ISC Class 11 हिंदी साखी – कबीरदास: भावार्थ, विचार और हल सहित प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
कबीर की साखियाँ अनुभव से निकले दोहे हैं। काव्य मंजरी की साखियों में गुरु का महत्त्व (सद्गुरु ज्ञान का दीपक देता है), जीवात्मा का परमात्मा से विरह, बाहरी आडंबर का विरोध और अहंकार मिटने पर ज्ञान का प्रकाश प्रमुख हैं। 2025 के ISC प्रश्न-पत्र में इन्हीं बिंदुओं पर 10 अंकों का प्रश्न आया था।
What साखी – कबीरदास is about
साखी भक्तिकाल की निर्गुण ज्ञानमार्गी शाखा के प्रमुख संत-कवि कबीरदास (पंद्रहवीं शती) की रचनाएँ हैं। ISC 2028 की पाठ्य-पुस्तक-सूची के अनुसार यह काव्य मंजरी (Evergreen Publications) के कक्षा XI भाग का पहला पाठ है। 'साखी' शब्द 'साक्षी' से बना है: कबीर ने जो स्वयं देखा और अनुभव किया, उसी की गवाही इन दोहों में है। उनकी भाषा को 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' कहा जाता है, जिसमें अवधी, ब्रज, राजस्थानी, पंजाबी आदि का मेल है।
2025 के ISC बोर्ड प्रश्न-पत्र (प्रश्न 8, 10 अंक) में पूछा गया था: 'कबीर की साखियों में गुरु का महत्त्व, जीवात्मा-परमात्मा का सम्बन्ध तथा अज्ञानता रूपी अंधकार से ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर अग्रसित करने का विधान मिलता है।' पठित साखियों के आधार पर इसे स्पष्ट कीजिए। अंक-योजना ने चार बिंदु और उनकी साखियाँ बताईं: गुरु का महत्त्व ('पीछे लागा जाई था...'), जीवात्मा-परमात्मा का संबंध ('बासुरि सुखु...'), बाह्याडंबर का विरोध ('तन कौं जोगी सब करें...') और अहं का नाश तथा ज्ञान का प्रकाश ('जब मैं था तब हरि नहिं...')।
इस पृष्ठ पर इन चार साखियों का पूरा पाठ (कविता कोश पर उपलब्ध कबीर-ग्रंथावली पाठ, और चौथी साखी NCERT 'स्पर्श' से मिलाकर), भावार्थ और विचार दिए गए हैं। ध्यान दें: काव्य मंजरी में इनके अतिरिक्त और साखियाँ भी हो सकती हैं, और वर्तनी में अंतर (जैसे 'सतगुर/सद्गुरु', 'बासुरि सुखु/बासुरि सुख') संभव है; अपनी पाठ्य-पुस्तक से मिलान अवश्य करें।
Weightage: CISCE अध्यायवार अंक प्रकाशित नहीं करता। बोर्ड प्रश्न-पत्र में काव्य मंजरी से तीन प्रश्न (एक पद्यांश-आधारित, दो दीर्घ, 10-10 अंक) आते हैं; 2025 में कबीर की साखियों पर 10 अंकों का दीर्घ प्रश्न आया था। कक्षा XI का प्रश्न-पत्र विद्यालय बनाता है।Source: CISCE का ISC 2028 परिशिष्ट I (हिंदी 805, काव्य मंजरी, कक्षा XI); ISC विद्यार्थी-प्रदर्शन विश्लेषण 2025 (हिंदी), प्रश्न 8
साखी – कबीरदास: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
1. गुरु का महत्त्व। 'पीछैं लागा जाइ था, लोक बेद के साथि। आगैं थैं सतगुर मिल्या, दीपक दीया हाथि॥' कबीर कहते हैं कि मैं भी दुनिया की देखा-देखी लोक-रीति और वेदों की परंपरा के पीछे-पीछे चला जा रहा था, अर्थात् बिना सोचे-समझे रूढ़ियों का पालन कर रहा था। तभी आगे से सद्गुरु मिल गए और उन्होंने मेरे हाथ में ज्ञान का दीपक दे दिया। गुरु ही अज्ञान के अंधेरे में सही मार्ग दिखाने वाला है।
2. जीवात्मा और परमात्मा का संबंध (विरह)। 'बासुरि सुख नाँ रैणि सुख, ना सुख सुपिनै माँहि। कबीर बिछुट्या राम सूँ ना सुख धूप न छाँह॥' राम (परमात्मा) से बिछड़ी आत्मा को न दिन में सुख है, न रात में, न सपने में; न धूप में चैन है, न छाँव में। जीवात्मा परमात्मा का ही अंश है, इसलिए उससे अलग होकर वह सदा व्याकुल रहती है।
3. बाह्याडंबर का विरोध। 'तन कौं जोगी सब करैं, मन कों बिरला कोइ। सब सिधि सहजै पाइए, जे मन जोगी होइ॥' (2025 की CISCE अंक-योजना में दूसरी पंक्ति 'सब विधि सहजै पाइए' छपी है; अपनी पुस्तक का पाठ देखें।) शरीर को योगी बनाना (भगवा वस्त्र, जटा, भस्म) सब कर लेते हैं, पर मन को योगी बनाने वाला कोई विरला ही होता है। यदि मन योगी हो जाए, अर्थात् विकारों से मुक्त हो जाए, तो सारी सिद्धियाँ सहज ही मिल जाती हैं। कबीर दिखावे की साधना का विरोध करते हैं।
4. अहं का नाश और ज्ञान का प्रकाश। 'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि। सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि॥' जब तक मेरे भीतर 'मैं' (अहंकार) था, तब तक हरि नहीं मिले; अब हरि मिल गए हैं तो अहंकार नहीं रहा। जब भीतर ज्ञान का दीपक दिखाई दिया, तो अज्ञान का सारा अंधकार मिट गया। ईश्वर बाहर नहीं, भीतर है; अहंकार ही उसके और हमारे बीच की दीवार है।
Themes and message
गुरु का महत्त्व
कबीर के लिए गुरु वह है जो रूढ़ियों के पीछे भटकते मनुष्य को ज्ञान का दीपक देकर सही मार्ग दिखाए। 2025 की अंक-योजना का पहला बिंदु यही था: सद्गुरु ज्ञान का दीपक देता है।
From the text: 'आगैं थैं सतगुर मिल्या, दीपक दीया हाथि'।
जीवात्मा-परमात्मा का संबंध और विरह
आत्मा परमात्मा से बिछड़कर अधूरी है; यह विरह उसे हर स्थिति में बेचैन रखता है। विरह यहाँ ईश्वर-मिलन की तीव्र इच्छा का रूप है।
From the text: 'कबीर बिछुट्या राम सूँ ना सुख धूप न छाँह'।
बाह्याडंबर का विरोध
कबीर वेश-भूषा, कर्मकांड और दिखावे की साधना के विरोधी हैं। सच्ची साधना मन की शुद्धि है।
From the text: 'तन कौं जोगी सब करैं, मन कों बिरला कोइ'।
अहंकार का त्याग और आंतरिक ज्ञान
ईश्वर-प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा अहंकार है। 'मैं' मिटते ही ईश्वर का अनुभव होता है और भीतर का दीपक अज्ञान का अंधकार मिटा देता है।
From the text: 'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि'।
The speaker and the people in the poem
कबीर (वक्ता)
निर्गुण संत-कवि, जो अपने अनुभव की साखी दे रहे हैं
- स्पष्टवादी और निर्भीक
- रूढ़ि और आडंबर के विरोधी
- गुरु-भक्त
- अनुभव पर आधारित ज्ञान के समर्थक
वे स्वीकार करते हैं कि वे भी लोक-वेद के पीछे चलते थे; गुरु से ज्ञान पाकर वे तन के योगियों की आलोचना करते हैं और भीतर के दीपक की बात करते हैं।
सद्गुरु
ज्ञान देने वाले गुरु
- मार्गदर्शक
- ज्ञान का दाता
रास्ते में मिलकर हाथ में दीपक थमा देते हैं।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| दोहा छंद | हर साखी दो पंक्तियों का दोहा है (13-11 मात्राओं के चरण)। | छोटे, याद रहने वाले रूप में गहरी बात। |
| रूपक और प्रतीक | 'दीपक' (ज्ञान), 'अँधियारा' (अज्ञान)। | आध्यात्मिक अनुभव को सरल, दृश्य प्रतीकों से समझाते हैं। |
| विरोधाभास और चमत्कार | 'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि'। | अहंकार और ईश्वर के एक साथ न रह सकने की बात चौंकाने वाले ढंग से। |
| अनुप्रास | 'सब सिधि सहजै'। | संगीतात्मकता और स्मरणीयता। |
| सधुक्कड़ी भाषा | 'बिछुट्या', 'रैणि', 'माँहि', 'साथि'। | जनभाषा का सहज प्रभाव; विभिन्न बोलियों का मेल। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
पीछैं लागा जाइ था, लोक बेद के साथि ।
कबीर: गुरु के महत्त्व वाली साखी की पहली पंक्ति (2025 की अंक-योजना में उल्लिखित)।
गुरु मिलने से पहले की अवस्था: बिना सोचे रूढ़ियों का अनुसरण।
आगैं थैं सतगुर मिल्या, दीपक दीया हाथि
कबीर: उसी साखी की दूसरी पंक्ति।
गुरु ज्ञान का दीपक देता है।
तन कौं जोगी सब करैं, मन कों बिरला कोइ।
कबीर: बाह्याडंबर के विरोध वाली साखी।
दिखावे की साधना और मन की साधना का अंतर।
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।
कबीर: अहं-नाश वाली साखी।
अहंकार और ईश्वर एक साथ नहीं रह सकते।
सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि॥
कबीर: उसी साखी की दूसरी पंक्ति (NCERT 'स्पर्श' में भी)।
भीतर के ज्ञान-दीपक से अज्ञान का अंधकार मिटना।
साखी – कबीरदास in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
अंधानुकरण बनाम विवेक
मान लीजिए आपके मित्र केवल इसलिए कोई महँगा फ़ोन खरीदना चाहते हैं कि कक्षा में सब वही ले रहे हैं।
'पीछैं लागा जाइ था, लोक बेद के साथि' से इसका क्या संबंध है?
Try it first, then show the solutionSolution
- कबीर भी भीड़ के पीछे चल रहे थे।
- गुरु के ज्ञान ने उन्हें विवेक दिया।
- सोच-समझकर निर्णय लेना ही 'दीपक' है।
Answer: भीड़ का अनुसरण करना आसान है, पर विवेक से निर्णय लेना ही ज्ञान है; अच्छा मार्गदर्शक यही विवेक जगाता है।
Memory hook: भीड़ नहीं, दीपक।
दिखावा बनाम सच्चाई
कल्पना कीजिए कि कोई व्यक्ति हर दिन सामाजिक माध्यम पर समाज-सेवा की तस्वीरें डालता है, पर अपने घर के कर्मचारी से कठोर व्यवहार करता है।
कबीर की कौन-सी साखी यहाँ लागू होती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- 'तन कौं जोगी सब करैं' दिखावे की साधना की आलोचना है।
- असली परीक्षा मन और व्यवहार है।
Answer: बाहरी प्रदर्शन से कोई अच्छा नहीं बनता; कबीर के अनुसार मन का योगी होना, यानी सच्चा आचरण, ही असली साधना है।
Memory hook: तन का नहीं, मन का योगी।
अहंकार का त्याग
मान लीजिए समूह-परियोजना में एक सदस्य हर विचार को अपना बताने की ज़िद करता है और टीम बिखर जाती है।
'जब मैं था तब हरि नहीं' का संदेश यहाँ कैसे लागू होता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- 'मैं' का भाव दूसरों के लिए जगह नहीं छोड़ता।
- अहंकार मिटने पर ही सहयोग और सफलता संभव है।
Answer: जैसे अहंकार ईश्वर-प्राप्ति में बाधा है, वैसे ही टीम में 'मैं' का भाव सफलता में बाधा है; 'हम' बनते ही अँधियारा मिटता है।
Memory hook: 'मैं' मिटे तो रास्ता खुले।
Topics in this chapter
How the school exam asks साखी – कबीरदास
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पद्यांश: कवि और साखी का संदर्भ (1 अंक) | किसी साखी को उद्धृत करके कवि और पाठ का नाम, या 'साखी' शब्द का अर्थ। | कवि कबीरदास, पाठ 'साखी'; साखी = साक्षी, अनुभव की गवाही। |
| पद्यांश: भावार्थ और प्रतीक (2 + 2 अंक), विचार (5 अंक) | 'दीपक' और 'अँधियारा' किसके प्रतीक हैं? 'मन जोगी' होने से क्या अभिप्राय है? कबीर आडंबर का विरोध क्यों करते हैं? | प्रतीक का अर्थ, फिर साखी का सरल भाव, फिर आज के संदर्भ में विचार। |
| दीर्घ प्रश्न (10 अंक) | 'कबीर की साखियों में गुरु का महत्त्व, जीवात्मा-परमात्मा का सम्बन्ध तथा अज्ञानता रूपी अंधकार से ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर अग्रसित करने का विधान मिलता है।' पठित साखियों के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (2025) | कम से कम तीन (अच्छा हो चार) अलग बिंदु, हर बिंदु के साथ उपयुक्त साखी, फिर उसका भाव; केवल साखियों की व्याख्या नहीं, कथन से जोड़ना। |
Tricks to remember साखी – कबीरदास
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
गु-वि-आ-अ
गुरु (दीपक दिया), विरह (बासुरि सुख), आडंबर (तन कौं जोगी), अहं (जब मैं था): चार साखियाँ, चार बिंदु।
Use it when: दीर्घ प्रश्न का ढाँचा।
दीपक दो बार
पहले गुरु हाथ में देता है, फिर भीतर दिखाई देता है।
Use it when: प्रतीक वाले प्रश्न।
साखी – कबीरदास: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पद्यांश (i): 'साखी' का अर्थ · 1 mark · Very short answerExam level
'साखी' शब्द का क्या अर्थ है? कबीर की साखियों को यह नाम क्यों दिया गया?
Try it first, then show the solutionSolution
- साखी = साक्षी (गवाह)।
- कबीर अपने अनुभव की गवाही देते हैं।
Answer: 'साखी' 'साक्षी' से बना है; कबीर ने जो स्वयं अनुभव किया उसकी गवाही इन दोहों में दी है, इसलिए इन्हें साखी कहते हैं।
Example 2: पद्यांश (ii) और (iii): दीपक और मन जोगी · 4 marks · Short answerHarder exam level
(ii) 'आगैं थैं सतगुर मिल्या, दीपक दीया हाथि' में 'दीपक' किसका प्रतीक है? गुरु ने कबीर को क्या दिया? (iii) 'जे मन जोगी होइ' से कबीर का क्या अभिप्राय है?
Try it first, then show the solutionSolution
- (ii) दीपक = ज्ञान; गुरु ने ज्ञान देकर रूढ़ियों से मुक्त किया।
- (iii) मन का विकारों से मुक्त होना, सच्ची साधना।
Answer: (ii) 'दीपक' ज्ञान का प्रतीक है। कबीर लोक-रीति और वेद-परंपरा के पीछे आँख मूँदकर चल रहे थे; सद्गुरु ने उन्हें ज्ञान का दीपक देकर सही और गलत की पहचान कराई।
(iii) कबीर कहते हैं कि शरीर पर योगी का वेश धारण करना आसान है, पर असली साधना मन को योगी बनाना है, अर्थात् मन को काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से मुक्त करना। ऐसा हो जाए तो सारी सिद्धियाँ सहज ही मिल जाती हैं।
Example 3: पद्यांश (iv): कबीर का आडंबर-विरोध (5 अंक) · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'तन कौं जोगी सब करैं' साखी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कबीर बाह्याडंबरों का विरोध क्यों करते हैं। क्या यह विचार आज भी प्रासंगिक है?
Try it first, then show the solutionSolution
- साखी का भाव: तन का योग बनाम मन का योग।
- विरोध का कारण: दिखावा, आत्म-धोखा, समाज को भ्रम।
- आज के उदाहरण: दिखावे की धार्मिकता, केवल बाहरी प्रतीक।
- निष्कर्ष।
Answer: कबीर कहते हैं कि शरीर को योगी बनाना, यानी भगवा वस्त्र, जटा, माला और भस्म धारण कर लेना, सबके लिए आसान है, पर मन को योगी बनाना विरला ही कर पाता है। वे बाह्याडंबरों का विरोध इसलिए करते हैं कि इनसे न मन शुद्ध होता है, न ईश्वर मिलता है; उल्टे साधक अपने को और समाज को धोखा देता है। उनके अनुसार ईश्वर मन की पवित्रता से मिलता है, वेश-भूषा से नहीं।
यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है। आज भी अनेक लोग धार्मिक चिह्नों, दिखावटी अनुष्ठानों और सामाजिक माध्यमों पर पूजा के प्रदर्शन को ही भक्ति मान लेते हैं, जबकि उनके व्यवहार में करुणा, ईमानदारी और विनम्रता नहीं होती। कबीर की यह साखी हमें याद दिलाती है कि सच्चा धर्म आचरण और मन की शुद्धता में है।
Example 4: दीर्घ प्रश्न: गुरु, जीवात्मा-परमात्मा और ज्ञान का प्रकाश (2025) · 10 marks · Long answerHarder exam level
'कबीर की साखियों में गुरु का महत्त्व, जीवात्मा-परमात्मा का सम्बन्ध तथा अज्ञानता रूपी अंधकार से ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर अग्रसित करने का विधान मिलता है।' पठित साखियों के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- भूमिका: कबीर, निर्गुण ज्ञानमार्गी कवि; साखी का अर्थ।
- बिंदु 1: गुरु का महत्त्व, 'पीछैं लागा...' साखी।
- बिंदु 2: जीवात्मा-परमात्मा का विरह, 'बासुरि सुख...'।
- बिंदु 3: बाह्याडंबर का विरोध, 'तन कौं जोगी...'।
- बिंदु 4: अहं-नाश और ज्ञान का प्रकाश, 'जब मैं था...'।
- निष्कर्ष: कथन से जोड़कर।
Answer: कबीर भक्तिकाल की निर्गुण ज्ञानमार्गी शाखा के प्रमुख कवि हैं। उनकी साखियाँ उनके अनुभव की गवाही हैं, और प्रस्तुत कथन उनके तीन प्रमुख विचारों को सही रूप में सामने रखता है।
गुरु का महत्त्व। कबीर कहते हैं, 'पीछैं लागा जाइ था, लोक बेद के साथि। आगैं थैं सतगुर मिल्या, दीपक दीया हाथि॥' वे भी दुनिया के साथ रूढ़ियों के पीछे चल रहे थे, पर सद्गुरु ने उनके हाथ में ज्ञान का दीपक दे दिया। गुरु ही अज्ञान के अंधेरे में मार्ग दिखाता है।
जीवात्मा-परमात्मा का संबंध। 'बासुरि सुख नाँ रैणि सुख, ना सुख सुपिनै माँहि।' राम से बिछड़ी आत्मा को न दिन में सुख है, न रात में, न सपने में, न धूप में, न छाँव में। आत्मा परमात्मा का अंश है; उसके बिना वह अधूरी और व्याकुल है।
आडंबर से मुक्ति। 'तन कौं जोगी सब करैं, मन कों बिरला कोइ।' बाहरी वेश से कोई योगी नहीं बनता; मन योगी हो, तभी सिद्धि मिलती है। यह भी अज्ञान से ज्ञान की ओर जाने का मार्ग है।
अंधकार से प्रकाश की ओर। 'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि। सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि॥' अहंकार मिटते ही ईश्वर का अनुभव होता है, और भीतर के ज्ञान-दीपक से अज्ञान का सारा अंधकार दूर हो जाता है।
निष्कर्ष। इस प्रकार कबीर की साखियाँ गुरु को ज्ञान का स्रोत, परमात्मा को आत्मा का लक्ष्य और अहंकार तथा आडंबर के त्याग को प्रकाश का मार्ग बताती हैं; कथन पूर्णतः सार्थक है।
Example 5: दीर्घ प्रश्न: दीपक का प्रतीक · 10 marks · Long answerHOTS / competency
कबीर की साखियों में 'दीपक' का प्रतीक दो बार आया है। दोनों प्रसंगों की तुलना करते हुए उसका अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- पहला प्रसंग: गुरु दीपक हाथ में देता है (बाहर से मिला ज्ञान)।
- दूसरा प्रसंग: भीतर दीपक दिखाई देता है (आत्मानुभूति)।
- दोनों का संबंध: गुरु का ज्ञान अंततः भीतर का प्रकाश बनता है।
- अँधियारा: अज्ञान, अहंकार।
Answer: कबीर ने 'दीपक' को ज्ञान के प्रतीक के रूप में दो प्रसंगों में प्रयोग किया है।
पहली साखी में 'सतगुर मिल्या, दीपक दीया हाथि': यहाँ दीपक बाहर से, गुरु से मिलता है। रूढ़ियों के पीछे भटकते शिष्य को गुरु ज्ञान देता है, जिससे वह सही-गलत पहचानने लगता है।
दूसरी साखी में 'सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि': यहाँ दीपक भीतर दिखाई देता है। जब अहंकार ('मैं') मिट जाता है, तब मनुष्य अपने भीतर ही ईश्वर-रूपी प्रकाश का अनुभव करता है, और अज्ञान का अंधकार पूरी तरह मिट जाता है।
दोनों प्रसंग एक यात्रा के दो चरण हैं: गुरु से मिला ज्ञान साधना और अहं-त्याग से भीतर का अनुभव बन जाता है। 'अँधियारा' दोनों जगह अज्ञान और अहंकार का प्रतीक है। इस प्रकार 'दीपक' कबीर की पूरी ज्ञान-साधना का केंद्रीय प्रतीक है: बाहर गुरु, भीतर हरि।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
दीर्घ प्रश्न (10 अंक), 2025 के प्रश्न 8 की अंक-योजना के बिंदुओं पर आधारित। CISCE अंक-विभाजन प्रकाशित नहीं करता; यह संकेतात्मक है। (10 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| भूमिका: कबीर और साखी का परिचय, कथन से जुड़ाव | 1 |
| कम से कम तीन (अच्छा हो चार) अलग बिंदु: गुरु, जीवात्मा-परमात्मा, आडंबर-विरोध, अहं-नाश और ज्ञान | 4 |
| हर बिंदु के साथ उपयुक्त साखी और उसका भाव | 3 |
| भाषा और निष्कर्ष | 2 |
Where students lose marks in साखी – कबीरदास
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: साखियाँ उद्धृत करना पर प्रश्न से न जोड़ना
2025 के परीक्षकों के अनुसार कई विद्यार्थियों ने साखियाँ लिखकर केवल उनकी व्याख्या कर दी।
Do this: हर अनुच्छेद को कथन के किसी अंश से शुरू करें, फिर साखी और भाव।
Usually costs: विषय-वस्तु के अधिकांश अंक।
Mistake: एक ही बिंदु दोहराना
2025 में कुछ ने तीन अलग बिंदुओं के स्थान पर एक ही बात दोहराई।
Do this: गुरु, विरह, आडंबर, अहं-नाश: चार अलग बिंदु तैयार रखें।
Usually costs: विषय-वस्तु के अंक।
Mistake: सीधे सरल अर्थ, भाव के बिना
परीक्षकों का सुझाव था कि पहले भाव, फिर सरल अर्थ लिखें।
Do this: साखी का केंद्रीय विचार (भाव) पहले बताएँ, फिर शब्दार्थ।
Usually costs: प्रस्तुति के अंक।
Mistake: साखियों की वर्तनी बिगाड़ना
सधुक्कड़ी भाषा के शब्द ('बिछुट्या', 'माँहि', 'सतगुर') गलत लिखे जाते हैं।
Do this: चार-पाँच साखियाँ शुद्ध रूप में कंठस्थ करें; बाकी का भाव अपने शब्दों में लिखें।
Usually costs: उद्धरण की विश्वसनीयता।
Practice questions on साखी – कबीरदास
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
कबीर किस भक्ति-धारा के कवि हैं? (a) सगुण रामभक्ति (b) सगुण कृष्णभक्ति (c) निर्गुण ज्ञानमार्गी (d) निर्गुण प्रेममार्गी
Hint
प्रेममार्गी (सूफ़ी) शाखा के कवि जायसी हैं।
Answer
(c) निर्गुण ज्ञानमार्गी।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'लोक बेद के साथि' चलने से कबीर का क्या अभिप्राय है?
Hint
बिना सोचे परंपरा का पालन।
Answer
दुनिया की रीति (लोक) और शास्त्रीय परंपरा (वेद) के अनुसार बिना सोचे-समझे, अंधानुकरण करते हुए चलना; अपने अनुभव और विवेक से सत्य की खोज न करना।
Q3 · 5 marks · Long answerHarder exam level
'बासुरि सुख नाँ रैणि सुख' साखी में जीवात्मा की किस दशा का वर्णन है? स्पष्ट कीजिए।
Hint
राम से बिछड़ने का विरह; दिन, रात, सपना, धूप, छाँव।
Answer
अपेक्षित बिंदु: परमात्मा (राम) से बिछड़ी आत्मा की विरह-दशा; उसे दिन में, रात में, सपने में कहीं सुख नहीं; धूप और छाँव दोनों में बेचैनी; अर्थात् हर स्थिति में व्याकुलता; आत्मा परमात्मा का अंश है, उसके बिना अधूरी; विरह ईश्वर-मिलन की तीव्र इच्छा का रूप।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'जब मैं था तब हरि नहीं' साखी में विरोधाभास कहाँ है? इसका अर्थ समझाइए।
Hint
'मैं' और 'हरि' का एक साथ न होना।
Answer
'मैं' (अहंकार) के रहते 'हरि' नहीं, और 'हरि' के आते 'मैं' नहीं: दोनों एक साथ नहीं रह सकते। अर्थ यह कि अहंकार ही ईश्वर-प्राप्ति में बाधा है; अहंकार मिटते ही ईश्वर का अनुभव होता है।
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
एक विद्यार्थी ने 2025 के दीर्घ प्रश्न के उत्तर में चारों साखियाँ लिखकर उनकी व्याख्या कर दी, पर कथन से कोई संबंध नहीं जोड़ा। परीक्षकों की टिप्पणी के आधार पर उसकी कमी बताइए और सुधार सुझाइए।
Hint
प्रश्न कथन को स्पष्ट करने को कहता है।
Answer
2025 के परीक्षकों के अनुसार विद्यार्थियों ने साखियाँ उद्धृत कीं पर उन्हें प्रश्न से नहीं जोड़ा, और कुछ ने एक ही बिंदु दोहराया। सुधार: हर अनुच्छेद कथन के एक अंश (गुरु का महत्त्व, जीवात्मा-परमात्मा, अंधकार से प्रकाश) से शुरू करें, फिर उपयुक्त साखी दें और भाव समझाएँ; कम से कम तीन अलग बिंदु रखें।
Q6 · 10 marks · Long answerHOTS / competency
कबीर की साखियाँ आज के समय में कितनी प्रासंगिक हैं? पठित साखियों के आधार पर अपने विचार लिखिए।
Hint
अंधानुकरण, दिखावा, अहंकार, गुरु/शिक्षक का महत्त्व।
Answer
अपेक्षित बिंदु: आज भी लोग बिना सोचे परंपराओं और भीड़ के पीछे चलते हैं ('लोक बेद के साथि'); अच्छे शिक्षक और मार्गदर्शक का महत्त्व; दिखावटी धार्मिकता और सामाजिक माध्यमों पर प्रदर्शन ('तन कौं जोगी'); अहंकार के कारण संबंधों और समाज में टकराव ('जब मैं था'); आंतरिक शांति की खोज; निष्कर्ष कि कबीर के विचार कालजयी हैं। हर बिंदु के साथ साखी का उल्लेख।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'साखी' का अर्थ क्या है?Show answer
साक्षी या गवाह; कबीर के अनुभव की गवाही देने वाले दोहे।
2.गुरु ने कबीर के हाथ में क्या दिया?Show answer
दीपक, अर्थात् ज्ञान।
3.राम से बिछड़ी आत्मा को कहाँ-कहाँ सुख नहीं मिलता?Show answer
न दिन में, न रात में, न सपने में; न धूप में, न छाँव में।
4.कबीर की भाषा को क्या कहा जाता है?Show answer
सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी।
5.अहंकार मिटने पर क्या होता है?Show answer
हरि का अनुभव होता है और भीतर के ज्ञान-दीपक से अज्ञान का अंधकार मिट जाता है।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप चारों साखियाँ शुद्ध रूप में लिख सकते हैं?
- क्या आप हर साखी का भाव एक वाक्य में बता सकते हैं?
- क्या आप 'दीपक' और 'अँधियारा' के प्रतीक समझा सकते हैं?
- क्या आप 2025 के दीर्घ प्रश्न का उत्तर चार बिंदुओं में लिख सकते हैं?
- क्या आप कबीर के विचारों की आज की प्रासंगिकता पर लिख सकते हैं?
साखी – कबीरदास: frequently asked questions
काव्य मंजरी में कबीर की कितनी साखियाँ हैं?
हमें काव्य मंजरी का पाठ उपलब्ध नहीं हुआ। 2025 की CISCE अंक-योजना इस पृष्ठ की चार साखियों का उल्लेख करती है; पुस्तक में और साखियाँ भी हो सकती हैं, इसलिए सभी साखियाँ अपनी पुस्तक से पढ़ें।
कबीर ईश्वर को किस रूप में मानते हैं?
निर्गुण, निराकार रूप में; वे राम नाम लेते हैं, पर उनका राम दशरथ-पुत्र नहीं, घट-घट में व्याप्त परमात्मा है।
साखियों में वर्तनी अलग-अलग क्यों मिलती है?
कबीर की वाणी मौखिक परंपरा से आई है और उसके कई संस्करण हैं; 'सतगुर/सद्गुरु', 'है/हैं' जैसे अंतर सामान्य हैं। अपनी पाठ्य-पुस्तक का पाठ लिखें।
कबीर के गुरु कौन थे?
परंपरा के अनुसार स्वामी रामानंद को कबीर का गुरु माना जाता है।
Based on: CISCE ISC 2028 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi 805, Kavya Manjari, Class XI); CISCE ISC Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi, Question 8 (Kabir's sakhis, marking scheme, examiners' comments); Kavita Kosh: कबीर की साखियाँ (गुरुदेव का अंग; बिरह कौ अंग; भेष कौ अंग; परचा कौ अंग); NCERT Sparsh Bhag 2 (Class X), Chapter 1: Kabir, Sakhi