मातृभूमि का मान (हरिकृष्ण 'प्रेमी'): लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान
Updated 18 October 2026 · Fact-checked
'मातृभूमि का मान' हरिकृष्ण 'प्रेमी' का ऐतिहासिक एकांकी है। बूँदी से हारकर मेवाड़ के महाराणा लाखा प्रतिज्ञा करते हैं कि बूँदी का दुर्ग जीते बिना अन्न-जल नहीं लेंगे। इसके लिए नकली दुर्ग बनता है, पर मेवाड़ की सेना का हाड़ा सैनिक वीरसिंह अपनी मातृभूमि के उस दुर्ग की रक्षा में प्राण दे देता है।
Understand लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान (मातृभूमि का मान)
एकांकी का परिचय। यह हरिकृष्ण 'प्रेमी' का ऐतिहासिक एकांकी है, जो एकांकी संचय में संकलित है और कक्षा 9 के लिए निर्धारित है।
पात्र। महाराणा लाखा: मेवाड़ के शासक। अभय सिंह: उनके सेनापति। राव हेमू: बूँदी के शासक। वीरसिंह: मेवाड़ की सेना में नौकरी करने वाला हाड़ा सैनिक, जिसकी जन्मभूमि बूँदी है।
घटना-क्रम।
1. लाखा राजपूतों की शक्ति को एक सूत्र में बाँधना चाहते हैं और अभय सिंह के हाथ राव हेमू को संदेश भेजते हैं कि बूँदी मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करे।
2. राव हेमू आदर के साथ मना कर देते हैं: हाड़ा वंश किसी की गुलामी नहीं करेगा।
3. नीमरा के मैदान में युद्ध होता है और लाखा हारकर भागते हैं।
4. आत्मग्लानि में वे प्रतिज्ञा करते हैं कि जब तक बूँदी के दुर्ग में सेना सहित प्रवेश नहीं करेंगे, अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे।
5. प्रतिज्ञा विवेकहीन थी, इसलिए एक चारणी के सुझाव पर बूँदी का मिट्टी का नकली दुर्ग बनवाया जाता है।
6. वीरसिंह अपने हाड़ा साथियों के साथ प्रण लेता है कि प्राण रहते नकली दुर्ग पर भी मेवाड़ की पताका नहीं फहरने देगा। वह लड़ते हुए प्राण दे देता है।
7. उसके बलिदान से लाखा सहित सब राजपूत जन्मभूमि का मान समझते हैं।
विषय। मातृभूमि-प्रेम और बलिदान, स्वाभिमान और स्वतंत्रता, और राजपूत एकता का प्रयास।
शीर्षक। मातृभूमि का मान बचाने की भावना ही एकांकी का केंद्र है।
लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान (मातृभूमि का मान): key facts
- कथा-क्रम
- अधीनता का संदेश
- राव हेमू का इनकार
- नीमरा का युद्ध
- लाखा की प्रतिज्ञा
- नकली दुर्ग
- वीरसिंह का बलिदान
- सारांश का क्रम।
- पात्र
लाखा मेवाड़ के शासक अभय सिंह सेनापति राव हेमू बूँदी के शासक वीरसिंह हाड़ा सैनिक - नामों में भेद।
- मुख्य भाव
- मातृभूमि-प्रेम
- स्वाभिमान
- बलिदान
- विषय के प्रश्न।
- प्रतिज्ञा
- बूँदी के दुर्ग में प्रवेश | अन्न-जल का त्याग
- लाखा की विवेकहीन प्रतिज्ञा।
How to answer लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान (मातृभूमि का मान) questions
अवतरण या चरित्र के प्रश्न का उत्तर इस प्रकार लिखिए।
- 1वक्ता, श्रोता और प्रसंग लिखिए।
- 2राव हेमू के इनकार का कारण बताइए।
- 3प्रतिज्ञा और नकली दुर्ग की घटना लिखिए।
- 4वीरसिंह के बलिदान का कारण और प्रभाव लिखिए।
- 5एकांकी का उद्देश्य एक वाक्य में लिखिए।
लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान (मातृभूमि का मान) in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
स्कूल की पुरानी इमारत
मान लीजिए किसी स्कूल में पुरानी इमारत गिराने का आदेश आता है और एक पुराना छात्र उसे बचाने के लिए सबके सामने खड़ा हो जाता है क्योंकि वह उसका विद्यालय है।
यह एकांकी के किस भाव से मिलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- अपनी जन्मभूमि या संस्था से लगाव।
- वह प्रतीक के लिए भी खड़ा होता है।
- सम्मान की रक्षा।
Answer: यह वीरसिंह के भाव से मिलता है, जो नकली दुर्ग का भी मान बचाने के लिए प्राण देता है क्योंकि वह उसकी मातृभूमि का प्रतीक है।
Memory hook: प्रतीक भी पवित्र।
Tricks to remember लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान (मातृभूमि का मान)
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
लाखा-हेमू-वीरसिंह
तीन मुख्य नाम: मेवाड़, बूँदी, हाड़ा सैनिक।
Use it when: पात्र।
नीमरा
युद्ध का स्थान।
Use it when: स्थान।
मिट्टी का दुर्ग
नकली दुर्ग, असली मान।
Use it when: प्रतीक।
लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान (मातृभूमि का मान): solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: वीरसिंह का चरित्र-चित्रण (4 अंक) · 4 marks · Long answerHarder board level
'मातृभूमि का मान' एकांकी के आधार पर वीरसिंह का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- परिचय: मेवाड़ की सेना का हाड़ा सैनिक, जन्मभूमि बूँदी (1)
- मातृभूमि-प्रेम: नकली दुर्ग को भी जन्मभूमि का प्रतीक मानता है (1)
- साहस और दृढ़ता: साथियों के साथ प्रण लेता है और लड़ते हुए प्राण देता है (1)
- प्रभाव: बलिदान से लाखा और राजपूत जन्मभूमि का मान समझते हैं (1)।
Answer: वीरसिंह मेवाड़ की सेना में नौकरी करने वाला हाड़ा सैनिक है, पर उसकी जन्मभूमि बूँदी है। वह मातृभूमि से गहरा प्रेम करता है, इसलिए नकली दुर्ग का अपमान भी उसे सहन नहीं होता। वह साहसी और दृढ़ प्रतिज्ञ है और प्राण रहते नकली दुर्ग पर मेवाड़ की पताका नहीं फहरने देने का प्रण लेकर लड़ते हुए प्राण दे देता है। उसके बलिदान से लाखा सहित सब राजपूत जन्मभूमि का मान समझते हैं।
Example 2: राव हेमू का उत्तर (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level
राव हेमू ने मेवाड़ की अधीनता क्यों अस्वीकार की?
Try it first, then show the solutionSolution
- स्वतंत्र रहना चाहते हैं (1)
- हाड़ा वंश किसी का गुलाम नहीं (1)।
Answer: राव हेमू ने कहा कि बूँदी महाराणा का आदर करता है, पर वह स्वतंत्र रहना चाहता है और हाड़ा वंश किसी की गुलामी नहीं करेगा।
Example 3: लाखा की प्रतिज्ञा (4 अंक) · 4 marks · Long answerHarder board level
महाराणा लाखा ने प्रतिज्ञा क्यों की और उसका क्या हल निकाला गया?
Try it first, then show the solutionSolution
- हार (1)
- प्रतिज्ञा (1)
- विवेकहीन (1)
- नकली दुर्ग (1)।
Answer: नीमरा के युद्ध में हारने की ग्लानि से लाखा ने प्रतिज्ञा की कि बूँदी के दुर्ग में प्रवेश किए बिना अन्न-जल नहीं लेंगे। यह प्रतिज्ञा विवेकहीन थी, इसलिए एक चारणी के सुझाव पर मिट्टी का नकली दुर्ग बनवाया गया।
Example 4: शीर्षक की सार्थकता (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level
"मातृभूमि का मान" शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। (लगभग 80 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मातृभूमि के प्रति भाव (2)
- वीरसिंह का बलिदान (2)
- निष्कर्ष (1)।
Answer: वीरसिंह की जन्मभूमि बूँदी थी। जब उसे पता चला कि उसकी मातृभूमि के नकली दुर्ग का भी अपमान होगा, तो उसने प्राण देकर उसकी रक्षा की। इस बलिदान से सब राजपूतों ने जन्मभूमि का मान समझा, इसलिए शीर्षक सार्थक है।
Example 5: मूल्यांकन (4 अंक) · 4 marks · Long answerHOTS / competency
"वीरसिंह का बलिदान व्यर्थ नहीं गया।" इस कथन की परख दो कारणों से कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- मत (1)
- लाखा का बोध (1)
- राजपूतों की समझ (1)
- निष्कर्ष (1)।
Answer: यह कथन सही है। उसके बलिदान से महाराणा लाखा सहित सब राजपूतों को जन्मभूमि के मान का अर्थ समझ आया। साथ ही यह संदेश मिला कि विवेकहीन प्रतिज्ञा से अधिक मूल्य सम्मान और स्वाभिमान का है।
Where students lose marks in लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान (मातृभूमि का मान)
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: अभय सिंह और राव हेमू मिलाना
पदों का भेद नहीं।
Wrong working
अभय सिंह बूँदी के शासक हैं।
Right working
राव हेमू बूँदी के शासक हैं।
Do this: पात्र-सूची बनाइए।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: राव हेमू का उत्तर अधूरा
स्वतंत्रता का भाव छूटना।
Wrong working
राव हेमू ने मना किया।
Right working
राव हेमू ने स्वतंत्र रहने के लिए मना किया।
Do this: कारण लिखिए।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: उद्देश्य न लिखना
संदेश छूटना।
Wrong working
वीरसिंह मर गया।
Right working
मातृभूमि के मान के लिए बलिदान।
Do this: उद्देश्य जोड़िए।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Exam tips
- पात्रों के पद और राज्य याद रखिए।
- राव हेमू का पूरा उत्तर लिखिए।
- नकली दुर्ग की घटना क्रम से लिखिए।
- वीरसिंह के बलिदान का कारण बताइए।
- उद्देश्य देशप्रेम से जोड़िए।
Practice questions on लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान (मातृभूमि का मान)
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 3 marks · Short answerHarder board level
राव हेमू के चरित्र की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए। (3 अंक)
Hint
स्वाभिमान और आदरपूर्ण व्यवहार।
Answer
राव हेमू स्वाभिमानी और स्वतंत्रता-प्रेमी हैं, इसलिए वे कहते हैं कि हाड़ा वंश किसी की गुलामी नहीं करेगा। वे विनम्र भी हैं, क्योंकि महाराणा का आदर करते हुए आदर के साथ ही अधीनता स्वीकार करने से मना करते हैं।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
नीमरा के युद्ध में क्या हुआ? (2 अंक)
Hint
हार।
Answer
युद्ध में महाराणा लाखा को बूँदी के राव हेमू से हारकर भागना पड़ा।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
लाखा की प्रतिज्ञा क्या थी? (3 अंक)
Hint
दुर्ग और अन्न-जल।
Answer
उन्होंने प्रतिज्ञा की कि जब तक बूँदी के दुर्ग में सेना सहित प्रवेश नहीं करेंगे, अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे।
Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level
वीरसिंह नकली दुर्ग की रक्षा क्यों करना चाहता था? (3 अंक)
Hint
जन्मभूमि का प्रतीक।
Answer
वीरसिंह की जन्मभूमि बूँदी थी, इसलिए उस दुर्ग के अपमान को वह अपनी मातृभूमि का अपमान मानता था, भले वह नकली था।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
वीरसिंह के इस प्रण का आशय स्पष्ट कीजिए कि प्राण रहते वह नकली दुर्ग पर भी मेवाड़ की पताका नहीं फहरने देगा। (3 अंक)
Hint
दुर्ग मातृभूमि का प्रतीक है।
Answer
इस प्रण का आशय है कि वीरसिंह के लिए नकली दुर्ग भी उसकी मातृभूमि बूँदी का प्रतीक है। वह उसका अपमान सहन नहीं कर सकता, इसलिए प्राण देकर भी उसके मान की रक्षा करने को तैयार है। इससे उसका मातृभूमि-प्रेम और बलिदान की भावना प्रकट होती है।
Q6 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
क्या लाखा की प्रतिज्ञा बुद्धिमानी की थी? दो कारण देकर अपना मत लिखिए। (4 अंक)
Hint
विवेक और भावना।
Answer
नहीं, क्योंकि बूँदी को तुरंत जीतना संभव नहीं था और वह प्रतिज्ञा क्रोध और अपमान में की गई थी। नकली दुर्ग का सहारा लेना भी बताता है कि प्रतिज्ञा विवेकहीन थी।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.लेखक?Show answer
हरिकृष्ण 'प्रेमी'।
2.लाखा किस राज्य के?Show answer
मेवाड़।
3.राव हेमू किस राज्य के?Show answer
बूँदी।
4.युद्ध कहाँ हुआ?Show answer
नीमरा के मैदान में।
5.नकली दुर्ग किसके सुझाव पर?Show answer
एक चारणी के।
6.वीरसिंह किस वंश का?Show answer
हाड़ा।
लाखा की प्रतिज्ञा, नकली दुर्ग और वीरसिंह का बलिदान (मातृभूमि का मान): frequently asked questions
एकांकी कहाँ संकलित है?
एकांकी संचय में।
एकांकी के लेखक कौन हैं?
हरिकृष्ण 'प्रेमी'।
क्या पूरा पाठ उद्धृत है?
नहीं, केवल अध्याय-पृष्ठ की संक्षिप्त बातें हैं।