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HindiCBSE Class 12 · शमशेर बहादुर सिंह – उषा

उषा (शमशेर बहादुर सिंह): उपमान, बिंब और गतिशील शब्द-चित्र (कक्षा 12)

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

'उषा' में सूर्योदय से ठीक पहले के आकाश का गतिशील शब्द-चित्र है। कवि ने गाँव की सुबह के उपमान चुने हैं: नीला शंख, राख से लीपा गीला चौका, केसर से धुली काली सिल, स्लेट पर मली लाल खड़िया, और नीले जल में झिलमिलाती गोरी देह। कोष्ठक '(अभी गीला पड़ा है)' ताज़गी पर ज़ोर देता है। अंत में 'जादू टूटता है' का अर्थ है कि सूर्योदय के साथ रंगों का पल-पल बदलता खेल समाप्त हो जाता है।

Understand उषा: उपमान, बिंब और गतिशील शब्द-चित्र

शमशेर बहादुर सिंह बिंबधर्मी कवि हैं: वे शब्दों से चित्र बनाते हैं। 'उषा' की पूरी कविता एक चलचित्र की तरह रंग बदलता दृश्य है।

पहला चित्र: 'प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे'। उपमा अलंकार है, 'जैसे' वाचक शब्द है। शंख के नीले-उजले रंग से आकाश के नीलेपन में छिपी उजली चमक का भाव आता है।

दूसरा चित्र: भोर का नभ 'राख से लीपा हुआ चौका' है, जो अभी गीला है। गीली राख का रंग धूसर-नीला होता है और उसमें नमी की ताज़गी होती है, जैसे ओस से भीगे आकाश में। यहाँ आकाश को ही चौका मान लिया गया है, इसलिए रूपक और दृश्य बिंब है। कोष्ठक '(अभी गीला पड़ा है)' इस ताज़गी और अभी-अभी की स्थिति पर बल देता है।

तीसरा चित्र: आकाश में हल्की लाली आती है। कवि कहता है मानो बहुत काली सिल ज़रा-से लाल केसर से धुल गई हो, या स्लेट पर किसी ने लाल खड़िया चाक मल दी हो। यहाँ 'कि जैसे' के साथ संभावना है, इसलिए उत्प्रेक्षा। सिल और स्लेट गाँव के घरों की परिचित चीज़ें हैं: मसाला पीसने की सिल और बच्चों की स्लेट।

चौथा चित्र: पहली किरणों के समय नीले आकाश रूपी जल में किसी की गोरी, झिलमिलाती देह हिल रही है। नीला आकाश जल है और काँपती सुनहरी आभा गोरी देह जैसी।

अंत: 'और...' के विराम के बाद कवि कहता है कि अब उषा का जादू टूट रहा है, सूर्योदय हो रहा है। उषा के समय रंगों का जो पल-पल बदलता खेल था, वह सूरज के पूरे निकल आने पर समाप्त हो जाता है।

विशेषताएँ: उपमान गाँव के घरेलू जीवन से लिए गए हैं, इससे आकाश धरती के जीवन से जुड़ता है; कविता मुक्त छंद में है और कोष्ठक, बिंदु (...) तथा पंक्तियों के बीच की खाली जगह से भी अर्थ बनता है। यह नई कविता के शिल्प का उदाहरण है।

उषा: उपमान, बिंब और गतिशील शब्द-चित्र: key facts

उपमान और उनके भाव
  • नीला शंख = नीलेपन में उजली चमक
  • राख से लीपा गीला चौका = धूसर-नीला, ताज़ा, नम आकाश
  • केसर से धुली काली सिल = अँधेरे में पहली लाली
  • स्लेट पर लाल खड़िया = लाली का फैलना
  • नीले जल में गोरी देह = झिलमिलाती किरणें
हर उपमान के साथ उसका भाव लिखें।
अलंकार
  • नीला शंख जैसे = उपमा
  • काली सिल कि जैसे धुल गई हो = उत्प्रेक्षा
  • राख से लीपा चौका = रूपक और दृश्य बिंब
'जैसे' के साथ संभावना हो तो उत्प्रेक्षा पर भी विचार करें।
कविता का क्रम
  • नीला शंख
  • गीला चौका
  • काली सिल पर केसर
  • स्लेट पर लाल चाक
  • नीले जल में गोरी देह
  • जादू टूटना
क्रम से रंग का परिवर्तन समझाएँ।

उषा: उपमान, बिंब और गतिशील शब्द-चित्र in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

रोज़मर्रा की चीज़ों से तुलना

मान लीजिए आपका छोटा भाई शाम के आकाश की लाली देखकर कहता है, 'आकाश पर किसी ने पूरे आसमान की स्लेट पर लाल चाक घिस दी है।'

इस उपमान की तुलना 'उषा' के किस उपमान से होगी और यह किस प्रकार के उपमान हैं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. स्लेट-चाक का उपमान 'स्लेट पर लाल खड़िया चाक' से मेल खाता है।
  2. दोनों घरेलू और बाल-जीवन के उपमान हैं।

Answer: 'स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने'; घरेलू जीवन के परिचित उपमान।

Memory hook: आसमान की बात, घर की चीज़ से।

क्षणभंगुर सौंदर्य

मान लीजिए आप छत पर चढ़कर सूर्योदय की सुंदर लाली देखते हैं, पर कुछ मिनट बाद ही सूरज निकल आता है और आसमान साधारण दिन के रंग में बदल जाता है।

यह स्थिति कविता की किस पंक्ति से मेल खाती है और क्यों?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रंगों का पल-पल बदलना और फिर समाप्त होना।
  2. कवि इसे जादू का टूटना कहता है।

Answer: 'जादू टूटता है इस उषा का अब'; सूर्योदय के साथ उषा के रंगों का खेल समाप्त हो जाता है।

Memory hook: सूरज पूरा निकला, जादू गया।

Tricks to remember उषा: उपमान, बिंब और गतिशील शब्द-चित्र

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • शं-चौ-सि-स्ले-दे

    शंख, चौका, सिल, स्लेट, देह: पाँचों उपमानों के पहले अक्षर।

    Use it when: उपमानों की सूची याद रखने के लिए।

  • रंग का सफ़र

    नीला → धूसर-नीला → काला पर केसर → लाल → सुनहला: रंगों का क्रम याद रखें।

    Use it when: गतिशील चित्र की व्याख्या में।

उषा: उपमान, बिंब और गतिशील शब्द-चित्र: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: उपमा की पहचान · 1 mark · MCQBoard level

'प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे' में कौन-सा अलंकार है?
(क) रूपक
(ख) उपमा
(ग) यमक
(घ) श्लेष

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'जैसे' वाचक शब्द है।
  2. आकाश की तुलना शंख से है।

Answer: (ख) उपमा; 'जैसे' के साथ आकाश की तुलना शंख से की गई है।

Example 2: कोष्ठक का प्रयोग · 2 marks · Short answerHarder board level

कविता में '(अभी गीला पड़ा है)' कोष्ठक का क्या प्रयोजन है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. चौके की नमी का संकेत।
  2. आकाश की ताज़गी और अभी-अभी की स्थिति पर बल।

Answer: कोष्ठक का प्रयोग इस बात पर ज़ोर देता है कि राख से लीपा चौका अभी गीला है। इससे भोर के आकाश की नमी, ताज़गी और अभी-अभी की स्थिति का अनुभव होता है, मानो पाठक उस दृश्य को ठीक उसी क्षण देख रहा हो।

Example 3: घरेलू उपमानों की सार्थकता · 3 marks · Long answerHarder board level

कवि ने आकाश के चित्रण के लिए गाँव के घरेलू उपमान क्यों चुने? दो उपमानों के उदाहरण सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. उद्देश्य: आकाश को धरती के जीवन से जोड़ना।
  2. उदाहरण: राख से लीपा चौका, केसर से धुली सिल या स्लेट पर चाक।
  3. प्रभाव: परिचित, जीवंत चित्र।

Answer: कवि ने आकाश के दृश्य को धरती के जीवन से जोड़ने के लिए घरेलू उपमान चुने। राख से लीपा गीला चौका भोर के धूसर-नीले, नम आकाश का बिंब देता है और केसर से धुली काली सिल या स्लेट पर मली लाल खड़िया अँधेरे में फैलती लाली को दिखाती है। ये उपमान परिचित होने के कारण दृश्य को सजीव और अपना-सा बनाते हैं।

Example 4: जादू टूटना · 3 marks · Long answerHarder board level

'जादू टूटता है इस उषा का अब' का आशय स्पष्ट कीजिए। इसमें 'और...' के विराम की क्या भूमिका है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. जादू = रंगों का बदलता खेल।
  2. टूटना = सूर्योदय के साथ समाप्ति।
  3. विराम = प्रतीक्षा और अचानक परिवर्तन।

Answer: इसका आशय है कि उषा के समय आकाश के रंग पल-पल बदलते हुए जादू जैसा दृश्य रचते हैं, पर सूरज के पूरे निकलते ही वह मोहक खेल समाप्त हो जाता है। 'और...' के बाद का विराम पाठक को क्षण भर रोककर उस अंतिम परिवर्तन के लिए तैयार करता है, जिससे सूर्योदय का आगमन अधिक प्रभावी लगता है।

Example 5: गतिशील चित्र · 3 marks · Long answerHOTS / competency

कुछ पाठक कहते हैं कि 'उषा' केवल प्रकृति-वर्णन है, उसमें कोई गहरी बात नहीं। क्या आप सहमत हैं? कविता के दो प्रमाणों से तर्क दीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रकृति और घरेलू जीवन का मेल।
  2. सौंदर्य की क्षणभंगुरता।
  3. नई कविता का शिल्प।

Answer: मैं पूरी तरह सहमत नहीं हूँ। कविता आकाश के रंगों को चौके, सिल और स्लेट जैसे घरेलू उपमानों से जोड़कर प्रकृति और मनुष्य के जीवन का मेल दिखाती है। अंत में 'जादू टूटता है' से सुंदर क्षणों की क्षणभंगुरता का संकेत मिलता है। इसलिए यह केवल वर्णन नहीं, एक सघन और गतिशील शब्द-चित्र है जिसमें अर्थ की परतें हैं।

Where students lose marks in उषा: उपमान, बिंब और गतिशील शब्द-चित्र

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: उपमान और उपमेय उलट देना

    आकाश उपमेय है; शंख, चौका, सिल आदि उपमान हैं।

    Wrong working

    चौके की तुलना आकाश से की गई है।

    Right working

    आकाश की तुलना या उसे चौका मान लिया गया है।

    Do this: 'किसे किससे' पूछकर लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: उपमा और उत्प्रेक्षा को एक मान लेना

    'शंख जैसे' में तुलना है; 'सिल... कि जैसे धुल गई हो' में संभावना है।

    Do this: वाक्य की भावना देखें: तुलना या कल्पना।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: उपमानों के भाव न लिखना

    उपमान गिनाने से अधिक उनका भाव लिखना ज़रूरी है।

    Do this: हर उपमान के बाद 'इससे... का भाव' लिखें।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: कोष्ठक और विराम की अनदेखी

    ये शिल्प के अंग हैं और अर्थ में योगदान देते हैं।

    Do this: कोष्ठक का प्रयोजन अलग से एक वाक्य में लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • पाँचों उपमान और उनके भाव अलग-अलग याद रखें।
  • अलंकार के प्रश्न में वाचक शब्द और भाव दोनों का उल्लेख करें।
  • कोष्ठक और 'और...' के विराम पर एक-एक वाक्य लिखने का अभ्यास करें।
  • 'जादू टूटना' का अर्थ क्षणभंगुर सौंदर्य से जोड़कर लिखें।
  • घरेलू उपमानों की सार्थकता वाला प्रश्न बार-बार पूछे जाने योग्य है, इसलिए इसका अभ्यास अवश्य करें।

Practice questions on उषा: उपमान, बिंब और गतिशील शब्द-चित्र

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    'राख से लीपा हुआ चौका' में आकाश को क्या मान लिया गया है?
    (क) आकाश को चौका
    (ख) चौके को आकाश
    (ग) आकाश को राख
    (घ) राख को बादल

    Hint

    उपमेय आकाश है।

    Answer

    (क) आकाश को ही चौका मान लिया गया है; रूपक और दृश्य बिंब।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    'स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने' से आकाश के किस रूप का संकेत मिलता है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    काले से लाल होता आकाश।

    Answer

    इस उपमान से अँधेरे आकाश पर फैलती हल्की लाली का संकेत मिलता है, जैसे काली स्लेट पर किसी ने लाल चाक मल दी हो। यह बाल-जीवन के परिचित उपमान से बना दृश्य बिंब है।

  3. Q3 · 3 marks · Long answerHarder board level

    'नील जल में या किसी की गौर झिलमिल देह जैसे हिल रही हो' पंक्ति में कौन-सा बिंब है? इसका प्रभाव क्या है? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    नीला जल, गोरी झिलमिलाती देह।

    Answer

    इस पंक्ति में रंग-बिंब और गति का बिंब है। नीला आकाश जल जैसा और उसमें काँपती सुनहरी-गोरी आभा किसी की झिलमिलाती देह जैसी लगती है। इससे पहली किरणों की कोमलता, चंचलता और सुंदरता का सजीव चित्र बनता है, और आकाश में बहती रोशनी का एहसास होता है।

  4. Q4 · 3 marks · Long answerHarder board level

    'उषा' को गतिशील शब्द-चित्र क्यों कहा जाता है? कविता के क्रम को आधार बनाकर लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    रंग और रोशनी का क्रमिक परिवर्तन।

    Answer

    कविता में आकाश का चित्र स्थिर नहीं है। आरंभ में वह नीले शंख जैसा है, फिर राख से लीपे गीले चौके जैसा, फिर केसर से धुली काली सिल और स्लेट पर लाल चाक जैसा, और अंत में नीले जल में झिलमिलाती देह जैसा। हर पंक्ति के साथ रंग और रोशनी बदलती है और अंत में सूर्योदय के साथ जादू टूट जाता है, इसलिए यह गतिशील चित्र है।

  5. Q5 · 3 marks · Long answerHOTS / competency

    यदि कवि आकाश की तुलना किसी राजमहल या हीरे-मोती जैसी चीज़ों से करता, तो कविता का भाव कैसे बदल जाता? अपना मत तर्क सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    घरेलू उपमानों की आत्मीयता।

    Answer

    तब कविता की सहजता और आत्मीयता कम हो जाती। चौका, सिल और स्लेट जैसे परिचित उपमान आकाश को गाँव के घर-आँगन की हलचल से जोड़ते हैं और सुबह की सहज ताज़गी का अनुभव कराते हैं। राजमहल या हीरे-मोती जैसे उपमान भव्य तो लगते, पर वे आम जीवन से दूर होते और कविता का धरती से जुड़ाव कमज़ोर पड़ जाता।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.'उषा' के कवि कौन हैं?Show answer

    शमशेर बहादुर सिंह।

  2. 2.भोर का नभ किसके समान बताया गया है?Show answer

    नीले शंख और राख से लीपे गीले चौके के।

  3. 3.काली सिल किससे धुली बताई गई है?Show answer

    ज़रा-से लाल केसर से।

  4. 4.कोष्ठक में क्या लिखा है?Show answer

    'अभी गीला पड़ा है'।

  5. 5.कविता का अंत किस पंक्ति से होता है?Show answer

    जादू टूटता है इस उषा का अब; सूर्योदय हो रहा है।

उषा: उपमान, बिंब और गतिशील शब्द-चित्र: frequently asked questions

उषा कविता किस छंद में है?

मुक्त छंद में।

'उषा' में प्रमुख बिंब कौन-से हैं?

दृश्य और रंग-बिंब, जैसे नीला शंख, गीला चौका, केसर से धुली सिल, स्लेट पर लाल चाक और झिलमिलाती देह।

यह कविता किस काव्य-धारा की मानी जाती है?

नई कविता के शिल्प का उदाहरण, जहाँ नए उपमान और कोष्ठक-विराम जैसे प्रयोग हैं।

इस कविता से बोर्ड में क्या पूछा जाता है?

काव्यांश पर MCQ, तथा उपमान-बिंब, कोष्ठक और 'जादू टूटने' के अर्थ पर 2-3 अंक के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।