Skip to content
HindiCBSE Class 12 · आनंद यादव – जूझ

जूझ (आनंद यादव): सौंदलगेकर मास्टर और कविता रचने का आत्मविश्वास (कक्षा 12)

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

मराठी के अध्यापक न.वा. सौंदलगेकर कविता गाकर और अभिनय करके पढ़ाते थे, कवियों के संस्मरण सुनाते थे और स्वयं भी कविता लिखते थे। उन्हें कवि के रूप में देखकर लेखक आनंदा को विश्वास हुआ कि कवि भी साधारण मनुष्य होता है और वह भी कविता लिख सकता है। खेत में पानी लगाते और ढोर चराते समय अकेलापन अब उसे अच्छा लगने लगा, और वह भैंस की पीठ तथा पत्थर पर तुकबंदी लिखकर मास्टर को दिखाने लगा।

ध्यान दें: मास्टर को कवि के रूप में देखकर आनंदा को लगा कि कवि भी साधारण इंसान है, इसलिए उसने खुद तुकबंदी शुरू की।

Illustration drawn for QuestionBuddy.

Understand जूझ: सौंदलगेकर मास्टर और कविता रचने का आत्मविश्वास

'जूझ' (संघर्ष) पढ़ने के अधिकार के लिए एक किसान-पुत्र की कथा है। पिता 'दादा' ने उसकी पढ़ाई छुड़वाकर उसे खेतों में लगा दिया था। माँ के साथ गाँव के प्रतिष्ठित दत्ता जी राव देसाई के पास जाने पर वह फिर पाठशाला पहुँचा, पर दादा की शर्त थी कि सुबह ग्यारह बजे तक खेत में पानी लगाना होगा, छुट्टी के बाद ढोर चराने होंगे और काम अधिक हुआ तो पाठशाला से गैरहाज़िर रहना होगा। पाँचवीं में दोबारा बैठने पर कक्षा में सब छोटे और अजनबी थे और चह्वाण के लड़के ने उसका गमछा छीना और धोती खींची, पर वह अगले दिन फिर आया।

इस पृष्ठ का केंद्र है कि लेखक को कविता की ओर किसने खींचा। गणित के मंत्री मास्टर के अनुशासन और होशियार मॉनीटर वसंत पाटील की देखादेखी लेखक ने पढ़ाई में मन लगाया और मास्टर के 'आनंदा' कहकर पुकारने से उसका आत्मविश्वास बढ़ा। फिर आए मराठी के अध्यापक न.वा. सौंदलगेकर।

सौंदलगेकर की शिक्षण-शैली। (1) कविता को सुर में गाकर पढ़ाते थे। (2) कविता के भाव के अनुसार अभिनय करते थे। (3) कवियों के संस्मरण सुनाकर कविता को जीवन से जोड़ते थे। (4) स्वयं भी कविता लिखते थे और कविताएँ सुनाते थे। (5) बच्चों को अपनापन देते थे। उनके प्रभाव से लेखक खेत में पानी लगाते और ढोर चराते हुए वही कविताएँ ऊँची आवाज़ में गाता और अभिनय करता। अब अकेलापन उसे बुरा नहीं, अच्छा लगने लगा, क्योंकि वहाँ वह निर्भय होकर गा सकता था।

आत्मविश्वास कैसे जागा। लेखक ने एक कविता अपनी चाल में गाई तो मास्टर ने उसे बड़ी कक्षाओं और समारोह में गवाया, तब उसे लगा कि उसके कुछ नए पंख निकल आए हैं। मास्टर को कवि के रूप में देखकर उसे विश्वास हुआ कि कवि भी अपने जैसा साधारण मनुष्य होता है। फिर उसने भैंस की पीठ और पत्थर पर तुकबंदी लिखकर मास्टर को दिखाई, उनसे छंद, अलंकार और शुद्ध लेखन सीखा, उसकी मराठी सुधरी और उसे शब्दों का नशा चढ़ने लगा।

शीर्षक 'जूझ' का औचित्य: संघर्ष पिता से, परिस्थिति से, कक्षा के अपमान से और स्वयं अपने भीतर के संकोच से भी है।

जूझ: सौंदलगेकर मास्टर और कविता रचने का आत्मविश्वास: key facts

सौंदलगेकर की शिक्षण-शैली
  • सुर में गाकर पढ़ाना
  • भाव के अनुसार अभिनय
  • कवियों के संस्मरण
  • स्वयं कविता लिखना
  • अपनापन
शिक्षक के प्रभाव वाले प्रश्न में तीन-चार गुण लिखें।
लेखक पर प्रभाव
  • अकेलापन अच्छा लगना
  • कविता गाना और अभिनय
  • नए पंख निकलना
  • भैंस की पीठ पर तुकबंदी
  • छंद, अलंकार, शुद्ध लेखन सीखना
प्रभाव क्रम से लिखें।
'जूझ' के संघर्ष
  • पिता का विरोध
  • खेत का काम
  • कक्षा का अपमान
  • आत्म-संकोच
शीर्षक के औचित्य में चारों स्तर लिखें।

जूझ: सौंदलगेकर मास्टर और कविता रचने का आत्मविश्वास in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

शिक्षक से प्रेरणा

मान लीजिए आपकी विज्ञान शिक्षिका प्रयोगों को कहानी की तरह सुनाती हैं और अपने शौक के लिए छोटे उपकरण बनाकर लाती हैं। उनकी कक्षा के बाद एक शर्मीले विद्यार्थी को लगने लगता है कि वह भी कोई उपकरण बना सकता है।

यह 'जूझ' के किस प्रसंग से मेल खाता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रोचक शिक्षण = गाकर और अभिनय करके पढ़ाना।
  2. शिक्षिका का स्वयं उपकरण बनाना = मास्टर का स्वयं कविता लिखना।
  3. विद्यार्थी का विश्वास = लेखक का 'कवि भी साधारण मनुष्य' समझना।

Answer: सौंदलगेकर मास्टर और लेखक के प्रसंग से; शिक्षक का रचनाशील उदाहरण विद्यार्थी में आत्मविश्वास जगाता है।

Memory hook: शिक्षक करके दिखाए, तो शिष्य करने का साहस पाए।

अकेलापन अवसर बन सकता है

मान लीजिए एक छात्र को रोज़ आधे घंटे अकेले बस में सफ़र करना पड़ता है, जिसे वह पहले बोझ मानता था, पर अब उस समय कविताएँ गुनगुनाकर याद करता है।

यह लेखक के किस अनुभव से मेल खाता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अकेलापन पहले बोझ।
  2. कविताओं के कारण अवसर बन गया।

Answer: लेखक को खेत में पानी लगाते समय अकेलापन अब अच्छा लगने लगा था, क्योंकि वहाँ वह निर्भय होकर कविताएँ गाता और अभिनय करता था।

Memory hook: रुचि मिले तो अकेलापन भी साथी।

Tricks to remember जूझ: सौंदलगेकर मास्टर और कविता रचने का आत्मविश्वास

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • गा-अ-सं-ल

    गाना, अभिनय, संस्मरण, लेखन: सौंदलगेकर की चार शैलियाँ।

    Use it when: शिक्षण-शैली के प्रश्न में।

  • प्रेरणा की सीढ़ी

    सुनना, गाना, मास्टर का सराहना, तुकबंदी, सुधार: पाँच सीढ़ियों में कविता का विकास।

    Use it when: आत्मविश्वास कैसे जागा, इसका क्रम लिखने के लिए।

जूझ: सौंदलगेकर मास्टर और कविता रचने का आत्मविश्वास: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: सौंदलगेकर कौन थे · 1 mark · MCQBoard level

सौंदलगेकर मास्टर किस विषय को पढ़ाते थे और वे कविता पढ़ाने की किस शैली के लिए जाने जाते थे?
(क) गणित; कविता रटवाकर
(ख) मराठी; कविता गाकर और अभिनय करके
(ग) विज्ञान; प्रयोग करके
(घ) इतिहास; कहानियाँ सुनाकर

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सौंदलगेकर मराठी के अध्यापक थे।
  2. वे कविता गाकर और अभिनय करके पढ़ाते थे।

Answer: (ख) मराठी; कविता गाकर और अभिनय करके।

Example 2: अकेलापन अच्छा लगना · 2 marks · Short answerHarder board level

पहले जो अकेलापन लेखक को काटता था, वह उसे अच्छा क्यों लगने लगा? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कविताओं के कारण नया अर्थ।
  2. खेत में निर्भय होकर गाना और अभिनय करना।

Answer: मास्टर की कविताओं ने लेखक को नया सहारा दिया। खेत में पानी लगाते या ढोर चराते समय वह अकेला होकर ऊँची आवाज़ में कविताएँ गाता और अभिनय करता था, जो भीड़ में संभव नहीं था। इसलिए अकेलापन उसे बोझ नहीं, अपने मन की मौज का समय लगने लगा।

Example 3: शिक्षक का प्रभाव · 5 marks · Long answerHarder board level

सौंदलगेकर मास्टर के अध्यापन की विशेषताएँ बताइए और स्पष्ट कीजिए कि लेखक पर उनका क्या प्रभाव पड़ा (लगभग 100 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. शैली: गाना, अभिनय, संस्मरण, स्वयं कविता लिखना।
  2. प्रभाव: अकेलापन अच्छा लगना, कविता गाना, लिखना।
  3. सीख: छंद, अलंकार, शुद्ध लेखन।

Answer: सौंदलगेकर मास्टर कविता को सुर में गाकर और भाव के अनुसार अभिनय करके पढ़ाते थे। वे कवियों के संस्मरण सुनाते थे और स्वयं भी कविता लिखते थे। उनके प्रभाव से लेखक खेत में कविताएँ गाने और अभिनय करने लगा, उसे अकेलापन अच्छा लगने लगा और उसे लगा कि कवि भी साधारण मनुष्य होता है। फिर उसने भैंस की पीठ और पत्थर पर तुकबंदी लिखी और मास्टर से छंद, अलंकार तथा शुद्ध लेखन सीखा। इससे उसकी मराठी सुधरी और काव्य-प्रतिभा जागी।

Example 4: शीर्षक का औचित्य · 5 marks · Long answerHarder board level

'जूझ' शीर्षक पाठ की कथावस्तु और नायक की चारित्रिक विशेषता को कहाँ तक उजागर करता है? (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. जूझ = संघर्ष।
  2. संघर्ष के स्तर: पिता, खेत, अपमान, संकोच।
  3. नायक की विशेषता: जुझारू, धैर्यवान।

Answer: 'जूझ' का अर्थ संघर्ष है और पूरा पाठ पढ़ने के अधिकार के लिए लेखक के संघर्ष की कथा है। उसे पिता के विरोध, खेत के काम और कक्षा के अपमान से जूझना पड़ा; चह्वाण के लड़के के उपहास के बाद भी वह अगले दिन पाठशाला गया। उसने माँ और दत्ता जी राव की सहायता से पाठशाला का मार्ग बनाया और कवि-प्रतिभा विकसित की। इस तरह शीर्षक उसके जुझारू, धैर्यवान और आशावादी स्वभाव को ठीक-ठीक उजागर करता है।

Example 5: दादा बनाम दत्ता जी राव · 5 marks · Long answerHOTS / competency

पढ़ाई के प्रति दादा और दत्ता जी राव के रवैये की तुलना कीजिए। आज के संदर्भ में इनमें से कौन-सा रवैया अपनाने योग्य है? अपना मत तर्क सहित लिखिए (लगभग 100 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दादा: शिक्षा को व्यर्थ मानते हैं, बेटे को खेत में जोतते हैं।
  2. दत्ता जी राव: बेटे को पढ़ने भेजने पर ज़ोर, ज़रूरत हो तो स्वयं पढ़ाने को तैयार।
  3. आज: शिक्षा के महत्त्व को देखते हुए दत्ता जी राव का रवैया उचित।

Answer: दादा शिक्षा को व्यर्थ मानते हैं; वे बेटे को खेत में जोतते हैं और स्वयं गाँव में घूमते हैं। 'बालिस्टर नहीं होनेवाला' जैसे ताने से उनका तिरस्कार झलकता है। दत्ता जी राव देसाई दादा को फटकारते हैं और कहते हैं कि लड़के को कल से पाठशाला भेजो, नहीं तो वे स्वयं पढ़ाएँगे। आज के संदर्भ में दत्ता जी राव का रवैया अपनाने योग्य है, क्योंकि शिक्षा बच्चे के भविष्य और आत्मविश्वास का आधार है।

Where students lose marks in जूझ: सौंदलगेकर मास्टर और कविता रचने का आत्मविश्वास

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: शिक्षक के प्रभाव को केवल 'अच्छा पढ़ाते थे' लिखना

    विशेषताएँ (गाना, अभिनय, संस्मरण, स्वयं कविता) और लेखक पर प्रभाव दोनों चाहिए।

    Wrong working

    सौंदलगेकर मास्टर अच्छा पढ़ाते थे इसलिए लेखक को कविता पसंद आई।

    Right working

    मास्टर गाकर और अभिनय करके पढ़ाते थे; इससे लेखक खेत में भी कविताएँ गाने लगा और स्वयं लिखने लगा।

    Do this: गुण और प्रभाव की जोड़ी बनाएँ।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: दादा को केवल क्रूर बताना

    पाठ में उसका रवैया खेती और व्यावहारिक सोच से भी जुड़ा है; उत्तर संतुलित हो।

    Do this: 'दादा की सोच में शिक्षा व्यर्थ थी' जैसे निष्पक्ष शब्द लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: पाठ को लेखक की मौलिक कविता की कहानी मान लेना

    पाठ का केंद्र पढ़ने का संघर्ष है; कविता उसका एक चरण है।

    Do this: शीर्षक वाले उत्तर में संघर्ष के सभी स्तर लिखें।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: शब्द-सीमा की अनदेखी

    वितान के प्रश्न 5 अंक के हैं; उत्तर लगभग 100 शब्द का होना चाहिए।

    Do this: चार बिंदु और निष्कर्ष लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • शिक्षक के प्रभाव के उत्तर में शैली और प्रभाव का क्रम रखें।
  • 'जूझ' शीर्षक के प्रश्न में संघर्ष के चार स्तर लिखें।
  • दादा और दत्ता जी राव की तुलना में दोनों पक्ष निष्पक्ष रखें और अंत में अपना मत दें।
  • 5 अंक के उत्तर में लगभग 100 शब्द और एक स्पष्ट निष्कर्ष रखें।
  • लेखक के चरित्र के प्रमाण पाठ की घटनाओं से दें।

Practice questions on जूझ: सौंदलगेकर मास्टर और कविता रचने का आत्मविश्वास

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    लेखक के पाठशाला जाने की व्यवस्था में दादा ने कौन-सी शर्त रखी थी?
    (क) सुबह ग्यारह बजे तक खेत में पानी लगाना
    (ख) रोज़ पाँच घंटे पढ़ना
    (ग) कोल्हू चलाना बंद करना
    (घ) शाम को मास्टर से ट्यूशन लेना

    Hint

    खेत और ढोर के काम से जुड़ी शर्तें।

    Answer

    (क) सुबह ग्यारह बजे तक खेत में पानी लगाना, छुट्टी के बाद ढोर चराना और काम अधिक हो तो पाठशाला से गैरहाज़िर रहना।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    मंत्री मास्टर और वसंत पाटील के प्रभाव से लेखक की पढ़ाई में क्या सुधार आया? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    अनुशासन, मॉनीटर, गणित।

    Answer

    मंत्री मास्टर के अनुशासन से कक्षा में ऊधम बंद हुआ, और होशियार मॉनीटर वसंत पाटील की देखादेखी लेखक ने भी मन लगाकर पढ़ना शुरू किया। उसे गणित समझ में आने लगा और मास्टर के 'आनंदा' कहने से उसका आत्मविश्वास बढ़ा।

  3. Q3 · 5 marks · Long answerHarder board level

    लेखक ने जब भैंस की पीठ और पत्थर पर कविता की तुकबंदी लिखी, तब यह उसके किस विकास का संकेत है? सौंदलगेकर मास्टर की भूमिका सहित स्पष्ट कीजिए (लगभग 100 शब्द)।

    Hint

    रचनात्मक आत्मविश्वास और मास्टर से मार्गदर्शन।

    Answer

    भैंस की पीठ और पत्थर पर तुकबंदी लिखना लेखक के भीतर जागी रचनात्मकता और आत्मविश्वास का संकेत है। सौंदलगेकर मास्टर को कवि के रूप में देखकर उसे लगा कि कवि भी साधारण मनुष्य होता है, इसलिए वह भी कविता लिख सकता है। उसने अपनी तुकबंदी मास्टर को दिखाई और उनसे छंद, अलंकार तथा शुद्ध लेखन सीखा। इस मार्गदर्शन से उसकी मराठी सुधरी और उसे शब्दों का नशा चढ़ने लगा।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level

    चह्वाण के लड़के के उपहास के बाद भी लेखक अगले दिन पाठशाला क्यों गया? इससे उसके चरित्र की कौन-सी विशेषताएँ प्रकट होती हैं? (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    पढ़ने की तड़प, धैर्य, व्यावहारिकता।

    Answer

    लेखक को पढ़ने की तीव्र तड़प थी और वह जानता था कि खेती से भविष्य नहीं बनेगा। चह्वाण के लड़के ने उसका गमछा छीना और धोती खींची, जिससे उसे लगा कि उसकी पाठशाला उसे घायल कर रही है। फिर भी उसने माँ से नई टोपी और कपड़े मँगवाए और अगले दिन गया। इससे उसका धैर्य, दृढ़ निश्चय, दूरदर्शिता और जुझारूपन प्रकट होता है।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    यदि सौंदलगेकर मास्टर कविता गाकर पढ़ाने की जगह केवल अर्थ लिखवाते, तो लेखक में कविता के प्रति रुचि कैसे बदल जाती? अपना मत तर्क सहित लिखिए (लगभग 100 शब्द)।

    Hint

    गाने और अभिनय का प्रभाव बनाम रटंत।

    Answer

    तब शायद लेखक को कविता रटने का बोझ लगती और वह उसे जीवन से जोड़ने के बजाय परीक्षा की वस्तु मानता। मास्टर के गाने और अभिनय से कविता में सुर, भाव और दृश्य जीवंत होते थे, इसलिए लेखक खेत में भी उन्हें गाता और अभिनय करता था। कवियों के संस्मरणों ने कवि को साधारण मनुष्य दिखाया, जिससे उसे स्वयं लिखने का विश्वास मिला। केवल अर्थ लिखवाने से यह प्रेरणा नहीं बनती, इसलिए उसकी रुचि सीमित रह जाती।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.'जूझ' किसकी रचना है?Show answer

    मराठी कथाकार आनंद यादव के आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश।

  2. 2.हिंदी अनुवादक कौन हैं?Show answer

    केशव प्रथम वीर।

  3. 3.मराठी के शिक्षक का नाम क्या था?Show answer

    न.वा. सौंदलगेकर।

  4. 4.मंत्री मास्टर लेखक को किस नाम से पुकारते थे?Show answer

    आनंदा।

  5. 5.लेखक ने पहली तुकबंदी कहाँ लिखी?Show answer

    भैंस की पीठ और पत्थर पर।

जूझ: सौंदलगेकर मास्टर और कविता रचने का आत्मविश्वास: frequently asked questions

'जूझ' का अर्थ क्या है?

संघर्ष।

यह पाठ किस शैली में है?

आत्मकथात्मक 'मैं' शैली में।

पाठ का मुख्य संदेश क्या है?

संकल्प और अच्छे शिक्षक की प्रेरणा से कठिन परिस्थितियों में भी पढ़ाई और रचनाशीलता का मार्ग बन सकता है।

इस पाठ से बोर्ड में क्या पूछा जाता है?

वितान भाग 2 से 5 अंक के लगभग 100 शब्दों के प्रश्न: शीर्षक का औचित्य, शिक्षक का प्रभाव, पात्रों की तुलना और अकेलेपन के प्रति धारणा।