रैदास – पद Class 9: भावार्थ और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
कक्षा 9 की गंगा के आठवें पाठ में संत रैदास के दो पद हैं। पहले पद 'अब कैसे छूटै राम रट लागी' में चंदन-पानी, दीपक-बाती, मोती-धागा जैसी जोड़ियों से भक्त और प्रभु का अटूट संबंध है। दूसरे पद 'जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ' में भक्त तीर्थ-व्रत छोड़कर केवल प्रभु-चरणों पर भरोसा करता है।
What रैदास – पद is about
रैदास (संत रविदास) भक्तिकाल के प्रसिद्ध निर्गुण संत कवि हैं। पाठ-परिचय के अनुसार उनका जन्म काशी में हुआ और उनका जीवन-काल पंद्रहवीं शताब्दी (सन् 1388-1518) माना जाता है। उन्होंने बाह्य आडंबरों का खंडन करके मन की शुद्धता और आंतरिक भक्ति को सच्चा धर्म माना। उनकी भाषा सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्द भी मिलते हैं। उनकी भक्ति रचनाएँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं और 'रैदास बानी' में संकलित हैं।
एनसीईआरटी की पुस्तक गंगा (कक्षा 9) के काव्य खंड के इस पहले पाठ में उनके दो पद हैं। पहले पद में चंदन-पानी, बादल-मोर, चाँद-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा और स्वामी-दास जैसी जोड़ियों से अनन्य भक्ति और समर्पण प्रकट होता है। दूसरे पद में भक्त कहता है कि प्रभु संबंध तोड़ भी दें, तो वह नहीं तोड़ेगा; उसे तीर्थ-व्रत नहीं, केवल प्रभु-चरणों का भरोसा है। कक्षा 9 की परीक्षा विद्यालय लेता है; खंड ग का विभाजन CBSE ने नहीं दिया, इसलिए यहाँ कक्षा 10 हिंदी जैसे प्रश्न हैं: काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न। पाठ में अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकार भी समझाए गए हैं, जो आर-1 के व्याकरण (अलंकार) से जुड़ते हैं।
Weightage: कक्षा 9 की वार्षिक परीक्षा (80 अंक) विद्यालय लेता है। खंड ग (पाठ्यपुस्तक गंगा) के 30 अंक हैं, पर CBSE ने इस खंड के प्रश्नों का विभाजन नहीं दिया है। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं 2026-27
रैदास – पद: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पद 1: 'अब कैसे छूटै राम रट लागी'। भक्त कहता है कि अब राम-नाम की रट लग गई है, यह कैसे छूट सकती है? फिर वह छह जोड़ियों से प्रभु और अपने संबंध को समझाता है:
- प्रभु चंदन हैं और भक्त पानी; जैसे चंदन घिसने से उसकी सुगंध पानी के अंग-अंग में समा जाती है, वैसे ही प्रभु की भक्ति भक्त में समा गई है।
- प्रभु वन के बादल (घन) हैं और भक्त मोर; जैसे बादल देखकर मोर नाचता है, और जैसे चकोर चंद्रमा को निहारता रहता है, वैसे ही भक्त प्रभु को देखता रहता है।
- प्रभु दीपक हैं और भक्त बाती; जिनकी ज्योति दिन-रात जलती है। प्रभु के साथ ही भक्त का जीवन प्रकाशित है।
- प्रभु मोती हैं और भक्त धागा; जैसे सोने में सुहागा मिलकर उसकी चमक बढ़ा देता है, वैसे ही दोनों का मेल सुंदर है।
- प्रभु स्वामी हैं और भक्त दास; रैदास ऐसी ही भक्ति करते हैं।
पद 2: 'जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ'। भक्त कहता है: हे राम, यदि तुम संबंध तोड़ भी दो, तो मैं नहीं तोड़ूँगा; तुमसे तोड़कर मैं किससे जोड़ूँगा? वह तीर्थ और व्रत की चिंता नहीं करता; उसे केवल प्रभु के चरण-कमलों का भरोसा है। जहाँ-जहाँ वह जाता है, प्रभु की ही पूजा होती है; प्रभु जैसा कोई दूसरा देव नहीं। उसने अपना मन हरि से जोड़ लिया है और हरि से जोड़कर बाकी सबसे तोड़ लिया है। हर पहर उसे प्रभु की ही आशा है; मन, कर्म और वचन से रैदास यही कहते हैं।
केंद्रीय भाव: सच्ची भक्ति बाहरी कर्मकांड (तीर्थ, व्रत) में नहीं, आराध्य से अटूट, अनन्य प्रेम और पूर्ण समर्पण में है। प्रभु सर्वव्यापक हैं और भक्त उनसे उसी तरह जुड़ा है जैसे दीपक से बाती।
Themes and message
अनन्य भक्ति
भक्त का मन केवल प्रभु में रमा है। राम-नाम की रट छूट नहीं सकती, और प्रभु के अलावा कोई दूसरा देव नहीं।
From the text: 'अब कैसे छूटै राम रट लागी।' और 'तुम सा देव ओर नहिं दूजा।'
भक्त और आराध्य का अटूट संबंध
चंदन-पानी, दीपक-बाती, मोती-धागा जैसी जोड़ियाँ बताती हैं कि दोनों एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते। दूसरे पद में भक्त कहता है कि प्रभु तोड़ें तो भी वह नहीं तोड़ेगा।
From the text: 'प्रभु जी तुम दीपक, हम बाती' और 'जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ'
बाह्य आडंबर का विरोध
रैदास तीर्थ-यात्रा और व्रत को भक्ति का आधार नहीं मानते। प्रभु के चरणों पर भरोसा ही सच्चा साधन है। यह संत कवियों की निर्गुण भक्ति-परंपरा से जुड़ा भाव है।
From the text: 'तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां।'
विनम्रता और समर्पण (दास्य भाव)
भक्त स्वयं को पानी, बाती, धागा और दास कहता है, यानी प्रभु की तुलना में छोटा, पर उनसे जुड़कर ही सार्थक। वह मन, कर्म और वचन से समर्पित है।
From the text: 'प्रभु जी तुम स्वामी, हम दासा' और 'मन क्रम वचन कहै रैदासा।'
ईश्वर की सर्वव्यापकता
भक्त जहाँ भी जाता है, वहाँ प्रभु की ही पूजा पाता है। ईश्वर किसी एक तीर्थ में सीमित नहीं।
From the text: 'जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा'
The speaker and the people in the poem
भक्त (रैदास)
पदों का वक्ता, जो अपने आराध्य राम/हरि से बात करता है।
- अनन्य भक्त
- विनम्र: स्वयं को दास, पानी, बाती कहता है
- दृढ़ निष्ठा वाला: 'मैं नहिं तोरौ'
- आडंबर-विरोधी: तीर्थ-व्रत की चिंता नहीं
'ऐसी भगति करै रैदासा।'
आराध्य (राम/हरि/प्रभु)
जिनसे भक्त जुड़ा है; निर्गुण, सर्वव्यापक प्रभु।
- चंदन की तरह सुगंध देने वाले
- दीपक की तरह प्रकाश देने वाले
- सर्वव्यापक: हर जगह उनकी पूजा
'प्रभु जी तुम चंदन हम पानी'
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| अनुप्रास अलंकार | 'चितवत चंद चकोरा' (च वर्ण की आवृत्ति) | ध्वनि-माधुर्य; पाठ में यही उदाहरण दिया गया है। |
| उपमा अलंकार | 'जैसे सोने मिलत सुहागा' | प्रभु-भक्त के मेल की तुलना सोने-सुहागे के मेल से; 'जैसे' वाचक शब्द। |
| रूपक अलंकार | 'चरन कमल' (चरणों पर कमल का आरोप) | प्रभु के चरणों की कोमलता और पवित्रता का भाव। |
| प्रतीक/जोड़ियाँ | चंदन-पानी, घन-मोर, चंद-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा, स्वामी-दास | आराध्य और भक्त के अटूट, पूरक संबंध को सरल चित्रों में दिखाती हैं। |
| पुनरावृत्ति और गेयता | हर पंक्ति में 'प्रभु जी तुम... हम...' | पद को लयात्मक और गाने योग्य बनाती है; भाव पर बल देती है। |
| सरल, लोकधर्मी ब्रजभाषा | 'तोरौ', 'जोरौ', 'बरत', 'भगति' | आम लोगों तक भक्ति का संदेश सहजता से पहुँचता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
अब कैसे छूटै राम रट लागी।
रैदास: पहले पद की टेक।
राम-नाम की लगन का न छूटना: अनन्य भक्ति।
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी
रैदास: पहले पद की पहली जोड़ी।
प्रभु की भक्ति भक्त के अंग-अंग में समाई है।
प्रभु जी तुम दीपक, हम बाती
रैदास: पहला पद।
प्रभु के साथ ही भक्त का जीवन आलोकित है।
जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ
रैदास: दूसरे पद का आरंभ।
भक्त की अटूट निष्ठा।
जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा
रैदास: दूसरा पद।
ईश्वर की सर्वव्यापकता।
रैदास – पद in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
अनन्य निष्ठा
मान लीजिए आप वर्षों से तबला सीख रहे हैं और नए-नए शौक़ आपको बार-बार अपनी ओर खींचते हैं।
'अब कैसे छूटै राम रट लागी' की भावना से आप क्या सीखेंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भक्त की लगन छूटती नहीं।
- एक साधना पर टिके रहना।
- नियमित अभ्यास।
Answer: जैसे रैदास की राम-नाम की लगन छूटती नहीं, वैसे ही मुझे भी तबले की साधना पर टिके रहना चाहिए। नियमित अभ्यास और एकनिष्ठ लगन से ही कला में निखार आएगा।
Memory hook: लगन लगी तो छूटे नहीं।
आडंबर से अधिक भावना
कल्पना कीजिए कि आपके मोहल्ले में त्योहार पर ऊँची आवाज़ के लाउडस्पीकर और भारी खर्च होता है, जबकि पास के बच्चों को किताबें नहीं मिलतीं।
रैदास के विचारों के आधार पर एक सुझाव दीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- रैदास: मन की भक्ति सच्ची।
- दिखावा घटाकर सेवा।
- किताबें बाँटना।
Answer: रैदास दिखावे की जगह मन की भक्ति को सच्चा मानते थे। हम लाउडस्पीकर और सजावट का खर्च घटाकर ज़रूरतमंद बच्चों को किताबें दे सकते हैं; यही सच्ची पूजा होगी।
Memory hook: दिखावा कम, सेवा ज़्यादा।
साथ से निखरना (सोना-सुहागा)
मान लीजिए किसी अच्छे शिक्षक के मार्गदर्शन से आपकी लिखावट और सोच दोनों सुधर गई हैं।
'जैसे सोने मिलत सुहागा' से इसे कैसे समझाएँगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सुहागा सोने को निखारता है।
- अच्छा साथ व्यक्ति को निखारता है।
Answer: जैसे सुहागा मिलने से सोना निखर जाता है, वैसे ही अच्छे शिक्षक के साथ मेरी कमियाँ दूर होकर योग्यता चमक उठी। अच्छा साथ जीवन में सोने-सुहागे जैसा होता है।
Memory hook: अच्छा साथ = सोने में सुहागा।
Topics in this chapter
How the school exam asks रैदास – पद
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | किसी पद की तीन-चार पंक्तियाँ देकर: किसी पंक्ति का भाव, भक्त-आराध्य का संबंध (एकाकार, आश्रय-आश्रित), दीपक-बाती का भाव, सर्वव्यापकता वाली पंक्ति, अलंकार, कथन-कारण। | पहले पंक्ति का सरल अर्थ सोचें, फिर भाव। पाठ के अभ्यास के उत्तर-विकल्प (जैसे 'आराध्य का नाम जपना') ध्यान से पढ़ें। |
| अर्थ और भाव स्पष्ट करना (2 अंक, 25-30 शब्द) | 'प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा' या 'तीरथ बरत न करूँ अंदेसा...' का भाव। | पहले सरल अर्थ, फिर भाव (भक्ति, समर्पण) एक वाक्य में। |
| अलंकार पहचान (आर-1 व्याकरण से जुड़ा) | अनुप्रास, उपमा, रूपक की पहचान और परिभाषा। | वर्ण-आवृत्ति = अनुप्रास; 'जैसे/सा/सम' = उपमा; उपमेय में उपमान का आरोप = रूपक। |
| विचारात्मक प्रश्न | रैदास ने तीर्थ-व्रत के स्थान पर किसे भक्ति का आधार माना; दोनों पदों के प्रतीक; रैदास और नामदेव के पदों की तुलना। | पद की पंक्ति उद्धृत करके अपने शब्दों में विचार लिखें। |
Tricks to remember रैदास – पद
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
छह जोड़ियाँ: चं-घ-दी-मो-स्वा
चंदन-पानी, घन-मोर (चंद-चकोर), दीपक-बाती, मोती-धागा (सोना-सुहागा), स्वामी-दास।
Use it when: पहले पद का क्रम याद रखने के लिए।
तीन अलंकार, तीन उदाहरण
अनुप्रास = चितवत चंद चकोरा; उपमा = सोने मिलत सुहागा; रूपक = चरन कमल।
Use it when: अलंकार वाले प्रश्नों में।
दूसरे पद का सार: तो-ती-ज-जो-म
तोरौ (नहीं तोड़ूँगा), तीरथ (नहीं चाहिए), जहँ-जहँ (सर्वव्यापक), जोरौ (मन जोड़ा), मन क्रम वचन (पूर्ण समर्पण)।
Use it when: दूसरे पद की पंक्तियाँ क्रम से याद रखने के लिए।
रैदास – पद: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: चंदन, घन और दीपक
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।
प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।
प्रभु जी तुम दीपक, हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती।
(1) · 1 mark · MCQ
'प्रभु जी तुम चंदन हम पानी' में भक्त और आराध्य का संबंध किस रूप में है?
(क) एकाकार और समरूप
(ख) तरल और तीव्र सुगंध
(ग) शत्रु और मित्र
(घ) द्रव और ठोस(2) · 1 mark · MCQ
'तुम दीपक, हम बाती' से रैदास का क्या भाव है?
(क) दीपक और बाती का कोई मेल नहीं
(ख) दीपक बिना बाती जल सकता है
(ग) भक्त आराध्य से अधिक महत्त्वपूर्ण है
(घ) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है(3) · 1 mark · MCQ
'चितवत चंद चकोरा' (पाठ में रेखांकित अंश) में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) अनुप्रास
(ग) यमक
(घ) श्लेष(4) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): मोर बादलों को देखकर प्रसन्न होता है।
कारण (R): भक्त प्रभु को देखकर उसी प्रकार आनंदित होता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।(5) · 1 mark · MCQ
'बास' शब्द का अर्थ है:
(क) बाँस
(ख) गंध (सुगंध)
(ग) बस
(घ) वास्ता
Show the answersAnswers
- (क) एकाकार और समरूप; चंदन की सुगंध पानी के अंग-अंग में समा जाती है।
- (घ) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।
- (ख) अनुप्रास; 'च' वर्ण की आवृत्ति। पाठ में यही अंश अनुप्रास के उदाहरण के रूप में रेखांकित है।
- (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है; R तो उपमेय (भक्त) की बात है, A का कारण नहीं।
- (ख) गंध (सुगंध)।
Extract 2: काव्यांश 2: अटूट निष्ठा
तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां।
जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा, तुम सा देव ओर नहिं दूजा।
मैं अपनो मन हरि से जोरौ, हरि सो जोरि सबन सो तोरों।
(1) · 1 mark · MCQ
'तीरथ बरत न करूँ अंदेसा' का आशय है:
(क) तीर्थ और व्रत आवश्यक हैं
(ख) भक्त को तीर्थ-व्रत की चिंता नहीं, प्रभु-चरण ही उसका आश्रय हैं
(ग) तीर्थ जाने से मुक्ति निश्चित है
(घ) व्रत से ही भक्ति होती है(2) · 1 mark · MCQ
सर्वव्यापक ईश्वर का भाव किस पंक्ति में है?
(क) 'जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा'
(ख) 'तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां'
(ग) 'मैं अपनो मन हरि से जोरौ'
(घ) 'तीरथ बरत न करूँ अंदेसा'(3) · 1 mark · MCQ
'चरन कमल' में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) उपमा
(ग) रूपक
(घ) यमक(4) · 1 mark · MCQ
'हरि सो जोरि सबन सो तोरों' का भाव है:
(क) भक्त सबसे लड़ता है
(ख) प्रभु से जुड़कर भक्त ने सांसारिक मोह त्याग दिया
(ग) भक्त हरि को छोड़ देता है
(घ) भक्त सबको जोड़ता है(5) · 1 mark · MCQ
'अंदेसा' का अर्थ है:
(क) संदेश
(ख) सोच, चिंता
(ग) अँधेरा
(घ) देश
Show the answersAnswers
- (ख) भक्त को तीर्थ-व्रत की चिंता नहीं, प्रभु-चरण ही उसका आश्रय हैं।
- (क) 'जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा'।
- (ग) रूपक।
- (ख) प्रभु से जुड़कर भक्त ने सांसारिक मोह त्याग दिया।
- (ख) सोच, चिंता।
रैदास – पद: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: घन-मोर और चंद-चकोर · 2 marks · Short answerExam level
'प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा' का भाव स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रभु बादल, भक्त मोर।
- चकोर चंद्रमा को एकटक देखता है।
- भक्त प्रभु को देखकर आनंदित, एकनिष्ठ।
Answer: जैसे वन के बादल देखकर मोर नाच उठता है और चकोर चंद्रमा को एकटक निहारता है, वैसे ही भक्त प्रभु को देखकर आनंदित होता है और उन्हीं में एकनिष्ठ रहता है।
Example 2: तीर्थ-व्रत के स्थान पर · 2 marks · Short answerExam level
रैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर किसे भक्ति का प्रमुख आधार माना है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- तीर्थ-व्रत की चिंता नहीं।
- प्रभु के चरण-कमलों पर भरोसा।
- मन, कर्म, वचन से समर्पण।
Answer: रैदास तीर्थ-व्रत की चिंता नहीं करते। वे प्रभु के चरण-कमलों पर पूर्ण भरोसे और मन, कर्म तथा वचन से समर्पण को ही भक्ति का सच्चा आधार मानते हैं।
Example 3: 'जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ' · 2 marks · Short answerHarder exam level
'जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ' पंक्ति से रैदास की निष्ठा के बारे में क्या पता चलता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रभु संबंध तोड़ें, तब भी भक्त नहीं तोड़ेगा।
- दूसरा कोई सहारा नहीं।
- अटूट, निःस्वार्थ निष्ठा।
Answer: भक्त कहता है कि प्रभु संबंध तोड़ भी दें, तो वह नहीं तोड़ेगा, क्योंकि उनसे तोड़कर वह किससे जोड़ेगा। यह उसकी अटूट, निःस्वार्थ और अनन्य निष्ठा दिखाता है।
Example 4: प्रतीकों का अर्थ · 2 marks · Short answerHarder exam level
पहले पद की जोड़ियों में भक्त ने स्वयं को ही पानी, बाती, धागा और दास क्यों कहा? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ये वस्तुएँ अकेले कम मूल्य की।
- प्रभु से जुड़कर सार्थक।
- विनम्रता और समर्पण।
Answer: पानी, बाती, धागा और दास अकेले साधारण हैं, पर चंदन, दीपक, मोती और स्वामी से जुड़कर सार्थक बनते हैं। इससे भक्त की विनम्रता और प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण प्रकट होता है।
Example 5: आज के जीवन में रैदास · 2 marks · Short answerHOTS / competency
आज भी लोग दिखावे के लिए धार्मिक आयोजनों पर बहुत खर्च करते हैं। रैदास के विचार इस पर क्या संदेश देते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- रैदास बाह्य आडंबर के विरोधी।
- सच्ची भक्ति मन की शुद्धता में।
- दिखावे से अधिक आचरण और प्रेम।
Answer: रैदास के अनुसार सच्ची भक्ति दिखावे या तीर्थ-व्रत में नहीं, मन की शुद्धता और प्रेम में है। इसलिए आयोजन का दिखावा कम करके अच्छे आचरण और सेवा पर ध्यान देना चाहिए।
Example 6: अटूट मित्रता पर · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपका मित्र किसी गलतफ़हमी से आपसे बात करना बंद कर देता है। 'जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ' की भावना से आप क्या करेंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- संबंध न तोड़ना।
- पहल करके बात करना।
- धैर्य और निष्ठा।
Answer: रैदास की तरह मैं भी संबंध नहीं तोड़ूँगा। मैं धैर्य से मित्र से बात करूँगा, गलतफ़हमी दूर करने की पहल करूँगा और अपनी मित्रता पर अटूट निष्ठा बनाए रखूँगा।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां' का भाव स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय-वस्तु: तीर्थ-व्रत की चिंता नहीं; केवल प्रभु-चरणों का भरोसा; आडंबर-विरोध और अनन्य भक्ति। | 1 |
| अभिव्यक्ति: शुद्ध, संक्षिप्त भाषा। | 1 |
संवाद लेखन (लगभग 80 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रारूप: पात्र, संवाद-क्रम। | 1 |
| विषय-वस्तु: पद की उपमाओं और भाव का प्रयोग। | 2 |
| प्रस्तुति और समापन। | 1 |
| भाषा की शुद्धता। | 1 |
Where students lose marks in रैदास – पद
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: प्रभु को पानी और भक्त को चंदन बताना
जोड़ी उलट देना।
Wrong working
भक्त चंदन है और प्रभु पानी।
Right working
प्रभु चंदन, भक्त पानी; प्रभु दीपक, भक्त बाती।
Do this: 'प्रभु जी तुम...' पहला शब्द प्रभु का है।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: रैदास को सगुण मूर्तिपूजक बताना
'राम' शब्द से भ्रम।
Wrong working
रैदास तीर्थ-यात्रा और मूर्ति-पूजा पर बल देते हैं।
Right working
रैदास निर्गुण संत हैं; वे तीर्थ-व्रत की चिंता छोड़कर मन की भक्ति पर बल देते हैं।
Do this: 'तीरथ बरत न करूँ अंदेसा' याद रखें।
Usually costs: विषय-वस्तु के अंक।
Mistake: अलंकार गलत पहचानना
उपमा और रूपक में भ्रम।
Wrong working
'चरन कमल' में उपमा।
Right working
'चरन कमल' में रूपक (वाचक शब्द नहीं, अभेद आरोप)।
Do this: 'जैसे/सा' हो तो उपमा, न हो और अभेद हो तो रूपक।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: केवल शब्दार्थ लिखकर भाव न लिखना
भाव-स्पष्टीकरण अधूरा।
Wrong working
प्रभु बादल हैं, भक्त मोर है।
Right working
...जैसे मोर बादल देखकर आनंदित होता है, वैसे भक्त प्रभु में एकनिष्ठ है।
Do this: अर्थ + भाव दोनों।
Usually costs: 1 अंक।
Practice questions on रैदास – पद
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
रैदास का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) प्रयाग
(ख) काशी (वाराणसी)
(ग) मथुरा
(घ) अयोध्याHint
कवि-परिचय।
Answer
(ख) काशी (वाराणसी)।
Q2 · 1 mark · MCQExam level
'अब कैसे छूटै राम रट लागी' पंक्ति का भाव है:
(क) नाम उच्चारण की कठिनाई
(ख) नाम रटकर याद करना
(ग) आराध्य का नाम जपना
(घ) मित्रों का नाम रटनाHint
पाठ के अभ्यास का प्रश्न।
Answer
(ग) आराध्य का नाम जपना।
Q3 · 2 marks · Short answerExam level
'जैसे सोने मिलत सुहागा' पंक्ति का अर्थ और अलंकार लिखिए। (25-30 शब्द)
Hint
सुहागा सोने की अशुद्धि दूर करता है।
Answer
मूल्य-बिंदु: सुहागा सोने की अशुद्धि दूर करके चमक बढ़ाता है; प्रभु-भक्त का मेल भी ऐसा ही शुभ और सुंदर; उपमा अलंकार ('जैसे')।
आदर्श उत्तर: जैसे सुहागा मिलने से सोने की अशुद्धि दूर होकर उसकी चमक बढ़ जाती है, वैसे ही प्रभु से मिलकर भक्त निखर उठता है। 'जैसे' के कारण यहाँ उपमा अलंकार है।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
दोनों पदों में भक्त और आराध्य के संबंध के लिए कौन-कौन से प्रतीक आए हैं? (25-30 शब्द)
Hint
पहले पद की जोड़ियाँ; दूसरे पद का चरण-कमल।
Answer
मूल्य-बिंदु: चंदन-पानी, घन-मोर, चंद-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा, सोना-सुहागा, स्वामी-दास; दूसरे पद में चरण-कमल और जोड़ना-तोड़ना।
आदर्श उत्तर: चंदन-पानी, घन-मोर, चंद-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा, सोना-सुहागा और स्वामी-दास; दूसरे पद में चरण-कमल और 'जोड़ना-तोड़ना' के प्रतीक से अटूट संबंध दिखाया गया है।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'मन क्रम वचन कहै रैदासा' का क्या आशय है? (25-30 शब्द)
Hint
तीनों से समर्पण।
Answer
मूल्य-बिंदु: मन, कर्म और वचन तीनों से; पूर्ण, सच्चा समर्पण; केवल कहने का नहीं, आचरण का भी।
आदर्श उत्तर: रैदास कहते हैं कि वे मन से, कर्म से और वचन से, तीनों प्रकार से प्रभु पर ही आशा रखते हैं। उनकी भक्ति केवल शब्दों में नहीं, सोच और आचरण में भी है।
Q6 · 1 mark · Very short answerHarder exam level
निम्नलिखित में अलंकार पहचानिए: (क) 'चरन कमल' (ख) 'चितवत चंद चकोरा' (ग) 'जैसे सोने मिलत सुहागा'
Hint
पाठ में तीनों की परिभाषा दी है।
Answer
(क) रूपक (ख) अनुप्रास (ग) उपमा
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
रैदास और कबीर दोनों निराकार आराध्य की भक्ति और आडंबर के विरोध पर बल देते हैं। इसके क्या कारण हो सकते हैं? (25-30 शब्द)
Hint
उस समय का समाज: भेदभाव, कर्मकांड।
Answer
मूल्य-बिंदु: उस समय समाज में जाति-भेद और कर्मकांड का बोलबाला; साधारण लोग मंदिर-तीर्थ से वंचित; मन की भक्ति सबके लिए सुलभ; समानता का संदेश।
आदर्श उत्तर: उस समय कर्मकांड और जाति-भेद के कारण साधारण लोग पूजा-स्थलों से वंचित थे। मन की निराकार भक्ति सबके लिए सुलभ थी, इसलिए संतों ने आडंबर छोड़कर समानता और प्रेम का संदेश दिया।
Q8 · 1 mark · Assertion-reasonHOTS / competency
कथन (A): रैदास तीर्थ-व्रत को भक्ति का एकमात्र मार्ग नहीं मानते।
कारण (R): वे मानते हैं कि प्रभु हर जगह हैं और उनके चरणों पर भरोसा ही पर्याप्त है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।Hint
'जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा'।
Answer
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
Q9 · 5 marks · Long answerHarder exam level
संवाद लेखन (लगभग 80 शब्द): पद की उपमाओं के आधार पर भक्त और आराध्य के बीच एक काल्पनिक संवाद लिखिए।
Hint
चंदन-पानी, दीपक-बाती जैसी जोड़ियाँ।
Answer
मूल्य-बिंदु (संवाद लेखन): दो पात्र (भक्त, आराध्य); क्रमबद्ध संवाद; पद की कम से कम तीन जोड़ियों का प्रयोग; भक्त की विनम्रता और निष्ठा, आराध्य का स्नेह; तीर्थ-व्रत से ऊपर प्रेम का संदेश; उपयुक्त समापन; लगभग 80 शब्द।
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1.रैदास का जन्म-स्थान?Show answer
काशी (वाराणसी)।
2.रैदास की रचनाएँ किस ग्रंथ में शामिल हैं?Show answer
श्री गुरु ग्रंथ साहिब में; संकलन 'रैदास बानी'।
3.प्रभु चंदन हैं तो भक्त क्या है?Show answer
पानी।
4.चकोर किसे निहारता है?Show answer
चंद्रमा को।
5.'घन' का अर्थ?Show answer
बादल।
6.भक्त किसकी चिंता नहीं करता?Show answer
तीर्थ और व्रत की।
7.'चरन कमल' में अलंकार?Show answer
रूपक।
8.पाठ के बाद किस संत कवि के पद दिए गए हैं?Show answer
नामदेव के।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप पहले पद की छह जोड़ियाँ क्रम से लिख सकते हैं?
- क्या आप दोनों पदों का केंद्रीय भाव दो-दो वाक्यों में बता सकते हैं?
- क्या आप अनुप्रास, उपमा और रूपक के उदाहरण पद से दे सकते हैं?
- क्या आप 'जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ' का आशय समझा सकते हैं?
- क्या आप सर्वव्यापकता वाली पंक्ति पहचान सकते हैं?
- क्या आप रैदास की भाषा की तीन विशेषताएँ लिख सकते हैं?
रैदास – पद: frequently asked questions
रैदास कौन थे?
रैदास (संत रविदास) भक्तिकाल के निर्गुण संत कवि थे, जिनका जन्म काशी में हुआ। उन्होंने बाह्य आडंबर का खंडन करके मन की शुद्धता और आंतरिक भक्ति को सच्चा धर्म माना। उनकी रचनाएँ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं।
'अब कैसे छूटै राम रट लागी' का क्या भाव है?
भक्त को राम-नाम की ऐसी लगन लग गई है कि अब वह छूट नहीं सकती। यह आराध्य का नाम जपने और अनन्य भक्ति का भाव है।
पहले पद में भक्त और आराध्य की कौन-सी जोड़ियाँ हैं?
चंदन-पानी, घन-मोर (और चंद-चकोर), दीपक-बाती, मोती-धागा (सोना-सुहागा) और स्वामी-दास।
रैदास ने तीर्थ-व्रत के स्थान पर भक्ति का आधार किसे माना?
प्रभु के चरण-कमलों पर पूर्ण भरोसे और मन, कर्म, वचन से समर्पण को।
सर्वव्यापक ईश्वर का भाव किस पंक्ति में है?
'जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा' में।
'जैसे सोने मिलत सुहागा' में कौन-सा अलंकार है?
उपमा अलंकार। सुहागा सोने की अशुद्धियाँ दूर करके उसकी चमक बढ़ाता है; वैसे ही भक्त और प्रभु का मेल सुंदर है।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं (आर-1 और आर-2) 2026-27; NCERT गंगा, कक्षा 9 (मार्च 2026), पाठ 8: पद