रीढ़ की हड्डी (गंगा, कक्षा 9): उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
जगदीशचंद्र माथुर की एकांकी में बी.ए. पास उमा को कम पढ़ी-लिखी बताकर देखे-परखे जाने का अपमान सहना पड़ता है। अंत में वह साहस से सच बोलती है, लड़की को वस्तु समझने वालों से सवाल पूछती है और शंकर की कायरता उजागर करती है। "रीढ़ की हड्डी" नैतिक दृढ़ता और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
Understand रीढ़ की हड्डी: उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ
रचना और पृष्ठभूमि। यह एकांकी उस सामाजिक पृष्ठभूमि में लिखी गई है, जब स्त्रियों को शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में समान अवसर नहीं मिलते थे। यह गंगा के गद्य खंड का छठा पाठ है। इसमें कम पढ़ी-लिखी लड़कियों की माँग और विवाह में लेन-देन जैसी कुरीतियों पर चोट है।
पात्र। रामस्वरूप (उमा के पिता), प्रेमा (माँ), उमा (बी.ए. पास बेटी), वकील गोपालप्रसाद, उनका बेटा शंकर (मेडिकल कॉलेज का छात्र) और घरेलू सहायक रतन।
दोहरापन। गोपालप्रसाद स्वयं वकील और पढ़े-लिखे हैं, पर उन्हें ज़्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए, अधिक से अधिक मैट्रिक। उनका तर्क है: "मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।" ऊँची तालीम, उनके अनुसार, केवल मर्दों के लिए है। रामस्वरूप उनकी चापलूसी में उमा की बी.ए. की पढ़ाई छिपाते हैं और चश्मे का बहाना बनाते हैं।
उमा की परख। उमा सादे कपड़ों में पान लेकर आती है। गोपालप्रसाद उसकी चाल, चेहरा, गाना-बजाना, पेंटिंग और सिलाई की परख करते हैं। मीरा का गीत गाते-गाते वह शंकर की झेंपती आँखें देखकर रुक जाती है।
उमा का विद्रोह। "मुँह खोलने" पर ज़ोर दिए जाने पर वह कहती है कि कुर्सी-मेज़ बिकते समय दुकानदार उनसे कुछ नहीं पूछता। वह प्रश्न करती है: "क्या लड़कियों के दिल नहीं होता? क्या उनके चोट नहीं लगती?" वह बताती है कि शंकर पिछली फ़रवरी में लड़कियों के होस्टल के आसपास घूमता था और वहाँ से भगाया गया था। उसने बी.ए. पास किया है, कोई पाप नहीं किया। गोपालप्रसाद धोखे का आरोप लगाकर चल देते हैं।
प्रतीकार्थ। उमा कहती है कि घर जाकर पता लगाइए कि आपके बेटे के रीढ़ की हड्डी (बैकबोन) है या नहीं। यह शारीरिक अंग नहीं, नैतिक साहस और स्वतंत्र सोच का प्रतीक है। शंकर सीधा बैठने की सलाह भी पिता से लेता है, यही उसकी रीढ़-हीनता है।
अंत। बाप-बेटे चले जाते हैं, उमा सिसकने लगती है और तभी रतन आकर कहता है: "बाबूजी, मक्खन!" यह अंत हास्य और करुणा का मेल है।
केंद्रीय भाव। स्त्री-शिक्षा, आत्मसम्मान और नैतिक दृढ़ता के बिना समाज की रूढ़ियाँ नहीं टूटतीं।
रीढ़ की हड्डी: उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ: key facts
- मुख्य पात्र
- उमा
- रामस्वरूप
- प्रेमा
- गोपालप्रसाद
- शंकर
- रतन
- पात्र-परिचय।
- उमा के गुण
- शिक्षित
- साहसी
- आत्मसम्मानी
- स्पष्टवक्ता
- प्रमाण: अंतिम विद्रोह।
- रीढ़ की हड्डी
- नैतिक दृढ़ता
- साहस
- स्वतंत्र सोच
- शंकर में अभाव।
- सामाजिक बुराइयाँ
- कम पढ़ी बहू की माँग
- लड़की को वस्तु समझना
- दोहरा आचरण
- एकांकी की चोट।
How to answer रीढ़ की हड्डी: उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ questions
एकांकी के पात्र या प्रतीक पर प्रश्न का उत्तर इस क्रम से लिखें।
- 1पात्र या प्रसंग का नाम बताइए।
- 2संवाद या घटना उद्धृत कीजिए।
- 3गुण या दोष बताइए।
- 4प्रतीकार्थ लिखिए।
- 5अंत में सामाजिक संदेश दीजिए।
रीढ़ की हड्डी: उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
वस्तु की तरह परखना
मान लीजिए किसी साक्षात्कार में चयनकर्ता योग्य महिला प्रत्याशी की योग्यता नहीं पूछते, केवल उसकी चाल-ढाल और रूप पर टिप्पणी करते हैं।
यह एकांकी के किस प्रसंग जैसा है? (2-3 पंक्तियाँ)
Try it first, then show the solutionSolution
- योग्यता की उपेक्षा।
- रूप और चाल की परख।
Answer: यह उस प्रसंग जैसा है जिसमें गोपालप्रसाद उमा की चाल, चेहरा और गुणों की परख करते हैं, पर उसकी शिक्षा और भावना को नहीं देखते।
Memory hook: लड़की वस्तु नहीं, व्यक्ति है।
Tricks to remember रीढ़ की हड्डी: उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
उ-र-गो-शं
उमा, रामस्वरूप, गोपालप्रसाद, शंकर।
Use it when: मुख्य पात्र।
मोर-मोरनी
मोर के पंख, मोरनी के नहीं: दोहरा तर्क।
Use it when: गोपालप्रसाद का तर्क।
मक्खन!
अंतिम संवाद रतन का।
Use it when: अंत का स्मरण।
रीढ़ की हड्डी: उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: लेखक · 1 mark · MCQBoard level
"रीढ़ की हड्डी" एकांकी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद (ख) जगदीशचंद्र माथुर (ग) मोहन राकेश (घ) शेखर जोशी
Try it first, then show the solutionSolution
- नाटककार का नाम।
Answer: (ख) जगदीशचंद्र माथुर।
Example 2: रामस्वरूप का आचरण · 2 marks · Short answerBoard level
रामस्वरूप उमा की पढ़ाई क्यों छिपाते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- गोपालप्रसाद की शर्त।
- रिश्ता न टूटे।
Answer: गोपालप्रसाद को ज़्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए। रिश्ता न टूट जाए, इसलिए रामस्वरूप उमा की बी.ए. की पढ़ाई छिपाते हैं और चश्मे का बहाना बनाते हैं।
Example 3: गोपालप्रसाद का तर्क · 2 marks · Short answerHarder board level
"मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं" कथन से गोपालप्रसाद की कौन-सी सोच प्रकट होती है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ऊँची शिक्षा केवल मर्दों के लिए।
- दोहरी सोच।
Answer: इस कथन से प्रकट होता है कि गोपालप्रसाद ऊँची शिक्षा को केवल मर्दों के लिए मानते हैं। उनकी सोच रूढ़िवादी और स्त्री-विरोधी है, जबकि वे स्वयं पढ़े-लिखे हैं।
Example 4: उमा का प्रश्न · 2 marks · Short answerHarder board level
उमा के "क्या लड़कियों के दिल नहीं होता?" प्रश्न का क्या महत्त्व है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- वस्तु नहीं, व्यक्ति।
- भावनाओं की माँग।
Answer: यह प्रश्न बताता है कि लड़कियाँ केवल परखी जाने वाली वस्तुएँ नहीं, भावनाओं वाली व्यक्ति हैं। उमा अपमान का विरोध करके स्त्री के आत्मसम्मान को स्वर देती है।
Example 5: प्रतीकार्थ · 4 marks · Long answerHOTS / competency
"रीढ़ की हड्डी" शीर्षक की सार्थकता पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शीर्षक का अर्थ (1)।
- शंकर का आचरण (1)।
- उमा का साहस (1)।
- भाषा (1)।
Answer: शीर्षक में रीढ़ की हड्डी नैतिक दृढ़ता और साहस का प्रतीक है। शंकर पिता के निर्देश पर चलता है और स्वयं निर्णय नहीं लेता, जबकि उमा अपमान सहने के स्थान पर सच बोलती है। जब उमा पूछती है कि आपके बेटे के रीढ़ है या नहीं, तब शीर्षक पूरी तरह सार्थक हो जाता है।
Where students lose marks in रीढ़ की हड्डी: उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पात्र-संबंध गड़बड़ाना
रामस्वरूप उमा के पिता हैं।
Wrong working
गोपालप्रसाद उमा के पिता हैं।
Right working
रामस्वरूप उमा के पिता और गोपालप्रसाद वर पक्ष के पिता हैं।
Do this: पात्र-परिचय याद करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: प्रतीकार्थ न लिखना
शीर्षक पर प्रतीकार्थ अपेक्षित है।
Wrong working
रीढ़ की हड्डी = शरीर का भाग।
Right working
रीढ़ की हड्डी = नैतिक दृढ़ता का प्रतीक।
Do this: अर्थ के साथ प्रतीक लिखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: संवाद गलत पात्र को देना
अंतिम संवाद रतन का है।
Wrong working
अंतिम संवाद उमा का।
Right working
अंतिम संवाद रतन का: बाबूजी, मक्खन!
Do this: संवाद-वक्ता का मिलान करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: उमा की शिक्षा गलत लिखना
उमा बी.ए. पास है, इसी कारण गोपालप्रसाद की शर्त से टकराव होता है।
Wrong working
उमा मैट्रिक पास है।
Right working
उमा बी.ए. पास है।
Do this: पात्र की योग्यता याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- सभी पात्रों के नाम और संबंध सही लिखिए।
- गोपालप्रसाद का "मोर-मोरनी" तर्क उद्धृत कीजिए।
- "रीढ़ की हड्डी" का प्रतीकार्थ अवश्य लिखिए।
- उमा के साहस को संवाद से सिद्ध कीजिए।
- अंत में स्त्री-सम्मान का संदेश दीजिए।
Practice questions on रीढ़ की हड्डी: उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
उमा की शैक्षिक योग्यता क्या है?
(क) मैट्रिक (ख) इंटरमीडिएट (ग) बी.ए. (घ) एम.ए.Hint
पात्र-परिचय देखिए।
Answer
(ग) बी.ए.
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
शंकर की कायरता का क्या प्रमाण उमा देती है? (25-30 शब्द)
Hint
होस्टल का प्रसंग।
Answer
उमा बताती है कि शंकर पिछली फ़रवरी में लड़कियों के होस्टल के आसपास घूमता था और वहाँ से भगाया गया। इससे उसके चरित्र की कमज़ोरी और कायरता उजागर होती है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
उमा ने गोपालप्रसाद को कुर्सी-मेज़ का उदाहरण क्यों दिया? (25-30 शब्द)
Hint
दुकानदार कुछ नहीं पूछता।
Answer
उमा कहती है कि कुर्सी-मेज़ बिकते समय दुकानदार उनसे कुछ नहीं पूछता। इस उदाहरण से वह बताती है कि लड़की को परखा जाना उसे वस्तु मानने जैसा अपमान है।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
एकांकी का अंतिम संवाद "बाबूजी, मक्खन!" किस प्रकार का प्रभाव छोड़ता है? (25-30 शब्द)
Hint
करुणा और हास्य।
Answer
उमा के सिसकने के क्षण में रतन का "बाबूजी, मक्खन!" कहना हास्य उत्पन्न करता है। साथ ही यह रोज़मर्रा की उदासीनता दिखाकर करुणा को और गहरा कर देता है।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
आज के संदर्भ में "रीढ़ की हड्डी" एकांकी की प्रासंगिकता पर अपना मत लिखिए। (50-60 शब्द)
Hint
आज की स्थिति से जोड़िए।
Answer
आज लड़कियाँ अधिक पढ़-लिख रही हैं, फिर भी विवाह के समय उनकी शिक्षा से अधिक रूप और घर के कामों की परख की जाती है। एकांकी हमें सिखाती है कि हर व्यक्ति को समान सम्मान मिलना चाहिए। उमा का साहस आज की युवतियों को अपमान का विरोध करने और अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.एकांकी के लेखक कौन हैं?Show answer
जगदीशचंद्र माथुर।
2.शंकर के पिता कौन हैं?Show answer
वकील गोपालप्रसाद।
3.उमा की शिक्षा क्या है?Show answer
बी.ए. पास।
4.शंकर क्या पढ़ रहा है?Show answer
मेडिकल कॉलेज में।
5.अंतिम संवाद किसका है?Show answer
रतन का।
6.यह गंगा का कौन-सा पाठ है?Show answer
छठा पाठ।
रीढ़ की हड्डी: उमा का विरोध और रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ: frequently asked questions
एकांकी का मुख्य संदेश क्या है?
स्त्री-शिक्षा, आत्मसम्मान और नैतिक दृढ़ता का महत्त्व।
रीढ़ की हड्डी का क्या अर्थ है?
नैतिक साहस और अपने निर्णय पर टिके रहने की शक्ति।
उमा किसका प्रतिनिधित्व करती है?
पढ़ी-लिखी, सशक्त स्त्री का।
परीक्षा में कैसे प्रश्न आते हैं?
पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले उत्तर।