अपना अपना भाग्य (जैनेंद्र कुमार): पहाड़ी बालक की मृत्यु और समाज की संवेदनहीनता
Updated 18 October 2026 · Fact-checked
'अपना अपना भाग्य' जैनेंद्र कुमार की कहानी है। नैनीताल की ठंडी शाम लेखक और उसके मित्र को एक गरीब, बेघर पहाड़ी बालक मिलता है। वकील साहब के इनकार के बाद वे उसकी ठोस सहायता नहीं करते और अगली सुबह वह ठंड से मरा मिलता है। लोग इसे अपना-अपना भाग्य कहकर टाल देते हैं।
Understand पहाड़ी बालक की मृत्यु और "अपना अपना भाग्य" का व्यंग्य
कहानी का परिचय। यह जैनेंद्र कुमार की कहानी है, जो साहित्य सागर में संकलित है और कक्षा 9 के लिए निर्धारित है। शीर्षक ही कहानी का व्यंग्य है।
दृश्य। लेखक अपने मित्र के साथ नैनीताल में संध्या के समय बेंच पर बैठा है। बादल सिर को छूकर निकल रहे हैं और ठंड बढ़ रही है।
बालक। कुहरे में एक दस-बारह वर्ष का बालक आता है: नंगे पैर, नंगे सिर, मैली कमीज़ में, बड़ी पर सूनी आँखों वाला। वह गरीब पहाड़ी परिवार से है, जहाँ भूख के कारण वह भागकर नैनीताल आया। वह एक दुकान पर जूठे खाने और एक रुपये पर काम करता था, पर अब काम और रहने की जगह दोनों छूट चुके हैं।
वकील साहब। लेखक उसे अपने वकील मित्र के पास ले जाते हैं, जिन्हें नौकर चाहिए था। वकील साहब यह कहकर मना कर देते हैं कि पहाड़ी बच्चे शैतान होते हैं और अनजान को नौकर रखने पर वह सामान लेकर भाग सकता है।
अंत। लेखक और मित्र बालक को उसी ठंडी रात में उसके भाग्य पर छोड़ देते हैं। अगली सुबह वह सड़क किनारे पेड़ के नीचे मरा मिलता है। सब इसे अपना-अपना भाग्य कहकर अपने काम में लग जाते हैं।
विषय। समाज की संवेदनहीनता और स्वार्थ, आर्थिक विषमता, और भाग्य के नाम पर ज़िम्मेदारी से बचना।
चरित्र। बालक: गरीब, मेहनती, सहनशील। लेखक और मित्र: सहानुभूति दिखाने वाले पर ठोस सहायता न करने वाले। वकील साहब: संदेही और स्वार्थी।
पहाड़ी बालक की मृत्यु और "अपना अपना भाग्य" का व्यंग्य: key facts
- कथा-क्रम
- नैनीताल की शाम
- बालक मिला
- उसकी कहानी
- वकील का इनकार
- रात में छोड़ना
- सुबह मृत्यु
- भाग्य कहकर टालना
- सारांश का क्रम।
- मुख्य भाव
- संवेदनहीनता
- आर्थिक विषमता
- भाग्य का बहाना
- शीर्षक के प्रश्न का आधार।
- बालक
- दस-बारह वर्ष
- नंगे पैर
- मैली कमीज़
- जूठा खाना और एक रुपया
- बालक की पहचान के मुख्य बिंदु।
- व्यंग्य
- सुंदर नैनीताल | ठंड से मरता बालक
- शीर्षक के व्यंग्य का विरोधाभास।
How to answer पहाड़ी बालक की मृत्यु और "अपना अपना भाग्य" का व्यंग्य questions
शीर्षक या व्यंग्य के प्रश्न का उत्तर इस प्रकार लिखिए।
- 1बालक की स्थिति संक्षेप में बताइए।
- 2लेखक, मित्र और वकील के व्यवहार को लिखिए।
- 3बालक की मृत्यु का उल्लेख कीजिए।
- 4लोगों के "अपना-अपना भाग्य" कहने का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
- 5व्यंग्य और संदेश के साथ उत्तर समाप्त कीजिए।
पहाड़ी बालक की मृत्यु और "अपना अपना भाग्य" का व्यंग्य in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
सर्दी की रात में स्टेशन
मान लीजिए रेलवे स्टेशन के बाहर एक बच्चा बिना गर्म कपड़ों के ठिठुर रहा है और कई यात्री उसे देखकर आगे बढ़ जाते हैं यह सोचकर कि कोई और मदद करेगा।
यह कहानी के किस भाव से मिलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- लोग देखते हैं पर सहायता नहीं करते।
- ज़िम्मेदारी दूसरों पर डाली जाती है।
- यही संवेदनहीनता है।
Answer: यह कहानी की संवेदनहीनता से मिलता है, जहाँ सब देखकर भी बालक की ठोस सहायता नहीं करते।
Memory hook: देखा, पर रुके नहीं।
Tricks to remember पहाड़ी बालक की मृत्यु और "अपना अपना भाग्य" का व्यंग्य
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
शाम-बालक-इनकार-सुबह
चार दृश्य: शाम, बालक, वकील का इनकार, सुबह की मृत्यु।
Use it when: कथा का क्रम।
नंगे पैर, मैली कमीज़
बालक की पहचान।
Use it when: वर्णन।
भाग्य का बहाना
ज़िम्मेदारी से बचना।
Use it when: व्यंग्य।
पहाड़ी बालक की मृत्यु और "अपना अपना भाग्य" का व्यंग्य: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: बालक की आयु · 1 mark · MCQBoard level
बालक की आयु कितनी थी?
(क) पाँच-छह वर्ष (ख) दस-बारह वर्ष (ग) अठारह वर्ष (घ) बीस वर्ष
Try it first, then show the solutionSolution
- आयु: दस-बारह वर्ष (1)।
Answer: (ख) दस-बारह वर्ष।
Example 2: बालक की स्थिति (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level
बालक की वेशभूषा और स्थिति का वर्णन कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- नंगे पैर, मैली कमीज़ (1)
- भूखा, बेघर (1)।
Answer: बालक दस-बारह वर्ष का था, नंगे पैर और नंगे सिर, मैली कमीज़ पहने। उसकी आँखें बड़ी पर सूनी थीं और वह भूखा तथा बेघर था।
Example 3: वकील साहब का इनकार (4 अंक) · 4 marks · Long answerHarder board level
वकील साहब ने बालक को नौकर रखने से क्यों इनकार किया?
Try it first, then show the solutionSolution
- नौकर चाहिए था (1)
- पहाड़ी बच्चे शैतान (1)
- सामान लेकर भाग सकता है (1)
- संदेह (1)।
Answer: वकील साहब को अपने होटल के लिए नौकर चाहिए था, पर उन्होंने कहा कि पहाड़ी बच्चे बड़े शैतान होते हैं और उनमें अवगुण छिपे रहते हैं। उन्हें डर था कि अनजान नौकर सामान लेकर भाग सकता है, इसलिए उन्होंने इनकार कर दिया।
Example 4: शीर्षक की सार्थकता (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level
"अपना अपना भाग्य" शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। (लगभग 80 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लोगों का कथन (2)
- व्यंग्य (2)
- निष्कर्ष (1)।
Answer: बालक की मृत्यु के बाद लोग सब कुछ भाग्य पर डालकर अपने काम में लग जाते हैं। वे यह नहीं सोचते कि रात में आश्रय या गर्म कपड़ा देकर उसे बचाया जा सकता था। लेखक और उनका मित्र भी सहानुभूति दिखाकर उसे ठंड में छोड़ आते हैं, और वकील साहब पूर्वाग्रह के कारण उसे नौकरी नहीं देते। इस प्रकार भाग्य अपनी निष्क्रियता और स्वार्थ को छिपाने का बहाना बन जाता है। शीर्षक इसी बहाने पर व्यंग्य है और समाज की संवेदनहीनता को उजागर करता है। अतः शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
Example 5: मूल्यांकन (4 अंक) · 4 marks · Long answerHOTS / competency
"लेखक और उसके मित्र भी बालक की मृत्यु के उत्तरदायी हैं।" इस पर अपना मत दो कारणों से लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- मत (1)
- सहानुभूति पर कर्म नहीं (1)
- वापस लौटना (1)
- निष्कर्ष (1)।
Answer: मैं कुछ हद तक सहमत हूँ। उन्होंने बालक की स्थिति देखी और सहानुभूति दिखाई, पर रात के लिए कोई ठोस सहायता किए बिना लौट आए। उनकी निष्क्रियता भी उस उदासीनता का हिस्सा है जिसने बालक को अकेला छोड़ दिया।
Where students lose marks in पहाड़ी बालक की मृत्यु और "अपना अपना भाग्य" का व्यंग्य
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: शीर्षक का व्यंग्य छोड़ना
केवल कथा लिखना।
Wrong working
बालक मर गया।
Right working
लोगों ने उसकी मृत्यु को भाग्य कहकर टाल दिया।
Do this: व्यंग्य स्पष्ट कीजिए।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: वकील साहब को पात्र न बताना
पात्र छूटना।
Wrong working
लेखक ने नौकरी नहीं दी।
Right working
वकील साहब ने नौकरी देने से मना किया।
Do this: पात्र पहचानिए।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: विषमता न बताना
मुख्य भाव छूटना।
Wrong working
बालक गरीब था।
Right working
बालक गरीब और बाकी सुविधासंपन्न।
Do this: तुलना कीजिए।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- शीर्षक के प्रश्न में व्यंग्य अवश्य लिखिए।
- बालक की आयु और वेशभूषा याद रखिए।
- वकील साहब का तर्क लिखिए।
- अंत का दृश्य संक्षेप में बताइए।
- संदेश में संवेदनशीलता का आग्रह जोड़िए।
Practice questions on पहाड़ी बालक की मृत्यु और "अपना अपना भाग्य" का व्यंग्य
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
कहानी किस स्थान पर घटित होती है?
(क) शिमला (ख) नैनीताल (ग) दिल्ली (घ) मसूरीHint
कहानी के आरंभिक वर्णन में बैठने के स्थान को याद कीजिए।
Answer
(ख) नैनीताल।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
बालक नैनीताल क्यों आया था? (2 अंक)
Hint
भूख और परिवार।
Answer
उसके घर में बहुत भाई-बहन थे और भूख रहती थी, इसलिए वह भागकर नैनीताल आ गया।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
बालक को दुकान पर काम के बदले क्या मिलता था? (3 अंक)
Hint
जूठा खाना।
Answer
दिन भर के काम के बदले उसे जूठा खाना और एक रुपया मिलता था।
Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level
अगली सुबह बालक के शव का वर्णन कीजिए। (3 अंक)
Hint
बर्फ़ की चादर।
Answer
वह सड़क किनारे पेड़ के नीचे ठंड से मरा पड़ा था, और उसके मुँह, छाती, मुट्ठियों और पैरों पर बर्फ़ की हल्की चादर चिपकी थी।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
कहानी में आर्थिक विषमता कैसे दिखती है? (3 अंक)
Hint
सैलानी और बालक।
Answer
एक ओर नैनीताल में घूमने आए सुविधासंपन्न लोग (लेखक, मित्र, वकील साहब) हैं, जिनके पास होटल, घर और गर्म कपड़े हैं; दूसरी ओर नंगे पैर, मैली कमीज़ वाला भूखा, बेघर बालक है, जिसे जूठा खाना और एक रुपया मिलता था। वह ठंड में मर जाता है और लोग उसे भाग्य कहकर टाल देते हैं।
Q6 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
क्या वकील साहब का संदेह उचित था? दो कारण देकर लिखिए। (4 अंक)
Hint
पूर्वाग्रह।
Answer
नहीं। वे बालक को जाने बिना सभी पहाड़ी बच्चों को शैतान कह देते हैं, जो पूर्वाग्रह है। और बालक की गरीबी और सहनशीलता से उसकी ईमानदारी का संकेत मिलता है, जिसे उन्होंने देखा ही नहीं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कहानी के लेखक?Show answer
जैनेंद्र कुमार।
2.स्थान?Show answer
नैनीताल।
3.बालक की आयु?Show answer
दस-बारह वर्ष।
4.वकील साहब ने क्या किया?Show answer
नौकरी देने से इनकार।
5.बालक का अंत?Show answer
ठंड से मृत्यु।
6.लोगों ने क्या कहा?Show answer
अपना-अपना भाग्य।
पहाड़ी बालक की मृत्यु और "अपना अपना भाग्य" का व्यंग्य: frequently asked questions
कहानी कहाँ संकलित है?
साहित्य सागर में।
कौन-सी कक्षा?
ICSE कक्षा 9।
क्या मूल पाठ उद्धृत है?
नहीं, कहानी के अंश उद्धृत नहीं किए गए; केवल सारांश दिया गया है।