Skip to content
HindiCBSE Class 12 · हरिवंश राय बच्चन – आत्मपरिचय, एक गीत

आत्मपरिचय (हरिवंश राय बच्चन): विरोधाभास और कवि-जग का संबंध (कक्षा 12)

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

'आत्मपरिचय' में कवि संसार का भार भी ढोता है और उससे अलग भी रहता है: जग के जीवन का भार लेकर भी वह प्यार लिए फिरता है। इसी द्वंद्व को वह विरोधाभासी पंक्तियों से व्यक्त करता है: 'रोदन में राग', 'शीतल वाणी में आग', 'उन्मादों में अवसाद'। 'जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते' से स्पष्ट है कि कवि चापलूसी नहीं, अपने मन का गान करता है। बोर्ड में इन पंक्तियों का आशय और कवि-जग संबंध पूछा जाता है।

The poet both carries the world's burden and loves it, yet sings his own song; his paradoxes show joy and sorrow living together.

Illustration drawn for QuestionBuddy.

Understand आत्मपरिचय: विरोधाभास और कवि का जग से संबंध

विरोधाभास में दो परस्पर उलटी लगने वाली बातें एक साथ कही जाती हैं, पर उनके भीतर एक गहरा सत्य होता है। कविता में कवि अपने व्यक्तित्व को ऐसे ही जोड़ों से सामने रखता है।

पहला संकेत पहली पंक्ति में ही है: 'मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ, फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ।' यहाँ कवि जग के दायित्वों और दुखों को स्वीकार करता है, पर उसके प्रति प्रेम भी रखता है। किसी प्रिय ने उसकी साँसों के तारों को छूकर झंकृत कर दिया है, इसलिए उसका जीवन संगीत से भरा है।

दूसरा पक्ष अलगाव का है। कवि प्रेम की 'सुरा' पीता है और जग का ध्यान नहीं करता। संसार उन्हीं को पूछता है जो उसकी प्रशंसा गाते हैं, पर कवि अपने मन का गान करता है। संसार अधूरा है, इसलिए वह अपने सपनों का संसार लिए फिरता है। संसार भवसागर पार करने के लिए नाव बनाता है, जबकि कवि लहरों पर मस्त होकर बहता है।

तीसरा पक्ष विरोधाभास का है। वह रोने में भी राग लिए है, शीतल वाणी में भी आग लिए है। उसके यौवन के उन्माद में अवसाद छिपा है, क्योंकि किसी की याद उसे बाहर हँसाती और भीतर रुलाती है। इन पंक्तियों का आशय यह है कि कवि का मन सुख और दुख दोनों को साथ जीता है।

चौथा पक्ष ज्ञान पर प्रश्न का है। 'नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना' का भाव है कि जहाँ ज्ञानी हैं, वहीं नासमझी भी है; सत्य किसी को पूरा नहीं मिला। इसलिए कवि सीखा हुआ ज्ञान भुलाना सीख रहा है।

निष्कर्ष: कवि जग से प्रेम भी करता है और अपनी स्वतंत्रता के लिए उससे असहमत भी है। इसी द्वंद्वात्मक संबंध को दोनों पक्षों के प्रमाण के साथ लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं।

आत्मपरिचय: विरोधाभास और कवि का जग से संबंध: key facts

विरोधाभास की मुख्य पंक्तियाँ
  • रोदन में राग
  • शीतल वाणी में आग
  • उन्मादों में अवसाद
  • नादान वहीं है जहाँ पर दाना
पहले शाब्दिक विरोध, फिर भाव लिखें।
कवि और जग का संबंध
जुड़ाव: जग का भार, प्यार, मस्ती का संदेश | अलगाव: जग की परवाह नहीं, वैभव का तिरस्कार, अपना सपनों का संसार
3 अंक के उत्तर में दोनों पक्ष लिखें।
प्रतीक और रूपक
  • स्नेह-सुरा = प्रेम की मदिरा
  • भव-सागर = संसार
  • साँसों के तार = जीवन का संगीत
रूपक में उपमेय-उपमान अभिन्न होते हैं।

आत्मपरिचय: विरोधाभास और कवि का जग से संबंध in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

दो बातें एक साथ: विरोधाभास

मान लीजिए आपके विद्यालय का एक प्रधानाचार्य बहुत नम्र बोलते हैं, पर अनुशासन के प्रश्न पर अपने निर्णय से रत्ती भर नहीं हटते।

इसे कवि की किस पंक्ति से जोड़ा जा सकता है और क्यों?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. नम्र वाणी = शीतल वाणी।
  2. अटल निर्णय = भीतर की आग, यानी दृढ़ता।
  3. इसलिए 'शीतल वाणी में आग' वाली पंक्ति से मेल है।

Answer: 'शीतल वाणी में आग': नम्र बोली के भीतर दृढ़ संकल्प की आँच है।

Memory hook: ऊपर ठंडा, भीतर आँच: शीतल वाणी में आग।

जग की सुनना या अपने मन की

मान लीजिए आपका एक मित्र सब लोगों की वाहवाही पाने के लिए वही गाने गाता है जो भीड़ को पसंद हैं, जबकि दूसरा मित्र अपनी लिखी धुनें गाता है।

दोनों मित्रों में से कौन कवि के दृष्टिकोण के निकट है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहला मित्र उनमें है जो जग की गाते हैं और जग उन्हें पूछता है।
  2. दूसरा मित्र अपने मन का गान करता है।
  3. कवि दूसरे के निकट है।

Answer: दूसरा मित्र; कवि कहता है 'मैं अपने मन का गान किया करता हूँ'।

Memory hook: वाहवाही नहीं, अपना गान।

Tricks to remember आत्मपरिचय: विरोधाभास और कवि का जग से संबंध

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • दो पलड़े

    एक पलड़े पर जुड़ाव (भार, प्यार, मस्ती का संदेश), दूसरे पर अलगाव (परवाह नहीं, वैभव ठुकराना): कवि दोनों के बीच संतुलित है।

    Use it when: कवि-जग संबंध के 3 अंक वाले प्रश्न में।

  • विरोधाभास के तीन जोड़े

    रोदन-राग, शीतल-आग, उन्माद-अवसाद: हर जोड़े में दो उलटे भाव साथ आते हैं (दुख-आनंद, शीतलता-ज्वाला, उल्लास-उदासी)। पहले जोड़ा पहचानिए, फिर बताइए कि दोनों एक ही मन में कैसे हैं।

    Use it when: पंक्ति का आशय लिखने से पहले जोड़ा पहचानने के लिए।

आत्मपरिचय: विरोधाभास और कवि का जग से संबंध: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: विरोधाभास की पहचान · 1 mark · MCQBoard level

'मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूँ' पंक्ति में विरोधाभास किन दो बातों के बीच है?
(क) रोदन और राग
(ख) मैं और रोदन
(ग) राग और फिरता
(घ) निज और राग

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रोदन दुख का और राग संगीत-आनंद का प्रतीक है।
  2. दोनों उलटे भाव हैं, पर एक ही कवि में साथ हैं।

Answer: (क) रोदन और राग: दुख की स्थिति में भी कवि के भीतर संगीत और आनंद है।

Example 2: शीतल वाणी में आग · 2 marks · Short answerHarder board level

'मैं शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ' का आशय स्पष्ट कीजिए (लगभग 40 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. शाब्दिक विरोध: शीतलता और आग।
  2. भाव: विनम्र बोली के पीछे तीव्र भावों की आँच।
  3. कवि के स्वभाव से जोड़ें।

Answer: कवि कहता है कि उसकी वाणी ऊपर से शांत और कोमल है, पर उसके भीतर तीव्र भावों की ज्वाला है। यह कवि के असंतोष, प्रेम की पीड़ा और विद्रोही स्वभाव को प्रकट करता है। बाहर की शीतलता और भीतर की आग का मेल उसके व्यक्तित्व का विरोधाभास है।

Example 3: कवि और जग का संबंध · 3 marks · Long answerHarder board level

'आत्मपरिचय' के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कवि का संसार से कैसा संबंध है (लगभग 60 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. जुड़ाव: जग का भार, प्यार, मस्ती का संदेश।
  2. अलगाव: जग की परवाह नहीं, वैभव का तिरस्कार, अपना संसार।
  3. निष्कर्ष: द्वंद्वात्मक संबंध।

Answer: कवि का संसार से संबंध प्रेम और विरोध दोनों का है। वह जग-जीवन का भार लिए फिरता है और जग को मस्ती का संदेश भी देता है। पर वह जग की परवाह नहीं करता, उसकी प्रशंसा गाने वालों में शामिल नहीं होता और जिस वैभव को जग जोड़ता है उसे ठुकराता है। वह अपने सपनों का अलग संसार लिए फिरता है।

Example 4: ज्ञान पर व्यंग्य · 3 marks · Long answerHarder board level

'नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना!' में कवि क्या कहना चाहता है? इसके आधार पर वह क्या सीखने का प्रयत्न करता है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सत्य को कोई पूरी तरह नहीं जान पाया।
  2. ज्ञानी और नासमझ दोनों साथ हैं।
  3. इसलिए कवि सीखा हुआ ज्ञान भुलाना सीख रहा है।

Answer: कवि का भाव है कि बहुत प्रयत्न करके भी कोई सत्य को पूरी तरह नहीं जान पाया; जहाँ ज्ञानी होने का दावा है, वहीं नासमझी भी है। यह ज्ञान के अहंकार पर व्यंग्य है। इसी कारण कवि अपना सीखा हुआ ज्ञान भुलाना सीख रहा है और अपने अनुभव तथा प्रेम की राह चुनता है।

Example 5: दीवाना और कवि · 3 marks · Long answerHOTS / competency

कवि स्वयं को 'कवि' के बजाय 'दुनिया का एक नया दीवाना' क्यों कहता है? अपना मत दो तर्कों के साथ लिखिए (लगभग 60 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लोग उसके रोने को गाना और फूट पड़ने को छंद कहते हैं, पर कवि मानता है कि वह जो करता है वह स्वाभाविक भाव का उद्गार है, कला-प्रदर्शन नहीं।
  2. 'दीवाना' शब्द मस्ती और जग की मान्यताओं से अलगाव दोनों दिखाता है।
  3. वह मस्ती का संदेश देता है।

Answer: लोग उसके रोने को गाना और फूट पड़ने को छंद कहते हैं, पर कवि स्वयं को केवल कवि नहीं मानता। वह मानता है कि उसके शब्द सहज भावों का उद्गार हैं, इसलिए वह स्वयं को दुनिया का नया दीवाना कहता है। दीवानापन उसकी मस्ती और जग की रीतियों से दूरी को दिखाता है, और वह इसी मस्ती का संदेश देता है।

Where students lose marks in आत्मपरिचय: विरोधाभास और कवि का जग से संबंध

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: विरोधाभास का केवल शब्दार्थ लिखना

    आशय में शाब्दिक विरोध के पीछे का भाव भी लिखना होता है।

    Wrong working

    'शीतल वाणी में आग' का अर्थ है वाणी ठंडी है और उसमें आग है।

    Right working

    वाणी ऊपर से शांत है, पर भीतर तीव्र भावों की ज्वाला है; यह कवि के द्वंद्व को दिखाता है।

    Do this: 'शाब्दिक अर्थ + भाव' दो पंक्तियों में लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: कवि-जग संबंध में केवल एक पक्ष लिखना

    संबंध द्वंद्वात्मक है; जुड़ाव और अलगाव दोनों चाहिए।

    Do this: पहले जुड़ाव का प्रमाण, फिर अलगाव का प्रमाण, अंत में निष्कर्ष।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: 'स्नेह-सुरा' को शराब पीने की बात समझ लेना

    यह रूपक है; सुरा प्रेम की मस्ती का प्रतीक है।

    Wrong working

    कवि शराब पीता है।

    Right working

    कवि प्रेम रूपी मदिरा की मस्ती में डूबा रहता है।

    Do this: प्रतीक पर लिखते समय 'का आशय' शब्द प्रयोग करें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: 'आत्मपरिचय' और 'एक गीत' के भाव मिला देना

    'एक गीत' में समय और प्रतीक्षा का भाव है, 'आत्मपरिचय' में जग से संबंध।

    Do this: अंश पढ़कर पहले कविता का नाम तय करें।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • विरोधाभास वाली पंक्ति पूछे तो पहले विरोधी जोड़ा बताइए, फिर उसके पीछे का भाव।
  • कवि-जग संबंध में 'भार लेकर भी प्यार' और 'जग की परवाह नहीं' दोनों उद्धरण दीजिए।
  • 'नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना' को ज्ञान के अहंकार पर व्यंग्य के रूप में समझाइए।
  • रूपक पहचानते समय देखें कि वाचक शब्द नहीं है: स्नेह-सुरा, भव-सागर।
  • MCQ में कथन-कारण के विकल्प ध्यान से पढ़ें; कारण अक्सर आधा सही होता है।

Practice questions on आत्मपरिचय: विरोधाभास और कवि का जग से संबंध

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    'मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ' में 'स्नेह-सुरा' का आशय है—
    (क) शराब का नशा
    (ख) प्रेम रूपी मदिरा, यानी प्रेम की मस्ती
    (ग) संसार का धन
    (घ) औषधि

    Hint

    स्नेह और सुरा का रूपक देखिए।

    Answer

    (ख) प्रेम रूपी मदिरा; कवि प्रेम की मस्ती में डूबा रहता है।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    संसार की ओर से भवसागर पार करने का प्रयास और कवि का व्यवहार, इन दोनों में अंतर लिखिए (लगभग 40 शब्द)।

    Hint

    नाव बनाना बनाम लहरों पर मस्त बहना।

    Answer

    संसार भवसागर पार करने के लिए नाव बनाता है, यानी सुरक्षित साधन खोजता है। कवि नाव नहीं चाहता; वह भवसागर की लहरों पर मस्त होकर बहता है। इससे कवि की निश्चिंतता और अलग जीवन-दृष्टि का पता चलता है।

  3. Q3 · 3 marks · Long answerHarder board level

    'उन्मादों में अवसाद' में विरोधाभास किस प्रकार है? कवि के जीवन की किस स्थिति से इसका संबंध है? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    किसी की याद बाहर हँसाती और भीतर रुलाती है।

    Answer

    उन्माद उल्लास की और अवसाद उदासी की स्थिति है, इसलिए दोनों का साथ होना विरोधाभास है। कवि के यौवन का उन्माद ऊपर से दिखता है, पर किसी की याद उसे भीतर रुलाती है और बाहर हँसाती है। इस प्रकार उसका मन उल्लास और पीड़ा दोनों का मिश्रण है।

  4. Q4 · 3 marks · Long answerHarder board level

    कवि कहता है कि वह जग की परवाह नहीं करता, फिर भी जग-जीवन का भार लिए फिरता है। इन दोनों कथनों में विरोध है या सामंजस्य? पाठ के आधार पर तर्क दीजिए (लगभग 60 शब्द)।

    Hint

    परवाह न करना यानी चापलूसी न करना; भार ढोना यानी दायित्व स्वीकारना।

    Answer

    ऊपर से विरोध लगता है, पर भीतर सामंजस्य है। जग की परवाह न करने का आशय है उसकी वाहवाही और वैभव की चिंता न करना, जैसा कि कवि अपने मन का गान गाकर दिखाता है। जग-जीवन का भार लेना उसके दायित्वों और दुखों को स्वीकारना है। इस प्रकार वह जग से जुड़ा भी है और स्वतंत्र भी।

  5. Q5 · 3 marks · Long answerHOTS / competency

    यदि आत्मपरिचय का कवि किसी दरबारी की तरह राजाओं और धनिकों की प्रशंसा के गीत गाने लगे, तो कविता के कौन-से कथन असत्य हो जाएँगे? दो कथन चुनकर कारण लिखिए।

    Hint

    'अपने मन का गान' और वैभव को ठुकराना।

    Answer

    तब 'मैं अपने मन का गान किया करता हूँ' असत्य हो जाएगा, क्योंकि वह दूसरों को खुश करने के लिए गाएगा। 'जिस पृथ्वी पर जग वैभव जोड़ता है, मैं उसे ठुकराता हूँ' भी असत्य होगा, क्योंकि प्रशंसा के गीत वैभव की ही आराधना हैं। इस प्रकार उसका स्वाभिमान और स्वतंत्रता टूट जाएगी।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.'आत्मपरिचय' का पहला विरोधाभास क्या है?Show answer

    जग-जीवन का भार लेकर भी जीवन में प्यार लिए फिरना।

  2. 2.जग किन्हें पूछता है?Show answer

    जो जग की प्रशंसा गाते हैं।

  3. 3.कवि अपने रोने और वाणी के बारे में क्या कहता है?Show answer

    रोदन में राग और शीतल वाणी में आग लिए फिरता है।

  4. 4.कवि स्वयं को क्या कहता है?Show answer

    कवि नहीं, दुनिया का एक नया दीवाना।

  5. 5.'स्नेह-सुरा' में कौन-सा अलंकार है?Show answer

    रूपक।

आत्मपरिचय: विरोधाभास और कवि का जग से संबंध: frequently asked questions

'आत्मपरिचय' के कवि कौन हैं?

हरिवंश राय बच्चन।

'आत्मपरिचय' का मुख्य भाव क्या है?

कवि का संसार से प्रेम और विरोध का द्वंद्वात्मक संबंध तथा मस्ती का संदेश।

क्या 'एक गीत' भी इसी पाठ में है?

हाँ, पाठ में 'आत्मपरिचय' और 'एक गीत' दोनों कविताएँ हैं; यह पृष्ठ केवल 'आत्मपरिचय' पर है।

काव्यांश के प्रश्न किस खंड में आते हैं?

खंड ग (आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2) के काव्य खंड में, 5 MCQ और 2-3 अंक के प्रश्न।