कैमरे में बंद अपाहिज (रघुवीर सहाय): व्यंग्य, कोष्ठक और शीर्षक (कक्षा 12)
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
इस कविता में टीवी कार्यक्रम का संचालक एक अपाहिज से बेतुके प्रश्न पूछकर उसे और दर्शकों को रुलाना चाहता है ताकि कार्यक्रम रोचक बने। कवि 'सामाजिक उद्देश्य' और करुणा के मुखौटे में छिपी मीडिया की व्यावसायिकता और संवेदनहीनता पर व्यंग्य करता है। कोष्ठकों में लिखी बातें कैमरे के पीछे की असली मंशा बताती हैं। अपाहिज के न रोने पर 'परदे पर वक्त की कीमत है' कहकर कार्यक्रम रोक दिया जाता है।
Notice the gap: the anchor speaks of social purpose, but the bracketed thoughts reveal tears and airtime as the real aim.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand कैमरे में बंद अपाहिज: व्यंग्य, कोष्ठक और मीडिया की संवेदनहीनता
कविता तीन परतों में खुलती है: संचालक का दंभ, प्रश्नों की क्रूरता और कार्यक्रम का पाखंडी अंत।
दंभ। संचालक कहता है, 'हम समर्थ शक्तिवान, हम एक दुर्बल को लाएँगे, एक बंद कमरे में'। शक्ति और दुर्बलता का यह विरोध बताता है कि मीडिया अपनी ताकत से एक कमज़ोर व्यक्ति की गरिमा को रौंदता है। 'बंद कमरा' टीवी स्टूडियो का और अपाहिज की कैद का भी संकेत है, जो शीर्षक 'कैमरे में बंद' को सार्थक करता है।
प्रश्नों की क्रूरता। 'क्या आप अपाहिज हैं? क्यों अपाहिज हैं? आपका अपाहिजपन आपको दुख देता होगा?' जैसे प्रश्न संवेदनहीन और बेतुके हैं। जब अपाहिज बोल नहीं पाता तो संचालक स्वयं इशारे से बताने को तैयार है। वह कैमरामैन से बड़ा-बड़ा दिखाने को कहता है, ताकि फूली हुई आँख की बड़ी तसवीर और होंठों की कसमसाहट परदे पर दिखे और दर्शक उसे पीड़ा समझें। वह दर्शकों से कहता है कि हम उसे पूछ-पूछकर रुला देंगे और आप भी उसके रो पड़ने का इंतज़ार करते हैं।
कोष्ठक। कोष्ठकों में कैमरामैन के निर्देश और संचालक के मन की बातें हैं, जैसे '(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा)' और '(बस थोड़ी ही कसर रह गई)'। ये उस असली मंशा को उजागर करते हैं जो दर्शकों से छिपाई जाती है। इनसे कविता नाटक का रूप ले लेती है।
अंत। अपाहिज नहीं रोता। तब आदेश आता है, 'बस करो, नहीं हुआ, रहने दो, परदे पर वक्त की कीमत है'। संचालक मुस्कुराकर कहता है कि आप देख रहे थे 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम'। यही व्यंग्य का शिखर है।
दर्शकों की भी भूमिका है: वे सनसनी के उपभोक्ता हैं और अनजाने में उस क्रूरता में भागीदार बन जाते हैं। अपाहिज का न रोना उसका आत्मसम्मान है।
कैमरे में बंद अपाहिज: व्यंग्य, कोष्ठक और मीडिया की संवेदनहीनता: key facts
- व्यंग्य के तीन बिंदु
- सामाजिक उद्देश्य का दिखावा
- दुख को बेचने की मानसिकता
- दर्शकों की सनसनी-प्रियता
- 3 अंक के उत्तर में तीनों पर एक-एक प्रमाण लिखें।
- कोष्ठकों के कार्य
- कैमरामैन को निर्देश
- संचालक की असली मंशा
- दर्शकों से छिपी बात
- कविता में नाटकीयता
- दो कोष्ठक उद्धृत करना आवश्यक है।
- शीर्षक की सार्थकता
- बंद कमरा = स्टूडियो
- कैमरे में कैद = निजता और गरिमा की कैद
- अपाहिज = शोषित मनुष्य
- शीर्षक के प्रश्न में दोनों अर्थ लिखें।
कैमरे में बंद अपाहिज: व्यंग्य, कोष्ठक और मीडिया की संवेदनहीनता in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
दुख का प्रदर्शन
मान लीजिए एक कार्यक्रम में किसी दुर्घटना से बचे बच्चे से बार-बार पूछा जाता है कि 'तुम्हें कैसा लग रहा है?' और कैमरा उसके आँसू पर रुक जाता है।
यह कविता की किन बातों से मेल खाता है और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- बार-बार वही प्रश्न = 'अपना दुख बताइए, कैसा लगता है'।
- आँसू पर कैमरा = 'फूली हुई आँख की एक बड़ी तसवीर'।
- दुख का प्रदर्शन = कार्यक्रम को रोचक बनाना।
Answer: संचालक के प्रश्न और क्लोज़-अप की मंशा से; दुख का प्रदर्शन संवेदना के स्थान पर मनोरंजन बन जाता है।
Memory hook: आँसू का क्लोज़-अप: दुख की बिक्री।
गरिमा बनाम लोकप्रियता
मान लीजिए एक वीडियो-निर्माता किसी वृद्ध महिला की गरीबी का वीडियो इसलिए बनाता है कि उसे अधिक दर्शक मिलें, महिला की मदद के लिए नहीं।
कविता के किस कथन से इसकी तुलना हो सकती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- दर्शक पाने का लक्ष्य = कार्यक्रम को रोचक बनाना।
- महिला की मदद न करना = करुणा का मुखौटा।
Answer: 'कार्यक्रम रोचक बनाने के वास्ते हम पूछ-पूछकर उसको रुला देंगे': लक्ष्य लोकप्रियता है, संवेदना नहीं।
Memory hook: मदद नहीं, मसाला।
Tricks to remember कैमरे में बंद अपाहिज: व्यंग्य, कोष्ठक और मीडिया की संवेदनहीनता
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
दिखावा बनाम असली
बाहर की पंक्ति में दिखावा, कोष्ठक में असली मंशा।
Use it when: कोष्ठकों के प्रश्न में।
शक्ति-दुर्बलता का जोड़ा
समर्थ शक्तिवान और दुर्बल, संचालक और अपाहिज, कैमरा और कैद।
Use it when: व्यंग्य और शीर्षक के उत्तर में।
कैमरे में बंद अपाहिज: व्यंग्य, कोष्ठक और मीडिया की संवेदनहीनता: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: कोष्ठक की पहचान · 1 mark · MCQBoard level
'(बस थोड़ी ही कसर रह गई)' कोष्ठकगत पंक्ति से संचालक की कौन-सी मंशा प्रकट होती है?
(क) अपाहिज की पीड़ा पर दुख
(ख) अपाहिज को न रुला पाने का अफ़सोस
(ग) कार्यक्रम पर गर्व
(घ) दर्शकों से क्षमा-याचना
Try it first, then show the solutionSolution
- कोष्ठक में संचालक के मन की बात है।
- वह अपाहिज को रुलाने में थोड़ी चूक का अफ़सोस मना रहा है।
Answer: (ख) अपाहिज को न रुला पाने का अफ़सोस, जो उसके पाखंड को खोल देता है।
Example 2: वक्त की कीमत · 2 marks · Short answerHarder board level
'परदे पर वक्त की कीमत है' कथन मीडिया की किस मानसिकता को प्रकट करता है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- यह कथन तब आता है जब अपाहिज नहीं रोता।
- समय और पैसा मनुष्य की भावना से ऊपर है।
Answer: यह कथन मीडिया की व्यावसायिक और संवेदनहीन मानसिकता दिखाता है। अपाहिज के न रोने पर संचालक कार्यक्रम बंद करवा देता है, क्योंकि उसके लिए परदे का समय और पैसा किसी व्यक्ति की भावना या गरिमा से अधिक महत्त्वपूर्ण है।
Example 3: कोष्ठकों की सार्थकता · 3 marks · Long answerHarder board level
कविता में कोष्ठकों में दिए गए कथनों की सार्थकता दो उदाहरण देकर समझाइए (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- पहला उदाहरण: कैमरामैन को निर्देश।
- दूसरा उदाहरण: संचालक के मन की बात।
- प्रभाव: सच्चाई सामने आना, नाटकीयता।
Answer: '(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा)' में कैमरामैन को निर्देश है, जो दिखाता है कि पीड़ा को क्लोज़-अप में दिखाना ही उद्देश्य है। '(बस थोड़ी ही कसर रह गई)' संचालक के मन की बात है, जो रुलाने की विफलता पर अफ़सोस दिखाती है। ये कोष्ठक असली मंशा उजागर करके व्यंग्य को तीखा और कविता को नाटकीय बनाते हैं।
Example 4: शीर्षक की सार्थकता · 3 marks · Long answerHarder board level
'कैमरे में बंद अपाहिज' शीर्षक कविता के लिए कितना उपयुक्त है? दो तर्क दीजिए (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- शाब्दिक अर्थ: अपाहिज स्टूडियो के बंद कमरे में कैमरे के सामने है।
- प्रतीकात्मक अर्थ: उसकी गरिमा और निजता कैद है।
- व्यंग्य का केंद्र।
Answer: शीर्षक उपयुक्त है। शाब्दिक रूप से अपाहिज बंद कमरे में कैमरे के सामने है। प्रतीकात्मक रूप से उसकी पीड़ा, निजता और गरिमा कैमरे की क्रूर निगाह में कैद हो गई है। कविता का केंद्रीय विषय भी यही है कि मीडिया दूसरे के दुख को अपने कार्यक्रम का सामान बना लेता है।
Example 5: दर्शक भी कठघरे में · 3 marks · Long answerHOTS / competency
कविता में संचालक दर्शकों से भी कहता है कि 'आप भी उसके रो पड़ने का इंतज़ार करते हैं'। इससे कवि दर्शकों के बारे में क्या संकेत देता है? अपना मत तर्क सहित लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- संचालक दर्शकों की अपेक्षा मान लेता है।
- यह उस रुचि का संकेत है जो दुख को तमाशे की तरह देखती है।
- कवि दर्शकों को आत्म-निरीक्षण के लिए प्रेरित करता है।
Answer: कवि संकेत देता है कि दर्शक भी अनजाने में इस क्रूरता में भागीदार हैं। संचालक यह मानकर चलता है कि वे दुख का प्रदर्शन देखना चाहते हैं, इसलिए कार्यक्रम बनता है। यह पंक्ति पाठक को आत्म-निरीक्षण के लिए प्रेरित करती है कि क्या वह दूसरों की पीड़ा को सहानुभूति से देखता है या मनोरंजन की तरह।
Where students lose marks in कैमरे में बंद अपाहिज: व्यंग्य, कोष्ठक और मीडिया की संवेदनहीनता
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कविता को अपाहिज की पीड़ा की कविता बताना
केंद्र अपाहिज की पीड़ा नहीं, उसे प्रदर्शन बनाने वाले मीडिया की संवेदनहीनता है।
Wrong working
कविता में अपाहिज की पीड़ा का वर्णन है।
Right working
कविता में मीडिया द्वारा अपाहिज की पीड़ा को बेचे जाने पर व्यंग्य है।
Do this: पहले वाक्य में व्यंग्य का विषय लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: कोष्ठकों को बेकार बात मान लेना
कोष्ठक असली मंशा और कविता की नाटकीयता के वाहक हैं।
Do this: कम से कम दो कोष्ठक उद्धृत कर उनका कार्य लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: संचालक को सहृदय मान लेना
वह करुणा का दिखावा करता है, पर लक्ष्य रोचकता है।
Do this: उसके चरित्र में दंभ, व्यावसायिकता और पाखंड लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: शीर्षक का केवल शाब्दिक अर्थ लिखना
प्रतीकात्मक अर्थ (गरिमा की कैद) भी आवश्यक है।
Do this: दोनों अर्थ दो पंक्तियों में लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- व्यंग्य के प्रश्न में तीन बिंदु लिखें: दिखावा, व्यावसायिकता और दर्शकों की रुचि।
- कोष्ठकों के उदाहरण शब्दशः उद्धृत करें।
- अपाहिज के मौन और अंतिम पंक्तियों की विडंबना का उल्लेख करें।
- शीर्षक के प्रश्न में शाब्दिक और प्रतीकात्मक दोनों अर्थ दें।
- कविता का संग्रह 'लोग भूल गये हैं' याद रखें।
Practice questions on कैमरे में बंद अपाहिज: व्यंग्य, कोष्ठक और मीडिया की संवेदनहीनता
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
'हम समर्थ शक्तिवान, हम एक दुर्बल को लाएँगे' में कौन-सा भाव प्रकट होता है?
(क) विनम्रता
(ख) शक्ति का दंभ
(ग) करुणा
(घ) भयHint
'समर्थ' और 'दुर्बल' का विरोध देखिए।
Answer
(ख) शक्ति का दंभ; संचालक अपने को शक्तिशाली और अपाहिज को दुर्बल कहता है।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
संचालक कैमरामैन से अपाहिज की 'फूली हुई आँख की बड़ी तसवीर' क्यों दिखाना चाहता है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
दर्शकों को पीड़ा का आभास कराना।
Answer
संचालक चाहता है कि दर्शक फूली आँख और होंठों की कसमसाहट के बड़े चित्र को देखकर अपाहिज की पीड़ा का अनुभव करें और रो पड़ें। उसका उद्देश्य संवेदना नहीं, कार्यक्रम को प्रभावशाली और रोचक बनाना है।
Q3 · 3 marks · Long answerHarder board level
कविता में मीडिया की भूमिका पर किन-किन रूपों में व्यंग्य किया गया है? तीन बिंदुओं में लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
दंभ, व्यावसायिकता, मुखौटा।
Answer
पहला, मीडिया का अहंकार: 'हम समर्थ शक्तिवान' कहकर वह कमज़ोर को रौंदता है। दूसरा, व्यावसायिकता: दुख को बेचकर कार्यक्रम रोचक बनाना और 'वक्त की कीमत' को मनुष्य से ऊपर रखना। तीसरा, करुणा का मुखौटा: 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम' कहना, जबकि असली लक्ष्य अपाहिज और दर्शक दोनों को रुलाना है।
Q4 · 3 marks · Long answerHarder board level
अपाहिज के न रोने से उसके चरित्र की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है? कविता के आधार पर तर्क सहित लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
आत्मसम्मान, मौन प्रतिरोध।
Answer
अपाहिज के न रोने से उसका आत्मसम्मान और मौन प्रतिरोध प्रकट होता है। संचालक उसे बार-बार उकसाता है, पर वह अपनी पीड़ा को तमाशा बनने नहीं देता। उसका यह मौन संचालक की योजना को असफल कर देता है और कविता का व्यंग्य और गहरा हो जाता है, क्योंकि पाखंड उजागर हो जाता है।
Q5 · 3 marks · Long answerHOTS / competency
मान लीजिए कार्यक्रम का संचालक अंत में कहता, 'आपका धन्यवाद, हम अपाहिज की सहायता करेंगे।' इससे कविता के व्यंग्य और संदेश पर क्या प्रभाव पड़ता? तर्क सहित अपना मत लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
वर्तमान अंत की विडंबना और 'थोड़ी कसर' वाला कोष्ठक।
Answer
तब व्यंग्य की धार कम हो जाती और कविता आश्वस्ति में बदल जाती। वर्तमान अंत की विडंबना यह है कि कार्यक्रम 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त' कहा जाता है, पर संचालक के मन में केवल रुलाने की कसर का अफ़सोस है। सहायता की घोषणा से यह पाखंड ढक जाता और कवि का मूल संदेश कमज़ोर पड़ता।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'कैमरे में बंद अपाहिज' किस संग्रह से ली गई है?Show answer
'लोग भूल गये हैं' से।
2.संचालक स्वयं को क्या कहता है?Show answer
समर्थ शक्तिवान।
3.अपाहिज के न रोने पर संचालक क्या आदेश देता है?Show answer
कैमरा बंद करने का, यह कहकर कि परदे पर वक्त की कीमत है।
4.कविता में कोष्ठकों में किसकी बातें हैं?Show answer
कैमरामैन के निर्देश और संचालक के मन की असली बातें।
5.कार्यक्रम को अंत में क्या कहा गया?Show answer
सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम।
कैमरे में बंद अपाहिज: व्यंग्य, कोष्ठक और मीडिया की संवेदनहीनता: frequently asked questions
कविता के कवि कौन हैं?
रघुवीर सहाय, जो पत्रकार भी थे।
कविता का मूल संदेश क्या है?
मीडिया दूसरे के दुख को बेचने की वस्तु न बनाए; संवेदना और गरिमा सर्वोपरि है।
क्या यह कविता अपाहिजों के विरुद्ध है?
नहीं, यह अपाहिज के पक्ष में और संवेदनहीन प्रस्तुति के विरुद्ध व्यंग्य है।
इस कविता से बोर्ड में क्या पूछा जाता है?
काव्यांश पर MCQ, कोष्ठकों का प्रयोजन, व्यंग्य, शीर्षक की सार्थकता और संदेश पर 2-3 अंक के प्रश्न।