कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश Class 9: सार और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'मैं और मेरा देश' कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का निबंध है, जो कक्षा 9 की गंगा का सातवाँ पाठ है। लाला लाजपत राय के अनुभव से लेखक समझाता है कि नागरिक का सम्मान देश के सम्मान से जुड़ा है। हर नागरिक छोटे कामों, शक्ति-बोध, सौंदर्य-बोध और सही मतदान से देश का गौरव बढ़ा सकता है।
What कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश is about
'मैं और मेरा देश' प्रसिद्ध पत्रकार और निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का निबंध है, जो एनसीईआरटी की पुस्तक गंगा (कक्षा 9) के गद्य खंड का सातवाँ पाठ है। पाठ-परिचय के अनुसार यह व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को स्थापित करता है: व्यक्ति का हर काम उसकी पहचान के साथ-साथ उसके परिवार, क्षेत्र और राष्ट्र से जुड़ा होता है, इसलिए देश का सम्मान और नागरिक का सम्मान एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हैं। निबंध में नागरिक के अधिकार, कर्तव्य और देश की उन्नति पर भी विचार है।
निबंध प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है। इसमें लाला लाजपत राय, स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक, पुस्तकालय से चित्र चुराने वाला विदेशी छात्र, कमालपाशा और किसान का शहद, तथा पं. नेहरू और किसान की खाट जैसे प्रेरक प्रसंग हैं। पाठ के बाद 'साथ-साथ पढ़ें' में परमवीर निर्मल जीत सिंह सेखों पर एक पाठ भी है। कक्षा 9 की परीक्षा विद्यालय लेता है; खंड ग के प्रश्नों का विभाजन CBSE ने नहीं दिया, इसलिए यहाँ कक्षा 10 हिंदी जैसे प्रश्न हैं: पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।
Weightage: कक्षा 9 की वार्षिक परीक्षा (80 अंक) विद्यालय लेता है। खंड ग (पाठ्यपुस्तक गंगा) के 30 अंक हैं, पर CBSE ने इस खंड के प्रश्नों का विभाजन नहीं दिया है। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं 2026-27
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पूर्णता का भ्रम। लेखक अपने घर में जन्मा, पड़ोस में खेला और नगर के समाज से जुड़कर बड़ा हुआ। वह नगर के लोगों का सम्मान करता था और लोग उसका। उसे लगता था कि उसके पास सब कुछ है और वह पूरा मनुष्य हो गया है।
मन का भूकंप। फिर उसके 'आनंद की दीवार' में दरार पड़ गई। यह भूकंप धरती का नहीं, मन का था, जो लाला लाजपत राय के एक अनुभव से आया। लालाजी अमेरिका, इंग्लैंड, फ़्रांस और दूसरे देशों में घूमे, पर जहाँ भी गए, भारत की गुलामी का कलंक उनके माथे पर लगा रहा। लेखक समझता है कि यदि देश गुलाम या हीन हो, तो किसी व्यक्ति के पास स्वर्ग के भी सारे साधन हों, वे उसे गौरव नहीं दे सकते। इसलिए उसका कर्तव्य है कि वह ऐसा कोई काम न करे जिससे देश के सम्मान या शक्ति को धक्का लगे, और उसका अधिकार है कि देश के सम्मान में उसे पूरा भाग मिले।
एक साधारण आदमी क्या कर सकता है? लेखक कहता है कि जीवन विशाल समुद्र का तट है, जिस पर हर किसी के लिए जगह है। युद्ध में लड़ने वालों के साथ रसद पहुँचाने वाले, खेती करने वाले और जय बोलने वाले भी महत्त्वपूर्ण हैं; दर्शकों की तालियाँ खिलाड़ियों में बिजली भर देती हैं। 'अकेला चना क्या भाड़ फोड़े' कहावत को लेखक अपने अनुभव के आधार पर सौ फ़ीसदी झूठ बताता है।
दो युवक, दो घटनाएँ। जापान में स्वामी रामतीर्थ को फल न मिलने पर उन्होंने कहा कि शायद जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। एक जापानी युवक दौड़कर ताज़े फल लाया और मूल्य के रूप में केवल यह माँगा कि वे अपने देश में यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। इसके विपरीत, एक विदेशी छात्र ने जापान के सरकारी पुस्तकालय की पुस्तक से दुर्लभ चित्र निकाल लिए; उसे देश से निकाल दिया गया और पुस्तकालय पर लिख दिया गया कि उसके देश का कोई निवासी वहाँ प्रवेश नहीं कर सकता। निष्कर्ष: नागरिक की हीनता और गौरव का फल देश को भी मिलता है; 'मैं और मेरा देश दो अलग चीजें' नहीं हैं।
भावना का महत्त्व। महत्त्व काम के आकार में नहीं, उसके पीछे की भावना में है। तुर्की के राष्ट्रपति कमालपाशा ने तीस मील पैदल चलकर आए बूढ़े किसान का मिट्टी की हँडिया में लाया शहद स्वयं खाया, उसे सर्वोत्तम उपहार कहा और उसे शाही कार में घर भिजवाया। पं. नेहरू ने एक किसान की बुनी खाट स्वीकार करके उसे अपना हस्ताक्षरित फ़ोटो दिया।
शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध। देश को सबसे पहले इन दो बातों की ज़रूरत है। जो लोग रेलों, क्लबों और चौपालों में अपने देश को हीन और दूसरों को श्रेष्ठ बताते हैं, वे देश के शक्ति-बोध को चोट पहुँचाते हैं, जैसे शल्य ने बार-बार अर्जुन की प्रशंसा करके कर्ण का आत्मविश्वास तोड़ा था। जो छिलके फेंकते, थूकते, गंदगी करते और धक्का-मुक्की करते हैं, वे सौंदर्य-बोध को चोट पहुँचाते हैं।
कसौटी: चुनाव। देश की ऊँचाई-नीचाई की कसौटी चुनाव है। जहाँ नागरिक सोच-समझकर सही व्यक्ति को मत देते हैं, वह देश उच्च है। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह ठीक व्यक्ति को मत दे, और अधिकार है कि उसके मत के बिना कोई अधिकार की कुर्सी पर न बैठे।
केंद्रीय भाव: नागरिक और देश एक-दूसरे से अलग नहीं। हर नागरिक अपने छोटे-छोटे कामों, अच्छे आचरण और जिम्मेदार मतदान से देश का सम्मान बढ़ा सकता है।
Themes and message
व्यक्ति और राष्ट्र का अविभाज्य संबंध
लेखक का निष्कर्ष है कि नागरिक का सम्मान देश से और देश का सम्मान नागरिक से जुड़ा है। जापानी युवक और विदेशी छात्र के प्रसंग इसे स्पष्ट करते हैं।
From the text: 'मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।'
स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव
लाला लाजपत राय का अनुभव बताता है कि गुलाम देश का नागरिक कहीं भी जाए, उसके माथे पर गुलामी का कलंक रहता है। व्यक्तिगत सुख-साधन देश की हीनता की भरपाई नहीं कर सकते।
From the text: 'जहाँ भी मैं गया, भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक मेरे माथे पर लगा रहा।'
साधारण नागरिक की भूमिका
देश के लिए हर कोई वैज्ञानिक या धनी नहीं बन सकता, पर रसद पहुँचाने वाला, किसान और जय बोलने वाला भी युद्ध में महत्त्वपूर्ण है। अकेला व्यक्ति भी बहुत कुछ कर सकता है।
From the text: 'युद्ध में जय बोलने वालों का भी बहुत महत्व है।'
काम के पीछे की भावना
कमालपाशा का शहद और नेहरू की खाट वाले प्रसंग बताते हैं कि छोटा उपहार या छोटा काम भी महान है, यदि उसके पीछे सच्ची भावना है।
From the text: 'महत्व किसी कार्य की विशालता में नहीं है, उस कार्य के करने की भावना में है।'
कर्तव्य और अधिकार
नागरिक का कर्तव्य है कि देश के सम्मान और शक्ति को धक्का न लगने दे, शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध बढ़ाए और सही व्यक्ति को मत दे; उसका अधिकार है देश के सम्मान में भागीदारी और यह कि उसके मत के बिना कोई सत्ता पर न बैठे।
From the text: 'हरेक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दे'
Characters
लेखक (वक्ता)
निबंध का 'मैं', जो पाठक के प्रश्नों का उत्तर देते हुए विचार रखता है।
- आत्मचिंतनशील: अपनी 'पूर्णता' पर पुनर्विचार
- देशभक्त और जागरूक नागरिक
- संवादप्रिय: प्रश्नोत्तर शैली
- व्यावहारिक: छोटे कामों पर ध्यान
'मैं अपने देश का नागरिक हूँ और मानता हूँ कि मैं अपना देश हूँ।'
लाला लाजपत राय
स्वतंत्रता सेनानी 'पंजाब-केसरी', जिनका अनुभव लेखक के मन का 'भूकंप' बना।
- तेजस्वी: कलम और वाणी में तेज
- देशभक्त: विदेशों में भी देश की गुलामी की पीड़ा
'उनकी कलम और वाणी दोनों में तेजस्विता की अद्भुत किरणें थीं।'
जापानी युवक
स्वामी रामतीर्थ को फल देने वाला युवक।
- देश के सम्मान के प्रति सजग
- उदार और निःस्वार्थ
फलों के मूल्य के रूप में केवल यह माँगा कि जापान की बुराई न की जाए।
कमालपाशा और पं. नेहरू
राष्ट्राध्यक्ष जिन्होंने साधारण लोगों की भावना का सम्मान किया।
- विनम्र और संवेदनशील
- भावना को वस्तु के मूल्य से ऊपर रखने वाले
कमालपाशा का शहद चखना; नेहरू का हस्ताक्षरित फ़ोटो देना।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| प्रश्नोत्तर (संवादात्मक) शैली | 'क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई?' फिर उत्तर | पाठक को बातचीत में शामिल करती है और विचार क्रम से आगे बढ़ते हैं। |
| रूपक | 'आनंद की इस दीवार में एक दरार पड़ गई'; 'मानस में भूकंप' | मानसिक परिवर्तन को सजीव चित्र में बदलते हैं। |
| दृष्टांत और प्रसंग | स्वामी रामतीर्थ, विदेशी छात्र, कमालपाशा, नेहरू, शल्य-कर्ण | अमूर्त विचारों को ठोस और रोचक बनाते हैं। |
| कहावत का खंडन | 'अकेला चना क्या भाड़ फोड़े— यह कहावत... सौ फीसदी झूठ है' | पाठक को साधारण होने के बावजूद सक्रिय होने की प्रेरणा। |
| व्यंग्य | 'जीवन कोई आपके मुन्ने की गुड़िया थोड़े ही है' | छोटी सोच पर हल्की चोट करके बात को रोचक बनाता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
एक दिन आनंद की इस दीवार में एक दरार पड़ गई
लेखक: अपनी 'पूर्णता' के भ्रम के टूटने पर।
निबंध का मोड़; मन में आया परिवर्तन।
भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक मेरे माथे पर लगा रहा
लाला लाजपत राय: विदेश-यात्रा के अनुभव का सार।
गुलाम देश के नागरिक का अपमान।
युद्ध में जय बोलने वालों का भी बहुत महत्व है।
लेखक: साधारण नागरिक की भूमिका समझाते हुए।
हर व्यक्ति का योगदान मूल्यवान है।
मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।
लेखक: दोनों जापान वाले प्रसंगों के बाद।
निबंध का केंद्रीय विचार।
एक शक्ति-बोध और दूसरा सौंदर्य-बोध।
लेखक: देश की दो सबसे बड़ी ज़रूरतें बताते हुए।
नागरिक के आचरण की दो कसौटियाँ।
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
नागरिक का आचरण और देश की छवि
मान लीजिए आप विद्यालय के दल के साथ विदेश यात्रा पर हैं और एक सहपाठी होटल से तौलिया उठा लेना चाहता है।
पुस्तकालय वाले विदेशी छात्र के प्रसंग के आधार पर आप उसे क्या कहेंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- एक छात्र की चोरी से पूरा देश कलंकित हुआ।
- हमारा आचरण भारत की छवि बनाता है।
- चीज़ वापस रखना।
Answer: मैं उसे बताऊँगा कि एक छात्र की चोरी से उसके पूरे देश के लोगों पर पुस्तकालय में रोक लग गई थी। हमारा आचरण भारत की छवि बनाता है, इसलिए तौलिया वापस रखना चाहिए।
Memory hook: विदेश में हर भारतीय, भारत का राजदूत।
शक्ति-बोध को चोट न पहुँचाना
कल्पना कीजिए कि ट्रेन में कुछ लोग लगातार कह रहे हैं कि 'हमारे देश में कुछ अच्छा नहीं होता, विदेश ही बढ़िया है।'
शल्य-कर्ण के उदाहरण से इसका प्रभाव समझाइए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शल्य की बार-बार अर्जुन-प्रशंसा से कर्ण का विश्वास टूटा।
- देश की निंदा सामूहिक आत्मविश्वास घटाती है।
- आलोचना हो तो सुधार के सुझाव के साथ।
Answer: जैसे शल्य ने बार-बार अर्जुन की प्रशंसा करके कर्ण का आत्मविश्वास तोड़ा, वैसे ही देश की लगातार निंदा लोगों का मनोबल घटाती है। कमियाँ बताएँ, तो सुधार के सुझाव भी दें।
Memory hook: शल्य मत बनो, सारथी बनो।
छोटे काम, बड़ी भावना
मान लीजिए स्वतंत्रता दिवस पर आप सैनिकों के लिए कुछ करना चाहते हैं, पर आपके पास पैसे नहीं हैं।
लेखक के विचार से आप क्या कर सकते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- महत्त्व भावना में, आकार में नहीं।
- हाथ से लिखा धन्यवाद-पत्र/कार्ड।
- आसपास स्वच्छता अभियान।
Answer: लेखक कहता है कि महत्त्व भावना का है, आकार का नहीं। मैं सैनिकों के लिए हाथ से धन्यवाद-कार्ड बनाकर भेज सकता हूँ और अपने मोहल्ले में स्वच्छता अभियान चला सकता हूँ।
Memory hook: छोटा उपहार, बड़ी भावना।
Topics in this chapter
How the school exam asks कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | दीवार में दरार, लाला लाजपत राय, जापानी युवक, विदेशी छात्र, शक्ति-बोध या चुनाव वाले अंश पर: 'दरार' किस ओर संकेत, पराधीनता के दिन 'दीन' क्यों, 'गाँठ' किन दो बातों को बाँधती है, निबंध का मुख्य भाव। | प्रतीकात्मक शब्दों (दरार, भूकंप, गाँठ) का अर्थ संदर्भ से समझें। |
| लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 25-30 शब्द) | स्वामी रामतीर्थ क्यों मुग्ध हुए, जापानी युवक ने मूल्य में क्या माँगा, 'मैं और मेरा देश दो अलग चीजें नहीं', शक्ति-बोध/सौंदर्य-बोध को चोट कैसे पहुँचती है। | प्रसंग का सार और उससे निकला विचार। |
| मूल्यपरक और अनुभव आधारित | आपके आचरण से देश का गौरव कैसे बढ़ता या घटता है; स्वच्छता; अच्छे उम्मीदवार के गुण; विद्यालय-चुनाव का अनुभव। | पाठ का विचार, अपना उदाहरण, ठोस सुझाव। |
| व्याकरण और लेखन | उपसर्ग-प्रत्यय (अपूर्णता = अ + पूर्ण + ता), शब्द-युग्म, अनेकार्थी शब्द (गाँठ, पानी), कहावत; अनुच्छेद 'मेरा भारत मेरा गौरव'। | शब्द को तोड़कर दिखाएँ; अनुच्छेद में पाठ के प्रसंग का उपयोग करें। |
Tricks to remember कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
निबंध की सात सीढ़ियाँ
पूर्णता → दरार/भूकंप (लालाजी) → एक आदमी क्या करे (जय बोलने वाले) → दो जापानी प्रसंग → भावना (कमालपाशा, नेहरू) → शक्ति-बोध व सौंदर्य-बोध → चुनाव।
Use it when: विचार-क्रम याद रखने के लिए।
प्रसंग-जोड़ी
फल = गौरव (जापानी युवक); चित्र = कलंक (विदेशी छात्र); शहद = भावना (कमालपाशा); खाट = भावना (नेहरू); शल्य = शक्ति-बोध पर चोट।
Use it when: किस प्रसंग से क्या सिद्ध होता है।
दो बोध
श-सौ: शक्ति-बोध (मनोबल) और सौंदर्य-बोध (स्वच्छता, सुरुचि)।
Use it when: देश की दो ज़रूरतें।
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: जापानी युवक का मूल्य
बहुत आग्रह करने पर उसने कहा– आप इनका मूल्य देना ही चाहते हैं तो वह यह है कि आप अपने देश में जाकर किसी से यह न कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले स्वामी जी युवक से उसके लाए फलों के दाम पूछते हैं, पर वह दाम लेने से इनकार कर देता है।) स्वामी जी ने युवक को क्या समझा?
(क) रेल का कर्मचारी
(ख) फल बेचने वाला
(ग) अपना शिष्य
(घ) पुलिस वाला(2) · 1 mark · MCQ
युवक ने फलों का मूल्य किस रूप में माँगा?
(क) धन के रूप में
(ख) अपने देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के रूप में
(ग) आशीर्वाद के रूप में
(घ) नौकरी के रूप में(3) · 1 mark · MCQ
युवक के व्यवहार से उसकी कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
(क) लालच
(ख) देश के सम्मान के प्रति सजगता
(ग) डर
(घ) अहंकार(4) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): युवक ने अपने काम से जापान का गौरव बढ़ाया।
कारण (R): एक नागरिक का आचरण पूरे देश की छवि बनाता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।(5) · 1 mark · MCQ
यह प्रसंग निबंध के किस विचार को पुष्ट करता है?
(क) नागरिक और देश का गौरव जुड़ा है
(ख) विदेश यात्रा कठिन है
(ग) फल महँगे हैं
(घ) रेल यात्रा आरामदायक है
Show the answersAnswers
- (ख) फल बेचने वाला।
- (ख) अपने देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के रूप में।
- (ख) देश के सम्मान के प्रति सजगता।
- (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (क) नागरिक और देश का गौरव जुड़ा है।
Extract 2: गद्यांश 2: शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध
हमारे देश को दो बातों की सबसे पहले और सबसे ज्यादा जरूरत है। एक शक्ति-बोध और दूसरा सौंदर्य-बोध। बस, हम यह समझ लें कि हमारा कोई भी काम ऐसा न हो जो देश में कमजोरी की भावना को बल दे या कुरुचि की भावना को ही।
(1) · 1 mark · MCQ
लेखक के अनुसार देश की दो सबसे बड़ी ज़रूरतें कौन-सी हैं?
(क) धन और सेना
(ख) शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध
(ग) उद्योग और कृषि
(घ) शिक्षा और स्वास्थ्य(2) · 1 mark · MCQ
देश के शक्ति-बोध को चोट कैसे पहुँचती है?
(क) सफ़ाई रखने से
(ख) अपने देश को हीन और दूसरों को श्रेष्ठ बताने वाली चर्चाओं से
(ग) मतदान करने से
(घ) खेल देखने से(3) · 1 mark · MCQ
'कुरुचि' का अर्थ है:
(क) अच्छी रुचि
(ख) बुरी रुचि/असभ्यता
(ग) भूख
(घ) डर(4) · 1 mark · MCQ
सौंदर्य-बोध को आघात पहुँचाने वाला आचरण कौन-सा है?
(क) केले का छिलका रास्ते में फेंकना
(ख) पेड़ लगाना
(ग) कतार में खड़े होना
(घ) पुस्तक सँभालकर रखना(5) · 1 mark · MCQ
शक्ति-बोध को चोट पहुँचाने के लिए लेखक ने किस पौराणिक पात्र का उदाहरण दिया?
(क) भीष्म
(ख) शल्य
(ग) द्रोण
(घ) विदुर
Show the answersAnswers
- (ख) शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध।
- (ख) अपने देश को हीन और दूसरों को श्रेष्ठ बताने वाली चर्चाओं से।
- (ख) बुरी रुचि/असभ्यता।
- (क) केले का छिलका रास्ते में फेंकना।
- (ख) शल्य, जिसने बार-बार अर्जुन की प्रशंसा करके कर्ण का आत्मविश्वास तोड़ा।
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: स्वामी रामतीर्थ क्यों मुग्ध हुए · 2 marks · Short answerExam level
स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- युवक ने पैसे नहीं लिए।
- मूल्य के रूप में देश की प्रतिष्ठा की रक्षा माँगी।
- उसकी देशभक्ति ने मुग्ध किया।
Answer: युवक ने फलों के पैसे नहीं लिए; मूल्य के रूप में केवल यह माँगा कि स्वामी जी जापान के बारे में बुरी बात न कहें। उसकी देश के प्रति इतनी सजगता देखकर वे मुग्ध हो गए।
Example 2: विदेशी छात्र का परिणाम · 2 marks · Short answerExam level
पुस्तकालय से चित्र निकालने वाले छात्र के कारण उसके देश को क्या नुकसान हुआ? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- छात्र को जापान से निकाला गया।
- पुस्तकालय पर उसके देश के लोगों के प्रवेश पर रोक।
- देश की छवि वर्षों तक कलंकित।
Answer: छात्र को जापान से निकाल दिया गया और पुस्तकालय पर लिख दिया गया कि उसके देश का कोई निवासी प्रवेश नहीं कर सकता। एक व्यक्ति की चोरी से पूरा देश वर्षों तक कलंकित रहा।
Example 3: दीवार में दरार · 2 marks · Short answerHarder exam level
'एक दिन आनंद की इस दीवार में एक दरार पड़ गई' में 'दरार' किस ओर संकेत करती है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक स्वयं को पूर्ण मानता था।
- लालाजी के अनुभव से यह भ्रम टूटा।
- दरार = पूर्णता के भाव पर प्रहार।
Answer: लेखक घर, पड़ोस और नगर के सुख से स्वयं को पूर्ण मानता था। लाला लाजपत राय के अनुभव ने उसकी इस पूर्णता के भाव पर प्रहार किया; 'दरार' इसी टूटे भ्रम का संकेत है।
Example 4: भावना का महत्त्व · 2 marks · Short answerHarder exam level
कमालपाशा और किसान के शहद वाले प्रसंग से लेखक क्या सिद्ध करना चाहता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- साधारण शहद, मिट्टी की हँडिया।
- कमालपाशा ने सर्वोत्तम उपहार माना।
- भावना से काम महान बनता है।
Answer: मिट्टी की हँडिया में लाया साधारण शहद भी कमालपाशा को सर्वोत्तम उपहार लगा, क्योंकि उसमें किसान का शुद्ध प्यार था। लेखक सिद्ध करता है कि काम का महत्त्व भावना में है, आकार में नहीं।
Example 5: अकेला चना · 2 marks · Short answerHOTS / competency
लेखक 'अकेला चना क्या भाड़ फोड़े' कहावत को सौ फ़ीसदी झूठ क्यों कहता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- इतिहास में अकेले व्यक्तियों ने बड़े काम किए।
- जापानी युवक जैसे अकेले व्यक्ति ने देश का गौरव बढ़ाया।
- साधारण नागरिक भी बहुत कुछ कर सकता है।
Answer: लेखक के अनुसार इतिहास साक्षी है कि अकेले व्यक्तियों ने बड़े काम किए हैं। जापानी युवक जैसे एक व्यक्ति ने देश का गौरव बढ़ाया; इसलिए साधारण नागरिक भी देश के लिए बहुत कुछ कर सकता है।
Example 6: मतदान का कर्तव्य · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपके विद्यालय में कक्षा-प्रतिनिधि का चुनाव है और एक प्रत्याशी केवल टॉफ़ियाँ बाँटकर वोट माँग रहा है। लेखक के विचारों के आधार पर आप क्या करेंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- उत्तेजक नारों/लालच में मत देना हीनता।
- ठीक व्यक्ति को मत देना कर्तव्य।
- योग्यता देखकर निर्णय।
Answer: लेखक के अनुसार लालच या नारों में बहकर मत देना हीनता है। मैं टॉफ़ियों से प्रभावित हुए बिना उस प्रत्याशी को मत दूँगा जो ज़िम्मेदार, ईमानदार और कक्षा के लिए काम करने वाला हो।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ से फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? उसके व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है? (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय-वस्तु: जापान में अच्छे फल न मिलने की बात न कहें; छवि: देशभक्त, उदार, देश के सम्मान के प्रति सजग। | 1 |
| अभिव्यक्ति: शुद्ध, संक्षिप्त भाषा। | 1 |
अनुच्छेद लेखन (लगभग 120 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय-वस्तु: विषय से जुड़े विचार और उदाहरण। | 2 |
| प्रस्तुति: आरंभ, क्रम, निष्कर्ष। | 2 |
| भाषा की शुद्धता और शब्द-सीमा। | 1 |
Where students lose marks in कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: भूकंप को सचमुच का भूकंप बताना
रूपक न समझना।
Wrong working
लेखक के नगर में भूकंप आया और दीवार गिर गई।
Right working
भूकंप मन (मानस) में आया, लाला लाजपत राय के अनुभव से।
Do this: 'मेरे मानस में ही उठा था' याद रखें।
Usually costs: 1-2 अंक।
Mistake: पुस्तकालय वाले छात्र को जापानी बताना
दोनों प्रसंग जापान के हैं।
Wrong working
एक जापानी छात्र ने चित्र चुराए।
Right working
दूसरे देश का छात्र जापान में पढ़ने आया था; जापानी विद्यार्थी ने उसकी सूचना दी।
Do this: चोरी = विदेशी छात्र; सूचना = जापानी छात्र।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: शहद को कीमती बताना
प्रसंग का अर्थ न समझना।
Wrong working
शहद में मोती-हीरे मिले थे, इसलिए कीमती था।
Right working
शहद साधारण था; उसका मूल्य किसान की भावना से था।
Do this: 'उस शहद के पीछे उसके लाने वाले की भावना थी' याद रखें।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: निबंध को केवल अधिकारों पर केंद्रित बताना
आधा विचार लिखना।
Wrong working
लेखक नागरिक के अधिकारों की ही बात करता है।
Right working
लेखक कर्तव्य (देश को हानि न पहुँचाना, सही मत देना) और अधिकार दोनों की बात करता है।
Do this: दोनों पक्ष लिखें।
Usually costs: विषय-वस्तु के अंक।
Practice questions on कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
लेखक के मन में 'भूकंप' किसके अनुभव से आया?
(क) स्वामी रामतीर्थ
(ख) लाला लाजपत राय
(ग) कमालपाशा
(घ) पं. नेहरूHint
पंजाब-केसरी।
Answer
(ख) लाला लाजपत राय।
Q2 · 1 mark · MCQExam level
निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?
(क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
(ख) पारिवारिक संबंधों का महत्त्व
(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध
(घ) देश का महत्त्व और व्यक्ति की उपेक्षाHint
शीर्षक।
Answer
(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध।
Q3 · 2 marks · Short answerExam level
पं. नेहरू ने किसान की खाट के बदले उसे क्या दिया और क्यों? (25-30 शब्द)
Hint
दस्तखती फ़ोटो।
Answer
मूल्य-बिंदु: खाट स्वीकार की; अपना हस्ताक्षरित फ़ोटो दिया; जिसके लिए बड़े लोग तरसते हैं; खाट के मूल्य का नहीं, किसान की भावना का सम्मान।
आदर्श उत्तर: नेहरू ने किसान की बुनी खाट स्वीकार की और उसे अपना हस्ताक्षरित फ़ोटो दिया, जिसके लिए बड़े-बड़े लोग तरसते हैं। यह खाट के मूल्य का नहीं, किसान की भावना का सम्मान था।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'अपूर्णता' शब्द में उपसर्ग, मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए; इसी प्रकार 'अनावश्यक' का विश्लेषण कीजिए।
Hint
पाठ के व्याकरण अभ्यास में तालिका दी है।
Answer
मूल्य-बिंदु: सही विभाजन।
आदर्श उत्तर: अपूर्णता = अ (उपसर्ग) + पूर्ण (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)। अनावश्यक = अन् (उपसर्ग) + आवश्यक (मूल शब्द); इसमें कोई प्रत्यय नहीं है।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'युद्ध में जय बोलने वालों का भी बहुत महत्व है' – लेखक ने यह बात किस संदर्भ में कही और उदाहरण क्या दिया? (25-30 शब्द)
Hint
मैच और मुशायरे।
Answer
मूल्य-बिंदु: साधारण नागरिक के योगदान के संदर्भ में; मैच में दर्शकों की तालियाँ खिलाड़ियों में बिजली भर देती हैं; मुशायरे की सफलता दाद देने वालों पर निर्भर।
आदर्श उत्तर: यह साधारण नागरिक के योगदान के संदर्भ में कहा गया। जैसे मैच में दर्शकों की तालियाँ गिरते खिलाड़ियों में जोश भर देती हैं और मुशायरे दाद देने वालों से सफल होते हैं।
Q6 · 1 mark · Assertion-reasonHOTS / competency
कथन (A): लेखक के अनुसार हर व्यक्ति देश के लिए वैज्ञानिक या धनी बनकर ही योगदान दे सकता है।
कारण (R): लेखक कहता है कि जीवन विशाल समुद्र का तट है, जिस पर हरेक अपने लिए स्थान पा सकता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।Hint
लेखक का तर्क उल्टा है।
Answer
(घ) A गलत है, R सही है। लेखक मानता है कि साधारण नागरिक भी योगदान दे सकता है।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आप किसी विदेशी पर्यटक को अपने शहर के ऐतिहासिक स्थल पर घुमा रहे हैं, और वहाँ दीवारों पर नाम लिखे हैं। लेखक के 'सौंदर्य-बोध' के विचार से आप क्या करेंगे? (25-30 शब्द)
Hint
देश की छवि और अपना आचरण।
Answer
मूल्य-बिंदु: नाम लिखना सौंदर्य-बोध को आघात; पर्यटक के सामने देश की छवि; स्वयं ऐसा न करना; प्रबंधन को सूचित करना/सफ़ाई अभियान।
आदर्श उत्तर: दीवारों पर नाम लिखना देश के सौंदर्य-बोध पर आघात है और पर्यटक के सामने देश की छवि बिगाड़ता है। मैं स्वयं ऐसा नहीं करूँगा और स्मारक-प्रबंधन को सफ़ाई के लिए सूचित करूँगा।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।' इस कथन के पक्ष में अपने आस-पास से एक उदाहरण दीजिए। (25-30 शब्द)
Hint
खिलाड़ी, वैज्ञानिक, पर्यटक।
Answer
मूल्य-बिंदु: व्यक्ति के काम से देश की छवि; उदाहरण (ओलंपिक पदक विजेता, अंतरिक्ष मिशन के वैज्ञानिक, विदेश में भारतीयों का आचरण); निष्कर्ष।
आदर्श उत्तर: जब कोई भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक में पदक जीतता है, तो पूरी दुनिया में भारत का नाम ऊँचा होता है। व्यक्ति की सफलता देश की सफलता बन जाती है; दोनों अलग नहीं।
Q9 · 5 marks · Long answerHarder exam level
अनुच्छेद लेखन: 'मेरा भारत मेरा गौरव' विषय पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए।
Hint
पाठ के विचार: नागरिक का आचरण, शक्ति-बोध, सौंदर्य-बोध, मतदान।
Answer
मूल्य-बिंदु (अनुच्छेद): देश से जुड़ाव का भाव; भारत की विरासत और उपलब्धियाँ (संक्षेप में); नागरिक के रूप में कर्तव्य: देश की निंदा न करना (शक्ति-बोध), स्वच्छता और सुरुचि (सौंदर्य-बोध), सही मतदान; पाठ का एक प्रसंग (जापानी युवक); निष्कर्ष: मेरे काम से देश का गौरव; लगभग 120 शब्द; शुद्ध भाषा।
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1.निबंध के लेखक?Show answer
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'।
2.'पंजाब-केसरी' किसे कहा गया?Show answer
लाला लाजपत राय को।
3.स्वामी रामतीर्थ किस देश गए थे?Show answer
जापान।
4.विदेशी छात्र ने पुस्तक से क्या निकाला?Show answer
दुर्लभ चित्र।
5.कमालपाशा किस देश के राष्ट्रपति थे?Show answer
तुर्की।
6.बूढ़ा किसान कितनी दूर से पैदल आया था?Show answer
तीस मील।
7.किसने बार-बार अर्जुन की प्रशंसा करके कर्ण का आत्मविश्वास तोड़ा?Show answer
शल्य (कर्ण का सारथी)।
8.देश की उच्चता-नीचता की कसौटी?Show answer
चुनाव।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप 'दरार' और 'भूकंप' के प्रतीकार्थ बता सकते हैं?
- क्या आप लाला लाजपत राय का अनुभव अपने शब्दों में लिख सकते हैं?
- क्या आप दोनों जापानी प्रसंगों की तुलना कर सकते हैं?
- क्या आप कमालपाशा और नेहरू के प्रसंगों से निकला विचार लिख सकते हैं?
- क्या आप शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध को चोट पहुँचाने वाले दो-दो आचरण बता सकते हैं?
- क्या आप नागरिक के दो कर्तव्य और दो अधिकार लिख सकते हैं?
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – मैं और मेरा देश: frequently asked questions
'मैं और मेरा देश' के लेखक कौन हैं?
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'। यह निबंध कक्षा 9 की पुस्तक गंगा का सातवाँ पाठ है।
लेखक के मन में 'भूकंप' किस कारण आया?
लाला लाजपत राय के इस अनुभव से कि वे दुनिया में जहाँ भी गए, भारत की गुलामी का कलंक उनके माथे पर लगा रहा।
जापानी युवक ने फलों के बदले क्या माँगा?
उसने कहा कि यदि स्वामी रामतीर्थ मूल्य देना चाहते हैं, तो अपने देश में किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।
शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध से लेखक का क्या आशय है?
शक्ति-बोध यानी देश की शक्ति और आत्मविश्वास की भावना, जिसे देश को हीन बताकर चोट पहुँचती है; सौंदर्य-बोध यानी स्वच्छता और सुरुचि, जिसे गंदगी और असभ्य आचरण से चोट पहुँचती है।
लेखक के अनुसार देश की उच्चता की कसौटी क्या है?
चुनाव। जिस देश के नागरिक सोच-समझकर सही व्यक्ति को मत देते हैं, वह उच्च है; जो उत्तेजक नारों में बहकर मत देते हैं, वह हीन है।
कमालपाशा ने किसान का शहद सर्वोत्तम उपहार क्यों कहा?
क्योंकि उसमें किसान के हृदय का शुद्ध प्यार था। उपहार का मूल्य भावना से था, धन से नहीं।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं (आर-1 और आर-2) 2026-27; NCERT गंगा, कक्षा 9 (मार्च 2026), पाठ 7: मैं और मेरा देश