महायज्ञ का पुरस्कार (यशपाल): सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार
Updated 18 October 2026 · Fact-checked
'महायज्ञ का पुरस्कार' यशपाल की कहानी है। गरीबी में पड़े धर्मपरायण सेठ अपना एक यज्ञ बेचने कुंदनपुर जाते हैं और रास्ते में अपनी चारों रोटियाँ एक भूखे कुत्ते को खिला देते हैं। धन्ना सेठ की पत्नी इसी कर्म को महायज्ञ कहती है। सेठ उसे बेचने से इनकार कर देते हैं और घर लौटने पर उन्हें तहख़ाने में खज़ाना मिलता है।
Follow the arrows: the Seth's selfless kindness to the dog is the true mahayajna, and he refuses to sell it, so he is rewarded.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार (महायज्ञ का पुरस्कार)
कहानी का परिचय। यह यशपाल की कहानी है, जो साहित्य सागर में संकलित है।
सेठ की स्थिति। सेठ विनम्र, उदार और धर्मपरायण थे। उनके द्वार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। अचानक उनके दिन फिरे और गरीबी आ गई। उस समय यज्ञों के फल का क्रय-विक्रय होता था, इसलिए सेठानी की सलाह पर वे अपना एक यज्ञ बेचने कुंदनपुर चल पड़े।
धन्ना सेठ की पत्नी। कुंदनपुर में धन्ना सेठ की पत्नी के बारे में प्रसिद्ध था कि उसे कोई दैवी शक्ति प्राप्त है और वह तीनों लोकों की बात जान लेती है।
रास्ते का प्रसंग। सेठानी की दी चार रोटियाँ लेकर सेठ गर्मी में चले। आधे रास्ते में थककर वे कुएँ के पास रुके। वहाँ भूख से दुर्बल एक कुत्ता उठ भी नहीं पा रहा था। सेठ ने चारों रोटियाँ उसे खिला दीं और स्वयं पानी पीकर आगे बढ़ गए।
कुंदनपुर में। धन्ना सेठ की पत्नी ने कहा कि वह वही महायज्ञ खरीदेगी जो सेठ ने आज रास्ते में किया। सेठ ने अपने निःस्वार्थ कर्म को बेचना स्वीकार नहीं किया और खाली हाथ लौट आए।
पुरस्कार। सेठानी को गर्व हुआ। उसी रात दहलीज़ के पास एक पत्थर के नीचे सीढ़ियाँ मिलीं और विशाल तहख़ाना जवाहरातों से भरा था।
संदेश। निःस्वार्थ सेवा सच्चा यज्ञ है; धर्म का पालन विपत्ति में भी होना चाहिए।
सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार (महायज्ञ का पुरस्कार): key facts
- कथा-क्रम
- धन और दान
- गरीबी
- यज्ञ बेचने का निश्चय
- चार रोटियाँ कुत्ते को
- धन्ना सेठ की पत्नी
- इनकार
- तहख़ाना
- सारांश का क्रम।
- सच्चा यज्ञ
- स्वयं भूखे रहना
- भूखे प्राणी को भोजन
- निःस्वार्थ भाव
- शीर्षक का आधार।
- चरित्र
सेठ उदार, करुणामय, स्वाभिमानी सेठानी व्यावहारिक, धैर्यवान धन्ना सेठ की पत्नी विदुषी, पारखी - एक घटना जोड़िए।
- संदेश
- निःस्वार्थ सेवा | धर्म विपत्ति में भी
- अंत के प्रश्न।
How to answer सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार (महायज्ञ का पुरस्कार) questions
शीर्षक या चरित्र के प्रश्न का उत्तर इस प्रकार लिखिए।
- 1यज्ञ और महायज्ञ का अंतर बताइए।
- 2रास्ते की घटना क्रम से लिखिए।
- 3धन्ना सेठ की पत्नी के कथन का उल्लेख कीजिए।
- 4सेठ के इनकार का कारण बताइए।
- 5पुरस्कार और संदेश के साथ उत्तर पूरा कीजिए।
सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार (महायज्ञ का पुरस्कार) in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
स्कूल के बाहर का भोजन
मान लीजिए एक छात्र के पास केवल एक टिफ़िन है और वह उसे भूखे दिखते एक बच्चे को दे देता है और स्वयं पानी पीकर कक्षा में चला जाता है।
यह कहानी के किस भाव से मिलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- अपना भोजन दूसरे को देना।
- बदले की इच्छा नहीं।
- यही निःस्वार्थ सेवा है।
Answer: यह सेठ के महायज्ञ से मिलता है, जहाँ स्वयं भूखे रहकर दूसरे को भोजन दिया जाता है और कोई स्वार्थ नहीं होता।
Memory hook: दे दो, गिनो मत।
Tricks to remember सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार (महायज्ञ का पुरस्कार)
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
चार रोटियाँ
चार रोटियाँ कुत्ते को।
Use it when: महायज्ञ की घटना।
सेठ-सेठानी-धन्ना
तीन पात्र: सेठ, सेठानी, धन्ना सेठ की पत्नी।
Use it when: पात्र।
दहलीज़ का पत्थर
पुरस्कार की जगह।
Use it when: अंत।
सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार (महायज्ञ का पुरस्कार): solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: कहानी के लेखक · 1 mark · MCQBoard level
"महायज्ञ का पुरस्कार" के लेखक हैं:
(क) प्रेमचंद (ख) यशपाल (ग) सुदर्शन (घ) स्वयं प्रकाश
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक का नाम याद करें: यशपाल (1)।
Answer: (ख) यशपाल।
Example 2: सेठ की गरीबी (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level
सेठ गरीब कैसे हो गए और सेठानी ने क्या सलाह दी?
Try it first, then show the solutionSolution
- दिन फिरे (1)
- यज्ञ बेचने की सलाह (1)।
Answer: अचानक उनके दिन फिरे और वे गरीब हो गए, संगी-साथियों ने भी मुँह फेर लिया। तंगी बढ़ने पर सेठानी ने सलाह दी कि वे अपना एक यज्ञ बेच दें।
Example 3: रास्ते की घटना (4 अंक) · 4 marks · Long answerHarder board level
कुंदनपुर जाते समय रास्ते में सेठ के साथ क्या घटना हुई?
Try it first, then show the solutionSolution
- थके, कुएँ पर रुके (1)
- कुत्ता भूख से दुर्बल (1)
- चारों रोटियाँ खिलाईं (1)
- स्वयं पानी पिया (1)।
Answer: गर्मी में थककर सेठ एक कुएँ की छाया में रुके। वहाँ एक कुत्ता भूख से इतना दुर्बल था कि उठ नहीं पा रहा था। सेठ ने अपनी चारों रोटियाँ उसे खिला दीं और स्वयं केवल पानी पीकर आगे बढ़ गए।
Example 4: शीर्षक की सार्थकता (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level
"महायज्ञ का पुरस्कार" शीर्षक की सार्थकता कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 80 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- महायज्ञ क्या है (2)
- पुरस्कार क्या है (2)
- निष्कर्ष (1)।
Answer: 'महायज्ञ' का अर्थ है स्वयं भूखे रहकर किसी भूखे प्राणी को निःस्वार्थ भाव से भोजन देना। सेठ ने कुंदनपुर जाते समय रास्ते में भूख से दुर्बल कुत्ते को अपनी चारों रोटियाँ खिला दीं और स्वयं केवल पानी पीकर आगे बढ़ गए। धन्ना सेठ की पत्नी ने इसी कर्म को महायज्ञ कहा, पर सेठ ने उसे बेचने से इनकार कर दिया। घर लौटने पर उन्हें तहख़ाने में जवाहरात मिले, यही उनका पुरस्कार था। इसलिए शीर्षक कथा के कर्म और उसके फल को ठीक बताता है।
Example 5: मूल्यांकन (4 अंक) · 4 marks · Long answerHOTS / competency
"सेठ ने महायज्ञ बेचने से इनकार करके सही किया।" इस कथन की परख दो कारणों से कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- मत (1)
- निःस्वार्थ कर्म (1)
- बेचने से कर्म का मूल्य घटता (1)
- निष्कर्ष (1)।
Answer: मैं सहमत हूँ। सेठ ने कुत्ते को भोजन निःस्वार्थ भाव से दिया था, इसलिए उसे बेचना उस भावना का अपमान होता। बेचने पर वह सेवा नहीं, सौदा बन जाती। इसलिए उनका इनकार कहानी के संदेश को पुष्ट करता है।
Where students lose marks in सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार (महायज्ञ का पुरस्कार)
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: यज्ञ और महायज्ञ को मिलाना
अंतर स्पष्ट नहीं।
Wrong working
सेठ ने बड़ा अनुष्ठान किया।
Right working
सेठ ने भूखे को भोजन देकर महायज्ञ किया।
Do this: निःस्वार्थ सेवा को पहचानिए।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: पात्रों का भेद
सेठानी और धन्ना सेठ की पत्नी मिल जाती हैं।
Wrong working
सेठानी ने यज्ञ खरीदने का प्रस्ताव किया।
Right working
धन्ना सेठ की पत्नी ने।
Do this: पात्र-सूची बनाइए।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: पुरस्कार का स्थान भूलना
अंत का विवरण।
Wrong working
खेत में खज़ाना मिला।
Right working
दहलीज़ के पत्थर के नीचे तहख़ाना।
Do this: अंत दोहराइए।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- यज्ञ और महायज्ञ का अंतर लिखिए।
- रास्ते की घटना क्रम से लिखिए।
- धन्ना सेठ की पत्नी का कथन शामिल कीजिए।
- पुरस्कार का स्थान बताइए।
- संदेश एक वाक्य में लिखिए।
Practice questions on सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार (महायज्ञ का पुरस्कार)
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
सेठ के पास रास्ते के लिए कितनी रोटियाँ थीं?
(क) दो (ख) तीन (ग) चार (घ) पाँचHint
कहानी के आरंभ में सेठानी द्वारा रास्ते के लिए दी गई रोटियों का प्रसंग याद कीजिए।
Answer
(ग) चार।
Q2 · 1 mark · Short answerBoard level
धन्ना सेठ कहाँ रहते थे? (1 अंक)
Hint
वह नगर याद कीजिए जहाँ सेठ अपना यज्ञ बेचने जा रहे थे।
Answer
कुंदनपुर नगर में।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
धन्ना सेठ की पत्नी के बारे में क्या प्रसिद्ध था? (3 अंक)
Hint
दैवी शक्ति।
Answer
यह प्रसिद्ध था कि उसे कोई दैवी शक्ति प्राप्त है, जिससे वह तीनों लोकों की बात जान लेती है।
Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level
सेठ चकित क्यों हुए? (3 अंक)
Hint
महायज्ञ की बात।
Answer
धन्ना सेठ की पत्नी ने उनका आज रास्ते में किया यज्ञ खरीदने की बात कही, पर सेठ ने तो वर्षों से कोई यज्ञ नहीं किया था, इसलिए वे चकित हुए।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
सेठ के चरित्र की दो विशेषताएँ घटना सहित लिखिए। (3 अंक)
Hint
गुण और प्रमाण।
Answer
वे करुणामय हैं, क्योंकि भूखे कुत्ते को सब रोटियाँ खिलाते हैं। वे स्वाभिमानी हैं, क्योंकि अपने निःस्वार्थ कर्म को बेचने से इनकार करते हैं।
Q6 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
क्या कहानी का अंत आपको स्वाभाविक लगता है? दो कारण दीजिए। (4 अंक)
Hint
पुरस्कार का तर्क।
Answer
हाँ, क्योंकि कहानी में नेक कर्म का फल मिलना जीवन की नैतिक अपेक्षा को पूरा करता है। साथ ही तहख़ाने का खज़ाना कथा को सुखद अंत देता है। पर कोई यह भी कह सकता है कि पुरस्कार संयोग है, इसलिए असली मूल्य कर्म में है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कहानी के लेखक?Show answer
यशपाल।
2.सेठ कहाँ जा रहे थे?Show answer
कुंदनपुर।
3.कितनी रोटियाँ थीं?Show answer
चार।
4.रोटियाँ किसे खिलाईं?Show answer
भूखे कुत्ते को।
5.पुरस्कार क्या मिला?Show answer
तहख़ाने में जवाहरात।
6.संदेश?Show answer
निःस्वार्थ सेवा सच्चा यज्ञ है।
सेठ की चार रोटियाँ, सच्चा महायज्ञ और पुरस्कार (महायज्ञ का पुरस्कार): frequently asked questions
कहानी कहाँ संकलित है?
साहित्य सागर में।
कौन-सी कक्षा?
ICSE कक्षा 9।
क्या मूल पाठ उद्धृत है?
नहीं, यहाँ कहानी की केवल संक्षिप्त बातें अपने शब्दों में दी गई हैं।