सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे! Class 9
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'भारति, जय, विजयकरे!' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की देशप्रेम से भरी कविता है, जो कक्षा 9 की गंगा का दसवाँ पाठ है। कवि भारत को देवी के रूप में देखता है: सागर उसके चरण धोता है, वन-लताएँ उसके वस्त्र हैं, गंगा गले का हार है और हिमालय मुकुट। कवि भारत की विजय की कामना करता है।
What सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे! is about
'भारति, जय, विजयकरे!' छायावाद के प्रमुख कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की छोटी, गेय और प्रेरक कविता है, जो एनसीईआरटी की पुस्तक गंगा (कक्षा 9) के काव्य खंड का तीसरा पाठ है। पाठ-परिचय के अनुसार कविता देशप्रेम से ओत-प्रोत है। आरंभ में कवि 'भारति, जय, विजयकरे!' कहकर भारत को विजयश्री प्राप्त करने की कामना करता है और उसे 'कनक-शस्य-कमलधरे!' कहकर संबोधित करता है, जो भारत की कृषि-परंपरा और श्रम के सौंदर्य को दर्शाता है। कविता में भारत की भौगोलिक सुंदरता का ऐसा चित्र है मानो भारत कोई देवी हो, जिसके चरणों को समुद्र अपने जल से धोता है; नदी, वन, पुष्प, हिमालय और गंगा उसके वस्त्र और आभूषण हैं। कवि भारत को एक चेतन सत्ता के रूप में देखता है, जिसकी दिशाओं में 'ओंकार' की गूँज है।
भाषा संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त है। निराला ने छायावादी कवियों में सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया, पर यह कविता लयबद्ध गीत है। कक्षा 9 की परीक्षा विद्यालय लेता है; खंड ग का विभाजन CBSE ने नहीं दिया, इसलिए यहाँ कक्षा 10 हिंदी जैसे प्रश्न हैं: काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।
Weightage: कक्षा 9 की वार्षिक परीक्षा (80 अंक) विद्यालय लेता है। खंड ग (पाठ्यपुस्तक गंगा) के 30 अंक हैं, पर CBSE ने इस खंड के प्रश्नों का विभाजन नहीं दिया है। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं 2026-27
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे!: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
आरंभ: विजय की कामना। कवि भारत-माता (भारति) को संबोधित करता है: हे भारत, तुम्हारी जय हो, तुम विजय करने वाली हो। तुम सोने जैसी फ़सलें (कनक-शस्य) और कमल धारण करने वाली हो। यह भारत की धन-धान्य संपन्नता और प्राकृतिक सौंदर्य का संकेत है।
चरणों में सागर। लंका भारत के चरणों के नीचे सौ पंखुड़ियों वाले कमल (शतदल) के समान है। गरजती लहरों वाला सागर-जल भारत के दोनों पवित्र चरणों को धोता है। सागर मानो भक्त की तरह भारत-माता की अनेक अर्थों से भरी स्तुति (स्तव) कर रहा है ('स्तव कर बहु-अर्थ-भरे!')।
वस्त्र, आँचल और हार। पेड़, घास, वन और लताएँ भारत-माता के वस्त्र हैं; उनके आँचल में फूल जड़े हुए हैं। गंगा के ज्योतिर्मय जल-कणों वाली उजली धारा उनके गले का हार है।
मुकुट और ओंकार। हिम से ढका, चमकता हिमालय उनका श्वेत मुकुट है। उनके प्राण 'प्रणव' यानी ओंकार हैं। उदार दिशाएँ ध्वनित हैं: सैकड़ों मुखों से, सैकड़ों स्वरों में भारत गूँज रहा है (शतमुख-शतरव-मुखरे), अर्थात् अनेक भाषाओं, विचारों और परंपराओं वाला देश। कविता इसी पंक्ति 'शतमुख-शतरव-मुखरे!' पर समाप्त होती है।
केंद्रीय भाव: भारत प्राकृतिक सौंदर्य, कृषि-संपन्नता, आध्यात्मिक चेतना और विविधता से भरा देश है। कवि उसे देवी के रूप में पूजते हुए उसकी विजय की कामना करता है। पाठ के अभ्यास के अनुसार स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत ज्ञान, कृषि और संस्कृति का प्रतीक है।
Themes and message
देशप्रेम और राष्ट्र-वंदना
कविता भारत-माता की वंदना है। पहली ही पंक्ति 'भारति, जय, विजयकरे!' में संबोधन के साथ भारत की जय और विजय की कामना है, जो पूरी कविता का स्वर तय करती है।
From the text: 'भारति, जय, विजयकरे!'
प्राकृतिक सौंदर्य
सागर, लंका, वन, लताएँ, फूल, गंगा और हिमालय, सब भारत-माता के रूप-सज्जा के अंग बनकर आते हैं। भारत का भौगोलिक सौंदर्य देवी के शृंगार में बदल जाता है।
From the text: 'तरु-तृण-वन-लता वसन' और 'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार'
कृषि-संपन्नता और श्रम
'कनक-शस्य' (सोने-सी फ़सलें) भारत की धन-धान्य संपन्नता और किसानों के श्रम के सौंदर्य को दर्शाता है।
From the text: 'कनक-शस्य-कमलधरे!'
आध्यात्मिक चेतना
भारत के प्राण 'प्रणव ओंकार' हैं; दिशाओं में ओंकार की गूँज है। कवि भारत को एक चेतन, आध्यात्मिक सत्ता मानता है।
From the text: 'प्राण प्रणव ओंकार'
विविधता में एकता
'शतमुख-शतरव-मुखरे' यानी सैकड़ों मुखों और स्वरों से मुखरित भारत, अनेक भाषाओं, पर्वों और विचारों का देश, जो फिर भी एक है।
From the text: 'शतमुख-शतरव-मुखरे!'
The speaker and the people in the poem
कवि (वक्ता)
भारत-माता का उपासक, जो उसकी जय-विजय की कामना करता है।
- देशभक्त और श्रद्धालु
- प्रकृति-प्रेमी
- कल्पनाशील: भूगोल को देवी के शृंगार में बदल देता है
'भारति, जय, विजयकरे!'
भारत-माता (भारति, मानवीकृत)
कविता की आराध्य देवी।
- संपन्न: कनक-शस्य धारण करने वाली
- सुंदर: वन-लता के वस्त्र, फूलों का आँचल, गंगा का हार, हिमालय का मुकुट
- आध्यात्मिक: प्राण में ओंकार
- विविध: शत-शत स्वरों से मुखरित
'गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले।'
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| मानवीकरण | भारत को देवी के रूप में, सागर का चरण धोना | देश को माँ/देवी बनाकर श्रद्धा और भावात्मक जुड़ाव पैदा करता है। |
| रूपक | 'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार' (हिमालय रूपी मुकुट); 'धवल धार हार गले' (गंगा रूपी हार) | प्राकृतिक तत्त्वों पर आभूषणों का आरोप; भव्य चित्र। |
| अनुप्रास | 'पदतल शतदल'; 'शतमुख-शतरव-मुखरे'; 'धवल धार' | ध्वनि-माधुर्य और गेयता। |
| समस्त पद (समास) और संस्कृतनिष्ठ भाषा | 'कनक-शस्य-कमलधरे', 'गर्जितोर्मि', 'ज्योतिर्जल-कण' | भाषा में गंभीरता, संक्षिप्तता और उदात्तता। |
| चित्रात्मकता | 'गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल' | पाठक के मन में भारत का भव्य दृश्य बनता है। |
| संबोधन-शैली और गेयता | 'भारति, जय, विजयकरे! / कनक-शस्य-कमलधरे!' (संबोधन; 'करे-धरे-भरे-मुखरे' की तुक) | गीत जैसी लय और विजय-कामना पर बल। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
भारति, जय, विजयकरे!
कवि: कविता की पहली पंक्ति (संबोधन)।
भारत की जय और विजय की कामना।
कनक-शस्य-कमलधरे!
कवि: दूसरी पंक्ति।
धन-धान्य संपन्नता और सौंदर्य।
धोता शुचि चरण युगल
कवि: सागर का वर्णन।
सागर भारत-माता के चरण धोता है: मानवीकरण।
मुकुट शुभ्र हिम-तुषार
कवि: हिमालय का वर्णन।
हिमालय भारत का मुकुट: गौरव और ऊँचाई।
शतमुख-शतरव-मुखरे!
कवि: कविता की अंतिम पंक्ति।
विविधता से मुखरित भारत।
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे! in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
प्रकृति-संरक्षण ही देशप्रेम
मान लीजिए आपके शहर की नदी के घाट पर पूजा-सामग्री और प्लास्टिक का ढेर लगा है।
'धवल धार हार गले' के चित्र को ध्यान में रखकर आप क्या करेंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- नदी भारत-माता का हार।
- प्रदूषण = माँ का अपमान।
- सफ़ाई अभियान, जागरूकता।
Answer: कविता में गंगा भारत-माता का उजला हार है। मैं मित्रों के साथ घाट की सफ़ाई करूँगा, पूजा-सामग्री के लिए अलग कलश रखवाऊँगा और लोगों को नदी में प्लास्टिक न डालने के लिए जागरूक करूँगा।
Memory hook: माँ का हार उजला रखो।
विविधता का सम्मान
कल्पना कीजिए कि आपकी कक्षा में अलग-अलग राज्यों से आए बच्चे हैं और कुछ बच्चे किसी की भाषा का मज़ाक उड़ाते हैं।
'शतमुख-शतरव-मुखरे' के आधार पर आप उन्हें क्या समझाएँगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भारत सैकड़ों स्वरों से मुखरित।
- हर भाषा भारत की आवाज़।
- सम्मान और सीखना।
Answer: निराला कहते हैं कि भारत सैकड़ों मुखों और स्वरों से मुखरित है। हर भाषा भारत की ही आवाज़ है; मज़ाक उड़ाने के बजाय हमें एक-दूसरे की भाषा के कुछ शब्द सीखने चाहिए।
Memory hook: सौ स्वर, एक भारत।
किसान और श्रम का सम्मान
मान लीजिए आप गाँव जाते हैं और लहलहाते सुनहरे गेहूँ के खेत देखते हैं।
'कनक-शस्य' शब्द से इस दृश्य को जोड़कर किसानों के प्रति अपनी भावना लिखिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कनक-शस्य = सोने-सी फ़सल।
- यह किसानों के श्रम से।
- सम्मान और अन्न की बचत।
Answer: सुनहरे खेत 'कनक-शस्य' का सजीव रूप हैं। यह सोना किसानों के कठिन श्रम से उगता है, इसलिए मैं उनका सम्मान करूँगा और भोजन कभी व्यर्थ नहीं करूँगा।
Memory hook: खेत का सोना, किसान का पसीना।
Topics in this chapter
How the school exam asks सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे!
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | कविता की पंक्तियाँ देकर: कविता में किसकी प्रशंसा, 'कनक-शस्य-कमलधरे' का भावार्थ (धन-धान्य संपन्नता), भारत के महत्त्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ, भाषा-शैली (संस्कृतनिष्ठ, समासयुक्त), वस्त्र-धारा के चित्रण से कौन-सी चेतना (राष्ट्रीयता और देशप्रेम)। | कठिन शब्दों के अर्थ पहले याद रखें; फिर भाव। |
| भाव स्पष्ट करना (2 अंक, 25-30 शब्द) | 'लंका पदतल शतदल...' या 'प्राण प्रणव ओंकार...' का भाव; हिमालय को मुकुट क्यों कहा; कविता में कवि की भावना। | शब्दार्थ से भावार्थ; मानवीकरण का उल्लेख। |
| काव्य-सौंदर्य | प्रकृति का मानवीकरण, आलंकारिक प्रयोग, समस्त पद, संस्कृतनिष्ठ भाषा वाली पंक्तियाँ ढूँढ़ना। | प्रत्येक विशेषता के लिए एक पंक्ति याद रखें। |
| विचारात्मक प्रश्न | प्रकृति-संरक्षण भी देशप्रेम है?; प्रदूषण से गंगा-हिमालय पर प्रभाव; आज के भारत को नए रूप में प्रस्तुत करना। | कविता के चित्र से आज की स्थिति जोड़ें, फिर सुझाव दें। |
Tricks to remember सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे!
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
भारत-माता का शृंगार
चरण = लंका और सागर; वस्त्र = वन-लता; आँचल = फूल; हार = गंगा; मुकुट = हिमालय; प्राण = ओंकार।
Use it when: कविता का क्रम और रूपक याद रखने के लिए।
कठिन शब्द
कनक = सोना; शस्य = फ़सल; शतदल = कमल; ऊर्मि = लहर; शुचि = पवित्र; तुषार = पाला/बर्फ़; प्रणव = ओंकार; रव = ध्वनि।
Use it when: शब्दार्थ और MCQ के लिए।
नीचे से ऊपर
कविता नीचे (लंका, सागर, चरण) से ऊपर (हार, मुकुट, प्राण) की ओर बढ़ती है।
Use it when: पंक्तियों का क्रम याद रखने के लिए।
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे!: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: चरणों में सागर
भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलधरे!
लंका पदतल शतदल,
गर्जितोर्मि सागर-जल
धोता शुचि चरण युगल
(1) · 1 mark · MCQ
'कनक-शस्य-कमलधरे' पंक्ति का भावार्थ है:
(क) भारत की धन-धान्य संपन्नता
(ख) भारत की नदियों का सौंदर्य
(ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता
(घ) भारत की सैन्य शक्ति(2) · 1 mark · MCQ
'लंका पदतल शतदल' में लंका को क्या कहा गया है?
(क) भारत का मुकुट
(ख) भारत-माता के चरणों में सौ पंखुड़ियों वाला कमल
(ग) भारत का हार
(घ) भारत का शत्रु(3) · 1 mark · MCQ
'गर्जितोर्मि' का अर्थ है:
(क) गरजती लहरें
(ख) शांत जल
(ग) ठंडी हवा
(घ) गर्म रेत(4) · 1 mark · MCQ
'सागर-जल धोता शुचि चरण युगल' में कौन-सा अलंकार है?
(क) यमक
(ख) मानवीकरण
(ग) श्लेष
(घ) उपमा(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): काव्यांश में सागर को भक्त-सा चित्रित किया गया है।
कारण (R): सागर-जल भारत-माता के पवित्र चरण-युगल धोता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।
Show the answersAnswers
- (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता।
- (ख) भारत-माता के चरणों में सौ पंखुड़ियों वाला कमल।
- (क) गरजती लहरें (गर्जित + ऊर्मि)।
- (ख) मानवीकरण; सागर को चरण धोने वाला भक्त बताया गया है।
- (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
Extract 2: काव्यांश 2: मुकुट और ओंकार
मुकुट शुभ्र हिम-तुषार,
प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!
(1) · 1 mark · MCQ
भारत-माता का मुकुट किसे कहा गया है?
(क) गंगा को
(ख) हिमालय को
(ग) सागर को
(घ) लंका को(2) · 1 mark · MCQ
'प्राण प्रणव ओंकार' से कौन-सा भाव प्रकट होता है?
(क) भारत की सैन्य शक्ति
(ख) भारत की आध्यात्मिक चेतना
(ग) भारत की खनिज संपदा
(घ) भारत का व्यापार(3) · 1 mark · MCQ
'शतमुख-शतरव-मुखरे' किस ओर संकेत करता है?
(क) भारत की विविधता (भाषाएँ, स्वर, परंपराएँ)
(ख) भारत का शोर
(ग) सौ नदियाँ
(घ) सौ राजा(4) · 1 mark · MCQ
समस्त विश्व में भारत के महत्त्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं:
(क) गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले
(ख) गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल
(ग) भारति, जय, विजयकरे / कनक-शस्य-कमलधरे
(घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे(5) · 1 mark · MCQ
काव्यांश की भाषा है:
(क) सरल बोल-चाल की
(ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त
(ग) हास्य-व्यंग्यपूर्ण
(घ) संवादात्मक
Show the answersAnswers
- (ख) हिमालय को (हिम से ढका शुभ्र पर्वत)।
- (ख) भारत की आध्यात्मिक चेतना।
- (क) भारत की विविधता (भाषाएँ, स्वर, परंपराएँ)।
- (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे।
- (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त।
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे!: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: लंका और सागर · 2 marks · Short answerExam level
'लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल धोता शुचि चरण युगल' का भाव स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लंका चरणों के नीचे कमल-सी।
- गरजता सागर चरण धोता है।
- भारत देवी, सागर भक्त।
Answer: लंका भारत-माता के चरणों के नीचे सौ पंखुड़ियों वाले कमल-सी है और गरजती लहरों वाला सागर उनके पवित्र चरण धोता है। कवि भारत को देवी और सागर को भक्त-सा दिखाता है।
Example 2: हिमालय: भारत का मुकुट · 2 marks · Short answerExam level
'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार' पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट क्यों कहा गया है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- हिमालय उत्तर में, सबसे ऊपर।
- बर्फ़ से श्वेत, चमकदार।
- मुकुट = गौरव; रूपक।
Answer: हिमालय भारत के उत्तर में सबसे ऊपर स्थित है और बर्फ़ से श्वेत-चमकीला है। जैसे मुकुट सिर पर गौरव बढ़ाता है, वैसे ही हिमालय भारत का गौरव है; यहाँ रूपक अलंकार है।
Example 3: प्राण प्रणव ओंकार · 2 marks · Short answerHarder exam level
'प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार' का भाव स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भारत के प्राण ओंकार।
- दिशाओं में उसकी गूँज।
- भारत आध्यात्मिक, चेतन सत्ता।
Answer: कवि कहता है कि भारत के प्राण 'ओंकार' (प्रणव) हैं और उदार दिशाएँ उसी ध्वनि से गूँज रही हैं। भारत केवल भू-भाग नहीं, आध्यात्मिक चेतना से भरी जीवित सत्ता है।
Example 4: प्रकृति-संरक्षण भी देशप्रेम · 2 marks · Short answerHarder exam level
क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण भी देशप्रेम है? कविता के आधार पर उत्तर दीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता में वन, गंगा, हिमालय भारत-माता के शृंगार।
- प्रकृति नष्ट = माँ का शृंगार नष्ट।
- संरक्षण = सच्चा देशप्रेम।
Answer: हाँ। कविता में वन-लताएँ, गंगा और हिमालय भारत-माता के वस्त्र, हार और मुकुट हैं। इन्हें प्रदूषित करना माँ का शृंगार छीनना है, इसलिए प्रकृति-संरक्षण सच्चा देशप्रेम है।
Example 5: आज की गंगा और हिमालय · 2 marks · Short answerHOTS / competency
कविता में गंगा 'धवल धार' और हिमालय 'शुभ्र' मुकुट है। आज के प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने इन्हें कैसे प्रभावित किया है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- गंगा में कचरा, रसायन: धारा मैली।
- हिमनद पिघल रहे।
- कविता का चित्र बचाने की ज़िम्मेदारी।
Answer: आज कचरे और रसायनों से गंगा की 'धवल धार' मैली हो रही है और बढ़ती गर्मी से हिमालय के हिमनद पिघल रहे हैं। कविता का यह सुंदर चित्र बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है।
Example 6: आज के भारत का चित्र · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपको आज के भारत पर इसी शैली में दो पंक्तियाँ जोड़नी हैं। आप भारत की कौन-सी नई विशेषताएँ जोड़ेंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- विज्ञान, अंतरिक्ष, तकनीक।
- संस्कृतनिष्ठ शैली में।
- विविधता और प्रगति।
Answer: मैं अंतरिक्ष और विज्ञान की प्रगति जोड़ूँगा: 'चंद्र-चरण गगन-यान, ज्ञान-दीप विश्व-मान।' इससे भारत ज्ञान, विज्ञान और परंपरा का संगम दिखेगा, जैसे निराला ने प्रकृति और अध्यात्म दिखाए।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार' का भाव और अलंकार लिखिए। (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय-वस्तु: हिमालय बर्फ़ से शुभ्र, भारत के सिर पर मुकुट; गौरव का प्रतीक; रूपक अलंकार। | 1 |
| अभिव्यक्ति: शुद्ध, संक्षिप्त भाषा। | 1 |
अनुच्छेद लेखन (लगभग 120 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय-वस्तु: विषय से जुड़े विचार, कविता का संदर्भ, सुझाव। | 2 |
| प्रस्तुति: आरंभ, क्रम, निष्कर्ष। | 2 |
| भाषा की शुद्धता और शब्द-सीमा। | 1 |
Where students lose marks in सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे!
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: गंगा को मुकुट और हिमालय को हार बताना
रूपक उलटना।
Wrong working
गंगा भारत का मुकुट है।
Right working
गंगा गले का हार, हिमालय मुकुट।
Do this: ऊपर = मुकुट (हिमालय), गला = हार (गंगा)।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: लंका को भारत का शत्रु बताना
रामायण की याद से भ्रम।
Wrong working
लंका भारत की शत्रु है।
Right working
लंका भारत-माता के चरणों के नीचे शतदल (कमल) के समान है।
Do this: 'लंका पदतल शतदल' का अर्थ याद रखें।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: भाषा को सरल बोलचाल की बताना
शैली पर ध्यान न देना।
Wrong working
कविता की भाषा सरल बोलचाल की है।
Right working
संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त।
Do this: 'गर्जितोर्मि', 'ज्योतिर्जल-कण' जैसे शब्द देखें।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: भाव लिखते समय केवल शब्दार्थ देना
अधूरा उत्तर।
Wrong working
हिमालय बर्फ़ का मुकुट है।
Right working
...और वह भारत के गौरव और ऊँचाई का प्रतीक है।
Do this: अर्थ के बाद प्रतीक/भाव जोड़ें।
Usually costs: 1 अंक।
Practice questions on सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे!
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
निराला का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) प्रयागराज
(ख) बंगाल के महिषादल
(ग) वाराणसी
(घ) उन्नावHint
कवि-परिचय।
Answer
(ख) बंगाल के महिषादल।
Q2 · 1 mark · MCQExam level
कविता 'भारति, जय, विजयकरे' में विशेष रूप से:
(क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति है
(ख) सांस्कृतिक विविधता बताई गई है
(ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा है
(घ) खनिज पदार्थों का वर्णन हैHint
पूरी कविता का भाव।
Answer
(ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा है।
Q3 · 2 marks · Short answerExam level
भारत-माता के वस्त्रों और आँचल का वर्णन कीजिए। (25-30 शब्द)
Hint
'तरु-तृण-वन-लता वसन'।
Answer
मूल्य-बिंदु: पेड़, घास, वन और लताएँ वस्त्र; आँचल में फूल जड़े (खचित सुमन); हरियाली और रंग-बिरंगे फूलों का सौंदर्य।
आदर्श उत्तर: पेड़, घास, वन और लताएँ भारत-माता के वस्त्र हैं और उनके आँचल में रंग-बिरंगे फूल जड़े हुए हैं। इस प्रकार भारत की हरियाली और पुष्प-सौंदर्य देवी के परिधान बन गए हैं।
Q4 · 1 mark · Very short answerHarder exam level
निम्नलिखित समस्त पदों का विग्रह कीजिए: (क) गर्जितोर्मि (ख) हिम-तुषार
Hint
गर्जित + ऊर्मि।
Answer
(क) गर्जितोर्मि = गरजती हुई ऊर्मियाँ (लहरें) (ख) हिम-तुषार = हिम और तुषार (बर्फ़ और पाला)।
Q5 · 1 mark · MCQHarder exam level
भारत के वस्त्रों में 'तरु-तृण-वन-लता' और गले में 'गंगा-धारा' को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देता है?
(क) आर्थिक और औद्योगिक
(ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम
(ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक
(घ) सामाजिक और राजनीतिकHint
पाठ के अभ्यास पर आधारित; प्रकृति यहाँ भारत-माता का शृंगार है।
Answer
(ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम (प्रकृति-प्रेम के माध्यम से)।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'गंगा ज्योतिर्जल-कण, धवल धार हार गले' का भाव लिखिए। (25-30 शब्द)
Hint
गंगा = हार।
Answer
मूल्य-बिंदु: गंगा के चमकते जल-कण; उजली धारा; भारत-माता के गले का हार; पवित्रता और सौंदर्य; रूपक।
आदर्श उत्तर: गंगा के जल-कण ज्योति से चमकते हैं और उसकी उजली धारा भारत-माता के गले के हार जैसी सुशोभित है। गंगा भारत की पवित्रता और सौंदर्य का प्रतीक है।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'शतमुख-शतरव-मुखरे' पंक्ति में भारत के विविध पर्व, भाषाएँ और रीति-रिवाज 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को कैसे साकार करते हैं? (25-30 शब्द)
Hint
अनेक स्वर, एक गीत।
Answer
मूल्य-बिंदु: सैकड़ों स्वर, भाषाएँ, पर्व; सब मिलकर भारत की एक ध्वनि; विविधता से समृद्धि; परस्पर सम्मान से एकता।
आदर्श उत्तर: सैकड़ों भाषाओं, पर्वों और रीति-रिवाजों के स्वर मिलकर भारत का एक गीत बनाते हैं। विविधता भारत को समृद्ध करती है और परस्पर सम्मान से वही 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' बनता है।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपको विद्यालय की प्रार्थना-सभा में यह कविता प्रस्तुत करनी है। आप इसकी कौन-सी दो विशेषताएँ दर्शकों को पहले बताएँगे? (25-30 शब्द)
Hint
मानवीकरण, गेयता, संस्कृतनिष्ठ भाषा।
Answer
मूल्य-बिंदु: भारत का देवी-रूप में मानवीकरण; तुक और अनुप्रास से गेयता; संस्कृतनिष्ठ भाषा; प्रकृति और अध्यात्म का मेल (कोई दो)।
आदर्श उत्तर: मैं बताऊँगा कि कविता में भारत को देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जिसके वस्त्र-आभूषण प्रकृति है; और तुक तथा अनुप्रास के कारण यह गाने योग्य, लयबद्ध गीत है।
Q9 · 5 marks · Long answerHarder exam level
अनुच्छेद लेखन (लगभग 120 शब्द): 'भारत की प्राकृतिक संपदा और हमारा कर्तव्य' विषय पर अनुच्छेद लिखिए।
Hint
कविता का चित्र + आज की चुनौतियाँ + उपाय।
Answer
मूल्य-बिंदु (अनुच्छेद): भारत की प्राकृतिक संपदा (हिमालय, नदियाँ, वन, सागर, खेत); कविता का संदर्भ (भारत-माता का शृंगार); आज की चुनौतियाँ (प्रदूषण, वन-कटाई, जलवायु परिवर्तन); हमारे कर्तव्य (वृक्षारोपण, जल-बचत, प्लास्टिक न फेंकना, नदियों की सफ़ाई); निष्कर्ष; लगभग 120 शब्द।
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1.कविता के कवि?Show answer
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'।
2.'भारति' किसे कहा गया?Show answer
भारत (भारत-माता) को।
3.'कनक-शस्य' का अर्थ?Show answer
सोने जैसी फ़सलें।
4.भारत-माता के चरण कौन धोता है?Show answer
गरजती लहरों वाला सागर।
5.गले का हार किसे कहा गया?Show answer
गंगा की उजली धारा को।
6.भारत का मुकुट?Show answer
हिम से ढका हिमालय।
7.भारत के प्राण क्या हैं?Show answer
प्रणव (ओंकार)।
8.निराला ने छायावादियों में सबसे पहले किस छंद का प्रयोग किया?Show answer
मुक्त छंद।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप भारत-माता के शृंगार के छह अंग क्रम से बता सकते हैं?
- क्या आप दस कठिन शब्दों के अर्थ लिख सकते हैं?
- क्या आप मानवीकरण, रूपक और अनुप्रास के उदाहरण दे सकते हैं?
- क्या आप 'शतमुख-शतरव-मुखरे' का भाव समझा सकते हैं?
- क्या आप कविता को आज के पर्यावरण-संकट से जोड़ सकते हैं?
- क्या आप दो समस्त पदों का विग्रह कर सकते हैं?
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे!: frequently asked questions
'भारति, जय, विजयकरे!' के कवि कौन हैं?
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'। यह कविता कक्षा 9 की गंगा का दसवाँ पाठ है।
'कनक-शस्य-कमलधरे' का क्या अर्थ है?
सोने जैसी फ़सलें और कमल धारण करने वाली। यह भारत की धन-धान्य संपन्नता और प्राकृतिक सौंदर्य का संकेत है।
कविता में भारत-माता के वस्त्र और आभूषण क्या हैं?
पेड़, घास, वन और लताएँ वस्त्र हैं; आँचल में फूल जड़े हैं; गंगा की उजली धारा गले का हार है और हिम से ढका हिमालय मुकुट है।
हिमालय को भारत का मुकुट क्यों कहा गया है?
हिमालय भारत के सबसे ऊपर (उत्तर में) स्थित है, बर्फ़ से श्वेत और चमकता है; जैसे मुकुट सिर पर गौरव का प्रतीक होता है, वैसे ही हिमालय भारत का गौरव है।
'शतमुख-शतरव-मुखरे' का क्या भाव है?
सैकड़ों मुखों और सैकड़ों स्वरों से मुखरित; भारत की भाषाओं, पर्वों, विचारों और परंपराओं की विविधता।
कविता की भाषा कैसी है?
संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त, जैसे 'गर्जितोर्मि', 'ज्योतिर्जल-कण', 'कनक-शस्य-कमलधरे'।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं (आर-1 और आर-2) 2026-27; NCERT गंगा, कक्षा 9 (मार्च 2026), पाठ 10: भारति, जय, विजयकरे!