तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा, छंद और पद-शैली (ISC कक्षा 12)
Updated 17 October 2026 · Draft, not yet fact-checked
तुलसीदास की काव्य-कला की पहचान सांगरूपक है: NCERT के अनुसार जो स्थान उपमा में कालिदास का है, वही सांगरूपक में तुलसी का। उनके काव्य में भाव, विचार, छंद और भाषा की समृद्धि है; दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया और पद, सभी रूप मिलते हैं, और माध्यम लोकभाषा, अवधी और ब्रज, है।
In answers, write the feeling side first, then the craft side, and give a line of verse as an example for each point; Sangrupak is Tulsi's signature.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा और छंद
सूचना। यह पृष्ठ काव्य मंजरी के पदों का पाठ नहीं देता। उदाहरण तुलसी-काव्य (कवितावली) की उन पंक्तियों से हैं जो NCERT आरोह भाग 2 में छपी हैं और केवल शैली समझाने के लिए हैं। अपने पदों के उदाहरण पुस्तक से जोड़िए।
1. सांगरूपक। रूपक में उपमेय पर उपमान का आरोप होता है। जब एक पूरे अंग-समूह का आरोप हो, यानी कई अंगों सहित रूपक चले, तो वह सांगरूपक कहलाता है। उदाहरण: 'दारिद-दसानन दबाई दुनी, दीनबंधु!' में दरिद्रता (दारिद) पर दसानन (रावण) का आरोप है। इससे दरिद्रता की भयावहता और राम की कृपा की आवश्यकता दोनों प्रकट होती हैं।
2. अनुप्रास। समान वर्णों की आवृत्ति से लय और गेयता आती है। उदाहरण: 'किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट'।
3. लोकभाषा। अवधी और ब्रजभाषा का प्रयोग उन्हें जनसामान्य से जोड़ता है।
4. छंद-वैविध्य। NCERT के अनुसार दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया और पद, सभी रूप उनके यहाँ मिलते हैं।
5. पद-शैली। गेयता, टेक और अंतिम पंक्ति में कवि की छाप ('तुलसी…') पद की पहचान मानी जाती है; यह सामान्य वर्णन है, अपने पदों में स्वयं जाँचिए।
6. भाव और विचार की समृद्धि। उनके काव्य में भक्ति, विनय, लोकमंगल और युग-यथार्थ एक साथ मिलते हैं। 'हृदय-सिंधु मति सीप समाना।' जैसी पंक्ति से NCERT परिचय काव्य-रचना पर उनकी दृष्टि समझाता है: हृदय समुद्र और बुद्धि सीप, विचार की वर्षा से कविता रूपी मोती बनते हैं।
उत्तर की रीति। काव्य-सौंदर्य के प्रश्न में पहले भाव-पक्ष (भक्ति, विनय, यथार्थ), फिर कला-पक्ष (भाषा, अलंकार, छंद, शैली) अलग अनुच्छेदों में लिखें और हर तत्त्व के साथ पंक्ति का उदाहरण दें।
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
दारिद-दसानन दबाई दुनी, दीनबंधु!
तुलसीदास (कवितावली; NCERT आरोह भाग 2): अभ्यास हेतु उदाहरण; बेकारी और गरीबी का चित्र।
सांगरूपक: दरिद्रता रूपी रावण; दीनबंधु राम से प्रार्थना।
हृदय-सिंधु मति सीप समाना।
तुलसीदास (NCERT परिचय में उद्धृत): काव्य-रचना पर तुलसी की दृष्टि।
हृदय समुद्र और बुद्धि सीप के समान।
तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा और छंद: key facts
- सांगरूपक पहचान
- उपमेय पर उपमान का आरोप
- साथ में उसके अंगों का भी आरोप
- उदाहरण: दारिद-दसानन
- पहले अलंकार का नाम, फिर उपमेय-उपमान।
- कला-पक्ष
भाषा अवधी, ब्रज अलंकार सांगरूपक, अनुप्रास छंद दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया, पद - तीनों भागों को अलग लिखें।
- भाव-पक्ष
- भक्ति
- विनय
- लोकमंगल
- युग-यथार्थ
- समन्वय
- हर भाव के साथ एक पंक्ति दें।
How to answer तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा और छंद questions
काव्य-सौंदर्य के प्रश्न के लिए यह क्रम अपनाएँ।
- 1भाव-पक्ष और कला-पक्ष के दो शीर्षक बनाएँ।
- 2भाव-पक्ष में भक्ति और लोकमंगल लिखें।
- 3कला-पक्ष में भाषा, अलंकार और छंद लिखें।
- 4हर तत्त्व के साथ पंक्ति का उदाहरण दें।
- 5अंत में समग्र प्रभाव बताएँ।
तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा और छंद in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
समस्या को किसी जानी-पहचानी छवि में बाँधना
मान लीजिए एक नेता भाषण में बेरोज़गारी को 'दैत्य' कहकर उसके कई अंगों, जैसे 'भूख का मुख' और 'निराशा की बाँहें', का वर्णन करता है।
यह प्रयोग किस अलंकार जैसा है और इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- बेरोज़गारी पर दैत्य का आरोप है।
- दैत्य के अंगों का भी आरोप है।
- इससे समस्या की भयावहता साकार होती है।
Answer: यह सांगरूपक जैसा है, क्योंकि उपमेय पर उपमान और उसके अंगों का आरोप है। 'दारिद-दसानन' में तुलसी भी यही करते हैं और दरिद्रता की भयावहता साकार कर देते हैं।
Memory hook: रूपक के साथ अंग, तो सांगरूपक।
Tricks to remember तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा और छंद
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
सा-अ-भा-छ
सांगरूपक, अनुप्रास, भाषा, छंद।
Use it when: कला-पक्ष के चार बिंदु।
कालिदास-उपमा, तुलसी-सांगरूपक
दो कवि, दो पहचान।
Use it when: NCERT के कथन के लिए।
तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा और छंद: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: दारिद-दसानन में अलंकार · 1 mark · MCQBoard level
'दारिद-दसानन दबाई दुनी' में प्रमुख अलंकार है:
(क) उपमा
(ख) सांगरूपक
(ग) यमक
(घ) श्लेष
Try it first, then show the solutionSolution
- दारिद (उपमेय) पर दसानन (उपमान) का आरोप है।
Answer: (ख) सांगरूपक (रूपक)।
Example 2: छंद-रूप · 1 mark · Very short answerBoard level
तुलसी के काव्य में मिलने वाले कोई चार काव्य-रूप या छंद लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- NCERT: दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया और पद।
Answer: दोहा, चौपाई, कवित्त और सवैया (पद भी)।
Example 3: अनुप्रास का प्रभाव · 2 marks · Short answerHarder board level
'किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट' में अनुप्रास का क्या प्रभाव है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ध्वनियों की आवृत्ति।
- लय और गेयता।
Answer: इस पंक्ति में समान ध्वनियों की आवृत्ति से लय बनती है और पंक्ति गेय हो जाती है। अलग-अलग वर्गों की गिनती इस तरह होने से सबकी बेकारी का चित्र एक प्रवाह में सामने आता है।
Example 4: सांगरूपक की व्याख्या · 5 marks · Long answerHarder board level
सांगरूपक का अर्थ बताइए और 'दारिद-दसानन दबाई दुनी' के आधार पर इसका प्रभाव स्पष्ट कीजिए (लगभग 80 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- अर्थ (1.5)।
- उपमेय-उपमान (1.5)।
- प्रभाव: भयावहता, कृपा की आवश्यकता (2)।
Answer: सांगरूपक वह अलंकार है जिसमें उपमेय पर उपमान का आरोप उसके अंगों सहित किया जाता है। इस पंक्ति में दरिद्रता (दारिद) पर रावण (दसानन) का आरोप है, यानी दरिद्रता दुनिया को दबाने वाले रावण जैसी है। इससे गरीबी की भयावहता साकार होती है और दीनबंधु राम से कृपा की आवश्यकता भी प्रकट होती है। NCERT के अनुसार सांगरूपक तुलसी की पहचान है, इसलिए यह उदाहरण उनकी काव्य-कला का प्रतिनिधि है।
Example 5: लोकभाषा का चुनाव · 5 marks · Long answerHOTS / competency
यदि तुलसी संस्कृत में रचना करते तो उनके काव्य के प्रभाव में क्या अंतर पड़ता? तर्क सहित लिखिए (लगभग 80 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठक-वर्ग का अंतर (1.5)।
- लोकमंगल का उद्देश्य (2)।
- निष्कर्ष (1.5)।
Answer: संस्कृत में रचना होती तो तुलसी का काव्य मुख्यतः विद्वानों तक सीमित रहता। NCERT के अनुसार वे संस्कृत में समर्थ थे, फिर भी उन्होंने अवधी और ब्रजभाषा को चुना, जिससे विद्वान और जनसामान्य दोनों उनसे जुड़ सके। उनका लक्ष्य लोकमंगल था, जो जन-जन तक पहुँचे बिना संभव नहीं। इसलिए लोकभाषा का चुनाव उनके काव्य के प्रभाव और लोकप्रियता का मुख्य कारण है।
Where students lose marks in तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा और छंद
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: सांगरूपक को केवल रूपक लिखना
सांगरूपक में अंगों सहित आरोप होता है।
Wrong working
दारिद-दसानन में उपमा है।
Right working
दारिद-दसानन में दरिद्रता पर रावण का आरोप: सांगरूपक।
Do this: अलंकार के साथ उपमेय-उपमान बताएँ।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: भाव-पक्ष और कला-पक्ष को मिला देना
दो शीर्षकों से उत्तर स्पष्ट रहता है।
Wrong working
एक लंबा अनुच्छेद।
Right working
दो अलग अनुच्छेद।
Do this: पहले भाव, फिर कला।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: उदाहरण-पंक्ति के बिना अलंकार का नाम लिखना
पंक्ति से पुष्टि होती है।
Wrong working
काव्य में सांगरूपक है।
Right working
'दारिद-दसानन दबाई दुनी' में सांगरूपक है।
Do this: हर तत्त्व के साथ पंक्ति दें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: वर्तनी की चूक (दसानन, कवित्त, सवैया)
मात्रा-भूल अंक कटवाती है।
Wrong working
दशानन, कवित, सवैय्या।
Right working
दसानन (उद्धरण में), कवित्त, सवैया।
Do this: नामों की सूची बनाएँ।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- काव्य-सौंदर्य में भाव-पक्ष और कला-पक्ष अलग लिखें।
- अलंकार का नाम, उपमेय-उपमान और पंक्ति तीनों दें।
- NCERT का कथन: कालिदास-उपमा, तुलसी-सांगरूपक।
- पदों के उदाहरण अपनी पुस्तक से जोड़ें।
- वर्तनी शुद्ध रखें।
Practice questions on तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा और छंद
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
NCERT के अनुसार उपमा के क्षेत्र में जो पहचान कालिदास की है, वही सांगरूपक में किसकी है?
(क) सूरदास
(ख) कबीर
(ग) तुलसीदास
(घ) बिहारीHint
कला-पक्ष का पहला बिंदु।
Answer
(ग) तुलसीदास।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
'हृदय-सिंधु मति सीप समाना' का भाव स्पष्ट कीजिए (लगभग 40 शब्द)।
Hint
हृदय और बुद्धि के रूपक।
Answer
इसमें हृदय को समुद्र और बुद्धि को सीप कहा गया है। भाव यह है कि विचार की वर्षा से हृदय-समुद्र में बुद्धि-सीप के भीतर कविता रूपी मोती बनते हैं। यह तुलसी की काव्य-रचना पर दृष्टि बताता है।
Q3 · 5 marks · Long answerHarder board level
तुलसी के काव्य के कला-पक्ष की चर्चा भाषा, अलंकार और छंद के आधार पर कीजिए (लगभग 80 शब्द)।
Hint
तीन उपशीर्षक बनाइए।
Answer
भाषा: तुलसी ने संस्कृत में समर्थ होकर भी अवधी और ब्रजभाषा चुनी, जिससे उनका काव्य जनसुलभ हुआ। अलंकार: उनकी पहचान सांगरूपक है, जैसे 'दारिद-दसानन दबाई दुनी'; अनुप्रास से लय आती है, जैसे 'किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट'। छंद: NCERT के अनुसार दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया और पद, सभी रूप उनके यहाँ मिलते हैं। इन तीनों के मेल से उनके काव्य में भावों की गहराई और अभिव्यक्ति की सहजता आती है।
Q4 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'तुलसी का काव्य कला की दृष्टि से जितना समृद्ध है, भाव की दृष्टि से भी उतना ही।' इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं? (लगभग 80 शब्द)
Hint
भाव-पक्ष और कला-पक्ष दोनों के प्रमाण।
Answer
मैं पूरी तरह सहमत हूँ। कला की दृष्टि से उनके पास सांगरूपक, अनुप्रास, अवधी-ब्रज भाषा और दोहा-चौपाई-कवित्त-सवैया-पद जैसे अनेक रूप हैं। भाव की दृष्टि से उनमें राम के प्रति अनन्य भक्ति, लोकमंगल, समन्वय और युग-यथार्थ का चित्रण है, जैसे 'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी'। NCERT भी भाव, विचार, काव्य-रूप, छंद और भाषा की अद्वितीय समृद्धि की बात करता है। इसलिए दोनों पक्षों की समृद्धि उनके काव्य को विशिष्ट बनाती है।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
पद-शैली की कोई दो विशेषताएँ बताइए और अपनी पाठ्यपुस्तक के एक पद से उनकी जाँच करने की विधि लिखिए (लगभग 40 शब्द)।
Hint
गेयता, टेक, छाप।
Answer
पद में प्रायः गेयता और टेक होती है, तथा अंत में कवि की छाप, जैसे 'तुलसी', आती है। इन्हें जाँचने के लिए पद की पहली पंक्ति की पुनरावृत्ति देखिए और अंतिम पंक्ति में कवि का नाम खोजिए।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.तुलसी की पहचान किस अलंकार में है?Show answer
सांगरूपक में।
2.दारिद-दसानन में दसानन कौन है?Show answer
रावण।
3.अनुप्रास से क्या लाभ है?Show answer
लय और गेयता।
4.तुलसी की दो भाषाएँ कौन-सी हैं?Show answer
अवधी और ब्रज।
5.कवितावली में किस यथार्थ का चित्रण है?Show answer
बेकारी, गरीबी और पेट की आग।
6.पद की अंतिम पंक्ति में क्या आता है?Show answer
कवि की छाप।
तुलसीदास की काव्य-कला: सांगरूपक, भाषा और छंद: frequently asked questions
सांगरूपक क्या है?
अंगों सहित रूपक; उपमेय पर उपमान और उसके अंगों का आरोप।
तुलसी की भाषा कौन-सी है?
अवधी और ब्रजभाषा।
क्या ये उदाहरण काव्य मंजरी के पदों के हैं?
नहीं, वे कवितावली के हैं और शैली समझाने के लिए हैं।
कौन-से छंद तुलसी के यहाँ मिलते हैं?
दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया और पद।