ISC Class 11 हिंदी एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त: भावार्थ, पात्र और हल सहित प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'एक फूल की चाह' में महामारी से बीमार बच्ची सुखिया अपने पिता से देवी के प्रसाद का एक फूल माँगती है। अछूत पिता मंदिर से फूल लाता है, पर पकड़ा जाता है, पीटा जाता है और सात दिन की सज़ा पाता है। लौटने तक बेटी की चिता बुझ चुकी होती है। कविता छुआछूत की क्रूरता उजागर करती है।
What एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त is about
एक फूल की चाह राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के छोटे भाई सियारामशरण गुप्त (1895-1963) की प्रसिद्ध कथात्मक कविता है। ISC 2028 की पाठ्य-पुस्तक-सूची के अनुसार यह काव्य मंजरी (ISC Collection of Poems, Evergreen Publications) के कक्षा XI भाग की तीसरी कविता है। सियारामशरण गुप्त गांधीवादी विचारों से प्रभावित थे; उनकी कविता में करुणा, मानवता और सामाजिक अन्याय का विरोध प्रमुख है।
कविता एक अछूत पिता के मुख से कही गई है। गाँव में महामारी फैली है; उसकी बेटी सुखिया बीमार पड़ जाती है और ज्वर में बार-बार एक ही इच्छा दोहराती है: देवी के प्रसाद का एक फूल। पिता मंदिर जाता है, प्रसाद पाता भी है, पर भक्त उसे 'अछूत' कहकर पकड़ लेते हैं, पीटते हैं और न्यायालय सात दिन का दंड देता है। छूटकर वह लौटता है तो बेटी की चिता बुझ चुकी होती है।
2024 के ISC बोर्ड प्रश्न-पत्र (प्रश्न 7) में इसी कविता की अंतिम पंक्तियाँ ('अंतिम बार गोद में बेटी...') उद्धृत करके पूछा गया था: कविता का नाम और 'मैं' कौन है (1 अंक), बेटी ने किससे क्या इच्छा की (2), क्या इच्छा पूरी हुई (2), और कवि ने कौन-सा भेदभाव उजागर किया तथा वह देश की प्रगति में कैसे बाधक है (5)। कक्षा XI की परीक्षा विद्यालय लेता है, पर प्रश्नों का ढाँचा यही रहता है: पद्यांश-आधारित प्रश्न (1, 2, 2, 5 अंक) और 10 अंकों के दीर्घ प्रश्न।
पाठ के बारे में। यह पृष्ठ कविता कोश पर उपलब्ध पूर्ण पाठ और CISCE द्वारा 2024 में छापी गई पंक्तियों पर आधारित है। काव्य मंजरी में कविता का संक्षिप्त रूप हो सकता है और कुछ शब्दों में पाठांतर है; अपनी पाठ्य-पुस्तक से मिलान करें।
Weightage: CISCE अध्यायवार अंक प्रकाशित नहीं करता। बोर्ड प्रश्न-पत्र में काव्य मंजरी से तीन प्रश्न (एक पद्यांश-आधारित, दो दीर्घ, 10-10 अंक) आते हैं; परीक्षार्थी चार में से तीन पुस्तकों से कुल चार प्रश्न करते हैं। कक्षा XI का प्रश्न-पत्र विद्यालय बनाता है।Source: CISCE का ISC 2028 भारतीय भाषाएँ पाठ्यक्रम और परिशिष्ट I (हिंदी 805, काव्य मंजरी, कक्षा XI); ISC विद्यार्थी-प्रदर्शन विश्लेषण 2024 (हिंदी), प्रश्न 7
एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
महामारी और सुखिया। गाँव में भयंकर महामारी फैली है। चारों ओर उन माताओं का करुण रुदन सुनाई देता है जिनके बच्चे मर गए हैं। कथावाचक पिता अपनी नन्ही बेटी सुखिया को बाहर खेलने जाने से रोकता है, पर चंचल सुखिया पल भर नहीं ठहरती। पिता का हृदय डर से काँपता रहता है, और एक दिन वही डर सच हो जाता है: सुखिया का शरीर ज्वर से तपने लगता है।
एक फूल की चाह। ज्वर में बेचैन सुखिया एक ही बात कहती है: 'मुझको देवी के प्रसाद का एक फूल ही दो लाकर।' पिता असमंजस में पड़ जाता है, क्योंकि वह अछूत है और उसे मंदिर में कौन जाने देगा? वह दूसरे फूल लाकर उसकी खाट पर रखता है, पर सुखिया उन्हें फेंक देती है। धीरे-धीरे उसका स्वर क्षीण हो जाता है और वह निढाल पड़ जाती है। रात भर पिता चिंता में बैठा रहता है।
मंदिर में। सुबह वह निश्चय करता है कि कुछ भी हो, फूल लाएगा। स्नान करके, साफ़ कपड़े पहनकर, पूजा की थाली सजाकर वह पहाड़ी पर बने विशाल मंदिर में जाता है। भक्तों के साथ वह भी 'पतित-तारिणी' देवी की जय बोलता है। पुजारी उसके दीप-फूल चढ़ाकर उसे प्रसाद देता है। पर आँगन से निकलने से पहले ही कोई चिल्लाता है कि यह अछूत भीतर कैसे आया। भक्त उसे घेरकर मारते-पीटते हैं, प्रसाद बिखर जाता है। वह कहता है कि मुझे जो दंड दो, पर कोई यह एक फूल बच्ची तक पहुँचा दे। उसे न्यायालय ले जाया जाता है और सात दिन का दंड मिलता है।
अंत। सज़ा काटकर वह घर लौटता है, पर सुखिया दौड़कर नहीं आती। वह मरघट पहुँचता है, जहाँ परिचित उसे पहले ही जला चुके हैं। फूल-सी कोमल बच्ची राख की ढेरी बन चुकी है। पिता विलाप करता है कि अंतिम बार बेटी को गोद में भी न ले सका और माँ के प्रसाद का एक फूल भी न दे सका।
Themes and message
छुआछूत (अस्पृश्यता) का विरोध
कविता का केंद्रीय उद्देश्य जाति के आधार पर किए जाने वाले भेदभाव की अमानवीयता दिखाना है। जिस देवी को भक्त 'पतित-तारिणी' कहते हैं, उसी के मंदिर में एक पिता को केवल जन्म के कारण अपराधी बना दिया जाता है। 2024 की अंक-योजना के अनुसार यही भेदभाव समाज के एक वर्ग को सुविधाओं और मुख्यधारा से दूर रखकर देश की प्रगति में बाधक बनता है।
From the text: 'कैसे यह अछूत भीतर आया?' और पिता का प्रश्न कि क्या उसका कलुष देवी की गरिमा से भी बड़ा है।
पिता का वात्सल्य और विवशता
पिता बेटी की छोटी-सी इच्छा पूरी करने के लिए अपमान, मार और कारावास सब सहता है। उसका प्रेम जितना गहरा है, समाज की बाधाएँ उतनी ही क्रूर।
From the text: 'अंतिम बार गोद में बेटी, तुझको ले न सका मैं हा'।
धर्म का पाखंड
भक्त देवी की जय बोलते हैं, पर एक दुखी पिता को मारते हैं। कवि दिखाता है कि जो धर्म मनुष्य से घृणा करे, वह सच्ची भक्ति नहीं, पाखंड है; पिता का प्रश्न है कि भक्त माँ के सामने ही माँ का गौरव छोटा कर रहे हैं।
From the text: भक्तों का 'पतित-तारिणी' का गान और उसी क्षण पिता की पिटाई।
महामारी और गरीबों की असहायता
महामारी में सबसे अधिक दुख गरीब और वंचित भोगते हैं; उनके पास न उपचार है, न सहारा। सुखिया की मृत्यु इसी असहायता का चित्र है।
From the text: महामारी में माताओं का करुण रुदन और सुखिया का ज्वर।
The speaker and the people in the poem
सुखिया का पिता (कथावाचक)
एक अछूत, निर्धन पिता
- बेटी से गहरा प्रेम
- साहसी और दृढ़-निश्चयी
- सच्चा भक्त
- विवश और शोकाकुल
बेटी की इच्छा के लिए मंदिर जाने का निश्चय करता है, मार खाकर भी विनती करता है कि फूल बच्ची तक पहुँचा दो, और अंत में विलाप करता है। 2024 की अंक-योजना: 'मैं' सुखिया का पिता है।
सुखिया
पिता की नन्ही, चंचल बेटी
- चंचल और खेलप्रिय
- भोली
- ज्वर में भी अपनी इच्छा पर अडिग
बार-बार मना करने पर भी खेलने बाहर जाती है; ज्वर में दूसरे फूल फेंक देती है और देवी के प्रसाद का फूल ही माँगती है।
मंदिर के भक्त और समाज
भेदभाव करने वाला वर्ग
- बाहरी भक्ति
- हृदयहीन
पिता को पकड़कर मारते हैं, न्यायालय ले जाते हैं; मंदिर की पवित्रता नष्ट होने का तर्क देते हैं।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| कथात्मक शैली और प्रथम पुरुष | पूरी कविता पिता के मुख से कही गई है। | पाठक पिता के दुख और अपमान को सीधे अनुभव करता है। |
| आवृत्ति (टेक) | 'मुझको देवी के प्रसाद का एक फूल ही दो लाकर' बार-बार आता है। | बच्ची की हठ और पिता के मन में गूँजती इच्छा को तीव्र बनाती है। |
| उपमा | 'कोमल कुसुम समान देह'; 'फूल-सी कोमल बच्ची'। | बच्ची की कोमलता और उसकी मृत्यु की करुणा को बढ़ाती है; 'फूल' शब्द शीर्षक से जुड़ता है। |
| व्यंग्य और विरोधाभास | भक्त 'पतित-तारिणी' की जय बोलते हैं और 'पतित' मानकर पिता को मारते हैं। | धार्मिक पाखंड पर तीखी चोट। |
| करुण रस | अंतिम पंक्तियों में पिता का विलाप। | कविता का प्रधान रस करुण है, जो पाठक को झकझोर देता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मुझको देवी के प्रसाद का
सुखिया (पिता द्वारा दोहराया गया): ज्वर में बेटी की बार-बार की इच्छा; पूरी पंक्ति: '...एक फूल ही दो लाकर'।
कविता की टेक; इसी इच्छा से पूरी कथा आगे बढ़ती है।
मैं अछूत हूँ, मुझे कौन हा! मन्दिर में जाने देगा
पिता: बेटी की इच्छा सुनकर पिता का असमंजस।
समाज के भेदभाव का पहला संकेत।
कैसे यह अछूत भीतर आया?
मंदिर के भक्त: प्रसाद लेकर लौटते पिता को पहचानकर।
अस्पृश्यता की क्रूरता; यहीं से पिता की विपत्ति शुरू होती है।
अंतिम बार गोद में बेटी, तुझको ले न सका मैं हा
पिता: बुझी हुई चिता के सामने (2024 प्रश्न-पत्र में उद्धृत)।
पिता की असहनीय वेदना और विवशता; करुण रस का चरम।
एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
भेदभाव का सामाजिक मूल्य
मान लीजिए किसी गाँव में कुछ परिवारों के बच्चों को सार्वजनिक कुएँ से पानी भरने नहीं दिया जाता।
'एक फूल की चाह' इस स्थिति के बारे में क्या सोचने को प्रेरित करती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता में पिता को मंदिर से वंचित किया गया।
- वंचना का परिणाम: निर्दोष की इच्छा और जीवन दोनों पर चोट।
- समाधान: समानता, कानून और जागरूकता।
Answer: कविता दिखाती है कि भेदभाव केवल अपमान नहीं, जीवन के अवसरों से वंचना है। ऐसी स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत) और समाज की संवेदनशीलता दोनों आवश्यक हैं।
Memory hook: भेद मिटे, तो देश बढ़े।
महामारी में संवेदनशीलता
कल्पना कीजिए कि किसी महामारी के समय आपके पड़ोस का एक गरीब परिवार दवा और सहायता के लिए भटक रहा है।
कविता से हम क्या सीख सकते हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- महामारी में गरीब सबसे अधिक असहाय होते हैं।
- समाज की उपेक्षा दुख को कई गुना बढ़ा देती है।
- छोटी-सी सहायता भी बड़ा अंतर ला सकती है।
Answer: सुखिया के पिता को किसी ने सहारा नहीं दिया; कविता हमें संकट में दूसरों की सहायता के लिए आगे आने की प्रेरणा देती है।
Memory hook: एक फूल, एक सहारा।
सच्ची भक्ति
मान लीजिए किसी धार्मिक उत्सव में भीड़ एक बूढ़े, गरीब व्यक्ति को धक्का देकर बाहर कर देती है।
कविता के अनुसार इसे सच्ची भक्ति क्यों नहीं कहा जा सकता?
Try it first, then show the solutionSolution
- भक्त 'पतित-तारिणी' की जय बोलते हैं, पर दुखी पिता को मारते हैं।
- पिता पूछता है कि क्या उसका कलुष देवी से बड़ा है।
- सच्ची भक्ति करुणा में है।
Answer: जो भक्ति मनुष्य से घृणा सिखाए, वह पाखंड है; कविता करुणा को ही सच्चा धर्म बताती है।
Memory hook: जय बोलना नहीं, दया करना भक्ति है।
Topics in this chapter
How the school exam asks एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पद्यांश: कविता और वक्ता (1 अंक) | 'प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता से ली गई हैं? यहाँ मैं शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?' (2024) | कविता और कवि का नाम सही वर्तनी में; 'मैं' = सुखिया का पिता, स्पष्ट रूप से। |
| पद्यांश: इच्छा और उसका परिणाम (2 + 2 अंक) | 'बेटी ने किससे, क्या इच्छा जाहिर की?' 'क्या वक्ता की इच्छा पूरी हो सकी? कारण सहित उत्तर लिखिए।' (2024) | पूरा उत्तर: पिता से, देवी के प्रसाद का (मंदिर का) फूल; इच्छा पूरी नहीं हुई क्योंकि अछूत होने के कारण पिता को पकड़कर पीटा गया और सज़ा मिली। |
| पद्यांश: भेदभाव पर विचार (5 अंक) और दीर्घ प्रश्न (10 अंक) | 'इस कविता में कवि ने किस भेदभाव को उजागर किया है? वह किस प्रकार देश की प्रगति में बाधक है?' (2024); दीर्घ प्रश्न: पिता का चरित्र, कविता का उद्देश्य, शीर्षक की सार्थकता। | कविता से उदाहरण के साथ अपने विचार; कहानी न दोहराएँ। |
Tricks to remember एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
म-इ-मं-दं-चि
महामारी, इच्छा (एक फूल), मंदिर, दंड (सात दिन), चिता: कथा का क्रम।
Use it when: पूरी कविता का सार याद रखने के लिए।
फूल के दो अर्थ
प्रसाद का फूल (इच्छा) और 'फूल-सी कोमल बच्ची' (सुखिया)।
Use it when: शीर्षक की सार्थकता वाले प्रश्न।
एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पद्यांश (i): कविता और 'मैं' (2024) · 1 mark · Very short answerExam level
'अंतिम बार गोद में बेटी, तुझको ले न सका मैं हा / एक फूल माँ के प्रसाद का, तुझको दे न सका मैं हा।' प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता से ली गई हैं? यहाँ 'मैं' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता: 'एक फूल की चाह', कवि सियारामशरण गुप्त।
- 'मैं': सुखिया का पिता, जो अछूत है।
Answer: कविता 'एक फूल की चाह' (सियारामशरण गुप्त); 'मैं' सुखिया का पिता है।
Example 2: पद्यांश (ii) और (iii): इच्छा और उसका परिणाम (2024) · 4 marks · Short answerHarder exam level
(ii) बेटी ने किससे, क्या इच्छा जाहिर की? (iii) क्या वक्ता की इच्छा पूरी हो सकी? कारण सहित उत्तर लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- (ii) किससे: पिता से; क्या: देवी के मंदिर के प्रसाद का फूल (केवल 'फूल' लिखना अधूरा है)।
- (iii) नहीं; कारण: अछूत होने से मंदिर में पकड़ा गया, पीटा गया, सात दिन की सज़ा; लौटने पर बेटी मर चुकी थी।
Answer: (ii) महामारी के ज्वर से पीड़ित सुखिया ने अपने पिता से इच्छा की कि वह देवी के मंदिर से प्रसाद का एक फूल लाकर उसे दे।
(iii) नहीं। पिता मंदिर से प्रसाद ले भी आया, पर अछूत होने के कारण भक्तों ने उसे पकड़कर पीटा, प्रसाद बिखर गया और उसे सात दिन का दंड मिला। जब वह लौटा तो सुखिया की मृत्यु हो चुकी थी और उसकी चिता भी बुझ चुकी थी।
Example 3: पद्यांश (iv): भेदभाव और देश की प्रगति (2024) · 5 marks · Long answerHOTS / competency
इस कविता में कवि ने किस भेदभाव को उजागर किया है? वह किस प्रकार देश की प्रगति में बाधक है? समझाकर लिखिए।
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- भेदभाव: जाति-आधारित छुआछूत।
- कविता से प्रमाण: मंदिर-प्रवेश पर रोक, पिटाई, दंड।
- प्रगति में बाधा: एक वर्ग शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और अवसरों से वंचित; समाज में विभाजन।
- कहानी न दोहराएँ; अपने विचार दें।
Answer: कवि ने जाति के आधार पर किए जाने वाले छुआछूत के भेदभाव को उजागर किया है। सुखिया का पिता केवल इसलिए अपराधी ठहराया जाता है कि वह 'अछूत' है; जिस देवी को भक्त 'पतित-तारिणी' कहते हैं, उसी के मंदिर में उसे पीटा जाता है और उसे दंड मिलता है। इस भेदभाव ने एक निर्दोष बच्ची की अंतिम इच्छा तक पूरी न होने दी।
ऐसा भेदभाव देश की प्रगति में बाधक है, क्योंकि यह समाज के एक बड़े वर्ग को शिक्षा, स्वास्थ्य, मंदिरों और सार्वजनिक सुविधाओं से दूर रखता है। जब नागरिकों को बराबरी का सम्मान और अवसर नहीं मिलते, तो उनकी प्रतिभा और श्रम का लाभ देश को नहीं मिल पाता, और समाज में घृणा तथा विभाजन बढ़ता है। एकजुट और समतामूलक समाज ही सच्ची प्रगति कर सकता है; इसीलिए हमारे संविधान ने अस्पृश्यता को समाप्त किया है।
Example 4: दीर्घ प्रश्न: पिता का चरित्र · 10 marks · Long answerHarder exam level
'एक फूल की चाह' कविता के आधार पर सुखिया के पिता का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- स्नेही पिता: बेटी को बचाने की चिंता, रात भर जागना।
- दृढ़-निश्चयी और साहसी: मंदिर जाने का निर्णय।
- सच्चा भक्त: स्नान, पूजा की थाली, देवी की स्तुति।
- स्वाभिमानी पर विनम्र: भक्तों से तर्क, फिर भी केवल फूल पहुँचाने की विनती; दंड चुपचाप स्वीकार।
- विवश और शोकाकुल: अंत का विलाप।
Answer: सुखिया का पिता कविता का कथावाचक और केंद्रीय पात्र है। वह एक निर्धन, अछूत व्यक्ति है, पर उसका हृदय प्रेम और करुणा से भरा है।
वह अत्यंत स्नेही पिता है। महामारी के दिनों में वह बेटी को खेलने जाने से रोकता है और उसका हृदय डर से काँपता रहता है; बीमारी में वह रात भर उपाय सोचता बैठा रहता है।
वह दृढ़-निश्चयी और साहसी है। जानता है कि अछूत को मंदिर में घुसने नहीं दिया जाएगा, फिर भी बेटी की इच्छा के लिए जाने का निश्चय करता है।
वह सच्चा भक्त है। स्नान करके, उजले वस्त्र पहनकर, पूजा की थाली सजाकर जाता है और भक्तों के साथ देवी की जय बोलता है।
वह स्वाभिमानी पर विनम्र है। भक्तों से पूछता है कि क्या उसका कलुष देवी की महिमा से भी बड़ा है, पर पिटने के बाद भी केवल यही विनती करता है कि कोई फूल बच्ची तक पहुँचा दे। न्यायालय का दंड वह चुपचाप सिर झुकाकर स्वीकार कर लेता है।
अंत में वह विवश और शोकाकुल दिखता है। बुझी चिता देखकर वह विलाप करता है कि अंतिम बार बेटी को गोद में भी न ले सका।
इस प्रकार वह एक आदर्श, प्रेममय पिता है, जिसे समाज की अमानवीय रूढ़ियाँ पराजित कर देती हैं; उसका चरित्र पाठक के मन में करुणा और अन्याय के प्रति आक्रोश जगाता है।
Example 5: दीर्घ प्रश्न: शीर्षक की सार्थकता · 10 marks · Long answerHOTS / competency
'एक फूल की चाह' शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- पूरी कथा एक फूल की इच्छा पर टिकी है।
- फूल छोटी-सी, मासूम इच्छा का प्रतीक।
- वही छोटी इच्छा समाज के भेदभाव के कारण पूरी नहीं होती।
- 'फूल-सी कोमल बच्ची' और फूल का प्रतीकार्थ।
- निष्कर्ष।
Answer: कविता का शीर्षक पूर्णतः सार्थक है, क्योंकि पूरी कथा एक फूल की इच्छा के चारों ओर घूमती है।
बीमार सुखिया की एकमात्र इच्छा है कि उसे देवी के प्रसाद का एक फूल मिले; यह इच्छा कविता में बार-बार गूँजती है। पिता इसी इच्छा को पूरा करने के लिए मंदिर जाता है, अपमान सहता है और कारावास भोगता है।
फूल यहाँ एक छोटी, मासूम और निर्दोष इच्छा का प्रतीक है। ऐसी साधारण इच्छा भी समाज की जाति-व्यवस्था के कारण पूरी नहीं हो पाती, और यही कविता का सबसे बड़ा व्यंग्य है।
फूल का दूसरा प्रतीक स्वयं सुखिया है: कवि उसे 'फूल-सी कोमल बच्ची' कहता है, जो अंत में राख की ढेरी बन जाती है। फूल की चाह और फूल-सी बच्ची का मुरझाना, दोनों मिलकर करुणा को चरम पर ले जाते हैं।
अतः शीर्षक कथा का केंद्र, उसका प्रतीक और उसका संदेश, तीनों को एक साथ व्यक्त करता है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
पद्यांश-आधारित प्रश्न (10 अंक: 1 + 2 + 2 + 5), 2024 के प्रश्न-पत्र के ढाँचे पर। CISCE उप-भागों के भीतर अंक-विभाजन प्रकाशित नहीं करता; यह संकेतात्मक है। (10 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| (i) कविता/कवि का नाम और वक्ता: 1 अंक | 1 |
| (ii) प्रसंग या इच्छा: दोनों अंश (किससे, क्या) पूरे | 2 |
| (iii) परिणाम और कारण: हाँ/नहीं के साथ स्पष्ट कारण | 2 |
| (iv) विचारात्मक उत्तर: भेदभाव की पहचान, कविता से प्रमाण, प्रगति में बाधा पर अपने तर्क | 5 |
Where students lose marks in एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: 'मैं' को केवल 'पिता' लिखना या वर्तनी की भूल
2024 के परीक्षकों के अनुसार कुछ विद्यार्थियों ने केवल 'पिता' या ढीले रूप में 'सुखिया के पिता' लिखा और वर्तनी में भूलें कीं।
Do this: पूरा और स्पष्ट लिखें: 'मैं' सुखिया का पिता है, जो अछूत है; कवि का नाम सही वर्तनी में।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: केवल 'फूल' लिखना
2024 में कई विद्यार्थियों ने यह नहीं लिखा कि फूल मंदिर की देवी के प्रसाद का था।
Wrong working
'बेटी ने फूल माँगा।'
Right working
'बेटी ने पिता से देवी के मंदिर के प्रसाद का एक फूल माँगा।'
Do this: इच्छा का पूरा स्वरूप लिखें।
Usually costs: 2 अंकों के प्रश्न में आधे अंक।
Mistake: इच्छा पूरी न होने का कारण अधूरा
परीक्षकों के अनुसार इस भाग का संतोषजनक उत्तर कम विद्यार्थियों ने दिया।
Do this: कारण स्पष्ट करें: अछूत होने से मंदिर में पकड़ा गया, पीटा गया, दंड मिला; लौटने तक बेटी की मृत्यु।
Usually costs: 2 अंक।
Mistake: विचारात्मक प्रश्न में कविता की कहानी दोहराना
2024 में अस्पृश्यता प्रगति में कैसे बाधक है, यह समझाने के बजाय कई ने कविता की कथा लिख दी।
Do this: भेदभाव पहचानें, कविता से एक-दो प्रमाण दें, फिर अपने तर्क दें कि यह प्रगति में कैसे बाधक है।
Usually costs: 5 अंकों में अधिकांश।
Practice questions on एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
सुखिया को बार-बार बाहर खेलने जाने से क्यों रोका जाता था? (a) वह पढ़ाई नहीं करती थी (b) गाँव में महामारी फैली हुई थी (c) बाहर बहुत ठंड थी (d) उसकी माँ बीमार थी
Hint
कविता का आरंभ।
Answer
(b) गाँव में महामारी फैली हुई थी।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder exam level
पिता ने सुखिया की खाट पर कई फूल लाकर रखे, फिर भी वह शांत क्यों नहीं हुई?
Hint
उसकी इच्छा किस फूल की थी?
Answer
सुखिया को साधारण फूल नहीं, देवी के प्रसाद का फूल चाहिए था; इसलिए उसने लाए हुए फूल तोड़-मोड़कर फेंक दिए और फिर वही माँग दोहराई।
Q3 · 5 marks · Long answerHarder exam level
मंदिर में पिता के साथ क्या हुआ? उस पर लगाए गए आरोप पर उसने भक्तों से क्या तर्क दिया?
Hint
पहचान, आरोप, पिता का प्रश्न, पिटाई, दंड।
Answer
अपेक्षित बिंदु: पुजारी से प्रसाद पाकर लौटते समय भक्तों ने उसे अछूत के रूप में पहचाना; आरोप लगाया कि उसने मंदिर की शुचिता नष्ट कर दी; पिता ने पूछा कि क्या उसका कलुष देवी की गरिमा से बड़ा है और कहा कि भक्त माँ के सामने ही माँ का गौरव छोटा कर रहे हैं; भक्तों ने एक न सुनी, उसे मारा-पीटा, प्रसाद बिखर गया; न्यायालय ने सात दिन का दंड दिया।
Q4 · 5 marks · Long answerHarder exam level
'एक फूल की चाह' कविता में करुण रस की अभिव्यक्ति पर प्रकाश डालिए।
Hint
महामारी, बीमार बच्ची, पिटाई, चिता, विलाप।
Answer
अपेक्षित बिंदु: महामारी में माताओं का रुदन; बीमार बच्ची की हठ और क्षीण होता स्वर; पिता का रात भर का जागरण; मंदिर में अपमान और पिटाई; कारावास में आँसू; लौटकर बुझी चिता और 'फूल-सी कोमल बच्ची' का राख होना; अंतिम विलाप; करुण रस का स्थायी भाव शोक है, जो इन दृश्यों से पुष्ट होता है।
Q5 · 10 marks · Long answerHOTS / competency
'जो धर्म मनुष्य-मनुष्य में भेद करे, वह सच्चा धर्म नहीं हो सकता।' 'एक फूल की चाह' कविता के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।
Hint
भक्तों का आचरण, देवी का 'पतित-तारिणी' रूप, पिता की सच्ची भक्ति; आज के संदर्भ।
Answer
अपेक्षित बिंदु: भक्त देवी की जय बोलते हैं, पर दुखी पिता को मारते हैं; देवी को 'पतित-तारिणी' कहते हुए 'पतित' माने गए व्यक्ति को धिक्कारते हैं, जो विरोधाभास है; पिता की भक्ति अधिक सच्ची है (स्नान, श्रद्धा, विनम्रता); धर्म का उद्देश्य करुणा और समता है, घृणा नहीं; कवि का गांधीवादी दृष्टिकोण; आज भी जाति-भेद के उदाहरणों पर विचार; निष्कर्ष कि कथन उचित है।
Q6 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
यदि आप उस मंदिर में उपस्थित होते, तो सुखिया के पिता के साथ हो रहे व्यवहार पर आपकी क्या प्रतिक्रिया होती? अपने विचार कविता के संदर्भ में लिखिए।
Hint
व्यक्तिगत प्रतिक्रिया, पर कविता के तथ्यों और मूल्यों पर आधारित।
Answer
अपेक्षित: पिता को मारने का विरोध; यह तर्क कि ईश्वर सबका है और एक पिता अपनी बीमार बेटी के लिए प्रसाद लेने आया है; भक्तों को कविता के प्रश्न की याद दिलाना कि उसका कलुष देवी की महिमा से बड़ा नहीं; फूल बच्ची तक पहुँचाने में सहायता; संविधान में अस्पृश्यता का निषेध; करुणा और साहस पर आधारित स्पष्ट मत।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कविता का वक्ता कौन है?Show answer
सुखिया का पिता, जो अछूत है।
2.सुखिया ने क्या इच्छा की?Show answer
देवी के मंदिर के प्रसाद का एक फूल।
3.पिता को कितने दिन का दंड मिला?Show answer
सात दिन का।
4.जेल से लौटने पर पिता ने क्या पाया?Show answer
सुखिया की मृत्यु हो चुकी थी; परिचित उसे पहले ही जला चुके थे और चिता बुझ चुकी थी।
5.कविता का प्रधान रस कौन-सा है?Show answer
करुण रस।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कविता की कथा को पाँच चरणों में बता सकते हैं?
- क्या आप 2024 के पद्यांश वाले चारों प्रश्नों के उत्तर लिख सकते हैं?
- क्या आप पिता का चरित्र पाँच गुणों में लिख सकते हैं?
- क्या आप समझा सकते हैं कि छुआछूत देश की प्रगति में कैसे बाधक है?
- क्या आप शीर्षक की सार्थकता पर लिख सकते हैं?
एक फूल की चाह – सियारामशरण गुप्त: frequently asked questions
सियारामशरण गुप्त कौन थे?
हिंदी के प्रसिद्ध कवि (1895-1963), राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के छोटे भाई; उनकी रचनाओं पर गांधीवाद का प्रभाव है और उनमें करुणा तथा सामाजिक अन्याय का विरोध प्रमुख है।
क्या काव्य मंजरी में पूरी कविता है?
कविता लंबी है और पाठ्य-पुस्तकों में प्रायः इसका संक्षिप्त रूप छपता है; कुछ शब्दों में पाठांतर भी है। अपनी पाठ्य-पुस्तक का पाठ ही परीक्षा का आधार है।
कविता किस सामाजिक समस्या पर है?
जाति-आधारित छुआछूत (अस्पृश्यता) पर; 2024 की अंक-योजना ने इसे कविता का केंद्रीय भेदभाव बताया।
पिता ने मंदिर जाने से पहले क्या तैयारी की?
कुएँ पर स्नान किया, उजले वस्त्र पहने और चंदन, पुष्प, कपूर, धूप से पूजा की थाली सजाई।
Based on: CISCE ISC 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi 805, Kavya Manjari, Class XI); CISCE ISC Analysis of Pupil Performance 2024: Hindi, Question 7 (extract, marking scheme, examiners' comments); Kavita Kosh: एक फूल की चाह / सियाराम शरण गुप्त (full text)