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HindiISC Class 12 · तुलसीदास के पद – तुलसीदास

तुलसीदास (काव्य मंजरी): कवि-परिचय, भक्ति का स्वरूप और लोकमंगल

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

गोस्वामी तुलसीदास भक्तिकाल की सगुण काव्य-धारा की रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं। NCERT के अनुसार उनका जन्म 1532 में बाँदा ज़िले के राजापुर में माना जाता है और निधन 1623 में काशी में हुआ। उनकी भक्ति लोकोन्मुख है: वह आध्यात्मिक मुक्ति के साथ जीवन के यथार्थ संकटों का समाधान भी खोजती है, इसलिए वे लोकमंगल की साधना के कवि कहे जाते हैं।

Understand तुलसीदास का परिचय और उनकी भक्ति का स्वरूप

एक आवश्यक सूचना। काव्य मंजरी में संकलित तुलसी के पदों का पाठ इस पृष्ठ के लेखन के समय उपलब्ध नहीं था। इसलिए यहाँ पदों का पंक्ति-वार भावार्थ नहीं है। पदों का भावार्थ अपनी पाठ्यपुस्तक से पढ़िए; यह पृष्ठ कवि और भक्ति की समझ देता है, जो हर पद के उत्तर में काम आती है।

कवि-परिचय (NCERT के अनुसार)। जन्म 1532, राजापुर (बाँदा, उत्तर प्रदेश) माना जाता है; निधन 1623, काशी। प्रमुख रचनाएँ: रामचरितमानस, विनयपत्रिका, गीतावली, श्रीकृष्ण गीतावली, दोहावली, कवितावली और रामाज्ञा-प्रश्न।

भक्ति का स्वरूप। तुलसी सगुण काव्य-धारा की रामभक्ति शाखा के कवि हैं। उनमें भक्ति से कविता बनने की प्रक्रिया सहज दिखती है। उनकी भक्ति इतनी लोकोन्मुख है कि वे लोकमंगल की साधना के कवि के रूप में प्रतिष्ठित हैं। राम-भक्ति जीवन के संकटों (जैसे 'पेट की आग') का समाधान भी खोजती है और आध्यात्मिक मुक्ति भी।

समन्वय के कवि। वे भक्त और रचनाकार का, शास्त्र और लोक का, द्वंद्वों का समन्वय करते हैं। संस्कृत में समर्थ होकर भी उन्होंने लोकभाषा (अवधी और ब्रजभाषा) को माध्यम बनाया। वे सीताराम और राधाकृष्ण, दोनों कथाओं को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाते हैं।

युग-बोध। विषमताओं से भरा कलिकाल उनका युगीन यथार्थ है, जिसमें वे कृपालु राम और रामराज्य का स्वप्न रचते हैं। कवितावली में बेकारी, गरीबी और 'पेट की आग' का चित्रण इसका प्रमाण है।

पद क्या है। सामान्यतः पद गेय रचना होती है, जिसकी पहली पंक्ति प्रायः टेक का काम करती है और अंतिम पंक्ति में कवि की छाप आती है, जैसे 'तुलसी…'। काव्य मंजरी के पद किस प्रकार के हैं, यह अपनी पुस्तक से पहचानिए।

प्रश्न का ढाँचा। पदों पर आधारित प्रश्न में सभी निर्धारित पदों का भाव लिखना, कवि की भक्ति-भावना पर टिप्पणी करना और प्रश्न के सभी भाग हल करना अपेक्षित है। यही ढाँचा तुलसी के पदों पर अपनाएँ।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • तुलसी सरनाम गुलामु है राम को

    तुलसीदास (कवितावली; NCERT आरोह भाग 2): अभ्यास हेतु तुलसी-काव्य का उदाहरण, काव्य मंजरी के पदों से नहीं।

    राम के प्रति अनन्य सेवा-भाव और भक्त का आत्मविश्वास।

  • आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी

    तुलसीदास (कवितावली; NCERT आरोह भाग 2): अभ्यास हेतु उदाहरण; पेट की आग का यथार्थ।

    भक्ति के साथ युग-यथार्थ: भूख समुद्र की आग से भी बड़ी है।

तुलसीदास का परिचय और उनकी भक्ति का स्वरूप: key facts

कवि-परिचय
जन्म1532 राजापुर (बाँदा)
निधन1623 काशी
शाखारामभक्ति (सगुण)
प्रमुख रचनारामचरितमानस
तिथियाँ NCERT के अनुसार लिखें, 'माना जाता है' के साथ।
रचनाएँ
  • रामचरितमानस
  • विनयपत्रिका
  • गीतावली
  • श्रीकृष्ण गीतावली
  • दोहावली
  • कवितावली
  • रामाज्ञा-प्रश्न
सात रचनाएँ याद रखें।
काव्य की विशेषताएँ
  • लोकमंगल
  • समन्वय
  • लोकभाषा
  • सांगरूपक
  • युग-बोध
हर विशेषता के साथ एक उदाहरण दें।

How to answer तुलसीदास का परिचय और उनकी भक्ति का स्वरूप questions

भक्ति-भावना वाले प्रश्न में यह क्रम अपनाएँ।

  1. 1कवि का परिचय दो-तीन वाक्यों में दें।
  2. 2भक्ति का स्वरूप बताएँ: सगुण, रामभक्ति, सेवक-भाव।
  3. 3पाठ्यपुस्तक के हर पद का भाव पंक्ति सहित लिखें।
  4. 4भाषा और अलंकार पर टिप्पणी करें।
  5. 5लोकमंगल के संदेश से निष्कर्ष दें।

तुलसीदास का परिचय और उनकी भक्ति का स्वरूप in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

भक्ति और जीवन की ज़रूरतों का संतुलन

मान लीजिए एक गाँव का भजन-मंडल केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर हर सप्ताह गरीब परिवारों के लिए अन्न और काम की व्यवस्था में भी हाथ बँटाता है।

इस मंडल की सोच तुलसी की लोकमंगल की भक्ति से कैसे मिलती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पूजा आध्यात्मिक पक्ष है।
  2. अन्न और काम की व्यवस्था जीवन के यथार्थ संकट का समाधान है।
  3. दोनों का साथ लोकमंगल है।

Answer: NCERT के अनुसार तुलसी की भक्ति जीवन के यथार्थ संकटों का समाधान भी खोजती है और आध्यात्मिक मुक्ति भी। मंडल की तरह वे पूजा और लोक-कल्याण को जोड़ते हैं।

Memory hook: भक्ति वही जो लोक का भला करे।

Tricks to remember तुलसीदास का परिचय और उनकी भक्ति का स्वरूप

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ल-स-भा-अ

    लोकमंगल, समन्वय, भाषा (लोकभाषा), अलंकार (सांगरूपक)।

    Use it when: तुलसी की विशेषताएँ।

  • 1532-1623

    जन्म 1532, निधन 1623।

    Use it when: कवि-परिचय के प्रश्न।

तुलसीदास का परिचय और उनकी भक्ति का स्वरूप: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: तुलसी की शाखा · 1 mark · MCQBoard level

तुलसीदास भक्तिकाल की किस शाखा के सर्वोपरि कवि माने जाते हैं?
(क) निर्गुण ज्ञानमार्गी
(ख) निर्गुण प्रेममार्गी
(ग) सगुण कृष्णभक्ति
(घ) सगुण रामभक्ति

Try it first, then show the solutionSolution
  1. NCERT के अनुसार वे सगुण धारा की रामभक्ति शाखा के कवि हैं।

Answer: (घ) सगुण रामभक्ति।

Example 2: तुलसी की भाषा · 1 mark · Very short answerBoard level

तुलसी ने किन लोकभाषाओं को रचना का माध्यम बनाया?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. संस्कृत में समर्थ होकर भी उन्होंने लोकभाषा चुनी।

Answer: अवधी और ब्रजभाषा।

Example 3: लोकमंगल का आशय · 2 marks · Short answerHarder board level

तुलसी को 'लोकमंगल की साधना का कवि' क्यों कहा जाता है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भक्ति लोकोन्मुख है।
  2. जीवन के संकटों का समाधान भी खोजती है।

Answer: तुलसी की भक्ति केवल निजी साधना नहीं, लोकोन्मुख है। वह आध्यात्मिक मुक्ति के साथ पेट की आग जैसे जीवन के यथार्थ संकटों का समाधान भी खोजती है। इसीलिए NCERT उन्हें लोकमंगल की साधना के कवि के रूप में प्रतिष्ठित मानता है।

Example 4: समन्वय के कवि · 5 marks · Long answerHarder board level

तुलसीदास को समन्वय का कवि क्यों कहा जाता है? तीन उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए (लगभग 80 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भक्त और रचनाकार (1.5)।
  2. शास्त्र और लोक (1.5)।
  3. सीताराम और राधाकृष्ण की कथाएँ, अवधी और ब्रज (2)।

Answer: तुलसीदास दार्शनिक और लौकिक स्तर के अनेक द्वंद्वों का चित्रण करते हैं और उनका समन्वय करते हैं। वे भक्त और रचनाकार का, शास्त्र और लोक का समन्वय करते हैं। संस्कृत में समर्थ होते हुए भी उन्होंने लोकभाषा, अवधी और ब्रजभाषा, को माध्यम बनाया, और सीताराम तथा राधाकृष्ण, दोनों कथाओं को अभिव्यक्ति का आधार बनाया। इसी समन्वय के कारण वे विद्वानों और जनसामान्य दोनों में लोकप्रिय हैं।

Example 5: भक्ति और युग-यथार्थ · 5 marks · Long answerHOTS / competency

कुछ पाठक मानते हैं कि भक्त-कवि का काम केवल ईश्वर-स्तुति है। तुलसी के काव्य के आधार पर इस मत की परख कीजिए (लगभग 80 शब्द)।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मत की परख (1)।
  2. कवितावली का प्रमाण: पेट की आग (2)।
  3. लोकमंगल और रामराज्य का स्वप्न (1.5)।
  4. निष्कर्ष (0.5)।

Answer: यह मत तुलसी पर पूरा लागू नहीं होता। उनका काव्य केवल स्तुति नहीं है; कवितावली में बेकारी, गरीबी और 'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी' जैसी पंक्तियाँ युग के यथार्थ को सामने रखती हैं। साथ ही वे दीनबंधु राम से कृपा माँगते हैं और रामराज्य का स्वप्न रचते हैं। NCERT के अनुसार उनकी भक्ति लोकमंगल की साधना है। इसलिए तुलसी के लिए भक्ति ईश्वर-स्तुति और समाज की पीड़ा के समाधान का मेल है।

Where students lose marks in तुलसीदास का परिचय और उनकी भक्ति का स्वरूप

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: पदों का भाव लिखते समय कवि की भक्ति-भावना पर टिप्पणी न करना

    भक्ति-भावना पर टिप्पणी के बिना उत्तर अधूरा रह जाता है।

    Wrong working

    केवल पद का सरल अर्थ लिखना।

    Right working

    अर्थ के बाद कवि की भक्ति पर दो वाक्य जोड़ना।

    Do this: हर पद के अंत में भक्ति का भाव लिखें।

    Usually costs: 2 से 3 अंक

  • Mistake: सभी पदों के स्थान पर कम पद लिखना

    सभी निर्धारित पदों का भाव अपेक्षित होता है।

    Wrong working

    निर्धारित पदों में से कुछ पद छोड़ देना।

    Right working

    पाठ्यपुस्तक के सभी निर्धारित पदों का भाव।

    Do this: पदों की गिनती करके लिखें।

    Usually costs: 2 से 3 अंक

  • Mistake: कवि की तिथियाँ निश्चित रूप से लिखना

    NCERT में जन्म तिथि 'माना जाता है' के साथ दी गई है।

    Wrong working

    तुलसी का जन्म निश्चित रूप से 1532 में हुआ।

    Right working

    तुलसी का जन्म 1532 में माना जाता है।

    Do this: 'माना जाता है' लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: कवितावली की पंक्ति को पद की पंक्ति बताना

    अभ्यास की पंक्तियाँ पद नहीं हैं।

    Wrong working

    इस पद में तुलसी कहते हैं पेट की आग बड़ी है।

    Right working

    कवितावली में तुलसी कहते हैं…

    Do this: स्रोत का नाम लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • उत्तर में पहले कवि का परिचय, फिर पद का भाव लिखें।
  • हर पद के साथ भक्ति-भावना पर टिप्पणी करें।
  • सभी पदों का उल्लेख करें।
  • भाषा (अवधी, ब्रज) और अलंकार का नाम लिखें।
  • तिथियों के साथ 'माना जाता है' लिखें।

Practice questions on तुलसीदास का परिचय और उनकी भक्ति का स्वरूप

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    तुलसीदास की रचना कौन-सी नहीं है?
    (क) विनयपत्रिका
    (ख) गीतावली
    (ग) कवितावली
    (घ) सूरसागर

    Hint

    सूरसागर किस कवि की रचना है, यह पाठ्यपुस्तक से पुष्ट करें।

    Answer

    (घ) सूरसागर। यह तुलसीदास की रचनाओं की सूची में नहीं है।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'तुलसी सरनाम गुलामु है राम को' से तुलसी की किस भावना का पता चलता है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    सेवक-भाव और आत्मविश्वास।

    Answer

    इस पंक्ति से तुलसी का राम के प्रति अनन्य सेवक-भाव प्रकट होता है। वे स्वयं को राम का प्रसिद्ध गुलाम कहते हैं और जाति-पाँति के दुराग्रहों से ऊपर उठकर भक्ति का आत्मविश्वास दिखाते हैं।

  3. Q3 · 5 marks · Long answerHarder board level

    NCERT के अनुसार तुलसी की काव्य-कला की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? उदाहरण सहित लिखिए (लगभग 80 शब्द)।

    Hint

    सांगरूपक, छंद-वैविध्य, भाषा।

    Answer

    NCERT के अनुसार उपमा के क्षेत्र में जो पहचान कालिदास की है, वही सांगरूपक के क्षेत्र में तुलसीदास की है। 'दारिद-दसानन दबाई दुनी' में दरिद्रता पर रावण का आरोप है, यह रूपक अलंकार का उदाहरण है; जब रूपक अनेक अंगों के साथ विस्तार से चलता है, तब वह सांगरूपक कहलाता है। उनके काव्य में भाव, विचार, काव्य-रूप, छंद और भाषा की समृद्धि है; दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया और पद, सभी रूप मिलते हैं। भाषा के रूप में अवधी और ब्रजभाषा का प्रयोग उन्हें जनसामान्य से जोड़ता है।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    'भक्त-कवि को अपने युग का यथार्थ भी देखना चाहिए' इस मत की पुष्टि तुलसी के काव्य से कीजिए (लगभग 80 शब्द)।

    Hint

    कलिकाल, पेट की आग, रामराज्य।

    Answer

    तुलसी इस मत की पुष्टि करते हैं। विषमताओं से भरा कलिकाल उनका युगीन यथार्थ है और कवितावली में बेकारी, गरीबी तथा पेट की आग का चित्रण मिलता है। 'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी' में वे भूख को समुद्र की आग से भी बड़ा बताते हैं। यथार्थ को देखकर वे निराश नहीं होते, कृपालु राम और रामराज्य का स्वप्न रचते हैं। इस प्रकार उनकी भक्ति पलायन नहीं, जीवन से जुड़ी भक्ति है।

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level

    तुलसी ने संस्कृत में समर्थ होकर भी लोकभाषा क्यों चुनी, इसका आपके मत में क्या महत्त्व है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    जन-जन तक पहुँच।

    Answer

    लोकभाषा चुनने से तुलसी का काव्य जन-जन तक पहुँचा। इससे उनकी लोकमंगल की भावना सिद्ध होती है, क्योंकि वे विद्वानों के साथ साधारण जनता से भी सीधे संवाद करना चाहते थे।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.तुलसीदास का जन्म कहाँ माना जाता है?Show answer

    राजापुर (बाँदा, उत्तर प्रदेश) में।

  2. 2.वे किस शाखा के कवि हैं?Show answer

    सगुण धारा की रामभक्ति शाखा के।

  3. 3.उनकी दो रचनाओं के नाम बताइए।Show answer

    रामचरितमानस और विनयपत्रिका।

  4. 4.उन्होंने किन भाषाओं में रचना की?Show answer

    अवधी और ब्रजभाषा।

  5. 5.सांगरूपक में किसकी पहचान तुलसी की है?Show answer

    NCERT के अनुसार उपमा में कालिदास की तरह सांगरूपक में तुलसी की।

  6. 6.तुलसी किस साधना के कवि हैं?Show answer

    लोकमंगल की।

तुलसीदास का परिचय और उनकी भक्ति का स्वरूप: frequently asked questions

तुलसीदास के पद ISC के किस भाग में हैं?

काव्य मंजरी के कक्षा 12 वाले भाग में, 2027 से।

क्या इस पृष्ठ में पदों का भावार्थ है?

नहीं; पदों का पाठ उपलब्ध नहीं था, इसलिए भावार्थ अपनी पुस्तक से पढ़ें।

पद की पहचान क्या है?

सामान्यतः गेयता, टेक और अंतिम पंक्ति में कवि की छाप।

तुलसी के पदों पर आधारित उत्तर में क्या लिखना चाहिए?

सभी निर्धारित पदों का भाव, कवि की भक्ति-भावना पर टिप्पणी, तथा भाषा और अलंकार का उल्लेख।