ISC Class 12 हिंदी क्या निराश हुआ जाए (हजारी प्रसाद द्विवेदी): सार, विचार और हल सहित प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'क्या निराश हुआ जाए' में हजारी प्रसाद द्विवेदी मानते हैं कि अख़बारों में ठगी और भ्रष्टाचार की ख़बरें भरी हैं, फिर भी ईमानदारी और मनुष्यता समाप्त नहीं हुई। टिकट बाबू और बस कंडक्टर की अपनी घटनाओं से वे दिखाते हैं कि अच्छाई दबी है, नष्ट नहीं; इसलिए निराश होने की ज़रूरत नहीं है।
What क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी is about
क्या निराश हुआ जाए आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का निबंध है, जो ISC हिंदी (805) की पाठ्यपुस्तक गद्य संकलन के Class XII भाग में है। यही निबंध NCERT की वसंत भाग 3 में भी है; इस पृष्ठ के सभी उद्धरण उसी पाठ से शब्दशः लिए गए हैं।
खंड ख में गद्य संकलन से तीन प्रश्न आते हैं: एक गद्यांश-आधारित (1, 2, 2 और 5 अंक) और दो 10-10 अंकों के दीर्घ प्रश्न। यह निबंध 2026 तक भी गद्य संकलन में था, पर 2024 और 2025 के प्रश्न-पत्रों में इस पर कोई प्रश्न नहीं आया; 2027 से यह Class XII के भाग में है। इसलिए यहाँ के प्रश्न उसी ढाँचे पर बनाए गए हैं जो गद्य संकलन के अन्य पाठों पर पूछा गया।
गद्य संकलन के अन्य पाठों पर परीक्षकों की टिप्पणियाँ यहाँ भी लागू होती हैं: रचनाकार का नाम भूलना, प्रश्न का कोई भाग (जैसे 'कौन') छोड़ देना, और कथन की समीक्षा के बजाय कहानी का सार लिख देना।
Weightage: गद्य संकलन से खंड ख में तीन प्रश्न (हर एक 10 अंक) आते हैं; परीक्षार्थी चार पुस्तकों में से तीन चुनकर कुल चार प्रश्न करते हैं। यह निबंध 2027 से Class XII भाग में है; 2024-25 में इस पर प्रश्न नहीं आया।Source: CISCE ISC 2027 भारतीय भाषाएँ पाठ्यक्रम तथा 2024-25 के बोर्ड प्रश्न-पत्र
क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
निराशा का कारण। लेखक कहते हैं कि उनका मन कभी-कभी बैठ जाता है। समाचार-पत्र ठगी, डकैती, चोरी, तस्करी और भ्रष्टाचार से भरे हैं; आरोप-प्रत्यारोप का ऐसा वातावरण है कि लगता है देश में कोई ईमानदार आदमी नहीं रहा। हर व्यक्ति संदेह से देखा जाता है; जो जितने ऊँचे पद पर है, उसके उतने ही दोष दिखाए जाते हैं। एक बड़े आदमी ने उनसे कहा था कि आज सुखी वही है जो कुछ नहीं करता, क्योंकि करने वाले के गुण भुला दिए जाते हैं और दोष बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जाते हैं।
क्या यही भारतवर्ष है? लेखक पूछते हैं कि क्या यही तिलक और गांधी के सपनों का भारत है। उनका मन कहता है कि ऐसा नहीं हो सकता; महान मनीषियों के सपनों का भारत है और रहेगा। वे मानते हैं कि आज ईमानदार श्रमजीवी पिस रहे हैं, झूठ-फ़रेब करने वाले फल-फूल रहे हैं और ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है।
कारणों का विश्लेषण। भारत ने भौतिक वस्तुओं के संग्रह को कभी अधिक महत्त्व नहीं दिया; उसने लोभ-मोह, काम-क्रोध को संयम से बाँधने का प्रयत्न किया। पर भूख, बीमारी और गुमराही की उपेक्षा नहीं की जा सकती। दरिद्रों की दशा सुधारने के लिए क़ानून बने, पर उन्हें लागू करने वालों का मन सदा पवित्र नहीं होता। पहले भारत क़ानून को धर्म के रूप में देखता था; आज दोनों में अंतर हो गया है। धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, क़ानून को दिया जा सकता है।
मूल्य दबे हैं, नष्ट नहीं। लेखक के अनुसार सेवा, ईमानदारी, सचाई और आध्यात्मिकता के मूल्य दब गए हैं, पर नष्ट नहीं हुए। भ्रष्टाचार के प्रति अख़बारों का आक्रोश ही बताता है कि हम इसे गलत मानते हैं। दोषों का पर्दाफ़ाश बुरा नहीं, पर बुराई में रस लेना बुरा है और अच्छाई को उजागर न करना उससे भी बुरा।
दो घटनाएँ। रेलवे स्टेशन पर लेखक ने गलती से दस के बजाय सौ का नोट दे दिया; टिकट बाबू डिब्बे में उन्हें ढूँढ़कर नब्बे रुपये लौटा गया। एक रात बस बिगड़ गई, कंडक्टर साइकिल लेकर चला गया और यात्रियों ने डकैती के डर से ड्राइवर को घेर लिया; लेखक ने उसे पिटने से बचाया। कंडक्टर दूसरी बस के साथ लौटा और लेखक के बच्चों के लिए पानी और दूध भी लाया।
निष्कर्ष। लेखक ठगे भी गए, धोखा भी खाया, पर विश्वासघात बहुत कम मिला। केवल धोखे का हिसाब रखने से जीवन कष्टकर हो जाएगा। वे रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रार्थना याद करते हैं कि धोखा खाने पर भी ईश्वर पर संदेह न हो। मनुष्य की बनाई विधियाँ गलत हों तो उन्हें बदलना होगा; आशा की ज्योति बुझी नहीं है। अंतिम वाक्य है: 'मेरे मन! निराश होने की जरूरत नहीं है।'
Themes and message
निराशा के बीच आशा
निबंध का पूरा तर्क निराशा से आशा की ओर बढ़ता है: समस्याएँ स्वीकार कर भी लेखक मानते हैं कि भारत के मूल्य जीवित हैं।
From the text: 'लेकिन अब भी आशा की ज्योति बुझी नहीं है।'
ईमानदारी और मनुष्यता
टिकट बाबू और बस कंडक्टर जैसे साधारण लोग बिना किसी लाभ के ईमानदारी और दया दिखाते हैं; यही असली भारत है।
From the text: 'कैसे कहूँ कि मनुष्यता एकदम समाप्त हो गई!'
क़ानून और धर्म
लेखक के अनुसार भारत क़ानून को धर्म की तरह मानता था; आज क़ानून को धोखा देना आसान है, इसलिए नैतिकता (धर्म) क़ानून से बड़ी है।
From the text: 'धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, कानून को दिया जा सकता है।'
दोष-दर्शन बनाम गुण-दर्शन
बुराई उजागर करना ठीक है, पर उसमें रस लेना और अच्छाई को अनदेखा करना समाज को निराश बनाता है।
From the text: 'बुराई में रस लेना बुरी बात है'
Characters
लेखक (हजारी प्रसाद द्विवेदी)
निबंध के वक्ता; अपने मन से संवाद करते हुए पाठक को आशा का संदेश देते हैं।
- चिंतनशील और ईमानदार: समाज की बुराइयाँ स्वीकार करते हैं।
- आशावादी: अच्छाई के प्रमाण खोजते हैं।
- करुणामय और साहसी: डरे होने पर भी ड्राइवर को पिटने से बचाते हैं।
बस-यात्रा प्रसंग और अंतिम वाक्य।
टिकट बाबू
रेलवे स्टेशन का कर्मचारी जो नब्बे रुपये लौटाता है।
- ईमानदार: डिब्बे में हर चेहरा पहचानते हुए लेखक को ढूँढ़ता है।
- विनम्र: अपनी गलती भी मानता है।
'उसके चेहरे पर विचित्र संतोष की गरिमा थी।'
बस कंडक्टर
जिस पर यात्रियों ने धोखे का संदेह किया।
- कर्तव्यनिष्ठ: अड्डे से दूसरी बस लाता है।
- दयालु: बच्चों के लिए पानी और दूध लाता है।
'बच्चों का रोना मुझसे देखा नहीं गया।'
बस ड्राइवर और यात्री
संदेह और भय से भरे यात्री; निर्दोष ड्राइवर।
- यात्री: डर में बिना प्रमाण दोषी मान लेते हैं, बाद में माफ़ी माँगते हैं।
- ड्राइवर: कातर, निर्दोष।
बस-यात्रा प्रसंग।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| विधा: विचारात्मक-ललित निबंध | शीर्षक ही प्रश्न: 'क्या निराश हुआ जाए' | प्रश्न से आरंभ कर तर्क, विश्लेषण और घटनाओं से उत्तर तक पहुँचना। |
| आत्म-संबोधन और आत्मकथात्मक शैली | 'मेरे मन! निराश होने की जरूरत नहीं है।' | लेखक अपने मन से बात करते हैं, जिससे पाठक भी स्वयं को उस संवाद में पाता है। |
| दृष्टांत (घटनाओं के उदाहरण) | टिकट बाबू और बस कंडक्टर की घटनाएँ | अमूर्त विचार (ईमानदारी जीवित है) को ठोस अनुभव से प्रमाणित करना। |
| प्रश्न-शैली | 'क्या यही भारतवर्ष है जिसका सपना तिलक और गांधी ने देखा था?' | पाठक को सोचने पर मजबूर करना। |
| भाषा | 'धर्मभीरु', 'लोक-चित्त', 'मानव महा-समुद्र'; साथ में 'पर्दाफाश', 'माहौल' जैसे शब्द | तत्सम शब्दों के साथ प्रचलित उर्दू-हिंदी शब्दों का सहज मेल; सरल, प्रवाहपूर्ण गद्य। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मेरा मन कभी-कभी बैठ जाता है।
लेखक: निबंध की पहली पंक्ति।
निराशा की स्वीकारोक्ति से आरंभ।
ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है
लेखक: आज के माहौल का विश्लेषण।
मूल्यों के संकट का सबसे तीखा कथन।
धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, कानून को दिया जा सकता है।
लेखक: क़ानून और धर्म में अंतर।
नैतिकता क़ानून से बड़ी है।
वे दब अवश्य गए हैं लेकिन नष्ट नहीं हुए हैं।
लेखक: सेवा, ईमानदारी, सचाई और आध्यात्मिकता के मूल्यों के बारे में।
निबंध का केंद्रीय विश्वास।
बुराई में रस लेना बुरी बात है
लेखक: दोषों के पर्दाफ़ाश पर विचार।
मीडिया और समाज के लिए संतुलित दृष्टि।
मेरे मन! निराश होने की जरूरत नहीं है।
लेखक: निबंध का अंतिम वाक्य।
शीर्षक के प्रश्न का उत्तर।
क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
ईमानदारी जीवित है
मान लीजिए आपका बटुआ बाज़ार में गिर गया और शाम को एक सब्ज़ीवाला उसमें रखे पहचान-पत्र से पता खोजकर उसे लौटा गया।
निबंध के किस प्रसंग से यह घटना मेल खाती है और इससे क्या सिद्ध होता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- टिकट बाबू ने भी बिना माँगे नब्बे रुपये लौटाए।
- लेखक के अनुसार ऐसी एक घटना ठगी की अनेक घटनाओं से अधिक शक्तिशाली है।
Answer: यह टिकट बाबू वाले प्रसंग जैसी है और सिद्ध करती है कि ईमानदारी दबी है, नष्ट नहीं हुई।
Memory hook: एक सच्चाई, सौ ठगियों पर भारी।
बिना प्रमाण संदेह
कल्पना कीजिए कि कक्षा में किसी का पेन खो गया और सब एक नए छात्र पर शक करने लगे; बाद में पेन बैग की जेब में मिला।
बस-यात्रा प्रसंग से इस स्थिति की तुलना कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- यात्रियों ने भी डर में ड्राइवर और कंडक्टर पर शक किया।
- सच सामने आने पर माफ़ी माँगनी पड़ी।
- लेखक ने संयम से निर्दोष को बचाया।
Answer: बिना प्रमाण किसी को दोषी मानना अन्याय है; लेखक की तरह संयम रखना और निर्दोष का साथ देना चाहिए।
Memory hook: शक से पहले सच।
अच्छाई को उजागर करना
मान लीजिए आपके स्कूल के समाचार-पत्र में हर अंक केवल अनुशासन-भंग की घटनाएँ छापता है।
लेखक की दृष्टि से आप संपादक को क्या सुझाव देंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- बुराई में रस लेना बुरा; अच्छाई उजागर न करना और बुरा।
- अच्छे कामों की ख़बरें दूसरों को प्रेरित करती हैं।
Answer: हर अंक में छात्रों के अच्छे कामों (सहायता, ईमानदारी, सेवा) का एक स्तंभ जोड़ें; इससे लोक-चित्त में अच्छाई के प्रति भावना जगेगी।
Memory hook: बुराई बताओ, अच्छाई भी गाओ।
Topics in this chapter
How the board asks क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| गद्यांश: पाठ और रचनाकार (1 अंक) | 'उक्त पंक्तियों से सम्बन्धित पाठ तथा रचनाकार का नाम लिखिए।' (गद्य संकलन के गद्यांश पर 2025 का रूप) | पाठ 'क्या निराश हुआ जाए', रचनाकार हजारी प्रसाद द्विवेदी; पूरा नाम शुद्ध लिखें। |
| गद्यांश: प्रसंग और आशय (2 + 2 अंक) | किस घटना का उल्लेख है? लेखक ने ऐसा क्यों कहा? | पहले घटना/प्रसंग, फिर कारण; प्रश्न के दोनों भाग। |
| गद्यांश: मत और सुझाव (5 अंक) | लेखक की बात से आप कहाँ तक सहमत हैं? दो तर्क/सुझाव दीजिए। | स्पष्ट मत, दो तर्क, हर एक उदाहरण सहित; निबंध की पंक्ति से जोड़ें। |
| दीर्घ प्रश्न (10 अंक) | निबंध का मूल संदेश; शीर्षक की सार्थकता; दोनों घटनाओं के आधार पर समीक्षा। | निराशा के कारण, विश्लेषण, घटनाएँ, निष्कर्ष; उद्धरण सहित; सार नहीं, विश्लेषण। |
Tricks to remember क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
निबंध की चाल: नि-का-त-घ-आ
निराशा (अख़बार), कारण (क़ानून बनाम धर्म), तर्क (मूल्य दबे हैं), घटनाएँ (टिकट बाबू, कंडक्टर), आशा (अंतिम वाक्य)।
Use it when: दीर्घ उत्तर की रूपरेखा।
संख्याएँ
सौ का नोट, नब्बे लौटे; आठ किलोमीटर पहले बस रुकी; रात दस बजे; बारह से पहले अड्डे।
Use it when: गद्यांश के तथ्यात्मक प्रश्न।
दो कर्मचारी, दो गुण
टिकट बाबू = ईमानदारी; कंडक्टर = कर्तव्य और दया।
Use it when: पात्रों पर प्रश्न।
क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: गद्यांश (i): पाठ और रचनाकार · 1 mark · Very short answerBoard level
'कैसे कहूँ कि मनुष्यता एकदम समाप्त हो गई! कैसे कहूँ कि लोगों में दया-माया रह ही नहीं गई!' उक्त पंक्तियों से संबंधित पाठ तथा रचनाकार का नाम लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ का नाम।
- रचनाकार का पूरा नाम।
Answer: पाठ: 'क्या निराश हुआ जाए'; रचनाकार: हजारी प्रसाद द्विवेदी।
Example 2: गद्यांश (ii): कौन-सी घटना? · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखक ने ये वाक्य किस घटना के बाद कहे? घटना संक्षेप में लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- बस का निर्जन स्थान पर बिगड़ना; कंडक्टर का साइकिल लेकर जाना; यात्रियों का संदेह।
- ड्राइवर को घेरना; कंडक्टर का नई बस, पानी और दूध लेकर लौटना।
Answer: यह बस-यात्रा की घटना के बाद कहा गया। रात को गंतव्य से लगभग आठ किलोमीटर पहले निर्जन स्थान पर बस बिगड़ गई और कंडक्टर साइकिल लेकर चला गया। यात्रियों को डकैती का संदेह हुआ और उन्होंने ड्राइवर को घेर लिया। डेढ़-दो घंटे बाद कंडक्टर अड्डे से खाली बस लेकर लौटा और लेखक के बच्चों के लिए लोटे में पानी और थोड़ा दूध भी लाया।
Example 3: गद्यांश (iii): यात्रियों का व्यवहार · 2 marks · Short answerHOTS / competency
यात्रियों ने ड्राइवर के साथ जैसा व्यवहार किया, वह उचित था या नहीं? लेखक की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- यात्रियों ने भय में बिना प्रमाण ड्राइवर को दोषी माना: अनुचित।
- लेखक ने डरे होने पर भी उसे मार-पीट से बचाया।
Answer: यात्रियों का व्यवहार अनुचित था; डकैती के डर से उन्होंने बिना किसी प्रमाण के ड्राइवर को धोखेबाज़ मान लिया और उसे मारने की योजना बना ली। लेखक स्वयं भयभीत थे, फिर भी उन्होंने यात्रियों को समझाया कि मारना ठीक नहीं और ड्राइवर को किसी तरह मार-पीट से बचाया। अंत में यात्रियों ने ड्राइवर से माफ़ी माँगी।
Example 4: गद्यांश (iv): अच्छाई को उजागर करना · 5 marks · Long answerHOTS / competency
लेखक के अनुसार 'बुराई में रस लेना बुरी बात है, अच्छाई में उतना ही रस लेकर उजागर न करना और भी बुरी बात है।' आज के समाचार-माध्यमों के संदर्भ में इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं? दो तर्क दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कथन का अर्थ: दोष उजागर करना ठीक, पर उसमें रस लेना और अच्छाई छिपाना गलत।
- तर्क 1: केवल नकारात्मक ख़बरें निराशा और अविश्वास फैलाती हैं।
- तर्क 2: अच्छी घटनाएँ लोक-चित्त में अच्छाई के प्रति भावना जगाती हैं (लेखक का कथन)।
- निष्कर्ष: संतुलन।
Answer: मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। लेखक दोषों के पर्दाफ़ाश को बुरा नहीं मानते, पर उनका कहना है कि बुराई में रस लेना और दोषोद्घाटन को ही एकमात्र कर्तव्य मान लेना गलत है।
पहला तर्क: जब समाचार-माध्यम केवल अपराध और घोटालों को सनसनीखेज़ ढंग से दिखाते हैं, तो लोगों को लगता है कि देश में कोई ईमानदार बचा ही नहीं। निबंध की शुरुआत में लेखक का मन भी इसी कारण 'बैठ जाता है'। इससे समाज में अविश्वास और निराशा बढ़ती है।
दूसरा तर्क: लेखक के अनुसार सैकड़ों घटनाएँ ऐसी घटती हैं जिन्हें उजागर करने से लोक-चित्त में अच्छाई के प्रति अच्छी भावना जगती है। उदाहरण के लिए, किसी ऑटो-चालक द्वारा यात्री का खोया बैग लौटाने की ख़बर दूसरों को भी ईमानदार बनने की प्रेरणा देती है।
अतः समाचार-माध्यमों को बुराई उजागर करने के साथ अच्छाई को भी उतने ही उत्साह से सामने लाना चाहिए; तभी 'आशा की ज्योति' जलती रहेगी।
Example 5: दीर्घ प्रश्न: शीर्षक की सार्थकता · 10 marks · Long answerHarder board level
'क्या निराश हुआ जाए' निबंध के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। लेखक ने अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए किन तर्कों और घटनाओं का सहारा लिया है?
Try it first, then show the solutionSolution
- शीर्षक प्रश्न के रूप में; उत्तर निबंध के अंतिम वाक्य में।
- निराशा के कारण: ठगी, भ्रष्टाचार, संदेह का वातावरण।
- तर्क: भारत की परंपरा, क़ानून बनाम धर्म, मूल्य दबे हैं नष्ट नहीं, आक्रोश स्वयं प्रमाण।
- घटनाएँ: टिकट बाबू, बस कंडक्टर।
- निष्कर्ष: रवींद्रनाथ की प्रार्थना; आशा की ज्योति।
Answer: निबंध का शीर्षक एक प्रश्न है: क्या निराश हुआ जाए? पूरा निबंध इसी प्रश्न का उत्तर खोजता है और अंत में लेखक कहते हैं: 'मेरे मन! निराश होने की जरूरत नहीं है।' इस तरह शीर्षक जिज्ञासा जगाता है और निबंध के केंद्रीय विचार को समेटता है।
निराशा के कारण। समाचार-पत्र ठगी, डकैती, तस्करी और भ्रष्टाचार से भरे हैं; हर व्यक्ति संदेह की दृष्टि से देखा जाता है; ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है। लेखक इन्हें छिपाते नहीं।
तर्क। भारत ने भौतिक संग्रह से अधिक आंतरिक गुणों को महत्त्व दिया। क़ानून लागू करने वाले स्वार्थी हो गए हैं और क़ानून को धोखा देना आसान है, पर 'धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता'। सेवा, ईमानदारी और सचाई के मूल्य 'दब अवश्य गए हैं लेकिन नष्ट नहीं हुए'; भ्रष्टाचार के प्रति आक्रोश ही इसका प्रमाण है।
घटनाएँ। टिकट बाबू डिब्बे में ढूँढ़कर नब्बे रुपये लौटाता है; उसके चेहरे पर 'विचित्र संतोष की गरिमा' थी। बस-यात्रा में जिस कंडक्टर पर धोखे का संदेह था, वह नई बस के साथ बच्चों के लिए पानी और दूध भी लाता है।
निष्कर्ष। लेखक ठगे भी गए, पर विश्वासघात कम मिला। वे रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रार्थना याद करते हैं कि धोखा खाने पर भी ईश्वर पर संदेह न हो। गलत विधियों को बदलना होगा, पर 'आशा की ज्योति बुझी नहीं है'। इसलिए शीर्षक सार्थक है: प्रश्न निराशा का है, उत्तर आशा का।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
गद्यांश-आधारित प्रश्न (10 अंक), गद्य संकलन के 2025 वाले प्रश्न 4 के ढाँचे पर। (10 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| (i) पाठ और रचनाकार का नाम, शुद्ध वर्तनी | 1 |
| (ii) प्रसंग/घटना का उल्लेख, प्रश्न के हर भाग सहित | 2 |
| (iii) कथन का आशय या पात्र का व्यवहार, कारण सहित | 2 |
| (iv) मत या सुझाव: दो तर्क, उदाहरण सहित | 5 |
Where students lose marks in क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: रचनाकार का नाम भूलना या अशुद्ध लिखना
2025 में गद्य संकलन के गद्यांश प्रश्न पर परीक्षकों ने लिखा कि छात्र रचनाकार का नाम भूल गए।
Wrong working
हज़ारी प्रशाद द्विवेदि
Right working
हजारी प्रसाद द्विवेदी
Do this: शीर्षक और लेखक का नाम साथ-साथ लिखकर याद करें।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: प्रश्न का पहला या दूसरा भाग छोड़ना
2025 के गद्यांश प्रश्न में परीक्षकों ने देखा कि 'कौन' वाला भाग छोड़ दिया गया; उन्होंने हर भाग का क्रम से उत्तर देने की सलाह दी।
Do this: प्रश्न के हर भाग को रेखांकित करें और उसी क्रम में उत्तर दें।
Usually costs: 1-2 अंक।
Mistake: विश्लेषण के बजाय केवल घटनाएँ लिखना
गद्य संकलन के दीर्घ प्रश्नों पर परीक्षकों की बार-बार टिप्पणी: कथन की समीक्षा के स्थान पर सार लिखा गया।
Do this: घटनाओं को तर्क के प्रमाण के रूप में रखें: 'यह घटना सिद्ध करती है कि…'।
Usually costs: 4-5 अंक।
Mistake: लेखक को निराशावादी बताना
निबंध का आरंभ निराशा से होता है, इसलिए कुछ छात्र गलत निष्कर्ष निकालते हैं।
Wrong working
लेखक मानते हैं कि देश में ईमानदारी समाप्त हो गई है।
Right working
लेखक मानते हैं कि ईमानदारी दबी है, नष्ट नहीं; निराश होने की ज़रूरत नहीं।
Do this: अंतिम वाक्य हमेशा याद रखें।
Usually costs: पूरा प्रश्न गलत दिशा में।
Practice questions on क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखक ने स्वीकार किया है कि लोगों ने उन्हें भी धोखा दिया है, फिर भी वे निराश नहीं हैं। इसका क्या कारण है?
Hint
विश्वासघात कम; अकारण सहायता की घटनाएँ अधिक।
Answer
लेखक के अनुसार ठगे जाने और धोखा खाने के बावजूद विश्वासघात बहुत कम स्थलों पर मिलता है। ऐसी घटनाएँ भी कम नहीं जब लोगों ने अकारण सहायता की और निराश मन को ढाढ़स दिया। केवल धोखे का हिसाब रखने से जीवन कष्टकर हो जाएगा, इसलिए वे अच्छाई पर भरोसा रखते हैं।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
'धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, कानून को दिया जा सकता है।' इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Hint
धर्म = आंतरिक नैतिकता; क़ानून = बाहरी नियम।
Answer
धर्म यहाँ आंतरिक नैतिकता है, जिसे मनुष्य अपने मन से मानता है; उसे धोखा देना स्वयं को धोखा देना है। क़ानून बाहरी नियम है, जिसकी त्रुटियों का लाभ चतुर लोग उठा लेते हैं। लेखक के अनुसार भारत पहले क़ानून को धर्म की तरह मानता था; आज दोनों में अंतर हो जाने से भ्रष्टाचार बढ़ा है।
Q3 · 1 mark · MCQBoard level
टिकट बाबू ने लेखक को कितने रुपये लौटाए?
(क) दस रुपये
(ख) पचास रुपये
(ग) नब्बे रुपये
(घ) सौ रुपयेHint
दस के बजाय सौ का नोट।
Answer
(ग) नब्बे रुपये।
Q4 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
निबंध में लेखक ने भारत के किस स्वरूप को 'मानव महा-समुद्र' कहा है? आज के भारत के लिए इसकी क्या प्रासंगिकता है?
Hint
आर्य-द्रविड़, हिंदू-मुसलमान, यूरोपीय-भारतीय आदर्शों की मिलन-भूमि।
Answer
लेखक भारत को आर्य और द्रविड़, हिंदू और मुसलमान, यूरोपीय और भारतीय आदर्शों की मिलन-भूमि बताते हुए 'मानव महा-समुद्र' कहते हैं, जिसमें अनेक धाराएँ मिलकर एक हो जाती हैं। वे पूछते हैं कि क्या यह महा-समुद्र सूख गया, और उत्तर देते हैं कि ऐसा नहीं हो सकता। आज जब समाज में भेदभाव और अविश्वास की ख़बरें आती हैं, यह विचार याद दिलाता है कि भारत की शक्ति उसकी विविधता और सहिष्णुता में है; इसे बचाए रखना ही मनीषियों के सपनों का भारत बनाना है।
Q5 · 10 marks · Long answerHOTS / competency
'क्या निराश हुआ जाए' निबंध के आधार पर सिद्ध कीजिए कि समाज में अच्छाई दबी है, नष्ट नहीं हुई। आज के जीवन से भी दो उदाहरण दीजिए।
Hint
निबंध के तर्क + दोनों घटनाएँ + आज के उदाहरण + निष्कर्ष।
Answer
अपेक्षित बिंदु: लेखक का कथन कि मूल्य 'दब अवश्य गए हैं लेकिन नष्ट नहीं हुए'; आज भी लोग मनुष्य से प्रेम करते, महिलाओं का सम्मान करते, झूठ-चोरी को गलत मानते हैं; भ्रष्टाचार के प्रति आक्रोश स्वयं प्रमाण; टिकट बाबू और बस कंडक्टर की घटनाएँ; आज के उदाहरण (आपदा में अजनबियों की सहायता, खोया सामान लौटाने वाले लोग, रक्तदान); निष्कर्ष: अच्छाई को उजागर करना हमारा दायित्व।
Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
एक छात्र ने इस निबंध पर पूछे गए 'शीर्षक की सार्थकता' वाले प्रश्न में केवल दोनों घटनाएँ लिख दीं। उत्तर में क्या कमी है?
Hint
शीर्षक का प्रश्न-रूप और अंतिम वाक्य।
Answer
उत्तर में यह नहीं बताया गया कि शीर्षक एक प्रश्न है और निबंध के अंत में 'मेरे मन! निराश होने की जरूरत नहीं है' से उसका उत्तर मिलता है। निराशा के कारण और लेखक के तर्क भी छूट गए। परीक्षक सार या कहानी के स्थान पर प्रश्न से जुड़ा विश्लेषण चाहते हैं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'क्या निराश हुआ जाए' के लेखक कौन हैं?Show answer
हजारी प्रसाद द्विवेदी।
2.लेखक के अनुसार आज ईमानदारी को किसका पर्याय समझा जाने लगा है?Show answer
मूर्खता का।
3.बस-यात्रा में कंडक्टर बच्चों के लिए क्या लाया?Show answer
लोटे में पानी और थोड़ा दूध।
4.लेखक ने किस कवि की प्रार्थना का उल्लेख किया है?Show answer
रवींद्रनाथ ठाकुर।
5.'धर्मभीरु' का अर्थ क्या है?Show answer
जिसे धर्म छूटने का भय हो, अधर्म से डरने वाला।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप निराशा के तीन कारण निबंध से बता सकते हैं?
- क्या आप क़ानून और धर्म के अंतर वाला तर्क समझा सकते हैं?
- क्या आप टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ क्रम से लिख सकते हैं?
- क्या आप शीर्षक की सार्थकता अंतिम वाक्य से जोड़ सकते हैं?
- क्या आप निबंध की शैली की दो विशेषताएँ बता सकते हैं?
क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी: frequently asked questions
'क्या निराश हुआ जाए' निबंध का मूल संदेश क्या है?
समाज में बुराइयाँ हैं, पर ईमानदारी, सेवा और मनुष्यता के मूल्य दबे हैं, नष्ट नहीं हुए; इसलिए निराश होने के बजाय अच्छाई को पहचानना और उजागर करना चाहिए।
क्या इस निबंध पर पहले ISC बोर्ड में प्रश्न आया है?
2024 और 2025 के प्रश्न-पत्रों में नहीं (तब भी यह गद्य संकलन में था); 2027 से यह Class XII के भाग में है। प्रश्न गद्य संकलन के अन्य पाठों जैसे ढाँचे (गद्यांश 1+2+2+5 या 10 अंक का दीर्घ प्रश्न) पर आने की संभावना है।
निबंध में लेखक ने अपनी बात किन घटनाओं से प्रमाणित की है?
रेलवे स्टेशन पर टिकट बाबू द्वारा नब्बे रुपये लौटाना, और बस बिगड़ने पर कंडक्टर का नई बस तथा बच्चों के लिए पानी-दूध लेकर लौटना।
Based on: CISCE ISC 2027 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi 805: Gadya Sanklan); CISCE ISC Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi (board paper, marking scheme, examiners' comments); NCERT Vasant Bhag 3 (Class VIII): Hazari Prasad Dwivedi, Kya Nirash Hua Jaye