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HindiCBSE Class 12 · फणीश्वर नाथ रेणु – पहलवान की ढोलक

पहलवान की ढोलक (रेणु): ढोल के बोल और ढोलक की संजीवनी शक्ति (कक्षा 12)

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

इस कहानी में ढोल दो भूमिकाएँ निभाता है: कुश्ती में उसकी हर ताल लुट्टन को दाँव-पेंच का निर्देश देती है (इसलिए वह कहता है, 'मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है'), और महामारी की रातों में उसकी आवाज़ मरते गाँव में 'संजीवनी शक्ति' भरती है, यद्यपि वह बीमारी का इलाज नहीं कर सकती। कथा का संदेश है कि कला जीवन को साहस और अर्थ देती है, पर बदली हुई व्यवस्था में लोक-कलाकार उपेक्षित हो जाता है।

Understand ढोल के बोल और ढोलक की संजीवनी शक्ति

कहानी में ढोल के तीन स्तर हैं।

1. गुरु के रूप में ढोल। श्यामनगर के दंगल में लुट्टन ने 'शेर के बच्चे' चाँद सिंह को चुनौती दी। सारी भीड़ चाँद सिंह के पक्ष में थी, पर लुट्टन के साथ ढोल था। ढोल के हर बोल को वह निर्देश की तरह सुनता रहा: जैसे 'धाक-धिना, तिरकट-तिना' का आशय है दाँव काटकर बाहर निकल जाओ, 'चटाक्-चट्-धा' का आशय है उठाकर पटक दे, और 'धिना-धिना, धिक-धिना' का आशय है चित करो। जीतकर उसने सबसे पहले ढोलों को प्रणाम किया। इसी कारण वह बेटों से कहता था कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है।

2. संजीवनी के रूप में ढोलक। कहानी जाड़े की अमावस्या की रात से शुरू होती है। मलेरिया और हैज़े से त्रस्त गाँव भयार्त्त शिशु की तरह काँप रहा है। रात भर कराहने, रोने और कुत्तों के क्रंदन के बीच केवल पहलवान की ढोलक उस विभीषिका को चुनौती देती है। लेखक कहता है कि ढोलक बीमारी नहीं रोक सकती थी, पर उसकी आवाज़ से बूढ़े-बच्चे-जवानों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता था और वे मृत्यु का भय छोड़ देते थे।

3. कला के अस्तित्व का प्रश्न। राजा साहब कला के कद्रदान थे। उनकी मृत्यु के बाद विलायत से लौटे राजकुमार ने दंगल की जगह घोड़ों की रेस शुरू की और पहलवानों का खर्च सुनकर उन्हें निकाल दिया। गाँव में भूखे किसान-बच्चे कुश्ती नहीं सीख सकते थे, इसलिए अखाड़ा खाली हो गया। यह पुरानी लोक-कला की उपेक्षा का चित्र है।

अंत में लुट्टन बेटों को खोकर भी उसी रात ढोलक बजाता है, फिर अपनी मृत्यु के बाद चिता पर पेट के बल लिटाए जाने की इच्छा रखता है, क्योंकि वह जीवन में कभी चित नहीं हुआ। ध्वन्यात्मक शब्द, मानवीकरण (अँधेरी रात का चुपचाप आँसू बहाना) और लोक-बोली की भाषा कहानी को संगीतमय बनाते हैं।

ढोल के बोल और ढोलक की संजीवनी शक्ति: key facts

ढोल की तीन भूमिकाएँ
गुरुदाँव-पेंच का निर्देश
संजीवनीमरते गाँव में साहस
साथीलुट्टन की पहचान और कृतज्ञता
'ढोल' से जुड़े हर प्रश्न में इनमें से दो भूमिकाएँ लिखें।
ध्वन्यात्मक बोल
  • धाक-धिना, तिरकट-तिना = दाँव काटकर बाहर निकल जाओ
  • चटाक्-चट्-धा = उठाकर पटक दे
  • धिना-धिना, धिक-धिना = चित करो
इन बोलों के अर्थ पाठ में दाँव-पेंच से जुड़े हैं।
लुट्टन के जीवन के मोड़
  • नौ वर्ष में अनाथ
  • दंगल की जीत और राज-पहलवान
  • राजा की मृत्यु और निष्कासन
  • बेटों की मृत्यु
  • अपनी मृत्यु
क्रम से लिखने पर चरित्र-चित्रण के प्रश्न में आसानी रहती है।

ढोल के बोल और ढोलक की संजीवनी शक्ति in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

कला का सहारा संकट में

मान लीजिए किसी बाढ़-पीड़ित गाँव के राहत शिविर में लोग निराश बैठे हैं, तभी एक वृद्ध शाम को ढोलक पर लोकगीत की धुन छेड़ देता है, और धीरे-धीरे लोग एक साथ गाने लगते हैं।

यह स्थिति कहानी की किस बात से मेल खाती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. संकट में निराशा = मरता हुआ गाँव।
  2. ढोलक की धुन से हौसला = संजीवनी शक्ति।
  3. संगीत ने इलाज नहीं किया, पर साहस दिया।

Answer: ढोलक की संजीवनी शक्ति से; कला इलाज नहीं करती, पर जीने का साहस देती है।

Memory hook: ढोलक दवा नहीं, दिलासा है।

लोक-कला की उपेक्षा

मान लीजिए किसी कस्बे में स्थानीय नौटंकी मंडली को मंच देने वाला पुराना सभागार बंद कर दिया जाता है, और नगर परिषद वहाँ नया महँगा मॉल बनाने का निर्णय करती है।

इसकी तुलना कहानी के किस प्रसंग से होगी?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पुराना सभागार = राजा साहब का दंगल।
  2. मॉल = राजकुमार की घोड़ों की रेस।
  3. मंडली = बेरोज़गार हुआ पहलवान।

Answer: राजकुमार द्वारा दंगल बंद कर पहलवानों को निकालने के प्रसंग से।

Memory hook: दंगल गया, रेस आई।

Tricks to remember ढोल के बोल और ढोलक की संजीवनी शक्ति

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ढोल: ग-सं-सा

    गुरु, संजीवनी, साथी: ढोल के तीन रूप।

    Use it when: ढोल के महत्त्व वाले प्रश्नों में।

  • लुट्टन के पाँच मोड़

    अनाथ, दंगल, निष्कासन, बेटे, अंत: पाँच शब्द पाँच घटनाएँ।

    Use it when: चरित्र या जीवन-क्रम के प्रश्न में।

ढोल के बोल और ढोलक की संजीवनी शक्ति: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: ढोल को गुरु मानना · 1 mark · MCQBoard level

लुट्टन ढोल को अपना गुरु क्यों मानता था?
(क) ढोल उसे कुश्ती सिखाता था
(ख) ढोल की ताल से उसे दाँव-पेंच का निर्देश मिला और उसकी जीत हुई
(ग) ढोल उसे राजा ने दिया था
(घ) ढोल बजाना उसका पेशा था

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दंगल में भीड़ चाँद सिंह के पक्ष में थी।
  2. लुट्टन के लिए ढोल के बोल ही निर्देश थे।
  3. जीतकर उसने सबसे पहले ढोलों को प्रणाम किया।

Answer: (ख) ढोल की ताल से उसे दाँव-पेंच का निर्देश मिला और उसने चाँद सिंह को हराया।

Example 2: संजीवनी शक्ति · 2 marks · Short answerHarder board level

लेखक ने ढोलक की आवाज़ को 'संजीवनी शक्ति' क्यों कहा? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ढोलक बीमारी नहीं रोक सकती थी।
  2. पर उसकी आवाज़ से लोगों को दंगल का दृश्य याद आता और साहस मिलता।

Answer: ढोलक महामारी का इलाज नहीं कर सकती थी, पर उसकी आवाज़ से अर्द्धमृत ग्रामीणों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता था। इससे उनमें जीने का साहस आता और वे मृत्यु का भय भूल जाते थे, इसलिए उसे संजीवनी शक्ति कहा गया।

Example 3: ढोल और दाँव-पेंच का तालमेल · 3 marks · Long answerHarder board level

दंगल में ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच का तालमेल स्पष्ट कीजिए। दो बोल उदाहरण के लिए दीजिए (लगभग 60 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ढोल के बोल निर्देश बने।
  2. 'धाक-धिना, तिरकट-तिना' का आशय है दाँव काटकर बाहर निकल जाओ।
  3. 'चटाक्-चट्-धा' का आशय है उठाकर पटक दे; 'धिना-धिना, धिक-धिना' चित करने का निर्देश है।

Answer: लुट्टन ने ढोल के हर बोल को निर्देश की तरह सुना और उसी के अनुसार दाँव चला। 'धाक-धिना, तिरकट-तिना' (दाँव काटकर बाहर निकल जाओ) सुनकर वह चाँद सिंह के दाँव से निकल गया और 'चटाक्-चट्-धा' (उठाकर पटक दे) पर उसने उसे उठाकर पटका। अंत में 'धिना-धिना, धिक-धिना' के निर्देश पर उसे चित किया। इस तालमेल से बिना किसी गुरु के उसने बड़े पहलवान को हरा दिया।

Example 4: सूर्योदय और सूर्यास्त · 3 marks · Long answerHarder board level

कहानी में सूर्योदय और सूर्यास्त के वर्णन में क्या अंतर है और यह ढोलक से कैसे जुड़ा है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सूर्योदय पर लोग कराहते हुए बाहर निकलकर एक-दूसरे को ढाढ़स बँधाते हैं और मृतकों की चर्चा करते हैं।
  2. सूर्यास्त होते ही वे भय से झोंपड़ियों में घुसकर चुप हो जाते हैं।
  3. उस सन्नाटे में केवल ढोलक की आवाज़ उन्हें जीने का साहस देती है।

Answer: सूर्योदय होने पर गाँव के लोग कराहते हुए अपनी झोंपड़ियों से बाहर निकलते हैं, एक-दूसरे को ढाढ़स बँधाते हैं और अपनों की मृत्यु की चर्चा करते हैं। सूर्यास्त होते ही वे भय से घरों में दुबक जाते हैं और चारों ओर सन्नाटा छा जाता है। उस समय केवल ढोलक की आवाज़ उनमें जीने का साहस भरती है, इसलिए ढोलक का सहारा रात में सबसे अधिक ज़रूरी होता है।

Example 5: कलाओं के अस्तित्व का प्रश्न · 3 marks · Long answerHOTS / competency

राजकुमार के आने के बाद पहलवान और दंगल का क्या हुआ? इस घटना के आधार पर बदलती व्यवस्था में लोक-कलाओं की स्थिति पर अपना मत लिखिए (लगभग 60 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. घटना: दंगल की जगह घोड़ों की रेस, पहलवान निकाले गए।
  2. कारण: नई सोच के लिए लोक-कला का मूल्य नहीं।
  3. निष्कर्ष: कलाकार संरक्षण के अभाव में अकेला पड़ता है।

Answer: राजकुमार ने दंगल बंद करके घोड़ों की रेस शुरू की और पहलवानों का खर्च सुनकर उन्हें निकाल दिया। इससे लगता है कि नई सोच में लोक-कला का मूल्य नहीं समझा गया। संरक्षण के अभाव में लुट्टन जैसे कलाकार अकेले और बेसहारा हो जाते हैं। इसलिए कलाओं को बचाने के लिए समाज और शासन का संरक्षण आवश्यक है।

Where students lose marks in ढोल के बोल और ढोलक की संजीवनी शक्ति

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: ढोलक को बीमारी दूर करने वाली बता देना

    पाठ में स्पष्ट है कि ढोलक बीमारी नहीं रोकती, साहस देती है।

    Wrong working

    ढोलक की आवाज़ से बीमार ठीक हो जाते थे।

    Right working

    ढोलक बीमारी नहीं रोक सकती थी, पर उसकी आवाज़ से लोगों में जीने का साहस आता था।

    Do this: 'साहस', 'ढाढ़स' जैसे शब्द प्रयोग करें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: ढोल के बोलों का क्रम या अर्थ गलत लिखना

    बोल पाठ में दाँव-पेंच से जुड़े हैं।

    Do this: दो-तीन बोल ही लिखें और उनका आशय सही रखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: राजकुमार को खलनायक की तरह लिख देना

    पाठ में उसकी बदली हुई सोच और व्यवस्था-परिवर्तन का चित्र है।

    Do this: 'नई सोच में लोक-कला का मूल्य नहीं' जैसे निष्पक्ष शब्द लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: कहानी की घटनाओं का क्रम बिगाड़ना

    कहानी महामारी की रात से शुरू होकर पीछे लौटती है।

    Do this: पहले आरंभिक रात, फिर फ्लैशबैक के मोड़ लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • ढोल के प्रश्न में गुरु और संजीवनी दोनों रूप लिखें।
  • ध्वन्यात्मक बोलों के दो-तीन उदाहरण याद रखें और उनके आशय दाँव-पेंच से जोड़ें।
  • लुट्टन का चरित्र-चित्रण जीवन के मोड़ों के क्रम में लिखें।
  • 'व्यवस्था-परिवर्तन और लोक-कला' के प्रश्न में राजा साहब और राजकुमार की तुलना करें।
  • मानवीकरण के उदाहरण में 'अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी' उद्धृत करें।

Practice questions on ढोल के बोल और ढोलक की संजीवनी शक्ति

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    कहानी के आरंभ में गाँव की तुलना किससे की गई है?
    (क) भयार्त्त शिशु से
    (ख) सोते हुए बच्चे से
    (ग) जलते हुए दीपक से
    (घ) खाली अखाड़े से

    Hint

    'थर-थर काँप रहा था'।

    Answer

    (क) भयार्त्त शिशु से; गाँव मलेरिया और हैज़े के भय से काँप रहा है।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    राज-पहलवान बन जाने पर लुट्टन ने अपने बेटों को ढोल के बारे में क्या सीख दी? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    गुरु कौन है।

    Answer

    लुट्टन अपने बेटों को सीख देता था कि उनका गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है। वह बताता था कि ढोल की ताल से ही उसने दाँव-पेंच सीखे और जीत पाई, इसलिए इसे अपना गुरु मानना चाहिए।

  3. Q3 · 3 marks · Long answerHarder board level

    महामारी की रातों में लुट्टन ढोलक क्यों बजाता रहा और इसका गाँव पर क्या असर होता था? कहानी के आधार पर लिखिए (लगभग 60 शब्द)।

    Hint

    भय के सन्नाटे को चुनौती; ढाढ़स।

    Answer

    महामारी में गाँव रात को भय और सन्नाटे से घिर जाता था। लुट्टन ढोलक बजाकर उस विभीषिका को चुनौती देता रहा। इससे अर्द्धमृत ग्रामीणों में जीने का साहस जागता और वे मृत्यु का भय छोड़कर सो पाते। बेटों को खोने के बाद भी उसने ढोलक बजाई, जो उसकी जीवटता और परोपकार का प्रमाण है।

  4. Q4 · 3 marks · Long answerHarder board level

    लुट्टन के चरित्र की तीन विशेषताएँ पाठ से प्रमाण सहित लिखिए (लगभग 60 शब्द)।

    Hint

    साहस, कृतज्ञता, स्वाभिमान।

    Answer

    लुट्टन साहसी है; उसने बिना डरे चाँद सिंह को चुनौती दी। वह कृतज्ञ है; जीतकर उसने सबसे पहले ढोलों को प्रणाम किया और उसे गुरु माना। वह स्वाभिमानी है; मृत्यु से पहले उसकी इच्छा थी कि उसे चिता पर पेट के बल लिटाया जाए, क्योंकि वह जीवन में कभी चित नहीं हुआ। इन गुणों से वह जीवट वाला लोक-कलाकार लगता है।

  5. Q5 · 3 marks · Long answerHOTS / competency

    कहानी का शीर्षक 'पहलवान की ढोलक' कहाँ तक सार्थक है? यदि शीर्षक 'लुट्टन पहलवान' होता तो कहानी के भाव में क्या अंतर आता? अपना मत तर्क सहित लिखिए (लगभग 60 शब्द)।

    Hint

    कहानी का केंद्र ढोलक और उसका प्रभाव।

    Answer

    शीर्षक सार्थक है, क्योंकि कहानी का केंद्र ढोलक है: वह लुट्टन की गुरु, गाँव की संजीवनी और उसकी पहचान है। 'लुट्टन पहलवान' शीर्षक व्यक्ति पर केंद्रित होता और कला की जीवनदायिनी शक्ति तथा लोक-कला की उपेक्षा का भाव दब जाता। 'ढोलक' शब्द कथा के संगीत और गाँव की पीड़ा दोनों को समेटता है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.लुट्टन ने दंगल में किसे चुनौती दी थी?Show answer

    पंजाब से आए 'शेर के बच्चे' चाँद सिंह को।

  2. 2.जीतकर लुट्टन ने सबसे पहले क्या किया?Show answer

    ढोलों को प्रणाम किया।

  3. 3.राजकुमार ने दंगल की जगह क्या शुरू किया?Show answer

    घोड़ों की रेस।

  4. 4.गाँव में कौन-सी बीमारियाँ फैली थीं?Show answer

    मलेरिया और हैज़ा।

  5. 5.लुट्टन की अंतिम इच्छा क्या थी?Show answer

    उसे चिता पर पेट के बल लिटाया जाए और चिता जलाते समय ढोलक बजाई जाए।

ढोल के बोल और ढोलक की संजीवनी शक्ति: frequently asked questions

'पहलवान की ढोलक' किस प्रकार की कहानी है?

आंचलिक कहानी, जिसमें गाँव की बोली, लोकगीत और लोक-जीवन जीवंत हैं।

लेखक फणीश्वर नाथ रेणु का प्रसिद्ध उपन्यास कौन-सा है?

'मैला आँचल' (1954), जिसे आंचलिक उपन्यास की शुरुआत माना जाता है।

कहानी का संदेश क्या है?

कला जीवन को साहस देती है, पर बदलती व्यवस्था में लोक-कलाकार उपेक्षित हो जाता है; जीवट और स्वाभिमान से जीना ही मनुष्य की पहचान है।

इस कहानी से बोर्ड में क्या पूछा जाता है?

गद्यांश पर 5 MCQ, ढोल का महत्त्व, लुट्टन का चरित्र, मानवीकरण और व्यवस्था-परिवर्तन पर 2-3 अंक के प्रश्न।