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HindiISC Class 11 · Chapter 6

ISC Class 11 हिंदी पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद: सार, पात्र, उद्देश्य और हल सहित प्रश्न

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

'पुत्र प्रेम' में धन को सबसे ऊपर रखने वाले वकील बाबू चैतन्यदास अपने क्षयरोगी बड़े बेटे प्रभुदास को इलाज के लिए इटली भेजने पर तीन हज़ार रुपये खर्च नहीं करते। प्रभुदास की मृत्यु के बाद घाट पर एक गरीब युवक की बातें सुनकर उन्हें अपनी हृदयहीनता का बोध होता है और वे पश्चात्ताप से भर उठते हैं।

What पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद is about

पुत्र प्रेम हिंदी-उर्दू के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) की कहानी है। ISC 2028 की पाठ्य-पुस्तक-सूची के अनुसार यह गद्य संकलन (ISC Collection of Short Stories and Essays, Evergreen Publications) के कक्षा XI भाग का पहला पाठ है। प्रेमचंद को 'कथा-सम्राट' और 'उपन्यास-सम्राट' कहा जाता है; उनकी कहानियाँ मध्यवर्गीय और ग्रामीण भारत के यथार्थ, मानवीय संवेदना और नैतिक द्वंद्व को सरल, मुहावरेदार भाषा में प्रस्तुत करती हैं।

कहानी का केंद्र धन और भावना का संघर्ष है। बाबू चैतन्यदास अर्थशास्त्र के सिद्धांतों पर जीते हैं: हर खर्च से पहले वे सोचते हैं कि उससे किसका उपकार होगा। जब उनके प्रिय बड़े बेटे प्रभुदास को क्षयरोग (तपेदिक) हो जाता है और डॉक्टर उसे इटली के आरोग्य-निवास में भेजने की सलाह देते हैं, तो वे 'संदिग्ध फल' के लिए तीन हज़ार रुपये खर्च करने से मना कर देते हैं। प्रभुदास की मृत्यु के बाद मणिकर्णिका घाट पर एक गरीब ग्रामीण युवक की बातें, जिसने पिता के इलाज में अपना सब कुछ लगा दिया था, उनकी आँखें खोल देती हैं।

परीक्षा में गद्य संकलन से गद्यांश-आधारित प्रश्न (1, 2, 2, 5 अंक) और 10 अंकों के दीर्घ प्रश्न आते हैं। 2024 और 2025 के बोर्ड प्रश्न-पत्रों में परीक्षकों ने बार-बार यह शिकायत की कि विद्यार्थी कहानी का सार लिख देते हैं पर प्रश्न के कथन से नहीं जोड़ते, और लेखक या पाठ का नाम गलत लिखते हैं। यह पृष्ठ प्रेमचंद की सार्वजनिक (कॉपीराइट-मुक्त) कहानी के गद्यकोश पर उपलब्ध पाठ पर आधारित है; अपनी पाठ्य-पुस्तक से मिलान करें।

Weightage: CISCE अध्यायवार अंक प्रकाशित नहीं करता। बोर्ड प्रश्न-पत्र में गद्य संकलन से तीन प्रश्न (एक गद्यांश-आधारित, दो दीर्घ, 10-10 अंक) आते हैं; परीक्षार्थी चार में से तीन पुस्तकों से कुल चार प्रश्न करते हैं। कक्षा XI का प्रश्न-पत्र विद्यालय बनाता है।Source: CISCE का ISC 2028 भारतीय भाषाएँ पाठ्यक्रम और परिशिष्ट I (हिंदी 805, गद्य संकलन, कक्षा XI)

पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

अर्थशास्त्री पिता। बाबू चैतन्यदास वकील हैं; दो-तीन गाँवों में उनकी ज़मींदारी है और बैंक में भी रुपये हैं। उन्होंने अर्थशास्त्र खूब पढ़ा है और उसी के सिद्धांतों पर जीते हैं: कोई भी खर्च सामने आने पर वे सोचते हैं कि इससे मेरा या किसी और का उपकार होगा या नहीं, और व्यर्थ खर्च को विष के समान समझते हैं। उनके दो पुत्र हैं, बड़ा प्रभुदास और छोटा शिवदास। प्रभुदास पर उनका स्नेह अधिक है; वे उसे इंग्लैंड भेजकर बैरिस्टर बनाना चाहते हैं।

प्रभुदास की बीमारी। बी.ए. की परीक्षा के बाद प्रभुदास को ज्वर आने लगता है। डॉक्टर बताते हैं कि उसे तपेदिक (क्षयरोग) है। प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने का समाचार भी उसे प्रसन्न नहीं कर पाता। धीरे-धीरे वह जीवन से निराश होकर दवा तक फेंकने लगता है। चैतन्यदास के मन में बार-बार यह शंका उठती है कि जब परिणाम विदित है तो धन का अपव्यय क्यों, पर कुछ पुत्र-प्रेम और कुछ लोक-लाज से वे इलाज कराते रहते हैं।

इटली का प्रस्ताव। जाड़े में डॉक्टर बताते हैं कि अब एकमात्र उपाय इटली के किसी आरोग्य-निवास (सेनेटोरियम) में भेजना है, जिसमें लगभग तीन हज़ार रुपये लगेंगे, पर अच्छे होने का निश्चय नहीं। रात भर घर में बहस होती है। माँ तपेश्वरी प्रस्ताव का दृढ़ता से समर्थन करती है, शिवदास भी माँ के पक्ष में आ जाता है, पर चैतन्यदास कहते हैं कि पूर्वजों की संचित जायदाद को 'अनिश्चित हित की आशा' पर बलिदान नहीं कर सकते। छह महीने बाद वे ज़मींदारी का कुछ भाग गिरवी रखकर शिवदास को कानून पढ़ने इंग्लैंड भेज देते हैं। उनके लौटने के एक सप्ताह बाद प्रभुदास की मृत्यु हो जाती है।

घाट पर बोध। मणिकर्णिका घाट पर बेटे की चिता के पास बैठे चैतन्यदास के मन में ग्लानि उठती है कि शायद इटली जाकर वह बच जाता। तभी गाते-बजाते लोगों का एक समूह एक अर्थी लेकर आता है। एक ग्रामीण युवक बताता है कि उसने पिता के इलाज में घर की सारी पूँजी लगा दी, ज़मीन तक बेच दी, क्योंकि 'रुपया पैसा हाथ का मैल है' और मनुष्य फिर नहीं मिलता। उसकी बातें चैतन्यदास के हृदय में बाण-सी चुभती हैं; उन्हें अपनी हृदयहीनता और भौतिकता भयंकर दिखाई देती है। अपने संतप्त मन की शांति के लिए वे प्रभुदास के अंत्येष्टि-संस्कार पर हज़ारों रुपये खर्च कर डालते हैं।

Themes and message

धन बनाम मानवीय संवेदना

कहानी दिखाती है कि जीवन को केवल नफ़े-नुकसान के गणित से चलाना मनुष्य को हृदयहीन बना देता है। चैतन्यदास के लिए 'संदिग्ध फल' पर तीन हज़ार रुपये खर्च करना अबुद्धिमानी है, जबकि गरीब युवक के लिए 'रुपया पैसा हाथ का मैल है'।

From the text: युवक: 'धन से प्यारी जान जान से प्यारा ईमान।'

पश्चात्ताप और आत्म-बोध

बेटे की मृत्यु और युवक की बातों के बाद चैतन्यदास को अपनी भूल का एहसास होता है; पर यह बोध बहुत देर से आता है। अंत्येष्टि पर हज़ारों रुपये खर्च करना उनके पश्चात्ताप का प्रमाण है, पर अब वह किसी काम का नहीं।

From the text: उनके मन की कल्पना: 'हाय! मैने तीन हजार का मुंह देखा और पुत्र रत्न को हाथ से खो दिया।'

स्वार्थ से जुड़ा पितृ-प्रेम

चैतन्यदास का प्रभुदास पर स्नेह भी अपेक्षाओं से जुड़ा है: वे उसे बैरिस्टर बनाकर खानदान की मर्यादा बढ़ाते देखना चाहते थे। आशा टूटते ही उनका प्रेम हिसाब में बदल जाता है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि सच्चा प्रेम निःस्वार्थ होता है।

From the text: पत्नी से: उसमें अपना सर्वस्व दे देते, जब उससे कुछ आशा होती।

मध्यवर्ग और ग्रामीण जीवन का अंतर

शिक्षित, संपन्न वकील हिसाब लगाता है, जबकि अनपढ़ ग्रामीण युवक अपना सब कुछ पिता पर लगा देता है। प्रेमचंद ग्रामीण सादगी और मानवीयता को शहरी भौतिकता से ऊपर रखते हैं।

From the text: युवक ने पिता के इलाज में घर की सारी पूँजी लगा दी और थोड़ी ज़मीन भी बेच दी।

Characters

बाबू चैतन्यदास

वकील और ज़मींदार; प्रभुदास और शिवदास के पिता

  • अर्थशास्त्र के सिद्धांतों पर चलने वाले, हिसाबी
  • धन-लोलुप और व्यावहारिक
  • पुत्र से प्रेम, पर अपेक्षाओं से बँधा
  • अंत में पश्चात्तापी

इटली भेजने के प्रस्ताव को 'संदिग्ध फल' के लिए अपव्यय मानते हैं; शिवदास के लिए ज़मींदारी गिरवी रख देते हैं; घाट पर ग्लानि और अंत्येष्टि पर हज़ारों का खर्च।

प्रभुदास

बड़ा पुत्र, तपेदिक का रोगी

  • होनहार और उत्साही
  • बीमारी में निराश और दार्शनिक
  • उच्च अभिलाषाओं वाला

बी.ए. में प्रथम श्रेणी; बीमारी में दवाएँ फेंकना, लोक-रीतियों की निर्भीक आलोचना; उच्च अभिलाषाएँ लिए हुए ही मृत्यु।

तपेश्वरी

चैतन्यदास की पत्नी, प्रभुदास की माँ

  • ममतामयी
  • दृढ़ और तर्कशील

इटली भेजने के पक्ष में तर्क, लोकोक्तियाँ और आँसू; कहती है कि जायदाद में आधा हिस्सा प्रभुदास का भी है।

शिवदास

छोटा पुत्र

  • विनम्र
  • पहले पिता से सहमत, फिर माँ के पक्ष में

डॉक्टर से पिता की बात के लिए क्षमा माँगता है; बाद में इंग्लैंड भेजा जाता है।

ग्रामीण युवक

घाट पर मिलने वाला, जिसने पिता का अंतिम संस्कार किया

  • सरल और भावुक
  • कर्तव्यनिष्ठ पुत्र

पिता के इलाज में सब कुछ लगा दिया; कहता है कि रुपया पैसा हाथ का मैल है।

How it is written

DeviceExampleEffect
विरोधी चरित्रों का आमना-सामनासंपन्न, हिसाबी चैतन्यदास बनाम गरीब, उदार ग्रामीण युवक।कहानी का संदेश बिना उपदेश के स्पष्ट हो जाता है।
व्यंग्य'अर्थशास्त्र के सिद्धान्त उनके जीवन-स्तम्भ हो गये थे।'आरंभ में ही चरित्र की सीमा पर हल्की चोट।
मुहावरे और लोकोक्तियाँ'रुपया पैसा हाथ का मैल है'; 'धन से प्यारी जान जान से प्यारा ईमान'।भाषा सजीव और जन-जीवन के निकट; प्रेमचंद की शैली की पहचान।
प्रतीकात्मक दृश्यचिता की ज्वाला और चैतन्यदास के अंतर की ज्वाला।बाहरी दृश्य और भीतरी पीड़ा का मेल।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • अर्थशास्त्र के सिद्धन्त उनके जीवन-स्तम्भ हो गये थे।

    लेखक: कहानी के आरंभ में चैतन्यदास का परिचय।

    चरित्र की मूल प्रवृत्ति: हर निर्णय पर धन का हिसाब।

  • रुपया पैसा हाथ का मैल है।

    ग्रामीण युवक: घाट पर चैतन्यदास से बात करते हुए।

    कहानी का केंद्रीय विचार; चैतन्यदास के सिद्धांत का उलटा।

  • धन से प्यारी जान जान से प्यारा ईमान

    ग्रामीण युवक: उसी बातचीत में।

    मूल्यों का क्रम: धन से ऊपर जीवन, जीवन से ऊपर ईमान।

  • मैने तीन हजार का मुंह देखा और पुत्र रत्न को हाथ से खो दिया

    चैतन्यदास (मन में): प्रभुदास की चिता के पास।

    पश्चात्ताप: धन के लोभ ने पुत्र छीन लिया।

पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

धन और संबंध

मान लीजिए किसी परिवार में दादाजी के ऑपरेशन के लिए बचत तोड़नी पड़े और कोई सदस्य कहे कि उम्र देखते हुए यह पैसा व्यर्थ जाएगा।

'पुत्र प्रेम' इस स्थिति में क्या सोचने को प्रेरित करती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. चैतन्यदास ने भी 'संदिग्ध फल' का तर्क दिया था।
  2. परिणाम: जीवन भर का पश्चात्ताप।
  3. ग्रामीण युवक: सब कुछ करके भी संतोष।

Answer: कहानी सिखाती है कि साधन होते हुए प्रियजन के लिए प्रयास न करना बाद में ग्लानि देता है; प्रयास करने वाला, परिणाम कुछ भी हो, शांत रहता है।

Memory hook: रुपया लौट आता है, मनुष्य नहीं।

अपेक्षाओं से बँधा प्रेम

कल्पना कीजिए कि किसी विद्यार्थी के माता-पिता उसके अच्छे अंक आने पर ही उससे स्नेह दिखाते हैं।

चैतन्यदास के चरित्र से इसकी क्या समानता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. चैतन्यदास का स्नेह प्रभुदास से बैरिस्टर बनने की आशा से जुड़ा था।
  2. आशा टूटते ही प्रेम हिसाब बन गया।
  3. सच्चा प्रेम शर्तों पर नहीं चलता।

Answer: कहानी बताती है कि शर्तों वाला प्रेम संकट में टूट जाता है; बच्चों को बिना शर्त स्नेह की आवश्यकता होती है।

Memory hook: प्रेम सौदा नहीं।

समय रहते निर्णय

मान लीजिए आप किसी मित्र की सहायता को टालते रहते हैं और जब तक आप तैयार होते हैं, बहुत देर हो चुकी होती है।

कहानी का अंत इस बारे में क्या कहता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. चैतन्यदास का बोध बेटे की मृत्यु के बाद आया।
  2. अंत्येष्टि पर हज़ारों खर्च, पर जीवन के लिए नहीं।
  3. देर से आया पश्चात्ताप किसी काम का नहीं।

Answer: सहायता और प्रेम का सही समय वर्तमान है; बाद का पश्चात्ताप खोई चीज़ नहीं लौटाता।

Memory hook: जीते जी करो, बाद में नहीं।

Topics in this chapter

How the school exam asks पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
गद्यांश: पाठ, लेखक, वक्ता-श्रोता (1 अंक)किसी संवाद को उद्धृत करके: पाठ और लेखक का नाम; किसने किससे कहा।पाठ 'पुत्र प्रेम', लेखक मुंशी प्रेमचंद (सही वर्तनी); वक्ता-श्रोता उलटें नहीं।
गद्यांश: प्रसंग और आशय (2 + 2 अंक), चरित्र (5 अंक)'रुपया पैसा हाथ का मैल है' से युवक का क्या आशय है? इस बात का चैतन्यदास पर क्या प्रभाव पड़ा? वक्ता के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।प्रसंग, आशय और प्रभाव अलग-अलग; चरित्र में चार-पाँच गुण उदाहरण सहित।
दीर्घ प्रश्न (10 अंक)'धन को जीवन से ऊपर रखने का परिणाम पश्चात्ताप ही होता है।' कहानी के आधार पर समीक्षा कीजिए; चैतन्यदास का चरित्र-चित्रण; शीर्षक की सार्थकता।कथन का अर्थ, फिर कहानी से तीन-चार प्रमाण, अंत में अपना मत; सार मात्र न लिखें।

Tricks to remember पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • अ-रो-इ-घा

    अर्थशास्त्री पिता, रोग (तपेदिक), इटली का प्रस्ताव, घाट पर बोध: कहानी के चार पड़ाव।

    Use it when: सार याद रखने के लिए।

  • तीन हज़ार

    इटली का खर्च तीन हज़ार; पछतावा भी 'तीन हजार का मुंह देखा'।

    Use it when: तथ्य वाले प्रश्न।

पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: गद्यांश (i): वक्ता-श्रोता · 1 mark · Very short answerExam level

'भैया, रुपया पैसा हाथ का मैल है। कहां आता है कहां जाता है...' यह कथन किसने, किससे और कहाँ कहा?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. वक्ता: ग्रामीण युवक।
  2. श्रोता: बाबू चैतन्यदास (और साथ खड़े लोग)।
  3. स्थान: मणिकर्णिका घाट।

Answer: एक ग्रामीण युवक ने मणिकर्णिका घाट पर बाबू चैतन्यदास से कहा।

Example 2: गद्यांश (ii) और (iii): आशय और प्रभाव · 4 marks · Short answerHarder exam level

(ii) 'रुपया पैसा हाथ का मैल है' से युवक का क्या आशय है? (iii) युवक की बातों का चैतन्यदास पर क्या प्रभाव पड़ा?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. (ii) धन आता-जाता है; मनुष्य का जीवन अनमोल है; इसलिए पिता के इलाज में सब लगा दिया।
  2. (iii) शब्द बाण-से चुभे; अपनी हृदयहीनता और भौतिकता दिखाई दी; अंत्येष्टि पर हज़ारों का खर्च।

Answer: (ii) युवक का आशय है कि धन तो हाथ के मैल की तरह आता-जाता रहता है, फिर कमाया जा सकता है, पर कोई प्रिय व्यक्ति एक बार चला जाए तो फिर नहीं मिलता। इसी विश्वास से उसने पिता के इलाज में घर की सारी पूँजी लगा दी और ज़मीन भी बेच दी।
(iii) युवक का एक-एक शब्द चैतन्यदास के हृदय में बाण की तरह चुभा। उन्हें अपनी हृदयहीनता, आत्मशून्यता और भौतिकता भयंकर दिखाई देने लगी, क्योंकि उन्होंने तीन हज़ार रुपये बचाने के लिए बेटे को इटली नहीं भेजा था। इसी ग्लानि के कारण उन्होंने प्रभुदास के अंत्येष्टि-संस्कार पर हज़ारों रुपये खर्च कर डाले।

Example 3: गद्यांश (iv): चैतन्यदास का चरित्र (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder exam level

कहानी के आधार पर बाबू चैतन्यदास के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. हिसाबी, अर्थशास्त्र-प्रेमी।
  2. पुत्र-प्रेम अपेक्षाओं से बँधा।
  3. कठोर, पत्नी की ममता को ठुकराने वाले।
  4. लोक-लाज का भय।
  5. अंत में पश्चात्तापी।

Answer: बाबू चैतन्यदास एक सफल वकील और ज़मींदार हैं, जिनके जीवन का आधार अर्थशास्त्र है। हर खर्च से पहले वे सोचते हैं कि उससे किसका उपकार होगा; व्यर्थ खर्च उन्हें विष-समान लगता है। उनका प्रेम भी अपेक्षाओं से बँधा है: प्रभुदास से वे बैरिस्टर बनकर खानदान की मर्यादा बढ़ाने की आशा रखते थे; आशा टूटते ही उसका इलाज उन्हें 'संदिग्ध फल' पर अपव्यय लगने लगा। वे कठोर भी हैं; पत्नी की ममता को बच्चों जैसी बातें कहकर ठुकरा देते हैं। फिर भी लोक-लाज और कुछ पुत्र-प्रेम से वे इलाज जारी रखते हैं। अंत में घाट पर गरीब युवक की बातें सुनकर उन्हें अपनी भूल का बोध होता है और वे पश्चात्ताप से भर जाते हैं। इस प्रकार वे एक भौतिकवादी, पर अंततः आत्म-बोध पाने वाले पात्र हैं।

Example 4: दीर्घ प्रश्न: धन बनाम जीवन · 10 marks · Long answerHOTS / competency

'जो व्यक्ति धन को मानवीय संबंधों से ऊपर रखता है, उसे अंत में पश्चात्ताप ही हाथ लगता है।' 'पुत्र प्रेम' कहानी के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कथन का अर्थ।
  2. चैतन्यदास का धन-केंद्रित दृष्टिकोण: तीन हज़ार का हिसाब।
  3. विरोध: माँ की ममता, शिवदास का बदलना।
  4. प्रभुदास की मृत्यु और घाट पर ग्लानि।
  5. ग्रामीण युवक से तुलना।
  6. पश्चात्ताप: अंत्येष्टि पर हज़ारों का खर्च।
  7. निष्कर्ष और अपना मत।

Answer: प्रस्तुत कथन का अर्थ है कि धन जीवन का साधन है, साध्य नहीं; जो इसे संबंधों से ऊपर रखता है, वह अंततः अपने ही निर्णयों पर पछताता है। 'पुत्र प्रेम' कहानी इस कथन का सटीक उदाहरण है।

बाबू चैतन्यदास ने अर्थशास्त्र को अपना 'जीवन-स्तम्भ' बना लिया था। जब डॉक्टर ने तपेदिक से पीड़ित प्रभुदास को इटली भेजने की सलाह दी, तो उन्होंने तीन हज़ार रुपये के खर्च को एक 'संदिग्ध फल' के लिए बुद्धिमानी के विरुद्ध माना। पत्नी तपेश्वरी ने तर्क, लोकोक्तियों और आँसुओं से उन्हें मनाने का प्रयास किया, शिवदास भी माँ के पक्ष में आ गया, पर उन्होंने पूर्वजों की जायदाद को 'अनिश्चित हित की आशा' पर बलिदान करने से मना कर दिया। विडंबना यह कि छह महीने बाद उन्होंने ज़मींदारी गिरवी रखकर शिवदास को पढ़ने इंग्लैंड भेज दिया, क्योंकि उससे 'लाभ' की आशा थी।

प्रभुदास की मृत्यु के बाद मणिकर्णिका घाट पर उनके मन में ग्लानि उठी: 'हाय! मैने तीन हजार का मुंह देखा और पुत्र रत्न को हाथ से खो दिया।' उसी समय एक गरीब ग्रामीण युवक ने बताया कि उसने पिता के इलाज में घर की सारी पूँजी लगा दी और ज़मीन बेच दी, क्योंकि 'रुपया पैसा हाथ का मैल है'। युवक के मन में कोई पछतावा नहीं था, जबकि संपन्न चैतन्यदास का हृदय पश्चात्ताप से जल रहा था। अपनी शांति के लिए उन्होंने अंत्येष्टि पर हज़ारों रुपये खर्च कर डाले, जो बेटे के जीवित रहते खर्च नहीं किए थे।

इस प्रकार कहानी सिद्ध करती है कि धन को संबंधों से ऊपर रखने वाला अंत में खाली हाथ और पछताता रह जाता है। मेरे विचार से यह कथन आज के उपभोक्तावादी समय में और भी सार्थक है।

Example 5: दीर्घ प्रश्न: शीर्षक की सार्थकता · 10 marks · Long answerHOTS / competency

'पुत्र प्रेम' शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए। क्या यह शीर्षक व्यंग्यात्मक भी है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कहानी का केंद्र: पिता-पुत्र संबंध।
  2. चैतन्यदास का प्रेम: अपेक्षा और हिसाब में दबा।
  3. माँ का और ग्रामीण युवक का निःस्वार्थ प्रेम।
  4. व्यंग्य: पुत्र-प्रेम अर्थ-सिद्धांत से हारता है, और जागता है मृत्यु के बाद।
  5. निष्कर्ष।

Answer: 'पुत्र प्रेम' शीर्षक कहानी के केंद्रीय प्रश्न को सामने रखता है: पिता का पुत्र से प्रेम कितना सच्चा है?
चैतन्यदास प्रभुदास से प्रेम करते हैं, पर उनका प्रेम अपेक्षाओं से बँधा है; बेटे से आशा टूटते ही वह हिसाब में बदल जाता है। वे कुछ पुत्र-प्रेम और कुछ लोक-लाज से इलाज कराते हैं, पर इटली भेजने के लिए धन नहीं निकालते। इसके विपरीत माँ तपेश्वरी का प्रेम निःस्वार्थ है, और ग्रामीण युवक का पिता-प्रेम तो सारी पूँजी लुटाकर भी संतोष देता है।
शीर्षक में व्यंग्य भी है। जिस पुत्र-प्रेम के नाम पर कहानी है, वह चैतन्यदास में तभी जागता है जब पुत्र चिता पर है; घाट पर क्षण भर के लिए पुत्र-प्रेम अर्थ-सिद्धांत पर भारी पड़ता है। तब वे अंत्येष्टि पर हज़ारों खर्च करते हैं, जो जीवित पुत्र के लिए नहीं किया।
इस प्रकार शीर्षक कहानी के विषय, उसके विरोधाभास और उसके संदेश, तीनों को व्यक्त करता है, इसलिए पूर्णतः सार्थक है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

दीर्घ प्रश्न (10 अंक)। CISCE अंक-विभाजन प्रकाशित नहीं करता; यह विभाजन ISC हिंदी की अंक-योजनाओं के अपेक्षित बिंदुओं के आधार पर केवल संकेतात्मक है। (10 marks)

StepMarks
कथन या प्रश्न की व्याख्या (केवल सार नहीं)2
कहानी से तीन-चार प्रमाण, घटनाओं और पात्रों सहित5
उपयुक्त उद्धरण या संवाद1
अपना मत, निष्कर्ष और भाषा2

Where students lose marks in पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: प्रश्न के कथन से जोड़े बिना कहानी का सार लिखना

    2024 और 2025 के परीक्षकों ने गद्य संकलन के प्रश्नों में यही सबसे बड़ी कमी बताई (जैसे 'सती' और 'आउटसाइडर' के उत्तरों में)।

    Do this: हर अनुच्छेद कथन के किसी अंश से शुरू करें और घटना को प्रमाण की तरह प्रयोग करें।

    Usually costs: दीर्घ प्रश्न के अधिकांश अंक।

  • Mistake: लेखक या पाठ का नाम गलत

    परीक्षक बार-बार लेखक के नाम की भूल या वर्तनी की गलती पर टिप्पणी करते हैं।

    Do this: 'पुत्र प्रेम' – मुंशी प्रेमचंद; नाम सही वर्तनी में।

    Usually costs: 1 अंक।

  • Mistake: पात्रों के नाम या भूमिका मिलाना

    प्रभुदास और शिवदास को उलट देना, या तपेश्वरी को बहन लिख देना।

    Do this: प्रभुदास = बड़ा, रोगी; शिवदास = छोटा, इंग्लैंड गया; तपेश्वरी = माँ।

    Usually costs: विश्वसनीयता और अंक।

  • Mistake: चैतन्यदास को केवल 'कंजूस' कहकर छोड़ देना

    चरित्र में कई परतें हैं: सिद्धांतवादी, अपेक्षाओं वाला प्रेम, लोक-लाज, पश्चात्ताप।

    Do this: कम से कम चार गुण, हर एक का उदाहरण।

    Usually costs: चरित्र-चित्रण के अंक।

Practice questions on पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQExam level

    डॉक्टर ने प्रभुदास को कौन-सा रोग बताया? (a) मलेरिया (b) तपेदिक (c) हैज़ा (d) चेचक

    Hint

    क्षयरोग, ट्यूबरक्यूलोसिस।

    Answer

    (b) तपेदिक।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerExam level

    चैतन्यदास ने प्रभुदास को इटली भेजने से क्यों मना किया? दो कारण लिखिए।

    Hint

    खर्च और अनिश्चित परिणाम।

    Answer

    पहला, इटली भेजने में लगभग तीन हज़ार रुपये का खर्च था; दूसरा, डॉक्टर भी निश्चित रूप से नहीं कह सकते थे कि प्रभुदास वहाँ से स्वस्थ लौटेगा। उनके अर्थशास्त्र के अनुसार 'संदिग्ध फल' के लिए इतना खर्च बुद्धिमानी नहीं थी।

  3. Q3 · 5 marks · Long answerHarder exam level

    तपेश्वरी ने पति को मनाने के लिए क्या-क्या उपाय किए? क्या वह सफल हुई?

    Hint

    तर्क, लोकोक्तियाँ, आँसू, जायदाद में हिस्सा; 'जीतकर भी हार'।

    Answer

    अपेक्षित बिंदु: उसने तर्क दिए, धन की नश्वरता की लोकोक्तियाँ कहीं, पति के सद्भावों को जगाने का प्रयास किया, अंत में आँसू बहाए; बैंक के रुपयों और जायदाद की याद दिलाई; कहा कि आधा हिस्सा प्रभुदास का भी है; पति ने ऊपर से हार मान ली पर रुपये न होने का बहाना किया और कठोर उत्तर दिए; इसलिए वह जीतकर भी हार गई।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    चैतन्यदास ने शिवदास को इंग्लैंड भेजा, पर प्रभुदास को इटली नहीं। इस विरोधाभास से उनके चरित्र के बारे में क्या पता चलता है?

    Hint

    लाभ की आशा बनाम अनिश्चित परिणाम।

    Answer

    अपेक्षित बिंदु: शिवदास की पढ़ाई से उन्हें 'परिमित लाभ' की आशा थी, इसलिए उसके लिए ज़मींदारी गिरवी रख दी; प्रभुदास से अब कोई आशा नहीं थी, इसलिए उसका इलाज अपव्यय लगा; यह दिखाता है कि उनका प्रेम भी लाभ-हानि के गणित से चलता था; वे स्वार्थी और हिसाबी थे; यही विरोधाभास कहानी का मुख्य व्यंग्य है।

  5. Q5 · 10 marks · Long answerHOTS / competency

    ग्रामीण युवक और चैतन्यदास की तुलना करते हुए स्पष्ट कीजिए कि प्रेमचंद ने किसे आदर्श माना है।

    Hint

    आर्थिक स्थिति, पिता/पुत्र के प्रति व्यवहार, मृत्यु के बाद की मनःस्थिति, जीवन-दर्शन।

    Answer

    अपेक्षित बिंदु: चैतन्यदास संपन्न पर हिसाबी, युवक निर्धन पर उदार; युवक ने पिता के इलाज में सब कुछ लगा दिया, चैतन्यदास ने बेटे के लिए तीन हज़ार नहीं निकाले; मृत्यु के बाद युवक संतुष्ट (कोई लालसा शेष नहीं), चैतन्यदास पश्चात्तापी; युवक का दर्शन 'रुपया पैसा हाथ का मैल है', चैतन्यदास का 'अर्थशास्त्र जीवन-स्तम्भ'; प्रेमचंद ने युवक की मानवीयता को आदर्श माना है; निष्कर्ष और अपना मत।

  6. Q6 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    आज के समय में भी लोग इलाज के खर्च को लेकर कठिन निर्णयों का सामना करते हैं। 'पुत्र प्रेम' कहानी के संदेश की प्रासंगिकता पर अपने विचार लिखिए।

    Hint

    धन और जीवन का संतुलन; संवेदना; स्वास्थ्य-सेवा।

    Answer

    अपेक्षित: कहानी का संदेश (धन से ऊपर जीवन और संबंध); आज भी महँगे इलाज के कारण परिवार कठिन निर्णय लेते हैं; पर जहाँ साधन हों, वहाँ लोभ से इलाज न कराना अमानवीय है; स्वास्थ्य बीमा, सरकारी योजनाएँ और सामाजिक सहायता का महत्त्व; संवेदना और विवेक दोनों आवश्यक; स्पष्ट निष्कर्ष।

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  1. 1.बाबू चैतन्यदास का व्यवसाय क्या था?Show answer

    वे वकील थे; उनकी दो-तीन गाँवों में ज़मींदारी भी थी।

  2. 2.चैतन्यदास के दोनों पुत्रों के नाम क्या थे?Show answer

    बड़ा प्रभुदास और छोटा शिवदास।

  3. 3.डॉक्टर ने अंत में क्या उपाय बताया?Show answer

    प्रभुदास को इटली के किसी आरोग्य-निवास (सेनेटोरियम) में भेजना, जिसमें लगभग तीन हज़ार रुपये लगते।

  4. 4.प्रभुदास का अंतिम संस्कार कहाँ हुआ?Show answer

    मणिकर्णिका घाट पर।

  5. 5.कहानी के अंत में चैतन्यदास ने क्या किया?Show answer

    संतप्त मन की शांति के लिए प्रभुदास के अंत्येष्टि-संस्कार पर हज़ारों रुपये खर्च कर दिए।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप कहानी का सार चार अनुच्छेदों में लिख सकते हैं?
  • क्या आप चैतन्यदास के पाँच गुण उदाहरण सहित बता सकते हैं?
  • क्या आप ग्रामीण युवक और चैतन्यदास की तुलना कर सकते हैं?
  • क्या आप शीर्षक की सार्थकता और उसका व्यंग्य समझा सकते हैं?
  • क्या आप दो उद्धरण शुद्ध रूप में लिख सकते हैं?

पुत्र प्रेम – मुंशी प्रेमचंद: frequently asked questions

कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

धन जीवन का साधन है, साध्य नहीं; मानवीय संबंध और संवेदना धन से ऊपर हैं, और इन्हें अनदेखा करने का परिणाम पश्चात्ताप होता है।

कहानी का अंत दुखद क्यों है?

क्योंकि पिता का बोध पुत्र की मृत्यु के बाद आता है; अब पश्चात्ताप और खर्च, दोनों व्यर्थ हैं। यही अंत पाठक पर गहरी छाप छोड़ता है।

प्रेमचंद की भाषा की क्या विशेषता है?

सरल, सहज, मुहावरेदार हिंदुस्तानी, जिसमें हिंदी-उर्दू दोनों के शब्द हैं (जैसे 'गालिब', 'नागवार', 'जायदाद')।

क्या चैतन्यदास पूरी तरह बुरे पात्र हैं?

नहीं। वे पुत्र से प्रेम करते हैं, इलाज कराते रहते हैं, और अंत में उन्हें सच्चा पश्चात्ताप होता है; उनकी भूल धन को सर्वोपरि मानने की है।

Based on: CISCE ISC 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi 805, Gadya Sanklan, Class XI); Gadya Kosh: पुत्र-प्रेम / प्रेमचंद (public-domain text); CISCE ISC Analysis of Pupil Performance 2024 and 2025: Hindi (examiners' comments on Gadya Sanklan answers)