ISC Class 12 हिंदी उद्यमी नर (रामधारी सिंह 'दिनकर'): भाव, व्याख्या और हल सहित प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'उद्यमी नर' में रामधारी सिंह 'दिनकर' श्रम और भुजबल को मनुष्य-समाज का भाग्य बताते हैं, जिसके सामने पृथ्वी और आकाश भी झुकते हैं। कवि कहते हैं कि जिसने पसीना बहाया, उसे पीछे न छोड़ा जाए; प्रकृति पर विजय का सुख सबसे पहले श्रमिक को मिले।
What उद्यमी नर – रामधारी सिंह 'दिनकर' is about
उद्यमी नर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता है, जो ISC हिंदी (805) की पाठ्यपुस्तक काव्य मंजरी के Class XII भाग में है। खंड ख में चार में से किन्हीं तीन पुस्तकों से चार प्रश्न करने होते हैं; काव्य मंजरी से तीन प्रश्न आते हैं: एक पद्यांश-आधारित (1, 2, 2 और 5 अंकों के चार उप-प्रश्न) और दो 10-10 अंकों के दीर्घ प्रश्न।
2025 के बोर्ड प्रश्न-पत्र में इसी कविता पर पूरा पद्यांश-आधारित प्रश्न (प्रश्न 7) आया था। उद्धृत पंक्तियाँ थीं: 'नर-समाज का भाग्य एक है, वह श्रम है, वह भुजबल है…'। उप-प्रश्न थे: कविता और कवि का नाम; कवि ने 'नर समाज का भाग्य' किसे कहा और क्यों; सबसे पहले सुख पाने का अधिकारी कौन है और क्यों; और 'उसे पीछे मत रह जाने दो' के आधार पर पीछे रह जाने के परिणाम, दो तर्कों सहित।
परीक्षकों ने देखा कि कविता के नाम में मात्राओं की भूलें हुईं, कई छात्रों को कवि का नाम याद नहीं था, (ii) और (iii) के उत्तर लगभग एक जैसे लिखे गए, और 5-अंक के प्रश्न में तर्कों के स्थान पर कविता का सारांश लिख दिया गया।
कविता कॉपीराइट में है, इसलिए यह पृष्ठ केवल वही पंक्तियाँ उद्धृत करता है जो CISCE के 2025 प्रश्न-पत्र में छपी थीं; व्याख्या अंक-योजना के बिंदुओं पर आधारित है।
Weightage: काव्य मंजरी से खंड ख में तीन प्रश्न (हर एक 10 अंक) आते हैं; परीक्षार्थी चार पुस्तकों में से तीन चुनकर कुल चार प्रश्न करते हैं। 2025 में 'उद्यमी नर' पर पूरा पद्यांश-आधारित प्रश्न (1+2+2+5) आया।Source: CISCE ISC 2027 भारतीय भाषाएँ पाठ्यक्रम तथा 2025 का बोर्ड प्रश्न-पत्र (परीक्षकों की रिपोर्ट)
उद्यमी नर – रामधारी सिंह 'दिनकर': explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
केंद्रीय भाव। कविता श्रम की महिमा का गान है। कवि के अनुसार मनुष्य-समाज का एक ही भाग्य है, और वह है श्रम तथा भुजबल। भाग्य कोई ऊपर से मिलने वाली चीज़ नहीं; कर्मठ मनुष्य अपने परिश्रम से अपना भाग्य स्वयं बनाता है।
श्रम के सामने प्रकृति झुकती है। कवि कहते हैं कि श्रम और भुजबल के सम्मुख पृथ्वी झुकी हुई है और आकाश भी विनीत है। अर्थात मनुष्य ने अपने परिश्रम से धरती को उपजाऊ बनाया, उस पर नगर बसाए और प्रकृति की शक्तियों को अपने वश में किया। प्रकृति पर मनुष्य की यह विजय उद्यमी मनुष्य के पसीने का फल है।
श्रमिक का अधिकार। कविता की सबसे महत्त्वपूर्ण माँग है: 'जिसने श्रम-जल दिया, उसे पीछे मत रह जाने दो'। जिसने पसीना बहाया, उसे पीछे न छोड़ा जाए, और प्रकृति पर मिली विजय का सुख सबसे पहले उसी को मिले। कवि उस अन्याय का विरोध करते हैं जिसमें काम कोई और करता है और उसका सुख कोई और भोगता है।
पीछे छूटने का परिणाम। 2025 की अंक-योजना के अनुसार, यदि परिश्रमी व्यक्ति पीछे रह गया तो वह निरुत्साहित होगा, उन सुखों से वंचित होगा जिनका वह अधिकारी है, और समाज में असंतोष बढ़कर समाज अधोपतन की ओर जाएगा।
संदेश। श्रम का सम्मान और श्रमिक को उसका उचित हिस्सा देना ही न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज की नींव है।
Themes and message
श्रम ही भाग्य
कवि भाग्यवाद का खंडन करते हैं: मनुष्य-समाज का भाग्य श्रम और भुजबल है। 2025 की अंक-योजना: कर्मठ मनुष्य अपने श्रम से भाग्य स्वयं बनाते हैं।
From the text: 'नर-समाज का भाग्य एक है, वह श्रम है, वह भुजबल है'
प्रकृति पर मनुष्य की विजय
परिश्रम के सामने पृथ्वी और आकाश भी झुकते हैं; मनुष्य ने श्रम से प्रकृति को अपने अनुकूल बनाया है।
From the text: 'जिसके सम्मुख झुकी हुई पृथिवी, विनीत नभ-तल है'
श्रमिक के साथ न्याय
जिसने पसीना बहाया, सुख का पहला अधिकारी वही है। कवि उस व्यवस्था का विरोध करते हैं जिसमें श्रमिक पीछे रह जाता है और दूसरे लाभ उठाते हैं।
From the text: 'जिसने श्रम-जल दिया, उसे पीछे मत रह जाने दो'
सामाजिक संतुलन
श्रमिक की उपेक्षा से असंतोष और समाज का पतन होता है (2025 की अंक-योजना)। न्यायपूर्ण वितरण ही समाज को स्वस्थ रखता है।
From the text: 2025 प्रश्न 7(iv) की अंक-योजना।
The speaker and the people in the poem
कवि (वक्ता)
श्रम का समर्थक और श्रमिक के अधिकारों का पक्षधर।
- ओजस्वी और प्रेरक स्वर।
- सामाजिक न्याय के प्रति सजग।
- भाग्यवाद के स्थान पर कर्मवाद में विश्वास।
उद्धृत पंक्तियों का स्वर।
उद्यमी नर (श्रमिक)
कविता का नायक: परिश्रमी मनुष्य।
- अपने भुजबल से भाग्य रचने वाला।
- प्रकृति को वश में करने वाला।
- सुख का पहला अधिकारी, पर प्रायः उपेक्षित।
2025 प्रश्न 7 की अंक-योजना।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| मानवीकरण | 'झुकी हुई पृथिवी, विनीत नभ-तल' | पृथ्वी और आकाश को विनम्र मनुष्यों की तरह झुकता दिखाकर श्रम की शक्ति प्रकट की गई है। |
| लाक्षणिक प्रयोग | 'श्रम-जल' (पसीना) | पसीने को 'श्रम-जल' कहकर परिश्रम को पवित्र और मूल्यवान बनाया गया है। |
| ओज गुण | 'वह श्रम है, वह भुजबल है' | पुनरावृत्ति और दृढ़ स्वर पाठक में उत्साह भरते हैं। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
नर-समाज का भाग्य एक है, वह श्रम है, वह भुजबल है
कवि: 2025 के प्रश्न-पत्र में उद्धृत पद्यांश की पहली पंक्ति।
श्रम और भुजबल को मनुष्य-समाज का भाग्य बताया गया है।
जिसके सम्मुख झुकी हुई पृथिवी, विनीत नभ-तल है
कवि: उसी पद्यांश की दूसरी पंक्ति।
श्रम के सामने प्रकृति भी झुकती है।
जिसने श्रम-जल दिया, उसे पीछे मत रह जाने दो
कवि: उसी पद्यांश की तीसरी पंक्ति।
श्रमिक को पीछे न छोड़ने की माँग; 2025 के 5-अंक प्रश्न का आधार।
विजित प्रकृति से सबसे पहले उसको सुख पाने दो
कवि: उसी पद्यांश की चौथी पंक्ति।
प्रकृति पर विजय का पहला सुख श्रमिक का अधिकार है।
उद्यमी नर – रामधारी सिंह 'दिनकर' in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
श्रमिक का अधिकार
मान लीजिए आपके मोहल्ले में नई सड़क बनी है और उद्घाटन समारोह में अधिकारियों और नेताओं को सम्मानित किया जाता है, पर सड़क बनाने वाले मज़दूरों को कोई नहीं पूछता।
'उद्यमी नर' का संदेश इस स्थिति पर कैसे लागू होता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- सड़क मज़दूरों के पसीने से बनी।
- कवि के अनुसार सुख और सम्मान का पहला अधिकारी वही है।
- उपेक्षा से निरुत्साह और असंतोष।
Answer: उद्घाटन में मज़दूरों को आमंत्रित कर सम्मानित करना कविता की माँग 'उसे पीछे मत रह जाने दो' का व्यावहारिक रूप होगा।
Memory hook: जिसने बनाया, पहले उसे सराहो।
भाग्य बनाम परिश्रम
कल्पना कीजिए कि आपका मित्र परीक्षा से पहले कहता है, 'जो भाग्य में होगा, वही मिलेगा', और पढ़ाई छोड़ देता है।
कविता के आधार पर आप उसे क्या कहेंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- कवि के अनुसार भाग्य श्रम है।
- परिश्रम से ही प्रकृति भी झुकती है।
- परिणाम बदलने की शक्ति प्रयास में है।
Answer: 'नर-समाज का भाग्य… श्रम है': परिश्रम ही भाग्य बनाता है, इसलिए पढ़ाई ही सफलता का मार्ग है।
Memory hook: भाग्य हाथ की रेखा नहीं, हाथ का श्रम है।
किसान और उचित मूल्य
मान लीजिए किसान अपनी सब्ज़ी दो रुपये किलो बेचता है और वही सब्ज़ी शहर में चालीस रुपये किलो बिकती है।
कविता के अनुसार यह अन्याय क्यों है?
Try it first, then show the solutionSolution
- श्रम किसान का, लाभ बिचौलियों का।
- कवि कहते हैं श्रम करने वाले को सुख पहले मिले।
- समाधान: सीधी बिक्री, उचित मूल्य।
Answer: यह ठीक वही स्थिति है जिसका कवि विरोध करते हैं: श्रम कोई करे, सुख कोई और भोगे।
Memory hook: पसीना जिसका, पहला हिस्सा उसका।
Topics in this chapter
How the board asks उद्यमी नर – रामधारी सिंह 'दिनकर'
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पद्यांश: कविता और कवि का नाम (1 अंक) | 'प्रस्तुत पंक्तियों से सम्बन्धित कविता तथा कवि का नाम लिखिए।' (2025) | शुद्ध वर्तनी में: कविता 'उद्यमी नर', कवि श्री रामधारी सिंह 'दिनकर'। परीक्षकों के अनुसार मात्राओं की भूलें और कवि का नाम भूलना आम था। |
| पद्यांश: अर्थ और कारण (2 + 2 अंक) | 'कवि ने नर समाज का भाग्य किसे कहा है और क्यों?'; 'सबसे पहले सुख पाने का अधिकारी कौन है और क्यों?' (2025) | दोनों उप-प्रश्नों के उत्तर अलग रखें; 'क्यों' का उत्तर अवश्य दें। |
| पद्यांश: तर्क सहित 5 अंक का प्रश्न | 'उसे पीछे मत रह जाने दो पंक्ति के आधार पर बताइए कि यदि वह व्यक्ति पीछे रह गया तो क्या परिणाम होगा? किन्हीं दो तर्कों द्वारा अपनी बात स्पष्ट कीजिए।' (2025) | दो स्पष्ट तर्क, हर एक उदाहरण सहित; सारांश नहीं। |
| दीर्घ प्रश्न (10 अंक) | अपेक्षित: कविता का केंद्रीय भाव; श्रम और सामाजिक न्याय; आज के संदर्भ में प्रासंगिकता। | भाव, पंक्तियों के उद्धरण, उदाहरण और अपना मत। |
Tricks to remember उद्यमी नर – रामधारी सिंह 'दिनकर'
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
चार पंक्तियाँ, चार भाव
भाग्य = श्रम; प्रकृति झुकी; श्रमिक पीछे न रहे; सुख पहले उसे।
Use it when: पद्यांश का भाव क्रम से।
पीछे छूटे तो: नि-वं-अ
निरुत्साह, वंचना, असंतोष (और पतन)।
Use it when: 2025 के 5-अंक प्रश्न के तर्क।
नाम पक्का
उद्यमी (उद् + यमी) नर; रामधारी सिंह 'दिनकर'।
Use it when: 1-अंक का प्रश्न।
उद्यमी नर – रामधारी सिंह 'दिनकर': board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पद्यांश (i): कविता और कवि (2025) · 1 mark · Very short answerBoard level
'नर-समाज का भाग्य एक है, वह श्रम है, वह भुजबल है, / जिसके सम्मुख झुकी हुई पृथिवी, विनीत नभ-तल है। / जिसने श्रम-जल दिया, उसे पीछे मत रह जाने दो, / विजित प्रकृति से सबसे पहले उसको सुख पाने दो।' प्रस्तुत पंक्तियों से सम्बन्धित कविता तथा कवि का नाम लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता का नाम शुद्ध मात्राओं के साथ।
- कवि का पूरा नाम।
Answer: कविता: 'उद्यमी नर'; कवि: श्री रामधारी सिंह 'दिनकर'।
Example 2: पद्यांश (ii): नर समाज का भाग्य (2025) · 2 marks · Short answerHarder board level
कवि ने 'नर समाज का भाग्य' किसे कहा है और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- किसे: श्रम, पसीना और भुजबल।
- क्यों: श्रम के आगे पृथ्वी-आकाश झुकते हैं; कर्मठ मनुष्य अपना भाग्य स्वयं बनाता है।
Answer: कवि ने मनुष्य के श्रम, पसीने और भुजबल को नर-समाज का भाग्य कहा है, क्योंकि इसी शक्ति के सामने पृथ्वी और आकाश भी झुक जाते हैं; परिश्रमी मनुष्य भाग्य के भरोसे नहीं बैठता, बल्कि अपने श्रम से अपना भाग्य स्वयं गढ़ता है।
Example 3: पद्यांश (iii): सुख का पहला अधिकारी (2025) · 2 marks · Short answerHarder board level
कवि की दृष्टि में सबसे पहले सुख पाने का अधिकारी कौन है और क्यों? समझाकर लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कौन: जिसने श्रम-जल (पसीना) दिया, अर्थात उद्यमी नर।
- क्यों: प्रकृति पर विजय उसी के श्रम से मिली; प्रायः काम कोई करता है, सुख कोई और भोगता है, कवि इसके विरुद्ध हैं।
- (ii) से अलग उत्तर रखें (परीक्षकों की टिप्पणी)।
Answer: कवि के अनुसार सुख का पहला अधिकारी वह उद्यमी मनुष्य है जिसने कार्य पूरा करने में अपना पसीना बहाया। प्रकृति पर जो विजय मिली है, वह उसी के श्रम का फल है। समाज में प्रायः ऐसा होता है कि परिश्रम कोई करता है और उसका सुख कोई और उठाता है; कवि इस अन्याय का विरोध करते हुए कहते हैं कि श्रमिक को पीछे न छोड़ा जाए।
Example 4: पद्यांश (iv): पीछे रह जाने के परिणाम (2025) · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'उसे पीछे मत रह जाने दो' पंक्ति के आधार पर बताइए कि यदि वह व्यक्ति पीछे रह गया तो क्या परिणाम होगा? किन्हीं दो तर्कों द्वारा अपनी बात स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- तर्क 1: परिश्रमी व्यक्ति निरुत्साहित होगा; उदाहरण।
- तर्क 2: वह अपने अधिकार के सुखों से वंचित होगा, समाज में असंतोष बढ़ेगा; उदाहरण।
- निष्कर्ष: समाज अधोपतन की ओर जाएगा।
- सारांश न लिखें (परीक्षकों की टिप्पणी)।
Answer: यदि परिश्रम करने वाला व्यक्ति पीछे रह गया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
पहला, वह निरुत्साहित हो जाएगा। जब किसान अनाज उगाकर भी भूखा रहे या मज़दूर इमारत बनाकर भी बेघर रहे, तो उसका काम करने का उत्साह समाप्त हो जाता है। श्रम का सम्मान न मिलने पर परिश्रम की भावना ही मर जाती है।
दूसरा, वह उन सुखों से वंचित रहेगा जिनका वह वास्तविक अधिकारी है, और इससे समाज में असंतोष फैलेगा। जब मेहनत करने वाले देखते हैं कि उनके श्रम का लाभ दूसरे उठा रहे हैं, तो समाज में विषमता, आक्रोश और संघर्ष बढ़ते हैं।
इन दोनों कारणों से समाज की प्रगति रुक जाएगी और वह अधोपतन की ओर जाएगा। इसीलिए कवि चाहते हैं कि प्रकृति पर विजय का पहला सुख श्रमिक को मिले।
Example 5: दीर्घ प्रश्न: आज के संदर्भ में प्रासंगिकता · 10 marks · Long answerHOTS / competency
'उद्यमी नर' कविता का संदेश आज के समाज के लिए कितना प्रासंगिक है? कविता की पंक्तियों और आज के उदाहरणों के आधार पर उत्तर दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- केंद्रीय भाव: श्रम ही भाग्य; श्रमिक सुख का पहला अधिकारी।
- पंक्तियाँ उद्धृत करें।
- आज के उदाहरण: किसान, निर्माण-मज़दूर, घरेलू कामगार, डिलीवरी कर्मचारी।
- विषमता और असंतोष का परिणाम।
- अपना मत: कविता अत्यंत प्रासंगिक है; समाधान (उचित मज़दूरी, सम्मान, सुरक्षा)।
Answer: उत्तर की रूपरेखा: भूमिका में कविता का भाव ('नर-समाज का भाग्य एक है, वह श्रम है, वह भुजबल है'); फिर आज का यथार्थ: जो किसान देश का पेट भरता है, वह स्वयं कर्ज़ में डूबा है; जो मज़दूर ऊँची इमारतें बनाता है, वह झुग्गी में रहता है; इसलिए 'जिसने श्रम-जल दिया, उसे पीछे मत रह जाने दो' की माँग आज भी उतनी ही सच्ची है। परिणाम (निरुत्साह, असंतोष, सामाजिक विषमता) और समाधान (उचित मूल्य और मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा, श्रम का सम्मान) लिखकर निष्कर्ष दें कि कविता का संदेश आज और भी प्रासंगिक है। लगभग 250-300 शब्द, अनुच्छेदों में।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
पद्यांश-आधारित प्रश्न (10 अंक), 2025 के प्रश्न 7 के अनुसार। (10 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| (i) कविता और कवि का नाम, शुद्ध वर्तनी | 1 |
| (ii) नर समाज का भाग्य किसे और क्यों | 2 |
| (iii) सुख का पहला अधिकारी कौन और क्यों | 2 |
| (iv) पीछे रहने के परिणाम, दो तर्क उदाहरण सहित | 5 |
Where students lose marks in उद्यमी नर – रामधारी सिंह 'दिनकर'
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कविता या कवि के नाम में भूल
2025 के परीक्षकों के अनुसार कविता के नाम में मात्राओं की भूलें हुईं और कई छात्रों को कवि का नाम याद नहीं था।
Wrong working
उधमी नर; कवि: दिनकर जी
Right working
उद्यमी नर; कवि: श्री रामधारी सिंह 'दिनकर'
Do this: हर पाठ का शीर्षक और लेखक का पूरा नाम शुद्ध वर्तनी में याद करें।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: (ii) और (iii) का एक जैसा उत्तर
दोनों प्रश्न श्रम से जुड़े हैं; परीक्षकों ने लिखा कि छात्रों ने लगभग एक-सा उत्तर लिखा और भेद नहीं किया।
Do this: (ii) में 'भाग्य', (iii) में 'सुख का अधिकारी' पर केंद्रित रहें।
Usually costs: 2 अंक तक।
Mistake: 'क्यों' वाले भाग का बहुत छोटा उत्तर
परीक्षकों के अनुसार (ii) के दूसरे भाग ('क्यों') के उत्तर बहुत संक्षिप्त थे या दिए ही नहीं गए।
Do this: हर 'क्यों' के लिए कम-से-कम दो वाक्य।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: 5-अंक के प्रश्न में सारांश
परीक्षकों ने लिखा कि छात्रों ने दो तर्कों के स्थान पर कविता का सारांश लिख दिया।
Do this: 'तर्क 1', 'तर्क 2' अलग अनुच्छेदों में, हर एक उदाहरण सहित।
Usually costs: 5 में से अधिकांश अंक।
Practice questions on उद्यमी नर – रामधारी सिंह 'दिनकर'
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerHarder board level
'विनीत नभ-तल' का क्या अर्थ है? कवि ने आकाश को विनीत क्यों कहा है?
Hint
मानवीकरण।
Answer
'विनीत नभ-तल' का अर्थ है विनम्र होकर झुका हुआ आकाश। कवि कहते हैं कि मनुष्य के श्रम और भुजबल के सामने आकाश भी विनम्र हो गया है, अर्थात मनुष्य ने परिश्रम से प्रकृति की ऊँची से ऊँची शक्तियों पर भी विजय पाई है।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
'श्रम-जल' शब्द का अर्थ और उसका सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
Hint
पसीना; शब्द का प्रभाव।
Answer
'श्रम-जल' का अर्थ है परिश्रम से निकला पसीना। पसीने को 'जल' कहकर कवि ने उसे जीवनदायी और पवित्र बना दिया है, जैसे जल से धरती सींची जाती है, वैसे ही श्रमिक का पसीना समाज को समृद्ध बनाता है।
Q3 · 5 marks · Long answerHarder board level
कवि भाग्यवाद का खंडन कैसे करते हैं? कविता के आधार पर लिखिए।
Hint
भाग्य = श्रम और भुजबल।
Answer
कवि कहते हैं कि नर-समाज का एक ही भाग्य है, श्रम और भुजबल। भाग्य कोई ऊपर से लिखी चीज़ नहीं; कर्मठ मनुष्य अपने परिश्रम से उसे स्वयं बनाता है। इसका प्रमाण है कि श्रम के सामने पृथ्वी और आकाश भी झुकते हैं और प्रकृति पर विजय मिली है। इसलिए भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय परिश्रम करना चाहिए।
Q4 · 10 marks · Long answerHOTS / competency
'उद्यमी नर' कविता के आधार पर श्रम और सामाजिक न्याय के संबंध पर अपने विचार लिखिए।
Hint
श्रमिक का अधिकार, पीछे छूटने के परिणाम, आज के उदाहरण।
Answer
अपेक्षित: श्रम को सम्मान और उचित हिस्सा देना ही सामाजिक न्याय है; कवि की माँग कि श्रमिक को सबसे पहले सुख मिले; श्रमिक के पीछे छूटने पर निरुत्साह, असंतोष और पतन; आज के उदाहरण; अपना मत तर्क सहित; पंक्तियों का उद्धरण।
Q5 · 1 mark · MCQBoard level
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कविता के भाव के अनुकूल है?
(क) भाग्य से ही सब कुछ मिलता है।
(ख) श्रमिक को उसके श्रम का फल सबसे पहले मिलना चाहिए।
(ग) प्रकृति मनुष्य से अधिक शक्तिशाली है।
(घ) सुख केवल धनवानों के लिए है।Hint
अंतिम पंक्ति देखें।
Answer
(ख) श्रमिक को उसके श्रम का फल सबसे पहले मिलना चाहिए।
Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
एक छात्र ने 2025 के प्रश्न (ii) और (iii) के उत्तर लगभग एक जैसे लिखे। दोनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Hint
(ii) भाग्य किसे कहा; (iii) सुख का अधिकारी कौन।
Answer
(ii) पूछता है कि कवि ने नर-समाज का भाग्य किसे कहा (श्रम और भुजबल) और क्यों (उसके आगे प्रकृति झुकती है, मनुष्य अपना भाग्य बनाता है)। (iii) पूछता है कि सुख का पहला अधिकारी कौन है (पसीना बहाने वाला श्रमिक) और क्यों (विजय उसी के श्रम से मिली; श्रम कोई करे, सुख कोई और भोगे, यह अन्याय है)। परीक्षकों ने दोनों के एक जैसे उत्तरों पर अंक काटे।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'उद्यमी नर' के कवि कौन हैं?Show answer
रामधारी सिंह 'दिनकर'।
2.कवि ने नर-समाज का भाग्य किसे कहा है?Show answer
श्रम और भुजबल को।
3.सबसे पहले सुख पाने का अधिकारी कौन है?Show answer
जिसने श्रम-जल (पसीना) दिया, अर्थात परिश्रमी मनुष्य।
4.श्रमिक के पीछे रह जाने के क्या परिणाम होंगे?Show answer
वह निरुत्साहित होगा, अधिकार के सुखों से वंचित होगा, समाज में असंतोष बढ़ेगा और समाज का पतन होगा।
5.'श्रम-जल' का अर्थ क्या है?Show answer
पसीना।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप 2025 में छपी चारों पंक्तियाँ और उनका भाव लिख सकते हैं?
- क्या आप (ii) और (iii) के उत्तरों में अंतर रख सकते हैं?
- क्या आप पीछे छूटने के परिणाम पर दो तर्क उदाहरण सहित लिख सकते हैं?
- क्या आप कविता के दो काव्य-सौंदर्य बता सकते हैं?
- क्या आप कविता की आज के संदर्भ में प्रासंगिकता समझा सकते हैं?
उद्यमी नर – रामधारी सिंह 'दिनकर': frequently asked questions
'उद्यमी नर' कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
श्रम और भुजबल ही मनुष्य-समाज का भाग्य है, और श्रम करने वाले को उसके फल का पहला सुख मिलना चाहिए।
ISC में इस कविता पर कैसा प्रश्न आता है?
पद्यांश-आधारित प्रश्न (1, 2, 2 और 5 अंकों के उप-प्रश्न) या 10 अंकों का दीर्घ प्रश्न। 2025 में पद्यांश-आधारित प्रश्न आया था।
इस पृष्ठ पर पूरी कविता क्यों नहीं दी गई?
कविता कॉपीराइट में है। यहाँ केवल CISCE के 2025 प्रश्न-पत्र में छपी पंक्तियाँ उद्धृत हैं; पूरी कविता काव्य मंजरी में पढ़ें।
Based on: CISCE ISC 2027 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi 805: Kavya Manjari); CISCE ISC Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi (board paper, marking scheme, examiners' comments)