जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी Class 9: सारांश और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'रीढ़ की हड्डी' जगदीशचंद्र माथुर की एकांकी है, जो कक्षा 9 की गंगा का छठा पाठ है। रामस्वरूप अपनी बी.ए. पास बेटी उमा को कम पढ़ी बताकर वकील गोपालप्रसाद के बेटे शंकर से रिश्ते के लिए दिखाते हैं। उमा अपमान का विरोध करती है और शंकर की 'रीढ़ की हड्डी' पर सवाल उठाती है।
What जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी is about
'रीढ़ की हड्डी' प्रसिद्ध नाटककार जगदीशचंद्र माथुर की एकांकी है, जो एनसीईआरटी की पुस्तक गंगा (कक्षा 9) के गद्य खंड का छठा पाठ है। पाठ-परिचय के अनुसार इसकी रचना 1939 में हुई, जब स्त्रियों को शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में समान अवसर नहीं मिलते थे। एकांकी विवाह के लिए कम पढ़ी-लिखी लड़कियों की माँग और विवाह में लेन-देन जैसी कुरीतियों पर चोट करती है। इसकी मुख्य पात्र उमा पढ़ी-लिखी, सशक्त स्त्री का प्रतिनिधित्व करती है।
रामस्वरूप और उनकी पत्नी प्रेमा बेटी उमा के रिश्ते के लिए वकील गोपालप्रसाद और उनके मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले बेटे शंकर का स्वागत करते हैं। गोपालप्रसाद को ज़्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए, इसलिए रामस्वरूप उमा की बी.ए. की पढ़ाई छिपाते हैं। लड़की को 'देखे-परखे' जाने से आहत उमा अंत में सच बोल देती है और शंकर की कायरता उजागर करती है। कक्षा 9 की परीक्षा विद्यालय लेता है; खंड ग के प्रश्नों का विभाजन CBSE ने नहीं दिया, इसलिए यहाँ कक्षा 10 हिंदी जैसे प्रश्न हैं: पठित अंश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।
Weightage: कक्षा 9 की वार्षिक परीक्षा (80 अंक) विद्यालय लेता है। खंड ग (पाठ्यपुस्तक गंगा) के 30 अंक हैं, पर CBSE ने इस खंड के प्रश्नों का विभाजन नहीं दिया है। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं 2026-27
जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
तैयारी। रामस्वरूप घरेलू सहायक रतन के साथ कमरा सजाते हैं: तख्त, दरी, चादर, हारमोनियम और सितार। रतन की गलतफ़हमियों पर वे झुँझलाते हैं। प्रेमा बताती है कि उमा मुँह फुलाए पड़ी है और पाउडर लगाने से इनकार कर रही है। प्रेमा को पढ़ाई-लिखाई के 'जंजाल' समझ नहीं आते; वह कहती है कि इंट्रेंस ही पास करा लेते। रामस्वरूप उसे चुप कराते हैं ताकि बात मेहमानों तक न पहुँचे। मक्खन न होने पर वे रतन को मक्खन लाने भेजते हैं। रामस्वरूप बताते हैं कि गोपालप्रसाद स्वयं वकील और पढ़े-लिखे होकर भी कम पढ़ी बहू चाहते हैं, और बेटा शंकर 'सवा सेर' है; मजबूरी में वे उनकी शर्त मान रहे हैं।
मेहमानों का आगमन। गोपालप्रसाद अनुभवी, चतुर व्यक्ति हैं और शंकर झुकी कमर वाला, खीसें निपोरने वाला युवक। बातचीत में शंकर एक साल बीमार रहने की बात आती है। गोपालप्रसाद अपने ज़माने की कचौड़ियों, बालाई और पढ़ाई का बखान करते हैं; रामस्वरूप चापलूसी में 'हँ-हँ' करते हैं। गोपालप्रसाद 'बिजनेस' की बात पर आते हैं, शंकर को कमर सीधी करके बैठने को कहते हैं और उसके दोस्तों की 'बैकबोन' वाली बात अधूरी छोड़ते हैं। वे 'खूबसूरती पर टैक्स' का मज़ाक करते हैं और कहते हैं कि उन्हें ज़्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए, अधिक से अधिक मैट्रिक। उनका तर्क है: 'मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।' ऊँची तालीम, उनके अनुसार, केवल मर्दों के लिए है।
उमा की परख। उमा सादे कपड़ों में पान लेकर आती है; उसका चश्मा देखकर बाप-बेटे चौंकते हैं। रामस्वरूप बहाना बनाते हैं कि आँखें दुखने के कारण चश्मा लगा है। गोपालप्रसाद उसकी चाल, चेहरा, गाना-बजाना, पेंटिंग और सिलाई की परख करते हैं। उमा मीरा का गीत 'मेरे तो गिरधर गोपाल' गाते-गाते शंकर की झेंपती आँखें देखकर रुक जाती है। इनाम के बारे में पूछने पर वह चुप रहती है।
उमा का विद्रोह। गोपालप्रसाद के 'मुँह खोलने' पर ज़ोर देने पर उमा कहती है कि कुर्सी-मेज़ बिकते समय दुकानदार उनसे कुछ नहीं पूछता। वह पूछती है कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होता, क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं जिन्हें कसाई देख-भालकर खरीदते हैं। वह शंकर के पिछली फ़रवरी में लड़कियों के होस्टल के आसपास घूमने और वहाँ से भगाए जाने की बात खोल देती है, और बताती है कि उसने बी.ए. पास किया है, कोई पाप नहीं किया। गोपालप्रसाद धोखे का आरोप लगाकर चल देते हैं। उमा कहती है कि घर जाकर पता लगाइए कि आपके बेटे के रीढ़ की हड्डी (बैकबोन) है या नहीं। बाप-बेटे चले जाते हैं, उमा सिसकने लगती है, और तभी रतन आकर कहता है: 'बाबूजी, मक्खन!'
केंद्रीय भाव: स्त्री को वस्तु की तरह परखना अपमानजनक है। शिक्षा स्त्री को आत्मसम्मान और साहस देती है, जबकि 'रीढ़ की हड्डी' यानी नैतिक दृढ़ता की कमी शिक्षित पुरुषों में भी हो सकती है।
Themes and message
स्त्री-शिक्षा और आत्मसम्मान
उमा बी.ए. पास है और अपने मान का ध्यान रखती है। शिक्षा ने उसे सोचने और बोलने का साहस दिया है। गोपालप्रसाद की मानसिकता के विपरीत, एकांकी स्त्री-शिक्षा को स्त्री की शक्ति के रूप में दिखाती है।
From the text: 'मैंने बी.ए. पास किया है। कोई पाप नहीं किया, कोई चोरी नहीं की'
विवाह में लड़की को वस्तु समझना
लड़की की चाल, चेहरा, गाना, सिलाई, सब कुछ खरीदार की तरह परखा जाता है। उमा इस अपमान की तुलना कुर्सी-मेज़ की बिक्री और कसाई द्वारा भेड़-बकरी खरीदने से करती है।
From the text: 'क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?'
रूढ़िवादिता और दोहरापन
गोपालप्रसाद वकील हैं, सभा-सोसाइटियों में जाते हैं, अपने बेटों को ऊँची शिक्षा दिलाते हैं, पर बहू कम पढ़ी चाहते हैं। रामस्वरूप बेटी को पढ़ाते हैं, पर समाज के डर से उसकी पढ़ाई छिपाते हैं। दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
From the text: 'खुद पढ़े-लिखे हैं, वकील हैं... मगर लड़की चाहते हैं ऐसी कि ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो।'
'रीढ़ की हड्डी': नैतिक दृढ़ता
शीर्षक दोहरे अर्थ वाला है। शंकर की झुकी कमर उसकी शारीरिक कमज़ोरी है, पर असली कमी नैतिक साहस और व्यक्तित्व की है: वह पिता की हर बात मानता है और ताक-झाँक में भी कायरता दिखाता है। उमा के पास वह रीढ़ है।
From the text: 'आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन, बैकबोन!'
हास्य-व्यंग्य
रामस्वरूप की 'हँ-हँ', गोपालप्रसाद का 'खूबसूरती पर टैक्स', पुराने ज़माने का बखान और अंत में 'बाबूजी, मक्खन!' जैसी स्थितियाँ समाज की कुरीतियों पर हँसते-हँसते चोट करती हैं।
From the text: 'खूबसूरती पर टैक्स!'
Characters
उमा
रामस्वरूप की बेटी; बी.ए. पास, गाना, सितार, पेंटिंग और सिलाई में निपुण।
- स्वाभिमानी और साहसी: अपमान के विरुद्ध बोलती है
- शिक्षित और विचारशील: लड़कियों को वस्तु मानने का विरोध
- सच्ची: अपनी पढ़ाई नहीं छिपाती
- संवेदनशील: अंत में सिसक उठती है
'मुझे अपनी इज्जत— अपने मान का खयाल तो है।'
रामस्वरूप
उमा के पिता।
- आधुनिक विचार वाले: बेटी को उच्च शिक्षा दिलाई
- मजबूर और समझौतावादी: रिश्ते के लिए पढ़ाई छिपाते हैं
- चापलूसी करने वाले: 'हँ-हँ'
- विनोदी: ग्रामोफ़ोन वाला मज़ाक
'क्या करूँ, मजबूरी है।'
गोपालप्रसाद
शंकर के पिता, वकील।
- रूढ़िवादी और दोहरे मापदंड वाले
- चतुर और व्यावसायिक: विवाह को 'बिजनेस' कहते हैं
- अतीत-प्रेमी और आत्म-प्रशंसक
- स्त्री-विरोधी सोच: 'मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं'
'हमें ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए।'
शंकर
गोपालप्रसाद का बेटा, मेडिकल कॉलेज का छात्र।
- रीढ़-विहीन (व्यक्तित्वहीन): पिता की हर बात में हाँ
- झुकी कमर, कमज़ोर स्वास्थ्य
- कायर: होस्टल के आसपास ताक-झाँक; अंत में 'बाबूजी, चलिए'
'जी हाँ, कोई नौकरी तो करानी नहीं।'; 'बाबूजी, चलिए।'
प्रेमा और रतन
उमा की माँ और घरेलू सहायक।
- प्रेमा: पुरानी सोच, स्त्री-शिक्षा को 'जंजाल' मानती है, पर बेटी से स्नेह
- रतन: भोला, गलतफ़हमियों से हास्य; अंत में 'मक्खन' लेकर आता है
'मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।'
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| एकांकी शिल्प: एक दृश्य, कसी कथा | पूरी कथा रामस्वरूप के एक कमरे में घटती है | कम समय में तनाव बढ़ता है और अंत में विस्फोट होता है। |
| रंग-निर्देश (कोष्ठक में) | '(पान की तश्तरी हाथों में लिए उमा आती है। सादगी के कपड़े। गर्दन झुकी हुई।)' | पात्रों के हाव-भाव और मंच-सज्जा स्पष्ट करते हैं। |
| व्यंग्यपूर्ण, स्वाभाविक संवाद | 'खूबसूरती पर टैक्स!'; 'हँ-हँ-हँ!' | समाज की कुरीतियों पर हास्य के साथ चोट। |
| प्रतीक और दोहरा अर्थ | 'रीढ़ की हड्डी' (बैकबोन) | शारीरिक कमज़ोरी से नैतिक दृढ़ता की कमी तक का संकेत। |
| नाटकीय विडंबना और अंत | अंत में रतन: 'बाबूजी, मक्खन!' | जिस दिखावे के लिए इतनी भाग-दौड़ थी, वह अब व्यर्थ है; व्यंग्यपूर्ण, मार्मिक समापन। |
| उपमा और तर्क | कुर्सी-मेज़ की बिक्री; कसाई और भेड़-बकरियाँ | उमा के तर्क को तीखा और यादगार बनाते हैं। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।
प्रेमा: उमा के मुँह फुलाए पड़ी रहने की शिकायत करते हुए, जब रामस्वरूप उसे दोष देते हैं।
उस समय की स्त्री-शिक्षा के प्रति सोच।
मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं
गोपालप्रसाद: लड़कियों की ऊँची पढ़ाई का विरोध करते हुए।
रूढ़िवादी, पुरुष-प्रधान सोच।
क्या लड़कियों के दिल नहीं होता? क्या उनके चोट नहीं लगती?
उमा: परख से आहत होकर।
स्त्री की भावनाओं और सम्मान की माँग।
मुझे अपनी इज्जत— अपने मान का खयाल तो है।
उमा: अपनी बी.ए. की पढ़ाई बताते हुए।
उमा का आत्मसम्मान।
आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं
उमा: गोपालप्रसाद के जाते समय।
शीर्षक का मूल; शंकर की नैतिक कमज़ोरी पर चोट।
बाबूजी, मक्खन!
रतन: एकांकी का अंतिम संवाद।
विडंबनापूर्ण अंत: दिखावे की तैयारी व्यर्थ।
जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
सम्मान के लिए आवाज़ उठाना
मान लीजिए किसी समारोह में एक रिश्तेदार आपकी बहन के रंग-रूप पर टिप्पणी करके उसकी पढ़ाई को बेकार बताते हैं।
उमा से प्रेरणा लेकर आप क्या करेंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- उमा ने अपमान का शालीन पर दृढ़ विरोध किया।
- विनम्रता से आपत्ति।
- शिक्षा का महत्त्व बताना।
Answer: उमा की तरह मैं शालीन पर दृढ़ स्वर में कहूँगा कि किसी के रंग-रूप पर टिप्पणी अपमान है। मेरी बहन की पढ़ाई उसकी ताकत है, उसे बेकार कहना उचित नहीं।
Memory hook: शालीनता से, पर रीढ़ सीधी रखकर बोलो।
झूठ पर टिके संबंध
कल्पना कीजिए कि नौकरी पाने के लिए आपका भाई अपने बायोडाटा में झूठी योग्यता लिखना चाहता है।
रामस्वरूप के अनुभव से आप उसे क्या समझाएँगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- रामस्वरूप ने पढ़ाई छिपाई।
- सच सामने आया, अपमान हुआ।
- सच पर टिकना।
Answer: रामस्वरूप ने रिश्ते के लिए उमा की पढ़ाई छिपाई, पर सच सामने आते ही सब बिगड़ गया। झूठ पर टिका रिश्ता या नौकरी नहीं चलती; भाई को सही योग्यता ही लिखनी चाहिए।
Memory hook: झूठ की नींव पर घर नहीं टिकता।
व्यक्तित्व की 'रीढ़'
मान लीजिए आपका मित्र हर बात में दूसरों की हाँ में हाँ मिलाता है, भले ही बात गलत हो।
शंकर के चरित्र से तुलना करके उसे क्या सलाह देंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शंकर हर बात में पिता की हाँ।
- अपनी राय और नैतिक साहस नहीं।
- अपने विचार रखना सीखना।
Answer: शंकर भी हर बात में पिता की हाँ में हाँ मिलाता था, इसलिए उसे 'रीढ़-विहीन' कहा गया। मैं मित्र से कहूँगा कि विनम्रता से ही सही, अपनी सही राय रखना सीखे।
Memory hook: हाँ में हाँ नहीं, सही में हाँ।
Topics in this chapter
How the school exam asks जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | गोपालप्रसाद का स्त्री-शिक्षा पर मत, उमा का विद्रोह या अंतिम संवाद: शीर्षक किसका प्रतीक, किस पर व्यंग्य, शंकर की छवि, उमा की दृष्टि में शिक्षा का अर्थ, संवाद शैली। | पात्र और प्रसंग पहचानें; व्यंग्य वाले प्रश्नों में 'समाज की अनुचित मान्यताएँ' जैसा व्यापक उत्तर देखें। |
| लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 25-30 शब्द) | रामस्वरूप के आधुनिकता-रूढ़ि के अंतर्द्वंद्व, 'रीढ़ की हड्डी' के दो पात्रों के लिए अर्थ, प्रेमा की सोच, शीर्षक का औचित्य, उमा के विद्रोह का कारण। | संवाद या घटना का उल्लेख करके उत्तर दें। |
| मूल्यपरक प्रश्न | क्या उमा का व्यवहार उचित था; दहेज और लड़की-दिखाई जैसी कुरीतियाँ आज कितनी बची हैं। | संतुलित राय, एकांकी का प्रमाण, आज का उदाहरण। |
| रंगमंच और लेखन | रंग-निर्देशों का महत्त्व, एकांकी का मंचन, संवाद लेखन (खंड घ, लगभग 80 शब्द)। | पात्रों के स्वभाव के अनुरूप भाषा; कोष्ठक में हाव-भाव। |
Tricks to remember जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पात्र-जोड़ी
लड़की पक्ष: उमा-रामस्वरूप-प्रेमा-रतन; लड़का पक्ष: शंकर-गोपालप्रसाद।
Use it when: पात्रों में भ्रम न हो।
उमा की परख के पाँच बिंदु
चाल, चेहरा, गाना-बजाना, पेंटिंग, सिलाई (और इनाम पर चुप्पी)।
Use it when: लड़की को वस्तु की तरह परखने के उदाहरण।
शुरू और अंत में मक्खन
मक्खन नहीं आया → रतन भेजा गया → अंत में 'बाबूजी, मक्खन!'
Use it when: विडंबनापूर्ण अंत समझाने के लिए।
जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: अंश 1: गोपालप्रसाद का मत
अरे, मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वही करने लगीं, अंग्रेजी अखबार पढ़ने लगीं और ‘पालिटिक्स’ वगैरह पर बहस करने लगीं तब तो हो चुकी गृहस्थी।
(1) · 1 mark · MCQ
वक्ता कौन है?
(क) रामस्वरूप
(ख) गोपालप्रसाद
(ग) शंकर
(घ) रतन(2) · 1 mark · MCQ
वक्ता की सोच किस प्रकार की है?
(क) प्रगतिशील
(ख) रूढ़िवादी और पुरुष-प्रधान
(ग) वैज्ञानिक
(घ) निष्पक्ष(3) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले वक्ता उन 'अक्ल के ठेकेदारों' पर झुँझलाता है, जो लड़कों और लड़कियों की पढ़ाई को एक ही बात मानते हैं।) 'अक्ल के ठेकेदार' किन्हें कहा गया है?
(क) जो लड़कों की बहुएँ भी ग्रेजुएट लाने की सलाह देते हैं
(ख) अध्यापकों को
(ग) वकीलों को
(घ) व्यापारियों को(4) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): लेखक इस संवाद द्वारा गोपालप्रसाद की सोच पर व्यंग्य करता है।
कारण (R): स्वयं पढ़ा-लिखा वकील होकर भी वह स्त्रियों की शिक्षा का विरोध करता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।(5) · 1 mark · MCQ
'हो चुकी गृहस्थी' का आशय है:
(क) गृहस्थी अच्छी चलेगी
(ख) गृहस्थी बिगड़ जाएगी
(ग) गृहस्थी पूरी हो गई
(घ) गृहस्थी शुरू होगी
Show the answersAnswers
- (ख) गोपालप्रसाद।
- (ख) रूढ़िवादी और पुरुष-प्रधान।
- (क) जो लड़कों की बहुएँ भी ग्रेजुएट लाने की सलाह देते हैं।
- (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (ख) गृहस्थी बिगड़ जाएगी (वक्ता के अनुसार)।
Extract 2: अंश 2: उमा का प्रश्न
अब मुझे कह लेने दीजिए, बाबूजी।... ये जो महाशय मेरे खरीदार बनकर आए हैं, इनसे ज़रा पूछिए कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होता? क्या उनके चोट नहीं लगती? क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?
(1) · 1 mark · MCQ
उमा ने लड़कियों की तुलना किससे की?
(क) गाय-बैलों से
(ख) बेबस भेड़-बकरियों से
(ग) सितार से
(घ) मोरनी से(2) · 1 mark · MCQ
उमा 'खरीदार' किसे कहती है?
(क) रामस्वरूप को
(ख) गोपालप्रसाद को
(ग) रतन को
(घ) प्रेमा को(3) · 1 mark · MCQ
उमा के इन शब्दों में कौन-सा भाव प्रमुख है?
(क) विनम्रता
(ख) अपमान के प्रति आक्रोश और आत्मसम्मान
(ग) प्रसन्नता
(घ) भय(4) · 1 mark · MCQ
उमा किस सामाजिक कुरीति पर प्रहार करती है?
(क) बाल-श्रम
(ख) विवाह में लड़की को वस्तु की तरह परखना
(ग) अंधविश्वास
(घ) जातिवाद(5) · 1 mark · MCQ
गद्यांश में उमा ने कौन-सी शैली अपनाई है?
(क) वर्णनात्मक
(ख) प्रश्नात्मक, जिससे तर्क तीखा हो जाता है
(ग) हास्यपूर्ण
(घ) काव्यात्मक
Show the answersAnswers
- (ख) बेबस भेड़-बकरियों से, जिन्हें कसाई देख-भालकर खरीदते हैं।
- (ख) गोपालप्रसाद को, जो बेटे के लिए लड़की देखने आए हैं।
- (ख) अपमान के प्रति आक्रोश और आत्मसम्मान।
- (ख) विवाह में लड़की को वस्तु की तरह परखना।
- (ख) प्रश्नात्मक; लगातार प्रश्नों से उसका तर्क और आक्रोश तीखा हो जाता है।
जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: शीर्षक के दो अर्थ · 2 marks · Short answerExam level
'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो अलग पात्रों के लिए भिन्न अर्थों में आया है। स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- गोपालप्रसाद: शंकर की झुकी कमर (शारीरिक)।
- उमा: शंकर में नैतिक दृढ़ता और साहस की कमी।
Answer: गोपालप्रसाद शंकर से कमर सीधी करके बैठने को कहते हैं; यहाँ अर्थ शारीरिक रीढ़ है। उमा 'रीढ़ की हड्डी' कहकर शंकर में आत्मसम्मान और नैतिक साहस की कमी पर चोट करती है।
Example 2: प्रेमा की सोच · 2 marks · Short answerExam level
'मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।' प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा के बारे में क्या पता चलता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- स्त्रियाँ थोड़ा पढ़ना ही पर्याप्त मानती थीं।
- ऊँची शिक्षा को 'जंजाल' समझा जाता था।
- विवाह में बाधा मानी जाती थी।
Answer: उस समय स्त्री-शिक्षा को महत्त्व नहीं दिया जाता था। स्त्रियों के लिए थोड़ा पढ़ना-लिखना पर्याप्त माना जाता था और ऊँची पढ़ाई को 'जंजाल' तथा विवाह में बाधा समझा जाता था।
Example 3: रामस्वरूप का अंतर्द्वंद्व · 2 marks · Short answerHarder exam level
रामस्वरूप आधुनिक दिखते हैं पर व्यवहार में समझौता करते हैं। एकांकी से उदाहरण दीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- बेटी को बी.ए. तक पढ़ाया।
- पर पढ़ाई छिपाई, चश्मे का बहाना बनाया।
- उमा को सजाकर दिखाना चाहा।
Answer: उन्होंने उमा को बी.ए. तक पढ़ाया, पर रिश्ते के लिए उसकी पढ़ाई छिपाई, चश्मे का झूठा बहाना बनाया और उसे सजाकर 'दिखाना' चाहा। विचार आधुनिक थे, पर व्यवहार में वे समाज से डर गए।
Example 4: उमा का विद्रोह उचित? · 2 marks · Short answerHarder exam level
क्या उमा का गोपालप्रसाद और शंकर के सामने बोलना उचित था? कारण सहित लिखिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- उसका अपमान हो रहा था।
- झूठ पर टिका रिश्ता ठीक नहीं।
- आत्मसम्मान की रक्षा।
Answer: हाँ, उचित था। उसे वस्तु की तरह परखा जा रहा था और रिश्ता झूठ पर टिका था। अपने आत्मसम्मान की रक्षा करना और सच बोलना उसका अधिकार था, भले ही रिश्ता टूट गया।
Example 5: अंतिम संवाद का प्रभाव · 2 marks · Short answerHOTS / competency
एकांकी के अंत में रतन के 'बाबूजी, मक्खन!' कहने का क्या प्रभाव है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मक्खन मेहमानों के दिखावे के लिए मँगाया गया था।
- मेहमान जा चुके, सब तैयारी व्यर्थ।
- विडंबना और व्यंग्य; गंभीर दृश्य में हल्की चुभन।
Answer: मक्खन मेहमानों की खातिर मँगाया गया था, पर वे जा चुके हैं। यह संवाद दिखावे की सारी तैयारी की व्यर्थता पर तीखा व्यंग्य करता है और गंभीर क्षण में विडंबना पैदा करता है।
Example 6: आज के संदर्भ में · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आज आपके रिश्तेदार अपनी डॉक्टर बेटी के लिए ऐसा रिश्ता ढूँढ़ रहे हैं जहाँ बहू को नौकरी न करने की शर्त है। उमा की दृष्टि से आप उन्हें क्या सलाह देंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शिक्षा आत्मबल और स्वतंत्र विचार के लिए।
- शर्तों पर समझौता अपमान।
- बेटी की राय सर्वोपरि।
Answer: मैं कहूँगा कि उमा की तरह बेटी का आत्मसम्मान सबसे ऊपर है। जो परिवार उसकी शिक्षा और काम का सम्मान न करे, वहाँ समझौता न करें; निर्णय में बेटी की राय को सबसे अधिक महत्त्व दें।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
लेखक ने 'रीढ़ की हड्डी' को शीर्षक क्यों चुना होगा? (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय-वस्तु: रीढ़ = आत्मसम्मान/नैतिक दृढ़ता; शंकर में इसकी कमी (झुकी कमर, पिता की हाँ, कायरता); उमा में भरपूर; शीर्षक केंद्रीय भाव को व्यक्त करता है। | 1 |
| अभिव्यक्ति: शुद्ध, संक्षिप्त भाषा। | 1 |
संवाद लेखन (लगभग 80 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रारूप: पात्रों के नाम, संवादों का क्रम। | 1 |
| विषय-वस्तु: प्रसंग से जुड़े भाव और तर्क। | 2 |
| पात्रानुकूल भाषा और समापन। | 1 |
| भाषा की शुद्धता। | 1 |
Where students lose marks in जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: उमा को मैट्रिक पास बताना
रामस्वरूप के झूठ को सच मान लेना।
Wrong working
उमा केवल मैट्रिक पास थी।
Right working
उमा बी.ए. पास थी; रामस्वरूप ने मैट्रिक बताया था।
Do this: उमा का कथन 'मैंने बी.ए. पास किया है' याद रखें।
Usually costs: 1-2 अंक।
Mistake: शंकर को वकील बताना
पिता-पुत्र में भ्रम।
Wrong working
शंकर वकील है।
Right working
गोपालप्रसाद वकील हैं; शंकर मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है।
Do this: पात्र-जोड़ी याद रखें।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: शीर्षक का केवल शारीरिक अर्थ लिखना
प्रतीक न समझना।
Wrong working
शंकर की रीढ़ की हड्डी टूटी थी।
Right working
रीढ़ = आत्मसम्मान और नैतिक दृढ़ता; शंकर में इसकी कमी।
Do this: दोनों अर्थ लिखें।
Usually costs: 1-2 अंक।
Mistake: अंत में रिश्ता तय हो गया, लिखना
अंत न पढ़ना।
Wrong working
अंत में उमा और शंकर का विवाह तय हो गया।
Right working
गोपालप्रसाद और शंकर नाराज़ होकर चले जाते हैं।
Do this: अंतिम दृश्य क्रम से याद रखें।
Usually costs: 1-2 अंक।
Practice questions on जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' का शीर्षक किसका प्रतीक है?
(क) शरीर के एक अंग का
(ख) व्यक्ति की ऊँचाई का
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
(घ) शारीरिक शक्ति काHint
उमा का अंतिम कथन।
Answer
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का।
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
उमा ने कौन-सा गीत गाया?
Hint
मीरा।
Answer
मीरा का गीत 'मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई'।
Q3 · 2 marks · Short answerExam level
उमा का चश्मा देखकर बाप-बेटे क्यों चौंके और रामस्वरूप ने क्या बहाना बनाया? (25-30 शब्द)
Hint
चश्मा = पढ़ाई?
Answer
मूल्य-बिंदु: चश्मे से ज़्यादा पढ़ाई का संदेह; रामस्वरूप का बहाना: पिछले महीने आँखें दुखने आई थीं, इसलिए कुछ दिनों के लिए चश्मा।
आदर्श उत्तर: चश्मा देखकर उन्हें संदेह हुआ कि लड़की ज़्यादा पढ़ी-लिखी है। रामस्वरूप ने बहाना बनाया कि पिछले महीने उमा की आँखें दुखने आई थीं, इसलिए कुछ दिनों के लिए चश्मा लगा है।
Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level
गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या समानता है?
(क) दोनों प्रगतिशील हैं
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं
(ग) दोनों रूढ़ियों के विरोधी हैं
(घ) दोनों संगीत-प्रेमी हैंHint
पढ़ाई छिपाना और कम पढ़ी बहू की माँग।
Answer
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder exam level
शंकर का चरित्र-चित्रण कीजिए। (25-30 शब्द)
Hint
झुकी कमर, पिता की हाँ में हाँ, होस्टल प्रसंग।
Answer
मूल्य-बिंदु: झुकी कमर, कमज़ोर स्वास्थ्य; व्यक्तित्वहीन, पिता की हाँ में हाँ; कायर: होस्टल के आसपास ताक-झाँक; अंत में 'बाबूजी, चलिए' कहकर भागना।
आदर्श उत्तर: शंकर झुकी कमर वाला, कमज़ोर और व्यक्तित्वहीन युवक है, जो पिता की हर बात में हाँ मिलाता है। होस्टल वाली ताक-झाँक और अंत में भाग खड़ा होना उसकी कायरता दिखाते हैं।
Q6 · 1 mark · MCQHarder exam level
एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
(क) औपचारिक और शुष्क
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
(ग) काव्यात्मक
(घ) भावुक और संक्षिप्तHint
'हँ-हँ', 'खूबसूरती पर टैक्स'।
Answer
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।' गोपालप्रसाद के इस तर्क का खंडन कीजिए। (25-30 शब्द)
Hint
प्रकृति के शारीरिक अंतर और शिक्षा का अधिकार।
Answer
मूल्य-बिंदु: शारीरिक अंतर से बुद्धि या अधिकार तय नहीं होते; शिक्षा सबका अधिकार; उमा स्वयं गुणी और बी.ए. पास; तर्क रूढ़िवादी और भ्रामक।
आदर्श उत्तर: पक्षियों-पशुओं के शारीरिक अंतर से मनुष्य की बुद्धि या अधिकार तय नहीं होते। शिक्षा स्त्री-पुरुष दोनों का अधिकार है; गुणी, बी.ए. पास उमा स्वयं इस तर्क को गलत सिद्ध करती है।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आप उमा की सहेली हैं। एकांकी की घटना के अगले दिन आप उसे क्या कहेंगी? (25-30 शब्द)
Hint
साहस की प्रशंसा, सांत्वना।
Answer
मूल्य-बिंदु: उसके साहस की प्रशंसा; दुखी न होने की सलाह; सम्मान देने वाला जीवनसाथी मिलेगा; आगे पढ़ाई/करियर पर ध्यान।
आदर्श उत्तर: उमा, तुमने जो साहस दिखाया, उस पर मुझे गर्व है। ऐसे लोगों से रिश्ता टूटना अच्छा ही हुआ। तुम्हें वही परिवार मिलेगा जो तुम्हारी शिक्षा और सम्मान को समझेगा।
Q9 · 5 marks · Long answerHarder exam level
संवाद लेखन (लगभग 80 शब्द): एकांकी के बाद उमा और उसके पिता रामस्वरूप के बीच संवाद लिखिए।
Hint
पिता का पछतावा, उमा का आत्मसम्मान, भविष्य।
Answer
मूल्य-बिंदु (संवाद लेखन): पात्रों के नाम, क्रमबद्ध संवाद; रामस्वरूप का पढ़ाई छिपाने पर पछतावा या चिंता; उमा का शांत पर दृढ़ उत्तर; स्त्री-शिक्षा और आत्मसम्मान का भाव; आगे का निर्णय (पढ़ाई जारी रखना, झूठ न बोलना); कोष्ठक में हाव-भाव; लगभग 80 शब्द।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.एकांकी के लेखक?Show answer
जगदीशचंद्र माथुर।
2.एकांकी की रचना कब हुई?Show answer
1939 में।
3.उमा की शिक्षा?Show answer
बी.ए. पास।
4.गोपालप्रसाद का पेशा?Show answer
वकील।
5.शंकर कहाँ पढ़ता है?Show answer
लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में।
6.रतन को क्या लाने भेजा गया?Show answer
मक्खन।
7.गोपालप्रसाद ने किस पर टैक्स लगाने की बात कही?Show answer
खूबसूरती पर।
8.एकांकी का अंतिम संवाद?Show answer
'बाबूजी, मक्खन!' (रतन)।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप एकांकी के पात्र और उनके संबंध बता सकते हैं?
- क्या आप गोपालप्रसाद के स्त्री-शिक्षा-विरोधी दो तर्क लिख सकते हैं?
- क्या आप उमा के विद्रोह के तीन तर्क बता सकते हैं?
- क्या आप शीर्षक के दोनों अर्थ समझा सकते हैं?
- क्या आप अंतिम संवाद 'बाबूजी, मक्खन!' का प्रभाव लिख सकते हैं?
- क्या आप रामस्वरूप के अंतर्द्वंद्व के दो उदाहरण दे सकते हैं?
जगदीशचंद्र माथुर – रीढ़ की हड्डी: frequently asked questions
'रीढ़ की हड्डी' किसकी रचना है और किस विधा में है?
जगदीशचंद्र माथुर की एकांकी है। कक्षा 9 की पुस्तक गंगा में यह छठा पाठ है; इसकी रचना 1939 में हुई।
गोपालप्रसाद कैसी बहू चाहते थे?
सुंदर और अधिक से अधिक मैट्रिक पास; उन्हें ज़्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए थी।
रामस्वरूप ने उमा की पढ़ाई क्यों छिपाई?
गोपालप्रसाद को अधिक पढ़ी लड़की नहीं चाहिए थी। रिश्ता तय कराने की मजबूरी में रामस्वरूप ने कहा कि उमा केवल मैट्रिक तक पढ़ी है।
उमा ने शंकर के बारे में क्या रहस्य खोला?
कि पिछली फ़रवरी में शंकर लड़कियों के होस्टल के इर्द-गिर्द घूम रहा था और वहाँ से भगाया गया था।
एकांकी के शीर्षक का क्या अर्थ है?
रीढ़ की हड्डी यानी बैकबोन, आत्मसम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है। शंकर में यह नहीं है, जबकि उमा में है।
एकांकी का अंत कैसे होता है?
गोपालप्रसाद और शंकर नाराज़ होकर चले जाते हैं, उमा सिसकने लगती है और तभी रतन आकर कहता है, 'बाबूजी, मक्खन!' इसी पर परदा गिरता है।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं (आर-1 और आर-2) 2026-27; NCERT गंगा, कक्षा 9 (मार्च 2026), पाठ 6: रीढ़ की हड्डी