मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक Class 9: सारांश और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'आखिरी चट्टान तक' मोहन राकेश का यात्रा-वृत्तांत है, जो कक्षा 9 की गंगा का पाँचवाँ पाठ है। लेखक कन्याकुमारी में तीन सागरों के संगम, रेत के टीलों से सूर्यास्त, रंग-बिरंगी रेत, चढ़ते पानी का डर और विवेकानंद चट्टान से सूर्योदय का सजीव वर्णन करता है, साथ ही वहाँ के शिक्षित युवकों की बेकारी भी दिखाता है।
What मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक is about
'आखिरी चट्टान तक' प्रसिद्ध साहित्यकार मोहन राकेश का यात्रा-वृत्तांत है, जो एनसीईआरटी की पुस्तक गंगा (कक्षा 9) के गद्य खंड का पाँचवाँ पाठ है। पाठ-परिचय के अनुसार इसमें लेखक ने बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर के मिलन-स्थल पर स्थित कन्याकुमारी की अपनी यात्रा के अनुभव लिखे हैं। वह केवल प्राकृतिक और सांस्कृतिक सुंदरता का वर्णन नहीं करता, बल्कि अपने मन के विस्मय, रोमांच, डर, शांति और आत्मिक खोज को भी व्यक्त करता है। भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और चित्रात्मक है।
यात्रा में चार मुख्य दृश्य हैं: चट्टान पर खड़े होकर तीनों सागरों का विस्तार देखना; टीले-दर-टीले चलकर सूर्यास्त देखना; अँधेरे और चढ़ते पानी के बीच तट से लौटना; और मछुआ नाव से विवेकानंद चट्टान पहुँचकर सूर्योदय देखना, जहाँ एक स्नातक युवक बेकारी की बात करता है। कक्षा 9 की परीक्षा विद्यालय लेता है; खंड ग के प्रश्नों का विभाजन CBSE ने नहीं दिया, इसलिए यहाँ कक्षा 10 हिंदी जैसे प्रश्न हैं: पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।
Weightage: कक्षा 9 की वार्षिक परीक्षा (80 अंक) विद्यालय लेता है। खंड ग (पाठ्यपुस्तक गंगा) के 30 अंक हैं, पर CBSE ने इस खंड के प्रश्नों का विभाजन नहीं दिया है। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं 2026-27
मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
आखिरी चट्टान का दृश्य। कन्याकुमारी, सुनहले सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि। केप होटल के आगे समुद्र से उभरी एक स्याह चट्टान पर खड़ा लेखक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता है, जिस पर कभी स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी। पीछे कन्याकुमारी मंदिर की लाल-सफ़ेद लकीरें चमक रही थीं। अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के संगम पर लहरें चट्टानों से टकराकर बूँदों की जालियाँ बना रही थीं। लेखक 'शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति' महसूस करता है और कुछ देर स्वयं को भूलकर दृश्य का हिस्सा बन जाता है। होश आने पर देखता है कि उसकी चट्टान बढ़ते पानी से घिर गई है; वह कूदता हुआ किनारे पहुँचता है।
सूर्यास्त की खोज। यात्रियों की टोलियाँ 'सैंड हिल' पर सूर्यास्त देखने जाती हैं, जहाँ रेशमी कपड़ों में युवतियाँ और गेस्ट हाउस के बैरे कॉफ़ी पिलाते दिखते हैं। पर अरब सागर की ओर एक ऊँचा टीला दृश्य रोक रहा था, इसलिए लेखक एक के बाद एक कई टीले पार करता है। टाँगें थकती हैं, मन नहीं। आखिर खुला विस्तार दिखता है और वह संतोष से ऐसे बैठता है जैसे संसार की सबसे ऊँची चोटी पहली बार उसी ने सर की हो। सूर्य का गोला पानी को छूता है; पानी पर पहले सोना, फिर लहू, फिर बैंगनी और अंत में काला रंग फैल जाता है। नारियलों के झुरमुट अँधेरे में सिर धुनते-से लगते हैं।
लौटने का डर और रंगीन रेत। लौटने की बात सोचकर उसे कँपकँपी होती है। टीलों में भटकने के डर से वह फिसलकर नीचे तट पर उतर जाता है। वहाँ की रेत में ऐसे अनाम रंग थे जो उसने कहीं नहीं देखे; वह रंग-बिरंगी रेत हाथ में मसलता है और चाहता है कि थोड़ी-थोड़ी रख ले। पर पानी बढ़ रहा था; तट सिकुड़ रहा था। लहरों से बचने के लिए वह जूते हाथ में लेकर दौड़ता है, एक ऊँची चट्टान से टकराता है और उस पर चढ़ता है। उस पार सौ फुट का खुला तट, टहलते लोग और सड़क का रास्ता देखकर उसे लगता है जैसे उसके साथ मज़ाक हुआ हो।
सूर्योदय और बेकारी। सुबह लेखक तीन स्थानीय युवकों और चार मल्लाहों के साथ रबड़ के तीन तनों से बनी छोटी नाव में विवेकानंद चट्टान पहुँचता है; डर उसकी काँपती टाँगों में उतर आता है। एक स्नातक युवक बताता है कि आठ हज़ार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित युवक बेकार हैं, लगभग सौ स्नातक। वे अर्ज़ियाँ देते और बहस करते हैं; वह खुद फ़ोटो-एल्बम बेचता है और कहता है कि वे सीपियों का गूदा खाकर दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं। घाट पर लोग सूर्य को अर्घ्य दे रहे थे; सरकारी मेहमान कॉफ़ी पीते हुए शंख-मालाओं का मोल-तोल और दूरबीन से सूर्य-दर्शन, दोनों कर रहे थे। कडल-काक (समुद्री पक्षी) बेकारी और सूर्योदय, दोनों से बेलाग तैर रहे थे। लेखक का मन लौटने की बसों का टाइम-टेबल दोहरा रहा था।
केंद्रीय भाव: प्रकृति की विराटता मनुष्य को विस्मित, विनम्र और रोमांचित करती है; पर लेखक सुंदर दृश्यों के बीच समाज की कड़वी सच्चाई, बेकारी, को भी नहीं भूलता।
Themes and message
प्रकृति की विराटता और सौंदर्य
तीन सागरों का संगम, क्षितिज तक फैला पानी, सूर्यास्त के बदलते रंग और अनाम रंगों वाली रेत लेखक को अभिभूत कर देते हैं। वह अपने अस्तित्व को भूलकर दृश्य का हिस्सा बन जाता है।
From the text: 'शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति।'
आत्मानुभूति और आत्म-चेतना
यात्रा केवल स्थानों की नहीं, मन की भी है। लेखक अपने विस्मय, संतोष, उदासी और डर को खुलकर लिखता है। टीले पर बैठकर वह स्वयं को पहली बार चोटी सर करने वाला मानता है।
From the text: 'मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं हूँ'
रोमांच, साहस और संघर्ष
बढ़ते पानी से घिरी चट्टान, टीलों में भटकने का डर, सिकुड़ता तट और लहरों से भागना: यात्रा में रोमांच और खतरा दोनों हैं। लेखक हार न मानकर रास्ता निकालता है।
From the text: 'टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था।'
सामाजिक यथार्थ: शिक्षित बेकारी
सुंदर सूर्योदय के बीच एक स्नातक युवक बेकारी के आँकड़े बताता है। सीपियों का गूदा खाकर दर्शन पर बहस करने की उसकी बात में व्यंग्य और पीड़ा है। लेखक प्रकृति के साथ समाज को भी देखता है।
From the text: 'हम लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं'
पर्यटन की सतहीपन पर व्यंग्य
सरकारी मेहमान कॉफ़ी पीते हुए शंख-मालाओं का मोल-तोल और दूरबीन से सूर्य-दर्शन, दोनों साथ करते हैं। कडल-काक बेकारी और सूर्योदय, दोनों से बेलाग हैं। लेखक हल्के व्यंग्य से दिखाता है कि सौंदर्य-दर्शन भी दिखावा बन सकता है।
From the text: 'वे लोग दोनों काम साथ-साथ कर रहे थे'
Characters
लेखक (मोहन राकेश)
यात्री और वाचक।
- सौंदर्य-प्रेमी और संवेदनशील
- जिज्ञासु और धुन का पक्का: टीले-दर-टीले बढ़ता है
- ईमानदार: अपने डर को स्वीकार करता है
- सामाजिक दृष्टि वाला: बेकारी पर ध्यान देता है
'अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया'; 'डर मेरी टाँगों में उतर गया'।
स्नातक युवक
कन्याकुमारी का शिक्षित, बेकार युवक जो फ़ोटो-एल्बम बेचता है।
- स्पष्टवादी और व्यंग्यप्रिय
- अपने क्षेत्र की समस्या से भली-भाँति परिचित
'इस चट्टान से इतनी प्रेरणा तो हमें मिलती ही है।'
मल्लाह, सैलानी और सरकारी मेहमान
पृष्ठभूमि के पात्र।
- मल्लाह: कुशल, नुकीली चट्टानों और ऊँची लहरों से नाव बचाते हैं
- सरकारी मेहमान: कॉफ़ी, मोल-तोल और दूरबीन से सूर्य-दर्शन
रबड़ के तीन तनों से बनी नाव; 'अपने बाइनाक्यूलर्ज से सूर्य-दर्शन'।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| चित्रात्मक, दृश्यात्मक भाषा | 'पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना ढुल आया।' | पाठक को लगता है कि वह भी लेखक के साथ सूर्यास्त देख रहा है। |
| रंगों का भावात्मक प्रयोग | सोना → लहू → बैंगनी → काला | सूर्यास्त के बदलते रंग मन के बदलते भावों (आनंद से उदासी और डर तक) से जुड़ते हैं। |
| मानवीकरण | नारियलों के झुरमुट 'जैसे लगातार सिर धुन रहे थे' | अँधेरे में प्रकृति बेचैन और जीवित लगती है। |
| रूपक और तुलना | 'बड़ी-बड़ी चट्टानों के बीच एक छोटी-सी चट्टान' (लेखक स्वयं को चट्टान कहता है); 'जैसे वह टीला संसार की सबसे ऊँची चोटी हो' | लेखक की लघुता और संतोष, दोनों को सुंदर ढंग से प्रकट करते हैं। |
| शब्द-क्रम उलटकर चमत्कार (विपर्यय) | 'शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति' | सागर की व्यापकता और उसकी शक्ति, दोनों भाव एक साथ। |
| व्यंग्य | मोल-तोल और सूर्य-दर्शन साथ-साथ; कडल-काक 'बे-लाग' | समाज और पर्यटन की सतहीपन पर हल्की चोट। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति।
लेखक: तीन सागरों के संगम को देखते हुए।
सागर की व्यापकता और उसकी शक्ति का अनुभव।
टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था।
लेखक: सूर्यास्त देखने के लिए टीले पार करते हुए।
लेखक की दृढ़ता और धुन।
अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया
लेखक: खुला पश्चिमी क्षितिज मिलने पर।
परिश्रम सफल होने का संतोष।
पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना ढुल आया।
लेखक: सूर्य के पानी को छूने पर।
चित्रात्मक भाषा का उत्कृष्ट उदाहरण।
हम लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं
स्नातक युवक: विवेकानंद चट्टान पर बेकारी की बात करते हुए।
शिक्षित बेकारी पर करुण व्यंग्य।
मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
प्रकृति के सामने विनम्रता
मान लीजिए आप पहली बार हिमालय की ऊँची चोटियाँ देखते हैं और कुछ देर बोल नहीं पाते।
लेखक के किस अनुभव से आपकी स्थिति मिलती है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक तीन सागरों को देखकर स्वयं को भूल गया।
- विराटता में अपनी लघुता का बोध।
Answer: कन्याकुमारी में तीन सागरों को देखकर लेखक कुछ देर भूल गया कि वह कौन है। मैं भी हिमालय की विराटता में स्वयं को छोटा और विस्मित अनुभव कर रहा हूँ।
Memory hook: प्रकृति के आगे 'मैं' छोटा हो जाता है।
सुरक्षा और सावधानी
कल्पना कीजिए कि समुद्र-तट पर आपके दोस्त सूर्यास्त के बाद दूर तक घूमने जाना चाहते हैं।
लेखक के अनुभव से आप उन्हें क्या सलाह देंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अँधेरे और ज्वार में तट सिकुड़ता है।
- लेखक भी फँसते-फँसते बचा।
- समय पर लौटना।
Answer: लेखक अँधेरे और बढ़ते पानी के बीच मुश्किल से बचा था। मैं दोस्तों से कहूँगा कि अँधेरा होने से पहले लौट आएँ, ज्वार का समय जान लें और अकेले दूर न जाएँ।
Memory hook: ज्वार का समय, लौटने का समय।
शिक्षित बेकारी
मान लीजिए आपके मोहल्ले में कई पढ़े-लिखे युवक नौकरी न मिलने से निराश हैं।
पाठ के स्नातक युवक से तुलना करते हुए एक सुझाव दीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- स्नातक युवक फ़ोटो-एल्बम बेचता था।
- केवल अर्ज़ियाँ और बहस से समस्या नहीं सुलझती।
- कौशल-प्रशिक्षण, स्वरोज़गार।
Answer: पाठ का स्नातक युवक भी नौकरी न मिलने से फ़ोटो-एल्बम बेचता था। मेरे मोहल्ले के युवक कौशल-प्रशिक्षण लेकर स्वरोज़गार, जैसे पर्यटन-सेवा या हस्तशिल्प, शुरू कर सकते हैं।
Memory hook: डिग्री के साथ हुनर भी।
Topics in this chapter
How the school exam asks मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | चट्टान वाला दृश्य, सूर्यास्त, तट पर दौड़ या विवेकानंद चट्टान वाले अंश पर: लेखक ने सूर्यास्त कहाँ से देखा, किसी कथन से मनःस्थिति (विस्मित होना), भाव (संतुष्टि), वर्णन (सागर की व्यापकता), यात्रा-वृत्तांत की विशेषता। | पहचानें कि अंश किस दृश्य का है; भाव वाले प्रश्न में लेखक के शब्दों से संकेत लें ('संतुष्ट होकर', 'भूला रहा')। |
| लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 25-30 शब्द) | लेखक सैंड हिल से आगे क्यों गया, स्थानीय लोगों के बारे में क्या बताया, 'प्रयत्न की सार्थकता' का अर्थ, नए अनुभव, मानसिक दृढ़ता के दो अंश। | पहले वाक्य में उत्तर, फिर पाठ से एक प्रमाण। |
| यात्रा-वृत्तांत की विशेषताएँ | दृश्य-वर्णन, आत्मानुभूति, सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य, जीवन-दर्शन, शैलीगत विशेषताएँ, रोमांच और संघर्ष: पाठ से उदाहरण। | हर विशेषता के लिए पाठ का एक दृश्य याद रखें। |
| लेखन (खंड घ) | अपनी किसी यात्रा पर अनुच्छेद (लगभग 120/100 शब्द) या मित्र को यात्रा-वर्णन वाला अनौपचारिक पत्र। | स्थान, दृश्य, अनुभूति, एक रोमांचक क्षण, निष्कर्ष; चित्रात्मक भाषा। |
Tricks to remember मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
चार दृश्य: च-सू-त-वि
चट्टान (संगम), सूर्यास्त (टीले), तट (रंगीन रेत और चढ़ता पानी), विवेकानंद चट्टान (सूर्योदय और बेकारी)।
Use it when: क्रम याद रखने के लिए।
सूर्यास्त के रंग
सो-ल-बै-का: सोना → लहू → बैंगनी → काला।
Use it when: रंग-परिवर्तन वाले प्रश्नों के लिए।
बेकारी के आँकड़े
8000 आबादी, 400-500 शिक्षित बेकार, लगभग 100 स्नातक।
Use it when: तथ्यात्मक MCQ के लिए।
मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: संगम पर खड़ा लेखक
लगता था कि उस ओर दूसरा छोर है ही नहीं। तीनों ओर के क्षितिज को आँखों में समेटता मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं हूँ, एक जीवित व्यक्ति, दूर से आया यात्री, एक दर्शक।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले लेखक बताते हैं कि तीनों तरफ़ क्षितिज तक पानी ही पानी था, पर सामने वाले सागर का क्षितिज अधिक दूर और अधिक गहरा लगता था।) सामने का क्षितिज किस सागर का था?
(क) अरब सागर
(ख) बंगाल की खाड़ी
(ग) हिंद महासागर
(घ) लाल सागर(2) · 1 mark · MCQ
'मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं हूँ' कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना
(ख) विस्मित हो जाना
(ग) भ्रमित हो जाना
(घ) आशंकित होना(3) · 1 mark · MCQ
'उस ओर दूसरा छोर है ही नहीं' से क्या भाव प्रकट होता है?
(क) सागर की असीम व्यापकता
(ख) सागर का उथलापन
(ग) तूफ़ान का डर
(घ) नाव की कमी(4) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): लेखक स्वयं को दृश्य का हिस्सा अनुभव करने लगा।
कारण (R): प्रकृति की विराटता में वह अपना अलग अस्तित्व भूल गया।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।(5) · 1 mark · MCQ
'क्षितिज' का अर्थ है:
(क) समुद्र का तल
(ख) जहाँ धरती और आकाश मिलते दिखाई देते हैं
(ग) ऊँचा पहाड़
(घ) नदी का किनारा
Show the answersAnswers
- (ग) हिंद महासागर।
- (ख) विस्मित हो जाना।
- (क) सागर की असीम व्यापकता।
- (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (ख) जहाँ धरती और आकाश मिलते दिखाई देते हैं।
Extract 2: गद्यांश 2: डूबता सूर्य
पर वह रंग इतनी जल्दी-जल्दी बदल रहा था कि किसी भी एक क्षण के लिए उसे एक नाम दे सकना असंभव था। सूर्य का गोला जैसे एक बेबसी में पानी के लावे में डूबता जा रहा था।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे ठीक पहले सूर्य का गोला पानी की सतह को छूता है और पानी पर दूर तक एक चमकीला रंग ढुल आता है।) सूर्य के पानी को छूते ही पानी पर कैसा रंग फैल गया?
(क) नीला
(ख) सुनहरा (सोने जैसा)
(ग) हरा
(घ) काला(2) · 1 mark · MCQ
रंग को एक नाम देना असंभव क्यों था?
(क) अँधेरा था
(ख) रंग बहुत जल्दी-जल्दी बदल रहे थे
(ग) लेखक को रंगों का ज्ञान नहीं था
(घ) धुंध थी(3) · 1 mark · MCQ
'सूर्य का गोला जैसे एक बेबसी में... डूबता जा रहा था' में कौन-सा अलंकार/भाव है?
(क) मानवीकरण
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) अनुप्रास मात्र(4) · 1 mark · MCQ
गद्यांश की भाषा की प्रमुख विशेषता है:
(क) तकनीकी
(ख) चित्रात्मक
(ग) हास्यपूर्ण
(घ) संवादात्मक(5) · 1 mark · MCQ
'पानी के लावे' से क्या संकेत मिलता है?
(क) पानी जल रहा था
(ख) सूर्यास्त के रंगों से पानी पिघले लावे-सा लाल-सुनहरा चमक रहा था
(ग) ज्वालामुखी फटा
(घ) पानी बहुत ठंडा था
Show the answersAnswers
- (ख) सुनहरा (सोने जैसा)।
- (ख) रंग बहुत जल्दी-जल्दी बदल रहे थे।
- (क) मानवीकरण; सूर्य में मनुष्य जैसी बेबसी दिखाई गई है।
- (ख) चित्रात्मक।
- (ख) सूर्यास्त के रंगों से पानी पिघले लावे-सा लाल-सुनहरा चमक रहा था।
मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: सैंड हिल से आगे क्यों · 2 marks · Short answerExam level
सब यात्री सैंड हिल पर रुक गए, पर लेखक आगे के टीलों की ओर क्यों बढ़ा? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अरब सागर की ओर ऊँचा टीला दृश्य रोक रहा था।
- पूरे विस्तार में सूर्यास्त देखना चाहता था।
Answer: अरब सागर की ओर एक ऊँचा टीला उधर के विस्तार को ओट में लिए था। लेखक पूरे खुले क्षितिज की पृष्ठभूमि में सूर्यास्त देखना चाहता था, इसलिए वह टीले-दर-टीले आगे बढ़ा।
Example 2: प्रयत्न की सार्थकता · 2 marks · Short answerExam level
'अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया' में 'प्रयत्न की सार्थकता' से क्या अभिप्राय है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- थककर भी कई टीले पार किए।
- अंततः खुला पश्चिमी क्षितिज मिला।
- परिश्रम सफल हुआ: संतोष।
Answer: लेखक ने थकान के बावजूद कई टीले पार किए। अंत में पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिखा, यानी उसका परिश्रम सफल हुआ। इसी सफलता का संतोष 'प्रयत्न की सार्थकता' है।
Example 3: स्थानीय लोगों के बारे में · 2 marks · Short answerHarder exam level
लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या बताया? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शिक्षित युवकों में बेकारी।
- छोटे-मोटे काम: फ़ोटो-एल्बम बेचना।
- शंख-माला बेचती युवतियाँ, मल्लाह।
Answer: वहाँ आठ हज़ार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित युवक बेकार थे, जो अर्ज़ियाँ देते और बहस करते थे। कुछ फ़ोटो-एल्बम बेचते, युवतियाँ शंख-मालाएँ बेचतीं और मल्लाह नाव चलाते थे।
Example 4: मानसिक दृढ़ता के अंश · 2 marks · Short answerHarder exam level
यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो प्रसंग लिखिए जिनसे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- थककर भी टीले पार करना।
- बढ़ते पानी में दौड़कर, चट्टान पर चढ़कर रास्ता निकालना।
Answer: पहला, टाँगें थकने पर भी मन न थकना और एक-एक करके कई टीले पार करना। दूसरा, बढ़ते पानी और अँधेरे में डर के बावजूद दौड़कर, चट्टान पर चढ़कर सुरक्षित रास्ता ढूँढ़ लेना।
Example 5: सौंदर्य के बीच बेकारी · 2 marks · Short answerHOTS / competency
लेखक ने सूर्योदय के सुंदर दृश्य के साथ बेकारी की बात क्यों जोड़ी होगी? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- यात्रा-वृत्तांत केवल दृश्य नहीं, समाज भी।
- सुंदरता के पीछे की कड़वी सच्चाई।
- पाठक को सोचने पर विवश करना।
Answer: लेखक दिखाना चाहता है कि सुंदर दृश्यों वाली जगह के लोग भी कठिनाइयों से जूझते हैं। सूर्योदय के साथ बेकारी जोड़कर वह पाठक को केवल सैलानी नहीं, संवेदनशील नागरिक बनने को कहता है।
Example 6: डर पर विजय · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आप भी समुद्र-तट पर अँधेरा होने और पानी चढ़ने से घिर गए हैं। लेखक के अनुभव से आप क्या सीखेंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शांत रहकर सुरक्षित रास्ता चुनना।
- ज्वार का ध्यान: समय रहते लौटना।
- जोखिम न लेना।
Answer: लेखक की तरह मैं शांत रहकर जल्दी निर्णय लूँगा और ज्ञात, सुरक्षित रास्ता चुनूँगा। सबसे बड़ी सीख यह कि ज्वार और अँधेरे का ध्यान रखकर पहले ही लौट आना चाहिए।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
लेखक के लिए कौन-से दृश्य बिल्कुल नए थे? (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय-वस्तु: तीन सागरों का संगम; पल-पल बदलते सूर्यास्त के रंग; अनाम रंगों वाली रेत; रबड़ के तनों की नाव से चट्टान पर जाना (कोई दो-तीन)। | 1 |
| अभिव्यक्ति: शुद्ध, संक्षिप्त भाषा। | 1 |
अनुच्छेद लेखन (लगभग 120 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय-वस्तु: दृश्य, अनुभूति, घटना। | 2 |
| प्रस्तुति: आरंभ, क्रम, निष्कर्ष। | 2 |
| भाषा की शुद्धता और शब्द-सीमा। | 1 |
Where students lose marks in मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: सूर्यास्त सैंड हिल से देखा, लिखना
सैंड हिल का नाम याद रह जाता है।
Wrong working
लेखक ने सैंड हिल पर बैठकर सूर्यास्त देखा।
Right working
वह सैंड हिल से आगे अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले पर गया।
Do this: सैंड हिल = भीड़; टीला = लेखक।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: विवेकानंद चट्टान पर लेखक अकेला गया, लिखना
विवरण भूलना।
Wrong working
लेखक अकेले नाव चलाकर चट्टान पर पहुँचा।
Right working
आठ लोग थे: लेखक, तीन स्थानीय युवक और चार मल्लाह।
Do this: 'हम आठ आदमी' याद रखें।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: यात्रा-वृत्तांत को केवल दृश्य-वर्णन बताना
आत्मानुभूति और समाज की ओर ध्यान न देना।
Wrong working
पाठ में केवल प्रकृति का वर्णन है।
Right working
पाठ में प्रकृति, लेखक की अनुभूति और बेकारी जैसा सामाजिक यथार्थ, तीनों हैं।
Do this: विशेषताओं वाले प्रश्न में तीनों पक्ष लिखें।
Usually costs: विषय-वस्तु के अंक।
Mistake: तीन सागरों के नाम गलत लिखना
जल्दबाज़ी।
Wrong working
अरब सागर, लाल सागर, हिंद महासागर।
Right working
अरब सागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी।
Do this: पूर्व-पश्चिम-दक्षिण से जोड़कर याद करें।
Usually costs: 1 अंक।
Practice questions on मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
(ग) केप होटल से
(घ) सैंड हिल सेHint
सैंड हिल से आगे।
Answer
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से।
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
विवेकानंद चट्टान तक लेखक किस प्रकार की नाव से गया?
Hint
रबड़ के तने।
Answer
रबड़ के पेड़ के तीन तनों को जोड़कर बनी छोटी मछुआ नाव से।
Q3 · 2 marks · Short answerExam level
तट की रेत में लेखक को क्या अनोखा लगा? (25-30 शब्द)
Hint
अनाम रंग।
Answer
मूल्य-बिंदु: अनेक अनाम रंग; हर इंच पर अलग रंग; हर रंग में कई रंगों की झलक; ऐसे रंग पहले कहीं नहीं देखे; थोड़ी-थोड़ी रेत रख लेने की इच्छा।
आदर्श उत्तर: तट की रेत में ऐसे अनाम रंग थे जो लेखक ने कहीं नहीं देखे थे। हर इंच पर अलग रंग था और हर रंग में कई रंगों की झलक; वह हर रंग की रेत रखना चाहता था।
Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level
'शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति' वाक्य में किसका वर्णन है?
(क) बलखाती लहरों का
(ख) सागर की व्यापकता का
(ग) सूर्यास्त का
(घ) पश्चिमी क्षितिज काHint
तीनों सागरों का दृश्य।
Answer
(ख) सागर की व्यापकता का।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder exam level
सूर्यास्त के बाद नारियल के झुरमुटों का वर्णन कैसे किया गया है और इससे कौन-सा भाव उभरता है? (25-30 शब्द)
Hint
सिर धुनना, हाथ-पैर पटकना।
Answer
मूल्य-बिंदु: स्याह पड़े झुरमुट; मानो सिर धुन रहे हों और हाथ-पैर पटक रहे हों; मानवीकरण; बेचैनी, उदासी और आने वाले डर का भाव।
आदर्श उत्तर: अँधेरे में स्याह पड़े झुरमुट मानो सिर धुन रहे थे और हाथ-पैर पटक रहे थे। यह मानवीकरण लेखक के मन की बेचैनी, उदासी और लौटने के डर को प्रकट करता है।
Q6 · 1 mark · MCQHarder exam level
'मैंने, सिर्फ मैंने, उस चोटी को पहली बार सर किया हो' में कौन-सा भाव है?
(क) करुणा
(ख) विनम्रता
(ग) आत्मीयता
(घ) संतुष्टिHint
प्रयत्न सफल होने के बाद।
Answer
(घ) संतुष्टि।
Q7 · 1 mark · Assertion-reasonHOTS / competency
कथन (A): चट्टान पर चढ़ने के बाद लेखक को लगा कि उसके साथ मज़ाक हुआ है।
कारण (R): चट्टान के उस पार खुला तट, टहलते लोग और सड़क का रास्ता था।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।Hint
डर व्यर्थ निकला।
Answer
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आप कन्याकुमारी जाते हैं। सरकारी मेहमानों की तरह 'मोल-तोल और सूर्य-दर्शन साथ-साथ' करने के बजाय आप सूर्योदय का अनुभव कैसे करेंगे? (25-30 शब्द)
Hint
पूरा ध्यान, स्थानीय लोगों का सम्मान।
Answer
मूल्य-बिंदु: फ़ोन और मोल-तोल छोड़कर पूरा ध्यान दृश्य पर; रंगों और आवाज़ों को महसूस करना; बाद में स्थानीय कारीगरों से सम्मान के साथ उचित मूल्य पर ख़रीदारी।
आदर्श उत्तर: मैं फ़ोन और ख़रीदारी कुछ देर के लिए छोड़कर पूरे मन से सूर्योदय के बदलते रंग देखूँगा। बाद में स्थानीय कारीगरों से सम्मानपूर्वक उचित मूल्य पर शंख-माला खरीदूँगा।
Q9 · 5 marks · Long answerHarder exam level
अनुच्छेद लेखन: 'मेरी एक यादगार यात्रा' विषय पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए।
Hint
यात्रा-वृत्तांत के तत्व: दृश्य, अनुभूति, रोमांच, संस्कृति।
Answer
मूल्य-बिंदु (अनुच्छेद): स्थान और समय का परिचय; दृश्य-वर्णन (रंग, ध्वनि, गंध); अपनी अनुभूति (विस्मय, आनंद, डर); एक रोमांचक या कठिन क्षण; स्थानीय लोग/संस्कृति की झलक; सीख और निष्कर्ष; चित्रात्मक, प्रवाहपूर्ण भाषा; लगभग 120 शब्द।
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1.'आखिरी चट्टान तक' के लेखक?Show answer
मोहन राकेश।
2.किस चट्टान पर विवेकानंद ने समाधि लगाई थी?Show answer
भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान (विवेकानंद चट्टान) पर।
3.पाठ में किस होटल का नाम आता है?Show answer
केप होटल।
4.सैलानी सूर्यास्त कहाँ देख रहे थे?Show answer
सैंड हिल पर।
5.नाव किससे बनी थी?Show answer
रबड़ के पेड़ के तीन तनों से।
6.चट्टान पर कितने लोग थे?Show answer
आठ।
7.समुद्री पक्षियों को पाठ में क्या कहा गया?Show answer
कडल-काक।
8.लेखक का मन अंत में क्या दोहरा रहा था?Show answer
बसों का टाइम-टेबल।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप चारों दृश्यों को क्रम से बता सकते हैं?
- क्या आप सूर्यास्त के रंग-परिवर्तन लिख सकते हैं?
- क्या आप लेखक के डर वाले दो प्रसंग बता सकते हैं?
- क्या आप बेकारी वाले संवाद का अर्थ समझा सकते हैं?
- क्या आप पाठ की तीन शैलीगत विशेषताएँ उदाहरण सहित लिख सकते हैं?
- क्या आप अपनी यात्रा पर 120 शब्दों का अनुच्छेद लिख सकते हैं?
मोहन राकेश – आखिरी चट्टान तक: frequently asked questions
'आखिरी चट्टान तक' किस विधा की रचना है?
यह मोहन राकेश का यात्रा-वृत्तांत है, जो कक्षा 9 की गंगा का पाँचवाँ पाठ है।
कन्याकुमारी में कौन-से तीन सागर मिलते हैं?
अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी।
लेखक सैंड हिल से आगे क्यों चला गया?
अरब सागर की ओर एक ऊँचा टीला दृश्य को ओट में लिए था। लेखक पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में सूर्यास्त देखना चाहता था, इसलिए वह टीले-दर-टीले आगे बढ़ा।
सूर्यास्त के समय पानी के रंग कैसे बदले?
पहले पानी पर सोना-ही-सोना ढुल आया, सूर्य डूबने पर वहाँ लहू-सा बहता लगा, फिर रंग बैंगनी और अंत में काला पड़ गया।
विवेकानंद चट्टान पर स्नातक युवक ने क्या बताया?
कन्याकुमारी की आठ हज़ार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित युवक बेकार हैं, जिनमें लगभग सौ स्नातक हैं। वे नौकरी की अर्ज़ियाँ देते और बहस करते हैं।
तट पर चट्टान पर चढ़कर लेखक को मज़ाक-सा क्यों लगा?
वह डरकर दौड़ता और चट्टान पर चढ़ा था, पर उस पार लगभग सौ फुट का खुला तट, टहलते लोग और सड़क का रास्ता था; उसका सारा डर व्यर्थ निकला।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं (आर-1 और आर-2) 2026-27; NCERT गंगा, कक्षा 9 (मार्च 2026), पाठ 5: आखिरी चट्टान तक