ISC Class 12 हिंदी तुलसीदास के पद: भक्ति-भावना, काव्य-शिल्प और हल सहित प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
गोस्वामी तुलसीदास भक्तिकाल की सगुण काव्य-धारा में रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं। उनकी भक्ति लोकमंगल से जुड़ी है और वे समन्वय के कवि हैं। काव्य मंजरी के पदों का उत्तर लिखते समय भक्ति-भाव, पद का भावार्थ, भाषा (अवधी-ब्रज) और अलंकार, चारों को पंक्तियों के प्रमाण के साथ लिखना होता है।
What तुलसीदास के पद – तुलसीदास is about
तुलसीदास के पद ISC हिंदी (805) की पाठ्यपुस्तक काव्य मंजरी के Class XII भाग का पहला पाठ है। खंड ख में काव्य मंजरी से तीन प्रश्न आते हैं: एक पद्यांश-आधारित (1, 2, 2 और 5 अंक) और दो 10-10 अंकों के दीर्घ प्रश्न।
महत्त्वपूर्ण सूचना। काव्य मंजरी में संकलित तुलसी के पदों का पाठ हमें उपलब्ध नहीं हो सका, और 2024-25 के ISC प्रश्न-पत्रों में इन पदों पर कोई प्रश्न नहीं आया। (रिपॉज़िटरी की प्रश्न-फ़ाइल में 2024 का प्रश्न 8 इस पाठ के नाम से दर्ज है, पर वह सूरदास के पदों पर था, जो अब Class XI में हैं।) इसलिए यह पृष्ठ पदों का पंक्ति-वार भावार्थ नहीं देता। यहाँ कवि-परिचय, तुलसी की भक्ति और काव्य-कला की वे बातें हैं जो NCERT की आरोह भाग 2 के तुलसीदास-परिचय से पुष्ट हैं, और उद्धरण उसी पुस्तक में छपे तुलसी-काव्य से हैं। ये उद्धरण अभ्यास और शैली-विवेचन के लिए हैं; काव्य मंजरी के पद अपनी पाठ्यपुस्तक से पढ़ें।
काव्य मंजरी के अन्य पदों पर परीक्षकों की टिप्पणियाँ यहाँ भी लागू होती हैं (2024, सूरदास के पद): कवि की भक्ति-भावना पर टिप्पणी न करना, तीनों पदों के स्थान पर दो पद लिखना, और पदों का भाव लिखते समय प्रश्न का दूसरा भाग छोड़ देना।
Weightage: काव्य मंजरी से खंड ख में तीन प्रश्न (हर एक 10 अंक) आते हैं; परीक्षार्थी चार पुस्तकों में से तीन चुनकर कुल चार प्रश्न करते हैं। तुलसीदास के पद 2027 से Class XII भाग में हैं; 2024-25 में इन पर प्रश्न नहीं आया।Source: CISCE ISC 2027 भारतीय भाषाएँ पाठ्यक्रम तथा 2024-25 के बोर्ड प्रश्न-पत्र
तुलसीदास के पद – तुलसीदास: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
कवि-परिचय। NCERT के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में बाँदा (उत्तर प्रदेश) ज़िले के राजापुर गाँव में माना जाता है और निधन सन् 1623 में काशी में हुआ। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं: रामचरितमानस, विनयपत्रिका, गीतावली, श्रीकृष्ण गीतावली, दोहावली, कवितावली और रामाज्ञा-प्रश्न।
भक्ति का स्वरूप। तुलसी भक्तिकाल की सगुण काव्य-धारा में रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं। उनमें भक्ति से कविता बनने की प्रक्रिया सहज रूप से दिखती है। NCERT के शब्दों में उनकी भक्ति इतनी लोकोन्मुख है कि वे लोकमंगल की साधना के कवि के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी राम-भक्ति जीवन के यथार्थ संकटों (जैसे 'पेट की आग') का समाधान भी खोजती है और आध्यात्मिक मुक्ति भी।
समन्वय के कवि। तुलसी दार्शनिक और लौकिक स्तर के अनेक द्वंद्वों का चित्रण करते हैं और उनका समन्वय करते हैं: भक्त और रचनाकार का, शास्त्र और लोक का। संस्कृत में समर्थ होते हुए भी उन्होंने लोकभाषा (अवधी और ब्रजभाषा) को रचना का माध्यम चुना। वे सीताराम और राधाकृष्ण, दोनों कथाओं को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाते हैं।
काव्य-कला। NCERT के अनुसार उपमा के क्षेत्र में जो पहचान कालिदास की है, वही सांगरूपक के क्षेत्र में तुलसीदास की है। उनके काव्य में भाव, विचार, काव्य-रूप, छंद और काव्य-भाषा की अद्वितीय समृद्धि है; दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया और पद, सभी रूप उनके यहाँ मिलते हैं।
पद-शैली। पद गेय रचना होती है, जिसकी पहली पंक्ति प्रायः टेक का काम करती है और अंतिम पंक्ति में कवि का नाम (छाप) आता है, जैसे 'तुलसी…'। तुलसी के पद (विनयपत्रिका, गीतावली, श्रीकृष्ण गीतावली) कहीं भक्त का विनय, दैन्य और आत्म-निवेदन प्रकट करते हैं, तो कहीं राम-कथा के प्रसंगों का भावपूर्ण चित्र खींचते हैं। काव्य मंजरी के पद किस प्रकार के हैं, यह अपनी पाठ्यपुस्तक से पहचानें और प्रत्येक पद का भावार्थ वहीं से पढ़ें।
युग-बोध। विविध विषमताओं से भरा कलिकाल तुलसी का युगीन यथार्थ है, जिसमें वे कृपालु राम और रामराज्य का स्वप्न रचते हैं। कवितावली में बेकारी, गरीबी और 'पेट की आग' का यथार्थ चित्रण इसका प्रमाण है।
Themes and message
राम के प्रति अनन्य भक्ति
तुलसी स्वयं को राम का सेवक मानते हैं और जाति-पाँति के दुराग्रहों से ऊपर उठकर भक्ति का आत्मविश्वास प्रकट करते हैं।
From the text: 'तुलसी सरनाम गुलामु है राम को' (कवितावली, NCERT आरोह भाग 2)
लोकमंगल
NCERT के अनुसार तुलसी लोकमंगल की साधना के कवि हैं; उनकी भक्ति जीवन के यथार्थ संकटों का समाधान भी खोजती है।
From the text: 'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी' (कवितावली)
समन्वय
भक्त-कवि, शास्त्र-लोक, अवधी-ब्रज, सीताराम-राधाकृष्ण कथाओं का समन्वय; यह उन्हें विद्वानों और जनसामान्य दोनों में लोकप्रिय बनाता है।
From the text: NCERT आरोह भाग 2 का तुलसीदास-परिचय।
विनय और आत्म-निवेदन
विनयपत्रिका जैसे पद-संग्रहों में भक्त का दैन्य और प्रभु के प्रति आत्म-समर्पण प्रमुख भाव है। यदि काव्य मंजरी के पद विनय के हैं तो यह भाव पंक्तियों से पहचानें; यदि वे राम-कथा के किसी प्रसंग के हैं तो प्रसंग और उसका भाव लिखें।
From the text: पाठ्यपुस्तक के पदों से स्वयं प्रमाण जोड़ें।
The speaker and the people in the poem
तुलसीदास (भक्त-कवि)
पदों का वक्ता: राम का सेवक और लोकमंगल का कवि।
- अनन्य राम-भक्त; प्रभु की कृपा पर अटूट विश्वास।
- विनम्र और आत्म-निवेदी।
- युग के यथार्थ (दारिद्र्य, बेकारी) के प्रति संवेदनशील।
- जाति-धर्म के दुराग्रहों के तिरस्कार का साहस।
NCERT आरोह भाग 2: तुलसीदास-परिचय और कवितावली के छंद।
राम (आराध्य)
भक्त के आराध्य: कृपालु प्रभु और दीनबंधु।
- दीनों के रक्षक ('दीनबंधु')।
- करुणामय; मानवीय धरातल पर रचे गए चरित्र।
कवितावली ('दारिद-दसानन दबाई दुनी, दीनबंधु!') और NCERT परिचय।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| सांगरूपक | 'दारिद-दसानन दबाई दुनी' (दरिद्रता रूपी रावण) | दरिद्रता को रावण के रूप में दिखाकर उसकी भयावहता और राम की कृपा की आवश्यकता दोनों प्रकट होती हैं; NCERT के अनुसार सांगरूपक तुलसी की पहचान है। |
| अनुप्रास | 'किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट' | ध्वनि-साम्य से लय और गेयता। |
| लोकभाषा का प्रयोग | अवधी और ब्रजभाषा | संस्कृत में समर्थ होकर भी लोकभाषा चुनना: जन-जन तक पहुँचने की इच्छा। |
| पद-शैली | गेयता, टेक, अंतिम पंक्ति में 'तुलसी' की छाप | पद गाए जा सकते हैं; छाप से कवि का आत्म-निवेदन सीधे पाठक तक पहुँचता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
तुलसी सरनाम गुलामु है राम को
तुलसीदास (कवितावली; NCERT आरोह भाग 2): अभ्यास हेतु तुलसी-काव्य का उदाहरण, काव्य मंजरी के पदों से नहीं।
राम के प्रति अनन्य सेवा-भाव और भक्त का आत्मविश्वास।
आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी
तुलसीदास (कवितावली; NCERT आरोह भाग 2): अभ्यास हेतु उदाहरण; पेट की आग का यथार्थ।
भक्ति के साथ युग-यथार्थ: भूख समुद्र की आग से भी बड़ी है।
दारिद-दसानन दबाई दुनी, दीनबंधु!
तुलसीदास (कवितावली; NCERT आरोह भाग 2): अभ्यास हेतु उदाहरण; बेकारी और गरीबी का चित्र।
सांगरूपक: दरिद्रता रूपी रावण; दीनबंधु राम से प्रार्थना।
हृदय-सिंधु मति सीप समाना।
तुलसीदास (NCERT परिचय में उद्धृत): काव्य-रचना पर तुलसी की दृष्टि।
हृदय समुद्र और बुद्धि सीप के समान; विचार की वर्षा से कविता रूपी मोती बनते हैं।
तुलसीदास के पद – तुलसीदास in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
पेट की आग और कल्याणकारी दृष्टि
मान लीजिए आपके शहर में बेरोज़गारी के कारण कुछ युवा अपराध की ओर बढ़ रहे हैं।
कवितावली की 'पेट की आग' वाली दृष्टि से इस समस्या को कैसे समझेंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- तुलसी के अनुसार पेट के लिए ही लोग 'ऊँचे-नीचे करम' करते हैं।
- भूख को नैतिक उपदेश से नहीं, जीविका से बुझाना होगा।
- समाधान: कौशल-प्रशिक्षण और रोज़गार।
Answer: तुलसी की लोकमंगल वाली दृष्टि बताती है कि अपराध की जड़ अक्सर भूख और बेकारी है; उसे दूर करना ही सच्चा समाधान है।
Memory hook: पहले रोटी, फिर उपदेश।
समन्वय
कल्पना कीजिए कि आपकी कक्षा में अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले छात्र हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए एक ही भाषा पर झगड़ा हो रहा है।
तुलसी की समन्वय-दृष्टि यहाँ क्या सुझाएगी?
Try it first, then show the solutionSolution
- तुलसी ने अवधी और ब्रज दोनों में लिखा।
- सबको अपनी उपस्थिति का संतोष देना।
Answer: कार्यक्रम में हर भाषा की एक प्रस्तुति रखी जाए; विविधता में एकता ही तुलसी का समन्वय है।
Memory hook: दो भाषाएँ, एक राम-कथा।
भेदभाव का तिरस्कार
मान लीजिए कोई व्यक्ति किसी को उसकी जाति के आधार पर ताने देता है।
तुलसी के सवैये 'धूत कहौ, अवधूत कहौ…' का भाव इस स्थिति में क्या कहता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- तुलसी कहते हैं कि कोई कुछ भी कहे, वे राम के सेवक हैं; उन्हें किसी की जाति से लेना-देना नहीं।
- NCERT के अनुसार यह जात-पाँत के दुराग्रहों के तिरस्कार का साहस देता है।
Answer: मनुष्य की पहचान उसके कर्म और आस्था से है, जाति से नहीं; ऐसे तानों का आत्मविश्वास से विरोध करना चाहिए।
Memory hook: कोई कुछ कहे, मैं मनुष्य हूँ।
Topics in this chapter
How the board asks तुलसीदास के पद – तुलसीदास
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पद्यांश: पाठ और कवि (1 अंक) | 'प्रस्तुत पंक्तियों से सम्बन्धित कविता तथा कवि का नाम लिखिए।' | पाठ 'तुलसीदास के पद', कवि गोस्वामी तुलसीदास; शुद्ध वर्तनी। |
| पद्यांश: भावार्थ और प्रसंग (2 + 2 अंक) | पद में भक्त किससे क्या प्रार्थना करता है? किसी शब्द/पंक्ति का भाव। | पहले सरल अर्थ, फिर भक्ति-भाव; प्रश्न के दोनों भाग। |
| पद्यांश: भक्ति या प्रासंगिकता (5 अंक) | पद के आधार पर तुलसी की भक्ति-भावना या आज के जीवन में संदेश, दो तर्कों सहित। | दो तर्क, हर एक में पद की पंक्ति और उदाहरण। |
| दीर्घ प्रश्न (10 अंक) | संकलित पदों के आधार पर कवि की भक्ति-भावना और काव्य-सौंदर्य (2024 में सूरदास के पदों पर इसी ढाँचे का प्रश्न आया था)। | कवि-परिचय (2-3 वाक्य), भक्ति का स्वरूप, हर पद का भाव क्रम से, भाषा-अलंकार, पंक्तियाँ उद्धृत; सभी पद शामिल करें। |
Tricks to remember तुलसीदास के पद – तुलसीदास
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
तुलसी की पहचान: रा-लो-स-सां
रामभक्ति, लोकमंगल, समन्वय, सांगरूपक।
Use it when: भूमिका और काव्य-सौंदर्य।
जन्म-निधन
1532 राजापुर (बाँदा) → 1623 काशी।
Use it when: कवि-परिचय।
सात रचनाएँ: रा-वि-गी-श्री-दो-क-रा
रामचरितमानस, विनयपत्रिका, गीतावली, श्रीकृष्ण गीतावली, दोहावली, कवितावली, रामाज्ञा-प्रश्न।
Use it when: रचनाओं वाला प्रश्न।
तुलसीदास के पद – तुलसीदास: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: लघु प्रश्न: कवि-परिचय · 2 marks · Short answerBoard level
तुलसीदास किस काव्य-धारा और शाखा के कवि हैं? उनकी चार प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- भक्तिकाल, सगुण काव्य-धारा, रामभक्ति शाखा।
- रचनाएँ: रामचरितमानस, विनयपत्रिका, गीतावली, कवितावली (दोहावली भी)।
Answer: तुलसीदास भक्तिकाल की सगुण काव्य-धारा की रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं: रामचरितमानस, विनयपत्रिका, गीतावली और कवितावली (इनके अतिरिक्त दोहावली, श्रीकृष्ण गीतावली, रामाज्ञा-प्रश्न)।
Example 2: अभ्यास-पद्यांश (i)-(ii): भाव और अलंकार · 2 marks · Short answerHarder board level
(अभ्यास के लिए कवितावली से; काव्य मंजरी से नहीं) 'खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, बलि, / बनिक को बनिज, न चाकर को चाकरी।' इन पंक्तियों में किस स्थिति का चित्रण है? आगे की पंक्ति 'दारिद-दसानन दबाई दुनी' में कौन-सा अलंकार है?
Try it first, then show the solutionSolution
- स्थिति: बेकारी और जीविका-विहीनता; किसान, भिखारी, व्यापारी, नौकर सब बेरोज़गार।
- अलंकार: रूपक (सांगरूपक), दरिद्रता = दशानन (रावण)।
Answer: इन पंक्तियों में तुलसी के युग की बेकारी और गरीबी का चित्रण है: किसान के पास खेती नहीं, भिखारी को भीख नहीं, व्यापारी को व्यापार नहीं और नौकर को नौकरी नहीं। 'दारिद-दसानन दबाई दुनी' में रूपक अलंकार है, जहाँ दरिद्रता को रावण (दशानन) बताया गया है, जिसने पूरी दुनिया को दबा रखा है।
Example 3: लघु प्रश्न: लोकमंगल · 2 marks · Short answerHarder board level
तुलसीदास को 'लोकमंगल की साधना का कवि' क्यों कहा जाता है? उनकी भक्ति की इस विशेषता को स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- भक्ति लोकोन्मुख: जीवन के यथार्थ संकटों से जुड़ी।
- लोकभाषा का चुनाव; समाज की नैतिक बनावट की समझ।
Answer: तुलसी की भक्ति केवल व्यक्तिगत मोक्ष तक सीमित नहीं, लोक के कल्याण से जुड़ी है। वे भूख, बेकारी और दारिद्र्य जैसे यथार्थ संकटों का समाधान राम की कृपा में देखते हैं, और संस्कृत में समर्थ होकर भी लोकभाषा में लिखते हैं ताकि जन-जन तक पहुँचें। इसीलिए NCERT उन्हें लोकमंगल की साधना का कवि कहती है।
Example 4: मत-आधारित प्रश्न: समन्वय की प्रासंगिकता (5 अंक) · 5 marks · Long answerHOTS / competency
तुलसीदास को 'समन्वय का कवि' कहा जाता है। आज के समाज में उनकी समन्वय-दृष्टि कितनी प्रासंगिक है? दो तर्कों सहित स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- समन्वय का अर्थ: भक्त-कवि, शास्त्र-लोक, अवधी-ब्रज, विभिन्न विचारधाराओं का मेल।
- तर्क 1: विविधता वाले समाज में सबको अपनी उपस्थिति का संतोष; एकता का सूत्र।
- तर्क 2: भेदभाव के विरुद्ध भक्ति का आत्मविश्वास ('धूत कहौ…' वाला सवैया)।
- निष्कर्ष: आज अधिक प्रासंगिक।
Answer: NCERT के अनुसार तुलसी दार्शनिक और लौकिक स्तर के अनेक द्वंद्वों के चित्रण और उनके समन्वय के कवि हैं; वे शास्त्र और लोक, भक्ति और कविता, अवधी और ब्रज, सीताराम और राधाकृष्ण की कथाओं को साथ लेकर चलते हैं।
पहला तर्क: द्वंद्व-चित्रण सभी विचारधाराओं के लोगों को तुलसी-काव्य में अपनी उपस्थिति का संतोष देता है, और समन्वय उनकी ऊपरी भिन्नता में छिपे एक मानवीय सूत्र को सामने लाता है। आज के बहुभाषी, बहुधर्मी भारत में यही दृष्टि एकता और शांति का मार्ग है।
दूसरा तर्क: कवितावली के सवैये 'धूत कहौ, अवधूत कहौ…' में भक्त-हृदय का आत्मविश्वास जात-पाँत और धर्म के विभेदक दुराग्रहों के तिरस्कार का साहस देता है। NCERT के अनुसार आज के भेदभावमूलक माहौल में यह और अधिक प्रासंगिक है।
अतः तुलसी की समन्वय-दृष्टि आज भी समाज को जोड़ने का सशक्त आधार है।
Example 5: दीर्घ प्रश्न: भक्ति-भावना और काव्य-सौंदर्य · 10 marks · Long answerHarder board level
संकलित पदों के आधार पर गोस्वामी तुलसीदास की भक्ति-भावना और काव्य-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कवि-परिचय: रामभक्ति शाखा, लोकमंगल, समन्वय (2-3 वाक्य)।
- भक्ति का स्वरूप: दास्य/सेवक भाव, विनय, शरणागति, राम की कृपा पर विश्वास।
- हर संकलित पद का भाव क्रम से, एक-एक पंक्ति के उद्धरण सहित (पाठ्यपुस्तक से)।
- काव्य-सौंदर्य: लोकभाषा, सांगरूपक, अनुप्रास, गेयता, 'तुलसी' की छाप।
- निष्कर्ष; सभी पद शामिल करें (2024 में सूरदास वाले प्रश्न पर परीक्षकों की टिप्पणी)।
Answer: उत्तर की रूपरेखा (पदों की पंक्तियाँ अपनी पाठ्यपुस्तक से जोड़ें):
भूमिका। गोस्वामी तुलसीदास भक्तिकाल की सगुण धारा में रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं। उनकी भक्ति लोकोन्मुख है, इसलिए वे लोकमंगल की साधना के कवि माने जाते हैं।
भक्ति-भावना। तुलसी की भक्ति सेवक-भाव की है: वे स्वयं को राम का सेवक मानते हैं ('तुलसी सरनाम गुलामु है राम को', कवितावली)। उनके पदों में प्रायः भक्त का विनय, आत्म-निवेदन और प्रभु की कृपा पर अटूट विश्वास मिलता है (संकलित पदों में जो भाव हों, वही लिखें)। [यहाँ काव्य मंजरी के प्रत्येक पद का भाव, एक-एक पंक्ति के उद्धरण सहित, क्रम से लिखें।]
काव्य-सौंदर्य। संस्कृत में समर्थ होकर भी तुलसी ने अवधी और ब्रजभाषा में लिखा। सांगरूपक उनकी पहचान है (जैसे 'दारिद-दसानन')। पद गेय हैं, उनमें अनुप्रास की मधुरता है और अंतिम पंक्ति में 'तुलसी' की छाप आत्म-निवेदन को व्यक्तिगत बना देती है।
निष्कर्ष। तुलसी के पद भक्ति और कविता का सहज मेल हैं: उनमें आराध्य के प्रति समर्पण भी है और मनुष्य के जीवन-संकटों की गहरी समझ भी। लगभग 250-300 शब्द, अनुच्छेदों में।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
दीर्घ प्रश्न (10 अंक): संकलित पदों के आधार पर भक्ति-भावना, 2024 के सूरदास वाले प्रश्न 8 की अंक-योजना के ढाँचे पर (परीक्षकों के अनुसार हर पद पर अंक निर्धारित थे; यहाँ का अंक-विभाजन सांकेतिक है)। (10 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| कवि की भक्ति-धारा और भक्ति का स्वरूप (सगुण, रामभक्ति, सेवक-भाव) | 2 |
| पहले पद का भाव, पंक्ति सहित | 2 |
| दूसरे पद का भाव, पंक्ति सहित | 2 |
| शेष पद (यदि हों) का भाव, काव्य-सौंदर्य और निष्कर्ष | 4 |
Where students lose marks in तुलसीदास के पद – तुलसीदास
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कवि की भक्ति-धारा पर टिप्पणी न करना
2024 में सूरदास के पदों वाले प्रश्न पर परीक्षकों ने लिखा कि छात्रों ने यह नहीं बताया कि सूर कृष्ण-भक्ति के सगुण कवि हैं; यही भूल तुलसी पर भी संभव है।
Do this: भूमिका में: 'तुलसी सगुण भक्तिधारा की रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं।'
Usually costs: 2 अंक।
Mistake: सभी संकलित पद न लिखना
2024 में परीक्षकों ने देखा कि तीन में से दो पद ही लिखे गए या बहुत संक्षेप में।
Do this: पदों की सूची और हर पद की पहली पंक्ति याद रखें।
Usually costs: 2-4 अंक।
Mistake: अवधी/ब्रज शब्दों की अशुद्ध वर्तनी
उद्धरण में मात्राओं की भूल से भाषा के अंक कटते हैं; परीक्षकों ने मुख्य पंक्तियाँ याद कराने की सलाह दी।
Wrong working
तुलसि सरनाम गुलाम है राम का
Right working
तुलसी सरनाम गुलामु है राम को
Do this: मूल पाठ की वर्तनी में ही याद करें; खड़ी बोली में न बदलें।
Usually costs: भाषा के 1-2 अंक।
Mistake: भावार्थ के स्थान पर केवल शब्दार्थ
पद का शब्द-दर-शब्द अनुवाद लिखने से भक्ति-भाव और काव्य-सौंदर्य छूट जाता है।
Do this: हर पद के लिए: सरल अर्थ (1-2 वाक्य) + भक्ति-भाव + एक काव्य-विशेषता।
Usually costs: 2-3 अंक।
Practice questions on तुलसीदास के पद – तुलसीदास
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
तुलसीदास का जन्म कहाँ माना जाता है?
(क) काशी
(ख) राजापुर, बाँदा
(ग) अयोध्या
(घ) चित्रकूटHint
NCERT परिचय।
Answer
(ख) राजापुर, बाँदा (उत्तर प्रदेश); निधन काशी में।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
'हृदय-सिंधु मति सीप समाना' पंक्ति में तुलसी ने काव्य-रचना की प्रक्रिया को कैसे समझाया है?
Hint
हृदय = समुद्र, बुद्धि = सीप, कविता = मोती।
Answer
तुलसी कहते हैं कि कवि का हृदय समुद्र के समान और बुद्धि सीप के समान है। जब उस पर श्रेष्ठ विचारों की वर्षा (सरस्वती की कृपा) होती है, तब सीप में मोती की तरह सुंदर कविता बनती है। अर्थात कविता भाव और बुद्धि के मेल से जन्म लेती है।
Q3 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी' पंक्ति के आधार पर बताइए कि तुलसी की भक्ति जीवन के यथार्थ से कैसे जुड़ी है।
Hint
पेट के लिए ऊँचे-नीचे कर्म; समाधान राम-रूपी घनश्याम।
Answer
कवितावली के इस छंद में तुलसी दिखाते हैं कि किसान, व्यापारी, भिखारी, नट, चोर, सब पेट के लिए ही ऊँचे-नीचे कर्म करते हैं, यहाँ तक कि बेटा-बेटी तक बेच देते हैं। पेट की आग समुद्र की बड़वाग्नि से भी बड़ी है। NCERT के अनुसार तुलसी इसका समाधान राम-रूपी घनश्याम (मेघ) के कृपा-जल में देखते हैं। अर्थात उनकी भक्ति केवल परलोक की बात नहीं करती, भूख और गरीबी जैसे यथार्थ संकटों को भी पहचानती है। यह लोकमंगल की भक्ति है।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
तुलसी ने संस्कृत के स्थान पर लोकभाषा (अवधी-ब्रज) को रचना का माध्यम क्यों चुना? इसका क्या प्रभाव हुआ?
Hint
लोकोन्मुख भक्ति; जनसामान्य तक पहुँच।
Answer
उनकी भक्ति लोकोन्मुख थी और वे जन-जन तक राम-कथा और भक्ति पहुँचाना चाहते थे; संस्कृत केवल विद्वानों की भाषा थी। लोकभाषा चुनने से उनका काव्य विद्वानों और जनसामान्य में समान रूप से लोकप्रिय हुआ और रामचरितमानस घर-घर पहुँचा।
Q5 · 10 marks · Long answerHOTS / competency
काव्य मंजरी में संकलित तुलसीदास के पदों के आधार पर उनकी भक्ति-भावना की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।
Hint
पाठ्यपुस्तक के हर पद से एक पंक्ति; सेवक-भाव, विनय, शरणागति, कृपा पर विश्वास, लोकमंगल।
Answer
अपेक्षित बिंदु: कवि-परिचय और रामभक्ति शाखा; सेवक/दास्य भाव; विनय और दैन्य (यदि संकलित पदों में हों); प्रभु की कृपा और शरणागति पर विश्वास; लोकमंगल और जीवन-यथार्थ से जुड़ाव; हर संकलित पद का भाव और उसकी एक पंक्ति (पाठ्यपुस्तक से); भाषा, अलंकार, गेयता; निष्कर्ष। सभी पद शामिल करें; केवल दो पद लिखने पर अंक कटते हैं (2024 की परीक्षक-टिप्पणी, सूरदास के पदों पर)।
Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
2024 में सूरदास के पदों पर पूछे गए प्रश्न में छात्रों ने कवि की भक्ति-भावना पर टिप्पणी नहीं की और तीन में से दो ही पद लिखे। तुलसीदास के पदों पर ऐसे प्रश्न में आप ये भूलें कैसे टालेंगे?
Hint
भूमिका में भक्ति-धारा; सभी पद क्रम से।
Answer
भूमिका में ही लिखूँगा कि तुलसी सगुण भक्तिधारा की रामभक्ति शाखा के कवि हैं और उनकी भक्ति सेवक-भाव तथा लोकमंगल की है। फिर काव्य मंजरी के सभी संकलित पदों को क्रम से, हर एक का भाव और एक पंक्ति लिखूँगा, ताकि कोई पद न छूटे।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.तुलसीदास किस भक्ति-शाखा के कवि हैं?Show answer
सगुण भक्तिधारा की रामभक्ति शाखा।
2.तुलसी ने किन लोकभाषाओं में रचना की?Show answer
अवधी और ब्रजभाषा।
3.NCERT के अनुसार तुलसी किस अलंकार के क्षेत्र में विशेष पहचान रखते हैं?Show answer
सांगरूपक।
4.पद की अंतिम पंक्ति में प्रायः क्या आता है?Show answer
कवि की छाप (नाम), जैसे 'तुलसी…'।
5.तुलसी का निधन कब और कहाँ हुआ?Show answer
सन् 1623 में, काशी में।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप काव्य मंजरी के हर पद की पहली पंक्ति और भाव (पाठ्यपुस्तक से) लिख सकते हैं?
- क्या आप तुलसी की भक्ति की तीन विशेषताएँ बता सकते हैं?
- क्या आप 'लोकमंगल' और 'समन्वय' का अर्थ उदाहरण सहित समझा सकते हैं?
- क्या आप सांगरूपक का एक उदाहरण दे सकते हैं?
- क्या आप दीर्घ उत्तर में सभी पद क्रम से शामिल कर सकते हैं?
तुलसीदास के पद – तुलसीदास: frequently asked questions
काव्य मंजरी में तुलसीदास के कौन-से पद हैं?
यह पृष्ठ उनका पाठ नहीं दे पाया, क्योंकि काव्य मंजरी का मुद्रित पाठ उपलब्ध नहीं था। अपनी पाठ्यपुस्तक से पदों की सूची और पहली पंक्तियाँ देखें और यहाँ दी गई रूपरेखा में जोड़ें।
तुलसीदास की भक्ति की मुख्य विशेषता क्या है?
राम के प्रति सेवक-भाव की अनन्य भक्ति, जो लोकोन्मुख है: वह जीवन के यथार्थ संकटों से जुड़ती है और लोकमंगल की साधना करती है।
क्या 2024 का 'सूरदास' वाला प्रश्न तुलसीदास के पदों पर था?
नहीं। 2024 का प्रश्न 8 सूरदास के पदों (बाल-लीला, वात्सल्य) पर था, जो अब Class XI में हैं। तुलसीदास के पद 2027 से Class XII में हैं।
Based on: CISCE ISC 2027 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi 805: Kavya Manjari); CISCE ISC Analysis of Pupil Performance 2024: Hindi (board paper, marking scheme, examiners' comments); NCERT Aroh Bhag 2 (Class XII): Goswami Tulsidas, Kavitavali and Ramcharitmanas (poet profile and text)