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HindiCBSE Class 9 · Chapter 9

तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Class 9: भावार्थ और प्रश्न

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

कक्षा 9 की गंगा के नौवें पाठ में तुलसीदास के रामचरितमानस (बालकांड) का वह अंश है जिसमें शिव-धनुष टूटने पर क्रोधित परशुराम जनक की सभा में आते हैं। राजा भय से काँपते हैं, जनक चुप रहते हैं, राम विनम्रता से उत्तर देते हैं और लक्ष्मण मुसकराकर व्यंग्य करते हैं।

What तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद is about

'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' गोस्वामी तुलसीदास के महाकाव्य रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया अंश है, जो एनसीईआरटी की पुस्तक गंगा (कक्षा 9) के काव्य खंड का दूसरा पाठ है। पाठ-परिचय के अनुसार सीता-स्वयंवर में श्रीराम द्वारा शिव-धनुष तोड़ने का समाचार पाकर मुनि परशुराम क्रोधित होकर आते हैं और सभा के सभी राजाओं पर क्रुद्ध होते हैं। इस अंश में राजाओं का भय, विश्वामित्र और जनक की उपस्थिति, जनक द्वारा स्वयंवर का समाचार सुनाना, परशुराम का रोष, राम का विनम्र उत्तर और लक्ष्मण का पहला व्यंग्य है।

ध्यान दें: कक्षा 9 का यह अंश कथा का आरंभिक भाग है ('देखत भृगुपति बेषु कराला' से 'धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार' तक)। पुस्तक के अनुसार आगे के व्यंग्यपूर्ण संवाद और परशुराम का शांत होना 'खोजबीन' के लिंक से पढ़ा जा सकता है। भाषा अवधी है और छंद चौपाई-दोहा। कक्षा 9 की परीक्षा विद्यालय लेता है; खंड ग के प्रश्नों का विभाजन CBSE ने नहीं दिया, इसलिए यहाँ कक्षा 10 हिंदी जैसे प्रश्न हैं: काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।

Weightage: कक्षा 9 की वार्षिक परीक्षा (80 अंक) विद्यालय लेता है। खंड ग (पाठ्यपुस्तक गंगा) के 30 अंक हैं, पर CBSE ने इस खंड के प्रश्नों का विभाजन नहीं दिया है। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं 2026-27

तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: explanation

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

परशुराम का आगमन और राजाओं का भय। परशुराम (भृगुपति) का भयानक वेश देखकर सभी राजा भय से व्याकुल होकर उठ खड़े होते हैं और पिता सहित अपने-अपने नाम बताकर दंडवत प्रणाम करने लगते हैं। परशुराम जिसे सहज भाव से भी हितैषी मानकर देखते हैं, वह समझता है कि उसकी आयु पूरी हो गई। जनक आकर सिर झुकाते हैं और सीता को बुलाकर प्रणाम करवाते हैं। परशुराम आशीर्वाद देते हैं और सखियाँ प्रसन्न होकर सीता को ले जाती हैं।

विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण। विश्वामित्र आकर मिलते हैं और दोनों भाइयों को उनके चरण-कमलों में प्रणाम करवाते हैं, बताते हुए कि ये दशरथ के पुत्र राम-लक्ष्मण हैं। परशुराम सुंदर जोड़ी देखकर आशीर्वाद देते हैं; कामदेव के घमंड को भी मिटाने वाले राम के अपार रूप को देखकर उनकी आँखें थककर ठहर जाती हैं।

क्रोध का विस्फोट। फिर जानते हुए भी अनजान बनकर वे जनक से पूछते हैं कि इतनी भीड़ क्यों है; उनके शरीर में क्रोध व्याप जाता है। जनक स्वयंवर का समाचार सुनाते हैं। परशुराम दूसरी ओर देखते हैं तो धरती पर पड़े धनुष के टुकड़े दिखते हैं। अत्यंत क्रोध में वे कठोर वचन कहते हैं: 'अरे मूर्ख जनक, बता, धनुष किसने तोड़ा? जल्दी दिखा, नहीं तो आज जहाँ तक तेरा राज्य है, वहाँ तक की धरती उलट दूँगा।' जनक डर के मारे उत्तर नहीं देते; कुटिल राजा मन-ही-मन प्रसन्न होते हैं। देवता, मुनि, नाग, नगर के नर-नारी सब भयभीत होकर चिंता करते हैं। सीता की माता पछताती हैं कि विधाता ने बनी हुई बात बिगाड़ दी। परशुराम का स्वभाव सुनकर सीता को आधा पल भी कल्प (युग) के समान लगता है।

राम का विनम्र उत्तर। सबको भयभीत और सीता को डरी हुई देखकर राम, जिनके हृदय में न हर्ष है न विषाद, कहते हैं: 'हे नाथ, शिव-धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा। क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते?' यह सुनकर क्रोधी मुनि कहते हैं: 'सेवक वह है जो सेवा करे; शत्रु जैसा काम करके तो लड़ाई ही करनी चाहिए। जिसने शिव-धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु की तरह मेरा शत्रु है। वह सभा छोड़कर अलग हो जाए, नहीं तो सब राजा मारे जाएँगे।'

लक्ष्मण का व्यंग्य। मुनि के वचन सुनकर लक्ष्मण मुसकराए और परशुराम का अपमान करते हुए बोले: 'बचपन में हमने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया; इस धनुष पर इतनी ममता क्यों?' यह सुनकर परशुराम (भृगुकुलकेतु, अर्थात् भृगुकुल के दीपक) क्रोधित होकर कहते हैं: 'अरे राजपुत्र, काल के वश होकर तुझे बोलने का होश नहीं है। सारे संसार में प्रसिद्ध शिव का धनुष क्या धनुही के समान है?'

केंद्रीय भाव: एक ही परिस्थिति में परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और धैर्य, तथा लक्ष्मण का निर्भीक व्यंग्य दिखाकर तुलसीदास नाटकीय संवाद रचते हैं और विनय, मर्यादा और भावनात्मक संतुलन का महत्त्व बताते हैं।

Themes and message

क्रोध बनाम विनय

परशुराम का रौद्र रूप और राम का शांत, विनम्र उत्तर आमने-सामने हैं। राम स्वयं को 'आपका दास' कहकर क्रोध को शांत करने का प्रयास करते हैं। पुस्तक के अनुसार आगे की कथा में अंततः राम के विनय, विश्वामित्र के समझाने और राम की शक्ति की परीक्षा लेने पर परशुराम का आक्रोश शांत होता है।

From the text: 'नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥'

राम का भावनात्मक संतुलन

सारी सभा भयभीत है, सीता डरी हुई हैं, पर राम के मन में न हर्ष है न विषाद। यह धैर्य और स्थितप्रज्ञता उन्हें बाकी पात्रों से अलग करती है।

From the text: 'हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु॥'

भय का वातावरण

राजा व्याकुल होकर दंडवत करते हैं, जनक डर से उत्तर नहीं देते, नगर-वासी और देवता चिंतित हैं, सीता को आधा पल युग-सा लगता है। तुलसीदास भय का सजीव चित्र खींचते हैं।

From the text: 'अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं।' और 'अरध निमेष कलप सम बीता॥'

मानव-स्वभाव की सच्चाई

जनक के संकट में फँसने पर कुटिल राजा मन-ही-मन प्रसन्न होते हैं। तुलसी दिखाते हैं कि ईर्ष्यालु लोग दूसरों की परेशानी में सुख पाते हैं।

From the text: 'कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥'

निर्भीकता और व्यंग्य

लक्ष्मण क्रोधी मुनि से डरते नहीं; मुसकराकर व्यंग्य करते हैं कि बचपन में कई धनुहियाँ तोड़ीं, तब क्रोध क्यों नहीं आया। इससे संवाद में नाटकीयता आती है।

From the text: 'बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥'

The speaker and the people in the poem

परशुराम (भृगुपति, भृगुकुलकेतु)

शिव-धनुष टूटने से क्रुद्ध मुनि।

  • क्रोधी और उग्र: कठोर वचन, धमकियाँ
  • तेजस्वी और भयानक वेश वाले
  • शिव के प्रति ममता: धनुष टूटने पर आहत
  • सौंदर्य-प्रेमी: राम का रूप देखकर आँखें ठहर जाती हैं

'अति रिस बोले बचन कठोरा।'; 'रामहि चितइ रहे थकि लोचन।'

राम

शिव-धनुष तोड़ने वाले, दशरथ के पुत्र।

  • विनम्र और मर्यादाशील
  • धैर्यवान: न हर्ष, न विषाद
  • संवेदनशील: सीता को डरी देखकर बोलते हैं
  • बुद्धिमान: 'दास' कहकर क्रोध शांत करना चाहते हैं

'होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥'

लक्ष्मण

राम के भाई।

  • निर्भीक और स्पष्टवादी
  • व्यंग्यप्रिय: मुसकराकर उत्तर
  • भाई के प्रति स्नेही

'सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने॥'

जनक, सीता और सीता की माता

सभा के आयोजक परिवार।

  • जनक: शिष्ट, पर भय से मौन
  • सीता: भयभीत, आधा पल युग-सा
  • सीता की माता: पछतावा कि विधि ने बनी बात बिगाड़ दी

'जनक बहोरि आइ सिरु नावा।'; 'मन पछिताति सीय महतारी।'

Poetic devices

DeviceExampleEffect
संवाद शैली और नाटकीयतापरशुराम, राम और लक्ष्मण के आमने-सामने के वचनकविता में नाटक जैसा तनाव और रोचकता; संवाद ही चरित्र बनाते हैं।
अनुप्रास अलंकार'सुर मुनि नाग नगर नर नारी' (न और र की आवृत्ति)ध्वनि-सौंदर्य और लय।
उपमा अलंकार'सहसबाहु सम सो रिपु मोरा'धनुष तोड़ने वाले शत्रु की तुलना सहस्रबाहु से; 'सम' वाचक शब्द।
रूपक अलंकार'पद सरोज' (चरण रूपी कमल)चरणों की पवित्रता और कोमलता।
अतिशयोक्ति'अरध निमेष कलप सम बीता' (पाठ की व्याकरण-तालिका में अतिशयोक्ति का यही उदाहरण); 'उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू'आधे पल को कल्प-सा बताकर सीता की व्याकुलता, और धरती उलटने की धमकी से परशुराम के क्रोध की तीव्रता।
चौपाई-दोहा छंद और अवधी भाषाचौपाइयों के बाद दोहेगेयता और कथा का प्रवाह।
पौराणिक संदर्भसहस्रबाहु, तिपुरारि (त्रिपुरासुर के शत्रु शिव), भृगुकुलकथा को पौराणिक गरिमा देते हैं।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥

    परशुराम: टूटा धनुष देखकर।

    परशुराम का रौद्र रूप।

  • अरध निमेष कलप सम बीता॥

    कवि (सीता की दशा): परशुराम का स्वभाव सुनकर।

    भय में आधा पल भी युग-सा।

  • हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु॥

    कवि: राम के बोलने से पहले।

    राम का भावनात्मक संतुलन।

  • नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥

    राम: परशुराम के क्रोध के उत्तर में।

    राम की विनम्रता और मर्यादा।

  • बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥

    लक्ष्मण: परशुराम की धमकी पर।

    लक्ष्मण का व्यंग्य और निर्भीकता।

तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

क्रोध के सामने विनय

मान लीजिए आपकी गेंद से पड़ोसी की खिड़की का शीशा टूट गया है और वे बहुत गुस्से में बाहर आते हैं।

राम के व्यवहार से आप क्या करेंगे? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. राम ने स्वयं को 'दास' कहकर विनय दिखाया।
  2. गलती स्वीकारना, क्षमा माँगना।
  3. नुकसान भरने का प्रस्ताव।

Answer: राम की तरह मैं विनम्रता से गलती स्वीकार करूँगा, क्षमा माँगूँगा और माता-पिता से बात करके शीशा बदलवाने का प्रस्ताव दूँगा। विनय से उनका क्रोध शांत होगा।

Memory hook: क्रोध की आग पर विनय का पानी।

दूसरों के संकट में खुश न होना

कल्पना कीजिए कि प्रतियोगिता में आगे रहने वाले सहपाठी का प्रोजेक्ट गिरकर टूट गया है और कुछ बच्चे हँस रहे हैं।

'कुटिल भूप हरषे मन माहीं' से जोड़कर बताइए कि आपको क्या करना चाहिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कुटिल राजा जनक के संकट में खुश हुए।
  2. यह ईर्ष्या है, शोभनीय नहीं।
  3. मदद करना।

Answer: जनक के संकट में कुटिल राजा खुश हुए थे; यह ईर्ष्या का लक्षण है। मुझे हँसने के बजाय सहपाठी की मदद करनी चाहिए, ताकि वह प्रोजेक्ट दोबारा जोड़ सके।

Memory hook: दूसरे की हार पर हँसी, अपने मन की हार।

भय में धैर्य

मान लीजिए स्कूल में अचानक आग का अलार्म बजता है और सब घबरा जाते हैं।

राम के 'न हरषु बिषादु' वाले संतुलन से आप क्या सीखेंगे? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. राम भय के बीच स्थिर रहे।
  2. घबराहट में शांत रहकर निर्णय।
  3. दूसरों को भी शांत करना।

Answer: राम भय के माहौल में भी न खुश हुए न दुखी, बस शांत रहे। मैं भी घबराने के बजाय शांत रहकर निर्देशों का पालन करूँगा और दूसरों को भी धैर्य रखने को कहूँगा।

Memory hook: संकट में स्थिर मन, सबसे बड़ा हथियार।

Topics in this chapter

How the school exam asks तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5)चौपाइयाँ देकर: राजाओं की मनःस्थिति (भय और शिष्टाचार), जनक की विशेषता (शिष्टता), परशुराम के कठोर वचन का कारण (शिव-धनुष का खंडित होना), राम के कथन से विनम्रता और मर्यादा, लक्ष्मण के मुसकराने का कारण; अलंकार; कथन-कारण।हर चौपाई का सरल अर्थ पहले मन में बनाएँ; पात्र और प्रसंग पहचानें।
भाव स्पष्ट करना (2 अंक, 25-30 शब्द)'अरध निमेष कलप सम बीता' का भाव; परशुराम की चेतावनी का सभा पर प्रभाव; 'हृदयँ न हरषु बिषादु...' से राम के गुण; कुटिल राजा क्यों प्रसन्न हुए।अर्थ, भाव और एक कारण।
चरित्र और तुलनाराम का विनय या लक्ष्मण का तर्क, क्रोध शांत करने के लिए कौन-सा मार्ग उचित; परशुराम का चरित्र।दोनों पक्ष रखकर अपना निर्णय कारण सहित दें।
काव्य-सौंदर्यसंवादों की विशेषताएँ: राम की विनम्रता, परशुराम का रौद्र रूप, लक्ष्मण का प्रत्युत्तर, पौराणिक संदर्भ; अलंकार (अनुप्रास, उपमा, रूपक)।हर विशेषता के लिए एक पंक्ति याद रखें।

Tricks to remember तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • कथा-क्रम: आ-प्र-वि-क्रो-रा-ल

    आगमन (भय) → प्रणाम (राजा, जनक, सीता) → विश्वामित्र (राम-लक्ष्मण का परिचय) → क्रोध (टूटा धनुष, धमकी) → राम का विनय → लक्ष्मण का व्यंग्य।

    Use it when: अंश का क्रम याद रखने के लिए।

  • परशुराम के नाम

    भृगुपति, भृगुकुलकेतु, परसुधर, मुनि कोही।

    Use it when: काव्यांश में पात्र पहचानने के लिए।

  • तीन पात्र, तीन स्वभाव

    परशुराम = रोष, राम = विनय, लक्ष्मण = व्यंग्य।

    Use it when: तुलना वाले प्रश्नों के लिए।

तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: काव्यांश 1: परशुराम का क्रोध

सुनत बचन फिरि अनत निहारे। देखे चापखंड महि डारे॥
अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥
बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू॥
अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    परशुराम के कठोर वचन बोलने का मूल कारण था:
    (क) उचित आदर-सत्कार न मिलना
    (ख) जनक द्वारा समाचार छिपाना
    (ग) शिव-धनुष का खंडित होना
    (घ) अन्य राजाओं की उपस्थिति

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू' में कौन-सा भाव है?
    (क) विनम्रता
    (ख) उग्र क्रोध और धमकी
    (ग) करुणा
    (घ) प्रसन्नता

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    जनक ने उत्तर क्यों नहीं दिया?
    (क) वे क्रोधित थे
    (ख) वे बहुत डरे हुए थे
    (ग) उन्हें पता नहीं था
    (घ) वे सो रहे थे

  4. (4) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): कुटिल राजा मन-ही-मन प्रसन्न हुए।
    कारण (R): जनक को संकट में देखकर उन्हें ईर्ष्या-भरा सुख मिला, क्योंकि वे स्वयं धनुष नहीं तोड़ पाए थे।
    (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
    (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
    (ग) A सही है, R गलत है।
    (घ) A गलत है, R सही है।

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    'चापखंड' का अर्थ है:
    (क) धनुष के टुकड़े
    (ख) बाण
    (ग) तलवार
    (घ) सिंहासन

Show the answersAnswers
  1. (ग) शिव-धनुष का खंडित होना।
  2. (ख) उग्र क्रोध और धमकी।
  3. (ख) वे बहुत डरे हुए थे।
  4. (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  5. (क) धनुष के टुकड़े।

Extract 2: काव्यांश 2: लक्ष्मण का व्यंग्य, परशुराम का रोष

सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने॥
बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥
एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू॥
रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार।
धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार॥

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    'भृगुकुलकेतू' किसे कहा गया है?
    (क) राम को
    (ख) परशुराम को
    (ग) लक्ष्मण को
    (घ) जनक को

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    लक्ष्मण के मुसकराने और उपहास का कारण था:
    (क) वे सभा में श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहते थे
    (ख) राम के प्रति प्रेम दिखाना
    (ग) वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे
    (घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'तिपुरारि धनु' से आशय है:
    (क) राम का धनुष
    (ख) शिव का धनुष
    (ग) इंद्र का धनुष
    (घ) अर्जुन का धनुष

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    'बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं' में लक्ष्मण का स्वर कैसा है?
    (क) करुण
    (ख) व्यंग्यपूर्ण
    (ग) भयभीत
    (घ) शोकपूर्ण

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    'परसुधर' किसे कहा गया है?
    (क) राम को
    (ख) परशुराम को
    (ग) जनक को
    (घ) विश्वामित्र को

Show the answersAnswers
  1. (ख) परशुराम को (भृगुकुल के दीपक)।
  2. (घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।
  3. (ख) शिव का धनुष (त्रिपुरासुर के शत्रु शिव)।
  4. (ख) व्यंग्यपूर्ण।
  5. (ख) परशुराम को (फरसा धारण करने वाले)।

तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: अरध निमेष कलप सम · 2 marks · Short answerExam level

'अरध निमेष कलप सम बीता' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। यह किसके संदर्भ में कहा गया है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. संदर्भ: सीता।
  2. परशुराम का स्वभाव सुनकर भय।
  3. आधा पल भी युग जैसा।

Answer: यह सीता के संदर्भ में है। परशुराम का क्रोधी स्वभाव सुनकर वे इतनी भयभीत और व्याकुल हुईं कि उन्हें आधा पल भी कल्प (युग) के समान लंबा लगने लगा।

Example 2: कुटिल राजाओं की प्रसन्नता · 2 marks · Short answerExam level

जनक के डर से चुप रहने पर कुटिल राजा मन में प्रसन्न क्यों हुए? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. वे धनुष नहीं तोड़ पाए थे; ईर्ष्या।
  2. जनक संकट में।
  3. दूसरों के दुख में सुख: मानव-स्वभाव।

Answer: वे स्वयं धनुष नहीं तोड़ पाए थे और ईर्ष्या से भरे थे। जनक को संकट में देखकर उन्हें सुख मिला। यह दूसरों के दुख में खुश होने वाले मानव-स्वभाव की सच्चाई है।

Example 3: राम का संतुलन · 2 marks · Short answerHarder exam level

'हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु' राम के व्यक्तित्व के किन गुणों को दर्शाता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. न हर्ष न विषाद: स्थिर मन।
  2. धैर्य, आत्म-संयम।
  3. सबको भयभीत देख आगे आना: उत्तरदायित्व।

Answer: राम के मन में न हर्ष था न विषाद; यह उनके धैर्य, आत्म-संयम और स्थिर मन को दिखाता है। सबको भयभीत देखकर आगे बढ़कर बोलना उनका उत्तरदायित्व-बोध भी प्रकट करता है।

Example 4: परशुराम की चेतावनी का प्रभाव · 2 marks · Short answerHarder exam level

'सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥' इस चेतावनी का सभा पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सब राजाओं की जान को ख़तरा।
  2. भय और घबराहट बढ़ी।
  3. दोषी को अलग करने का दबाव।

Answer: चेतावनी से सब राजा अपनी जान के लिए और भयभीत हो गए होंगे। सभा में घबराहट फैली होगी और सब चाहते होंगे कि धनुष तोड़ने वाला स्वयं सामने आ जाए।

Example 5: विनय या तर्क · 2 marks · Short answerHOTS / competency

परशुराम का क्रोध शांत करने के लिए राम का 'विनय' उचित है या लक्ष्मण का 'तर्क'? कारण सहित लिखिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. क्रोधी व्यक्ति के सामने व्यंग्य आग में घी।
  2. विनय से क्रोध शांत होता है।
  3. पुस्तक: अंततः राम के विनय और विश्वामित्र के समझाने से परशुराम शांत।

Answer: राम का विनय अधिक उचित है। क्रोधी व्यक्ति के सामने व्यंग्य आग में घी डालता है, जबकि विनम्रता क्रोध को शांत करती है। पुस्तक भी बताती है कि अंततः राम के विनय और विश्वामित्र के समझाने से परशुराम शांत हुए।

Example 6: सभा के एक राजा के रूप में · 2 marks · Short answerHOTS / competency

मान लीजिए आप जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हैं। परशुराम के आगमन पर अपनी अनुभूति 25-30 शब्दों में लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भयानक वेश देखकर भय।
  2. दंडवत प्रणाम।
  3. राम का धैर्य देखकर आश्चर्य।

Answer: परशुराम का भयानक वेश देखते ही मैं डर से काँप उठा और पिता का नाम लेकर दंडवत प्रणाम किया। सब डरे थे, पर राम की शांत, विनम्र वाणी सुनकर मैं चकित रह गया।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

'हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु' का भाव स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द) (2 marks)

StepMarks
विषय-वस्तु: सब भयभीत, सीता डरी; राम के मन में न हर्ष न विषाद; धैर्य, संयम, संतुलन; इसलिए आगे बढ़कर बोले।1
अभिव्यक्ति: शुद्ध, संक्षिप्त भाषा।1

अनुच्छेद लेखन (लगभग 120 शब्द, 5 अंक) (5 marks)

StepMarks
विषय-वस्तु: विषय और काव्यांश का उदाहरण।2
प्रस्तुति: आरंभ, क्रम, निष्कर्ष।2
भाषा की शुद्धता और शब्द-सीमा।1

Where students lose marks in तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: कक्षा 10 वाले आगे के संवाद लिख देना

    दोनों कक्षाओं का प्रसंग एक है।

    Wrong working

    लक्ष्मण कहते हैं 'इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं...' (यह कक्षा 9 के अंश में नहीं है)।

    Right working

    कक्षा 9 का अंश 'धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार' पर समाप्त होता है।

    Do this: कक्षा 9 के अंश की सीमा याद रखें।

    Usually costs: विषय-वस्तु के अंक।

  • Mistake: जनक को क्रोधी बताना

    'कहु जड़ जनक' का वक्ता भूलना।

    Wrong working

    जनक ने परशुराम को मूर्ख कहा।

    Right working

    परशुराम ने जनक को 'जड़' और 'मूढ़' कहा; जनक डर से चुप रहे।

    Do this: वक्ता पहचानकर उत्तर दें।

    Usually costs: 1-2 अंक।

  • Mistake: 'अरध निमेष कलप सम' को परशुराम से जोड़ना

    संदर्भ न देखना।

    Wrong working

    परशुराम को आधा पल युग जैसा लगा।

    Right working

    सीता को, परशुराम का स्वभाव सुनकर।

    Do this: 'भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता' पढ़ें।

    Usually costs: 1 अंक।

  • Mistake: लक्ष्मण के मुसकराने को डर बताना

    भाव न समझना।

    Wrong working

    लक्ष्मण डरकर मुसकराए।

    Right working

    लक्ष्मण निर्भीक होकर, परशुराम को चुनौती देते हुए व्यंग्य से मुसकराए।

    Do this: 'बोले परसुधरहि अपमाने' पर ध्यान दें।

    Usually costs: 1 अंक।

Practice questions on तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQExam level

    'पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा॥' यह पंक्ति सभा के लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है?
    (क) आदर और सम्मान
    (ख) भक्ति और श्रद्धा
    (ग) भय और शिष्टाचार
    (घ) प्रेम और सहिष्णुता

    Hint

    पाठ के अभ्यास का प्रश्न।

    Answer

    (ग) भय और शिष्टाचार।

  2. Q2 · 1 mark · MCQExam level

    'जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा॥' से जनक की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
    (क) संवेदनशीलता
    (ख) शिष्टता
    (ग) सहनशीलता
    (घ) उदासीनता

    Hint

    अतिथि-सत्कार।

    Answer

    (ख) शिष्टता।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerExam level

    विश्वामित्र ने परशुराम से राम-लक्ष्मण का परिचय कैसे कराया और परशुराम की प्रतिक्रिया क्या थी? (25-30 शब्द)

    Hint

    दशरथ के ढोटा; रूप अपार।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: विश्वामित्र ने दोनों भाइयों को परशुराम के चरणों में प्रणाम करवाया और दशरथ के पुत्र बताया; परशुराम ने सुंदर जोड़ी देखकर आशीर्वाद दिया; राम का अपार रूप देखकर आँखें ठहर गईं।

    आदर्श उत्तर: विश्वामित्र ने दोनों भाइयों से परशुराम के चरणों में प्रणाम करवाकर उन्हें दशरथ के पुत्र बताया। परशुराम ने सुंदर जोड़ी को आशीर्वाद दिया और राम का अपार रूप देखकर उनकी आँखें ठहर गईं।

  4. Q4 · 1 mark · Very short answerHarder exam level

    निम्नलिखित में अलंकार पहचानिए: (क) 'सुर मुनि नाग नगर नर नारी' (ख) 'सहसबाहु सम सो रिपु मोरा' (ग) 'पद सरोज'

    Hint

    वर्ण-आवृत्ति, 'सम', अभेद आरोप।

    Answer

    (क) अनुप्रास (ख) उपमा (ग) रूपक

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    परशुराम ने 'सेवक' और 'शत्रु' के बारे में क्या कहा? (25-30 शब्द)

    Hint

    'सेवकु सो जो करै सेवकाई'।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: सेवक वह जो सेवा करे; शत्रु जैसा काम करने वाले से लड़ाई; धनुष तोड़ने वाला सहस्रबाहु-सा शत्रु; सभा से अलग हो, वरना सब राजा मारे जाएँगे।

    आदर्श उत्तर: परशुराम ने कहा कि सेवक वह है जो सेवा करे; शत्रु जैसा काम करने वाले से लड़ाई होती है। धनुष तोड़ने वाला सहस्रबाहु-सा शत्रु है; वह अलग न हुआ तो सब राजा मारे जाएँगे।

  6. Q6 · 1 mark · Assertion-reasonHarder exam level

    कथन (A): राम ने परशुराम को 'नाथ' कहकर संबोधित किया।
    कारण (R): राम विनम्रता से परशुराम का क्रोध शांत करना चाहते थे।
    (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
    (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
    (ग) A सही है, R गलत है।
    (घ) A गलत है, R सही है।

    Hint

    राम का संबोधन।

    Answer

    (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    सीता की माता के मन में पछतावा क्यों था? (25-30 शब्द)

    Hint

    'बिधि अब सँवरी बात बिगारी'।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: धनुष टूटने से सीता-राम विवाह की बात बन गई थी; परशुराम के क्रोध से संकट; लगा विधाता ने बनी बात बिगाड़ दी; माँ की चिंता।

    आदर्श उत्तर: धनुष टूटने से सीता-राम के विवाह की बात बन गई थी, पर परशुराम के क्रोध से नया संकट आ गया। माता को लगा कि विधाता ने बनी-बनाई बात बिगाड़ दी।

  8. Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    मान लीजिए आपकी कक्षा में कोई शिक्षक किसी टूटी वस्तु को लेकर बहुत क्रोधित हैं। राम और लक्ष्मण में से किसका व्यवहार अपनाएँगे और क्यों? (25-30 शब्द)

    Hint

    विनय और ज़िम्मेदारी।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: राम का विनय; ज़िम्मेदारी स्वीकार करना; व्यंग्य से क्रोध बढ़ता; शांत होने पर समाधान।

    आदर्श उत्तर: मैं राम का व्यवहार अपनाऊँगा: विनम्रता से ज़िम्मेदारी स्वीकार करूँगा और क्षमा माँगूँगा। लक्ष्मण जैसा व्यंग्य क्रोध बढ़ाता; शांत होने पर समाधान खोजना बेहतर है।

  9. Q9 · 5 marks · Long answerHarder exam level

    अनुच्छेद लेखन (लगभग 120 शब्द): 'क्रोध पर विजय: विनम्रता की शक्ति' विषय पर अनुच्छेद लिखिए, इस काव्यांश का उदाहरण देते हुए।

    Hint

    परशुराम, राम, लक्ष्मण; जीवन से उदाहरण।

    Answer

    मूल्य-बिंदु (अनुच्छेद): क्रोध के दुष्परिणाम; विनम्रता का अर्थ; काव्यांश का उदाहरण (परशुराम का रोष, राम का 'होइहि केउ एक दास तुम्हारा', लक्ष्मण के व्यंग्य से क्रोध का बढ़ना, अंततः राम के विनय और विश्वामित्र के समझाने से शांति); जीवन से एक उदाहरण; निष्कर्ष; लगभग 120 शब्द; शुद्ध भाषा।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.यह अंश रामचरितमानस के किस कांड से है?Show answer

    बालकांड।

  2. 2.'भृगुपति' किसे कहा गया?Show answer

    परशुराम को।

  3. 3.परशुराम ने किससे पूछा कि भीड़ क्यों है?Show answer

    विदेह (जनक) से।

  4. 4.परशुराम ने धनुष तोड़ने वाले की तुलना किससे की?Show answer

    सहस्रबाहु से।

  5. 5.किसे आधा पल युग-सा लगा?Show answer

    सीता को।

  6. 6.किसने कहा 'होइहि केउ एक दास तुम्हारा'?Show answer

    राम ने।

  7. 7.बचपन में धनुहियाँ तोड़ने की बात किसने कही?Show answer

    लक्ष्मण ने।

  8. 8.इस अंश की भाषा और छंद?Show answer

    अवधी; चौपाई-दोहा।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप अंश की घटनाएँ क्रम से बता सकते हैं?
  • क्या आप परशुराम के क्रोध के दो संवाद लिख सकते हैं?
  • क्या आप राम और लक्ष्मण के उत्तरों की तुलना कर सकते हैं?
  • क्या आप 'अरध निमेष कलप सम बीता' और 'कुटिल भूप हरषे मन माहीं' के भाव समझा सकते हैं?
  • क्या आप तीन अलंकारों के उदाहरण दे सकते हैं?
  • क्या आप बता सकते हैं कि कक्षा 9 का अंश कहाँ समाप्त होता है?

तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: frequently asked questions

यह अंश कहाँ से लिया गया है?

तुलसीदास के रामचरितमानस के बालकांड से। कक्षा 9 की गंगा में यह काव्य खंड का दूसरा पाठ (पाठ 9) है।

परशुराम क्यों क्रोधित हुए?

जनक की सभा में सीता-स्वयंवर के समय शिव-धनुष टूट गया था। धरती पर पड़े धनुष के टुकड़े देखकर वे अत्यंत क्रोधित हुए।

जनक ने परशुराम को उत्तर क्यों नहीं दिया?

वे बहुत डरे हुए थे: 'अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं'।

राम ने परशुराम से क्या कहा?

'हे नाथ, शिव-धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा; क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते?' यह उनकी विनम्रता और मर्यादा का प्रमाण है।

लक्ष्मण ने परशुराम पर क्या व्यंग्य किया?

कि बचपन में उन्होंने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब परशुराम ने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया; इस धनुष पर इतनी ममता क्यों?

क्या कक्षा 9 और कक्षा 10 का 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' एक ही है?

दोनों एक ही प्रसंग से हैं, पर गंगा (कक्षा 9) का अंश कथा का आरंभिक भाग है: परशुराम का आगमन, सभा का भय, जनक, राम का विनम्र उत्तर और लक्ष्मण का पहला व्यंग्य। आगे का संवाद पुस्तक में 'खोजबीन' के लिंक से पढ़ने को कहा गया है।

Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं (आर-1 और आर-2) 2026-27; NCERT गंगा, कक्षा 9 (मार्च 2026), पाठ 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद