ISC Class 12 हिंदी जाग तुझको दूर जाना है (महादेवी वर्मा): भाव, व्याख्या और हल सहित प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'जाग तुझको दूर जाना है' महादेवी वर्मा का जागरण-गीत है। कवयित्री अपने मन और हर मनुष्य से कहती हैं कि आँधी, भूकंप और प्रलय जैसी बाधाओं से न डरो, मोह के कोमल बंधन तोड़ो और लक्ष्य की ओर बढ़ते रहो, क्योंकि संघर्ष में मिली हार भी विजय बन जाती है।
What जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा is about
जाग तुझको दूर जाना है छायावाद की प्रमुख कवयित्री महादेवी वर्मा का गीत है, जो ISC हिंदी (805) की पाठ्यपुस्तक काव्य मंजरी के Class XII भाग में है। NCERT की अंतरा भाग 1 में यही गीत 'जाग तुझको दूर जाना' शीर्षक से छपा है; इस पृष्ठ के सभी उद्धरण उसी पाठ से शब्दशः लिए गए हैं।
खंड ख में चार में से किन्हीं तीन पुस्तकों से कुल चार प्रश्न करने होते हैं। काव्य मंजरी से तीन प्रश्न आते हैं: एक पद्यांश-आधारित (1, 2, 2 और 5 अंक) और दो 10-10 अंकों के दीर्घ प्रश्न। 2024 के बोर्ड प्रश्न-पत्र में इसी गीत पर 10 अंकों का प्रश्न (प्रश्न 9) आया: कवयित्री अपने मन तथा मानव-मन को क्या संदेश देना चाहती हैं, और कविता की पंक्तियाँ हममें नया उत्साह कैसे भरती हैं।
परीक्षकों ने लिखा कि बहुत कम परीक्षार्थियों ने यह प्रश्न किया; कुछ ने इसे 'स्वाधीनता' के संदर्भ में संघर्ष से जोड़कर लिखा, जो सही नहीं था, और कई यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि पंक्तियाँ मन में उत्साह कैसे भरती हैं। अंक-योजना में मन को प्रेरित करने वाला संदेश, बाधाओं के प्रतीक और 'आग हो उर में तभी…' जैसी पंक्तियाँ अपेक्षित थीं।
Weightage: काव्य मंजरी से खंड ख में तीन प्रश्न (हर एक 10 अंक) आते हैं; परीक्षार्थी चार पुस्तकों में से तीन चुनकर कुल चार प्रश्न करते हैं। 2024 में इस गीत पर 10 अंकों का दीर्घ प्रश्न आया।Source: CISCE ISC 2027 भारतीय भाषाएँ पाठ्यक्रम तथा 2024 का बोर्ड प्रश्न-पत्र (परीक्षकों की रिपोर्ट)
जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
गीत का स्वरूप। यह एक प्रयाण-गीत या जागरण-गीत है। हर छंद के अंत में टेक की तरह 'जाग तुझको दूर जाना!' आता है। कवयित्री किसी और से नहीं, अपने ही मन से और उसके माध्यम से हर मनुष्य से बात करती हैं। NCERT के परिचय के अनुसार यह गीत स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचा गया, पर इसका संदेश हर उस व्यक्ति के लिए है जो किसी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
पहला छंद: आलस्य छोड़ो, बाधाओं से मत डरो। जो आँखें सदा सजग रहती थीं, वे आज नींद से भरी हैं और वेश अस्त-व्यस्त है। कवयित्री कहती हैं कि चाहे अचल हिमालय काँप उठे, आकाश प्रलय के आँसू बहाए, घोर अंधकार छा जाए या बिजली के बीच तूफ़ान गरजे, तुझे इस नाशवान पथ पर अपने पदचिह्न छोड़कर जाना है।
दूसरा छंद: मोह के कोमल बंधन। बाधाएँ केवल भयानक नहीं, आकर्षक भी होती हैं: 'मोम के बंधन सजीले', तितलियों के रंगीले पंख, भौंरे की मधुर गुनगुन और ओस से भीगी फूल की पंखुड़ियाँ। ये सुख-सुविधा और सांसारिक मोह के प्रतीक हैं। कवयित्री चेताती हैं कि अपनी ही छाया को अपने लिए कारागार न बना लेना।
तीसरा छंद: अमरता का पुत्र मृत्यु क्यों चाहे। वज्र जैसा कठोर हृदय एक छोटे आँसू में गल गया; जीवन का अमृत देकर दो घूँट मदिरा माँग लाया। कवयित्री पूछती हैं कि अमरता-सुत होकर मनुष्य मृत्यु (निष्क्रियता) को हृदय में क्यों बसाना चाहता है।
चौथा छंद: संघर्ष की आग। ठंडी साँसें भरकर पुरानी कहानी मत भूलो; हृदय में आग होगी तभी आँखों में आँसू की चमक सार्थक होगी। संघर्ष में मिली हार भी विजय की पताका बनेगी, जैसे पतंगे की राख दीपक की अमरता का प्रमाण है। अंत में कहा गया है कि अंगारों की शय्या पर भी कोमल कलियाँ बिछानी हैं, अर्थात कठिनाइयों के बीच भी कोमलता और सृजन बनाए रखना है।
Themes and message
जागरण और कर्मठता
आलस्य और नींद को छोड़कर लक्ष्य की ओर चलने का आह्वान। 'दूर जाना' जीवन के ऊँचे लक्ष्य का संकेत है।
From the text: 'चिर सजग आँखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना!'
बाधाओं के बीच अडिग रहना
हिमगिरि का काँपना, प्रलय, अंधकार और तूफ़ान बाहरी कठिनाइयों के प्रतीक हैं; साधक को इनसे नहीं डरना है।
From the text: 'अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कंप हो ले'
मोह-माया से मुक्ति
सबसे कठिन बाधाएँ आकर्षक होती हैं: सुख, सौंदर्य और आराम। ये 'मोम के बंधन' हैं, जो कोमल दिखते हैं पर मनुष्य को बाँध लेते हैं।
From the text: 'बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?'
संघर्ष में हार भी जीत
जो लक्ष्य के लिए जलता है, उसकी हार भी गौरव की बात है; पतंगे की राख दीपक की अमरता की निशानी है।
From the text: 'हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका'
The speaker and the people in the poem
कवयित्री (वक्ता)
अपने मन को और हर मनुष्य को जगाने वाली प्रेरक आवाज़।
- आत्म-संबोधन: 'तू' कहकर अपने ही मन को झकझोरती हैं।
- दृढ़ और आशावादी; हार को भी विजय मानती हैं।
- करुणा और संघर्ष दोनों को साथ रखती हैं ('अंगार-शय्या पर मृदुल कलियाँ')।
गीत की टेक और चौथा छंद।
पथिक (संबोधित मन)
वह मनुष्य जिसे लंबी यात्रा करनी है, पर जो नींद और मोह में पड़ा है।
- स्वभाव से सजग, पर इस समय उनींदा।
- मोह और सुख के बंधनों की ओर आकर्षित।
- 'अमरता-सुत': भीतर से अमर शक्ति वाला।
पहला और तीसरा छंद।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| प्रतीक-विधान | 'मोम के बंधन', 'तितलियों के पर रंगीले', 'मधुप की मधुर गुनगुन' | सांसारिक सुख और मोह को कोमल, सुंदर वस्तुओं से दिखाकर बताया गया है कि आकर्षक बाधाएँ अधिक खतरनाक होती हैं। |
| मानवीकरण | 'अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कंप हो ले', 'मौन अलसित व्योम रो ले' | हिमालय को हृदय वाला और आकाश को रोता हुआ दिखाकर प्रलय जैसी परिस्थिति सजीव हो उठती है। |
| विरोधाभास | 'हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका', 'अंगार-शय्या पर मृदुल कलियाँ' | विपरीत बातों को साथ रखकर संघर्ष का गौरव और कठिनाई में कोमलता का भाव प्रकट होता है। |
| प्रश्न-शैली और टेक | 'पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?'; हर छंद के अंत में 'जाग तुझको दूर जाना!' | प्रश्न मन को सोचने पर मजबूर करते हैं; दोहराई गई टेक गीत को प्रयाण-गीत की लय देती है। |
| भाषा | 'तिमिर', 'व्योम', 'विद्युत-शिखाओं', 'उपधान' | तत्सम-प्रधान खड़ी बोली, लाक्षणिकता और संगीतात्मकता: छायावादी शैली की पहचान। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
चिर सजग आँखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना!
कवयित्री: गीत की पहली पंक्ति।
सदा सजग रहने वाला मन आज आलस्य में है; यहीं से जागने का आह्वान शुरू होता है।
पर तुझे है नाश-पथ पर चिह्न अपने छोड़ आना!
कवयित्री: पहले छंद के अंत में, सब बाधाओं की सूची के बाद।
नाशवान संसार में भी अपने कर्मों की छाप छोड़नी है।
बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?
कवयित्री: दूसरे छंद की पहली पंक्ति।
सांसारिक मोह के आकर्षक पर कमज़ोर बंधनों पर व्यंग्यपूर्ण प्रश्न।
तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना!
कवयित्री: दूसरे छंद का निष्कर्ष।
अपनी ही कमज़ोरियाँ और मोह मनुष्य की जेल न बन जाएँ।
आग हो उर में तभी दृग में सजेगा आज पानी
कवयित्री: चौथे छंद में; 2024 की अंक-योजना में उत्साह भरने वाली पंक्ति के रूप में अपेक्षित।
हृदय में संघर्ष की आग होगी तभी आँसू भी सार्थक होंगे।
राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी!
कवयित्री: चौथा छंद।
बलिदान व्यर्थ नहीं जाता; पतंगे की राख दीपक के अमर होने का प्रमाण है।
जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
आकर्षक बाधाएँ
मान लीजिए बोर्ड परीक्षा से दो महीने पहले आप हर शाम पढ़ने बैठते हैं, पर मोबाइल पर रील्स और गेम आपका एक-दो घंटा ले लेते हैं।
कविता के किस प्रतीक से यह स्थिति मेल खाती है और कवयित्री आपको क्या कहतीं?
Try it first, then show the solutionSolution
- रील्स और गेम = 'तितलियों के पर रंगीले', 'मधुप की मधुर गुनगुन': सुंदर पर मार्ग रोकने वाले।
- ये 'मोम के बंधन' हैं: संकल्प से टूट सकते हैं।
- कवयित्री का संदेश: अपनी छाँह (आदत) को अपनी कारा मत बनाओ।
Answer: यह ठीक वही आकर्षक बाधा है जिसका वर्णन दूसरे छंद में है। समाधान: पढ़ाई के समय फ़ोन दूर रखना; 'जाग तुझको दूर जाना' को अपना मंत्र बनाना।
Memory hook: जो सबसे प्यारा लगे, वही सबसे बड़ा बंधन हो सकता है।
हार भी जीत
कल्पना कीजिए कि आपका मित्र राज्य-स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहा और अब कहता है कि वह फिर कभी भाग नहीं लेगा।
कविता की किन पंक्तियों से आप उसका उत्साह लौटाएँगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- 'हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका'।
- उसने जो सीखा और जो साहस दिखाया, वही उसकी जीत है।
- 'आग हो उर में': संकल्प की आग बुझने न दे।
Answer: उसे बताएँगे कि संघर्ष में मिली हार भी सम्मान है और यही अनुभव अगली जीत की नींव बनेगा।
Memory hook: हार वही, जहाँ प्रयास रुक जाए।
कठिनाई में कोमलता
मान लीजिए कोई डॉक्टर लगातार कई रातें अस्पताल में काम करता है, फिर भी हर मरीज़ से मुस्कराकर बात करता है।
यह कविता की किस पंक्ति को चरितार्थ करता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- थकान और दबाव = 'अंगार-शय्या'।
- मरीज़ों के प्रति स्नेह = 'मृदुल कलियाँ'।
Answer: 'है तुझे अंगार-शय्या पर मृदुल कलियाँ बिछाना!': कठिन परिस्थिति में भी संवेदना बनाए रखना।
Memory hook: कठोर हालात, कोमल मन।
Topics in this chapter
How the board asks जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पद्यांश: कविता और कवयित्री का नाम (1 अंक) | 'प्रस्तुत पंक्तियों से सम्बन्धित कविता तथा कवि का नाम लिखिए।' (2025 में 'उद्यमी नर' पर इसी रूप में) | शुद्ध वर्तनी: कविता 'जाग तुझको दूर जाना है', कवयित्री महादेवी वर्मा। |
| पद्यांश: प्रतीक और अर्थ (2 + 2 अंक) | 'मोम के बंधन' से क्या तात्पर्य है?; कवयित्री किन बाधाओं की बात कर रही हैं? | पहले शब्दार्थ, फिर प्रतीकार्थ; हर भाग के लिए कम-से-कम दो वाक्य। |
| पद्यांश: मत सहित 5 अंक का प्रश्न | पंक्ति के आधार पर अपना मत, जैसे 'क्या हार भी विजय बन सकती है? दो तर्क दीजिए।' | दो स्पष्ट तर्क, हर एक उदाहरण सहित; कविता की पंक्ति से जोड़ें। |
| दीर्घ प्रश्न (10 अंक) | 'कविता में कवयित्री स्वयं के मन तथा मानव मन को क्या संदेश देना चाहती है? कविता की पंक्तियाँ कहीं-न-कहीं हम सब में एक नया उत्साह भरती हैं…' (2024) | संदेश, बाधाओं के प्रतीक, मोह-बंधन, उत्साह जगाने वाली पंक्तियाँ उद्धृत करें; केवल स्वाधीनता-संग्राम तक सीमित न रहें। |
Tricks to remember जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
चार छंद, चार संदेश: जा-मो-अ-आ
जागो (बाधाओं में भी), मोह छोड़ो, अमरता पहचानो, आग जलाए रखो।
Use it when: दीर्घ उत्तर की रूपरेखा।
दो तरह की बाधाएँ
डराने वाली: हिमगिरि, प्रलय, तिमिर, तूफ़ान। लुभाने वाली: मोम, तितली, मधुप, ओस-गीले फूल।
Use it when: प्रतीक वाले प्रश्न।
उत्साह की तीन पंक्तियाँ
आग हो उर में; हार भी जय की पताका; राख… अमर दीपक की निशानी।
Use it when: 2024 जैसे प्रश्न का दूसरा भाग।
जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पद्यांश (i): कविता और कवयित्री · 1 mark · Very short answerBoard level
'बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले? / पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?' प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता से ली गई हैं? उसकी रचनाकार कौन हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता का नाम शुद्ध वर्तनी में।
- कवयित्री का पूरा नाम।
Answer: कविता: 'जाग तुझको दूर जाना है'; कवयित्री: महादेवी वर्मा।
Example 2: पद्यांश (ii): मोम के बंधन · 2 marks · Short answerHarder board level
'मोम के बंधन सजीले' से कवयित्री का क्या तात्पर्य है? ये बंधन 'मोम' के क्यों कहे गए हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- तात्पर्य: सांसारिक मोह, सुख-सुविधा, प्रेम के आकर्षण।
- मोम क्यों: देखने में सुंदर, पर कमज़ोर; थोड़ी-सी आँच से पिघल जाते हैं, यानी दृढ़ संकल्प के आगे टिक नहीं सकते।
Answer: 'मोम के बंधन सजीले' का अर्थ है सांसारिक मोह-माया और सुख-सुविधाओं के आकर्षक बंधन, जो मनुष्य को लक्ष्य की यात्रा से रोकते हैं। इन्हें मोम का इसलिए कहा गया है कि ये सजीले और सुंदर तो हैं, पर भीतर से कमज़ोर हैं; दृढ़ संकल्प की थोड़ी-सी आँच से ये पिघल जाते हैं।
Example 3: पद्यांश (iii): दोनों प्रकार की बाधाएँ · 2 marks · Short answerHOTS / competency
कविता के पहले दो छंदों में कवयित्री ने किन दो प्रकार की बाधाओं का उल्लेख किया है? दोनों में कौन-सी अधिक कठिन है और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- पहला छंद: भयानक बाहरी बाधाएँ (भूकंप, प्रलय, अंधकार, तूफ़ान)।
- दूसरा छंद: आकर्षक भीतरी बाधाएँ (मोह, सुख, सौंदर्य)।
- अधिक कठिन: आकर्षक बाधाएँ, क्योंकि वे बाधा जैसी दिखती ही नहीं।
Answer: पहले छंद में भयानक बाहरी बाधाएँ हैं: हिमालय का काँपना, प्रलय, घोर अंधकार और तूफ़ान। दूसरे छंद में आकर्षक बाधाएँ हैं: मोम के सजीले बंधन, तितलियों के रंगीले पंख, भौंरे की गुनगुन और ओस-भीगे फूल। आकर्षक बाधाएँ अधिक कठिन हैं, क्योंकि भय से मनुष्य सावधान हो जाता है, पर सुख और मोह उसे बिना पता चले रोक लेते हैं।
Example 4: पद्यांश (iv): क्या हार भी जीत बन सकती है? · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका' पंक्ति से आप कहाँ तक सहमत हैं? दो तर्कों और उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- पंक्ति का अर्थ: लक्ष्य के लिए संघर्ष करते हुए मिली हार भी सम्मान दिलाती है।
- तर्क 1: संघर्ष का मूल्य परिणाम से बड़ा है; उदाहरण।
- तर्क 2: हार से सीख मिलती है जो अगली जीत की नींव बनती है; उदाहरण।
- निष्कर्ष: सहमति, कविता की अगली पंक्ति (पतंगे की राख) से जोड़ें।
Answer: मैं इस पंक्ति से पूर्णतः सहमत हूँ। कवयित्री कहती हैं कि जो व्यक्ति लक्ष्य के लिए पूरी शक्ति से संघर्ष करता है, उसकी हार भी गौरवपूर्ण विजय-पताका बन जाती है।
पहला तर्क: संघर्ष का मूल्य परिणाम से बड़ा होता है। स्वाधीनता आंदोलन में अनेक आंदोलन तत्काल सफल नहीं हुए, पर उन्होंने लोगों में साहस जगाया और अंततः स्वतंत्रता की नींव रखी। जो लड़े, वे हारकर भी अमर हुए।
दूसरा तर्क: हार अनुभव देती है। कोई खिलाड़ी फ़ाइनल में हारकर अपनी कमियाँ पहचानता है और अगली बार अधिक तैयारी से जीतता है। उसकी हार ही उसकी अगली जीत की सीढ़ी बनती है।
इसीलिए कवयित्री आगे कहती हैं: 'राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी!' पतंगा जलकर भी दीपक की ज्योति का प्रमाण छोड़ जाता है। संघर्ष न करना ही असली हार है।
Example 5: दीर्घ प्रश्न: मन को संदेश और नया उत्साह (2024) · 10 marks · Long answerHarder board level
'जाग तुझको दूर जाना है' कविता में कवयित्री स्वयं के मन तथा मानव मन को क्या संदेश देना चाहती है? कविता की पंक्तियाँ कहीं-न-कहीं हम सब में एक नया उत्साह भरती हैं। कविता के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- भूमिका: महादेवी वर्मा का जागरण-गीत; अपने मन और हर मनुष्य को संबोधन।
- संदेश 1: कठिनाइयों के सामने हार न मानना (आँधी, भूकंप, प्रलय)।
- संदेश 2: मोह के बंधन छोड़कर लक्ष्य की ओर बढ़ना; नाश-पथ पर चिह्न छोड़ना।
- उत्साह भरने वाली पंक्तियाँ: 'आग हो उर में तभी…', 'हार भी तेरी बनेगी…'।
- निष्कर्ष: केवल स्वाधीनता-संग्राम नहीं, हर संघर्षशील मन के लिए प्रेरणा (परीक्षकों की टिप्पणी)।
Answer: महादेवी वर्मा का 'जाग तुझको दूर जाना है' एक जागरण-गीत है, जिसमें कवयित्री अपने मन को और उसके माध्यम से हर मनुष्य को संबोधित करती हैं।
कठिनाइयों से न डरने का संदेश। कवयित्री कहती हैं कि चाहे 'अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कंप हो ले', आकाश प्रलय के आँसू बहाए या तूफ़ान गरजे, पथिक को रुकना नहीं है। उसे 'नाश-पथ पर चिह्न अपने छोड़ आना' है, यानी नश्वर संसार में भी अपने कर्मों की छाप छोड़नी है।
मोह से मुक्ति का संदेश। सुख-सुविधा के आकर्षण, 'मोम के बंधन सजीले', तितलियों के रंगीले पंख और भौंरे की गुनगुन भी मार्ग रोकते हैं। कवयित्री कहती हैं: 'तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना!'
नया उत्साह। चौथा छंद पाठक में ऊर्जा भर देता है: 'आग हो उर में तभी दृग में सजेगा आज पानी', अर्थात हृदय में संकल्प की आग चाहिए। 'हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका' पढ़कर असफलता का डर मिट जाता है। अंगारों की शय्या पर कोमल कलियाँ बिछाने की बात हमें सिखाती है कि कठिनाइयों में भी संवेदना न खोएँ।
निष्कर्ष। यह गीत स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचा गया था, पर इसका संदेश आज के हर विद्यार्थी, खिलाड़ी या कर्मयोगी के लिए है जो किसी बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इसीलिए ये पंक्तियाँ हम सब में नया उत्साह भरती हैं।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
दीर्घ प्रश्न (10 अंक): 2024 के प्रश्न 9 की अंक-योजना के अपेक्षित बिंदु (अंक-विभाजन सांकेतिक है; अंक-योजना में अलग-अलग अंक नहीं दिए गए)। (10 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| कवयित्री और गीत का परिचय; मन और मानव-मन को संबोधन | 2 |
| कठिनाइयों (आँधी, भूकंप, प्रलय) के आगे न झुकने का संदेश | 2 |
| मोह के बंधन छोड़कर लक्ष्य की ओर बढ़ना; नाश-पथ पर चिह्न छोड़ना | 3 |
| उत्साह भरने वाली पंक्तियाँ उद्धृत कर व्याख्या ('आग हो उर में…', हार भी विजय) | 3 |
Where students lose marks in जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कविता को केवल स्वाधीनता-संग्राम तक सीमित करना
2024 के परीक्षकों ने लिखा कि कुछ परीक्षार्थियों ने इसे 'स्वाधीनता' के संदर्भ में संघर्ष से जोड़ दिया, जो सही नहीं था; प्रश्न मन को प्रेरित करने के बारे में था।
Wrong working
यह कविता स्वतंत्रता सेनानियों को जेल जाने के लिए प्रेरित करती है।
Right working
कवयित्री अपने मन और हर मनुष्य को बाधाओं से न डरने, मोह छोड़ने और लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश देती हैं; प्रेरणा स्वाधीनता आंदोलन से मिली, पर संदेश सार्वभौमिक है।
Do this: पहले प्रश्न का केंद्र (मन को संदेश, उत्साह) पहचानें, फिर पृष्ठभूमि एक वाक्य में दें।
Usually costs: 4-5 अंक तक।
Mistake: उत्साह भरने का अंश छोड़ देना
परीक्षकों के अनुसार परीक्षार्थियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पंक्तियाँ उत्साह कैसे भरती हैं।
Do this: प्रश्न के दोनों भागों को अलग अनुच्छेदों में लिखें; दूसरे भाग में कम-से-कम दो पंक्तियाँ उद्धृत करें।
Usually costs: 3 अंक तक।
Mistake: प्रतीकों का केवल शब्दार्थ लिखना
'तितलियों के पर' को केवल 'तितली के पंख' लिख देने से प्रतीकार्थ (मोह, आकर्षण) नहीं आता।
Do this: हर प्रतीक के लिए: शब्दार्थ, फिर 'अर्थात' लिखकर प्रतीकार्थ।
Usually costs: हर उप-प्रश्न में 1 अंक।
Mistake: पंक्तियाँ गलत या अशुद्ध उद्धृत करना
तत्सम शब्दों (उनींदी, अलसित, कारा, उपधान) में मात्राओं की भूलें आम हैं; परीक्षक वर्तनी पर अंक काटते हैं।
Do this: चार-पाँच मुख्य पंक्तियाँ शुद्ध रूप में याद करें और लिखकर अभ्यास करें।
Usually costs: भाषा के अंक।
Practice questions on जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerHarder board level
'अमरता-सुत चाहता क्यों मृत्यु को उर में बसाना?' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
Hint
अमरता-सुत = मनुष्य की अमर चेतना; मृत्यु = निष्क्रियता।
Answer
मनुष्य अमरता का पुत्र है, उसके भीतर अनंत शक्ति है। फिर भी वह आलस्य, निराशा और मोह के रूप में मृत्यु को हृदय में बसा लेता है। कवयित्री पूछती हैं कि अमर शक्ति वाला मनुष्य निष्क्रिय होकर अपनी शक्ति क्यों नष्ट करे।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
'है तुझे अंगार-शय्या पर मृदुल कलियाँ बिछाना!' का काव्य-सौंदर्य लिखिए।
Hint
भाव + विरोधाभास + भाषा।
Answer
भाव: कठिनाइयों (अंगार-शय्या) के बीच भी कोमलता और सृजन (मृदुल कलियाँ) बनाए रखना है। शिल्प: अंगार और कलियों के विरोध से विरोधाभास की छटा; लाक्षणिक, तत्सम-प्रधान भाषा; टेक से पहले की यह पंक्ति गीत का निष्कर्ष बन जाती है।
Q3 · 1 mark · MCQBoard level
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रतीक कविता में 'आकर्षक बाधा' का नहीं है?
(क) तितलियों के पर रंगीले
(ख) मधुप की मधुर गुनगुन
(ग) विद्युत-शिखाओं में निठुर तूफ़ान
(घ) फूल के दल ओस-गीलेHint
पहले और दूसरे छंद की बाधाओं में अंतर।
Answer
(ग) विद्युत-शिखाओं में निठुर तूफ़ान: यह भयानक बाहरी बाधा है, आकर्षक नहीं।
Q4 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी!' पंक्ति में निहित जीवन-दर्शन स्पष्ट कीजिए।
Hint
बलिदान, उद्देश्य, अमरता; उदाहरण दें।
Answer
पतंगा दीपक की लौ पर जलकर राख हो जाता है; उसका जीवन क्षणिक है, पर उसकी राख इस बात का प्रमाण है कि दीपक जल रहा था। कवयित्री कहती हैं कि लक्ष्य के लिए किया गया बलिदान व्यर्थ नहीं जाता। व्यक्ति मिट जाता है, पर उसका उद्देश्य अमर हो जाता है। उदाहरण: स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान, जिनकी स्मृति स्वतंत्र भारत की ज्योति में जीवित है। संदेश: परिणाम की चिंता छोड़कर लक्ष्य के लिए पूरी निष्ठा से जलना ही सार्थक जीवन है।
Q5 · 10 marks · Long answerHOTS / competency
कवयित्री ने स्वाधीनता के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों को इंगित कर मनुष्य के भीतर किन गुणों का विकास करना चाहा है? कविता के आधार पर लिखिए।
Hint
साहस, दृढ़ता, संयम (मोह-त्याग), आशा, संवेदनशीलता: हर गुण के साथ पंक्ति।
Answer
अपेक्षित बिंदु: साहस और निर्भीकता (प्रलय, तूफ़ान के बीच भी चलना); दृढ़ संकल्प ('नाश-पथ पर चिह्न अपने छोड़ आना'); संयम और मोह-त्याग ('मोम के बंधन', 'तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना!'); आत्मविश्वास ('अमरता-सुत'); संघर्ष की आग और आशा ('आग हो उर में…', 'हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका'); कठिनाई में भी कोमलता ('अंगार-शय्या पर मृदुल कलियाँ')। हर गुण को पंक्ति से पुष्ट करें और निष्कर्ष में आज के जीवन से जोड़ें।
Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
एक छात्र ने 2024 के प्रश्न का उत्तर केवल यह लिखकर दिया कि 'यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के लिए लिखी गई है।' उसके अंक क्यों कटे होंगे? सही उत्तर की दिशा बताइए।
Hint
परीक्षकों की टिप्पणी देखें।
Answer
परीक्षकों के अनुसार कुछ परीक्षार्थियों ने कविता को 'स्वाधीनता' के संदर्भ में संघर्ष से जोड़ दिया, जो सही नहीं था, जबकि प्रश्न मन को दिए गए संदेश और उत्साह जगाने के बारे में था। सही उत्तर में बताना चाहिए कि कवयित्री अपने और हर मनुष्य के मन को बाधाओं से न डरने, मोह छोड़ने और लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश देती हैं, और उत्साह भरने वाली पंक्तियाँ उद्धृत करनी चाहिए।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'जाग तुझको दूर जाना है' की रचनाकार कौन हैं?Show answer
महादेवी वर्मा।
2.'कारा' शब्द का अर्थ क्या है?Show answer
बंधन, कैद।
3.'मोम के बंधन सजीले' किसके प्रतीक हैं?Show answer
सांसारिक मोह और सुख-सुविधा के आकर्षक पर कमज़ोर बंधन।
4.कवयित्री के अनुसार संघर्ष में मिली हार क्या बन जाती है?Show answer
'मानिनी जय की पताका', अर्थात गौरवपूर्ण विजय का प्रतीक।
5.NCERT के अनुसार यह गीत किसकी प्रेरणा से रचा गया?Show answer
स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचित जागरण-गीत।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप चारों छंदों का भाव क्रम से लिख सकते हैं?
- क्या आप डराने वाली और लुभाने वाली बाधाओं के दो-दो प्रतीक बता सकते हैं?
- क्या आप 'आग हो उर में…' और 'हार भी तेरी…' पंक्तियाँ शुद्ध लिख सकते हैं?
- क्या आप दो काव्य-सौंदर्य (मानवीकरण, विरोधाभास) उदाहरण सहित बता सकते हैं?
- क्या आप 2024 के प्रश्न में दोनों भागों का उत्तर अलग-अलग दे सकते हैं?
जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा: frequently asked questions
'जाग तुझको दूर जाना है' कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
मनुष्य को आलस्य और मोह छोड़कर, हर बाधा के बीच भी लक्ष्य की ओर बढ़ते रहने का आह्वान; संघर्ष में मिली हार भी विजय है।
क्या यह कविता केवल स्वतंत्रता संग्राम के बारे में है?
नहीं। NCERT के अनुसार यह स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचा गया जागरण-गीत है, पर इसका संदेश हर संघर्षशील मनुष्य के लिए है। 2024 में परीक्षकों ने लिखा कि इसे 'स्वाधीनता' के संदर्भ में संघर्ष से जोड़कर लिखना सही नहीं था।
ISC में इस कविता पर कैसे प्रश्न आते हैं?
पद्यांश-आधारित प्रश्न (1, 2, 2 और 5 अंक) या 10 अंकों का दीर्घ प्रश्न। 2024 में 10 अंकों का प्रश्न आया था।
कविता का शीर्षक 'जाग तुझको दूर जाना' है या 'जाग तुझको दूर जाना है'?
CISCE की पाठ्य-सूची और 2024 का प्रश्न-पत्र 'जाग तुझको दूर जाना है' लिखते हैं; गीत की टेक 'जाग तुझको दूर जाना!' है। परीक्षा में CISCE वाला शीर्षक लिखें।
Based on: CISCE ISC 2027 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi 805: Kavya Manjari); CISCE ISC Analysis of Pupil Performance 2024: Hindi (board paper, marking scheme, examiners' comments); NCERT Antra Bhag 1 (Class XI), chapter 13: Mahadevi Varma, Jaag Tujhko Door Jana