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HindiISC Class 11 · Chapter 8

ISC Class 11 हिंदी शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा: सार, पात्र और हल सहित प्रश्न

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

'शरणागत' में ललितपुर का कसाई रज्जब बीमार पत्नी के साथ एक गाँव में रात भर की शरण माँगता है। गाँव का ठाकुर, जो छिपकर डकैती भी करवाता है, उसे शरण देता है। अगले दिन उसके साथी रास्ते में रज्जब को लूटने लगते हैं, तो ठाकुर उसे बचाता है: बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता।

What शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा is about

शरणागत ऐतिहासिक उपन्यासों के लिए प्रसिद्ध बुंदेलखंड के कथाकार वृंदावनलाल वर्मा (1889-1969) की कहानी है। ISC 2028 की पाठ्य-पुस्तक-सूची के अनुसार यह गद्य संकलन (Evergreen Publications) के कक्षा XI भाग का तीसरा पाठ है। वर्मा जी 'झाँसी की रानी', 'मृगनयनी' जैसे उपन्यासों के लेखक हैं; उनकी रचनाओं में बुंदेलखंड का समाज, उसकी आन-बान और लोक-मान्यताएँ जीवंत रूप में आती हैं।

कहानी शरणागत-रक्षा के बुंदेला धर्म पर आधारित है। एक गरीब ठाकुर, जिसका गाँव में दबदबा है और जो चोरी-छिपे डाके डलवाता है, समाज में घृणित माने जाने वाले एक कसाई को इसलिए शरण देता है कि वह 'राजा' के घर शरण में आया है। अगले दिन वही ठाकुर अपने ही साथियों के विरुद्ध खड़ा होकर रज्जब की रक्षा करता है।

2025 के ISC बोर्ड प्रश्न-पत्र (प्रश्न 4) में इसी कहानी की अंतिम पंक्ति उद्धृत हुई थी: "परन्तु बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता, इस बात को गाँठ बाँध लेना।" पूछा गया था: पाठ और रचनाकार का नाम (1 अंक), शरणागत कौन है और उसे सहायता की आवश्यकता क्यों हुई (2), किस 'घात' की बात है (2), और कहानी में समाज की किस बुराई की ओर संकेत है तथा उसे दूर करने के लिए आप क्या करेंगे (5)। परीक्षकों के अनुसार कई विद्यार्थी लेखक का नाम भूल गए, 'शरणागत कौन है' वाला अंश छोड़ गए, और 'घात' का अर्थ 'विश्वासघात' नहीं लिख पाए।

यह पृष्ठ गद्यकोश पर उपलब्ध कहानी के पाठ और CISCE की 2025 अंक-योजना पर आधारित है; अपनी पाठ्य-पुस्तक से मिलान करें।

Weightage: CISCE अध्यायवार अंक प्रकाशित नहीं करता। गद्य संकलन से तीन प्रश्न (एक गद्यांश-आधारित, दो दीर्घ, 10-10 अंक) आते हैं; 2025 में इस कहानी पर 10 अंकों का गद्यांश-आधारित प्रश्न (1+2+2+5) आया था। कक्षा XI का प्रश्न-पत्र विद्यालय बनाता है।Source: CISCE का ISC 2028 परिशिष्ट I (हिंदी 805, गद्य संकलन, कक्षा XI); ISC विद्यार्थी-प्रदर्शन विश्लेषण 2025 (हिंदी), प्रश्न 4

शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

शरण की खोज। ललितपुर का कसाई रज्जब अपना धंधा करके पत्नी के साथ घर लौट रहा है; उसकी गाँठ में दो-तीन सौ रुपये की बड़ी रकम है। रास्ता बीहड़ और सुनसान है, ललितपुर दूर है और पत्नी को बुखार है, इसलिए वह मड़पुरा गाँव में रात बिताना चाहता है। गाँव के जिन लोगों ने उसे चोरी-छिपे पशु बेचे थे, वे भी बदनामी के डर से उसे ठहरने नहीं देते।

ठाकुर की शरण। अंत में वह गाँव के एक गरीब ठाकुर के द्वार पहुँचता है, जिसे लोग डर से 'राजा' कहते हैं। कसाई सुनकर ठाकुर पहले कठोर हो जाता है, पर जब रज्जब कहता है कि यह राजा का घर है, इसलिए शरण में आया है, तो वह नरम पड़ जाता है और उसे पौर के एक कोने में रात भर ठहरने देता है। रात में ठाकुर के कुछ साथी आकर बताते हैं कि रुपयों की मोट बाँधे एक कसाई इधर आया था, पर हाथ से निकल गया; वे कल उसे लूटेंगे। ठाकुर कहता है कि कसाई का पैसा नहीं छुएँगे, और साथियों को टाल देता है।

गाँव से निकाला जाना। सुबह पत्नी चल नहीं पाती, तो ठाकुर लोकमत के डर से रज्जब को बाहर कर देता है। रज्जब पेड़ के नीचे बैठा रहता है, फिर मुश्किल से एक गाड़ीवान को अधिक किराया देकर ललितपुर चलने को राज़ी करता है। रास्ते में वह गाड़ीवान को धमकाता भी है।

लूट और रक्षा। अँधेरे में चार-पाँच लठैत गाड़ी रोक लेते हैं। गाड़ीवान बता देता है कि यह ललितपुर का कसाई है। एक लठैत अपने साथी से कान में कहता है कि इसका नाम रज्जब है, छोड़ो। दूसरा नहीं मानता और रज्जब की छाती पर लाठी अड़ाकर रुपये माँगता है। तब नीचे खड़ा व्यक्ति, जो वही ठाकुर (दाऊजू) है, कड़ककर उसे रोकता है: वह मेरी शरण आया था। वह सबको घर भेज देता है, गाड़ीवान को रज्जब को ठिकाने तक पहुँचाने का आदेश देता है, और नाराज़ साथी से कहता है: 'परंतु बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता, इस बात को गाँठ बाँध लेना।'

Themes and message

शरणागत-रक्षा का धर्म

बुंदेलखंड की परंपरा में शरण में आए व्यक्ति की रक्षा को धर्म माना जाता है। ठाकुर डाके डलवाने वाला है, फिर भी शरणागत के साथ विश्वासघात नहीं करता; 2025 की अंक-योजना के अनुसार बुंदेला शरणागत की रक्षा को धर्म मानता है।

From the text: 'परंतु बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता, इस बात को गाँठ बाँध लेना।'

जाति और पेशे पर आधारित भेदभाव

रज्जब को कोई ठहरने नहीं देता, क्योंकि वह कसाई है; ठाकुर भी उसका पैसा 'अशुद्ध' मानता है और लोकमत के डर से सुबह उसे निकाल देता है। 2025 के प्रश्न में इसी सामाजिक बुराई पर विचार माँगा गया था।

From the text: रज्जब: बहुत कोशिश की, परंतु मेरे खोटे पेशे के कारण कोई सीधा नहीं हुआ।

मनुष्य के चरित्र की जटिलता

ठाकुर न पूरा बुरा है, न पूरा अच्छा: वह किसानों से पेशगी लगान वसूलता है और डाके डलवाता है, पर वचन और धर्म का पक्का है। लेखक दिखाता है कि मनुष्य में अच्छाई और बुराई साथ-साथ रहती हैं।

From the text: रात में साथियों से: 'कसाई का पैसा न छुएँगे।'

मानवता और सहानुभूति

रज्जब गाड़ीवान से कहता है कि आफ़त सब पर आती है और मनुष्य ही मनुष्य को सहारा देता है। कहानी विपत्ति में पड़े मनुष्य की सहायता को सबसे बड़ा धर्म बताती है।

From the text: 'मनुष्य मनुष्य को सहारा देता है, जानवर तो देते नहीं।'

Characters

ठाकुर (दाऊजू)

मड़पुरा गाँव का गरीब पर दबदबे वाला ठाकुर, जिसे लोग 'राजा' कहते हैं

  • शरणागत-रक्षा के धर्म का पक्का
  • रोबीला और निर्भीक
  • लोकमत से डरने वाला
  • चोरी-छिपे डाके डलवाने वाला

कसाई को शरण देता है; साथियों को टालता है; सुबह बदनामी के डर से निकालता है; रास्ते में अपने ही साथियों से रज्जब को बचाता है।

रज्जब

ललितपुर का गरीब कसाई; शरणागत

  • पत्नी की चिंता करने वाला
  • विनम्र, पर कभी-कभी क्रोधी
  • व्यावहारिक

बीमार पत्नी के लिए जगह-जगह शरण माँगता है; गाड़ीवान को छुरे की धमकी देता है; लठैतों के सामने गिड़गिड़ाता है।

गाड़ीवान

रज्जब को ललितपुर ले जाने वाला

  • लालची
  • डरपोक

अधिक पैसे लेकर चलता है; लुटेरों के सामने बता देता है कि यह कसाई है।

ठाकुर के साथी (लठैत)

लूटने वाले

  • लोभी
  • धर्म-अधर्म से बेपरवाह

एक कहता है, 'मैं कसाइयों की दवा हूँ'; ठाकुर के डाँटने पर नीचे उतरता है।

How it is written

DeviceExampleEffect
चरम-बिंदु पर रहस्योद्घाटनअंत में पता चलता है कि लुटेरों का मुखिया ही वह ठाकुर है जिसने शरण दी थी।कहानी में रोमांच और चरित्र की जटिलता दोनों उभरते हैं।
बुंदेली रंग वाली भाषा और संवाद'दाऊजू, एक बिनती है'; 'पौर'; 'गढ़ी'।स्थानीय वातावरण सजीव होता है।
मुहावरे'गाँठ बाँध लेना'; 'टस से मस न होना'; 'घिग्घी बँध जाना'।भाषा प्रभावी और सहज बनती है।
विरोधाभासडाका डलवाने वाला ठाकुर ही धर्म का रक्षक।पाठक को सोचने पर विवश करता है कि नैतिकता कितनी जटिल है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • परंतु बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता, इस बात को गाँठ बाँध लेना।

    ठाकुर (दाऊजू): कहानी की अंतिम पंक्ति, नाराज़ साथी से (2025 प्रश्न-पत्र में उद्धृत)।

    कहानी का केंद्रीय संदेश: शरणागत से विश्वासघात न करना बुंदेला धर्म है।

  • यह राजा का घर है, इसलिए शरण में आया हुआ है।

    रज्जब: ठाकुर के कठोर प्रश्न के उत्तर में।

    इसी वाक्य से ठाकुर का शरण-धर्म जाग उठता है।

  • कसाई का पैसा न छुएँगे।

    ठाकुर: रात में लूट की योजना बताने आए साथियों से।

    ठाकुर के मन में कसाई के प्रति घृणा भी है और अपना एक नियम भी।

  • मनुष्य मनुष्य को सहारा देता है, जानवर तो देते नहीं।

    रज्जब: हठी गाड़ीवान से विनती करते हुए।

    मानवता का संदेश, उस व्यक्ति के मुख से जिसे समाज ठुकराता है।

  • खबरदार, जो उसे छुआ।

    ठाकुर: रज्जब को लूटने पर अड़े साथी से।

    शरणागत की रक्षा के लिए अपने ही साथियों के विरुद्ध खड़ा होना।

शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

शरण और विश्वास

मान लीजिए आपके मोहल्ले में देर रात कोई अनजान यात्री बीमार परिवार के साथ मदद माँगता है और लोग उसके काम या धर्म के बारे में पूछकर दरवाज़ा बंद कर देते हैं।

'शरणागत' इस स्थिति में क्या सिखाती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रज्जब को भी पेशे के कारण कोई ठहरने नहीं देता था।
  2. विपत्ति में पड़े व्यक्ति की सहायता पहला धर्म है।
  3. शरण देकर धोखा देना सबसे बड़ा अपराध है।

Answer: कहानी सिखाती है कि संकट में पड़े व्यक्ति की सहायता उसकी पहचान पूछकर नहीं की जाती; और जिसे सहायता दी, उसके साथ विश्वासघात नहीं किया जाता।

Memory hook: शरण दी, तो रक्षा भी।

पेशे पर आधारित भेदभाव

कल्पना कीजिए कि आपकी कक्षा में किसी सहपाठी को इसलिए अलग बैठाया जाता है कि उसके माता-पिता सफ़ाई का काम करते हैं।

कहानी के संदर्भ में यह व्यवहार कैसा है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रज्जब को कसाई होने के कारण ठुकराया गया।
  2. पेशा व्यक्ति के सम्मान का पैमाना नहीं।
  3. ऐसा भेदभाव समाज को बाँटता है।

Answer: जैसे रज्जब के साथ अन्याय हुआ, वैसे ही किसी को काम के कारण नीचा देखना अन्याय है; 2025 के प्रश्न ने इसी बुराई को दूर करने के उपाय पूछे थे।

Memory hook: काम छोटा-बड़ा नहीं, सोच होती है।

वचन की दृढ़ता

मान लीजिए आपने किसी मित्र का रहस्य न बताने का वचन दिया है और दूसरे मित्र दबाव डालते हैं।

ठाकुर के व्यवहार से क्या सीख मिलती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ठाकुर पर साथियों का दबाव था।
  2. उसने अपना धर्म नहीं छोड़ा और साथियों से भिड़ गया।
  3. वचन निभाने में साहस चाहिए।

Answer: दबाव में भी दिए हुए वचन और विश्वास पर टिके रहना चरित्र की असली परीक्षा है, जैसा ठाकुर ने किया।

Memory hook: गाँठ बाँध लो: विश्वास नहीं तोड़ना।

Topics in this chapter

How the school exam asks शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
गद्यांश: पाठ और रचनाकार (1 अंक)'उक्त पंक्तियों से सम्बन्धित पाठ तथा रचनाकार का नाम लिखिए।' (2025)पाठ 'शरणागत', रचनाकार वृंदावनलाल वर्मा; दोनों अवश्य।
गद्यांश: शरणागत कौन, 'घात' का अर्थ (2 + 2 अंक)'यहाँ शरणागत कौन है तथा उसे सहायता लेने की आवश्यकता क्यों हुई?' 'उक्त पंक्तियों में किस घात की बात की जा रही है? समझाकर लिखिए।' (2025)पहले 'कौन' का स्पष्ट उत्तर (रज्जब, गरीब कसाई), फिर कारण; 'घात' = विश्वासघात, फिर प्रसंग।
गद्यांश: सामाजिक बुराई पर विचार (5 अंक) और दीर्घ प्रश्न (10 अंक)'कहानी में समाज की किस बुराई की ओर संकेत किया गया है? समाज से उस बुराई को दूर करने के लिए आप क्या करेंगे? कोई…' (2025); ठाकुर का चरित्र; शीर्षक की सार्थकता।बुराई की पहचान कहानी के प्रमाण से, फिर अपने ठोस उपाय; चरित्र में अच्छे-बुरे दोनों पक्ष।

Tricks to remember शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • शरण, शर्म, सड़क, संकट, संरक्षण

    शरण मिली; शर्म (लोकलाज) से निकाला; सड़क पर गाड़ी; संकट (लुटेरे); संरक्षण (ठाकुर)।

    Use it when: कहानी का क्रम।

  • घात = विश्वासघात

    अंतिम वाक्य का मुख्य शब्द।

    Use it when: 2025 जैसे प्रश्न।

शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: गद्यांश (i): पाठ और रचनाकार (2025) · 1 mark · Very short answerExam level

"परन्तु बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता, इस बात को गाँठ बाँध लेना।" उक्त पंक्तियों से सम्बन्धित पाठ तथा रचनाकार का नाम लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाठ: शरणागत।
  2. रचनाकार: वृंदावनलाल वर्मा (2025 में कई विद्यार्थी लेखक का नाम भूल गए)।

Answer: पाठ: 'शरणागत'; रचनाकार: वृंदावनलाल वर्मा।

Example 2: गद्यांश (ii) और (iii): शरणागत और घात (2025) · 4 marks · Short answerHarder exam level

(ii) यहाँ 'शरणागत' कौन है तथा उसे सहायता लेने की आवश्यकता क्यों हुई? (iii) उक्त पंक्तियों में किस 'घात' की बात की जा रही है? समझाकर लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. (ii) कौन: रज्जब नामक गरीब कसाई; क्यों: पत्नी बीमार, मार्ग बीहड़ और सुनसान, ललितपुर दूर, पास में बड़ी रकम।
  2. (iii) घात = विश्वासघात; ठाकुर अपने ही साथियों के सामने रज्जब की रक्षा के लिए खड़ा होता है; बुंदेला शरणागत की रक्षा को धर्म मानता है।

Answer: (ii) यहाँ शरणागत ललितपुर का रज्जब नामक गरीब कसाई है। उसकी पत्नी को तेज़ बुखार था, आगे का रास्ता बीहड़ और सुनसान था, गाँव दूर था और उसके पास दो-तीन सौ रुपये की बड़ी रकम थी; इसलिए उसे रात भर के लिए किसी की शरण और सुरक्षा की आवश्यकता हुई।
(iii) यहाँ 'घात' का अर्थ विश्वासघात है। ठाकुर के साथी उसी रज्जब को लूटना चाहते थे जिसे ठाकुर ने अपने घर शरण दी थी। ठाकुर कहता है कि जो व्यक्ति शरण में आया हो, उसे धोखा देकर लूटना या मारना विश्वासघात है, और बुंदेला ऐसा कभी नहीं करता; इसलिए वह अपने ही साथियों के विरुद्ध खड़ा होकर रज्जब की रक्षा करता है।

Example 3: गद्यांश (iv): समाज की बुराई और उसका निवारण (2025) · 5 marks · Long answerHOTS / competency

कहानी में समाज की किस बुराई की ओर संकेत किया गया है? समाज से उस बुराई को दूर करने के लिए आप क्या करेंगे? कोई दो उपाय लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बुराई: जाति/पेशे के आधार पर भेदभाव और घृणा; साथ ही लूटपाट और लोभ।
  2. प्रमाण: कोई ठहरने नहीं देता; पैसा 'अशुद्ध'; सुबह लोकमत के डर से निकाला जाना।
  3. उपाय: जागरूकता, सबके साथ समान व्यवहार, विपत्ति में सहायता।

Answer: कहानी में मुख्य रूप से जाति और पेशे के आधार पर किए जाने वाले भेदभाव की ओर संकेत है। रज्जब कसाई है, इसलिए गाँव का कोई व्यक्ति उसे बीमार पत्नी के साथ रात भर ठहरने नहीं देता, जबकि उन्हीं लोगों ने चोरी-छिपे उसे अपने पशु बेचे थे। ठाकुर भी उसके पैसे को 'अशुद्ध' मानता है और सुबह लोगों की बातों के डर से उसे घर से निकाल देता है। साथ ही कहानी लूटपाट और लोभ की बुराई भी दिखाती है।
इस बुराई को दूर करने के लिए मैं पहला उपाय यह करूँगा कि अपने आस-पास लोगों को समझाऊँ कि कोई पेशा व्यक्ति को छोटा या बड़ा नहीं बनाता; हर मनुष्य सम्मान का अधिकारी है। दूसरा, मैं स्वयं विपत्ति में पड़े किसी भी व्यक्ति की, उसकी जाति या काम पूछे बिना, सहायता करूँगा, और विद्यालय में ऐसे कार्यक्रमों में भाग लूँगा जो सामाजिक समरसता बढ़ाते हैं।

Example 4: दीर्घ प्रश्न: ठाकुर का चरित्र · 10 marks · Long answerHarder exam level

'शरणागत' कहानी के ठाकुर के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए। क्या आप उसे आदर्श पात्र मानते हैं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. गरीब पर दबदबे वाला, 'राजा' कहलाने वाला।
  2. शरणागत-रक्षक: रज्जब को शरण, अंत में रक्षा।
  3. कसाई से घृणा, पैसा न छूने का नियम।
  4. लोकमत से डरने वाला: सुबह निकाला।
  5. डाके डलवाने वाला: नैतिक जटिलता।
  6. निर्भीक, आदेश देने वाला।
  7. निष्कर्ष: पूर्ण आदर्श नहीं, पर धर्म का पक्का।

Answer: ठाकुर 'शरणागत' का सबसे जटिल और रोचक पात्र है।
दबदबे वाला व्यक्ति। वह गरीब है, उसके पास थोड़ी-सी ज़मीन है, फिर भी गाँव के लोग डर से उसे 'राजा' कहते हैं और वह किसानों से दो-तीन साल का पेशगी लगान वसूल लेता है।
शरणागत-रक्षक। कसाई सुनकर वह पहले कठोर होता है, पर 'राजा का घर है, इसलिए शरण में आया हुआ है' सुनते ही नरम पड़ जाता है और रज्जब को पौर में ठहरा लेता है।
अपने नियम का पक्का। रात में साथी कसाई को लूटने की बात करते हैं, तो वह कहता है, 'कसाई का पैसा न छुएँगे', और उन्हें टाल देता है।
लोकमत से डरने वाला। सुबह रज्जब के रुक जाने पर वह गाँव की बकवास के डर से उसे बाहर कर देता है; यह उसकी दुर्बलता है।
नैतिक जटिलता। वह चोरी-छिपे डाके डलवाता है; रास्ते में लुटेरों का मुखिया वही है। फिर भी जब साथी रज्जब पर लाठी अड़ाता है, तो वह कड़ककर कहता है, 'खबरदार, जो उसे छुआ', और अंत में घोषणा करता है कि बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता।
निष्कर्ष। ठाकुर पूर्ण आदर्श पात्र नहीं है: उसमें भेदभाव, लोकलाज और अपराध के दोष हैं। पर शरणागत की रक्षा के लिए अपने ही साथियों से भिड़ जाना उसके चरित्र की ऊँचाई है। लेखक ने उसके माध्यम से दिखाया है कि बुरे दिखने वाले व्यक्ति में भी धर्म और वचन की रेखा हो सकती है।

Example 5: दीर्घ प्रश्न: शीर्षक की सार्थकता · 10 marks · Long answerHOTS / competency

'शरणागत' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. शरणागत का अर्थ: शरण में आया व्यक्ति।
  2. रज्जब शरणागत है: शरण माँगना, मिलना।
  3. कहानी का चरम: शरणागत की रक्षा।
  4. अंतिम वाक्य शीर्षक को सिद्ध करता है।
  5. निष्कर्ष।

Answer: 'शरणागत' का अर्थ है शरण में आया हुआ व्यक्ति। पूरी कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है, इसलिए शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
कहानी का आरंभ रज्जब की शरण की खोज से होता है: बीमार पत्नी और पास की रकम के साथ वह गाँव में जगह-जगह भटकता है और अंत में ठाकुर के द्वार पर 'शरण' माँगता है। ठाकुर का मन इसी शब्द से बदलता है और वह उसे ठहरा लेता है।
कहानी का चरम-बिंदु भी शरणागत की रक्षा है। रास्ते में लुटेरे रज्जब को घेरते हैं; उनका मुखिया वही ठाकुर है, जो अपने साथियों से कहता है कि वह मेरी शरण आया था, और उसे सुरक्षित भेज देता है।
अंतिम वाक्य, 'परंतु बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता', कहानी का संदेश और शीर्षक दोनों एक साथ स्पष्ट कर देता है। इस प्रकार शीर्षक कहानी के आरंभ, चरम और संदेश तीनों से जुड़ा है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

गद्यांश-आधारित प्रश्न (10 अंक: 1 + 2 + 2 + 5), 2025 के प्रश्न 4 के ढाँचे पर। उप-भागों के भीतर का विभाजन संकेतात्मक है। (10 marks)

StepMarks
(i) पाठ और रचनाकार, दोनों1
(ii) शरणागत कौन (रज्जब, गरीब कसाई) और सहायता का कारण (बीमार पत्नी, बीहड़ मार्ग, रकम)2
(iii) घात = विश्वासघात; ठाकुर का अपने साथियों के विरुद्ध खड़ा होना2
(iv) सामाजिक बुराई की पहचान, कहानी से प्रमाण और अपने उपाय5

Where students lose marks in शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: लेखक का नाम न लिखना

    2025 में कई विद्यार्थी रचनाकार का नाम भूल गए (CISCE परीक्षकों की टिप्पणी)।

    Do this: हर पाठ के साथ लेखक का नाम सही वर्तनी में याद करें: वृंदावनलाल वर्मा।

    Usually costs: 1 अंक।

  • Mistake: 'शरणागत कौन है' वाला अंश छोड़ना

    2025 में कई ने सीधे कारण लिख दिया, यह नहीं बताया कि शरणागत रज्जब है।

    Do this: पहला वाक्य: 'यहाँ शरणागत ललितपुर का रज्जब नामक गरीब कसाई है।'

    Usually costs: 2 अंकों में से 1।

  • Mistake: 'घात' का अर्थ स्पष्ट न करना

    2025 में कई विद्यार्थियों ने यह नहीं लिखा कि घात का अर्थ विश्वासघात है।

    Wrong working

    'घात यानी चोट।'

    Right working

    'घात यानी विश्वासघात: शरण में आए व्यक्ति को धोखा देकर लूटना।'

    Do this: शब्दार्थ पहले, फिर प्रसंग।

    Usually costs: 2 अंकों में से 1।

  • Mistake: ठाकुर को केवल अच्छा या केवल बुरा बताना

    चरित्र जटिल है; एकतरफ़ा उत्तर अधूरा माना जाता है।

    Do this: गुण (शरणागत-रक्षा, निर्भीकता) और दोष (डकैती, लोकलाज, भेदभाव) दोनों लिखें।

    Usually costs: चरित्र-चित्रण के अंक।

Practice questions on शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQExam level

    रज्जब कहाँ का रहने वाला था? (a) झाँसी (b) ललितपुर (c) मड़पुरा (d) ओरछा

    Hint

    वह घर लौट रहा था।

    Answer

    (b) ललितपुर।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    गाँव के लोगों ने रज्जब को ठहरने क्यों नहीं दिया?

    Hint

    पेशा और चोरी-छिपे बेचे गए पशु।

    Answer

    रज्जब कसाई था, इसलिए लोग उसे घर में ठहराना अपमान समझते थे; साथ ही जिन्होंने उसे चोरी-छिपे अपने पशु बेचे थे, उन्हें डर था कि उसके ठहरने से तरह-तरह की खबरें फैलेंगी।

  3. Q3 · 5 marks · Long answerHarder exam level

    ठाकुर ने सुबह रज्जब को घर से क्यों निकाल दिया? इससे उसके चरित्र की कौन-सी दुर्बलता प्रकट होती है?

    Hint

    लोकमत का दबदबा।

    Answer

    अपेक्षित बिंदु: पत्नी की हालत के कारण रज्जब सुबह जा नहीं पाया; ठाकुर को डर था कि गाँव भर कसाई को उसकी पौर में टिका देखकर तरह-तरह की बातें करेगा; यद्यपि गाँव उसके दबदबे को मानता था, पर अव्यक्त लोकमत का दबदबा उसके मन पर भी था; यह उसकी लोकलाज और कसाई के प्रति पूर्वाग्रह की दुर्बलता है; फिर भी शाम को वह शरणागत-धर्म निभाता है।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerExam level

    रज्जब के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।

    Hint

    पत्नी के प्रति प्रेम, विनम्रता, क्रोध, व्यावहारिकता।

    Answer

    अपेक्षित बिंदु: पत्नी की बहुत चिंता करता है (शरण, गाड़ी, यात्रा टालना); विनम्र और गिड़गिड़ाने वाला (ठाकुर और लठैतों से); व्यावहारिक (रकम सँभालना, खर्च का हिसाब); क्रोधी भी (गाड़ीवान को छुरे की धमकी); मानवता की बात करता है ('मनुष्य मनुष्य को सहारा देता है'); समाज के भेदभाव से दुखी (हिंदू मात्र को मन-ही-मन कोसना)।

  5. Q5 · 10 marks · Long answerHOTS / competency

    'शरणागत-रक्षा का धर्म मनुष्य को अपराधी होते हुए भी महान बना सकता है।' 'शरणागत' कहानी के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।

    Hint

    ठाकुर के अपराध और उसका धर्म; क्या एक अच्छा कर्म दोषों को मिटा देता है?

    Answer

    अपेक्षित बिंदु: ठाकुर डाके डलवाता है, पेशगी लगान वसूलता है, कसाई से घृणा करता है, लोकलाज से उसे निकालता है; फिर भी शरणागत की रक्षा के लिए साथियों से भिड़ जाता है; यह क्षण उसे ऊँचा उठाता है; पर उसके अपराध मिटते नहीं; कहानी नैतिकता की जटिलता दिखाती है; अपना संतुलित मत और निष्कर्ष।

  6. Q6 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    यदि आप गाड़ीवान की जगह होते, तो लुटेरों के सामने क्या करते? कहानी के संदर्भ में अपने विचार लिखिए।

    Hint

    गाड़ीवान ने डर से रज्जब की पहचान बता दी।

    Answer

    अपेक्षित: गाड़ीवान ने डर में तुरंत बता दिया कि यह कसाई है, जिससे रज्जब पर खतरा बढ़ा; स्वयं की सुरक्षा स्वाभाविक है, पर यात्री की रक्षा भी कर्तव्य; मैं घबराए बिना विनती करता, बीमार स्त्री की दुहाई देता, और यात्री की पहचान उजागर न करता; व्यावहारिक और नैतिक दोनों पक्षों पर विचार; स्पष्ट निष्कर्ष।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.रज्जब किस गाँव में रात बिताना चाहता था?Show answer

    मड़पुरा।

  2. 2.गाँव वाले ठाकुर को किस नाम से पुकारते थे?Show answer

    डर के मारे 'राजा' कहते थे; उसके छोटे मकान को 'गढ़ी' कहते थे।

  3. 3.ठाकुर ने रात में साथियों से क्या कहा?Show answer

    'कसाई का पैसा न छुएँगे।'

  4. 4.रास्ते में किसने बताया कि रज्जब कसाई है?Show answer

    गाड़ीवान ने।

  5. 5.कहानी की अंतिम पंक्ति क्या है?Show answer

    'परंतु बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता, इस बात को गाँठ बाँध लेना।'

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप कहानी को पाँच चरणों में सुना सकते हैं?
  • क्या आप 2025 के चारों प्रश्नों के उत्तर लिख सकते हैं?
  • क्या आप ठाकुर के गुण और दोष दोनों बता सकते हैं?
  • क्या आप 'घात' और 'शरणागत' का अर्थ स्पष्ट कर सकते हैं?
  • क्या आप कहानी में दिखाई गई सामाजिक बुराई और उसके उपाय लिख सकते हैं?

शरणागत – वृंदावनलाल वर्मा: frequently asked questions

रास्ते में रज्जब को बचाने वाला कौन था?

वही ठाकुर (दाऊजू), जिसने उसे रात में शरण दी थी; वह लुटेरों की टोली के साथ था, पर उसने अपने साथियों को रज्जब को छूने नहीं दिया।

बुंदेला कौन हैं?

बुंदेलखंड (मध्य भारत) के राजपूत वंश के लोग; कहानी में ठाकुर अपने को बुंदेला कहकर शरणागत-रक्षा को अपनी परंपरा बताता है।

क्या यह कहानी 2025 की बोर्ड परीक्षा में आई थी?

हाँ। 2025 के ISC हिंदी प्रश्न-पत्र के प्रश्न 4 में इसकी अंतिम पंक्ति पर गद्यांश-आधारित प्रश्न आया था; तब पूरा गद्य संकलन कक्षा XII में पढ़ाया जाता था।

वृंदावनलाल वर्मा किस लिए प्रसिद्ध हैं?

ऐतिहासिक उपन्यासों के लिए, जैसे 'झाँसी की रानी' और 'मृगनयनी'; उनकी रचनाओं में बुंदेलखंड का जीवन जीवंत है।

Based on: CISCE ISC 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi 805, Gadya Sanklan, Class XI); CISCE ISC Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi, Question 4 (Sharanagat extract, marking scheme, examiners' comments); Gadya Kosh: शरणागत / वृंदावनलाल वर्मा