ISC Class 12 हिंदी बादल को घिरते देखा है (नागार्जुन): भाव, व्याख्या और हल सहित प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'बादल को घिरते देखा है' में नागार्जुन हिमालय के अपने प्रत्यक्ष अनुभव से प्रकृति का चित्र खींचते हैं: बर्फ़ीली चोटियों पर घिरते बादल, मानसरोवर के कमलों पर ओस, झीलों में तैरते हंस, कस्तूरी मृग और किन्नर-जीवन। कवि कालिदास के मेघदूत की कल्पना को छोड़ यथार्थ देखे हुए दृश्य पर बल देते हैं।
What बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन is about
बादल को घिरते देखा है जनकवि नागार्जुन की कविता है, जो ISC हिंदी (805) की पाठ्यपुस्तक काव्य मंजरी के Class XII भाग में है। यही कविता NCERT की अंतरा भाग 1 में भी है; इस पृष्ठ के सभी उद्धरण उसी पाठ से शब्दशः लिए गए हैं।
खंड ख में काव्य मंजरी से तीन प्रश्न आते हैं: एक पद्यांश-आधारित (1, 2, 2 और 5 अंक) और दो 10-10 अंकों के दीर्घ प्रश्न। 2025 के बोर्ड प्रश्न-पत्र में इस कविता पर 10 अंकों का प्रश्न (प्रश्न 9) आया: 'नागार्जुन प्रकृति-चित्रण के कुशल चितेरे कवि हैं' कथन की पुष्टि कविता के आधार पर करनी थी।
अंक-योजना में हर छंद का दृश्य क्रम से अपेक्षित था: हिमालय की चोटियों पर बर्फ़ और बादल, मानसरोवर के स्वर्ण-कमलों पर ओस, झीलों में तैरते हंस, कालिदास के मेघदूत की कल्पना, कैलाश पर बादलों का आँधी-तूफ़ान से भिड़ना, वसंत, देवदार के वन और किन्नर-किन्नरियों की जीवन-शैली, साथ में पंक्तियों के उद्धरण। परीक्षकों ने लिखा कि कथन की पुष्टि उत्तर के आरंभ में अवश्य करनी है, कविता की पंक्तियाँ भी उत्तर में शामिल होनी चाहिए, और कहीं-कहीं वर्तनी व मात्रा संबंधी अशुद्धियाँ मिलीं; शिक्षकों को सलाह दी गई कि हर पद क्रमवार उत्तर में शामिल कराया जाए।
Weightage: काव्य मंजरी से खंड ख में तीन प्रश्न (हर एक 10 अंक) आते हैं; परीक्षार्थी चार पुस्तकों में से तीन चुनकर कुल चार प्रश्न करते हैं। 2025 में इस कविता पर 10 अंकों का दीर्घ प्रश्न आया।Source: CISCE ISC 2027 भारतीय भाषाएँ पाठ्यक्रम तथा 2025 का बोर्ड प्रश्न-पत्र (परीक्षकों की रिपोर्ट)
बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
कविता का स्वरूप। हर छंद 'देखा है' पर समाप्त होता है और उसके बाद टेक आती है: 'बादल को घिरते देखा है।' यह दोहराव बताता है कि कवि जो कह रहे हैं, वह उन्होंने अपनी आँखों से देखा है। NCERT के परिचय के अनुसार कविता में बादल के कोमल और कठोर दोनों रूप हैं, साथ ही हिमालय की घाटियों, झीलों, झरनों, देवदार के जंगलों और किन्नर-किन्नरियों के जीवन का चित्र है; भाव और भाषा में यह कालिदास और निराला की परंपरा से जुड़ती है।
पहला छंद: ओस की बूँदें। निर्मल, सफ़ेद पर्वत-शिखरों पर बादल घिरते हैं। उनसे गिरने वाली छोटी-छोटी, मोती जैसी ठंडी ओस की बूँदें मानसरोवर के सुनहरे कमलों पर गिरती हैं।
दूसरा छंद: हंस। ऊँचे हिमालय के कंधों पर छोटी-बड़ी झीलें हैं। मैदानों की उमस से व्याकुल होकर आए हंस उनके नीले-श्यामल जल में तैरते हुए कमलनाल के कड़वे-मीठे तंतु खोजते हैं।
तीसरा छंद: चकवा-चकई। वसंत का सुहाना सवेरा है, मंद हवा बह रही है, बाल-सूर्य की किरणें शिखरों को सुनहरा कर रही हैं। रात भर बिछुड़े रहने के शाप से दुखी चकवा-चकई का क्रंदन बंद हो जाता है और सरोवर के किनारे काई की हरी दरी पर उनकी प्रणय-कलह (प्यार भरी छेड़छाड़) शुरू होती है।
चौथा छंद: कस्तूरी मृग। बर्फ़ीली घाटी में हज़ारों फ़ुट की ऊँचाई पर कस्तूरी मृग अपनी ही नाभि से उठने वाली मादक सुगंध के पीछे दौड़ता है और उसे न पाकर अपने ऊपर ही चिढ़ता है।
पाँचवाँ छंद: मेघदूत और यथार्थ। कवि पूछते हैं कि धनपति कुबेर और उसकी अलका नगरी कहाँ गई, कालिदास के आकाश में बहने वाले गंगाजल का क्या हुआ, मेघदूत का मेघ कहाँ बरसा। फिर कहते हैं: 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था'। उन्होंने तो भीषण जाड़ों में कैलाश की चोटी पर महामेघ को तूफ़ानी हवा से गरज-गरजकर भिड़ते देखा है।
छठा छंद: किन्नर-जीवन। झरनों से गूँजते देवदार-वन में भोजपत्रों से छाई कुटियों के भीतर फूलों से सजे, कस्तूरी-मृगछालों पर बैठे किन्नर-किन्नरियों की कोमल अँगुलियाँ वंशी पर फिर रही हैं।
Themes and message
प्रत्यक्ष अनुभव का प्रकृति-चित्रण
हर छंद 'देखा है' पर समाप्त होता है। कवि सुनी-सुनाई या पढ़ी हुई बात नहीं, अपना आँखों देखा हिमालय दिखाते हैं; यही इस कविता की यथार्थवादी शक्ति है।
From the text: 'अमल धवल गिरि के शिखरों पर, / बादल को घिरते देखा है।'
बादल के कोमल और कठोर रूप
एक ओर बादल मोती जैसी ओस गिराते हैं, दूसरी ओर कैलाश पर तूफ़ानी हवा से भिड़ते हैं। NCERT परिचय भी कोमल और कठोर दोनों रूपों का उल्लेख करता है।
From the text: 'महामेघ को झंझानिल से / गरज-गरज भिड़ते देखा है।'
कल्पना बनाम यथार्थ
कवि कालिदास के मेघदूत, कुबेर और अलका को खोजते हैं, पर उन्हें कवि-कल्पना मानकर छोड़ देते हैं और अपने देखे यथार्थ को सामने रखते हैं।
From the text: 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था'
प्रकृति में प्रेम और जीवन
हंस, चकवा-चकई, कस्तूरी मृग और किन्नर: पूरा हिमालय जीवन, प्रेम और उल्लास से भरा है।
From the text: 'प्रणय-कलह छिड़ते देखा है।'
The speaker and the people in the poem
कवि (प्रत्यक्षदर्शी)
हिमालय का यात्री, जो अपनी आँखों देखे दृश्य बताता है।
- सूक्ष्म निरीक्षक: ओस, कमलनाल के तंतु, मृग की बेचैनी तक देखते हैं।
- यथार्थवादी: कवि-कल्पना को छोड़कर अनुभव पर भरोसा।
- परंपरा से जुड़े: कालिदास और मेघदूत का स्मरण।
हर छंद की 'देखा है' वाली पंक्ति; पाँचवाँ छंद।
प्रकृति के जीव
कविता के 'पात्र': हंस, चकवा-चकई, कस्तूरी मृग, किन्नर-किन्नरियाँ।
- हंस: मैदानों की उमस से बचकर झीलों में आते हैं।
- चकवा-चकई: रात भर बिछुड़े, सवेरे प्रणय-कलह।
- कस्तूरी मृग: अपनी ही सुगंध के पीछे दौड़कर स्वयं पर चिढ़ता है।
- किन्नर: कलाप्रिय, वंशी बजाते हुए।
दूसरे से छठे छंद तक।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| उपमा | 'छोटे-छोटे मोती जैसे / उसके शीतल तुहिन कणों को' | ओस की बूँदों को मोती जैसा बताकर उनकी चमक और कोमलता साकार होती है। |
| मानवीकरण | 'तुंग हिमालय के कंधों पर', 'महामेघ को झंझानिल से / गरज-गरज भिड़ते देखा है' | हिमालय को कंधों वाला और बादल को योद्धा की तरह भिड़ता दिखाकर दृश्य सजीव बने हैं। |
| टेक और पुनरावृत्ति | 'बादल को घिरते देखा है।' हर छंद के बाद | दोहराव से लय बनती है और 'देखा है' पर बल प्रत्यक्ष अनुभव की प्रामाणिकता देता है। |
| बिंब-विधान | 'शैवालों की हरी दरी पर', 'शोणित धवल भोज पत्रों से / छाई हुई कुटी के भीतर' | रंग, स्पर्श और सुगंध के बिंब पूरे दृश्य को आँखों के सामने खड़ा कर देते हैं। |
| भाषा | 'अमल धवल', 'तुहिन कण', 'विसतंतु', 'द्राक्षासव' | संस्कृतनिष्ठ, तत्सम-प्रधान शब्दावली; कालिदास की परंपरा की प्रतिध्वनि। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
अमल धवल गिरि के शिखरों पर, बादल को घिरते देखा है।
कवि: कविता का आरंभ।
निर्मल, सफ़ेद हिमशिखरों पर घिरते बादल: पूरी कविता का मूल दृश्य।
मानसरोवर के उन स्वर्णिम कमलों पर गिरते देखा है।
कवि: पहला छंद; ओस की बूँदें।
स्वर्णिम कमल और मोती-सी ओस: कोमल सौंदर्य का चित्र।
हंसों को तिरते देखा है।
कवि: दूसरा छंद; मैदानों की उमस से व्याकुल हंस।
झीलों का शांत, जीवंत दृश्य।
तरल तरुण कस्तूरी मृग को अपने पर चिढ़ते देखा है।
कवि: चौथा छंद।
अपनी ही नाभि की सुगंध के पीछे दौड़ता मृग स्वयं पर खीझता है।
जाने दो, वह कवि-कल्पित था
कवि: पाँचवाँ छंद; मेघदूत, कुबेर और अलका की खोज के बाद।
कल्पना को छोड़कर यथार्थ को अपनाने की घोषणा।
महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते देखा है।
कवि: पाँचवाँ छंद; कैलाश की चोटी पर भीषण जाड़े।
बादल का कठोर, संघर्षशील रूप।
बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
प्रत्यक्ष अनुभव
मान लीजिए आप स्कूल पत्रिका के लिए किसी हिल-स्टेशन यात्रा पर लेख लिख रहे हैं; एक मित्र इंटरनेट से वर्णन उठाकर लिखता है, आप अपनी देखी बातें।
नागार्जुन की कविता के आधार पर किसका लेख अधिक प्रभावी होगा और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता की हर पंक्ति 'देखा है' पर बल देती है।
- अपने अनुभव में सूक्ष्म विवरण आते हैं (ओस, हंस, मृग की खीझ)।
- उधार लिया वर्णन 'कवि-कल्पित' जैसा रह जाता है।
Answer: आपका लेख अधिक प्रामाणिक और जीवंत होगा, क्योंकि उसमें अपना देखा सूक्ष्म विवरण होगा, जैसा नागार्जुन की कविता में है।
Memory hook: देखा हुआ, लिखा हुआ।
कस्तूरी मृग
कल्पना कीजिए कि आपकी एक सहेली हर प्रतियोगिता में दूसरों जैसी बनने की कोशिश करती है, जबकि उसकी अपनी चित्रकला की प्रतिभा अनदेखी रह जाती है।
कविता का कौन-सा चित्र इस स्थिति पर लागू होता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- कस्तूरी मृग की सुगंध उसकी अपनी नाभि में है।
- वह उसे बाहर खोजता है और खीझता है।
Answer: 'तरल तरुण कस्तूरी मृग को / अपने पर चिढ़ते देखा है': अपनी प्रतिभा भीतर है, उसे पहचानना है।
Memory hook: सुगंध भीतर, खोज बाहर।
हिमालय का संरक्षण
मान लीजिए किसी हिमालयी झील के किनारे पर्यटकों ने प्लास्टिक का कचरा फैला दिया है।
कविता के झील-दृश्य के आधार पर बताइए कि क्या खो जाएगा।
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता में झीलों का 'श्यामल नील सलिल' और तैरते हंस।
- प्रदूषण से जल और जीव-जीवन नष्ट होगा।
- उत्तरदायी पर्यटन ही समाधान।
Answer: नीला निर्मल जल और उसमें तैरते हंसों का वह दृश्य, जिसे कवि ने देखा, आने वाली पीढ़ियाँ नहीं देख पाएँगी।
Memory hook: जो सुंदर देखा, वही बचाना।
Topics in this chapter
How the board asks बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पद्यांश: कविता और कवि का नाम (1 अंक) | 'प्रस्तुत पंक्तियों से सम्बन्धित कविता तथा कवि का नाम लिखिए।' (2025 में 'उद्यमी नर' पर इसी रूप में) | शुद्ध वर्तनी: कविता 'बादल को घिरते देखा है', कवि नागार्जुन। |
| पद्यांश: दृश्य और भाव (2 + 2 अंक) | 'प्रणय-कलह' से क्या तात्पर्य है?; कस्तूरी मृग अपने पर क्यों चिढ़ता है? | पहले दृश्य, फिर उसका कारण या भाव; दोनों भाग अलग-अलग। |
| पद्यांश: मत सहित 5 अंक का प्रश्न | कल्पना और यथार्थ, या प्रकृति-संरक्षण पर अपना मत, कविता की पंक्तियों के आधार पर। | दो तर्क, हर एक उदाहरण सहित; पंक्ति उद्धृत करें। |
| दीर्घ प्रश्न (10 अंक) | 'नागार्जुन प्रकृति-चित्रण के कुशल चितेरे कवि हैं… इस कथन की पुष्टि कविता के आधार पर कीजिए।' (2025) | हर छंद का दृश्य क्रम से, पंक्तियों सहित; मेघदूत-प्रसंग और किन्नर-जीवन न छोड़ें; वर्तनी पर ध्यान। |
Tricks to remember बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
छह छंद, छह दृश्य: ओ-हं-च-मृ-मे-कि
ओस (कमलों पर), हंस, चकवा-चकई, मृग (कस्तूरी), मेघदूत (और कैलाश), किन्नर।
Use it when: 2025 जैसे दीर्घ प्रश्न में क्रम से छंद।
बादल के दो रूप
कोमल: ओस गिराता। कठोर: झंझानिल से भिड़ता।
Use it when: बादल के रूपों वाला प्रश्न।
मेघदूत के तीन संकेत
कुबेर, अलका, व्योम-प्रवाही गंगाजल: फिर 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था'।
Use it when: कल्पना बनाम यथार्थ वाला प्रश्न।
बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पद्यांश (i): कविता और कवि · 1 mark · Very short answerBoard level
'ऋतु वसंत का सुप्रभात था / मंद-मंद था अनिल बह रहा / बालारुण की मृदु किरणें थीं / अगल-बगल स्वर्णिम शिखर थे' प्रस्तुत पंक्तियों से संबंधित कविता तथा कवि का नाम लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता का नाम।
- कवि का नाम।
Answer: कविता: 'बादल को घिरते देखा है'; कवि: नागार्जुन।
Example 2: पद्यांश (ii): चकवा-चकई की प्रणय-कलह · 2 marks · Short answerHarder board level
चकवा-चकई को 'निशा काल से चिर-अभिशापित' क्यों कहा गया है? सवेरा होने पर उनमें क्या परिवर्तन होता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- अभिशापित क्यों: कविता के अनुसार उन्हें एक-दूसरे से अलग रहकर सारी रात बितानी होती है।
- परिवर्तन: उनका क्रंदन बंद होता है; सरोवर के तट पर शैवाल की हरी दरी पर प्रणय-कलह।
Answer: कविता के अनुसार चकवा-चकई को एक-दूसरे से अलग रहकर पूरी रात बितानी पड़ती है, इसलिए वे रात के समय से सदा शापित और दुखी हैं। वसंत के सवेरे उनका विरह-क्रंदन बंद हो जाता है और वे सरोवर के किनारे शैवाल की हरी दरी पर प्यार भरी छेड़छाड़ (प्रणय-कलह) करने लगते हैं।
Example 3: पद्यांश (iii): कस्तूरी मृग · 2 marks · Short answerHOTS / competency
कस्तूरी मृग अपने पर ही क्यों चिढ़ता है? इस चित्र से क्या जीवन-सत्य झलकता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- कारण: सुगंध उसकी अपनी नाभि से उठती है; वह उसे बाहर खोजता है, न पाकर खीझता है।
- जीवन-सत्य: मनुष्य भी अपने भीतर की शक्ति/सुख को बाहर खोजता फिरता है।
Answer: कस्तूरी मृग की अपनी नाभि से मादक सुगंध उठती है, पर वह उसे बाहर कहीं समझकर उसके पीछे दौड़ता है। सुगंध का स्रोत न मिलने पर वह अपने आप पर ही चिढ़ता है। इससे यह सत्य झलकता है कि मनुष्य भी प्रायः अपने भीतर छिपे सुख और शक्ति को पहचाने बिना उसे बाहर खोजता रहता है।
Example 4: पद्यांश (iv): कल्पना बनाम यथार्थ · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'जाने दो, वह कवि-कल्पित था' कहकर कवि मेघदूत की कल्पना को छोड़ देते हैं। क्या साहित्य में प्रत्यक्ष अनुभव कल्पना से अधिक महत्त्वपूर्ण है? दो तर्कों सहित अपना मत लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रसंग: कुबेर, अलका, व्योम-प्रवाही गंगाजल, मेघदूत का मेघ: खोजने पर कहीं नहीं मिले।
- मत स्पष्ट करें (संतुलित मत भी स्वीकार्य)।
- तर्क 1: प्रत्यक्ष अनुभव से प्रामाणिकता और विश्वसनीयता; कविता के ही उदाहरण।
- तर्क 2: कल्पना की भी भूमिका है (कवि स्वयं कालिदास को याद करते हैं), पर उसे यथार्थ से जुड़ा होना चाहिए।
Answer: कवि हिमालय में कुबेर, उसकी अलका नगरी, कालिदास के आकाश में बहने वाले गंगाजल और मेघदूत के मेघ को खोजते हैं, पर कुछ नहीं मिलता। तब वे कहते हैं, 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था', और कैलाश पर तूफ़ानी हवा से भिड़ते महामेघ का अपना देखा दृश्य रखते हैं।
मेरे मत में साहित्य में प्रत्यक्ष अनुभव का विशेष महत्त्व है। पहला तर्क: अनुभव से रचना प्रामाणिक बनती है। इस कविता का हर छंद 'देखा है' पर समाप्त होता है, इसलिए पाठक को हर दृश्य पर विश्वास होता है; ओस का कमल पर गिरना या मृग का अपने पर चिढ़ना केवल वही लिख सकता है जिसने ध्यान से देखा हो।
दूसरा तर्क: फिर भी कल्पना व्यर्थ नहीं है। कवि ने स्वयं मेघदूत को याद करके कविता को परंपरा से जोड़ा है, और किन्नर-किन्नरियों का चित्र भी कल्पना और अनुभव का मेल है। अतः श्रेष्ठ साहित्य वह है जिसमें कल्पना अनुभव की ज़मीन पर खड़ी हो। नागार्जुन यही करते हैं: वे कल्पना का सम्मान करते हुए यथार्थ को प्राथमिकता देते हैं।
Example 5: दीर्घ प्रश्न: प्रकृति-चित्रण के कुशल चितेरे (2025) · 10 marks · Long answerHarder board level
'नागार्जुन प्रकृति-चित्रण के कुशल चितेरे कवि हैं। 'बादल को घिरते देखा है' कविता में उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम चित्रण किया है।' इस कथन की पुष्टि कविता के आधार पर कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- आरंभ में कथन की पुष्टि।
- हिमालय की श्वेत चोटियाँ और बादल; मानसरोवर के स्वर्ण-कमलों पर ओस।
- झीलों में तैरते हंस; चकवा-चकई; कस्तूरी मृग।
- मेघदूत की कल्पना; कैलाश पर बादलों का आँधी-तूफ़ान से भिड़ना।
- वसंत, देवदार के वन, किन्नर-किन्नरियों की जीवन-शैली; पंक्तियाँ उद्धृत; हर छंद क्रम से (परीक्षकों की सलाह)।
Answer: यह कथन पूर्णतः सत्य है। 'बादल को घिरते देखा है' में नागार्जुन ने हिमालय की प्रकृति का ऐसा सजीव चित्र खींचा है कि पाठक स्वयं को वहाँ खड़ा पाता है।
कविता का आरंभ ही एक भव्य दृश्य से होता है: 'अमल धवल गिरि के शिखरों पर, / बादल को घिरते देखा है।' बादलों से गिरने वाली मोती जैसी ओस की बूँदें 'मानसरोवर के उन स्वर्णिम / कमलों पर' गिरती हैं।
हिमालय के कंधों पर फैली झीलों के नीले जल में मैदानों की उमस से व्याकुल हंस कमलनाल के तंतु खोजते हुए तैरते हैं। वसंत के सवेरे, मंद हवा और बाल-सूर्य की किरणों के बीच रात भर बिछुड़े चकवा-चकई की प्रणय-कलह शुरू होती है। बर्फ़ीली घाटी में कस्तूरी मृग अपनी ही सुगंध के पीछे दौड़ता हुआ 'अपने पर चिढ़ते' दिखता है।
कवि कालिदास के मेघदूत, कुबेर और अलका को खोजते हैं, पर 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था' कहकर अपना देखा दृश्य रखते हैं: भीषण जाड़ों में कैलाश की चोटी पर 'महामेघ को झंझानिल से / गरज-गरज भिड़ते देखा है।' यह बादल का कठोर रूप है।
अंतिम छंद में झरनों से गूँजते देवदार-वन, भोजपत्रों से छाई कुटियाँ और फूलों से सजे किन्नर-किन्नरियों की वंशी बजाती अँगुलियाँ प्रकृति और मानव-जीवन का सुंदर मेल दिखाती हैं।
उपमा, मानवीकरण, रंग-गंध के बिंब, तत्सम भाषा और 'देखा है' की टेक इन चित्रों को और प्रभावी बनाती है। अतः नागार्जुन सचमुच प्रकृति-चित्रण के कुशल चितेरे हैं।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
दीर्घ प्रश्न (10 अंक): 2025 के प्रश्न 9 की अंक-योजना के बिंदु (अंक-विभाजन सांकेतिक है; अंक-योजना में अलग-अलग अंक नहीं दिए गए)। (10 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| आरंभ में कथन की पुष्टि; हिमालय की श्वेत चोटियाँ और बादल | 2 |
| मानसरोवर के स्वर्ण-कमलों पर ओस; झीलों में तैरते हंस | 2 |
| मेघदूत की कल्पना; कैलाश पर बादलों का आँधी-तूफ़ान से भिड़ना | 3 |
| वसंत, देवदार के वन, किन्नर-किन्नरियों की जीवन-शैली; पंक्तियों के उद्धरण | 3 |
Where students lose marks in बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: वर्तनी और मात्राओं की भूलें
2025 के परीक्षकों ने लिखा कि कहीं-कहीं उत्तरों में वर्तनी और मात्रा संबंधी अशुद्धियाँ पाई गईं।
Wrong working
मानसरोबर, स्वरणिम कमल, देवदारू
Right working
मानसरोवर, स्वर्णिम कमल, देवदारु
Do this: कविता के कठिन शब्द (तुहिन, शैवाल, झंझानिल, भोजपत्र, किन्नर) लिखकर अभ्यास करें।
Usually costs: भाषा के 1-2 अंक।
Mistake: सभी छंद न लिखना
परीक्षकों ने शिक्षकों को सलाह दी कि हर पद क्रमवार उत्तर में शामिल कराया जाए; अंक-योजना में लगभग हर छंद का दृश्य आता है।
Do this: छह छंदों की सूची याद रखें: ओस, हंस, चकवा-चकई, मृग, मेघदूत-कैलाश, किन्नर।
Usually costs: 3-5 अंक।
Mistake: पंक्तियाँ उद्धृत न करना
'पुष्टि कीजिए' वाले प्रश्न में प्रमाण चाहिए; 2025 के परीक्षकों ने लिखा कि कविता की पंक्तियों को भी उत्तर में शामिल किया जाना चाहिए।
Do this: हर अनुच्छेद में कम-से-कम एक पंक्ति शुद्ध रूप में।
Usually costs: 2 अंक तक।
Mistake: मेघदूत-प्रसंग का गलत अर्थ
कुछ छात्र लिखते हैं कि कवि ने कालिदास का मेघ देखा, जबकि कवि कहते हैं कि वह कवि-कल्पित था और उन्होंने कैलाश पर महामेघ को भिड़ते देखा।
Do this: 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था' पंक्ति याद रखें।
Usually costs: 2 अंक।
Practice questions on बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerHarder board level
'बादल को घिरते देखा है' पंक्ति के बार-बार दोहराए जाने से कविता में क्या सौंदर्य आया है?
Hint
लय + प्रत्यक्ष अनुभव।
Answer
टेक के रूप में दोहराई गई पंक्ति कविता को गीत जैसी लय देती है और हर दृश्य को एक सूत्र में बाँधती है। 'देखा है' पर बार-बार बल यह विश्वास दिलाता है कि सारे दृश्य कवि के प्रत्यक्ष अनुभव हैं, कल्पना नहीं।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
बादलों का वर्णन करते हुए कवि को कालिदास की याद क्यों आती है?
Hint
मेघदूत: मेघ को दूत बनाना; अलका; कुबेर।
Answer
कालिदास के 'मेघदूत' में यक्ष मेघ को दूत बनाकर अलका नगरी में अपनी प्रिया तक संदेश भेजता है, और उसमें हिमालय-क्षेत्र की प्रकृति का मनोरम चित्रण है। हिमालय में बादलों को देखकर कवि को वही काव्य याद आता है, पर वे उसकी कल्पनाओं को खोजकर भी नहीं पाते।
Q3 · 1 mark · MCQBoard level
कविता में हंस मानसरोवर क्षेत्र की झीलों में कहाँ से और क्यों आते हैं?
(क) समुद्र से, भोजन की खोज में
(ख) समतल देशों से, पावस की उमस से व्याकुल होकर
(ग) कैलाश से, ठंड से बचने के लिए
(घ) अलका से, कुबेर के आदेश परHint
दूसरा छंद पढ़ें।
Answer
(ख) समतल देशों से, पावस की उमस से व्याकुल होकर।
Q4 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
कवि ने 'महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते देखा है' क्यों कहा है? बादल के इस रूप की तुलना पहले छंद के बादल से कीजिए।
Hint
कोमल बनाम कठोर रूप।
Answer
पहले छंद में बादल कोमल रूप में हैं: वे शिखरों पर घिरते हैं और मोती जैसी ठंडी ओस स्वर्ण-कमलों पर गिराते हैं। पाँचवें छंद में भीषण जाड़ों में कैलाश की चोटी पर वही बादल महामेघ बनकर तूफ़ानी हवा (झंझानिल) से गरज-गरजकर भिड़ते हैं। कवि यह कहकर बादल का कठोर, शक्तिशाली रूप दिखाते हैं और बताते हैं कि यह उनका अपना देखा यथार्थ है, मेघदूत की कोमल कल्पना नहीं। इस तुलना से प्रकृति के दोनों पक्ष, सौम्य और प्रचंड, सामने आते हैं।
Q5 · 10 marks · Long answerHOTS / competency
'बादल को घिरते देखा है' कविता के आधार पर नागार्जुन की काव्य-भाषा और शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।
Hint
तत्सम शब्द, बिंब, उपमा, मानवीकरण, टेक, लय, कालिदास-परंपरा।
Answer
अपेक्षित बिंदु: संस्कृतनिष्ठ तत्सम भाषा ('अमल धवल', 'तुहिन कण', 'विसतंतु'); सजीव बिंब ('शैवालों की हरी दरी', भोजपत्रों से छाई कुटी); उपमा ('मोती जैसे'); मानवीकरण ('हिमालय के कंधों पर', महामेघ का भिड़ना); टेक 'बादल को घिरते देखा है' से लय और प्रामाणिकता; छंद-प्रवाह; कालिदास और निराला की परंपरा से जुड़ाव (NCERT परिचय); हर बिंदु पर पंक्ति का उदाहरण।
Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
एक छात्र ने 2025 के प्रश्न में केवल पहले दो छंद लिखकर उत्तर समाप्त कर दिया। उसे पूरे अंक क्यों नहीं मिले होंगे?
Hint
अंक-योजना और परीक्षकों की सलाह।
Answer
अंक-योजना में हर छंद का दृश्य अपेक्षित था: बर्फ़ और बादल, ओस, हंस, मेघदूत-प्रसंग, कैलाश पर बादलों का भिड़ना, वसंत, देवदार-वन और किन्नर-जीवन। परीक्षकों ने हर छंद को क्रम से लिखने की सलाह दी थी। केवल दो छंद लिखने से आधे से अधिक बिंदु छूट गए।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'बादल को घिरते देखा है' के कवि कौन हैं?Show answer
नागार्जुन (मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र)।
2.'तुहिन कण' का अर्थ क्या है?Show answer
ओस की बूँदें।
3.'प्रणय-कलह' किनके बीच दिखाई गई है?Show answer
चकवा-चकई के बीच।
4.कवि ने महामेघ को कहाँ भिड़ते देखा?Show answer
भीषण जाड़ों में नभ-चुंबी कैलाश की चोटी पर, झंझानिल (तूफ़ानी हवा) से।
5.किन्नर-किन्नरियाँ कविता के अंत में क्या करती दिखती हैं?Show answer
कस्तूरी-मृगछालों पर बैठकर वंशी बजाती हैं; उनकी अँगुलियाँ वंशी पर फिरती हैं।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप छहों छंदों के दृश्य क्रम से बता सकते हैं?
- क्या आप मेघदूत-प्रसंग का अर्थ और 'कवि-कल्पित' का तात्पर्य समझा सकते हैं?
- क्या आप कस्तूरी मृग के चिढ़ने का कारण लिख सकते हैं?
- क्या आप तीन अलंकार/बिंब उदाहरण सहित बता सकते हैं?
- क्या आप तुहिन, शैवाल, झंझानिल, भोजपत्र, किन्नर शुद्ध लिख सकते हैं?
बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन: frequently asked questions
'बादल को घिरते देखा है' कविता का मूल भाव क्या है?
हिमालय की प्रकृति का प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित चित्रण: बादल के कोमल और कठोर रूप, झीलें, हंस, कस्तूरी मृग और किन्नर-जीवन; कवि-कल्पना की जगह देखे हुए यथार्थ पर बल।
कवि 'वह कवि-कल्पित था' किसके लिए कहते हैं?
कालिदास के मेघदूत की कल्पनाओं के लिए: कुबेर, उसकी अलका नगरी, आकाश में बहने वाला गंगाजल और संदेश ले जाने वाला मेघ।
ISC में इस कविता पर कैसा प्रश्न आता है?
पद्यांश-आधारित प्रश्न (1, 2, 2 और 5 अंक) या 10 अंकों का दीर्घ प्रश्न। 2025 में प्रकृति-चित्रण पर 10 अंकों का प्रश्न आया था।
Based on: CISCE ISC 2027 Appendix I: List of Prescribed Textbooks (Hindi 805: Kavya Manjari); CISCE ISC Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi (board paper, marking scheme, examiners' comments); NCERT Antra Bhag 1 (Class XI), chapter 14: Nagarjun, Badal Ko Ghirte Dekha Hai