शिरीष के फूल (हजारी प्रसाद द्विवेदी): कालजयी अवधूत और गतिशीलता (कक्षा 12)
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
द्विवेदी जी शिरीष को 'कालजयी अवधूत' कहते हैं क्योंकि जेठ की जलती धूप, लू और उमस में भी वह फूलों से लदा रहता है और जीवन की अजेयता का मंत्र देता है। उसके पुराने फल नए आने पर भी डाल नहीं छोड़ते, जिसे लेखक कुर्सी से चिपके नेताओं से जोड़कर 'जमे कि मरे' का संदेश देते हैं: जो जड़ होकर जमे रहते हैं वे मरते हैं, गतिशील रहने वाले बच सकते हैं। अंत में वे गांधीजी जैसे अवधूत को याद करते हैं।
Understand शिरीष: कालजयी अवधूत और 'जमे कि मरे' की गतिशीलता
यह ललित निबंध एक साधारण फूल से शुरू होकर इतिहास, साहित्य और समकालीन समाज तक पहुँचता है। इसके विचार तीन स्तरों पर समझिए।
1. शिरीष की विशेषता। जेठ में धरती आग की भट्ठी बनी हुई है, फिर भी शिरीष ऊपर से नीचे तक फूलों से लदा है। अमलतास भी फूलता है, पर पंद्रह-बीस दिन, पलाश की तरह; कबीर को ऐसा थोड़े दिन का खिलना पसंद नहीं था। शिरीष वसंत से आषाढ़ और कभी भादों तक फूलता रहता है। लू-धूप में भी वायुमंडल से रस खींचकर कोमल केसर उगाने वाला यह पेड़ सुख-दुख में हार न मानने वाला अवधूत है।
2. बाहरी कोमलता, भीतरी कठोरता। संस्कृत साहित्य में शिरीष का फूल बहुत कोमल माना गया (कालिदास के अनुसार वह भौंरों के पैरों का दबाव सह सकता है, पक्षियों का नहीं), पर उसके फल इतने मज़बूत हैं कि नए फूल-पत्ते आने पर भी डाल नहीं छोड़ते और खड़खड़ाते रहते हैं, जब तक नए फल-पत्ते उन्हें धकेल नहीं देते। लेखक को इनमें वे नेता याद आते हैं जो समय का रुख नहीं पहचानते और कुर्सी से चिपके रहते हैं।
3. काल और गतिशीलता। बुढ़ापा और मृत्यु अटल हैं; तुलसी ने कहा था कि जो फला वह झड़ा। काल-देवता लगातार कोड़े चला रहा है। जो जड़ होकर एक जगह जमे रहते हैं वे मरते हैं, जो हिलते-डुलते, स्थान बदलते और आगे की ओर मुँह किए रहते हैं, वे कोड़ों की मार से बच भी सकते हैं: 'जमे कि मरे!'
कवि और अनासक्ति। लेखक के अनुसार कबीर और कालिदास जैसे कवि मस्त, अनासक्त और फक्कड़ थे; जो कवि हिसाब-किताब में उलझा, वह कवि नहीं। सच्चे कवि में योगी की स्थिर-प्रज्ञता और प्रेमी का हृदय दोनों होते हैं। कालिदास इसीलिए सौंदर्य के भीतर तक पहुँचे; शकुंतला का चित्र तब तक अधूरा लगा जब तक उसके कानों में शिरीष का फूल नहीं बनाया गया। पंत और रवींद्रनाथ में भी यह अनासक्ति थी: फूल या पेड़ अपने में समाप्त नहीं, वह किसी अन्य वस्तु को दिखाने के लिए उठी हुई अँगुली है।
गांधीजी। अंत में लेखक सोचते हैं कि जैसे शिरीष धूप-लू में स्थिर है, वैसे ही देश में मार-काट और हिंसा के बीच एक बूढ़ा (गांधीजी) भी स्थिर रह सका, क्योंकि वह भी अवधूत था, कोमल भी और कठोर भी। इसीलिए मन में हूक उठती है: वह अवधूत आज कहाँ है!
शिरीष: कालजयी अवधूत और 'जमे कि मरे' की गतिशीलता: key facts
- शिरीष के प्रतीक
- शिरीष = अवधूत और जिजीविषा
- कोमल फूल, कठोर फल = हृदय की कोमलता, व्यवहार की कठोरता
- पुराने फल = कुर्सी से चिपके नेता
- काल का कोड़ा = समय की मार
- प्रतीकार्थ वाले प्रश्न में यही तालिका लिखें।
- अमलतास, पलाश और शिरीष
- अमलतास, पलाश: पंद्रह-बीस दिन के फूल | शिरीष: वसंत से आषाढ़-भादों तक
- तुलना में कबीर का उल्लेख करें।
- सच्चे कवि के गुण
- अनासक्ति
- फक्कड़पन
- योगी की स्थिरता
- प्रेमी का हृदय
- सौंदर्य के भीतर तक पहुँचना
- उदाहरण: कबीर, कालिदास, पंत, रवींद्रनाथ।
शिरीष: कालजयी अवधूत और 'जमे कि मरे' की गतिशीलता in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
समय के साथ बदलना
मान लीजिए किसी दुकान का पुराना मालिक नई तकनीक अपनाने से इनकार करता है और कहता है कि 'जैसे चलता आया है, वैसे ही चलेगा', जबकि आसपास की दुकानें डिजिटल भुगतान अपना लेती हैं और उसके ग्राहक घटते जाते हैं।
इसे 'जमे कि मरे' के संदर्भ में समझाइए।
Try it first, then show the solutionSolution
- एक ही जगह जमे रहना = पुराने फलों का डाल से चिपके रहना।
- बदलते समय को न पहचानना = काल के कोड़ों की अनदेखी।
- ग्राहकों का घटना = जड़ता का परिणाम।
Answer: मालिक जड़ बना रहा, इसलिए पिछड़ गया; गतिशील रहने वाले आगे बढ़े। यही 'जमे कि मरे' का भाव है।
Memory hook: बदलो, वरना बीतो।
बाहर कोमल, भीतर दृढ़
मान लीजिए एक शिक्षिका बच्चों से बहुत कोमलता से बोलती हैं, पर अनुशासन के सिद्धांतों पर अडिग रहती हैं।
इस स्वभाव की तुलना शिरीष से कैसे होगी?
Try it first, then show the solutionSolution
- कोमल वाणी = कोमल फूल।
- अडिग सिद्धांत = मज़बूत फल।
Answer: शिरीष की तरह उनमें कोमलता और दृढ़ता का संतुलन है।
Memory hook: फूल-सा मन, फल-सी दृढ़ता।
Tricks to remember शिरीष: कालजयी अवधूत और 'जमे कि मरे' की गतिशीलता
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
शिरीष के तीन गुण
अजेय (लू में भी फूलना), अनासक्त (वायुमंडल से रस), अडिग (बाहर कोमल फूल, भीतर दृढ़ता: मज़बूत फल जो डाल नहीं छोड़ते): तीन 'अ'।
Use it when: कालजयी अवधूत की व्याख्या में।
जमे कि मरे का सूत्र
हिलो, बदलो, आगे देखो: तीन क्रियाएँ गतिशीलता की।
Use it when: संदेश वाले प्रश्न में।
शिरीष: कालजयी अवधूत और 'जमे कि मरे' की गतिशीलता: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: शिरीष के फूलने की अवधि · 1 mark · MCQBoard level
लेखक के अनुसार शिरीष कब तक फूलता रहता है?
(क) केवल पंद्रह-बीस दिन
(ख) वसंत से आषाढ़ तक और कभी भादों तक
(ग) केवल सावन में
(घ) केवल सर्दियों में
Try it first, then show the solutionSolution
- अमलतास और पलाश पंद्रह-बीस दिन फूलते हैं।
- शिरीष वसंत से आषाढ़ तक और कभी भादों तक फूलता है।
Answer: (ख) वसंत से आषाढ़ तक और कभी भादों तक।
Example 2: जमे कि मरे · 2 marks · Short answerHarder board level
'जमे कि मरे!' कथन का आशय स्पष्ट कीजिए (लगभग 40 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- काल निरंतर कोड़े चलाता है।
- जो जड़ रहते हैं, वे नष्ट होते हैं।
- गतिशील रहने वाले बच सकते हैं।
Answer: इसका आशय है कि समय निरंतर सब पर प्रहार करता है। जो लोग एक ही स्थान पर जमे रहते हैं और बदलते समय के साथ नहीं चलते, वे नष्ट हो जाते हैं; जो गतिशील रहते हैं और आगे की ओर देखते हैं, वे बच सकते हैं।
Example 3: कालजयी अवधूत क्यों · 3 marks · Long answerHarder board level
लेखक ने शिरीष को 'कालजयी अवधूत' क्यों कहा है? तीन कारण पाठ के प्रमाण सहित लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- लू और जलती धूप में फूलना।
- सुख-दुख में अनासक्त रहना।
- वसंत से भादों तक लंबे समय तक टिकना।
Answer: शिरीष जेठ की जलती धूप और लू में भी फूलों से लदा रहता है, इसलिए वह अजेय है। वह वायुमंडल से रस खींचकर कोमल केसर उगाता है, यानी सुख-दुख में अनासक्त रहता है। वह वसंत से आषाढ़ और कभी भादों तक फूलता है, जबकि अमलतास और पलाश थोड़े दिन खिलते हैं। इन गुणों से वह जीवन की अजेयता का मंत्र देने वाला कालजयी अवधूत है।
Example 4: पुराने फल और नेता · 3 marks · Long answerHarder board level
शिरीष के पुराने फलों की तुलना लेखक ने किससे की है? इस तुलना के माध्यम से वे क्या संदेश देते हैं? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- फल नए फूल-पत्ते आने पर भी डाल नहीं छोड़ते।
- तुलना: कुर्सी से चिपके, समय का रुख न पहचानने वाले नेता।
- संदेश: बदलाव स्वीकार करो, नई पीढ़ी को जगह दो।
Answer: शिरीष के पुराने फल नए फूल-पत्ते आने पर भी डाल नहीं छोड़ते और खड़खड़ाते रहते हैं। लेखक उनकी तुलना उन नेताओं से करते हैं जो समय का रुख न पहचानकर कुर्सी से चिपके रहते हैं। संदेश यह है कि बदलते समय को स्वीकार करना चाहिए और नई पीढ़ी के लिए स्थान छोड़ना चाहिए, वरना जड़ता का दंड काल देता है।
Example 5: गांधीजी और शिरीष · 3 marks · Long answerHOTS / competency
लेखक ने निबंध के अंत में गांधीजी को शिरीष से क्यों जोड़ा? क्या यह जोड़ाव उचित है? अपना मत तर्क सहित लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- समानता: धूप-लू में स्थिर शिरीष; मार-काट के बीच स्थिर बूढ़ा।
- दोनों कोमल भी, कठोर भी।
- निष्कर्ष: जोड़ाव उचित, क्योंकि अवधूत का अर्थ अनासक्त स्थिरता है।
Answer: लेखक ने गांधीजी को शिरीष से इसलिए जोड़ा कि जैसे शिरीष लू और धूप में स्थिर रहता है, वैसे ही गांधीजी देश में मार-काट के बीच स्थिर रहे। दोनों कोमल और कठोर का संतुलन रखते हैं, अनासक्त हैं और जीवन की अजेयता का संदेश देते हैं। इसलिए यह जोड़ाव उचित है; यह निबंध के 'अवधूत' विचार का स्वाभाविक विस्तार है।
Where students lose marks in शिरीष: कालजयी अवधूत और 'जमे कि मरे' की गतिशीलता
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: शिरीष को केवल कोमल फूल बता देना
लेखक के अनुसार फूल कोमल है, पर फल बहुत मज़बूत और जड़ हैं।
Wrong working
शिरीष हर तरह से कोमल है।
Right working
शिरीष का फूल कोमल है, पर फल मज़बूत होते हैं और नए फूल आने पर भी डाल नहीं छोड़ते।
Do this: फूल और फल का अंतर लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'जमे कि मरे' को केवल एक शारीरिक गति मानना
यह जड़ता बनाम बदलाव की सोच का प्रतीक है।
Do this: 'बदलते समय के साथ चलना' शब्द प्रयोग करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: गांधीजी वाले प्रसंग को निबंध से अलग मान लेना
यह अवधूत के विचार का समकालीन उदाहरण है।
Do this: शिरीष और गांधीजी की समानता लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: अमलतास और पलाश को शिरीष जैसा बताना
वे केवल पंद्रह-बीस दिन फूलते हैं; शिरीष बहुत लंबे समय तक।
Do this: अवधि की तुलना जरूर करें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- प्रतीकार्थ के प्रश्न में प्रतीक का नाम, पाठ का प्रमाण और जीवन से संबंध तीनों लिखें।
- 'जमे कि मरे' का उत्तर लिखते समय पुराने फल और नेताओं का प्रसंग जोड़ें।
- कवि के गुण वाले प्रश्न में कबीर और कालिदास के उदाहरण दें।
- निबंध के अंत (गांधीजी) को छोड़ें नहीं; उसका प्रश्न अक्सर आता है।
- शैली के उत्तर में ललित निबंध, तत्सम शब्द, उद्धरण और विनोद का उल्लेख करें।
Practice questions on शिरीष: कालजयी अवधूत और 'जमे कि मरे' की गतिशीलता
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
लेखक ने कबीर को शिरीष के संदर्भ में किस कारण याद किया?
(क) कबीर को पलाश पसंद था
(ख) कबीर को थोड़े दिन का खिलना पसंद नहीं था, अनासक्त मस्ती पसंद थी
(ग) कबीर ने शिरीष लगाया था
(घ) कबीर शिरीष को कोमल मानते थेHint
पलाश और अमलतास का फूलना कितने दिन का है?
Answer
(ख) कबीर को थोड़े दिन का खिलना पसंद नहीं था; वे अनासक्त और मस्त कवि थे।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
कालिदास ने शिरीष के फूल की कोमलता के बारे में क्या कहा और बाद के कवियों ने क्या भूल की? (लगभग 40 शब्द)
Hint
भौंरों के पैरों का दबाव बनाम पक्षियों का।
Answer
कालिदास ने कहा कि शिरीष का फूल भौंरों के पैरों का दबाव तो सह सकता है, पक्षियों का नहीं। पर बाद के कवियों ने भूल से उसका सब कुछ कोमल मान लिया, जबकि उसके फल बहुत मज़बूत होते हैं।
Q3 · 3 marks · Long answerHarder board level
'कवि बनना है मेरे दोस्तो, तो फक्कड़ बनो' का आशय स्पष्ट कीजिए। लेखक किन कवियों का उदाहरण देते हैं और क्यों? (लगभग 60 शब्द)
Hint
अनासक्ति और लेखा-जोखा।
Answer
इसका आशय है कि सच्चा कवि अनासक्त, मस्त और हिसाब-किताब से दूर होना चाहिए। लेखक कबीर और कालिदास का उदाहरण देते हैं, जो मस्त और फक्कड़ थे, और कहते हैं कि जो कवि लेखा-जोखा मिलाने में उलझ गया वह कवि नहीं। कालिदास में योगी की स्थिर-प्रज्ञता और प्रेमी का हृदय दोनों थे।
Q4 · 3 marks · Long answerHarder board level
'फूल हो या पेड़, वह किसी अन्य वस्तु को दिखाने के लिए उठी हुई अँगुली है' का आशय पाठ के संदर्भ में लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
रवींद्रनाथ के सिंहद्वार वाले कथन से संबंध; अनासक्ति।
Answer
इसका आशय है कि फूल या पेड़ अपने आप में लक्ष्य नहीं, बल्कि किसी बड़े सत्य की ओर संकेत करते हैं। लेखक के अनुसार अनासक्त कवि सौंदर्य में डूबकर रुकता नहीं, उसे जीवन के गहरे अर्थ का इशारा मानता है। शिरीष का अजेय फूलना भी जीवन की अजेयता की ओर इशारा करने वाली अँगुली है।
Q5 · 3 marks · Long answerHOTS / competency
यदि शिरीष के फल भी दूसरे वृक्षों की तरह समय पर झड़ जाते, तो निबंध का कौन-सा संदेश कमज़ोर पड़ जाता? कारण सहित अपना मत लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
पुराने फलों की तुलना नेताओं से।
Answer
तब पुराने फलों और कुर्सी से चिपके नेताओं की तुलना न बन पाती, और जड़ता बनाम गतिशीलता वाला संदेश कमज़ोर पड़ जाता। शिरीष के फलों का नए फूल-पत्तों के आने पर भी डाल से चिपके रहना ही लेखक को समय के साथ न चलने वालों की याद दिलाता है। इसलिए यह प्रसंग 'जमे कि मरे' के संदेश की जड़ है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.शिरीष किस ऋतु में फूलों से लदा रहता है?Show answer
जेठ की जलती गरमी और लू में भी।
2.लेखक ने शिरीष को क्या कहा है?Show answer
कालजयी अवधूत।
3.'जमे कि मरे' किसके संदर्भ में कहा गया?Show answer
काल-देवता के कोड़ों से बचने के उपाय के संदर्भ में।
4.शिरीष के कौन-से अंग मज़बूत हैं?Show answer
उसके फल, जो नए फूल आने पर भी डाल नहीं छोड़ते।
5.निबंध किस संग्रह से लिया गया है?Show answer
'कल्पलता' से।
शिरीष: कालजयी अवधूत और 'जमे कि मरे' की गतिशीलता: frequently asked questions
'शिरीष के फूल' किस प्रकार का निबंध है?
ललित निबंध।
अवधूत का क्या अर्थ है?
पाठ में अवधूत सुख-दुख में अनासक्त और अविचल रहने वाला मस्त व्यक्ति है।
निबंध का मुख्य संदेश क्या है?
विपरीत परिस्थितियों में अनासक्त और अजेय रहना, तथा जड़ता छोड़कर गतिशील बने रहना।
इस पाठ से बोर्ड में क्या पूछा जाता है?
गद्यांश पर 5 MCQ, कालजयी अवधूत, 'जमे कि मरे', फक्कड़ कवि और गांधीजी पर 2-3 अंक के प्रश्न।