रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प (कक्षा 12)
Updated 18 October 2026 · Fact-checked
रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होते, इसलिए सब कुछ संवादों और ध्वनि प्रभावों से रचना पड़ता है। कहानी केवल एक्शन पर निर्भर न हो, अवधि प्रायः 15 से 30 मिनट हो (लंबी कहानी हो तो धारावाहिक) और पात्र सीमित हों। देश-काल, पात्र-परिचय और एक्शन संवादों तथा कोष्ठक में लिखे ध्वनि प्रभावों से दिखाए जाते हैं।
Radio has only sound, so pick a story that is not just action, fits 15–30 minutes, and has few voices to remember.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प
रेडियो नाटक और सिनेमा-रंगमंच। सिनेमा और रंगमंच की तरह रेडियो नाटक में भी चरित्र, उनके आपसी संवाद और संवादों से आगे बढ़ती कहानी होती है, और वही ढाँचा रहता है: परिचय, द्वंद्व और समाधान। सबसे बड़ा अंतर यह है कि रेडियो नाटक में विज़ुअल्स (दृश्य) नहीं होते। रेडियो पूरी तरह श्रव्य माध्यम है, इसलिए न मंच-सज्जा, न वस्त्र-सज्जा, न चेहरे की भाव-भंगिमा। सब कुछ संवादों और ध्वनि प्रभावों (संगीत सहित) से संप्रेषित करना पड़ता है। 'अंधा युग' (धर्मवीर भारती) और 'आषाढ़ का एक दिन' (मोहन राकेश) जैसे नाटकों के रेडियो रूपांतर प्रसारित हुए और बहुत लोकप्रिय हुए।
कहानी का चुनाव: तीन बातें।
1. कहानी पूरी तरह एक्शन पर निर्भर न हो। पुलिस-अपराधी का पीछा या क्रिकेट-फ़ुटबॉल जैसे खेल पर अच्छा सिनेमा बन सकता है, पर रेडियो नाटक नहीं, क्योंकि केवल आवाज़ से भाग-दौड़ का रोमांच नहीं रचा जा सकता।
2. अवधि बहुत ज़्यादा न हो; लंबी कहानी हो तो धारावाहिक बनाएँ।
3. पात्रों की संख्या सीमित हो।
सूत्र: कहानी का चुनाव अपने माध्यम को समझते हुए करें।
अवधि 15 से 30 मिनट क्यों। पहला कारण: श्रव्य माध्यम में नाटक या वार्ता जैसे कार्यक्रमों के लिए मनुष्य की एकाग्रता की अवधि 15 से 30 मिनट ही होती है। दूसरा कारण: सिनेमा या नाटक के दर्शक घर से निकलकर प्रेक्षागृह में आते हैं और 'कैपटिव ऑडियंस' होते हैं, जबकि रेडियो का श्रोता घर पर अपनी मर्ज़ी से सुनता है और मन उचटते ही स्टेशन बदल सकता है। रेडियो पर कार्यक्रम निश्चित समय पर आते हैं, इसलिए अवधि भी निश्चित (15, 30, 45, 60 मिनट) होती है।
पात्रों की संख्या। श्रोता चरित्रों को केवल आवाज़ से याद रखता है, इसलिए बहुत पात्र होंगे तो वह उनसे रिश्ता नहीं जोड़ पाएगा। पाठ का अंदाज़ा: 15 मिनट के नाटक में अधिकतम 5-6 पात्र (ज़रूरत हो तो 7-8); 30-40 मिनट में 8 से 12; एक घंटा या अधिक में 15 से 20 भूमिकाएँ। ये अनुमान मात्र हैं, छोटे-मोटे किरदार इनमें नहीं गिने जाते।
लेखन-शिल्प। मंच के नाट्यालेख और फ़िल्म की पटकथा से समानता है, पर दृश्य का निर्माण भी ध्वनि प्रभावों और संवादों से करना होता है। 'दृश्य' की जगह 'कट' लिखने की परिपाटी है, पर असली महत्त्व संवाद और ध्वनि प्रभाव का है। ध्वनि प्रभाव कोष्ठक में लिखे जाते हैं, जैसे '(दूर से नज़दीक आती आवाज़)'। पाठ के उदाहरण में रात में जंगल में भटके राम, श्याम और मोहन हैं; कोष्ठक में जंगली जानवरों की आवाज़ें, डरावना संगीत और पदचाप से स्थान का संकेत मिलता है, और संवादों से समय और पात्रों के स्वभाव का। देश-काल बताने वाला संवाद स्वाभाविक हो, ठूँसी गई सूचना जैसा न लगे।
संवादों से पात्र-परिचय। नाम, आपसी संबंध और स्वभाव संवादों से ही पता चलते हैं; भाषा से पात्र की शिक्षा, क्षेत्र और उम्र का अनुमान होता है। श्रोता देख नहीं सकता कि कौन किससे बोल रहा है, इसलिए जिस पात्र से बात हो रही हो, उसका नाम लेना ज़रूरी है, खासकर जब दो से अधिक पात्र हों। एक्शन भी संवाद में कहा जाता है, जैसे 'चलूँ कुछ देर इस बेंच पर बैठ जाऊँ।'
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
बस सिनेमा और रंगमंच की तरह रेडियो नाटक में विजुअल्स अर्थात दृश्य नहीं होते।
NCERT पाठ: रेडियो नाटक और सिनेमा-रंगमंच का अंतर
रेडियो नाटक लेखन के सभी नियम इसी एक अंतर से निकलते हैं।
इसलिए कहानी का चुनाव अपने माध्यम को समझते हुए करिए।
NCERT पाठ: एक्शन-प्रधान कहानी की समस्या
हर कहानी हर माध्यम के लिए उपयुक्त नहीं होती।
महत्त्वपूर्ण हैं—संवाद और ध्वनि प्रभाव।
NCERT पाठ: 'कट' और दृश्य की चर्चा
रेडियो नाटक के दो मुख्य औज़ार।
रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प: key facts
- कहानी चुनने की तीन बातें
- एक्शन पर पूरी तरह निर्भर नहीं
- अवधि बहुत ज़्यादा नहीं (धारावाहिक बनाएँ)
- पात्र सीमित
- माध्यम को समझकर चुनाव।
- अवधि और पात्र-संख्या का अंदाज़ा
15 मिनट 5-6 पात्र (अधिकतम 7-8) 30-40 मिनट 8-12 पात्र एक घंटा या अधिक 15-20 भूमिकाएँ - अनुमान मात्र; छोटे किरदार नहीं गिने जाते।
- रेडियो नाटक के औज़ार
- संवाद
- ध्वनि प्रभाव (कोष्ठक में)
- संगीत
- संबोधन में पात्र का नाम
- दृश्य नहीं, इसलिए सब आवाज़ से।
How to answer रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प questions
इस पाठ से 2026-27 में 2 और 4 अंक के प्रश्न निर्धारित नहीं हैं (विद्यालय-स्तर का अभ्यास)। उत्तर में कारण और उदाहरण दोनों दें।
- 1प्रश्न पढ़कर पहचानें कि अंतर, कारण, प्रक्रिया या अनुप्रयोग पूछा गया है।
- 2पहली पंक्ति में सीधा उत्तर दें: दृश्य नहीं, इसलिए आवाज़।
- 3पाठ का एक तथ्य जोड़ें: 15 से 30 मिनट, 5-6 पात्र, कोष्ठक में ध्वनि प्रभाव।
- 4अनुप्रयोग में संवाद लिखते समय पात्र का नाम और कोष्ठक में ध्वनि प्रभाव लिखें।
- 5शब्द-सीमा का ध्यान रखें: 2 अंक लगभग 40, 4 अंक लगभग 80 शब्द।
रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
आवाज़ से दृश्य रचना
मान लीजिए आपके विद्यालय के रेडियो क्लब को बारिश वाली शाम का दृश्य बनाना है, जिसमें दो सहेलियाँ बस-स्टैंड पर इंतज़ार कर रही हैं।
यह दृश्य बिना किसी चित्र के श्रोताओं तक कैसे पहुँचेगा?
Try it first, then show the solutionSolution
- ध्वनि प्रभाव: बारिश की बूँदों और बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज़ (कोष्ठक में)।
- संवाद: एक सहेली कहे, 'अरे, मेरा छाता तो भीग गया।'
- स्थान का संकेत: बस के हॉर्न की आवाज़।
Answer: बारिश और बादल की ध्वनि, बस के हॉर्न और सहेलियों के संवादों से श्रोता अपने मन में बस-स्टैंड का दृश्य बना लेंगे। इस प्रकार दृश्य की जगह ध्वनि प्रभाव और संवाद काम करते हैं।
Memory hook: आँखें नहीं, कान देखते हैं।
पात्रों की सीमित संख्या
मान लीजिए आपके पास 15 मिनट का रेडियो नाटक लिखने का समय है और आप उसमें बारह पात्र रखना चाहते हैं।
पाठ के अनुसार यह उचित क्यों नहीं है?
Try it first, then show the solutionSolution
- 15 मिनट में अधिकतम 5-6 पात्र (ज़रूरत हो तो 7-8)।
- श्रोता पात्रों को केवल आवाज़ से याद रखता है।
Answer: 15 मिनट के नाटक के लिए पाठ 5-6 पात्र सुझाता है, ज़रूरत पर 7-8। बारह पात्र होंगे तो श्रोता उन्हें केवल आवाज़ से पहचान और याद नहीं रख पाएगा।
Memory hook: कम समय, कम पात्र।
Tricks to remember रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
अ-अ-पा
एक्शन कम, अवधि कम, पात्र कम: कहानी चुनने की तीन बातें।
Use it when: कहानी के चुनाव वाले प्रश्न में।
15-30-60
15 मिनट में 5-6 पात्र, 30-40 में 8-12, एक घंटे में 15-20।
Use it when: पात्र-संख्या के अनुमान के लिए।
कान ही आँख
दृश्य नहीं, इसलिए संवाद और ध्वनि प्रभाव।
Use it when: सिनेमा और रेडियो में अंतर के लिए।
रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: रेडियो नाटक की अवधि · 1 mark · MCQBoard level
रेडियो नाटक की सामान्य अवधि होती है:
(क) 5 से 10 मिनट
(ख) 15 से 30 मिनट
(ग) 2 से 3 घंटे
(घ) 1 मिनट
Try it first, then show the solutionSolution
- एकाग्रता की अवधि के कारण रेडियो नाटक प्रायः 15 से 30 मिनट का होता है (1 अंक)।
Answer: (ख) 15 से 30 मिनट
Example 2: रेडियो नाटक और सिनेमा का अंतर · 2 marks · Short answerBoard level
रेडियो नाटक और सिनेमा में मुख्य अंतर क्या है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- समानता: चरित्र, संवाद, परिचय-द्वंद्व-समाधान (1)।
- अंतर: रेडियो में दृश्य नहीं, केवल संवाद और ध्वनि प्रभाव (1)।
Answer: सिनेमा और रेडियो नाटक दोनों में चरित्र, संवाद और परिचय, द्वंद्व, समाधान का ढाँचा होता है। अंतर यह है कि सिनेमा में दृश्य होते हैं, पर रेडियो नाटक पूरी तरह श्रव्य माध्यम है, इसलिए उसमें सब कुछ संवादों और ध्वनि प्रभावों से बताना पड़ता है।
Example 3: अवधि के दो कारण · 2 marks · Short answerHarder board level
रेडियो नाटक की अवधि प्रायः 15 से 30 मिनट क्यों होती है? दो कारण लिखिए। (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- श्रव्य माध्यम में एकाग्रता की अवधि 15-30 मिनट (1)।
- श्रोता घर पर अपनी मर्ज़ी से सुनता है, कैपटिव ऑडियंस नहीं (1)।
Answer: श्रव्य माध्यम में मनुष्य की एकाग्रता की अवधि 15 से 30 मिनट ही होती है। इसके अलावा सिनेमा के दर्शक प्रेक्षागृह में बैठे कैपटिव ऑडियंस होते हैं, जबकि रेडियो का श्रोता घर पर अपनी मर्ज़ी से सुनता है और मन उचटते ही स्टेशन बदल सकता है।
Example 4: कैसी कहानी रेडियो के लिए उचित · 4 marks · Long answerHarder board level
क्रिकेट मैच की उत्तेजक भागदौड़ पर आधारित कहानी रेडियो नाटक के लिए उचित क्यों नहीं मानी जाती? उचित कहानी की कोई दो विशेषताएँ भी लिखिए। (लगभग 80 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- केवल आवाज़ से भाग-दौड़ का रोमांच नहीं रचा जा सकता (1)।
- एक्शन सुनाना उबाऊ हो जाता है (1)।
- उचित: अवधि बहुत अधिक नहीं, पात्र सीमित (1)।
- माध्यम को समझकर चयन (1)।
Answer: पाठ के अनुसार जो कहानी पूरी तरह एक्शन पर निर्भर हो, जैसे क्रिकेट या फ़ुटबॉल का खेल या पुलिस और अपराधी का पीछा, उस पर अच्छा सिनेमा बन सकता है, पर रेडियो नाटक नहीं, क्योंकि केवल आवाज़ से भाग-दौड़ का रोमांच नहीं रचा जा सकता और बहुत एक्शन सुनना उबाऊ होता है। उचित कहानी की अवधि अधिक लंबी नहीं होनी चाहिए, लंबी हो तो धारावाहिक बनाया जाए, और उसमें पात्र सीमित होने चाहिए।
Example 5: जंगल का दृश्य लिखना · 4 marks · Long answerHOTS / competency
रात में जंगल में भटके दो मित्र, सोहन और मोहन, का एक छोटा रेडियो-दृश्य (4-5 पंक्तियाँ) लिखिए, जिसमें ध्वनि प्रभाव कोष्ठक में हों और स्थान, समय तथा दोनों के स्वभाव का पता संवादों से चले। (लगभग 80 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कोष्ठक में ध्वनि प्रभाव: जानवरों की आवाज़, पदचाप, डरावना संगीत (1)।
- संवादों से स्थान और समय (1)।
- स्वभाव: एक डरपोक, एक निश्चिंत (1)।
- संबोधन में नाम और स्वाभाविक भाषा (1)।
Answer: (झींगुरों और उल्लू की आवाज़ें, सूखे पत्तों पर पदचाप, हल्का डरावना संगीत)
सोहन: मोहन, कितना घना जंगल है... रात भी कितनी गहरा गई है।
मोहन: अरे सोहन, इतना क्यों घबराता है? चल, चाँद की रोशनी में रास्ता मिल ही जाएगा।
सोहन: (डरकर) वह... वह आवाज़ सुनी तूने?
(दूर से किसी जानवर के गुर्राने की आवाज़)
मोहन: (हँसकर) बस एक सियार है। चुपचाप मेरे साथ चल।
Where students lose marks in रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: रेडियो नाटक में दृश्य और मंच-सज्जा लिखना
सिनेमा-रंगमंच की आदत।
Wrong working
रेडियो नाटक में मंच-सज्जा से स्थान बताया जाता है।
Right working
रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होते; स्थान संवादों और ध्वनि प्रभावों से बताया जाता है।
Do this: 'दृश्य नहीं, इसलिए आवाज़' याद रखें।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: अवधि का कारण न देना
केवल संख्या लिख देना।
Wrong working
रेडियो नाटक 15 से 30 मिनट का होता है।
Right working
एकाग्रता की सीमा और श्रोता के मन उचटने पर स्टेशन बदल सकने के कारण 15 से 30 मिनट।
Do this: संख्या के साथ दो कारण।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: पात्र-संख्या में बिना समय देखे जवाब देना
अवधि के अनुसार संख्या बदलती है।
Wrong working
रेडियो नाटक में हमेशा 5-6 पात्र होते हैं।
Right working
15 मिनट में 5-6, 30-40 मिनट में 8-12, एक घंटे में 15-20 भूमिकाएँ (अनुमान)।
Do this: अवधि के साथ संख्या लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- अंतर वाले प्रश्न में पहले समानता, फिर 'दृश्य नहीं' वाला अंतर लिखें।
- संवाद लिखते समय ध्वनि प्रभाव कोष्ठक में दें और पात्र का नाम लें।
- संख्याओं को अनुमान मात्र बताएँ, जैसा पाठ कहता है।
- शब्द-सीमा का ध्यान रखें: 2 अंक लगभग 40, 4 अंक लगभग 80 शब्द।
Practice questions on रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
रेडियो नाटक में ध्वनि प्रभाव कहाँ लिखे जाते हैं?
(क) शीर्षक में
(ख) कोष्ठक में
(ग) अंत में
(घ) संवाद के बीच बिना चिह्न केHint
(पदचाप का स्वर) जैसे संकेत।
Answer
(ख) कोष्ठक में
Q2 · 1 mark · Very short answerBoard level
रेडियो नाटक में पात्र का नाम लेकर संवाद क्यों बोला जाता है?
Hint
श्रोता देख नहीं सकता।
Answer
श्रोता देख नहीं सकता कि कौन किससे बोल रहा है, इसलिए जिसे संवाद संबोधित हो, उसका नाम लेना ज़रूरी है, खासकर जब दो से अधिक पात्र हों।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
एक घंटे के नाटक में 18 भूमिकाएँ हैं। पाठ के अंदाज़े से तुलना कीजिए और बताइए कि 15 मिनट के नाटक में वही संख्या क्यों अनुचित होगी। (लगभग 40 शब्द)
Hint
एक घंटे में 15 से 20; 15 मिनट में 5-6।
Answer
एक घंटे या उससे अधिक के नाटक के लिए पाठ 15 से 20 भूमिकाएँ सुझाता है, इसलिए 18 उचित हैं। पर 15 मिनट के नाटक में अधिकतम 5-6 पात्र (ज़रूरत हो तो 7-8) होते हैं, इसलिए 18 पात्र श्रोता याद नहीं रख पाएगा।
Q4 · 4 marks · Long answerHarder board level
रेडियो नाटक में देश-काल कैसे बताया जाता है? एक उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए और बताइए कि इसमें क्या सावधानी रखनी चाहिए। (लगभग 80 शब्द)
Hint
ध्वनि प्रभाव और संवाद; स्वाभाविकता।
Answer
रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होता, इसलिए स्थान और समय ध्वनि प्रभावों (संगीत सहित) और संवादों से बताए जाते हैं। जैसे जंगल के दृश्य में कोष्ठक में जंगली जानवरों की आवाज़ें और डरावना संगीत स्थान बताता है, और पात्र का संवाद 'इत्ती रात हो गई' समय का संकेत देता है। सावधानी यह है कि देश-काल बताने वाला संवाद स्वाभाविक हो, ज़बरदस्ती ठूँसी गई सूचना जैसा न लगे।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
तर्क दीजिए कि 'रेडियो नाटक का लेखन थोड़ा भिन्न और थोड़ा मुश्किल है।' इसके लिए पाठ के तीन बिंदुओं का प्रयोग कीजिए। (लगभग 80 शब्द)
Hint
दृश्य का अभाव, ध्वनि प्रभाव, संवाद से पात्र-परिचय।
Answer
रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होते, इसलिए लेखक को मंच-सज्जा, वस्त्र-सज्जा और चेहरे की भाव-भंगिमा का सहारा नहीं मिलता। उसे स्थान और समय ध्वनि प्रभावों और संवादों से रचना पड़ता है। पात्रों के नाम, संबंध और स्वभाव भी केवल संवादों से बताने होते हैं, और जिस पात्र से बात हो उसका नाम लेना पड़ता है। एक्शन को भी संवाद में ढालना होता है, इसीलिए लेखन थोड़ा भिन्न और मुश्किल है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.रेडियो नाटक की सामान्य अवधि क्या है?Show answer
15 से 30 मिनट।
2.रेडियो नाटक में दृश्य की जगह क्या लिखा जाता है?Show answer
'कट'; पर असली महत्त्व संवाद और ध्वनि प्रभाव का है।
3.रेडियो रूपांतर से प्रसिद्ध हुए दो नाटकों के नाम बताइए।Show answer
'अंधा युग' (धर्मवीर भारती) और 'आषाढ़ का एक दिन' (मोहन राकेश); इनके रेडियो रूपांतर प्रसारित हुए और बहुत लोकप्रिय हुए।
4.15 मिनट के नाटक में कितने पात्र उचित हैं?Show answer
अधिकतम 5-6 (ज़रूरत हो तो 7-8)।
रेडियो नाटक: कहानी का चुनाव, अवधि, पात्र-संख्या और लेखन-शिल्प: frequently asked questions
रेडियो नाटक में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
दृश्य के बिना केवल आवाज़ से स्थान, पात्र और एक्शन रचना।
लंबी कहानी का रेडियो नाटक कैसे बनता है?
धारावाहिक के रूप में, जिसकी हर कड़ी 15 या 30 मिनट की हो।
यह पाठ अभिव्यक्ति और माध्यम का कौन-सा पाठ है?
पाठ 12।