) गोबिंद (ख) गुरु (ग) मुल्ला (घ) पहाड़

    Hint

    अर्थ देखिए।

    Answer

    (ख) गुरु पर।

  2. Q2 · 1 mark · Short answerBoard level

    कबीर किस शाखा के संत थे? (1 अंक)

    Hint

    कबीर का परिचय याद कीजिए।

    Answer

    भक्तिकाल की निर्गुण शाखा के।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    "प्रेम गली अति साँकरी" का क्या आशय है? (3 अंक)

    Hint

    दो न समा सकना।

    Answer

    प्रेम का मार्ग इतना सँकरा है कि उसमें अहंकार और ईश्वर दोनों एक साथ नहीं जा सकते, यानी ईश्वर पाने के लिए अहंकार छोड़ना पड़ता है।

  4. Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level

    कबीर ने मुल्ला की बाँग पर क्या प्रश्न उठाया? (3 अंक)

    Hint

    खुदा बहरा।

    Answer

    उन्होंने पूछा कि क्या खुदा बहरा हो गया है, जो मुल्ला को मस्जिद पर चढ़कर ज़ोर से अज़ान देनी पड़ती है। यह दिखावे पर व्यंग्य है।

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level

    पाँचवीं साखी के उदाहरण से ईश्वर की अनंतता कैसे बताई गई है? (3 अंक)

    Hint

    समुद्र, वन, धरती।

    Answer

    सातों समुद्रों को स्याही, सारे वन को कलम और पूरी धरती को कागज़ मान लें, तब भी ईश्वर के गुण पूरे नहीं लिखे जा सकते, इसलिए उनकी महिमा अनंत है।

  6. Q6 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    आज के समय में कबीर के आडंबर-विरोध की प्रासंगिकता पर अपना मत दो कारणों से लिखिए। (4 अंक)

    Hint

    आज के उदाहरण।

    Answer

    आज भी लोग दिखावे के आयोजनों पर बहुत खर्च करते हैं, जबकि सेवा और सद्भाव की उपेक्षा होती है। कबीर का संदेश याद दिलाता है कि ईश्वर भक्ति मन की सच्चाई और उपयोगी कर्म में है। इसलिए उनकी बात आज भी प्रासंगिक है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.कबीर किस काल के?Show answer

    भक्तिकाल, पंद्रहवीं शताब्दी।

  2. 2.साखी का अर्थ?Show answer

    साक्षी।

  3. 3.कबीर की भाषा?Show answer

    सधुक्कड़ी।

  4. 4.मैं का अर्थ?Show answer

    अहंकार।

  5. 5.कबीर कैसी भक्ति के पक्षधर?Show answer

    निर्गुण-निराकार।

  6. 6.पाँचवीं साखी का विषय?Show answer

    ईश्वर के अनंत गुण।

कबीर की पाँच साखियाँ: गुरु, अहंकार और आडंबर (साखी): frequently asked questions

कितनी साखियाँ हैं?

साहित्य सागर के इस पाठ में पाँच साखियाँ ली गई हैं; आपकी पुस्तक में और भी हो सकती हैं।

कौन-सी कक्षा?

ICSE कक्षा 9।

क्या कबीर के दोहे उद्धृत हैं?

हाँ, यहाँ केवल पाठ में पढ़ाई गई साखियों के दोहे उद्धृत हैं।