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HindiCBSE Class 12 · जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन

बाज़ार दर्शन (जैनेंद्र कुमार): बाज़ार का जादू, पर्चेज़िंग पावर और बाज़ारूपन (कक्षा 12)

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

बाज़ार का जादू आँख की राह चलता है और उस पर सबसे अधिक असर होता है जिसकी जेब भरी और मन खाली हो, यानी जिसे पता नहीं कि उसे क्या चाहिए। ऐसे लोग पैसे की 'पर्चेज़िंग पावर' के गर्व में फ़िजूल सामान खरीदते हैं। जैनेंद्र कुमार के अनुसार उपाय है: मन खाली हो तो बाज़ार न जाओ। चूरन वाले भगत जी जैसे संतोषी लोग बाज़ार को सार्थकता देते हैं, जबकि पर्चेज़िंग पावर का दिखावा करने वाले 'बाज़ारूपन' बढ़ाते हैं।

Understand बाज़ार का जादू, पर्चेज़िंग पावर और बाज़ारूपन

इस निबंध की चार धारणाएँ अलग-अलग समझिए।

1. बाज़ार का जादू। लेखक कहते हैं, बाज़ार में एक जादू है जो आँख की राह काम करता है। जैसे चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे यह जादू भी तब चलता है जब जेब भरी हो और मन खाली हो। जादू उतरने पर पता चलता है कि फ़ैंसी चीज़ें आराम नहीं, खलल देती हैं।

2. पर्चेज़िंग पावर। पहला मित्र मामूली चीज़ लेने गया और बहुत-से बंडल लेकर लौटा; लेखक के अनुसार असली कारण पत्नी नहीं, मनीबैग यानी पैसे की गर्मी थी। पैसा पावर है, और उसकी 'पर्चेज़िंग पावर' दिखाने में ही कुछ लोगों को रस मिलता है; सामान ज़रूरत के अनुसार नहीं, खरीदने की शक्ति के अनुपात में आता है।

3. मन खाली और मन भरा। दूसरा मित्र दिन भर बाज़ार में घूमकर खाली हाथ लौटा, क्योंकि वह सब कुछ चाहता था और कुछ भी नहीं छोड़ना चाहता था। जब यह पता न हो कि क्या चाहिए, तो चारों ओर की चाह घेर लेती है। उपाय है कि मन खाली हो तो बाज़ार न जाओ, जैसे लू में पानी पीकर जाना चाहिए। पर लेखक यह भी कहते हैं कि इच्छाओं को पूरी तरह मार देना (शून्य हो जाना) ठीक नहीं।

4. भगत जी और बाज़ारूपन। भगत जी चूरन बेचते हैं, रोज़ छह आने से अधिक नहीं कमाते और बचा चूरन बच्चों को मुफ़्त बाँट देते हैं। बाज़ार में वे खुली आँखों, संतुष्ट मन से चलते हैं और पंसारी की दुकान से केवल जीरा और काला नमक लेते हैं। उन पर जादू नहीं चलता, क्योंकि उनका मन भरा है। लेखक के अनुसार 'निर्बल ही धन की ओर झुकता है'। बाज़ार की असली कृतार्थता है आवश्यकता के समय काम आना। जो यह नहीं जानते कि वे क्या चाहते हैं, वे बाज़ार को शैतानी व्यंग्य की शक्ति देते हैं; इससे 'बाज़ारूपन' बढ़ता है, यानी कपट बढ़ता और सद्भाव घटता है, ग्राहक और विक्रेता एक-दूसरे को ठगने लगते हैं, और ऐसे बाज़ार का पोषक अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र है।

शैली: चुंबक, लू और पानी जैसे दृष्टांत, प्रश्न शैली, व्यंग्य और बोलचाल के अंग्रेज़ी-उर्दू शब्द ('पर्चेज़िंग पावर', 'मनीबैग', 'फ़ैंसी') निबंध को कहानी जैसा रोचक बनाते हैं।

बाज़ार का जादू, पर्चेज़िंग पावर और बाज़ारूपन: key facts

जादू के चलने की शर्त
  • जेब भरी
  • मन खाली
  • आँख की राह
  • बचाव: मन खाली हो तो बाज़ार न जाओ
'मन खाली' का अर्थ है कि क्या चाहिए, यह स्पष्ट नहीं।
तीन पात्र, तीन स्थितियाँ
पहला मित्रज़रूरत से ज़्यादा खरीदा
दूसरा मित्रसब चाहा, कुछ न लिया
भगत जीकेवल ज़रूरत का जीरा और काला नमक
तीनों के साथ उनके कारण भी याद रखें।
बाज़ार की सार्थकता और बाज़ारूपन
सार्थकता: आवश्यकता के समय काम आना | बाज़ारूपन: कपट बढ़ना, सद्भाव घटना, ग्राहक-विक्रेता की ठगी
परिभाषा के प्रश्न में दोनों का अंतर लिखें।

बाज़ार का जादू, पर्चेज़िंग पावर और बाज़ारूपन in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

ऑनलाइन खरीदारी का जादू

मान लीजिए आपकी बड़ी बहन के पास बोनस के पैसे आए हैं और वे बिना सूची के शॉपिंग ऐप खोलकर घंटों 'ऑफ़र' देखती रहती हैं, फिर कई ऐसी चीज़ें मँगा लेती हैं जो महीनों तक पैकेट में रखी रहती हैं।

इस स्थिति पर 'बाज़ार दर्शन' का कौन-सा विचार लागू होता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पैसे की मौजूदगी = जेब भरी।
  2. बिना सूची के खरीदना = मन खाली।
  3. बेकार रखी चीज़ें = जादू उतरने पर पता चलना कि चीज़ें आराम नहीं देतीं।

Answer: जेब भरी और मन खाली होने पर बाज़ार का जादू चलता है; उपाय है कि पहले ज़रूरत की सूची बनाई जाए।

Memory hook: सूची के बिना बाज़ार: जादू की चपेट।

संतोष और ज़रूरत भर खरीद

मान लीजिए आपके मोहल्ले का एक दर्ज़ी हर महीने की एक तारीख को केवल ज़रूरत के धागे और बटन खरीदता है, दुकान के नए ऑफ़र उसे आकर्षित नहीं करते, और बचे समय में बच्चों को मुफ़्त सिलाई सिखाता है।

दर्ज़ी का व्यवहार निबंध के किस पात्र से मिलता है और क्यों?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ज़रूरत भर खरीद = भगत जी का जीरा और काला नमक।
  2. ऑफ़र से अप्रभावित = मन भरा होना।
  3. बच्चों को मुफ़्त सिखाना = बचा चूरन बच्चों को देने जैसी उदारता।

Answer: भगत जी से; संतोष, संयम और उदारता तीनों समान हैं।

Memory hook: ज़रूरत भर लो, बाकी बाँट दो।

Tricks to remember बाज़ार का जादू, पर्चेज़िंग पावर और बाज़ारूपन

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ज-म-आ

    जेब भरी, मन खाली, आँख की राह: जादू के तीन सूत्र।

    Use it when: बाज़ार के जादू वाले प्रश्न में।

  • सार्थक बनाम बाज़ारू

    सार्थक: जानता है क्या चाहिए। बाज़ारू: दिखावा, कपट और ठगी।

    Use it when: बाज़ारूपन और सार्थकता का अंतर लिखने में।

बाज़ार का जादू, पर्चेज़िंग पावर और बाज़ारूपन: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: जादू कब चलता है · 1 mark · MCQBoard level

लेखक के अनुसार बाज़ार का जादू सबसे अधिक किस पर चलता है?
(क) जिसकी जेब भरी और मन खाली हो
(ख) जिसकी जेब खाली और मन भरा हो
(ग) जिसकी जेब और मन दोनों भरे हों
(घ) जिसके पास पैसे ही न हों

Try it first, then show the solutionSolution
  1. चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है; उसी तरह बाज़ार का जादू उसी पर चलता है जिसकी जेब भरी और मन खाली हो।
  2. यह मर्यादा भरी जेब और खाली मन की स्थिति है।

Answer: (क) जिसकी जेब भरी और मन खाली हो।

Example 2: पर्चेज़िंग पावर · 2 marks · Short answerHarder board level

पहले मित्र के अधिक सामान खरीद लाने का असली कारण लेखक के अनुसार क्या था? 'पर्चेज़िंग पावर' का आशय भी बताइए (लगभग 40 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. असली कारण पत्नी नहीं, मनीबैग यानी पैसे की गर्मी।
  2. पर्चेज़िंग पावर = खरीदने की शक्ति।

Answer: लेखक के अनुसार असली कारण मनीबैग, यानी पैसे की गर्मी थी, पत्नी नहीं। पर्चेज़िंग पावर का आशय पैसे की खरीदने की शक्ति है, जिसके प्रदर्शन में लोगों को रस मिलता है और वे ज़रूरत से अधिक सामान खरीद लेते हैं।

Example 3: भगत जी का व्यक्तित्व · 3 marks · Long answerHarder board level

बाज़ार में भगत जी के व्यक्तित्व के किन गुणों का पता चलता है? उदाहरण सहित लिखिए (लगभग 60 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. संतोष: छह आने से अधिक नहीं कमाते।
  2. उदारता: बचा चूरन बच्चों को देते हैं।
  3. विवेक: पंसारी की दुकान से केवल जीरा और काला नमक।

Answer: भगत जी संतोषी हैं; वे रोज़ छह आने से अधिक नहीं कमाते। वे उदार हैं, बचा चूरन बच्चों को मुफ़्त बाँट देते हैं। वे विवेकी हैं, बाज़ार में खुली आँखों से चलते हैं और बड़े-बड़े फ़ैंसी स्टोर छोड़कर पंसारी की दुकान से केवल ज़रूरत का जीरा और काला नमक लेते हैं। इसलिए बाज़ार का जादू उन पर नहीं चलता।

Example 4: बाज़ारूपन · 3 marks · Long answerHarder board level

'बाज़ारूपन' से लेखक का क्या अभिप्राय है? उसके दुष्परिणाम स्पष्ट कीजिए (लगभग 60 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. परिभाषा: कपट बढ़ना, सद्भाव घटना।
  2. कारण: जो नहीं जानते कि क्या चाहते हैं, पर्चेज़िंग पावर का गर्व।
  3. परिणाम: ठगी, शोषण, अनीति-शास्त्र।

Answer: बाज़ारूपन का आशय है बाज़ार में कपट का बढ़ना और सद्भाव का घटना। जो लोग नहीं जानते कि उन्हें क्या चाहिए, वे पर्चेज़िंग पावर के गर्व में बाज़ार को शैतानी व्यंग्य की शक्ति देते हैं। इसका दुष्परिणाम है कि ग्राहक और विक्रेता एक-दूसरे को ठगने लगते हैं, शोषण बढ़ता है और अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र बन जाता है।

Example 5: बाज़ार-विरोधी या बाज़ार-समर्थक? · 3 marks · Long answerHOTS / competency

क्या लेखक बाज़ार के विरोधी हैं? निबंध के दो प्रमाणों के साथ अपना मत दीजिए (लगभग 60 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रमाण 1: भगत जी बाज़ार जाते हैं और ज़रूरत भर खरीदते हैं।
  2. प्रमाण 2: बाज़ार की कृतार्थता आवश्यकता के समय काम आना है; इच्छाओं को मारना शून्यता है।
  3. निष्कर्ष: लेखक दुरुपयोग के विरोधी हैं, बाज़ार के नहीं।

Answer: लेखक बाज़ार के नहीं, उसके दुरुपयोग के विरोधी हैं। भगत जी बाज़ार जाते हैं और ज़रूरत भर चीज़ें लेते हैं। लेखक यह भी कहते हैं कि बाज़ार की असली कृतार्थता आवश्यकता के समय काम आना है और इच्छाओं को पूरी तरह मार देना ठीक नहीं। विरोध केवल उस खरीद और दिखावे का है जो खाली मन से की जाती है।

Where students lose marks in बाज़ार का जादू, पर्चेज़िंग पावर और बाज़ारूपन

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: 'मन खाली' का अर्थ 'मन में कुछ भी न होना' लिख देना

    यहाँ आशय है कि यह स्पष्ट न होना कि क्या चाहिए।

    Wrong working

    मन खाली यानी उदास मन।

    Right working

    मन खाली यानी यह निश्चित न होना कि क्या चाहिए।

    Do this: 'ज़रूरत का स्पष्ट बोध न होना' शब्द लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: लेखक को बाज़ार-विरोधी बताना

    लेखक बाज़ारूपन और दिखावे के विरोधी हैं, बाज़ार के नहीं।

    Do this: भगत जी के बाज़ार जाने का प्रमाण दें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: भगत जी की कमाई की राशि गलत लिखना

    पाठ के अनुसार वे रोज़ छह आने से अधिक नहीं कमाते।

    Do this: संख्या पक्की न हो तो लिखें 'बहुत सीमित, संतोष भर'।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: बाज़ारूपन को केवल महँगा सामान बताना

    बाज़ारूपन कपट और सद्भाव के ह्रास का नाम है।

    Do this: कपट, ठगी और शोषण का उल्लेख करें।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • 'जेब भरी, मन खाली' को उद्धृत करके ही जादू की शर्त बताएँ।
  • तीनों पात्रों (दो मित्र, भगत जी) की तुलना तालिका की तरह लिखें।
  • भगत जी के उत्तर में संतोष, संयम और उदारता तीनों के प्रमाण दें।
  • बाज़ारूपन और बाज़ार की सार्थकता का अंतर स्पष्ट लिखें।
  • शैली के प्रश्न में चुंबक और लू-पानी के दृष्टांत का उल्लेख करें।

Practice questions on बाज़ार का जादू, पर्चेज़िंग पावर और बाज़ारूपन

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    लेखक ने बाज़ार के जादू की तुलना किससे की है?
    (क) बिजली से
    (ख) चुंबक से
    (ग) आग से
    (घ) हवा से

    Hint

    जो लोहे पर ही चलता है।

    Answer

    (ख) चुंबक से, जिसका जादू केवल लोहे पर चलता है।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    दूसरा मित्र दिन भर बाज़ार में घूमकर भी कुछ क्यों नहीं खरीद सका? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    सब चाहना और कुछ न छोड़ना।

    Answer

    दूसरे मित्र को बाज़ार में सब कुछ लेने का मन था और वह कुछ भी नहीं छोड़ना चाहता था। एक चीज़ लेने का अर्थ बाकी सब छोड़ना था, इसलिए वह कुछ नहीं ले सका। उसे पता नहीं था कि उसे वास्तव में क्या चाहिए।

  3. Q3 · 3 marks · Long answerHarder board level

    'मन खाली हो, तब बाज़ार न जाओ' का आशय स्पष्ट कीजिए और लेखक द्वारा दिए गए दृष्टांत का उल्लेख कीजिए (लगभग 60 शब्द)।

    Hint

    लू में पानी पीकर जाना।

    Answer

    इसका आशय है कि जब यह स्पष्ट न हो कि क्या चाहिए, तब बाज़ार नहीं जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे में उसका जादू जल्दी असर करता है। लेखक दृष्टांत देते हैं कि जैसे लू में बाहर जाना हो तो पानी पीकर जाना चाहिए, वैसे ही बाज़ार जाने से पहले ज़रूरत का स्पष्ट बोध होना चाहिए।

  4. Q4 · 3 marks · Long answerHarder board level

    'निर्बल ही धन की ओर झुकता है' का भाव भगत जी के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए (लगभग 60 शब्द)।

    Hint

    संतोष सच्चा बल है।

    Answer

    लेखक के अनुसार जो भीतर से निर्बल है, वही धन के सहारे अपनी शक्ति दिखाना चाहता है। भगत जी के पास कम कमाई है, फिर भी वे संतुष्ट हैं, बचा चूरन बाँट देते हैं और ज़रूरत भर खरीदते हैं। उन पर पैसे की व्यंग्य-शक्ति भी असर नहीं करती। इसलिए उनका संतोष ही सच्चा आत्मबल है।

  5. Q5 · 3 marks · Long answerHOTS / competency

    एक विद्यार्थी का तर्क है, 'यदि सभी लोग भगत जी की तरह केवल ज़रूरत भर खरीदें तो बाज़ार और अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी।' निबंध के आधार पर इस तर्क का उत्तर दीजिए (लगभग 60 शब्द)।

    Hint

    बाज़ार की सार्थकता ज़रूरत पूरी करने में है।

    Answer

    निबंध के अनुसार बाज़ार की असली सार्थकता आवश्यकता के समय काम आना है, इसलिए ज़रूरत भर खरीद बाज़ार को बंद नहीं करती, बल्कि उसे सार्थक बनाती है। भगत जी भी बाज़ार जाते और खरीदते हैं। लेखक का विरोध अनावश्यक दिखावे और कपट के बाज़ारूपन से है, जो मनुष्यों के बीच ठगी और शोषण बढ़ाता है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.बाज़ार का जादू किस राह से काम करता है?Show answer

    आँख की राह से।

  2. 2.जादू से बचने का उपाय क्या है?Show answer

    मन खाली हो तो बाज़ार न जाओ।

  3. 3.भगत जी क्या बेचते हैं?Show answer

    चूरन।

  4. 4.'निर्बल ही धन की ओर झुकता है' किसके संदर्भ में कहा गया?Show answer

    भगत जी के आत्मबल की चर्चा में।

  5. 5.बाज़ार की असली कृतार्थता क्या है?Show answer

    आवश्यकता के समय काम आना।

बाज़ार का जादू, पर्चेज़िंग पावर और बाज़ारूपन: frequently asked questions

'बाज़ार दर्शन' किस विधा का पाठ है?

विचारात्मक (कथात्मक) निबंध।

जैनेंद्र कुमार का जन्म और निधन किस वर्ष हुआ?

जैनेंद्र कुमार का जन्म 1905 में और निधन 1988 में हुआ।

पर्चेज़िंग पावर का क्या अर्थ है?

पैसे की खरीदने की शक्ति, जिसके प्रदर्शन में कुछ लोगों को रस मिलता है।

इस पाठ से बोर्ड में क्या पूछा जाता है?

गद्यांश पर 5 MCQ, भगत जी का चरित्र, बाज़ारूपन, पर्चेज़िंग पावर और विचार-विस्तार जैसे 2-3 अंक के प्रश्न।